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राजस्थान में कल निकाय चुनाव का पहला चरण, 162 नगरीय निकायों में होगी वोटिंग; जानें पूरी तैयारी

जयपुर राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार (9 सितंबर) को मतदान होगा. पहले चरण में 162 नगरीय निकायों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे. मतदान को लेकर निर्वाचन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों पर पहुंच रही हैं. मतदान के लिए मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है. इसके साथ पहचान के लिए फोटोयुक्त दस्तावेज दिखाना होगा. अगर किसी मतदाता के पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है, तो भी वह मतदान कर सकता है. इसके लिए चुनाव आयोग ने 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज मान्य किए हैं. जयपुर में 565 मतदान केंद्र पर वोटिंग पहले चरण में 17 नगर पालिकाओं के 25 वार्ड, 4 नगर परिषदों के 6 वार्ड और एक नगर निगम का एक वार्ड निर्विरोध चुना जा चुका है. इन वार्डों को छोड़कर बाकी सीटों पर मतदान होगा. जयपुर जिले में 18 नगरीय निकायों के लिए 565 मतदान केंद्रों पर वोटिंग होगी. पहले चरण में मतदान वाले प्रमुख नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में चौमूं, शाहपुरा, बाड़मेर, जैसलमेर, तिजारा, खैरथल, भिवाड़ी, करौली, कुचामन सिटी, डीडवाना, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, झालावाड़, बूंदी, बारां, जालोर, झुंझुनूं, फतेहपुर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, सुजानगढ़, चूरू, कोटपूतली, ब्यावर और नागौर शामिल हैं. वोटर आई के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज     आधार कार्ड     विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी मनरेगा कार्ड     बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक     श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड     ड्राइविंग लाइसेंस     पैन कार्ड     भारतीय पासपोर्ट     फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज     केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम या सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी की ओर से जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र     सांसद या विधानसभा सदस्य को जारी सरकारी पहचान पत्र     सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी यूडीआईडी कार्ड में से कोई एक दस्तावेज मतदान केंद्र पर जाने से पहले मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में जरूर जांच लें. साथ ही मतदान केंद्र की जानकारी पहले से कर लें. मतदान के बाद 11 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा. निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी.

CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, सत्य निकेतन हादसे के घायलों को ₹5 लाख की आर्थिक मदद

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने हादसे के पास स्थित एक अन्य इमारत को भी ध्वस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों को 5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बिल्डिंग हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंची थी। घायलों से मुलाकात के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि घायलों की आर्थिक मदद के लिए राहत कोष से 5 लाख रुपये की मदद की जाएगी। साथ ही सीएम ने प्रशासन को आसपास की इमारतों की सुरक्षा जांच करने और जरूरत पड़ने पर खतरनाक बिल्डिंगो को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। MCD के 4 अधिकारी सस्पेंड इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निकाय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिसके तहत एमसीडी के दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों अधीक्षण अभियंता रणबीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित कर दिया गया। एमसीडी ने पूरी दिल्ली में इमारतों, विशेष रूप से ऊंचाई और मंजिल सीमाओं का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं के निरीक्षण का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को शहर में सभी पांच मंजिला ढांचों को सील करने का निर्देश दिया है। बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को इस इमारत के गिरने से सात लोगों के मौत हो गई थी। जबकि 3 लोग अभी भी अस्पताल में गंभीर है। इस इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट व्यवस्था के रूप में किया जा रहा था। पुलिस ने FIR दर्ज कर इस बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था।

नशे के खिलाफ मुहिम चलाने वाले मजदूर की मौत, सरपंच समेत 5 लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस

संगरूर. दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के गांव तूरबंजारा में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता के कार्यक्रम के दौरान नशे का मुद्दा उठाने वाले एक मजदूर द्वारा जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली। मजदूर गुलजार सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में गांव की सरपंच उसके पति समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत थाना दिड़बा में मामला दर्ज किया गया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल हॉस्पिटल संगरूर लाया गया है। जहां मोहनजीत इंसाफ संघर्ष कमेटी के कार्यकर्ता भी पहुंचे हुए हैं जिनके द्वारा वित्त मंत्री के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। मृतक मजदूर के भाइयों बिक्कर सिंह और जसवीर सिंह, निवासी तूरबंजारा, ने बताया कि गत दिवस गांव में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कार्यक्रम था। इस दौरान उनके भाई गुलजार सिंह ने नशे का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि उनका बेटा चिट्टे का नशा करता है और घर का सारा सामान बेच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया था कि गांव में खुलेआम चिट्टा बिक रहा है, जिससे वह बेहद परेशान हैं। गुलजार सिंह की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें वह पूरी घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठा रहा है। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह गुलजार सिंह ने उन्हें बताया कि गांव की महिला सरपंच के पति बलजीत सिंह सहित तीन अन्य व्यक्ति उस पर पंचायत में जाकर माफी मांगने के लिए दबाव बना रहे थे और कथित तौर पर धमका रहे थे। इससे परेशान होकर उसने सल्फास/जहरीली वस्तु निगल ली। जिसके कारण दत्त रात्रि डीएमसी लुधियाना में मजदूर की मौत हो गई।

पाली में गरजे भजनलाल शर्मा, गहलोत से पूछा- पेपर लीक और JJM पर क्यों नहीं बोलते

पाली  राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर भाजपा ने चुनावी अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को पाली में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो किया। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सिंधी कॉलोनी पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो सूरजपोल से शुरू हुआ। इसके बाद काफिला सर्राफा बाजार, फतेहपुरिया बाजार और पानी दरवाजा होते हुए सिंधी कॉलोनी पहुंचा। रोड शो में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, मंत्री जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, जिला अध्यक्ष सुनील भंडारी समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। बीजेपी कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यकर्ता ढोल बजाते हुए आगे चल रहे थे। वहीं, एक बुजुर्ग महिला हाथ में भाजपा का झंडा लेकर डांस करती नजर आईं। रोड शो के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की फैक्ट्रियां दोबारा शुरू कराने और स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दे भी उठाए। 'पाली लंबे समय से कांग्रेस मुक्त'- भजनलाल शर्मा सिंधी कॉलोनी में लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पाली में उत्साह और उमंग दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि यहां की जनता का भाजपा के प्रति प्यार और विश्वास साफ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ने पाली को भाजपा का गढ़ बताते हुए कहा कि यह शहर लंबे समय से कांग्रेस मुक्त है और यहां का एक-एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहा है। JJM और पेपर लीक को लेकर कांग्रेस पर निशाना मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन (JJM) को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा जो कहती है, वह करके दिखाती है। पिछले ढाई साल में सरकार ने जो काम किए हैं, वे सभी के सामने हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत जी पेपर लीक और जल जीवन मिशन के मुद्दे पर क्यों नहीं बोलते। उन्होंने 'दो साल बनाम पांच साल' के कामकाज पर भी कांग्रेस से सवाल किया। सीएम ने कहा कि राजस्थान की जनता प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाना चाहती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिताने और नगर निकायों में कमल खिलाने की अपील की। आधुनिक शहर बनाने का दावा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य नगर निकायों को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक और आत्मनिर्भर शहर बनाना है। उन्होंने सुदृढ़ आधारभूत ढांचे, आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, एलईडी लाइट, स्वच्छ पेयजल और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी पाली की जनता के उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार शहरी क्षेत्रों में विकास की अंतिम कड़ी तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में अस्पतालों की स्वच्छता को मिली पहचान, 10 को ‘Eat Right’ टैग और 3 को हाइजीन सर्टिफिकेट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए ‘ईट राइट इंडिया’ पहल के तहत लगातार गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा प्रमाणन, प्रशिक्षण, जागरूकता और प्रवर्तन गतिविधियों के जरिए खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी कड़ी में 10 अस्पतालों को ईट राइट टैग मिला है. वहीं खैरागढ़ के तीन खाद्य प्रतिष्ठानों को हाइजीन रेटिंग सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया गया है. प्रदेश में ईट राइट कैंपस, हाइजीन रेटिंग और FoSTaC प्रशिक्षण के क्षेत्र में पिछले 3 महीनों में लगातार उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है. ईट राइट कैंपस प्रमाणन के तहत जिला अस्पताल कांकेर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर, मुंगेली, राजनांदगांव और बीजापुर के साथ SSIMS Hospital दुर्ग को ‘ईट राइट’ टैग दिया गया है. इसी तरह खैरागढ़ के तीन खाद्य प्रतिष्ठानों को हाइजीन रेटिंग प्रमाणन मिला है. इस प्रमाणन का उद्देश्य खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों के पालन को बढ़ावा देना है. कई जिलों में FoSTaC प्रशिक्षण खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों और बेहतर खाद्य प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बलरामपुर, कोरबा, महासमुंद, कोरिया, धमतरी, सरगुजा, मनेंद्रगढ़ और रायपुर सहित विभिन्न जिलों में FoSTaC प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं. शेष जिलों में भी प्रशिक्षण की प्रक्रिया जारी है. इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में ईट राइट क्लीन स्ट्रीट फूड हब, ईट राइट क्लीन फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट और ईट राइट स्कूल के प्रमाणन की प्रक्रिया भी चल रही है. एनालॉग पनीर पर एक्शन एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहा है. सैंपल की जांच के बाद लगभग 1500 किलोग्राम एनालॉग पनीर नष्ट कराया गया है. लैब टेस्ट में अवमानक और असुरक्षित पाए जाने वाले मामलों में संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से MP के उत्पादों को मिलेगा ग्लोबल बाजार, निर्यात को बढ़ावा: CM डॉ. यादव

हतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में होगा नवाचार लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआईएम कांग्रेस-2026 के तीसरे दिन निवेशकों और उद्यमियों से की वन-टू-वन मीटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के लिए किया आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स और नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, देश के मध्य में स्थित है और यहां का सड़क सम्पर्क, रेल तथा एयर कनेक्टिविटी देश के सभी स्थानों से सुगम है। देश के किसी भी कोने में मध्यप्रदेश से अपने उत्पाद पहुंचाना सरल और त्वरित है। प्रदेश में उपलब्ध बेहतर औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा तथा स्किल्ड मैनपॉवर के कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की दृष्टि से हर तरह की संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग) के तीसरे दिन 8 सितंबर को यूएई के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग की। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के बिजनेस-फिलैंथ्रॉपी के लिए स्पेशल एनवॉय और क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार, राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा, जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन, शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर, वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर तथा सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को अगले वर्ष होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 का निमंत्रण भी दिया। तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप को राज्य सरकार कर रही है प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर को प्रदेश के प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स के लिए वेयर हाऊसिंग, लॉजिस्टिक्स आदि के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप के क्षेत्र में निवेश को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। जाफर ने शहरी अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में दीर्घ अवधि निवेश के संबंध में रूचि प्रकट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा जाफर के बीच मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाफर ने बताया कि क्रेसेंट ग्रुप ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना और दीर्घकालिक निवेश में रुचि रखने वाला बहुआयामी व्यापारिक समूह है। पेट्रोलियम और उद्यमिता क्रेसेंट के प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं। कंपनी का मुख्यालय शारजाह में है। पोवारखेड़ा अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में होगा विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ चर्चा में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहित कई विषयों पर बातचीत की। उल्लेखनीय है कि डीपी वर्ल्ड की इकाईयां मध्यप्रदेश में पहले से ही संचालित है तथा वह प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूमार ने बताया कि डीपी वर्ल्ड कंपनी एंड-टू-एंड सप्लाई चेन और व्यापार समाधानों की एकीकृत वैश्विक प्रदाता है। यह दुबई सरकार की 100% स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी भारत सहित 80 देशों में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्लस्टरों को सेवा देने वाली मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं से व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कुशल रेल-आधारित माल ढुलाई के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्ट का समय कम करते हुए किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों के लिए कार्गो समेकन, मूल्य संवर्धन और निर्यात सहायता प्रदान करने से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और एग्रीकल्चरल मशीनरी पर फोकस किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस होंगे स्थापित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की से मुलाकात के दौरान उन्हें प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के नवाचारों और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जेम्स एजुकेशन कंपनी स्कूल शिक्षा, एजुकेशनल मैनेजमेंट और एज्युकेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती है। जेम्स एजुकेशन कंपनी ने मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और विकासशील शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रूचि प्रदर्शित की। इन स्कूलों में विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। कंपनी स्थानीय जरूरतों और भविष्य की लर्निंग आवश्यकताओं के अनुसार नेशनल और इंटरनेशनल करिकुलम को लागू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सनी वर्की ने बताया कि उनकी कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। कंपनी मिडिल ईस्ट, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में काम कर रही है। कंपनी का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पर है। इसका मुख्यालय दुबई में है। ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन प्रदेश में निवेश का इच्छुक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन से वन-टू-वन मीटिंग की। बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी सहित कई सेक्टर में निवेश की इच्छा प्रकट की। शराफ ग्रुप मध्यप्रदेश में संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए इच्छुक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर से मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30 से 50 मिलियन … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा – बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं

सरगुजा एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री हुए सख्त: जिला  कलेक्टर से की फोन पर सीधी बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा – बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया।  मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें। मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बार-बार ऐसी घटनाओं को लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले पर एमकिस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अदालत को हादसे की जानकारी दी. उन्होंने सत्य निकेतन में अप्रैल 2022 में भी बिल्डिंग गिरने का हवाला देते हुए राजधानी के सभी PG हॉस्टलों, निजी हॉस्टलों की सुरक्षा जांच और ऑडिट- निरीक्षण करने की सिफारिश की।  एमिक्स क्यूरी की रिपोर्ट में कहा गया है? सत्‍य निकेतन में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं. सत्य नितेकन दिल्ली यूनिविर्सिटी साउथ कैंपस के पास स्थित है, यह छात्रों के रहने के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है।  यहां बड़ी संख्या में पीजी, प्राइवेट होस्टल, मेस खाने-पीने की दुकानें और दूसरे व्यवसायिक संस्थान चल रहे हैं।  अप्रैल 2022 में यहां एक बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी और 4 लोग घायल हुए थे।   अब दोबारा ऐसी घटना होने से यह गंभीर सवाल उठता है कि इमारतों की नियमित जांच, खतरनाक इमारतों की पहचान और भवन नियमों को लागू करने की व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है या नहीं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास मौजूद सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के रहने की ऐसी जगहों की समय सीमा के अंदर सुरक्षा जांच की जानी चाहिए।  – बिल्डिंग का नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन का उपयोग, मजबूती, आग से सुरक्षा और आने-जाने के रास्ते जैसे सुरक्षा मानकों की जांच होनी चाहिए।  रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है।  रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में बहुमंजिला इमारत ढह गई थी.  करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं. इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze' नाम से बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी गई है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे की सटीक वजह की जांच जारी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और हादसे से ठीक पहले वहां पानी भरने की भी सूचना थी.  दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 290 और 125 के तहत FIR दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान में गिरफ्तार कर लिया गया।  हादसे के सिलसिले में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं।  अमीकस क्यूरी ने बताया है कि सत्य निकेतन से सटी एक अन्य इमारत P-213 को भी खतरनाक पाया गया है और MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं।  दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों की जांच की सिफारिश रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल और अन्य छात्र आवास चल रहे हैं. कई बार रिहायशी संपत्तियों में अतिरिक्त निर्माण, बदलाव या उपयोग में परिवर्तन कर इन्हें संचालित किया जाता है. इसलिए इनकी जांच में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, वास्तविक निर्माण और मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, भूमि उपयोग, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रवेश-निकास की जांच होनी चाहिए।  रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई हुई.  हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह बताना होगा कि PG हॉस्टल वाली इमारतें जरूरी अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन तो नहीं हुआ।  हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक की नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि निर्माण और मरम्मत का काम बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप कराना संबंधित प्राधिकरण का दायित्व है।  कोर्ट ने MCD को यह भी जांचने को कहा है कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनी थीं या नहीं. अगर निर्माण बिना अनुमति या बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है.  मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।  दरअसल सुप्रीम कोर्ट दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में हुए अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई कर रहा है. इससे पहले अदालत दिल्ली, जयपुर और पटना समेत कई इलाकों में अवैध निर्माणों को लेकर कड़े आदेश जारी कर चुका है। 

‘UP’ यानी अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा प्रदेश की नई औद्योगिक ताकत: CM योगी

यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन, यूपी टेक मित्र पोर्टल तथा हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट, 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें  कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।   मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया। फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।   यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता। यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा। अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है। यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 … Read more

बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा बिजली ट्रांसफर, इंदौर में MP ट्रांसको ने शुरू किया क्षमता उन्नयन

इंदौर के पावर नेटवर्क को मिलेगी नई ताकत, एम पी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन- ऊर्जा मंत्री तोमर मौजूदा 132 केवी लाइनों की क्षमता होगी करीब तीन गुना, बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा पावर ट्रांसफर इंदौर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर के महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नयन कार्य शुरू कर दिया है। इस कार्य में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों के एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग   एच टी एल एस कंडक्टरों से बदला जा रहा है।  ऊर्जा मंत्री ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता मौजूदा पैंथर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक विद्युत पावर ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा रही है। इंदौर साउथ जोन से चंबल तक दोनों सर्किट का उन्नयन उन्नयन कार्य की शुरुआत खंडवा रोड स्थित 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन तक जाने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में की गई है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स तथा सत्य साईं सर्किट शामिल हैं। साथ ही 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, सांवेर रोड से 132 केवी चंबल सबस्टेशन, पोलोग्राउंड को जोड़ने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में भी एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को एचटीएलएस कंडक्टरों से बदलने का कार्य शुरू किया गया है। 14 फीडर बे भी होंगे अपग्रेड ट्रांसमिशन लाइनों के कंडक्टर बदलने के साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े 14 फीडर बे के उन्नयन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। इनमें 132 केवी चंबल सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, 132 केवी इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स सबस्टेशन तथा 132 केवी सत्य साईं सबस्टेशन से संबंधित फीडर बे शामिल हैं। ट्रांसमिशन लाइनों की बढ़ी हुई करंट वहन क्षमता के अनुरूप संबंधित स्विचयार्ड एवं फीडर बे उपकरणों को भी अपग्रेड किया जाएगा। इससे केवल कंडक्टर की क्षमता बढ़ने तक सीमित न रहकर उससे जुड़े नेटवर्क में भी बढ़ी हुई विद्युत क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। अधिक तापमान पर भी कम सैग के साथ काम करते हैं एचटीएलएस  कंडक्टर एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। यही तकनीकी विशेषता इन्हें मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाती है। कंडक्टर की बढ़ी हुई थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण किया जा सकता है। इससे नई ट्रांसमिशन लाइन के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम होती है और मौजूदा लाइन के माध्यम से ही अधिक पावर फ्लो संभव होता है। बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मौजूदा कॉरिडोर का होगा बेहतर उपयोग  ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि इंदौर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण गतिविधियों के कारण नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे  (आर ओ डब्ल्यू )उपलब्ध कराना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के कॉरिडोर में ही कंडक्टर की क्षमता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है। एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से मौजूदा 132 केवी नेटवर्क में अधिक विद्युत शक्ति के पारेषण के साथ महत्वपूर्ण लाइनों पर लोडिंग का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे पावर फ्लो के लिए अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन भी उपलब्ध होगा। इस क्षमता उन्नयन से इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।