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बिहार में नए बालू घाटों की बंदोबस्ती का रास्ता साफ, Supplementary DSR से तेजी से शामिल होंगे नए निक्षेप

 पटना बिहार में बालू घाटों की बंदोबस्ती को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए जिलों में नई जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बालू घाटों की बंदोबस्ती पांच वर्ष के लिए करने की तैयारी है। नई डीएसआर में जिलों के बालू भंडार, खनन योग्य क्षेत्र और नए विकसित हुए बालू निक्षेपों (डिपाजिट) का आकलन किया जाएगा। मंत्री की बैठक में लिया गया फैसला खान व भूतत्व मंत्री डाॅ. प्रमोद कुमार के स्तर पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक डीएसआर में बदलाव को लेकर बड़ी सीमा थी। प्रावधान था जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में पांच वर्ष में केवल एक बार संशोधन किया जा सकता था। ऐसे में यदि डीएसआर तैयार होने के बाद किसी नदी में नया बालू निक्षेप सामने आता था, तो उसे बालू घाट के रूप में रिपोर्ट में शामिल करने का अवसर सीमित हो जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के साथ समन्वय किया। नए घाट की बंदोबस्ती की प्रक्रिया में आएगी तेजी विभाग के प्रयास के बाद केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर नए बालू निक्षेपों को सप्लीमेंट्री, एडेंडम डीएसआर के माध्यम से मूल जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल करने का प्रावधान कर दिया है। इससे अब पांच साल की अवधि के दौरान भी यदि किसी जिले में बालू का नया निक्षेप मिलता है, तो उसे अलग से सप्लीमेंट्री या एडेंडम डीएसआर के माध्यम से शामिल किया जा सकेगा। इसके बाद नियमानुसार उस स्थल को बालू घाट के रूप में विकसित कर बंदोबस्ती की प्रक्रिया में लाया जा सकेगा। इसी व्यवस्था के आधार पर नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।  

राजभवन पहुंची छत्तीसगढ़ी भाषा की आवाज, भाषाविदों ने राज्यपाल से आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की

रायपुर. लोक भवन में आज राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में चर्चा की। 2 करोड़ लोग करते हैं प्रयोग भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है। लगभग 2 करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं। जानिए राज्यपाल ने क्या कहा ? राज्यपाल डेका ने खुद पहल करते हुए इस विषय पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी के साथ सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया। भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है। इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक उपस्थित थीं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं तथा सुपोषित बच्चों के माता-पिता का सम्मान

लखनऊ  बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के सम्मान तथा कुपोषण से सुपोषित हुए बच्चों के माता-पिता एवं महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित महिलाओं के सम्मान के लिए आयोजित प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जनपद अयोध्या से किया गया। इसी क्रम में गाजीपुर के राइफल क्लब सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज विभाग तथा अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग,  ओमप्रकाश राजभर जी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी के संबोधन का सजीव प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री जी ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण एवं महिला सशक्तिकरण में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती सपना सिंह, विधायक जखनियां  बेदी राम सहितजनप्रतिनिधिगण, अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं एवं लाभार्थी उपस्थित रहे। कैबिनेट मंत्री  ओमप्रकाश राजभर जी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव और पात्र परिवारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं तथा कुपोषण से सुपोषित हुए बच्चों के माता-पिता को सम्मानित किया। इस अवसर पर बाबा, यश, ऊर्सा फातिमा, सरस्वती, लाडो एवं शिवम कुमारी सहित सुपोषित बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं कुसुम सिंह, मधुबाला, सीमा मौर्य, पुनीता कुशवाहा, सीमा यादव, अनीता देवी, लक्ष्मी देवी, आशिया खातून एवं शीला देवी सहित अन्य तथा मुख्य सेविकाओं मीना कुमारी, कंचन कुमारी एवं मंजू सिंह को सम्मानित किया गया। महिला कल्याण विभाग की स्पॉन्सरशिप योजना एवं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थी बच्चों पूनम वर्मा, तन्मय पांडे, पुष्पा पांडे, आशुतोष कुशवाहा एवं रुबिका सहित अन्य लाभार्थियों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान मंत्री जी द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई एवं नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन कराया गया। गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा चिकित्सकीय परामर्श के पालन के लिए जागरूक किया गया, जबकि छह माह की आयु के बाद बच्चों को मां के दूध के साथ पौष्टिक पूरक आहार देने के महत्व की जानकारी दी गई।  माताओं एवं अभिभावकों को बच्चों के पोषण, स्वच्छता, टीकाकरण एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि सुपोषण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक प्राथमिकता से पहुंचाने तथा जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास जारी रखने पर जोर दिया। सम्पर्क सूत्र: राजेश राय

पीपीपी मॉडल से बदलेगा यात्री परिवहन का स्वरूप

भोपाल मध्यप्रदेश में यात्री सुविधाओं को स्मार्ट, सुगम और सुरक्षित बेहतर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा एक बड़ी पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार और उद्योग जगत को एक साझा मंच पर लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में यात्री परिवहन विज़न समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा यह समिट 11 व 12 सितंबर 2026 को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में आयोजित की जाएगी, जो मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर केंद्रित होगी। इस समिट में निजी बस ऑपरेटर, नीति निर्माता, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे और प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मंथन करेंगे। समिट में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समिट का आयोजन मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा ईलेट्स टेक्नोमीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में अधिक कनेक्टेड, वित्तीय रूप से साध्य, डिजिटल रूप से सक्षम और नागरिक-केंद्रित यात्री परिवहन इकोसिस्टम के निर्माण पर चर्चा और साझेदारी को बढ़ावा देना है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न और राष्ट्रीय पहल (जैसे पीएम ई-बस सेवा) के अनुरूप सतत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो यात्री परिवहन को राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण घटक के रूप में मजबूत करने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मंच राज्य के मोबिलिटी एजेंडे को केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित न रखते हुए, सरकारी निर्णयकर्ताओं और कार्यान्वयन में सहयोग करने वाली संस्थाओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद और साझेदारी को बढ़ावा देगा। मध्यप्रदेश की यात्री परिवहन परिकल्पना रहेगी चर्चा के केंद्र में मध्यप्रदेश की यात्री परिवहन परिकल्पना और भविष्य की मोबिलिटी व्यवस्था यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेगी। समिट में प्रदेश में यात्री परिवहन को आधुनिक, सुलभ और व्यापक बनाने के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह यात्री परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाली मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख पहल है। समिट में प्रदेश में आधुनिक और भविष्य-केंद्रित मोबिलिटी व्यवस्था को गति देने वाले सात प्रमुख परिणामों की प्राप्ति की दिशा में काम करना सुनिश्चित किया जाएगा। इनमें मोबिलिटी विज़न 2030 रोडमैप, परिवहन क्षेत्र में पीपीपी को गति देना, डिजिटल-फर्स्ट मोबिलिटी फ्रेमवर्क, स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा, पायलट एवं निवेश अवसर और सरकार-उद्योग सहयोग को मजबूत करना शामिल है। रोजगार के अवसरों पर होगी चर्चा यात्री परिवहन समिट में यात्री परिवहन क्षेत्र में होने वाले नवाचार और निवेश से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा होगी। सार्वजनिक परिवहन को अधिक सक्षम बनाने के साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे। 8 सत्रों में यात्री परिवहन के भविष्य पर होगा मंथन परिवहन समिट में 8 सत्र होंगे। इन सत्रों के माध्यम से यात्री परिवहन को सुगम, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषणमुक्त बनाने, एमपी मोबिलिटी विजन-2030 के तहत PPP मॉडल से निवेश, रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने, वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बस संचालन, यात्री सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी, स्वच्छ ईंधन, एकीकृत टिकटिंग, स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली विषयों पर चर्चा होगी। समग्र और आधुनिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करना उद्देश्य मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य प्रदेश में एक समग्र और आधुनिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करना है। इसके अंतर्गत बस निर्माण, इलेक्ट्रिक एवं हाइड्रोजन मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई एवं एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं विकसित होंगी। इस समिट के माध्यम से प्रदेश में यात्री परिवहन के भविष्य की दिशा तय करने के साथ निवेश, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। देश के प्रमुख संस्थान समिट में होंगे शामिल समिट में ईकेए मोबिलिटी, टाटा मोटर्स, ग्रीनसेल मोबिलिटी, वोल्वो-आयशर प्राइवेट लिमिटेड, स्विच मोबिलिटी (हिंदुजा ग्रुप), एयरो ईगल ऑटोमोबाइल, यश टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, चलो मोबिलिटी, एमनेक्स इन्फोटेक्नोलॉजीज, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, थिंक गैस जैसी प्रमुख कंपनियां सहभागिता करेंगी। इसके अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों, थिंक टैंक एवं कंसल्टेंसी एजेंसियों के परिवहन विशेषज्ञ भी समिट में अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। इनमें BITS पिलानी, CEPT अहमदाबाद, WII इंडिया, ICCT, KPMG और DIMTS प्रमुख हैं।  

UP में बदली औद्योगिक तस्वीर, योगी सरकार की नीतियों से निवेशकों का बढ़ा विश्वास

योगी सरकार की नीतियों से यूपी में उद्योगों का बढ़ा भरोसा, बदली औद्योगिक तस्वीर कानून-व्यवस्था, निर्बाध बिजली और बेहतर कनेक्टिविटी ने निवेश को दी रफ्तार, टेक्सटाइल सेक्टर में रोजगार के नए द्वार करोड़ों का निवेश, हजारों लोगों को रोजगार; उद्यमियों ने योगी सरकार के प्रयासों को सराहा योजनाओं की जानकारी से लेकर निवेश तक, अधिकारियों का सहयोग: उद्यमी लखनऊ उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की तस्वीर तेजी से बदली है। बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्बाध बिजली आपूर्ति, बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी के साथ उद्योगों को मिल रही सरकारी सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। मंगलवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शुरू हुए दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 में उद्योगपतियों ने प्रदेश में बदले कारोबारी माहौल की खुलकर सराहना की। योजनाओं की जानकारी से लेकर निवेश तक, अधिकारियों का सहयोग बरेली के राम कुमार एग्रो के राहुल अग्रवाल ने कहा कि अधिकारियों की ओर से उद्योगपतियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ लगातार मार्गदर्शन और सहयोग किया जा रहा है। प्रदेश में नई इंडस्ट्री स्थापित हो रही हैं और कारोबारी अब निडर होकर निवेश करने का माहौल महसूस कर रहे हैं। उनकी फैक्ट्री में करीब 500 लोगों को रोजगार मिलने की जानकारी देते हुए उन्होंने बिजली आपूर्ति, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार को उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बताया। सब्सिडी और सरकारी सहायता से विस्तार को मिला प्रोत्साहन गाजियाबाद की एफको एक्सपोर्ट्स की आरुषि सिंघल ने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। सरकारी सहयोग से उद्योगों को विस्तार का प्रोत्साहन मिल रहा है। उनकी इंडस्ट्री में करीब 800 लोग कार्यरत हैं और आने वाले समय में रोजगार बढ़ाने की योजना है। उन्होंने टीयूएफ योजना के तहत करीब 25 प्रतिशत सरकारी सहायता और एक्सपोर्ट लाइसेंस सहित अन्य सब्सिडी का भी उल्लेख किया। टेक्सटाइल नीति ने निवेशकों को दिया मजबूत आधार टांडा स्थित पार्थ थ्रेड प्राइवेट लिमिटेड के अम्बिका प्रसाद पांडे ने टेक्सटाइल सेक्टर के लिए लागू नीतियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि कंपनी को 35 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी और 60 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी का लाभ मिला है। करीब 150 करोड़ रुपये के निवेश और कई हजार लोगों को रोजगार देने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को कुशल कारीगर भी उपलब्ध हो रहे हैं। कानून-व्यवस्था और कनेक्टिविटी बनी निवेश की बड़ी ताकत रामपुर के जीएसएल स्पिनर्स के के.के. जैन ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बेहतर कानून-व्यवस्था, लगातार बिजली, सिंगल पोर्टल से अप्रूवल और मजबूत परिवहन व्यवस्था ने उद्योग स्थापित करना आसान बनाया है। कंपनी करीब 250 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। किसी भी निवेशक के लिए कानून-व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है और इस दिशा में प्रदेश में काफी सुधार हुआ है। योगी सरकार की औद्योगिक नीतियां केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सतर्कता, साहस और संवेदनशीलता की मिसाल बनी महिला पुलिसकर्मी

भोपाल  देशभक्ति–जनसेवाके संकल्प के साथ मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी ड्यूटी के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आमजन की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसी का प्रेरणादायी उदाहरण DCP ज़ोन-2 कार्यालय में पदस्थ महिला पुलिसकर्मीआरक्षक सुश्री निकिता जोशीने प्रस्तुत किया, जिनकी सजगता और साहस से एक 6 वर्षीय मासूम बालक की जान बच सकी। घटना उस समय की है जब निकिता जोशी ड्यूटी समाप्त कर शाम को अपने घर पहुंची थीं। इसी दौरान घर के सामने स्थित मंदिर परिसर से बच्चों के घबराए हुए चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वे तत्काल मंदिर परिसर की ओर दौड़ीं। मंदिर के पीछे झाड़ियों में उन्होंने 6 वर्षीय बालक को अचेत अवस्था में पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर बालक के हाथ में बिजली का तार दिखाई दिया। बिना समय गंवाए निकिता जोशी ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बालक का हाथ बिजली के तार से अलग किया। तार हटते ही बालक ने आंखें खोलीं। बालक की स्थिति को देखते हुए निकिता जोशी ने उसे तत्काल अपनी गोद में उठाया और परिजनों की सहायता से बिना विलंब अस्पताल पहुंचाया। समय पर उपचार मिलने से बालक की जान बच गई। बालक के परिजनों ने महिला पुलिसकर्मी कीतत्परता, साहस और मानवीय संवेदनशीलताके लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।  

बाढ़ से यूपी के कई जिले बेहाल, 100 से ज्यादा गांवों में पानी; हजारों परिवार प्रभावित

लखनऊ  प्रदेश में नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। पूर्वांचल के कई जिलों में गंगा, सरयू, घाघरा और शारदा खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि वाराणसी और प्रयागराज में नदियों का पानी धीरे-धीरे घटने से राहत के संकेत मिले हैं। बावजूद इसके बाढ़ग्रस्त इलाकों में जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। कई गांवों में पानी घुसने से संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं और हजारों परिवार प्रभावित हैं। बारिश और जलभराव के बीच विभिन्न जिलों में दीवार या कच्चे मकान गिरने और नदियों और गड्ढों में डूबने से नौ लोगों की मौत हुई। बलिया में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 57.615 मीटर से 2.05 मीटर ऊपर 59.62 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि गंगा में घटाव जारी है। सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 64.010 मीटर से करीब 55 सेंटीमीटर ऊपर है। मऊ के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा और नेपाल के बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। गाजीपुर में गंगा का पानी घट रहा है और सोमवार शाम जलस्तर खतरे के निशान से 13.5 सेंटीमीटर नीचे रहा। वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 70 सेंटीमीटर नीचे आ गया। फर्रुखाबाद में गंगा की बाढ़ से करीब 80 हजार आबादी प्रभावित सोमवार सुबह 69.62 मीटर से शाम छह बजे 69.56 मीटर पर पहुंच गया। घाटों की सीढ़ियां दिखने लगी हैं, लेकिन मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह प्रभावित है। गंगा आरती अब भी घाटों की छतों से हो रही है। नौका संचालन पर रोक जारी है। प्रयागराज में भी गंगा-यमुना का जलस्तर घट रहा है। फर्रुखाबाद में गंगा की बाढ़ से 102 गांवों की करीब 80 हजार आबादी प्रभावित है। 77 गांवों में पानी पहुंचने से 75 परिषदीय विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। समैचीपुर चितार में कटान से पांच मकान और तीन झोपड़ियां गिर गईं। आजमगढ़ में बाढ़ के दबाव से बेलहिया संपर्क मार्ग टूट गया। जालौन में करीब 60 गांवों पर बाढ़ का खतरा है। वहीं, लखीमपुर के पलिया में शारदा खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बनबसा से 1.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। सीतापुर में बैराजों से करीब 4.95 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रेउसा, रामपुर मथुरा और बेहटा क्षेत्र के 274 गांवों में संकट बना हुआ है। बहराइच में घाघरा खतरे के निशान से 42 सेंटीमीटर ऊपर है और 15 गांव प्रभावित हैं। बाराबंकी में 60 गांव तथा गोंडा में 20 गांवों के करीब 200 घरों में पानी घुस गया है। सीतापुर में दीवार गिरने से महिला की मौत अयोध्या में सरयू खतरे के निशान से 31 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। उधर, बांदा में नाले में डूबने से युवक की मौत हो गई, जबकि महोबा में दीवार गिरने से घायल वृद्ध ने दम तोड़ दिया। अयोध्या में पीडब्ल्यूडी कार्यालय की बाउंड्रीवाल गिरने से मोटरसाइकिल मिस्त्री रविंदर गौड़ की भी मौत हो गई। सीतापुर में दीवार गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि सुलतानपुर में रविवार आधी रात जर्जर खपरैल का कच्चा मकान ढह गया। इसके मलबे में मां व बेटे दब गए, जिसमें महिला की जान चली गई। इटावा में शौचालय की जमीन धंसने से करीब 60 फीट गहरा कुआं निकल आया, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। बरेली मंडल के शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक की मरम्मत के दौरान दो वर्ष पहले खोदे गए गड्ढे में डूबने से किशोर विनय व करन तथा बरेली में बालक भास्कर की उफनाते नाले और किसान राजवीर की रामगंगा में डूबने से जान चली गई। आंवला में अरिल नदी में बाइक सवार तीन युवक बह गए। पीलीभीत में नेपाल सीमावर्ती नौहल्हा नकटाह में नेपाली युवती सृष्टि मोबाइल फोन से रील बनाते समय फिसलकर शारदा में बह गई। उनकी तलाश की जा रही है। बरेली में एक दर्जन से ज्यादा मकान गिर गए हैं। डीएम ने बरेली के आठवीं तक के स्कूल बुधवार तक बंद कर दिए हैं।

मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में होगा नवाचार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स और नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, देश के मध्य में स्थित है और यहां का सड़क सम्पर्क, रेल तथा एयर कनेक्टिविटी देश के सभी स्थानों से सुगम है। देश के किसी भी कोने में मध्यप्रदेश से अपने उत्पाद पहुंचाना सरल और त्वरित है। प्रदेश में उपलब्ध बेहतर औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा तथा स्किल्ड मैनपॉवर के कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की दृष्टि से हर तरह की संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग) के तीसरे दिन 8 सितंबर को यूएई के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग की। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के बिजनेस-फिलैंथ्रॉपी के लिए स्पेशल एनवॉय और क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  बद्र जाफर, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रिजवान सूमार, राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा, जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर  सनी वर्की, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ  सिद्धार्थ बालाचंद्रन, शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ  श्याम कपूर, वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख  अमित साइचर तथा सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष  एल.टी. पगरानी से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को अगले वर्ष होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 का निमंत्रण भी दिया। तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप को राज्य सरकार कर रही है प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  बद्र जाफर को प्रदेश के प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स के लिए वेयर हाऊसिंग, लॉजिस्टिक्स आदि के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप के क्षेत्र में निवेश को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।  जाफर ने शहरी अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में दीर्घ अवधि निवेश के संबंध में रूचि प्रकट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा  जाफर के बीच मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को  जाफर ने बताया कि क्रेसेंट ग्रुप ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना और दीर्घकालिक निवेश में रुचि रखने वाला बहुआयामी व्यापारिक समूह है। पेट्रोलियम और उद्यमिता क्रेसेंट के प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं। कंपनी का मुख्यालय शारजाह में है। पोवारखेड़ा अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में होगा विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रिजवान सूमार के साथ चर्चा में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहित कई विषयों पर बातचीत की। उल्लेखनीय है कि डीपी वर्ल्ड की इकाईयां मध्यप्रदेश में पहले से ही संचालित है तथा वह प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  सूमार ने बताया कि डीपी वर्ल्ड कंपनी एंड-टू-एंड सप्लाई चेन और व्यापार समाधानों की एकीकृत वैश्विक प्रदाता है। यह दुबई सरकार की 100% स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी भारत सहित 80 देशों में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्लस्टरों को सेवा देने वाली मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं से व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कुशल रेल-आधारित माल ढुलाई के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्ट का समय कम करते हुए किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों के लिए कार्गो समेकन, मूल्य संवर्धन और निर्यात सहायता प्रदान करने से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और एग्रीकल्चरल मशीनरी पर फोकस किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस होंगे स्थापित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर  सनी वर्की से मुलाकात के दौरान उन्हें प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के नवाचारों और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जेम्स एजुकेशन कंपनी स्कूल शिक्षा, एजुकेशनल मैनेजमेंट और एज्युकेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती है। जेम्स एजुकेशन कंपनी ने मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और विकासशील शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रूचि प्रदर्शित की। इन स्कूलों में विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। कंपनी स्थानीय जरूरतों और भविष्य की लर्निंग आवश्यकताओं के अनुसार नेशनल और इंटरनेशनल करिकुलम को लागू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को  सनी वर्की ने बताया कि उनकी कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। कंपनी मिडिल ईस्ट, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में काम कर रही है। कंपनी का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पर है। इसका मुख्यालय दुबई में है। ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन प्रदेश में निवेश का इच्छुक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ  सिद्धार्थ बालाचंद्रन से वन-टू-वन मीटिंग की।  बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी सहित कई सेक्टर में निवेश की इच्छा प्रकट की। शराफ ग्रुप मध्यप्रदेश में संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए इच्छुक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ  श्याम कपूर से मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300 से 600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश के लिए इच्छुक है। बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रेसिडेंट  कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है जो इनलैंड … Read more

टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन

भोपाल।  टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप ने मंच पर साकार किया। इसके अलावा कार्यक्रम में रंगसंवाद पत्रिका का विमोचन भी किया गया। वहीं मंच का संचालन अविजित सोलंकी ने किया। आयोजन टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, विश्वरंग फाउंडेशन और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।  पहली प्रस्तुति ‘उनके हिस्से का प्रेम’ में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही। दूसरी प्रस्तुति ‘लेखक बनाने वाले’ में लेखकीय महत्वाकांक्षा और उसके बाजारू दोहन पर व्यंग्य किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहां पहुंचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहां से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है। दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही। कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन विरल साहित्यकारों में हैं, जो साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—और चार उपन्यास—‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ तथा ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है तथा उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता प्राप्त देवेन्द्र राज अंकुर देशभर की अनेक व्यावसायिक एवं शौकिया नाट्य मंडलियों के साथ निर्देशन कर चुके हैं। ‘संभव’ ग्रुप के संस्थापक सदस्य और ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता अंकुर अध्यापक, कैंप निर्देशक और नाट्य निर्देशक के रूप में देशभर की कार्यशालाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया है और रंगमंच विषयक लेखन भी किया है। रंग आलोचना पर उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। टैगोर फेलोशिप प्राप्त प्रो. अंकुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक रह चुके हैं। रंगमंच के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मंच पर अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा एवं सहज हरजाई  

शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि

भोपाल  शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखंड द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समारोह विश्वविद्यालय के गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में चौबे के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपाधि उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक है। शिक्षा और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का योगदान संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना तथा शिक्षा और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाना था। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया। एनआईटी, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियर चौबे ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय वैशाली, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय खंडवा, एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का विकास हुआ। इन संस्थानों में शिक्षा को कौशल विकास, शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योगोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। हिंदी में विज्ञान संचार के अग्रणी हस्ताक्षर संतोष चौबे की पहचान एक प्रतिष्ठित विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के रूप में भी रही है। उनकी वर्ष 1986 में प्रकाशित पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ ने हिंदी में तकनीकी शिक्षा और कंप्यूटर जागरूकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद को मजबूत करते हुए कविता, कथा, उपन्यास और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके चार उपन्यास ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’ प्रकाशित हुए हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है और उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय की मानद उपाधि के लिए तैयार प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक और वैज्ञानिक लेखन के साथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में संतोष चौबे के योगदान को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।