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अब और तेज होगा पुलिस रिस्पांस, बिलासपुर में 24 नई Dial-112 वाहनों की एंट्री

बिलासपुर. आपातकालीन स्थिति में लोगों तक तेजी से सहायता पहुंचाने वाली डायल 112 सेवा अब बिलासपुर जिले में और अधिक मजबूत होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल पर जिले के पुलिस बेड़े में 24 नए आधुनिक वाहन शामिल किए जाएंगे। इन वाहनों के शामिल होने से जिले में रियल टाइम रिस्पांस सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लिए 400 नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें से 24 वाहन बिलासपुर पुलिस को सौंपे जाएंगे। पुराने और जर्जर वाहनों से मिलेगी राहत वर्तमान में जिले के 19 थानों में एक-एक डायल 112 वाहन तैनात है। ये वाहन सूचना मिलते ही घटना स्थल के लिए रवाना होते हैं। हालांकि लगातार कई वर्षों तक चौबीसों घंटे इस्तेमाल होने के कारण अधिकांश वाहन जर्जर और कंडम हो चुके थे। इससे पुलिस के रिस्पांस टाइम पर भी असर पड़ रहा था। इसी समस्या को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के लिए 400 नए वाहनों की स्वीकृति दी है। बिलासपुर में पुराने वाहनों की जगह नए आधुनिक वाहन तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील इलाकों में रहेंगे अतिरिक्त वाहन बिलासपुर को मिलने वाले 24 वाहनों में से 19 वाहन जिले के सभी थानों में पुराने वाहनों की जगह लगाए जाएंगे। इसके अलावा बचे पांच अतिरिक्त वाहनों को उन क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जहां दुर्घटनाओं और अपराध की घटनाएं अधिक होती हैं। इन थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त वाहन तैनात किए जाएंगे सरकंडा सिविल लाइन तोरवा कोतवाली सकरी तेजी से मिलेगी मदद पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्रों में अतिरिक्त वाहन तैनात करने का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में पुलिस की पहुंच का समय (रिस्पांस टाइम) कम करना है। इससे दुर्घटना या किसी अन्य आपदा की स्थिति में पीड़ितों को गोल्डन ऑवर के भीतर त्वरित सहायता मिल सकेगी।

गोलियों की गूंज से कांपा जालंधर, पूर्व सैनिक के घर के बाहर फायरिंग से मचा हड़कंप

जालंधर.  जालंधर के पॉश इलाके में गोलियों की खबर सामने आई है। छोटी बारादरी इलाके में देर रात उस समय दहशत का माहौल बन गया जब मोटरसाइकिल सवार एक युवक ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना छोटी बारादरी पार्ट-1 में स्थित मकान नंबर 325 के बाहर हुई। उक्त घर पूर्व सैनिक और ज्वैलर गुरदयाल सिंह कांडा का घर है। पीड़ित गुरदयाल सिंह खाना खाने के बाद अपने घर के बाहर टहल रहे थे। इसी बीच एक अज्ञात युवक मोटरसाइकिल पर आया और अचानक उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर ने करीब 5 राउंड गोलियां चलाईं और घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गया। गोलियों की आवाज सुनकर इलाके के लोग डर गए। राहत की बात यह है कि इस फायरिंग में किसी के घायल होने या जान जाने की कोई खबर नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया और भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचकर इलाके को घेर लिया। सीनियर पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया और घर के बाहर गोलियों के निशानों की जांच की। पुलिस हमलावर की पहचान के लिए इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज चेक कर रही है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस फायरिंग के पीछे हमलावर का मकसद क्या था। पुलिस हर एंगल से मामले की अच्छी तरह जांच कर रही है।

नहरों में नहाना पड़ सकता है भारी! जींद पुलिस ने लगाया प्रतिबंध, लोगों को चेतावनी

जींद. पुलिस ने नहरों में नहाने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। गर्मी के मौसम में नहरों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों में नहाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एसपी कुलदीप सिंह ने आमजन के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को नहरों और तालाबों में नहाने से रोकें। पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने कहा कि हर वर्ष गर्मियों में कई युवक और बच्चे बिना सुरक्षा उपायों के नहरों और गहरे जल स्रोतों में नहाने चले जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। तेज बहाव, अधिक गहराई और पानी की सही जानकारी न होने के कारण छोटी सी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें जोखिम भरे स्थानों पर जाने से रोकें। युवाओं से भी अनुरोध किया गया है कि वे मनोरंजन या सोशल मीडिया वीडियो बनाने के लिए खतरनाक स्थानों पर न जाएं। एसपी ने स्पष्ट किया कि नहरों में नहाना या नशा करके जल स्रोतों के आसपास बैठना खतरनाक और कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई करेगी। सभी थाना प्रभारियों को संवेदनशील स्थानों पर गश्त बढ़ाने और जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री घूम रहे विदेश, जनता को दे रहे बचत की नसीहत— भगवंत मान का तंज

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा तेल की कीमतों में किए गए भारी वृद्धि की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि चुनावों के तुरंत बाद एक बार फिर आम लोगों पर भारी कीमतों का बोझ डाल दिया गया है, जबकि सत्ता पर काबिज लोग खर्चों में कटौती और बचत करने के बारे में नागरिकों को भाषण देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि देश भर के लोग महंगाई, बढ़ती परिवहन लागत और बढ़ते घरेलू खर्चों की मार से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत देने के बजाय केंद्र सरकार नागरिकों से निजी खर्च कम करने के लिए कह रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रधानमंत्री देश के लोगों को बचत करने का सबक देते हुए विदेश घूम रहे हैं।” उन्होंने बताया कि आम नागरिकों को बार-बार अनावश्यक यात्रा से बचने और खर्चे घटाने की सलाह दी जाती है, जबकि प्रधानमंत्री खुद जनता के खर्च पर लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अगर देश के लोगों को विदेश यात्रा करना बंद कर देना चाहिए और घर से काम करना चाहिए, तो क्या प्रधानमंत्री घर से काम नहीं कर सकते?” उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुई है, लेकिन किसी अन्य देश के प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह नागरिकों को बचत करने की सलाह नहीं दी। केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शुक्र है, प्रधानमंत्री ने लोगों को सिर्फ पैसे बचाने की सलाह दी और उन्हें थालियाँ बजाने और तालियाँ बजाने के लिए नहीं कहा।” उन्होंने कहा कि बेतुकी सलाह और भाषणों के बजाय लोग महंगाई को नियंत्रित करने और घरों, किसानों तथा छोटे कारोबारियों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए ठोस कदमों की उम्मीद करते हैं। वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध और आर्थिक अस्थिरता ने दुनिया भर के देशों को प्रभावित किया है, लेकिन अन्य देशों की सरकारें उच्च कीमतों और खर्चों पर नैतिक भाषणों के जरिए जनता पर बोझ डालने के बजाय नागरिकों को राहत प्रदान करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “युद्ध ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के अलावा किसी अन्य देश के प्रमुख ने अपने नागरिकों को इस तरह बचत पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह नहीं दी।” भाखड़ा के पानी के वितरण के संवेदनशील मुद्दे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि पंजाब हर कीमत पर अपने पानी के अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा को अपने कानूनी रूप से निर्धारित कोटे के अनुसार ही पानी मिलेगा और यह पानी निर्धारित समय-सीमा से पहले नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब किसी भी दबाव में आकर अपने पानी के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।” उन्होंने आगे कहा कि पानी पंजाब से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है और यह राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि की नींव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की हर बूंद की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पंजाब के रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है।” उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के पानी और कृषि पर निर्भर किसानों तथा ग्रामीण समुदायों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। स्थानीय निकायों के आगामी चुनावों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोग सरकार का जोरदार समर्थन कर रहे हैं क्योंकि जमीनी स्तर पर विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है, शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार हो रहा है, सड़कों और सीवरेज प्रणालियों को अपग्रेड किया जा रहा है, टोल प्लाजा बंद किए जा रहे हैं और राज्य भर के शहरों और कस्बों के लिए करोड़ों रुपये की विकास अनुदान जारी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल वर्षों के राजनीतिक पतन और लोगों की उम्मीदों के टूटने के कारण लगातार जनता का समर्थन और विश्वसनीयता खो रही है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को अब अकालियों पर पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकालियों ने बेअदबी की घटनाओं के जरिए हर पंजाबी और खासकर सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी अकालियों को पंजाब और इसके लोगों के साथ किए गए पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे।

हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, रिक्त पद का बहाना बनाकर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना गलत

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित द्वारा समय पर आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद केवल “रिक्त पद उपलब्ध नहीं है” कहकर नियुक्ति से इंकार करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” प्रकरण में पारित किया गया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे, और उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. मृत्यु के मात्र दो माह के भीतर ही याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, किंतु बैंक ने वर्षों मामला लंबित रख यह कहकर नियुक्ति से इंकार कर दिया कि संबंधित पद उपलब्ध नहीं है. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनादि शर्मा ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता की सेवा के दौरान मृत्यु होने के तुरंत बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था तथा याचिकाकर्ता ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था. उन्होंने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि बैंक द्वारा मामले को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि समान परिस्थिति वाले अन्य अभ्यर्थियों के प्रकरणों पर निर्णय लेकर उन्हें नियुक्ति प्रदान कर दी गई. अधिवक्ता ने यह भी प्रस्तुत किया कि बैंक अपनी ही अनुकंपा नियुक्ति नीति के विपरीत कार्य कर रहा है, जबकि नीति में स्पष्ट रूप से ऐसे मामलों को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से विचार करने तथा आश्रित परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है. उन्होंने यह तर्क भी रखा कि तकनीकी आधारों एवं प्रशासनिक बहानों का सहारा लेकर आश्रित परिवार को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब कर्मचारी की मृत्यु के पश्चात रिक्ति उत्पन्न हो चुकी थी, और आवेदन भी समय पर प्रस्तुत किया गया था. बैंक द्वारा “रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने” का तर्क तथ्यों एवं नीति दोनों के विपरीत है, तथा यह संवेदनशील मामलों में संस्थागत उत्तरदायित्व की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता. एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा, “जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई, उसी क्षण संबंधित पद रिक्त हो गया था. याचिकाकर्ता ने समयसीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया था, इसलिए बाद में रिक्ति उपलब्ध नहीं होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता.” न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल राहत प्रदान करना है और ऐसे मामलों में संस्थाओं को संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है. न्यायालय ने बैंक द्वारा जारी आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिए. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बैंक द्वारा जारी 30 सितंबर 2022 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर उपलब्ध किसी भी चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है, जहां संस्थाएं तकनीकी आधारों का सहारा लेकर आश्रित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने से बचती रही हैं.

धार सांसद बोले- शर्तों के साथ वाग्देवी प्रतिमा लौटाने को राजी था ब्रिटिश संग्रहालय

धार. ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद धार सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने दावा किया है कि ब्रिटिश संग्रहालय वर्ष 2017-18 में ही प्रतिमा लौटाने पर सहमत हो गया था, लेकिन एक शर्त के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। सावित्री ठाकुर ने बताया कि वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के लिए तत्कालीन राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी केंद्र सरकार की ओर से ब्रिटिश म्यूजियम प्रबंधन से चर्चा कर रहे थे। वर्ष 2014 से 2017 के बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने चार बार भोजशाला का दौरा भी किया था। सावित्री ठाकुर का कहना है कि वर्ष 2017-18 में ब्रिटिश म्यूजियम ने शर्त रखी थी कि वाग्देवी की प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए, जहां पर वह पहले स्थापित थी। उस समय मामला हाई कोर्ट में लंबित होने के कारण यह शर्त पूरी नहीं हो सकी। हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रतिमा को भोजशाला में पुनर्स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वह स्वयं इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करेंगी। बहुचर्चित भोजशाला परिसर में अलग भावनात्मक, धार्मिक और ऐतिहासिक वातावरण है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए शुक्रवार को दिए महत्वपूर्ण फैसले के बाद श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना जारी है। श्रद्धालु निर्धारित शुल्क (एक रुपया प्रति व्यक्ति) देकर परिसर में प्रवेश कर मां वाग्देवी की प्रतिमा के स्थान पर पहुंचकर श्रद्धा, आस्था और भावुकता के साथ नमन कर रहे हैं। लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो मंदिर पक्ष में आए फैसले के बाद भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़े बुजुर्ग कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज के वरिष्ठ लोगों की आंखों में संतोष, भावुकता और वर्षों के संघर्ष के बाद विजय की खुशी एक साथ दिखाई दी। 90 वर्षीय हिंदू नेता विमल गोधा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के कई दशक भोजशाला मुक्ति आंदोलन को समर्पित किए हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब भोजशाला की बात उठाना ही संघर्ष माना जाता था। अब लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो। आंदोलन से जुड़े रहे 75 वर्षीय सुरेशचंद्र भंडारी ने कहा कि यह आंदोलन सांस्कृतिक अस्मिता और इतिहास को बचाने की लड़ाई भी था। शुरुआती दौर में बहुत कम लोग खुलकर आंदोलन के साथ खड़े होते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह जन आस्था का आंदोलन बन गया। अब ऐसा लग रहा है जैसे संघर्ष की हर पीड़ा सार्थक हो गई।

जनता बदलाव चाहती है — नगर निगम चुनाव में बड़ी जीत का भरोसा जताया कुलवंत सिंह ने

चंडीगढ़. हलके के MLA कुलवंत सिंह ने कहा है कि आम आदमी पार्टी नगर निगम चुनाव में भारी जीत हासिल करेगी और नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव आम आदमी पार्टी के जीते हुए उम्मीदवारों में से ही होगा। रिपोर्टर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पिछले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और कई दूसरे उम्मीदवारों ने चुनाव इसलिए नहीं लड़ा क्योंकि वे लोगों का सामना नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा कि पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने जो वादे और दावे किए थे, जिनसे लोगों को गुमराह किया गया था, वे दावे और वादे पूरे नहीं हुए और मोहाली के लोग ऐसे नेताओं को इन चुनावों में सबक सिखाने के मूड में थे, जिसके कारण उन्होंने चुनाव मैदान से भागना ही बेहतर समझा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस पार्टी के कितने उम्मीदवार जीतेंगे, लेकिन वह एक बात कह सकते हैं कि चुनाव में किसी भी तरह की धांधली नहीं होने दी जाएगी और लोकतंत्र को हर कीमत पर जिंदा रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पूरी स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को चुना है और सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है जो सही तरीके से लोगों की सेवा करेंगे और आने वाले समय में हमेशा लोगों के दरबार में मौजूद रहेंगे।

भारत-नेपाल सीमा पर राहत,सुप्रीम कोर्ट ने कस्टम ड्यूटी वसूली पर लगाई अंतरिम रोक

 सोनबरसा  नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल-भारत सीमा से आम नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए कस्टम शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से तराई-मधेश के सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय समेत संबंधित निकायों को निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय आने तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर सीमा शुल्क नहीं वसूला जाए। दरअसल, नेपाल सरकार ने 2 मई 2082 को जारी अधिसूचना के तहत नेपाल-भारत सीमा से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम शुल्क अनिवार्य कर दिया था। इस निर्णय के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में विरोध शुरू हो गया था।लोगों का कहना था कि इससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सरकार के इसी निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह व्यवस्था सीमा शुल्क अधिनियम 2081 की भावना के विपरीत है तथा आम नागरिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रारंभिक तौर पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीर मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। अब अंतिम फैसला आने तक सरकार उक्त प्रावधान के तहत दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कस्टम शुल्क नहीं ले सकेगी। जैसे ही फैसले की बाते बाहर आई देश के सभी महत्वपूर्ण मीडिया ने इसे प्राथमिकता में रखा। अब हर जगह न्यायालय के इस निर्णय पर लोगो का एक ही बात कहना है,जिस देश की अदालत सख्त और इमानदार हो,वहां सरकारें अपनी मनमानी नहीं कर सकती।  

ग्रेनेड अटैक केस में पुलिस को बड़ी सफलता, आरोपी Arrest, अब खुलेंगे कई राज

गुरदासपुर. गुरदासपुर पुलिस ने काउंटर इंटेलिजेंस पंजाब के साथ मिलकर 27 अप्रैल 2026 को गुरदासपुर में गीता भवन रोड के पास भाजपा नेता अटल शर्मा की दुकान अशोक ट्रेडर पर ग्रेनेड फेंकने के मामले को सुलझाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान करनजीत सिंह निवासी तारपुर, अमरजीत सिंह उर्फ ​​बिल्ला निवासी जालंधर और सतनाम सिंह उर्फ ​​मिट्टू निवासी बोपाराय के रूप में हुई है। जब इस बारे में SSP गुरदासपुर आदित्य से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि खुशकिस्मती से तब ग्रेनेड फटा नहीं था और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ था। पुलिस ने टेक्निकल जानकारी, CCTV फुटेज और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर तुरंत कार्रवाई की और ग्रेनेड फेंकने वाले आरोपियों की पहचान कर ली। इस बीच यह भी बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी गुरदासपुर जिले से बाहर के रहने वाले हैं। जांच के दौरान एक आरोपी के घर से दूसरा हैंड ग्रेनेड भी बरामद हुआ है। उन्होंने बताया कि आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड लेकर पूछताश की जाएगी ताकि सारी सच्चाई सामने आ सके। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी विदेश में बैठे एक हैंडलर के कहने पर काम कर रहे थे और उन्हें दो हैंड ग्रेनेड भी उसी हैंडलर ने दिए थे। इस बारे में सिटी गुरदासपुर पुलिस स्टेशन में अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस विदेशी हैंडलर और लोकल साथियों से जुड़े आगे-पीछे के लिंक की जांच कर रही है। पंजाब पुलिस ने कहा है कि वह राज्य में कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पुलिस जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है और इस संबंध में और बड़े खुलासे कर सकती है।

विदिशा में किसानों का सड़क पर हंगामा, बंद खरीदी केंद्र के विरोध में हाईवे जाम

विदिशा. विदिशा जिले के उपार्जन केंद्रों पर जारी कुप्रबंधन और पिछले पांच दिनों से बने बारदाने के गंभीर संकट के कारण शनिवार को किसानों के सब्र का बांध टूट गया। नेशनल हाईवे-146 स्थित धतुरिया के आदित्य वेयरहाउस खरीदी केंद्र पर जब किसानों को ताला लटका मिला, तो आक्रोशित 500 से अधिक किसानों ने नेशनल हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां आड़ी खड़ी कर चक्काजाम कर दिया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि फंसे हुए दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन को बुलडोजर बुलाना पड़ा, जिसने सड़क किनारे मिट्टी डालकर अस्थाई रास्ता बनाया, तब जाकर बाइक सवार वहां से निकल सके। भीषण गर्मी में थमे पहिए, 3 किलोमीटर तक लगी गाड़ियां चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दोपहर के समय पारा 40 डिग्री के पार था, और इस भीषण गर्मी के बीच एक घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस, यात्री बसें और सैकड़ों राहगीर फंसे रहे। छोटे बच्चों और मरीजों के लिए यह एक घंटा बेहद प्रताड़ना भरा रहा। 70 KM दूर से आए किसान बोले- "रात-दिन भूखे-प्यासे दे रहे पहरा" इस केंद्र पर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए किसानों को भीषण धूप में प्रताड़ित होना पड़ रहा है। राकेश चौकसे (धनियाखेड़ी): "हम 11 मई की सुबह ही ट्रॉली लेकर आ गए थे। 5 दिन बीत गए पर तौल नहीं हुई। अब खुले आसमान के नीचे फसल बचाएं या खुद को।" विशाल ठाकुर (कछुआ बरखेड़ा): "रात-दिन ट्रॉली के पास ही भूखे-प्यासे पहरा देना पड़ रहा है। पानी तक की सही व्यवस्था नहीं है।" किसान अवतार सिंह और नीलेश अहिरवार ने बताया कि बारदाना, हम्माल और कांटों की कमी के कारण तौल पहले ही कछुआ गति से चल रही थी, और शनिवार को प्रबंधन ने हाथ खड़े करते हुए केंद्र पर ताला ही जड़ दिया। बारदाना आने पर ही खोला जाम समिति प्रबंधकों ने अपनी लाचारी जताते हुए कहा कि जिला स्तर से बार-बार मांग के बावजूद पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। चक्काजाम की खबर मिलते ही एसडीएम क्षितिज शर्मा और तहसीलदार अजय पाठक पुलिस बल के साथ पहुंचे। पहले तो किसान सिर्फ कागजी आश्वासन पर हटने को तैयार नहीं हुए। जब प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही बारदाने से भरी गाड़ी मंगवाई, तब जाकर किसानों ने हाईवे खाली किया। विपक्ष का आरोप इस पर विपक्ष और किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विनीत दांगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "यह पूरी तरह से प्रशासनिक कुप्रबंधन है। जब किसान पांच दिन से गुहार लगा रहे थे, तब कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जैसे ही चक्काजाम हुआ, एक घंटे के भीतर बारदाने की गाड़ी आ गई। इससे साफ है कि जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही थी।" तुलाई शुरू करवा दी है – धतुरिया केंद्र पर बारदाने की कमी और तौल बंद होने की शिकायत मिलते ही हम पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। किसानों को तुरंत बारदाना उपलब्ध कराकर तुलाई शुरू करवा दी गई है। सभी केंद्रों की व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है। – क्षितिज शर्मा, एसडीएम, विदिशा