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ड्यूटी पर गए पटवारी पर हमला, ट्रैक्टर चढ़ाकर मारने का प्रयास; किसी तरह बचाई जान

 खंडवा  जिले में अवैध रूप से उत्खनन करने वालों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। ग्राम जावर के भकराड़ा में अवैध उत्खनन रोकने गए पटवारी को जान से मारने का प्रयास किया गया। किसी तरह पटवारी ने भागकर अपनी जान बचाई। अवैध उत्खनन करने वालों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपितों की तलाश की जा रही है। पटवारी पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास ग्राम भकराड़ा में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से बुलडोजर से खुदाई कर ट्रैक्टर-ट्रालियों से मुरम निकाली जाने की सूचना पर यहां कार्रवाई के लिए हल्का पटवारी मयंक फुलेरिया जांच के लिए पहुंचे। जांच में पता चला कि अवैध उत्खनन कर पास ही स्थित मुर्गी पालन केंद्र पर मुरम ले जाई जा रही है। जब ट्रैक्टर-ट्रालियां रोकने का प्रयास किया गया, तो चालक कुंदन पुत्र गजेंद्र राजपूत निवासी भकराड़ा ने पटवारी फुलेरिया पर ट्रैक्टर चढ़ाने के लिए आगे बढ़ा दी। मौके से बुलडोजर जब्त, आरोपित फरार पटवारी ने किसी तरह स्वयं को बचाया। मौके पर एक बुलडोजर और चार ट्रैक्टर-ट्रालियां थीं। ट्रैक्टर चालक वाहन सहित यहां से भाग निकले, जबकि मुरम का उत्खनन कर रहा बुलडोजर गड्ढे में फंसने के कारण निकल नहीं सका। बुलडोजर का चालक सावन पुत्र राजू भिलाला निवासी बांगरदा और एक अन्य ट्रैक्टर का चालक मुकेश सोलंकी निवासी बिजोरा भील थे। खंडवा तहसीलदार महेश सोलंकी ने बताया कि मौके से बुलडोजर मशीन को जब्त कर थाना जावर की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 132, 110, 303 (2) व 3 (5) के तहत तथा खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21 एवं 4 के तहत थाना जावर में एफआइआर दर्ज की गई है। पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है।

वेस्ट टू वेल्थ: पॉलिटेक्निक छात्रों ने बनाई सस्ती रीसाइक्लिंग मशीन

अंबाला  बदलते समय के साथ साथ जहां प्लास्टिक कचरा एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बनकर उभर रहा है, वहीं अंबाला के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के छात्रों ने इस समस्या को अवसर में बदलते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. दरअसल चार छात्रों की टीम ने मिलकर एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो वेस्ट प्लास्टिक को 3डी प्रिंटिंग फिलामेंट में बदलकर उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करती है. 7000 में तैयार किया प्रोजेक्ट बता दे कि इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसे मात्र 7000 रुपये की लागत में तैयार किया गया है और इसे बनाने में छात्रों को करीब एक महीने का समय लगा है. छात्रों ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में इस मशीन को विकसित किया, जो अब न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. खासतौर पर इस मशीन की कार्यप्रणाली बेहद सरल और प्रभावी है, इसमें सबसे पहले प्लास्टिक की बोतल को एक कटिंग प्लेट में लगाया जाता है, जहां से वह पतली-पतली स्ट्रिप्स में कट जाती है. इसके बाद इन स्ट्रिप्स को हीटर के माध्यम से गर्म किया जाता है, जिससे वे पिघलकर एक पतले धागे यानी फिलामेंट का रूप ले लेती हैं. यही फिलामेंट 3डी प्रिंटर में इस्तेमाल होकर विभिन्न प्रकार के मॉडल और उत्पाद तैयार करता है. प्लास्टिक कचरे का होगा सही उपयोग वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र सुहैल ने बताया कि आज के दौर में 3डी प्रिंटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इस मशीन के जरिए न केवल प्लास्टिक कचरे का सही उपयोग किया जा सकता है, बल्कि इससे छोटे स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं.उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से चाबी के छल्ले, खिलौने, कार्टून कैरेक्टर और अन्य सजावटी वस्तुएं आसानी से बनाई जा सकती हैं, जिन्हें बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है.उन्होंने बताया कि यह पहल उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो कम संसाधनों में कुछ नया करने का सपना देखते हैं.जहां एक ओर लोग प्लास्टिक कचरे को जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं इस मशीन की मदद से प्लास्टिक कचरे को आय का साधन बनाया जा सकता हैं ओर आने वाले समय में यह “वेस्ट टू वेल्थ” का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आएगा. मशीन के अंदर हीटर मशीन की है मुख्य भूमिका वही राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के अध्यापक अजय ने बताया कि यह मशीन वेस्ट प्लास्टिक को रीसाइकलिंग करके एक बेहतर प्रोडक्ट बनाने में काफी सक्षम है. क्योंकि जिस तरह से लोग अक्सर पानी पीकर प्लास्टिक बोतल को इधर-उधर फेंक देते हैं, तो यह मशीन उस बोतल का उपयोग करके उसे एक 3D मॉडल में बदल देगी. उन्होंने कहा कि जल्द छात्रों द्वारा तैयार की गई इस मशीन को वह मार्केट में भी लॉन्च करेंगे, ताकि जो भी लोग बेरोजगार है उन्हें इस मशीन से एक बेहतर रोजगार मिल सके. उन्होंने बताया कि वैसे तो यह मशीन अभी छोटे साइज में तैयार की गई है लेकिन अगर इसे थोड़े बड़े आकार में बनाया जाए तो यह बड़े स्तर पर भी स्टैचू तैयार कर सकती है. उन्होंने कहा कि इसके अंदर जो हीटर मशीन और पावर सप्लायर है वह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही स्पीड मोटर कंट्रोलर कंप्यूटर की कमांड के बाद कार्य करता है. जिसके बाद यह मशीन काफी कम समय में अलग-अलग तरह के प्लास्टिक मॉडल बना देती है ओर जिसका लोग घरों में सजावट के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.

डिजिटल क्लासरूम और 100% रिजल्ट: तिगांव स्कूल की बदली तस्वीर

फरीदाबाद  हरियाणा का ये स्कूल चर्चा का केंद्र बन गया है. फरीदाबाद के तिगांव गांव में स्थित सरकारी स्कूल की नई बिल्डिंग अब किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं लगती. चमचमाती बिल्डिंग, डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह स्कूल अब आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. एडमिशन का दौर चल रहा है और बड़ी संख्या में बच्चे यहां पढ़ाई के लिए पहुंच रहे हैं. गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल तिगांव, जो अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा एक पुराना स्कूल माना जाता है, अब पूरी तरह नई पहचान के साथ सामने आया है. पहले यहां पुरानी बिल्डिंग में पढ़ाई होती थी लेकिन अब नई बिल्डिंग बनने के बाद स्कूल का पूरा माहौल बदल गया है. हालांकि पुरानी बिल्डिंग अभी भी मौजूद है. उसमें अब पढ़ाई नहीं होती है, पढ़ाई अब नई बिल्डिंग में होती है. हरियाणा सरकार की स्कीम ने बदली सूरत लोकल 18 से बातचीत में अंग्रेजी के प्रवक्ता सुनील नागर बताते हैं कि हरियाणा सरकार ने मॉडल संस्कृति स्कूल योजना के तहत शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल की है. फरीदाबाद में ऐसे 6 स्कूल चुने गए हैं, जिनमें से एक तिगांव का यह स्कूल भी है. इस स्कूल को यहां तक पहुंचाने में मंत्री राजेश नागर का भी अहम योगदान रहा है. सुनील नागर ने बताया कि यह किसी भी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है. न टीचिंग स्टाफ के लेवल पर और न ही सुविधाओं के मामले में. पूरी बिल्डिंग में कैमरे लगे हैं. डिजिटल क्लासरूम हैं. आरओ सिस्टम और वाटर कूलर की सुविधा है. सोलर प्लांट लगा हुआ है. इसलिए बिजली की कोई दिक्कत नहीं होती. 85 गांवों के बच्चे सुनील बताते हैं कि स्कूल में कंप्यूटर लैब और लैंग्वेज लैब भी है. हर क्लास डिजिटल है और पढ़ाई पूरी तरह आधुनिक तरीके से कराई जा रही है. स्कूल में 12 से 13 सेक्शन हैं और हर सेक्शन में करीब 40 बच्चे पढ़ते हैं. यह स्कूल आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम में चलता है जिसमें साइंस में मेडिकल और नॉन-मेडिकल दोनों विकल्प हैं. यहां 84 से 85 गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं. यहां तो उल्टा सिस्टम है लोग शहर से गांव में पढ़ने आते हैं. फरीदाबाद के सेक्टरों से भी बच्चे यहां एडमिशन लेने आते हैं. बच्चों की रुचि जांचने के लिए कभी-कभी टेस्ट लिया जाता है और कुछ मामलों में लकी ड्रॉ के जरिए भी एडमिशन दिया जाता है. यह स्कूल खास तौर पर गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए भी है. एडमिशन आसानी से ले सकते हैं. 100 प्रतिशत रिजल्ट स्कूल के प्रिंसिपल हंसराज ने बताते हैं कि इस स्कूल का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. यहां से पढ़कर कई छात्र क्लर्क से लेकर IAS अधिकारी और मंत्री तक बने हैं. यह हमारे इलाके की बड़ी पहचान है. 2022 में इस स्कूल को हरियाणा बोर्ड से सीबीएसई में अपग्रेड किया गया था. इस बार भी 10वीं का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा है.

चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

पराली पर कंट्रोल की तैयारी: फरीदकोट प्रशासन ने जारी किए नए निर्देश, सख्त निगरानी होगी

फरीदकोट. डिप्टी कमिश्नर पूनमदीप कौर ने फरीदकोट जिले में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासनिक अधिकारियों जैसे विभिन्न विभागों के साथ मीटिंग की। इस मौके पर एस.एस.पी., फरीदकोट डॉ. प्रज्ञा जैन खास तौर पर मौजूद थीं। मीटिंग में मौजूद अधिकारियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने अधीन क्लस्टर और नोडल अधिकारियों के साथ मीटिंग करें और उन्हें गांवों में जाकर किसानों को गेहूं की पराली न जलाने के बारे में जागरूक करने के लिए मजबूर करें। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने एग्रीकल्चर डिपार्टमैंट के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे किसान ट्रेनिंग कैंप, नुक्कड़ मीटिंग, प्रचार वैन, सोशल मीडिया वगैरह के जरिए किसानों को खेतों में गेहूं के डंठल उगाने के लिए मोटिवेट करें। डिप्टी कमिश्नर ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं के डंठलों में आग न लगाकर माहौल बचाने में अपना योगदान दें। इस मौके पर एडिशनल डिप्टी कमिश्नर संदीप मल्होत्रा, पुनीत शर्मा सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट फरीदकोट, कुलवंत सिंह चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर फरीदकोट, गुरप्रीत सिंह एग्रीकल्चर ऑफिसर फरीदकोट, लखवीर सिंह एग्रीकल्चर डिवैल्पमैंट ऑफिसर फरीदकोट, रवि दीप सिंगला एनवायरनमैंटल इंजीनियर फरीदकोट, शुभकरमन सिंह असिस्टैंट एनवायरनमैंटल इंजीनियर पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड फरीदकोट मौजूद थे।

रेत माफिया पर प्रशासन का शिकंजा, 9 वाहन जप्त

रायपुर रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में  राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त जांच के दौरान बम्हनीडीह क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर 2 हाइवा वाहनों को जब्त कर थाना बम्हनीडीह के सुपुर्द किया गया। वहीं जांजगीर क्षेत्र में 3 ट्रैक्टर जब्त कर खनिज विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा गया। इसके अलावा देवरहा, पीथमपुर, हाथनेवरा, गढ़ापाली, केवा नवापारा और जांजगीर मुख्य मार्ग पर जांच के दौरान 4 और हाइवा अवैध रेत परिवहन करते पाए गए, जिन्हें जब्त कर पुलिस लाइन खोखरा में सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23(ख) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

आवास को लेकर बढ़ी खींचतान: झुग्गियों पर सरकारी कर्मचारियों ने भी ठोका हक

भोपाल. भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित तुलसी मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच की जमीन पर बनी 27 झुग्गियों को हाल ही में प्रशासन ने हटाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद यहां रह रहे परिवारों को मालीखेड़ी स्थित प्रधानमंत्री आवासों में पुनर्वासित किया गया है। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर की गई, लेकिन अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। झुग्गियों के हटने के बाद कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जो दावा कर रहे हैं कि वहां उनकी झुग्गी थी। इनमें एक शासकीय कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं, जिससे पूरे मामले की जांच और जटिल हो गई है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के दौरान सामान के गायब होने और नुकसान के आरोप लगाए हैं। प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि पूरी प्रक्रिया रहवासियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। अब प्रशासन द्वारा प्राप्त दावों और शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सर्वे के आधार पर किया गया पुनर्वास प्रशासन के अनुसार कार्रवाई से पहले आदिवासी बस्ती का विस्तृत सर्वे किया गया था। इस दौरान 27 परिवारों के नाम और दस्तावेज एकत्र कर सूची तैयार की गई, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि केवल पात्र परिवारों को ही पुनर्वास का लाभ दिया है। फर्जी दावों से बढ़ी उलझन झुग्गियां हटने के बाद दो नए दावेदार सामने आए हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त मंत्रालय कर्मचारी महेश सोंधिया और दूसरे वन विभाग में पदस्थ मनीष जायसवाल हैं। दोनों ने अलग-अलग झुग्गियों पर अपना दावा किया है, जबकि सर्वे में इन स्थानों पर अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। एसडीएम ने दोनों से निवास के प्रमाण मांगे हैं। प्रभावित परिवारों के गंभीर आरोप करीब 20 प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान उनका कीमती सामान गायब हो गया या नष्ट हो गया। कुछ लोगों का कहना है कि उनके घरों की अलमारियां, जेवर, नकदी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कार्रवाई के बाद वे अपने पुराने स्थान पर जाकर सामान ढूंढना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश रोक दिया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पक्की दीवार और बैरिकेडिंग कर दी है। पालीटेक्निक चौराहे से सीएम हाउस जाने वाले मार्ग पर 20 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, ताकि कोई अवांछित गतिविधि न हो सके। प्रशासन का पक्ष एसडीएम दीपक पांडे ने स्पष्ट किया है कि झुग्गियों को हटाने से पहले सभी रहवासियों की मौजूदगी में उनका सामान सुरक्षित रूप से शिफ्ट कराया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का सामान मलबे में नहीं दबा और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई। 10 से अधिक आवेदन पहुंचे सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से अधिक आवेदन एसडीएम कार्यालय में प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें लोग झुग्गी पर अपना दावा कर रहे हैं। प्रशासन इन सभी मामलों की जांच कर रहा है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

अजब-गजब मामला खरगोन से: महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया

खरगोन  अक्सर फिल्मों और कहानियों में एक साथ कई खुशियां दरवाजे पर दस्तक देती हैं, ठीक वैसा ही कुछ यहां देखने को मिला, जब एक साधारण परिवार की जिंदगी एक ही रात में बदल गई. रात का सन्नाटा था, अस्पताल के बाहर परिजन बेचैनी से इंतजार कर रहे थे. हर बीतता पल चिंता बढ़ा रहा था, लेकिन अंदर डॉक्टरों की टीम एक मुश्किल जंग लड़ रही थी. फिर अचानक खुशखबरी आई एक नहीं, दो नहीं, बल्कि चार बच्चों की किलकारी एक साथ गूंजी है।  मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया. खास बात यह है कि इन चारों नवजातों में दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं।  बच्चों की हो रही विशेष निगरानी जानकारी के मुताबिक, बड़वाह तहसील के मेहपुरा गांव की रहने वाली पूजा को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात डॉक्टरों की टीम की निगरानी में डिलीवरी कराई गई, जिसमें महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया. डॉक्टरों के अनुसार, यह डिलीवरी काफी जटिल थी, लेकिन मेडिकल टीम की सतर्कता से सभी बच्चों का सुरक्षित जन्म हो सका. चारों नवजातों का वजन करीब 700 ग्राम से 1 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. डॉक्टरों का कहना है कि इतनी कम वजन में जन्म लेना जोखिम भरा होता है, इसलिए बच्चों को लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।  फिलहाल मां और चारों बच्चे अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस अनोखी घटना की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है, लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं.

पुलिस विभाग में तबादलों की लहर: रायपुर में 136 कर्मियों का हुआ ट्रांसफर, कई थानों में बदलाव

रायपुर. राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। रायपुर कमिश्नरेट में व्यापक स्तर पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई गति और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला द्वारा जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया है। इस आदेश के साथ ही सभी तबादलों की विस्तृत सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है। इस तबादला सूची में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि यह सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस बल में व्यापक पुनर्गठन है। कई पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान थानों से हटाकर नए थानों, चौकियों और विशेष इकाइयों में पदस्थ किया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से अहम कदम ऐसे बड़े पैमाने पर तबादले आमतौर पर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कार्यक्षमता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलने से न सिर्फ नई ऊर्जा आती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है। कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा असर रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में यह फेरबदल शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नए स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और कार्यशैली से संबंधित क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। विभागीय रणनीति का हिस्सा पुलिस विभाग समय-समय पर इस तरह के बदलाव करता रहता है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या स्थानीय प्रभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में अनुभवी पुलिसकर्मियों की तैनाती भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इससे अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा को मजबूती मिलती है। कर्मचारियों के लिए नई चुनौती तबादले के बाद पुलिसकर्मियों के सामने नए कार्यस्थल, नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें नए क्षेत्र की परिस्थितियों को समझते हुए तेजी से खुद को ढालना होगा। वहीं, आम जनता को भी नई तैनाती के बाद पुलिस से बेहतर सहयोग और सेवा की उम्मीद है। बता दें रायपुर कमिश्नरेट में हुआ यह बड़ा फेरबदल प्रशासन की सक्रियता और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह बदलाव शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में कितना कारगर साबित होता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां रेलवे ओवरब्रिज के लिए भू-अर्जन का कार्य एक माह में पूर्ण कर निर्माण करें शुरू

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति समीक्षा की। उन्होंने आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां चौराहे तक बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह ओवरब्रिज क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आम जनता की सुविधा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को एक माह में जमीन अधिग्रहण और भू-अर्जन की कार्यवाही पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने तथा कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने पिपलानी से खजूरी कलां तक बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए ट्रांसफॉर्मर और स्ट्रीट लाइट्स की पर्याप्त व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि उक्त स्थान पर नाली निर्माण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। राज्यमंत्री गौर ने ग्लोबल स्किल पार्क के पास पुलिया एवं मार्ग निर्माण के संबंध में अधिकारियों को 15 मई तक अतिक्रमण हटाकर अलाइनमेंट और अन्य आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। इसके साथ ही उन्होंने सोनागिरी सतनामी नगर से अयोध्या बायपास मार्ग और पुलिस थाना बागसेवनिया से एचडीएफसी बैंक तक मार्ग निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर जनता को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।