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छात्रों के समर्थन में BJP का प्रदर्शन, JSSC-CGL पेपर लीक की CBI जांच और मुकदमे वापसी की मांग

रांची JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और छात्र आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर झारखंड भाजपा ने चार दिवसीय राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया. आंदोलन के पहले दिन 8 अगस्त को राजधानी रांची में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय पहुंचे और घेराव किया. इस दौरान भाजपा की ओर से दो सूत्री मांगों को लेकर डीसी को ज्ञापन सौंपा गया. मांगों के समर्थन में कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठे. छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भाजपा की पहली मांग है कि छात्र आंदोलन के दौरान 300 से अधिक छात्रों पर दर्ज एफआइआर वापस लिये जाए. दूसरी मांग JSSC-CGL परीक्षा में पेपर लीक की जांच सीआइडी के बजाय सीबीआइ से कराने की है. भाजपा नेताओं का कहना है कि छात्रों के आंदोलन के बाद भी सरकार की ओर से उनकी मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं की गयी है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा ने पहले भी चुनाव आयोग से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था और 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में भाजपा का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. सीपी सिंह बोले- जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन होगा रांची विधायक सीपी सिंह ने कहा कि बुधवार का प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है. यदि छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिये गये, तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जायेगा. भाजपा लंबे समय से JSSC-CGL मामले की सीबीआइ जांच की मांग कर रही है. पार्टी का आरोप है कि सीआइडी जांच के जरिए सरकार के कुछ प्रमुख चेहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. भाजपा नेताओं का कहना है कि सीबीआइ जांच होने पर मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है और दोषियों तक पहुंचना संभव होगा. आदित्य साहू बोले- छात्रों के अधिकार से हुआ खिलवाड़ मीडिया से बातचीत में आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि झारखंड के छात्रों के साथ अन्याय हुआ है. उन्होंने कहा कि जिन नौकरियों पर झारखंड के छात्रों का अधिकार होना चाहिए था, उनमें बाहर के छात्रों को मौका दिया गया. उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि खोरठा और नागपुरी जैसी भाषाओं की परीक्षा में उन छात्रों का चयन हुआ, जो इन भाषाओं को जानते तक नहीं हैं. जबकि इन भाषाओं को बोलने वाले झारखंड के कई छात्र परीक्षा में सफल नहीं हो सके. आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि इससे परीक्षा में गड़बड़ी का स्तर समझा जा सकता है और झारखंड के छात्रों के अधिकार के साथ खिलवाड़ किया गया है. आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में भाजपा आदित्य साहू ने कहा कि छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और मर्यादित तरीके से आंदोलन किया. उनके अनुसार, आंदोलन के दौरान छात्रों ने किसी नेता को गाली नहीं दी और न ही अभद्र टिप्पणी की. इसके बावजूद छात्रों पर मुकदमे दर्ज किये गये हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को डराने के लिए मुकदमे किये जा रहे हैं. आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा शुरू से छात्रों के साथ खड़ी है और आगे भी उनके साथ रहेगी. छात्रों के साथ अन्याय या अत्याचार हुआ, तो पार्टी उसके खिलाफ आंदोलन करती रहेगी.  

22% कमीशन पर भड़के मिठाई कारोबारी, जयपुर में जोमैटो से किनारा

जयपुर जोमैटो के कमीशन व्यावसायिक शर्तों को लेकर जयपुर के मिठाई विक्रेताओं का विवाद अब बहिष्कार तक पहुंच गया है। श्री हलवाई समिति के आह्वान पर शहर की करीब 60 मिठाई दुकानों और आउटलेट्स ने 7 सितंबर से जोमैटो पर अपने स्टोर अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं। समिति का कहना है कि पिछले करीब एक माह से जोमैटो से कई बार पत्राचार के बावजूद कंपनी की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया। समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र रावत के अनुसार, जोमैटो ने वर्ष 2016 में जयपुर में लॉजिस्टिक्स पार्टनर के रूप में 0 फीसदी कमीशन पर सेवाएं शुरू की थीं। अब मिठाई विक्रेताओं से 22 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा है। समिति का तर्क है कि मिठाई कारोबार में कीमतों पर प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण इतना कमीशन दुकानदारों के लिए आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है। न बैठक न जवाब 7 अगस्त को जोमैटो ने बड़े दुकानदारों के साथ बैठक कर समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बाद समिति ने ईमेल के जरिए कमीशन कम करने की मांग रखी और 31 अगस्त तक जवाब व बैठक का अनुरोध किया, लेकिन कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद समिति ने सामूहिक बहिष्कार का फैसला किया। इन बड़े आउटलेटस ने किया किनारा… कान्हा, आनंद जी स्वीट्स, एस.एस. सोढ़ानी, रिद्धि सिद्धि, एलएमबी, बीएमबी, भगत मिष्ठान भंडार सहित कई प्रमुख प्रतिष्ठान बहिष्कार में शामिल हैं। समिति अब भी बातचीत से समाधान के लिए तैयार है। नया नहीं है विवाद फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट कारोबारियों के बीच कमीशन, डिस्काउंट, विज्ञापन शुल्क और भुगतान कटौती को लेकर विवाद नया नहीं है। 2022 में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जोमैटो और स्विगी की कमीशन व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उस समय आरोप लगाया था कि प्लेटफॉर्म की कमीशन दरें कई मामलों में 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच रही थीं। मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) तक भी पहुंचा। जोमैटो के बारे में जानिए जोमैटो एक प्रमुख भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी और रेस्तरां डिस्कवरी प्लेटफॉर्म है। इसकी स्थापना 2008 में दीपिंदर गोयल और पंकज चड्डा ने फूडीबे नाम से की थी, जिसे बाद में जोमैटो कर दिया गया। मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में है। यह यूजर्स को घर बैठे रेस्तरां से खाना ऑर्डर करने, मेनू देखने, रिव्यू पढ़ने और टेबुल बुक करने की सुविधा देता है। मूल कंपनी अब इटरनल लिमिटेड के नाम से जानी जाती है, जिसके तहत ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स सेवा भी चलती है। जोमैटो मुख्य रूप से भारत में सक्रिय है और देश के सबसे बड़े फूड-टेक ब्रांड्स में से एक है।

प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर बिहार में एक माह के कार्यक्रम

पटना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक बिहार में एक माह का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस अभियान में सेवा, समाज के सभी वर्गों के कल्याण और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया जाएगा। इसके तहत पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए पार्टी ‘सेवा सेतु अभियान’ चलाएगी। 25 साल के सफर पर महीनेभर होंगे कार्यक्रम सरावगी ने कहा कि सात अक्टूबर 2001 को नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। सात अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होंगे। इसी उपलब्धि को लेकर पूरे बिहार में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रेसवार्ता में बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री एवं कार्यक्रम प्रभारी संजय सिंह टाइगर भी मौजूद रहे 17 सितंबर को घर-घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगी। शाम सात बजे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थी अपने घरों में दीप जलाकर प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करेंगे। इसके बाद 23 सितंबर से दो अक्टूबर तक ‘सेवा चित्र’ कार्यक्रम के तहत स्कूलों और महाविद्यालयों में चित्रकला व भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार भी दिए जाएंगे। नाटक के जरिए जनता तक पहुंचेगी ‘सेवा की कहानी’ ‘सेवा संस्मरण’ कार्यक्रम के तहत 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक गांवों और शहरों में संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। इनके माध्यम से प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सेवा कार्यों को लोगों तक पहुंचाने की योजना है। प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ‘प्रधानमंत्री की जनसेवा’, ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे विषयों को केंद्र में रखा जाएगा। अंतिम दिन जुटेगा सवा लाख जनप्रतिनिधियों का महाकुंभ सरावगी ने बताया कि 17 अक्टूबर को ‘जनसेवक महाकुंभ : पंचायत से पार्लियामेंट तक’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पंचायत से लेकर संसद तक के करीब सवा लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना है। कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् का सामूहिक गायन होगा। भाजपा ने दावा किया कि इस आयोजन में गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड्स की टीम भी मौजूद रहेगी।

किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।  सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।  इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से  धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।   महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार  करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।   बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। ‘नियद नेल्ला नार 2.0‘ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान‘ के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में  लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना‘ तैयार की गई है।   बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है।  उद्योग के क्षेत्र में राज्य में निवेश लाने के साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।                           —————————–  

बिहार में बाढ़ से हाहाकार, 34 लाख लोग प्रभावित; हाजीपुर में नाव पलटी, दो लापता

पटना  बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 13 जिलों की 34 लाख से अधिक आबादी बाढ़ और कटाव से प्रभावित हुई है। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में मंगलवार को गंगा नदी ने फ्लड मार्क को क्रॉस कर दिया। इससे निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा सहित कई नदियां कई स्थानों पर खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं। बिहार में बाढ़ से पटना, भागलपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत 13 जिले प्रभावित हैं। इन जिलों की 480 ग्राम पंचायतों में रहने वाले लगभग 34.31 लाख लोग प्रभावित हैं। सोमवार को यह आंकड़ा 29 लाख था। मंगलवार को नए इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया, जिससे चिंता बढ़ गई है। हाजीपुर में नाव पलटी, दो लोग लापता हाजीपुर के तेरसिया में बाढ़ के पानी में महात्मा गांधी सेतु के नीचे पाया नंबर 9 के पास मंगलवार को नाव पलट गई। नाव में कुल 11 लोग सवार थे। गंगा ब्रिज के पास यह हादसा हुआ। नाव सवार 9 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, दो लोगों के डूबने की सूचना है। एसडीआरएफ की टीम उनकी तलाश कर रही है। वहीं, दूसरी ओर नाव पलटने के बाद बचाए गए एक व्यक्ति को सांप ने काट लिया। हाजीपुर में नाव पलटने के बाद लापता लोगों की तलाश करती एसडीआरएफ टीम नदियां उफान पर डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक नदी, बलतारा और कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। भागलपुर में भी नाव पलटी भागलपुर जिले के खरीक राघोपुर के बाढ़ प्रभावित इलाके में मंगलवार सुबह एक छोटी नाव पलट गई। प्रशासन के अनुसार एसडीआरएफ के जवानों ने नाव पर सवार सभी 10 लोगों को बचा लिया। बाढ़ में राहत कार्य सरकार के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में कुल 432 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, 14 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं, जहां आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल और अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था की गई है। बाढ़ पीड़ितों को अब तक लगभग 1.29 लाख पॉलिथीन शीट और 22900 सूखे राशन के पैकेट बांटे जा चुके हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 3142 क्विंटल पशु चारा भी वितरित किया जा चुका है। जलजमाव वाली जगहों पर आवागमन के लिए 1832 नावें चलाई जा रही है। बाढ़ को देखते हुए बिहार के विभिन्न जिलों में बचाव एवं राहत कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात की गई हैं। गंडक और कोसी बराज से डिस्चार्ज गंडक बराज पर मंगलवार सुबह 10 बजे 104400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जिसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है। इस साल अब तक का सबसे अधिक डिस्चार्ज 14 जुलाई को 224000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। दूसरी ओर, कोसी बराज पर सुबह 10 बजे डिस्चार्ज गिरावट के क्रम में 169985 क्यूसेक था। इस साल अब तक इसका सर्वाधिक डिस्चार्ज 20 जुलाई को 255425 क्यूसेक रहा था। लालू यादव ने बाढ़ पर एनडीए सरकार को घेरा विपक्षी दल आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने बिहार की बाढ़ को लेकर एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया फेसबुक पर संसद का पुराना वीडियो साझा करते हुए उन्होंने कहा हमने बिहार में राहत कार्य के लिए हमने यूपीए सरकार से लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के दौरान बिहार के मंत्रियों ने राज्य को कुछ नहीं दिलाया। बस राज्य की हमारी सरकार बदनाम करने या काम किया। उन्होंने कहा कि आज जब बाढ़ के दौरान बिहार का खजाना खाली है तो हमें सड़क से संसद तक का अपना संघर्ष याद आ रहा है।

सेवा अवधि से तय होगी वरिष्ठता में प्राथमिकता, क्लर्क-जूनियर असिस्टेंट को लेकर CAT का अहम फैसला

चंडीगढ़. केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने क्लर्कों और जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। कैट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि कॉमन कैडर में भर्ती क्लर्कों और विभागीय कैडर से कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की जाए। वरिष्ठता तय करते समय कैडर में की गई कुल सेवा अवधि को आधार बनाया जाएगा। कैट ने प्रशासन की ओर से 23 और 24 सितंबर 2021 को जारी किए गए उन आदेशों को रद कर दिया है, जिनके आधार पर कॉमन कैडर के क्लर्कों की अलग वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही थी। साथ ही 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कर्मचारियों को कॉमन कैडर में शामिल होने का दिया गया विकल्प बहाल कर दिया गया है। प्रशासन को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 1993 से 2014 में भर्ती कर्मचारियों ने उठाया था मामला यह मामला विकास शर्मा समेत 23 कर्मचारियों की ओर से दायर OA नंबर 1336/2021 से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं में जीएमसीएच-32 समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत जूनियर असिस्टेंट और क्लर्क शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना था कि वे 1993 से 2014 के बीच विभागीय कैडर में भर्ती हुए, जबकि कॉमन कैडर के तहत शामिल कई कर्मचारी 2016 से 2018 के बीच नियुक्त हुए। इसके बावजूद अलग वरिष्ठता सूची बनने से बाद में भर्ती हुए कर्मचारी पदोन्नति में उनसे आगे निकल सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने 23 सितंबर 2021 के मेमो और 24 सितंबर 2021 के सर्कुलर को चुनौती देते हुए सभी संबंधित क्लर्कों की एक समान वरिष्ठता सूची बनाने की मांग की थी। 2015 में बना था कॉमन कैडर कैट ने अपने फैसले में कहा कि 2015 से पहले विभिन्न विभागों में क्लर्कों के लिए अलग-अलग भर्ती नियम थे। प्रशासन ने 29 मई 2015 को ग्रुप-सी क्लर्क और स्टेनो-टाइपिस्ट के लिए कॉमन कैडर भर्ती नियम अधिसूचित किए। इसके बाद विभागीय भर्ती नियमों को समाप्त कर मिनिस्टीरियल पदों को कॉमन कैडर में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 23 सितंबर 19 को सीनियर असिस्टेंट और सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के लिए कॉमन भर्ती नियम अधिसूचित हुए। इन नियमों में पांच साल की सेवा पूरी करने वाले क्लर्क और जूनियर असिस्टेंट को सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना गया। अलग-अलग प्रमोशन चैनल पर कैट ने जताई आपत्ति अधिकरण ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में एक तरफ 2016 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों को अपने मूल विभाग में पदोन्नति का इंतजार करना पड़ता है, जबकि 2016 के बाद कॉमन कैडर में भर्ती कर्मचारियों के लिए कॉमन कैडर में पदोन्नति का रास्ता खुला है। इससे एक ही तरह का काम करने वाले कर्मचारियों के बीच पदोन्नति के अवसरों में असमानता पैदा हो रही है। कैट ने स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए पात्रता, वेतन और पदोन्नति के अवसरों में समानता होनी चाहिए। हालांकि, अधिकरण ने यह भी माना कि इस स्तर पर सभी विभागों के कर्मचारियों की एक ही समेकित वरिष्ठता सूची बनाना प्रशासनिक रूप से व्यावहारिक नहीं होगा। विकल्प देने वालों की सेवा अवधि से तय होगी वरिष्ठता कैट ने निर्देश दिया कि 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों को भी सूची में शामिल किया जाए। कॉमन कैडर में सीधे भर्ती कर्मचारियों और विभागीय कैडर से विकल्प के आधार पर शामिल कर्मचारियों के बीच इंटर-से वरिष्ठता उनकी कुल सेवा अवधि के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि, जो कर्मचारी विकल्प देने के बाद इस मामले के लंबित रहने के दौरान अपने मूल विभाग में नोट-II के तहत पदोन्नत हो चुके हैं, उन्हें कॉमन कैडर की नई वरिष्ठता सूची से बाहर रखा जाएगा। अधिकरण ने यह भी कहा कि खाली पदों को नियमित रूप से कॉमन कैडर में स्थानांतरित करने के बजाय प्रशासन को उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए, ताकि विभागीय स्तर पर पदोन्नति की संभावना रखने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित न हों। न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर और प्रशासनिक सदस्य रश्मि सक्सेना साहनी की पीठ ने ओए को स्वीकार करते हुए प्रशासन को तीन महीने में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामले में किसी प्रकार की लागत नहीं लगाई गई है।

छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव 2026 की तैयारी तेज, कांग्रेस ने पर्यवेक्षक-सह पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ गई है. कांग्रेस ने नगर निगम से लेकर पंचायत तक पर्यवेक्षक और सह-पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. सभी पर्यवेक्षकों को तत्काल प्रभाव से प्रभार क्षेत्र में पहुंचकर चुनाव तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए गए हैं. नगर निगम में इन्हें मिली जिम्मादारी – बीरगांव – पर्यवेक्षक – डॉ. शिवकुमार डहरिया, सह-पर्यवेक्षक – मोतीलाल देवांगन और लेखराम साहू. भिलाई – पर्यवेक्षक – धनेंद्र साहू, सह-पर्यवेक्षक – दीपक दुबे. रिसाली – पर्यवेक्षक – मोहन मरकाम, सह-पर्यवेक्षक – कन्हैया अग्रवाल. भिलाई चरोदा – पर्यवेक्षक – विकास उपाध्याय, सह-पर्यवेक्षक – राजेन्द्र साहू. नगर पालिकाओं में पर्यवेक्षकों का जिम्मा – बैकुंठपुर – राजेन्द्र सिंह शिवपुर चरचा – प्रशांत मिश्रा सारंगढ़ – चातुरी नंद जामुल – प्रमोद दुबे खैरागढ़ – छन्नी साहू प्रेमनगर – भानुप्रताप सिंह मारो – सुनील महेश्वरी नरहरपुर – आनंद पवार कोन्टा – अवधेश गौतम भैरमगढ़ – रेखचंद जैन भोपालपटनम – सततार अली

CM योगी ने अयोध्या से की बड़ी घोषणा, कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के परिवार को हर साल पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को अब 12 हजार, सहायिकाओं को छह हजार मानदेय   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या से की बड़ी घोषणा, कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के परिवार को हर साल पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज   दो की जगह अब मिलेंगी तीन साड़ियां, स्मार्टफोन से रियल टाइम डाटा से जुड़ेंगे आंगनबाड़ी केंद्र   मुख्यमंत्री बोले- पहले मासूम बच्चों के पोषाहार पर था माफिया का शिकंजा, अब महिला समूहों के हाथ में व्यवस्था   सपा-कांग्रेस पर हमला, कहा- राम मंदिर ही नहीं, अयोध्या की सड़क, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट का भी किया विरोध   अयोध्या  प्रदेश की 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बड़ी सौगात दी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इसके साथ ही कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अब उन्हें दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी। स्मार्टफोन और रियल टाइम डाटा के इस्तेमाल से आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्ट बनाने की भी घोषणा की गई।   मुख्यमंत्री योगी अयोध्या धाम में आईसीडीएस के तहत आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। अयोध्या में करीब 12 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाएं मौजूद रहीं, जबकि सभी 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों से मंत्री, सांसद, विधायक और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं जुड़ीं। बुधवार से शुरू हो रहे पोषण माह से पहले मुख्यमंत्री योगी ने मानदेय, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, अतिरिक्त साड़ी और स्मार्टफोन की चार प्रमुख सौगातें दीं।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के समय आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया जाएगा। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने कोरोना जैसी सदी की सबसे बड़ी महामारी के दौरान एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा तक वे अपनी जान जोखिम में डालकर जुटी रहीं।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हाल में प्रदेश के करीब 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी गई है। लगातार मांग आ रही थी कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को भी इससे जोड़ा जाए। अब सरकार यह सुविधा उन्हें भी देने जा रही है।   मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रदेश की 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए साड़ी की धनराशि जारी कर दी गई है। अब तक उन्हें दो साड़ियां मिलती थीं। अब एक अतिरिक्त साड़ी के लिए 500 रुपये और दिए जाएंगे। इस पर प्रदेश सरकार करीब 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 1.28 लाख स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे योजनाओं का डाटा रियल टाइम में दर्ज किया जा सकेगा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का काम भी आसान होगा।   मुख्यमंत्री योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को बच्चों के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में इनकी भूमिका की तुलना माता यशोदा से की थी। मां के बाद छोटे बच्चों का पहला संवाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं से होता है। यही बचपन स्वस्थ होगा तो भारत स्वस्थ, समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को व्यवस्थित स्वरूप दिया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को अपना भवन उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि या अलग बजट से निर्माण कराया जाएगा।   पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर थे। बच्चे बैठने के लिए अपना टाट लेकर आते थे। पेयजल और जरूरी उपकरणों का अभाव था। केंद्र सरकार पैसा देती थी, लेकिन पोषाहार पर माफिया का शिकंजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बच्चों का पोषाहार एक शराब माफिया संचालित करता था। सरकार और माफिया व्यवस्था को चौपट करते थे और बदनामी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को झेलनी पड़ती थी। अब पोषाहार को माफिया से मुक्त कर 204 स्थानों पर टेक होम राशन प्लांट महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।   अयोध्या के बदलाव को आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस वर्ष पहले यहां न पर्याप्त बिजली थी, न सड़कें और न सुविधाएं। आज अयोध्या में फोरलेन सड़कें, भव्य रेलवे स्टेशन और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। रेलवे की सिंगल लाइन डबल हो चुकी है, राम की पैड़ी का कायाकल्प हुआ है और अयोध्या देश की सोलर सिटी बनी है।   इसी बहाने मुख्यमंत्री योगी ने सपा और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने राम मंदिर का विरोध किया। सपा ने अयोध्या में सड़कों के चौड़ीकरण, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट निर्माण तक का विरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “ये विरासत के भी विरोधी हैं और विकास के भी।” विरोध के बावजूद न राम मंदिर का अभियान रुका और न अयोध्या का विकास। आज रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं और देश-दुनिया के लोग अयोध्या के बदलाव को देख रहे हैं।   समारोह में सैम और मैम श्रेणी से सामान्य पोषण स्थिति में आए बच्चों और उनके अभिभावकों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों तथा एवरेस्ट बेस कैंप अभियान में शामिल बेटियों को सम्मानित किया गया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला समेत जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

पटना की हवा दिल्ली से बेहतर, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 11 पायदान का सुधार

पटना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणाम घोषित कर दिए। लखनऊ की हवा देश में सबसे स्वच्छ पाई गई। लखनऊ ने 200 में 198 अंक प्राप्त किए हैं। वहीं, इंदौर को 197 अंक मिले। जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। सर्वे में अलग-अलग श्रेणियों में बिहार के तीन शहरों ने जगह बनाई है। इनमें पटना ने 178 अंक प्राप्त कर 16वां स्थान प्राप्त किया जबकि मुजफ्फरपुर को 28वीं और गया जी को 35वीं रैक हासिल हुई है। वहीं, बिहारशरीफ देश में सबसे प्रदूषित शहर बना। वहीं, राजधानी दिल्ली 21वें और मुंबई 28वें स्थान पर रही। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी (कैटेगरी-1) में दिल्ली को 172, मुंबई को 160.8 अंक मिले। झारखंड की राजधानी रांची 162.5 अंकों के साथ 27वें क्रम पर रही। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की अगल-अलग श्रेणी में यूपी के 16 शहरों ने जगह बनाई है। सर्वे के अनुसार, पटना की हवा दिल्ली, रांची, बेंगलुरु और कोलकाता से अच्छी है। पिछले सर्वे के मुकाबले इस बार पटना की स्थिति में नौ अंकों का सुधार भी हुआ है। पटना के वार्ड को मिला पुरस्कार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में पहली बार देशभर में वार्ड स्तर पर भी मूल्यांकन किया गया। इसमें पटना के वार्ड 9 और 43 को राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार मिला है।मालूम हो कि दोनों वार्डों को पुरस्कार के रूप में कुल 40 लाख रुपये मिले हैं। इस राशि का उपयोग संबंधित वार्डों में वायु प्रदूषण नियंत्रण, हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण सुधार से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा। तीन श्रेणियों में हुआ वार्डों का मूल्यांकन वार्ड स्तर पर मूल्यांकन के लिए 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वार्डों को आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया था। श्रेणी-1 में 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों का मूल्यांकन किया गया। इस श्रेणी में पटना नगर निगम के वार्ड संख्या-43 ने राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए निगम को 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। इस राशि का उपयोग राजेंद्र नगर, महमूदी चक, मैला टंकी रोड, आर्य कुमार रोड और पाटलिपुत्र पथ सहित अन्य इलाकों में वायु प्रदूषण कम करने से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा। वहीं, 10 हजार से 30 हजार की आबादी वाले वार्डों को श्रेणी-2 में रखा गया था। इस श्रेणी में पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड संख्या-9 ने राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष नौ वार्डों में स्थान बनाया और राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। वार्ड संख्या-9 के लिए निगम को 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। इस राशि का उपयोग एयरपोर्ट, राजवंशी नगर, हार्डिंग रोड और कौशल नगर सहित अन्य इलाकों में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा। वार्ड 9 के क्षेत्र लोक भवन,मुख्यमंत्री आवास, चिड़ियाघर,राजधानी वाटिका, सचिवालय,विधानसभा क्षेत्र आदि वार्ड 43 के क्षेत्र राजेंद्र नगर का पूरा इलाका,मोइनुल हक स्टेडियम,बहादुरपुर आदि पिछले वर्ष पटना 27वें स्थान पर था पटना नगर निगम ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में देशभर के 48 शहरों में 16वां स्थान हासिल किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 11 पायदान का सुधार है। पिछले वर्ष पटना इस सर्वेक्षण में 27वें स्थान पर था। ये रहे टॉप-5 शहर लखनऊ (उत्तर प्रदेश) 198 अंक (रैंक-1) इंदौर (मध्य प्रदेश) 197 अंक (रैंक-2) जबलपुर (मध्य प्रदेश) 195 अंक (रैंक-3) भोपाल (एमपी)/आगरा (यूपी) 192 अंक (संयुक्त रूप से रैंक-4) सूरत (गुजरात) 191 अंक (रैंक-5) पुरस्कार राशि लखनऊ – 1.5 करोड़ इंदौर – 1.0 करोड़ जबलपुर – 50 लाख

राजस्थान में अगले 4-5 दिन कमजोर रहेगा मानसून, 12 सितंबर से बारिश की वापसी के आसार

जयपुर राजस्थान में मानसून ने फिलहाल ब्रेक ले लिया है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के साथ मौसम का मिजाज एक बार फिर गर्म होने लगा है। हालांकि, यह राहत ज्यादा लंबी नहीं रहने वाली। मौसम विभाग के अनुसार अगले 4-5 दिन मानसून कमजोर रहेगा, लेकिन 12 सितंबर से प्रदेश में एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। आज भरतपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। सोमवार को भी प्रदेश में बारिश का दायरा काफी सीमित रहा। अलवर, कोटपूतली, सीकर और राजसमंद में ही कुछ स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। राजसमंद के नाथद्वारा में सबसे ज्यादा करीब 28 मिलीमीटर यानी एक इंच से ज्यादा पानी बरसा। देर शाम श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के कुछ इलाकों में बादल छाए और हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। उत्तर भारत की तरफ खिसका मानसून ट्रफ मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक सोमवार को मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर भारत की तरफ चली गई। इसका सीधा असर राजस्थान में बारिश की गतिविधियों पर पड़ा है। ट्रफ की स्थिति बदलने के कारण अब प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता कमजोर रहने का अनुमान है। इस दौरान आसमान में बादल जरूर नजर आ सकते हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर तेज या भारी बारिश की उम्मीद कम है। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 सितंबर से मानसून फिर सक्रिय होगा, जिसके बाद बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। राजस्थान में 24 फीसदी बारिश कम इस मानसून सीजन में राजस्थान को अब तक सामान्य बारिश का इंतजार ही है। 1 जून से 6 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से करीब 24 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश में सिर्फ चार जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। इनमें सबसे आगे भरतपुर है। यहां 1 जून से 6 सितंबर तक सामान्य बारिश 481.7 एमएम मानी जाती है, जबकि इस सीजन में अब तक 638.8 एमएम बारिश हो चुकी है। यानी भरतपुर में सामान्य से करीब 33 फीसदी ज्यादा पानी बरसा है। भरतपुर के अलावा दौसा, धौलपुर और झुंझुनूं में भी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। इन जिलों में बारिश सामान्य से करीब 7 से 13 फीसदी अधिक रही है। दूसरी ओर अलवर में सामान्य से करीब 1 फीसदी कम और करौली में 5 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। नाथद्वारा में सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान राजसमंद का नाथद्वारा बारिश के लिहाज से प्रदेश में सबसे आगे रहा। यहां करीब 28 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कोटपूतली, अलवर शहर और सीकर के कुछ इलाकों में भी बारिश हुई। देर शाम पश्चिमी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू में मौसम ने थोड़ी करवट ली। बादल छाने के साथ कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं। हालांकि, यह बारिश इतनी व्यापक नहीं रही कि प्रदेश में कमजोर पड़े मानसून को फिर से सक्रिय माना जाए। बारिश रुकी तो चढ़ने लगा पारा बारिश थमने और धूप निकलने का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार को करौली, कोटा, प्रतापगढ़, फतेहपुर, अलवर, पिलानी, टोंक और भीलवाड़ा समेत कई शहरों में दिन के तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हुई। प्रदेश में सोमवार को सबसे गर्म फलोदी रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने के साथ आने वाले दिनों में दिन के तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 12 सितंबर के बाद बारिश का नया दौर शुरू होने पर एक बार फिर तापमान में राहत मिलने की उम्मीद है। आज का मौसम कैसा रहेगा? आज भरतपुर और कोटा संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में अगले 4-5 दिन मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। ऐसे में प्रदेश में फिलहाल तेज बारिश का इंतजार करना होगा। मौसम विभाग की नजर अब 12 सितंबर से बनने वाले नए बारिश के दौर पर है। अगर सिस्टम अनुकूल रहा तो मानसून की सुस्ती टूट सकती है और प्रदेश के कई हिस्सों में दोबारा बारिश का सिलसिला तेज हो सकता है।