samacharsecretary.com

कैंसर डे-केयर सेंटर से विदिशा और आसपास के मरीजों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी कीमोथेरेपी की सुविधा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में कैंसर उपचार की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा रहा है। लक्ष्य केवल कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कैंसर की पहचान से लेकर सटीक जांच, स्टेजिंग, विशेषज्ञ परामर्श, सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी तक समन्वित उपचार व्यवस्था विकसित करना है।विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से स्थापित कैंसर डे-केयर कीमोथेरेपी यूनिट का केंद्रीय किसान कल्याण एवं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान एवं केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूनिट का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। यूनिट शुरू होने से विदिशा सहित आसपास के जिलों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी की सुविधा मिल सकेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि विदिशा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आज महत्वपूर्ण दिन है। डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर की शुरुआत से मरीजों और उनके परिवारों को बार-बार बड़े शहरों की यात्रा, उपचार पर होने वाले अतिरिक्त खर्च और मानसिक परेशानी से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार में समय पर जांच और प्रारंभिक अवस्था में उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जून माह में आयोजित कैंसर स्क्रीनिंग अभियान में लगभग 3 हजार लोगों की स्क्रीनिंग एवं जांच की गई। इनमें करीब 600 मरीजों में कैंसर की पहचान हुई, जबकि लगभग 250 संभावित कैंसर मरीज चिन्हित किए गए। आगे के उपचार के लिए भोपाल के कैंसर अस्पतालों तथा टाटा मेमोरियल सेंटर की मुंबई स्थित इकाई ऐक्ट्रेक के सहयोग से आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। इसी दौरान विदिशा में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया गया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के सतत संपर्क से आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था, स्टाफ का समुचित वितरण तथा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई। सेंटर के संचालन के लिए मेडिसिन विभाग के दो चिकित्सकों और सात नर्सिंग अधिकारियों को ऐक्ट्रेक, मुंबई में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को एम्स भोपाल में भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की कीमोथेरेपी किसी ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा निर्धारित की गई है, उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार विदिशा मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया जा सकेगा। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में कैंसर विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण एम्स भोपाल और ऐक्ट्रेक के विशेषज्ञों के समन्वय से तैयार उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार सेवाएं प्रदान की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के पुराने पांच शासकीय मेडिकल कॉलेजों में उन्नत लीनियर एक्सीलरेटर मशीनों के माध्यम से आधुनिक रेडिएशन थेरेपी और ब्रेकीथेरेपी की सुविधाएं शीघ्र प्रारंभ की जा रही हैं। कैंसर की सटीक जांच और स्टेजिंग के लिए पेट स्कैन की सुविधा भी जल्द शुरू होगी। इससे कैंसर मरीजों को उपचार की विभिन्न सुविधाओं के लिए अलग-अलग शहरों पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना संभव हुआ है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता, नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और नशे से दूरी भी आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर कैंसर मरीजों को मिलेगी उपचार की सुविधा – केंद्रीय मंत्री  चौहान केंद्रीय किसान कल्याण एवं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा में शुरू किया गया कैंसर डे-केयर सेंटर कैंसर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से अब मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कैंसर गंभीर बीमारी है, इसलिए उपचार के साथ समय पर जांच और जागरूकता भी आवश्यक है। विदिशा में कैंसर उपचार की सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जा रही हैं। इससे पहले आयोजित कैंसर जांच शिविर में लगभग 3 हजार लोगों की जांच की गई थी। अब विदिशा में कैंसर अस्पताल स्थापित करने की दिशा में भी तैयारियां की जा रही हैं। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने लोगों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। कैंसर उपचार को नई दिशा देगा डे-केयर सेंटर – केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि टाटा समूह द्वारा कैंसर के क्षेत्र में किए जा रहे शोध और प्रयास आने वाले समय में भारत सहित पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित होंगे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि भारत में होने वाला शोध पूरी मानवता के कल्याण के लिए उपयोगी हो। डॉ. सिंह ने बताया कि टाटा समूह द्वारा पिछले 11 वर्षों में 11 अस्पताल स्थापित किए गए हैं तथा 300 से अधिक ग्रिड स्थापित किए गए हैं, ताकि कैंसर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। विदिशा में डे-केयर सेंटर की शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सेंटर के संचालन के लिए दो डॉक्टरों और सात नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम ने कीमोथेरेपी डे-केयर सेंटर की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेंटर में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कीमोथेरेपी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के आनंद विभाग के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  लखन पटेल, कुरवाई विधायक  हरिसिंह सप्रे, बासौदा विधायक  हरिसिंह रघुवंशी, सांची विधायक  प्रभुराम चौधरी, बुधनी विधायक  रमाकांत भार्गव, विदिशा विधायक  मुकेश टंडन सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, चिकित्सा विशेषज्ञ एवं अधिकारी उपस्थित रहे।  

बिहार में खतरनाक ‘कोटा’ हेरोइन का बढ़ा नेटवर्क, साबुन-माचिस की डिब्बी में हो रही तस्करी

पटना ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ने सिर्फ रूट ही नहीं बदला है, बल्कि हेरोइन की हाई क्वालिटी तैयार कर उसका स्वरूप भी बदल दिया है, जिसे 'कोटा' (हेरोइन) के नाम से जाना जाता है। सरसों के दाने की तरह दिखने वाले 'कोटा' (हेरोइन) की तस्करी भी साबुन और माचिस की डिब्बी में रखकर ठिकाने तक पहुंचाया जा रहा है। पहले बिहार एसटीएफ के हाथ 'कोटा' (हेरोइन) लगा था, जिसकी मात्रा कम थी, लेकिन इसका असर बेहद खतरनाक बताया गया। इसका दिमाग और शरीर पर बहुत घातक प्रभाव पड़ता है। बिहार पुलिस कुछ दिन पहले इसका एक वीडियो क्लिप बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर लोगों को जागरूक भी किया था। एसटीएफ 'कोटा' (हेरोइन) बरामदगी मामले में अब तक 27 केस दर्ज करा चुकी है और 71 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। इनमें 15 महिलाएं शामिल थीं। बिहार पुलिस ने अपील की कि आपके पास नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त, तस्करी या सेवन से संबंधित कोई सूचना है, तो तुरंत 1933 पर काल करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, जिसके खिलाफ बिहार पुलिस और एसटीएफ लगातार बड़े स्तर पर छापेमारी कर रही हैं। कुछ दिन पूर्व बरौनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बने नए फुटओवर ब्रिज के नीचे से पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 118 ग्राम कोटा हेरोइन बरामद की गई है। यह हेरोइन बिहार या उसके आसपास के राज्यों से नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड से लाई गई थी। उन्हें यह मादक पदार्थ नागालैंड के ज्यूरक शहर के रहने वाले एक तस्कर ने सप्लाई किया था। चारों आरोपित कविगुरु एक्सप्रेस ट्रेन से सफर तय कर असम के कामाख्या से होते हुए बरौनी स्टेशन पहुंचे थे। इसी तरह मुजफ्फरपुर के कच्ची पक्की ओपी क्षेत्र में पुलिस ने घर में चल रहे रैकेट का भंडाफोड़ किया था। वहां से 25 ग्राम अवैध 'कोटा' हेरोइन की 64 पुड़िया बरामद कर एक तस्कर दंपती को गिरफ्तार किया था। बख्तियारपुर में एसटीएफ और पटना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में सौ ग्राम हेरोइन के साथ चार तस्करों को दबोचा था। इसे आठ साबुनदानीनुमा डिब्बों में रखा गया था। इसी तरह नदी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर एक घर से 162 ग्राम 'कोटा' (हेरोइन) और पैकिंग के 1,500 खाली डिब्बे जब्त किए गए थे। छिपाने के लिए अपना रहे शातिराना तरीका चेकिंग से बचने के लिए हेरोइन छिपाने का बेहद शातिराना तरीका अपना रहे हैं। बरौनी से गिरफ्तार दोनों महिलाओं ने हेरोइन से भरे प्लास्टिक के डिब्बों को अपने ब्लाउज के अंदर छिपा रखा था। दो अन्य तस्करों ने हेरोइन के पैकेटों को अपनी पैंट की जेब और पिठ्ठू बैग व प्लास्टिक के झोले में छिपा रखा था। तस्करी के दौरान किसी को संदेह नहीं हो, इसके लिए इसे सरसों के दाने की तरह तैयार कर कैरियर के जरिए तय ठिकाने पर भेजा जा रहा है। असम के दीमापुर और मणिपुर से पहुंच रही खेप सूत्रों की मानें तो पुलिस की छानबीन में सिंडिकेट से लेकर चेन से जुड़े कई राज उजागर हुए। स्थानीय लोगों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर बस या ट्रेन से उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में बुला रहे हैं। असम के दीमापुर और मणिपुर के इम्फाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से हेरोइन/कोटा की खेप लाकर बिहार के अलग-अलग जिलों में सप्लाई कर रहे हैं। नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के रास्ते चरस और अन्य ड्रग्स को बिहार के बाहर भी तस्करी की जा रही है। डेढ़ वर्ष में 17 किलोग्राम से अधिक हेरोइन/स्मैक बरामद एसटीएफ और उसकी नार्कोटिक्स सेल की टीम ने वर्ष 2025 में अप्रैल से दिसंबर तक 7.662 किलोग्राम हेरोइन और 4.215 किलोग्राम स्मैक जब्त किया गया। इसी तरह वर्ष 2026 में जनवरी से आठ अगस्त तक 5.724 किलोग्राम हेरोइन/स्मैक बरामद किया गया। एसटीएफ का अभियान जारी है और लगातार किसी न किसी क्षेत्र में मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या से की बड़ी घोषणा, कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के परिवार को हर साल पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

अयोध्या  प्रदेश की 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बड़ी सौगात दी। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इसके साथ ही कार्यकत्रियों, सहायिकाओं तथा उनके परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अब उन्हें दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी। सीएम ने स्मार्टफोन और रियल टाइम डेटा के इस्तेमाल से आंगनवाड़ी केंद्रों को स्मार्ट बनाने की भी घोषणा की।   मुख्यमंत्री योगी अयोध्या धाम में आईसीडीएस के तहत आयोजित आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। अयोध्या में करीब 12 हजार आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं मौजूद रहीं, जबकि सभी 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों से मंत्री, सांसद, विधायक और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं जुड़ीं। बुधवार से शुरू हो रहे पोषण माह से पहले मुख्यमंत्री योगी ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को मानदेय वृद्धि, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, अतिरिक्त साड़ी और स्मार्टफोन की चार प्रमुख सौगातें दीं। अपने संबोधन से पहले सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों के स्टॉल्स का अवलोकन किया, महिलाओं को पुष्टाहार भेंट किया तथा कई बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। सेवा की मिसाल बनीं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के समय आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया जाएगा। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से बढ़ाकर पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने कोरोना जैसी सदी की सबसे बड़ी महामारी के दौरान एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा तक अपनी जान जोखिम में डालकर जुटी रहीं। सीएम योगी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। हाल में प्रदेश के करीब 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी गई है। लगातार मांग आ रही थी कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को भी इससे जोड़ा जाए। अब सरकार यह सुविधा उन्हें भी देने जा रही है।   मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए साड़ी की धनराशि जारी कर दी गई है। अब तक उन्हें दो साड़ियां मिलती थीं। अब एक अतिरिक्त साड़ी के लिए 500 रुपये और दिए जाएंगे। इस पर प्रदेश सरकार करीब 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार वहन करेगी। पहले चरण में 1.28 लाख स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे योजनाओं का डेटा रियल टाइम में दर्ज किया जा सकेगा और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का काम भी आसान होगा। हर आंगनवाड़ी केंद्र को अपना भवन देना लक्ष्य सीएम ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को बच्चों के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2018 में इनकी भूमिका की तुलना माता यशोदा से की थी। मां के बाद छोटे बच्चों का पहला संवाद आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं से होता है। बचपन स्वस्थ होगा तो भारत स्वस्थ, समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को व्यवस्थित स्वरूप दिया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र को अपना भवन उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि या अलग बजट से भवनों का निर्माण कराया जाएगा।   शराब माफिया संचालित करता था बच्चों का पोषाहार पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर थे। बच्चे बैठने के लिए टाट लेकर आते थे। पेयजल और जरूरी उपकरणों का अभाव था। केंद्र सरकार पैसा देती थी, लेकिन पोषाहार पर माफिया का शिकंजा था। प्रदेश में बच्चों का पोषाहार एक शराब माफिया संचालित करता था। सरकार और माफिया व्यवस्था को चौपट करते थे और बदनामी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को झेलनी पड़ती थी। अब पोषाहार को माफिया से मुक्त कर 204 स्थानों पर टेक होम राशन प्लांट महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।   सपा-कांग्रेस ने किया राममंदिर का विरोध अयोध्या के बदलाव को आंगनवाड़ी केंद्रों के कायाकल्प से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दस वर्ष पहले यहां न पर्याप्त बिजली थी, न सड़कें और न सुविधाएं। आज अयोध्या में फोरलेन सड़कें, भव्य रेलवे स्टेशन और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। रेलवे की सिंगल लाइन डबल हो चुकी है। राम की पैड़ी का कायाकल्प हुआ और अयोध्या देश की सोलर सिटी बनी है। सपा और कांग्रेस, दोनों दलों ने राम मंदिर का विरोध किया। सपा ने अयोध्या में सड़कों के चौड़ीकरण, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट निर्माण तक का विरोध किया। ये विरासत के भी विरोधी हैं और विकास के भी। लेकिन, इनके विरोध के बावजूद न राम मंदिर अभियान रुका और न अयोध्या का विकास। आज रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं और देश-दुनिया के लोग अयोध्या के बदलाव को देख रहे हैं।   समारोह में सैम और मैम श्रेणी से सामान्य पोषण स्थिति में आए बच्चों और उनके अभिभावकों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों तथा एवरेस्ट बेस कैंप अभियान में शामिल बेटियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महिला कल्याण व बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य, महिला कल्याण राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, अयोध्या महापौर पंडित गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत सदस्य रोली सिंह, विधान परिषद सदस्य हरिओम पांडेय, अयोध्या सदर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान, गोसाईंगंज विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी, प्रदेश व जिले के अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

ग्रुप सीईओ खालिद अल हुरैमल के साथ वेस्ट-टू-एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

भोपाल  एआईएम कांग्रेस-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन  खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश की संभावनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ  खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे। अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं। एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे। बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है। रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।  

अयोध्या में सीएम योगी ने बजरंगबली का लिया आशीर्वाद, रामलला के दरबार में टेका माथा

अयोध्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह के समापन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचा। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हनुमान जी का आशीर्वाद लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर पहुंचे। मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जितेंद्र मिश्र ने उनका स्वागत किया। रामलला के दर्शन और पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे विभिन्न कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की स्वच्छता, श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। दर्शन-पूजन के दौरान मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली। हनुमानगढ़ी में मुख्यमंत्री ने पारंपरिक पूजा पद्धति के अनुसार दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। उनके अयोध्या आगमन को लेकर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क रहा। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

मुख्यमंत्री योगी से मिली ‘हनुमान अंश’ की टीम, गुरु गोरक्षनाथ के प्रसंग पर हुई चर्चा

 लखनऊ फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्माता, निर्देशक और प्रमुख कलाकारों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की। टीम ने उन्हें फिल्म के कुछ खास अंश दिखाए। इनमें नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और गुरु गोरक्षनाथ की पंक्तियों से जुड़ा हिस्सा भी शामिल था। मुख्यमंत्री योगी ने फिल्म और टीम के प्रयासों की सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया।   करीब दो करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक एवं निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने मुलाकात के बाद बताया कि फिल्म में नीब करोरी बाबा के घर छोड़कर ईश्वर की खोज में निकलने की यात्रा को दिखाया गया है। बचपन में मां के निधन के बाद लक्ष्मी नारायण शर्मा, जो आगे चलकर नीब करोरी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए, घर से निकले तो उनका संपर्क नाथ संप्रदाय के संतों से हुआ। संन्यास लेने से पहले उन्होंने इन संतों के साथ समय बिताया था।   विशाल ने बताया कि नीब करोरी बाबा की इसी आध्यात्मिक यात्रा के कारण फिल्म में गुरु गोरक्षनाथ की लिखी पंक्तियों का संदर्भ लिया गया है। उनके अनुसार, नाथ संप्रदाय के संतों के साथ रहने के दौरान नीब करोरी बाबा की अंतर्यात्रा शुरू होने के संदर्भ मिलते हैं। उनके कुंडलिनी जागरण, अन्नपूर्णा समेत कई सिद्धियां प्राप्त होने और पक्षियों की आवाजें सुनने से जुड़े प्रसंगों को भी फिल्म में स्थान दिया गया है।   विशाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी स्वयं संत परंपरा से आते हैं, इसलिए टीम ने उन्हें फिल्म का वह हिस्सा भी दिखाया जो भारतीय सभ्यता और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है। फिल्म में नीब करोरी बाबा की भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात सुखद रही। टीम को उनका आशीर्वाद मिला है और इसके लिए सभी आभारी हैं।   यूपी में शूटिंग के लिए कई बेहतरीन लोकेशन विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं हैं। नोएडा में बन रही फिल्म सिटी के अलावा वाराणसी, चित्रकूट, मथुरा, वृंदावन, प्रयागराज और आगरा में शूटिंग के लिए बेहतरीन लोकेशन उपलब्ध हैं। उनका प्रोडक्शन हाउस भी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत है और फिल्म के लगभग सभी कलाकार उत्तर और मध्य भारत से हैं।   विशाल मूल रूप से झांसी के रहने वाले हैं और उनकी पढ़ाई गोरखपुर में हुई है, जबकि उनका परिवार लखनऊ में रहता है। नीब करोरी बाबा की भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या भी लखनऊ के हैं। फिल्म में उनकी पत्नी की भूमिका निभाने वाली पूर्णिमा तिवारी और निर्माता रागिनी सोना भी लखनऊ की रहने वाली हैं।   यूपी के शहरों में होगा टैलेंट हंट विशाल ने कहा कि आगे भी उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों को केंद्र में रखकर फिल्में बनाई जाएंगी। यूपी की कहानी और यहां की बोली वाली फिल्मों को दक्षिण भारत में भी दर्शक मिल रहे हैं। आने वाली फिल्मों के लिए प्रदेश के अलग-अलग शहरों में टैलेंट हंट किया जाएगा और थिएटर से जुड़े कलाकारों को भी मौका दिया जाएगा। कोशिश उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के कलाकारों को फिल्म निर्माण से जोड़ने और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर देने की है।

Punjab Board Result 2026: री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन शुरू, छात्रों को मिला मौका

मोहाली. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा जुलाई 2026 में आयोजित की गई मैट्रिक (10वीं) और सीनियर सेकेंडरी (12वीं) की अनुपूरक परीक्षाओं (री-अपीयर/कंपार्टमेंट और अतिरिक्त/वोकेशनल विषय) का परिणाम घोषित किया जा चुका है। 12वीं कक्षा का परिणाम 25 अगस्त 2026 और 10वीं कक्षा का परिणाम 28 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया कि ​इन परीक्षाओं से संबंधित जो परीक्षार्थी अपने उत्तर-पुस्तिकाओं की री-चेकिंग (पुनः जांच) या री-मूल्यांकन (Re-evaluation) करवाना चाहते हैं, वे 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। ​मुख्य बातें: आवेदन की अवधि: 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक। आवेदन प्रक्रिया: फॉर्म और फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ​हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं: फॉर्म भरने और फीस का भुगतान करने के बाद परीक्षार्थी प्रिंटआउट अपने पास रिकॉर्ड के लिए संभाल कर रखें। इसे बोर्ड कार्यालय में जमा करवाने की आवश्यकता नहीं है। अधिक जानकारी: विस्तृत दिशा-निर्देशों और अन्य जानकारी के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.pseb.ac.in पर जाएं।

वन मित्रों की बकाया राशि पर मंत्री राव नरबीर सख्त, 15 सितंबर तक भुगतान का अल्टीमेटम

चंडीगढ़  हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने वन मित्रों की वित्तवर्ष 2025-26 और 2026-27 की बकाया मैनटेनेंस राशि का भुगतान 15 सितंबर तक हर हाल में करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिला वन अधिकारियों (डीएफओ) को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि भुगतान में किसी तरह की मनमानी या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वन मित्रों से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि पौधारोपण अभियान में वन मित्र विभाग और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने वन मित्रों को निजी भूमि के साथ वन विभाग की जमीन पर भी पौधे लगाने की अनुमति देने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी सुनिश्चित हो सके। बैठक में बताया गया कि वित्तवर्ष 2026-27 में 635 वन मित्रों ने करीब चार लाख पौधे लगाए हैं। इनमें से 2 लाख 14 हजार 992 पौधों का सत्यापन कर उनका विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। मंत्री ने वन मित्रों के पंजीकरण के लिए पोर्टल को 30 सितंबर 2026 तक खुला रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पहले से पंजीकृत वन मित्रों से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को भी वन मित्र बनाने पर जोर दिया गया। राव नरबीर सिंह ने वन विभाग की जमीन पर पौधारोपण बढ़ाने और लगाए गए पौधों की चार से पांच वर्ष तक देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्राण वायु देवता पेंशन योजना के तहत प्रदेश में करीब 5,300 पेड़ों की पहचान की गई है। इनकी देखभाल करने वालों को सालाना एक हजार रुपये पेंशन दी जाती है।

शिक्षकों के मार्गदर्शन और जनसेवा से ही संभव है, समाज व राष्ट्र का सर्वांगीण विकास- मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर  राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा आज नेवरा स्थित पी. एम  कन्या शाला में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व व कृतित्व को नमन करते हुए  कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी गढ़ते हैं। मस्तिष्क और बुद्धि के सर्वांगीण विकास के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक युग तक, जब भी समाज या राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां आई हैं, गुरुजनों ने ही सही दिशा दिखाने का कार्य किया है। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शेड, बाउंड्रीवॉल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं। गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार  शिक्षक सम्मान समारोह और अपने गुरुजनों से मुलाकात का स्मरण करते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवादों के निपटारे और सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका होती थी। वर्तमान तकनीकी युग में व्यस्तता भले ही बढ़ी है, लेकिन समाज को समय देकर ग्रामीण व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकता है।  रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू इस दौरानमंत्री  वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग की छवि सुधारने के लिए किए गए क्रांतिकारी फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मैन्युअल से ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करते समय हुई त्रुटियों के जल्द निपटारे हेतु अधिकारों का विस्तार कर तहसीलदारों को भी शक्तियां दी गई हैं। इसके अलावा द्वितीय अपील की सुनवाई का अधिकार अब कमिश्नर के स्थान पर सीधे जिला कलेक्टर को सौंपा गया है। अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए 5 डिसमिल से कम जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, जबकि फर्जी रजिस्ट्री रोकने हेतु तहसील कार्यालयों को पंजीयन कार्यालय से ऑनलाइन जोड़कर रजिस्ट्री के समय ओटीपी अनिवार्य किया गया है। ​अब रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी और किसानों को किसान पुस्तिका के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटकर इसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। भू-स्वामी अपने जीवनकाल में ही भूमि का बंटवारा कर सकते हैं। वहीं, भारतमाला जैसी बड़ी परियोजनाओं में भू-माफियाओं के अनुचित लाभ को रोकने के लिए अधिसूचना जारी होते ही संबंधित क्षेत्र की खरीद-बिक्री पर रोक का प्रावधान किया गया है, ताकि वास्तविक किसानों को पारदर्शी मुआवजा मिल सके। उच्च शिक्षा विभाग के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू कर शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है।  उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था हेतु 40 गांवों के लिए 2 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। साथ ही 100 गांवों के तालाबों में पक्के चबूतरों का निर्माण, 40 गांवों में महतारी सदन का निर्माण और सरस्वती शिशु मंदिर जैसी संस्थाओं के लिए भवन निर्माण स्वीकृत कराए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि जनसेवा के इन कार्यों में वरिष्ठों और गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव सर्वाेपरि रहेगा।

अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

रायपुर  शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।   उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की। सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर मुख्यमंत्री  साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि रायपुर नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक प्राप्त कर देश में छठा स्थान हासिल किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी तथा वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री  साय ने इस उपलब्धि के लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर के साथ स्वस्थ और बेहतर शहरी जीवन के लिए हरित क्षेत्र भी जरूरी हैं। उन्होंने वार्डों में उद्यान विकसित करने तथा जिन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या कम है, उनका चिन्हांकन कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को शीघ्र मिले आवास मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत आवासों, निर्माण की स्थिति, आबंटन और व्यवस्थापन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि आवासों के आवंटन एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र अपने पक्के आवास का लाभ मिल सके। चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसों से मजबूत होगा सार्वजनिक परिवहन मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना संबंधी कार्य मार्च 2027 से पहले पूर्ण कर ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री  साय ने संबंधित सभी निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। नागरिकों की शिकायतों का हो त्वरित और प्रभावी समाधान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण से संबंधित विषयों और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की भी जानकारी ली। उन्होंने नगरीय निकायों को विद्युत देयकों का नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।  मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संकलन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर संकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने … Read more