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सूरजपुर में खराब सोलर पम्प हुए दुरुस्त, ग्रामीणों के चेहरे पर फिर आई मुस्कान

रायपुर. शासन की संवेदनशील पहल और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सूरजपुर जिले के अत्यंत दूरस्थ वनांचल ग्राम बेलामी, पंचायत घुईडीह, विकासखंड ओड़गी में देखने को मिला, जहां लंबे समय से प्रभावित सोलर पम्प का सुधार कार्य मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर त्वरित रूप से पूरा कराया गया। वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए पेयजल और दैनिक उपयोग के पानी की समस्या किसी चुनौती से कम नहीं थी। ऐसे में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल क्रेडा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सोलर पम्प का सुधार कार्य पूर्ण किया, जिससे गांव में फिर से पानी की सुविधा सुचारु हो गई। सोलर पम्प के चालू होते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। गांव के लोगों ने इसे केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि संवेदनशील जनप्रतिनिधित्व और ग्रामीण हितों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। क्रेडा विभाग के जिला प्रभारी सुजीत श्रीवास्तव की उपस्थिति में सुधार कार्य सम्पन्न हुआ। इस दौरान विजय प्रजापति सहित अन्य मोहल्लेवासियों ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए उनका लगातार सक्रिय रहना ग्रामीणों में विश्वास और नई उम्मीद जगा रहा है।

झारखंड सरकार ने जारी की 30 नई क्लाइमेट-फ्रेंडली फसलें

 रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 30 नई फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक (10 साल) तक लगातार किए गए कड़े अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इन किस्मों को विकसित किया गया है। ये सभी फसलें उच्च उत्पादकता देने वाली, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील और पूरी तरह से जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट फ्रेंडली) हैं। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित राज्य वेरायटी रिलीज कमेटी (एसवीआरसी) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में विभाग के विशेष सचिव गोपाल तिवारी, बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के कुलपति डाॅ. एससी दुबे, अनुसंधान निदेशक डाॅ. पीके सिंह, विभिन्न संस्थानों के निदेशक और प्रगतिशील किसान नकुल महतो व मीनू महतो सहित कई विज्ञानी उपस्थित थे। किस संस्थान की कितनी किस्मों को मिली स्वीकृति? इस बैठक में राज्य के अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा तैयार की गई फसलों को हरी झंडी दिखाई गई: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू): वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सबसे अधिक 10 किस्में शामिल हैं। इनमें सोयाबीन और गेहूं की दो-दो तथा मक्का, फलारू (एरियल याम), अरहर, चारा जई, चारा घास और सरसों की एक-एक किस्म है। पलांडू केंद्र (ICAR-RCER): फार्मिंग सिस्टम रिसर्च सेंटर फॉर हिल एंड प्लेटो रीजन, पलांडू द्वारा विकसित 8 बागवानी और सब्जी किस्मों को मंजूरी मिली। आईआईएबी रांची: भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) की 4 आधुनिक धान किस्मों को विमोचन की स्वीकृति मिली। आईएआरआई हजारीबाग: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) हजारीबाग की 1 अरहर और 3 मक्का किस्मों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही क्षेत्र विस्तार के लिए 2 अन्य फसलों को भी स्वीकृति मिली। केंद्रीय वर्षा आधारित ऊपराऊं धान अनुसंधान केंद्र हजारीबाग: इस संस्थान द्वारा विकसित 2 विशेष धान किस्मों को भी हरी झंडी दिखाई गई। जारी की गई प्रमुख फसलों की पूरी सूची मंजूरी पाने वाली प्रमुख किस्मों के नाम इस प्रकार हैं: धान: सीआर धान 110, सीआर धान 215, स्वर्ण मोहन धान, आईआईएबी धान 1, आईआईएबी धान 2, आईआईएबी धान 3 और आईआईएबी धान 4। मक्का: बिरसा मक्का हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 2, भद्रिका क्वालिटी मेज हाइब्रिड 1 और शालीमार मेज हाइब्रिड 5। गेहूं व सरसों: बिरसा गेहूं 5, बिरसा गेहूं 6 और बिरसा भारत सरसों 1। दालें: बिरसा अरहर 3, वंशिका (अरहर) और पूसा अवंतिका (मसूर)। सब्जियां व अन्य: स्वर्ण रत्न (टमाटर), स्वर्ण प्रफुल्य (मिर्च), स्वर्ण अतुल्य (शिमला मिर्च), स्वर्ण यामिनी (करेला), स्वर्ण सुगंधा (सब्जी सोयाबीन), स्वर्ण सुपर्णा (चौलाई साग), स्वर्ण निधि (सेम) और बिरसा कोंकण फलारू 1 (हवाई रतालू)। चारा फसलें: बिरसा सोयाबीन 5, बिरसा सोयाबीन 6, बिरसा ओट 1 (चारा जई) और बिरसा दीनानाथ 1 (घास)। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) की 10 खास किस्में और उनकी खासियत बीएयू के विज्ञानियों द्वारा तैयार की गई ये 10 किस्में झारखंड की मिट्टी और मौसम के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं: 1. बिरसा मक्का हाइब्रिड 1 (डेवलपर: डाॅ. मणिगोपा चक्रवर्ती) इस किस्म की उत्पादन क्षमता 70 से 73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 10 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह फसल खरीफ के मौसम में 93 दिनों में और रबी में 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह तनाव सहनशील है और इससे 376 क्विंटल हरा चारा व 103 क्विंटल सूखा चारा भी प्राप्त होता है। 2. बिरसा कोंकन फलारू (डेवलपर: डाॅ. शुभ्रांशु सेनगुप्ता) यह झारखंड की पहली हवाई रतालू किस्म है जो 150 से 165 दिनों में तैयार होती है। इसकी बुलबिल उपज क्षमता 10 टन प्रति हेक्टेयर तक है। 3. बिरसा सोयाबीन 5 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) इस किस्म में 41.5 प्रतिशत प्रोटीन और 17 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। यह 115 से 118 दिनों में तैयार होती है और इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो मानक किस्मों से 28 प्रतिशत अधिक है। 4. बिरसा सोयाबीन 6 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) यह किस्म मात्र 105 से 108 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 39 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। 5. बिरसा अरहर 3 (डेवलपर: डाॅ. नीरज कुमार) यह मध्यम अवधि (178 से 180 दिन) में तैयार होने वाली अरहर की बेहतरीन किस्म है। इसकी उपज क्षमता 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो पुरानी मानक किस्मों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन देती है। 6. बिरसा ओट 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) पशुपालकों के लिए विकसित यह चारा किस्म प्रति हेक्टेयर 420 क्विंटल हरा चारा और करीब 25.7 क्विंटल दाना उत्पादन देती है। बहु-कट (मल्टी-कट) प्रणाली के लिए उपयुक्त इस चारे में 10.8 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन होता है। 7. बिरसा दीनानाथ 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) यह एकल कट प्रणाली के लिए उपयुक्त चारा घास है, जिसकी उपज क्षमता 468 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 8.4 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है। 8. बिरसा गेहूं 5 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) इस गेहूं की उत्पादन क्षमता 53 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह 106 से 109 दिनों में पक जाती. है। कुपोषण से लड़ने के लिए इसमें आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.6 पीपीएम) की मात्रा काफी अधिक रखी गई है। 9. बिरसा गेहूं 6 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) समय पर बुआई और सिंचित क्षेत्रों के लिए यह बेहद शानदार किस्म है, जिसकी उपज क्षमता लगभग 69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 120 दिनों में पकती है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.8 पीपीएम) प्रचुर मात्रा में मौजूद है। 10. बिरसा भारत सरसों 1 (डेवलपर: डाॅ. अरुण कुमार) कम पानी या वर्षा आधारित मध्यम भूमि के लिए यह किस्म सर्वोत्तम है। यह 108 से 111 दिनों में तैयार होती है और इसमें 40.1 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। इसकी संभावित पैदावार 26.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।  

5 स्पोर्ट्स कॉलेजों में रिकॉर्ड आवेदन, युवाओं का खेलों की ओर बढ़ा रुझान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार की खेलोन्मुख नीतियों और आधुनिक सुविधाओं का ही असर है कि सत्र 2026-27 में स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश के लिए रिकॉर्ड आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस बार प्रदेश के पांच स्पोर्ट्स कॉलेजों की 518 सीटों के लिए करीब 2600 छात्रों ने आवेदन कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश के युवा अब खेलों को केवल शौक नहीं, बल्कि अपने भविष्य और करियर के रूप में देखने लगे हैं। पिछले साल 1800 के करीब आए थे आवेदन लखनऊ, गोरखपुर, सैफई, सहारनपुर और फतेहपुर समेत कुल 5 स्पोर्ट्स कॉलेज में कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस साल 2600 के करीब आवेदन आये हैं। जबकि पिछले साल 1800 के करीब आवेदन आए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदन यह साबित करते हैं कि प्रदेश के युवाओं का भरोसा सरकारी खेल संस्थानों पर तेजी से बढ़ी है। इस बार चयन प्रक्रिया को पूरी तरह मेरिट और प्रदर्शन आधारित बनाया गया है। प्रारंभिक चयन परीक्षा 100 अंकों की रखी गई थी, जिसमें 50 अंक फिजिकल टेस्ट और 50 अंक स्किल एवं गेम टेस्ट के निर्धारित किए गए। दोनों परीक्षाओं में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य किया गया था।  3 से 6 जून के बीच होगी मुख्य चयन परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा में सेलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य चयन परीक्षा में शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में लखनऊ और कानपुर मंडल में पिछले साल 264 खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिसके सापेक्ष में इस वर्ष 393 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया है। मुख्य चयन परीक्षा भी 100 अंकों की होगी, जिसमें खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और खेल कौशल का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। खेलवार एवं कॉलेजवार मुख्य चयन परीक्षा का आयोजन 3-4 जून तथा 5-6 जून को किया जाएगा। इसमें फिजिकल टेस्ट के 50 अंक और गेम व स्किल टेस्ट के 50 अंक निर्धारित किए गए हैं।  परीक्षा में पास अभ्यर्थियों की होगी जैविक आयु जांच फिजिकल टेस्ट में न्यूनतम 40 प्रतिशत यानी 20 अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। खेल विशेषज्ञ मैदान पर अभ्यर्थियों की प्रतिभा का परीक्षण करेंगे। इसमें खेल तकनीक परीक्षा (स्किल टेस्ट) के लिए 30 अंक और गेम टेस्ट के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रदर्शन के आधार पर विशेषज्ञ अंक देंगे। मुख्य चयन परीक्षा का परिणाम खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा और चयन समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। मुख्य चयन परीक्षा के बाद अंतिम श्रेष्ठता सूची तैयार कर कॉलेज वेबसाइट, खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा। मुख्य चयन परीक्षा की श्रेष्ठता सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच केंद्रीय व्यवस्था के तहत कराई जाएगी। विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग जिलों में यह प्रक्रिया होगी। अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा संपन्न अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच अभिभावकों की सहमति से कराई जाएगी। जैविक आयु जांच में उपयुक्त पाए गए अभ्यर्थियों की काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इसमें प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर रिक्त सीटों और कॉलेज वरीयता के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रबंध समिति उत्तर प्रदेश के सचिव एवं स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ के प्रधानाचार्य दीपेंद्र यादव ने बताया कि प्रारंभिक ट्रायल पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया गया है और अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि इस सत्र की तुलना में अगले सत्र 3 से 4 गुना ज्यादा आवेदन आएं।

प्रदेश के 97 हजार गांवों में स्वच्छ जलापूर्ति में अहम भूमिका निभा रही महिलाएं

लखनऊ, 28 मई: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) अभियान को महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन का बड़ा जरिया बना दिया है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाओं के विशेष समूह को इससे जोड़कर न केवल स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाया गया है। गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के बदले मिलने वाले मानदेय से ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुले हैं। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि इस मिशन के तहत प्रदेश के लगभग समस्त ग्राम पंचायतों और राजस्व गांवों में 05-05 महिलाओं के समूह को फील्ड टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गयी है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 97,070 गांवों में इन प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा पूरी सक्रियता के साथ जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य किया जा रहा हैं। यह महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों एवं घरेलू नलों के जल नमूनों की नियमित जांच कर रही हैं। गुणवत्ता जांच की इस निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 63,700 जल गुणवत्ता नमूनों का परीक्षण पूरा किया जा चुका है। पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार खत्म ग्राम स्तर पर यह महिलाएं एफटीके के जरिए पाइप लाइन, ट्यूबवेल समेत अन्य पेयजल स्रोतों में हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया का पता लगा रही हैं। संदिग्ध या दूषित जल स्रोतों की समय पर पहचान होने पर विभाग को तुरंत सूचना देती हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली विभिन्न जलजनित बीमारियों की रोकथाम तुरंत की जा सके। पहले जहां पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से दूषित जल स्रोतों का पता चलते ही उन पर तत्काल कार्रवाई करना संभव हो पा रहा है। अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का माध्यम यह कार्यक्रम न केवल पानी की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का जरिया भी बन रहा है। फील्ड टेस्टिंग कार्य से जुड़ी इन महिलाओं को उनके द्वारा किए जाने वाले परीक्षण कार्य के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान (मानदेय) किया जा रहा है। इन्हें प्रति जांच 20 रुपये की दर से अधिकतम 20 जांच के लिए 400 रुपये का भुगतान मिल रहा है। यह व्यवस्था ग्रामीण परिवेश में रह रही महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय अर्जित करने और स्वरोजगार से जुड़ने का एक बेहतरीन माध्यम बन गई है। महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण महिलाओं को इस कार्य के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन के अंतर्गत 'जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस कार्यक्रम' के तहत विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। 1.    फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) को सही तरीके से संचालित करना। 2.    विभिन्न पेयजल स्रोतों से जल नमूनों का सुरक्षित संग्रहण (कलेक्शन) करना। 3.    पानी में मौजूद विभिन्न प्रकार के पैरामीटर्स की बारीकी से जांच करना। 4.    जांच के बाद तैयार रिपोर्टिंग को मोबाइल ऐप और रजिस्टर में दर्ज करना। 5.    सुरक्षित पेयजल के मानकों एवं स्वच्छता से जुड़ी अन्य आवश्यक जानकारियां प्राप्त करना।

कोविड राहत खत्म, एफआरबीएम एक्ट के तहत झारखंड की ऋण सीमा अब और कड़ी

रांची  केंद्र सरकार ने राज्यों को दी जानेवाली ऋण राशि में अब गैर बजटीय उधारी को भी जोड़ने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना राज्यों को दे भी दी गई है। इस प्रकार नई व्यवस्था में राज्यों के लिए ऋण लेना पहले से कठिन हो जाएगा। झारखंड सरकार के लिए मुसीबत की बात यह है कि इसमें गैर बजटीय उधारी को भी शामिल करने की बात कही गई है। ऐसा हुआ तो राज्यों को एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटि एंड बजट मैनेजमेंट ) एक्ट के तहत मिलनेवाली ऋण राशि पहले से कम हो जाएगी। कोविड काल में राज्यों को एक जीएसडीपी के हिसाब से चार प्रतिशत तक ऋण लेने की छूट दी गई थी और इसके ऊपर एक प्रतिशत ऋण बिना किसी शर्त के लिया जा सकता था। अब राज्यों को कोविड के कारण मिलनेवाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही गैर बजटीय उधारी को शामिल किए जाने से ऋण लेने की सीमा निर्धारित हो जाएगी। झारखंड सरकार पर कुल बकाया कर्ज की राशि 1.10 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी है। देश के कई राज्यों पर इससे भी अधिक कर्ज है। कर्ज लेने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2003 में एफआरबीएम एक्ट को पास कराया था। यह कानून राज्यों को एक निर्धारित सीमा में ऋण लेने को बाध्य करता है। अभी यह सीमा बजट के हिसाब से तीन प्रतिशत पर सीमित है। इसे कोविड काल में दो प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट केंद्र सरकार से मिली थी। इसमें एक प्रतिशत सशर्त छूट थी तो एक प्रतिशत पर कोई शर्त नहीं थोपा गया था। अब राज्यों को मिलनेवाली गैर बजटीय उधारी को भी सम्मिलित करने के केंद्र के निर्देश के आलोक में वित्त विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव भी पारित करा लिया है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए उधारी की सीमा और भी नियंत्रित हो जाएगी। आम तौर पर राज्य सरकार को विभिन्न एजेंसियों से विकास योजनाओं के लिए ऋण की राशि मिलती रहती है। नई व्यवस्था में इसको भी राज्य के ऊपर कुल ऋण में जोड़कर देखा जाएगा। झारखंड पर पहले से ही 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है कर्ज झारखंड सरकार पूर्व में ही विभिन्न एजेंसियों से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उठा चुकी है।अलग-अलग वर्षों में विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उधारी ली गई है। कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी राज्य सरकार बाजार से भी कर्ज उठाती है। चालू वित्तीय वर्ष में भी राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई राज्यों की प्री-बजट बैठक के दौरान मैंने यह मामला उठाया था। एफआरबीएम की सीमा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक करने की मांग की थी। तीन प्रतिशत के दायरे में ही झारखंड को और भी ऋण मिल सकता है। निर्धारित अनुपात को देखें तो राज्य सरकार अभी आठ हजार करोड़ रुपये और ऋण ले सकती है। अच्छी बात यह है कि हमें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ रही है। गैर बजटीय ऋण को जोड़कर हमारे अधिकारों को रोका नहीं जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड।  

भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, अस्पतालों और बिजली व्यवस्था पर सीएम योगी की नजर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव के खतरे को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को सतर्क रहते हुए प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कि आमजन को गर्मी से राहत दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड, दवाएं, आइस पैक, ओआरएस और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। सीएम योगी आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्य पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ संचालित किए जाएं। विशेष रूप से श्रमिकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजदूरों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने इसके साथ ही आमजन से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि लोग दोपहर में तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और हल्के, सूती या खादी के ढीले कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अपील की कि ऐसी किसी भी लापरवाही से बचें, जिससे आग लगने की आशंका पैदा हो सकती है।

हरियाणा को दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे की सौगात, यात्रा समय में होगी बड़ी कटौती

चंडीगढ़. केंद्र सरकार द्वारा हाई-स्पीड दिल्ली-कटरा कारिडोर को मंजूरी दिए जाने से हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इस परियोजना के पूरा होने पर हरियाणा के पांच शहरों में आवागमन सुगम होने का रास्ता साफ हो गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत अधिसूचना जारी कर इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल कर लिया है। इसके बाद अब भूमि अधिग्रहण, रूट तय करने और अन्य विकास कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली में रानीखेड़ा गांव के पास एनएच-344एम से शुरू होगा और जसौर खेरी गांव के पास कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इसके बाद यह हरियाणा और पंजाब के कई शहरों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के कटरा तक पहुंचेगा। हरियाणा में प्रस्तावित मार्ग सोनीपत के खरखौदा, गोहाना, बुटाना, कलायत और बारटा से होकर निकलेगा। वहीं, पंजाब में यह गुलजारपुर, पातड़ां, भवानीगढ़, धूरी, मलेरकोटला, अहमदगढ़, मुल्लांपुर दाखा, नूरमहल, करतारपुर और गुरदासपुर बाइपास जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा। आखिर में यह कटरा के पास एनएच-144 से जुड़ेगा। केंद्र सरकार का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से दिल्ली से कटरा तक यात्रा तेज और आसान होगी। इससे माल ढुलाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सडक़ सुविधा मिल सकेगी। यह परियोजना उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक कारिडोर साबित हो सकती है। इससे छोटे शहरों में निवेश बढ़ने, लाजिस्टिक्स पार्क, होटल और सडक़ किनारे अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। दिल्ली-कटरा एनई-5 एक्सप्रेसवे बनने के बाद हरियाणा से जम्मू-कटरा की यात्रा में काफी समय कम होने की उम्मीद है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यात्रा समय में चार से छह घंटे तक की कमी आ सकती है। अभी हरियाणा के ज्यादातर हिस्सों से कटरा पहुंचने में सडक़ मार्ग से करीब 10 से 14 घंटे तक लग जाते हैं।

साइबर अटैक से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और वेतन व्यवस्था प्रभावित

कानपूर कानपुर नगर निगम की मुख्य आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर अचानक हैक हो गई। इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले के बाद कानपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के प्रशासनिक गलियारों और आईटी (IT) महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकारी वेबसाइट के हैक होते ही नगर निगम से जुड़ी तमाम ऑनलाइन जनहित सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनआईसी के इंजीनियरों में खलबली जैसे ही वेबसाइट के हैकिंग की भनक लगी, सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन और रखरखाव करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियरों की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। दिल्ली और लखनऊ के वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञों व इंजीनियरों की फौज इस तकनीकी सेंधमारी को ठीक करने और वेबसाइट को दोबारा बहाल करने में जुट गई है। हालांकि, साइबर हमला इतना तगड़ा है कि खबर लिखे जाने तक वेबसाइट को पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका था। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर कर्मचारियों का वेतन तक अटका नगर निगम की मुख्य वेबसाइट हैक होने के कारण इसका सबसे बड़ा और सीधा असर आम जनता से जुड़ी बुनियादी डिजिटल सेवाओं पर पड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, वेबसाइट ठप होने से सबसे ज्यादा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सैकड़ों लोग अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। नगर निगम के महत्वपूर्ण टेंडर विकास कार्यों के ऑनलाइन प्रस्ताव और नगर निगम से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं भी पूरी तरह ब्लॉक हो गई हैं। इतना ही नहीं, इस साइबर सेंधमारी की वजह से नगर निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और ऑनलाइन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? इस पूरे साइबर संकट और तकनीकी खामी को लेकर जब नगर निगम के आईटी विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। नगर निगम आईटी विभाग के नोडल अधिकारी राहुल सबबरवाल के अनुसार,वेबसाइट के सर्वर में कुछ गंभीर दिक्कतें आई हैं और हैकिंग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। एनआईसी के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है और इसे ठीक करने में जुटी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी ऑनलाइन सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए ताकि जनता को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े।  

प्रेग्नेंसी में तम्बाकू बना जानलेवा, PGI विशेषज्ञों ने दी गंभीर बीमारियों की चेतावनी

चंडीगढ़. गुटखा, खैनी और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू को लोग अक्सर सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं पर PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने इस संबंध में गंभीर चेतावनी दी है। PGI के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन न सिर्फ मां के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इससे बच्चे का वजन कम होना, समय से पहले जन्म और यहां तक ​​कि मृत बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। PGI के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला और नसवार जैसे उत्पाद सीधे शरीर में निकोटीन और जहरीले केमिकल पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। PGI स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. सोनू गोयल ने बताया कि लोग अभी भी गुटखा और खैनी को सुरक्षित या 'नेचुरल' मानते हैं, जबकि यह पूरी तरह से गलत सोच है। उन्होंने कहा कि तंबाकू के पत्तों में निकोटीन, नाइट्रोसामाइन और कई ऐसे केमिकल होते हैं जो सीधे कैंसर से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकलेस तंबाकू खाने से बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई पर असर पड़ता है। इससे बच्चा कमजोर हो सकता है या समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में स्टिलबर्थ की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू भारत में ओरल कैंसर के मामलों का एक बड़ा कारण बन गया है। एक इंटरनेशनल स्टडी के मुताबिक दुनिया में स्मोकलेस तंबाकू और सुपारी से जुड़े ओरल कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामले भारत में होते हैं। धुआं रहित तंबाकू में करीब 4000 केमिकल पी.जी.आई. के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू सिर्फ मुंह को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि पूरे शरीर पर असर डालता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि कई लोग वजन बढ़ने के डर से तंबाकू नहीं छोड़ते, लेकिन यह डर काफी हद तक गलत है। रिसर्च के मुताबिक तंबाकू छोड़ने के बाद वजन में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, जबकि तंबाकू का इस्तेमाल जारी रखने से कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। PGI के एक्सपर्ट्स ने भी युवाओं और महिलाओं में बढ़ती तंबाकू की लत पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि छोटे पैक में मिलने वाले फ्लेवर्ड पान मसाला और गुटखा प्रोडक्ट्स तेजी से टीनएजर्स और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू में करीब 4000 केमिकल्स पाए जाते हैं, जिनमें से कई सीधे कैंसर का कारण बनते हैं। इनमें आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, फॉर्मेल्डिहाइड और रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 जैसे खतरनाक एलिमेंट्स शामिल हैं। PGI ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी हेल्पलाइन और तंबाकू छोड़ने की सर्विस का इस्तेमाल करने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर तंबाकू छोड़ना कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

रायपुर : लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों की ली बैठक

रायपुर. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज बिलासपुर में नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बन रहे 10 किमी फोरलेन सड़क के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार को कार्यों में तेजी लाते हुए इसे जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर बिलासपुर जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और भवनों के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों से कहा कि हर कार्य के विभिन्न चरणों के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लाएं। कार्यों की रोज मॉनिटरिंग कर तथा ठेकेदारों से समन्वय बनाकर समय-सीमा में काम पूरा कराएं। उन्होंने निविदा स्वीकृति के एक माह के भीतर हर हाल में काम प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। बिलासपुर के कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे और अधीक्षण अभियंता के.पी. संत भी बैठक में मौजूद थे। बंसल ने कहा कि विभाग के कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा सुनिश्चित करना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बैठक में कोनी-मोपका बायपास, जयरामनगर रेलवे ओवरब्रिज, जयरामनगर-सीपत रोड बायपास, उच्च न्यायालय में ऑडिटोरियम, नए जेल भवन और बोदरी में न्यायालयीन प्रकरणों में ओआईसी के लिए बनने वाले विश्राम भवन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की भी जानकारी ली। विभागीय सचिव ने नेहरू चौक से दर्रीघाट सड़क के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को सड़कों को साफ, सुंदर और सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने डिवाइडर्स के दीवारों और ग्रिल्स का रंग-रोगन कराने को कहा।