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योगी सरकार का बड़ा मिशन, ग्रामीण यूपी को मिलेगा फ्री Wi-Fi और डिजिटल सुविधाओं का नेटवर्क

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब डिजिटल आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक तकनीकी मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार का बेहद महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द ही धरातल पर "लाइव" होने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने इस दूरगामी परियोजना से जुड़े लगभग सभी तकनीकी और प्रशासनिक माइलस्टोन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल क्रांति का रास्ता साफ हो गया है। माइलस्टोन पूरे, जुलाई 2025 से चल रही थी तैयारी इस ऐतिहासिक मिशन की रूपरेखा जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ शुरू हुई थी, जिसने दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों की रणनीतिक चर्चाओं के साथ गति पकड़ी। जनवरी 2026 में इसके कॉन्सेप्ट नोट के बाद, 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति में इसका एमओयू (MoU) साइन किया गया। फाइनल डीपीआर (DPR) तैयार होने और अप्रैल 2026 में बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट की बातचीत पूरी होने के बाद, अब यह प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर लागू होने के अंतिम पड़ाव पर है। गांवों तक पहुंचेगा वर्ल्ड-क्लास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के डिजिटल डिवाइड (तकनीकी अंतर) को हमेशा के लिए समाप्त करना है। इसके तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इस नेटवर्क के जरिए हर ग्रामीण घर तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, मुफ्त पब्लिक वाई-फाई, आईपीटीवी (IPTV) और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, गांवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी समाधान और उन्नत साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के द्वार यह परियोजना केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक बड़ा जरिया बनेगी। प्रोजेक्ट गंगा के माध्यम से गांवों के युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क (घर बैठे काम) और ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग से जोड़ा जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से छात्रों को पढ़ाई के वैश्विक अवसर मिलेंगे, जिससे गांवों में ही रहते हुए युवा डिजिटल इकोनॉमी का हिस्सा बन सकेंगे और बड़े शहरों की तरफ होने वाला पलायन थमेगा। योगी सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार है। "प्रोजेक्ट गंगा" के जरिए सरकार 'कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी' के अपने संकल्प को सिद्ध करने जा रही है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी तकनीक का पूरा अधिकार मिल सके।

विश्व धरोहर खजुराहो में हुआ “योग महोत्सव 2026”

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय योग परम्परा को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर स्वस्थ, जागरूक एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग और खजुराहो, दोनों ही सदियों से भारतीय संस्कृति के अभिन्न स्तंभ रहे हैं। हमारी सरकार योग के प्रचार के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। योग को प्रदेश के घर-घर तक पहुंचाने के लिए आयुष विभाग द्वारा इन दिनों ''घर-घर योग-हर व्यक्ति निरोग" अभियान भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 25 दिवसीय काउंटडाउन के अवसर पर यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में आयोजित “योग महोत्सव 2026” कार्यक्रम को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित किया। वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग आज सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि 'वन अर्थ-वन हेल्थ' की भावना को साकार करने वाला जीवन दर्शन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार घर-घर योग हर व्यक्ति निरोध के भाव से योग और आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। आयुष विभाग के माध्यम से आरोग्य मंदिरों, योग वेलनेस सेंटर्स और विभिन्न जनजागरुकता की गतिविधियों के माध्यम से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए सफल अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले काउंटडाउन इवेंट से देशभर में लाखों लोग जुड़ रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी योग को सहर्ष स्वीकार कर रही है। हम योग को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर एक स्वस्थ, जागरूक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबके सहयोग से हम योग को हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय का यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। यह कार्यक्रम योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति केन्द्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्र और राज्य सरकार के आयुष मंत्रालय के अधिकारियों और जिला प्रशासन, छतरपुर को खजुराहो में इस विशेष आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को केंद्रीय आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और सांसद खजुराहो विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया।                           

बिहार में उजाला, झारखंड के गांव अंधेरे में: प्रतापपुर के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

प्रतापपुर (चतरा) बस कुछ कदम दूर बिहार है।वहां रातभर गांव रोशनी में जगमगाते रहते हैं और यहां पूरा गांव अंधेरे में डूबा रहता है।झारखंड-बिहार सीमा पर बसे प्रतापपुर प्रखंड के गांवों में इन दिनों यही दर्द लोगों की जुबान पर है।बिजली व्यवस्था की बदहाली ने ग्रामीणों का जीवन बेहाल कर दिया है। लोगों का आरोप है कि गांवों में दिनभर में मुश्किल से दो से तीन घंटे बिजली मिल रही है, वह भी लो वोल्टेज के सहारे। हालत यह है कि पंखे ठीक से नहीं चल पा रहे और रातभर उमस भरी गर्मी में लोग जागने को मजबूर हैं। सीमावर्ती गांवों के लोग जब रात के अंधेरे में बिहार के गांवों को 24 घंटे बिजली से जगमगाते देखते हैं, तो उनके भीतर व्यवस्था को लेकर गहरी मायूसी और आक्रोश उभर आता है। इस पार अंधेरे में डूबे गांव और उस पार रोशनी से चमकते घर लोगों को भीतर तक झकझोर रहे हैं। कई ग्रामीण अब पीड़ा भरे स्वर में कहते हैं कि काश, हम बिहार से अलग न हुए होते तो शायद आज हमारे गांवों में भी रातभर उजाला रहता। गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट ने हालात और भयावह बना दिए हैं। पूरी रात बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, जबकि किसान सिंचाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। छोटे दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों का कामकाज भी ठप पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की कोई तय समय-सारिणी नहीं रह गई है। कब बिजली आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। कभी अचानक हाई वोल्टेज आ जाता है तो कभी इतना लो वोल्टेज कि बल्ब तक टिमटिमाने लगते हैं। लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से पंखे, टीवी, फ्रिज, मोटर और अन्य उपकरण खराब हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। सरकारी कार्यालयों में जेनरेटर और इनवर्टर की सुविधा होने के कारण अधिकारियों को ग्रामीणों की पीड़ा का एहसास तक नहीं होता। जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं आता।प्रतापपुर प्रखंड के सीमावर्ती ग्रामीणों ने सरकार और बिजली विभाग से जल्द स्थायी समाधान निकालने तथा नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।  

15 जून से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ करने के निर्देश

लखनऊ जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के संचालन के साथ यात्रियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आवागमन के लिए प्राथमिक चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की चौथी बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि 15 जून से प्रस्तावित उड़ान संचालन से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 15.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं तथा वर्ष 2030 तक 10 हजार चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक लगभग 2500 चार्जिंग स्टेशन संचालित हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति देगी। उन्होंने भूमि अधिग्रहण और विनिमय संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 55 प्रतिशत भूमि प्राप्त की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण जून माह के अंत तक पूरा कर लिया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट स्वीकृत हो चुका है तथा भूमि अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश संबंधी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त हो चुका है। डेवलपर चयन के लिए निविदा की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 जुलाई 2026 कर दी गई है। वहीं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 200 हेक्टेयर में से 144 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो चुकी है तथा शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज को निवेश अनुकूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भवन स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि राज्य स्तर पर 136 रिक्त पदों में से 40 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा शेष 96 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। जिला एवं विकासखंड स्तर पर 360 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में बताया गया कि सीड पार्क परियोजना के संबंध में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और प्रमुख बीज कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया गया है तथा आगे की कार्यवाही पर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री ने डिफेंस कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि आइकॉन्स हिंदुस्तान एयरोस्पेस एंड डिफेंस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अलीगढ़ डिफेंस नोड में 125 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया गया है। तकनीकी मूल्यांकन समिति तथा भूमि आवंटन समिति द्वारा कंपनी के पक्ष में संस्तुति की जा चुकी है और आगे की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री ने जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब तथा उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि और मत्स्य आधारित उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएं। बैठक में बताया गया कि एग्री एक्सपोर्ट हब के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 29 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है। वहीं उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना के लिए 60 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है, जहां फिश प्रोसेसिंग, फीड प्लांट, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए आधुनिक नगरीय अवसंरचना का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में ‘सीएम समीक्षा’ में शामिल परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सेल गठित कर इन परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

पाकिस्तान सीमा होगी हाईटेक: ड्रोन रोधी सिस्टम, नई फेंसिंग और 184 गांवों का विकास

जयपुर राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा अब पहले से ज्यादा मजबूत और आधुनिक होने जा रही है. राजस्थान की पाकिस्तान सीमा का सुरक्षा का पूरा मॉडल बदलने जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर के सांचू पोस्ट दौरे के बाद अब बॉर्डर पर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" तैयार करने की रणनीति तैयार की गई है. यानी बीएसएफ, सेना, स्थानीय नागरिक और प्रशासन मिलकर सीमा सुरक्षा की नई दीवार बनेंगे. इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों को हाईटेक और आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी तैयारी भी शुरू हो चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परसों, 25 मई की रात दो दिन के दौर पर बीकानेर आए थे. उन्होंने राजस्थान के 5 बॉर्डर जिलों के DM-SP के साथ अहम बैठक की थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर में हुई हाईलेवल बैठक में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए बड़ा सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. भारत-पाक सीमा से 15 किलोमीटर तक अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. शाह ने साफ कहा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध निर्माण तुरंत ध्वस्त किए जाएं. बैठक में घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए संयुक्त एक्शन प्लान पर जोर दिया गया. BSF, NCB, CBDT और राज्य एजेंसियां मिलकर बॉर्डर मैनेजमेंट करेंगी. डीएम को बड़े अधिकार दिए जाएंगे. फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स, नकली आधार कार्ड और संदिग्ध फंडिंग की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं.   बीएसएफ, सेना, नागरिक और प्रशासन का "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" साइबर क्राइम रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन के प्रभावी इस्तेमाल और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया. कल, 26 मई को बीकानेर के सांचू पोस्ट पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संदेश दिया कि सीमा सुरक्षा अब सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, स्थानीय लोगों और प्रशासन के तालमेल से मजबूत होगी. अमित शाह ने बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और प्रशासन को मिलाकर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" बनाने की बात कही है. यानी सीमा के उस पार से होने वाली हर गतिविधि पर चौतरफा निगरानी रखी जाएगी. सीमा को बनाया जाएगा ड्रोन रोधी पाकिस्तान से लगती सीमा सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अब कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई डिजाइन की फेंसिंग लगाई जा रही है. ड्रोन रोधी सिस्टम अगले छह महीने में शुरू करने की तैयारी है. 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि जवानों की आवाजाही और निगरानी आसान हो सके. बीएसएफ चौकियों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का काम भी तेजी से चल रहा है. वहीं महिला जवानों के लिए आधुनिक बैरक बनाए जा रहे हैं. सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों को चुना गया है. इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, टीवी कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे. हर गांव पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी के गांव अब सिर्फ सीमा के आखिरी गांव नहीं, बल्कि देश की पहली सुरक्षा लाइन बनेंगे. मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम से भी विकास राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के जरिए भी सीमावर्ती इलाकों के विकास को गति दी है. इसके तहत 1 हजार 206 गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े एक हजार से ज्यादा काम स्वीकृत किए गए हैं.

ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति की तैयारी, ब्रॉडबैंड, फ्री वाई-फाई और डिजिटल सेवाओं से बदलेगी गांवों की तस्वीर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द “लाइव” होने जा रहा है। सरकार की ओर से परियोजना से जुड़े लगभग सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रोजेक्ट गंगा का उद्देश्य गांवों और छोटे शहरों तक आधुनिक डिजिटल सेवाओं को पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र भी हाई स्पीड इंटरनेट और नई तकनीकों से सीधे जुड़ सकें। परियोजना के तहत ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, फ्री पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी, आईपीटीवी और डिजिटल सेवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जुलाई 2025 से शुरू हुआ था मिशन प्रोजेक्ट गंगा की शुरुआत जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों और स्टेकहोल्डर्स के साथ रणनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। जनवरी 2026 में कॉन्सेप्ट नोट साझा किया गया, जबकि 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की उपस्थिति में एमओयू साइन किया गया। इसके बाद मीडिया कवरेज, फाइनल डीपीआर और एमएसएमई विभाग के माध्यम से जिलाधिकारियों को पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अप्रैल 2026 तक बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट को लेकर भी रणनीतिक बातचीत शुरू कर दी गई, जिससे अब यह परियोजना “लाइव” के लिए पूरी तरह तैयार मानी जा रही है। गांवों तक पहुंचेगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा के तहत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से घर-घर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, पब्लिक वाई-फाई और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच संभव होगी। साथ ही सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा। परियोजना का लक्ष्य केवल इंटरनेट पहुंचाना नहीं, बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है। युवाओं को मिलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के अवसर प्रोजेक्ट गंगा के जरिए ग्रामीण युवाओं को डिजिटल रोजगार से जोड़ने पर विशेष फोकस किया गया है। इसके तहत फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गांवों में रहने वाले युवाओं को भी बड़े शहरों जैसी डिजिटल संभावनाओं का लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इकॉनामी को नई गति दे सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा “कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी” के विजन को मजबूत आधार देगा। सरकार की कोशिश है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर राज्य के रूप में नई पहचान बनाए।

IAS लिंक सामने आने के बाद ठेकेदार रिशुश्री पर बड़ी रेड, पटना में हलचल तेज

पटना. Special Vigilance Unit और Economic Offences Unit ने बुधवार को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना और दरभंगा समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान नकदी, जेवरात, दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। पटना में ठेकेदार रिशु श्री के आवास पर विशेष निगरानी इकाई की टीम ने सुबह से जांच शुरू की। वहीं दरभंगा में केवटी प्रखंड के बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के कई ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने एक साथ दबिश दी। पटना के मीठापुर स्थित कांताराम सखी एंक्लेव में ठेकेदार रिशु श्री के फ्लैट पर आठ सदस्यीय टीम ने छापेमारी की। रिशु श्री पर सरकारी टेंडरों में हेराफेरी कर अपनी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है। जांच के दौरान टीम को जेवरात, नकदी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। अधिकारियों ने बैंक लेनदेन और डिजिटल उपकरणों की भी गहन जांच की। IAS अधिकारियों को विदेश यात्रा कराने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार रिशु श्री पर कुछ IAS अधिकारियों और उनके परिवारों को विदेश यात्रा कराने का भी आरोप है। पहले की जांच रिपोर्टों में यूरोप और ऑस्ट्रेलिया ट्रिप का खर्च उठाने की बात सामने आई थी। बताया गया कि सरकारी टेंडर दिलाने के बदले कुछ अधिकारियों के यात्रा और ठहरने का खर्च ठेकेदार द्वारा वहन किया गया। जांच में एक अधिकारी के आवास पर बागवानी में लाखों रुपये खर्च किए जाने का मामला भी सामने आया है। ED पहले भी कर चुकी है कार्रवाई Enforcement Directorate पहले भी रिशु श्री के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई कर चुकी है। नवंबर में देश के कई शहरों में उनके नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। उस दौरान 33 लाख रुपये नकद, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि ठेके हासिल करने के लिए कई अधिकारियों को मोटी कमीशन दी गई थी। दरभंगा में BDO के छह ठिकानों पर छापा दरभंगा के केवटी प्रखंड के बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के कार्यालय, सरकारी आवास और निजी ठिकानों समेत छह स्थानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने एक साथ छापेमारी की। टीम ने दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी के ठिकानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच की। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। आय से 81 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आरोप बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के पास 89 लाख 13 हजार 500 रुपये की अवैध संपत्ति होने के प्रमाण मिले हैं। बताया गया कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से करीब 81 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल दोनों मामलों में जांच एजेंसियां दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही हैं।

प्रदेश की समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचेगी गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षा सुधार को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के साथ-साथ प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। प्रदेश के समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू किया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और बालवाटिका पुस्तिका जैसी सामग्री के माध्यम से अब लाखों नौनिहालों को शुरुआती शिक्षा का नया और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को बच्चों की सीखने की बुनियाद माना गया है। अब उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं को केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आयु वर्ग के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत ‘चहक-1’, ‘चहक-2’, ‘चहक-3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बालवाटिका हस्तपुस्तिका, 12 प्रकार की बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और शिक्षण तालिकाएं वितरित की जाएंगी। प्रदेश में पहले ही बेसिक शिक्षा के अंतर्गत बड़े स्तर पर स्मार्ट स्कूल, ऑपरेशन कायाकल्प, डिजिटल मॉनिटरिंग और निपुण भारत मिशन जैसे अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी उसी व्यापक शिक्षा सुधार अभियान से जोड़ते हुए बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा पहुंचाने की दिशा में यह अभियान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।  गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी कारण गतिविधि आधारित, खेल आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘चहक’ श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा विकास, बोलने-सुनने की क्षमता और बुनियादी सीखने की दक्षताओं को विकसित करेंगी। वहीं ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री बच्चों के बौद्धिक विकास, रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही बिग बुक और टीचर गाइड के माध्यम से ईसीसीई एजुकेटर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ा जाएगा। डिजिटल मॉनिटरिंग से जुड़ी पूरी व्यवस्था योगी सरकार ने इस पूरी वितरण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की है। बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटरों को वितरण प्रक्रिया की निगरानी और स्कैनिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इस डिजिटल व्यवस्था से शासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किस बालवाटिकाओं तक सामग्री पहुंच चुकी है। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूती मिलेगी। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिल रहा संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश में पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। अभी तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था में अधिकतर फोकस प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं पर रहता था, लेकिन अब बच्चों की शुरुआती सीखने की अवस्था को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। अब शिक्षा सुधार बच्चों की सीखने की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है।

कर्मचारियों के अधिकारों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, संस्थानों को दी नसीहत

चंडीगढ़. एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में वर्षों तक ठेके के आधार पर काम लेने और फिर कर्मचारियों को बदल देने के बढ़ रहे रुझान पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पब्लिक इंस्टीट्यूशन कर्मचारियों को 'यूज एंड थ्रो' जैसे इस्तेमाल नहीं कर सकती। किसी संस्था में काम की जरुरत लगातार बनी होती है तो सिर्फ पद का नाम बदल कर एक ठेका कर्मचारी को हटा कर दूसरे कर्मचारी को नहीं लगाया जा सकता। जस्टिस संदीप मोदगिल ने ये अहम फैसला रिंपी नाम की महिला पिटीशनर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।   पढ़ें क्या है पूरा मामला  पिटीशनर साल 2021 से सेंट्रल गवर्नमेंट के तहत डेवलपमेंट स्टडीज विभाग में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम कर रही थी। उसका सिलेक्शन बकायदा चुनाव कमेटी द्वारा किया गया था। वह 4 दिसंबर, 2021 से लगातार इंस्टीट्यूशन में पढ़ा रही थी, वह 48 परसेंट डिसेबल्ड कैटेगरी से भी संबंधित है। पिटीशनर ने कोर्ट को बताया कि इंस्टीट्यूशन ने साल 2023 में फिर से कॉन्ट्रैक्ट पर असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिए एडवर्टाइजमेंट दिया था और उसने उसके लिए भी अप्लाई किया था, लेकिन सिलेक्शन प्रोसेस पूरा होने से पहले ही इंस्टीट्यूशन ने एक और कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉई को अपॉइंट कर दिया और 9 मार्च, 2024 को उसे सेवा मुक्त करने का ऑर्डर जारी कर दिया। पिटीशनर ने यह भी दलील दी कि उससे रेगुलर टीचर की तरह पूरा एकेडमिक काम लिया जा रहा था, लेकिन उसे हर महीने सिर्फ 52 हजार रुपये की फिक्स्ड सैलरी दी जा रही थी। यह भी कहा गया कि इंस्टीट्यूशन कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉई के साथ शोषण वाला बर्ताव कर रहा है, जबकि इंस्टीट्यूशन ने कोर्ट को बताया कि पिटीशनर को सिर्फ 11 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर अपॉइंट किया गया था और उसे रेगुलर अपॉइंटमेंट या सर्विस जारी रखने का कोई हक नहीं है। इंस्टीट्यूशन ने यह भी दावा किया कि उसे नई सिलेक्शन प्रोसेस में सिलेक्ट नहीं किया गया था और नया अपॉइंटमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर असिस्टेंट प्रोफेसर की एक अलग पोस्ट पर किया गया था। हाईकोर्ट ने इंस्टीट्यूशन की इन दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट सिर्फ पोस्ट का नाम नहीं देखता, बल्कि काम का असल नेचर भी देखता है। रिकॉर्ड से यह साफ है कि पिटीशनर पहले भी वही पढ़ाने का काम कर रही थी और बाद में जिस व्यक्ति को अपॉइंट किया गया, उसे भी उन्हीं एजुकेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए अपॉइंट किया गया था। इसलिए यह साफ तौर पर एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को हटाकर दूसरे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को अपॉइंट करने का मामला है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में लगातार शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर अपॉइंटमेंट न सिर्फ कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित करते हैं, बल्कि एजुकेशन के माहौल पर भी असर डालते हैं। जब स्टूडेंट्स को पढ़ाने का काम लगातार चल रहा हो, तो इंस्टीट्यूशन टीचर्स को अस्थिरता की स्थिति में नहीं रख सकता। आखिर में हाई कोर्ट ने 9 मार्च, 2024 के रिलीफ ऑर्डर को रद्द कर दिया और पिटीशनर को तुरंत बहाल करने, सर्विस जारी रखने और सभी कॉन्सीक्वेंशियल बेनिफिट्स देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बकाया सैलरी चार हफ्ते के अंदर 6 परसेंट सालाना ब्याज के साथ दी जाए।

अनुपयोगी सरकारी जमीनों के बेहतर उपयोग की तैयारी, अधिकारियों को मिले दिशा-निर्देश

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासकीय विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों के स्वामित्व वाली अनुपयोगी व खाली जमीनों के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए एक व्यापक रिडेवलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित की गई भूमियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी सरकारी जमीनों से न तो शासन को कोई आय हो रही है और न ही जनता को इसका लाभ मिल रहा है। इस रिडेवलपमेंट योजना से जहां शहरों को एक नियोजित विकास मिलेगा, वहीं शासकीय परिसंपत्तियों का मूल्य भी कई गुना बढ़ जाएगा। डिजिटल लैंड बैंक और जीआईएस मैपिंग से होगी निगरानी बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षों से खाली पड़ी या अतिक्रमण की आशंका वाली सरकारी जमीनों को चिन्हित कर उनका व्यावसायिक व जनहित में बेहतर उपयोग किया जाएगा। शासकीय विभागों के अंतर्गत आने वाली सभी खाली जमीनों का एक केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। मैपिंग के जरिए हर प्लॉट की सटीक लोकेशन, रकबा (क्षेत्रफल) और वर्तमान स्थिति का डेटा जीआईएस (GIS) मैपिंग ऑनलाइन दर्ज होगा। शहरों में प्राइम लोकेशन पर स्थित खाली जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और नए सरकारी कार्यालय बनाए जाएंगे। बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को राजस्व भी मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास ग्रामीण इलाकों की जमीनों पर कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस या कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centers) प्रस्तावित किए जाएंगे। बड़ी जमीनों के सुनियोजित विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। जर्जर भवनों को ढहाकर होगा नवनिर्माण, सुरक्षा के कड़े इंतजाम योजना के तहत ऐसे शासकीय भवनों और परिसरों को चिन्हित किया जाएगा, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत करना वित्तीय दृष्टि से फायदेमंद नहीं है। ऐसी जगहों पर पुरानी संरचनाओं को हटाकर शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सरकारी विभागों या उनके उपक्रमों के लिए नए और आधुनिक निर्माण किए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से चिन्हित जमीनों पर तत्काल फेंसिंग (घेराबंदी) की जाएगी और शासकीय स्वामित्व का बोर्ड लगाया जाएगा। इन जमीनों पर अवैध कब्जे रोकने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी रखेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी संभागायुक्त व कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।