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अल्प समय में ही 61 जटिल जीवन-रक्षक प्रक्रियाएँ सफल

भोपाल  विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से विभाग ने एक माह से भी कम समय में 61 से अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं विभाग का निरीक्षण कर इन उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उन्नत ईआरसीपी, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और विभाग की दक्षता की सराहना की। मध्यप्रदेश के सबसे उन्नत 'एडवांस्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्किल लैब' के माध्यम से अस्पताल ने न केवल अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि की है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए जीवनदायिनी भी सिद्ध हुआ है। सफल रही 61 प्रक्रियाओं में से एक बड़ी संख्या उन जीवन-रक्षक हस्तक्षेपों की है, जिनमें सक्रिय रक्तस्राव से जूझ रहे मरीजों का समयबद्ध एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस किया गया। यदि ये आधुनिक सुविधाएं यहाँ उपलब्ध न होतीं, तो मरीजों को अन्य बड़े शहरों के केंद्रों में रेफर करना अनिवार्य हो जाता, जिससे उपचार में देरी के साथ-साथ मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जान-माल का खतरा भी बना रहता। वर्तमान में यह विभाग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एम.एच. उस्मानी के कुशल नेतृत्व और सह-प्राध्यापक डॉ. प्रदीप निगम के सहयोग से अपनी अधिकतम परिचालन क्षमता पर कार्य कर रहा है। अस्पताल अब उन्नत इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी सेवाएं प्रदान करने में आत्मनिर्भर हो चुका है। इन सुविधाओं के विस्तार से अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल बीमारियों का सटीक उपचार संभव हो पा रहा है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अनावश्यक रेफरल और आर्थिक चुनौतियों से बड़ी राहत मिली है।  

भाजपा की रणनीति तेज, राज्यसभा की तीसरी सीट पर आदिवासी प्रत्याशी पर मंथन

भोपाल मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें जून महीने में रिक्त हो रही हैं। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चा में था, लेकिन दतिया में संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इसकी दो वजहें हैं-पहली, कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करना और दूसरी, विपक्ष के खेमे में सेंध लगाना। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव संभावित हैं, उनमें से एक पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट से केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। तीनों का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। लेकिन कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर सियासी गणित इस बार उलझता दिख रहा है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लंबित होने के बावजूद झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर लगभग 62 रह गए हैं।     दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। अभी यह संख्या तो कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रास वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है।     भाजपा आदिवासी प्रत्याशी उतारती है तो कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन भी उसे मिल सकता है। यही, दांव चलकर भाजपा कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने का प्रयास कर सकती है।     पार्टी के पास 164 विधायक हैं, यानी दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास करीब 48 वोट बचेंगे।     यदि कांग्रेस में क्रास वोटिंग होती है और कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो भाजपा तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सकती है।     कांग्रेस में फिलहाल मीनाक्षी नटराजन व कमल नाथ सहित कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं। लेकिन, भाजपा की रणनीति देखकर कांग्रेस भी आदिवासी या दलित चेहरे को मौका दे सकती है।  

6.91 लाख किसानों से 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 6 लाख 91 हजार किसानों से 34 लाख 73 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक 14 लाख 64 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 5462.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

JMM-कांग्रेस में दूरी बढ़ने के संकेत, राज्यसभा चुनाव पर असर की आशंका

रांची  झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है। जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है। असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है। सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है। इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।  

उप मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती का निरीक्षण

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने रविवार हरिहर धाम स्थित खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया।  शुक्ल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सहायकों और कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुँचाता है।  शुक्ल ने प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

चित्तौड़गढ़: भक्तों की ‘पार्टनरशिप भक्ति’ से बढ़ा सांवलिया सेठ का खजाना

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में इस साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। पिछले एक साल में मंदिर के भंडार में 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जो पिछले 34 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इस दान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा 'भक्ति के मुनाफे' का है। दुनिया के सबसे अनोखे 'बिजनेस पार्टनर' भक्तों के बीच मान्यता है कि सांवलिया जी यहां 'सेठ' के रूप में विराजमान हैं। यही कारण है कि देशभर के बड़े कारोबारी और शेयर बाजार के खिलाड़ी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। यहां दान केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि 'पार्टनरशिप डीड' के तहत आता है। स्टाम्प पेपर पर होती है 'साझेदारी' यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भक्त यहां बाकायदा स्टाम्प पेपर पर पार्टनरशिप करार बनवाकर लाते हैं। मंदिर में इस तरह के पत्र चढ़ाए जाते हैं- 'मैं निवासी जयपुर, यह साझेदारी करार श्री सांवलिया मंदिर के साथ करता हूं कि मेरे शेयर बाजार और व्यापारिक स्रोतों से होने वाले मुनाफे में 10% हिस्से की साझेदारी ठाकुर जी की रहेगी।' जब मन्नत पूरी होती है और व्यापार चमकता है, तो भक्त अपनी कंपनी के लेटर हेड पर पूरी जानकारी लिखकर लाखों-करोड़ों की राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं। 34 साल का रिकॉर्ड टूटा, मुनाफे में डूबे भक्त भक्तों का अटूट विश्वास है कि एक बार अगर 'सांवलिया सेठ' को अपना पार्टनर बना लिया, तो व्यापार कभी घाटे में नहीं जाता। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ता है, मंदिर के भंडार में आने वाली 'प्रॉफिट शेयरिंग' भी बढ़ती जाती है। इसी का नतीजा है कि इस वित्तीय वर्ष में चढ़ावे ने 337 करोड़ का जादुई आंकड़ा छू लिया है।  

पटना में शराब तस्करी का नेटवर्क, होम डिलीवरी से लेकर ‘निंजा तकनीक’ तक का खुलासा

पटना राजधानी के पॉश इलाके कंकड़बाग में 'प्योर मिल्क' (शुद्ध दूध) का मतलब पाश्चुरीकृत दूध का कोई पैकेट नहीं है। ये महंगी ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की का एक कोड वर्ड है, जो जासूसी नजरों से बचने के लिए टेट्रा पैक में आती है। सूखे बिहार (शराबबंदी) में जहां पिछले 10 वर्षों से शराबबंदी ने 'सोनपापड़ी' को महंगी शराब (जो झारखंड, यूपी और बंगाल से तस्करी कर लाई जाती है) के कोड में बदल दिया है। यहां, ये अवैध कारोबार न केवल जीवित है, बल्कि चूहे-बिल्ली के खेल की तरह फल-फूल रहा है। कई जिलों, कस्बों और राजधानी पटना में 'समोसेवाला', 'ग्रॉसरीवाला' और 'संन्यासी बाबा' उन युवाओं के लिए कोड वर्ड हैं, जो समय पर विदेशी शराब (IMFL) की होम डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं' बिहार अप्रैल 2016 से 'ड्राई' है, लेकिन यह केवल कागजों पर है। वास्तव में ये एक बेहद प्यासी भूमि है, जहां अधिकांश पिज्जा डिलीवरी से भी तेज एक सटीक होम-डिलीवरी सिस्टम काम कर रहा है। शराबबंदी ने एक फलता-फूलता काला बाजार बना दिया है, जहां युवा एजेंटों द्वारा शराब दरवाजे तक पहुंचाई जाती है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, ये एजेंट एक सक्रिय अवैध सप्लाई चेन की साइलेंट समझ के साथ काम करते हैं। शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के एक दशक बाद भी शराब की मांग खत्म नहीं हुई है। ये बस पर्दे के पीछे चली गई है। पटना के कई पॉश इलाकों में होम डिलीवरी के धंधे में शामिल 'ट्यूशन मैम', 'नर्स मैम' और 'पार्लरवाली' उन युवतियों के कोड हैं, जो शराब की डिलीवरी करती हैं। पटना में होम-डिलीवरी एजेंट मुन्ना से मुलाकात हुई। वो फॉर्मल शर्ट पहनता है। स्कूटर चलाता है और लैपटॉप बैग ले जाता है। उसने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) संवाददाता से कहा, 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं।' साथ ही जोड़ा कि वो 'खुशी' यूपी या झारखंड से तस्करी कर लाई गई प्रीमियम विदेशी शराब होती है। मुन्ना की सबसे बेहतरीन तरकीब ब्रांडेड कंपनियों के खाने के खाली डिब्बों के अंदर छिपी बोतलें पहुंचाना है। वो 'किराना-वाला' बनकर घरों में जाता है। 5 मिनट में 'संन्यासी बाबा' की डिलिवरी पटना के मोहल्लों में शराबबंदी ने पार्टियों को नहीं रोका। बस, उन्हें गुप्त बना दिया। 'संन्यासी बाबा' से भी मुलाकात हुई, जो एक स्थानीय होम-डिलीवरी नेटवर्क के अनौपचारिक सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) हैं। जहां प्रमुख ऐप्स 10 मिनट में किराना सामान पहुंचाते हैं, वहीं 'संन्यासी' का नेटवर्क पांच मिनट में डिलीवरी करता है, बेशक अतिरिक्त शुल्क के साथ। यहां ब्रांड के आधार पर 180 मिलीलीटर के पैक की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 600 रुपये तक हो जाती है। ये सिस्टम लगभग अचूक है। कोई दुकान या साइनबोर्ड नहीं है। बस 'हेल्थ एंड फिटनेस' नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। एक मैसेज 'दो प्रोटीन शेक' और 'दो प्योर मिल्'क चाहिए। कुछ ही मिनटों में एक 'दूधवाला' भारी दूध के केन लेकर मोटरसाइकिल पर आ जाता है। विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बिहार की शराबबंदी नीति भारत के सबसे विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बनी हुई है, जो मापने योग्य सामाजिक लाभों, भारी राजकोषीय लागतों और प्रवर्तन की लगातार विफलताओं से चिह्नित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के जरिए से शुरू किया गया ये प्रतिबंध शराबखोरी, गरीबी और घरेलू हिंसा को कम करने के लिए महिलाओं की मांगों के जवाब के रूप में पेश किया गया था। एक दशक बाद, इसका रिकॉर्ड एक तरफ घरेलू कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, तो दूसरी तरफ राजस्व का पतन, काले बाजार का विस्तार और न्यायिक बोझ के बीच बुरी तरह विभाजित है। कानूनी बाजार के गायब होने से मांग खत्म नहीं हुई। इसके बजाय, इसने एक विशाल अवैध व्यापार के लिए जगह बना दी। अनुमान बताते हैं कि बिहार में अब 25,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये की समानांतर शराब अर्थव्यवस्था चल रही है। इसके अलावा, दशक भर की शराबबंदी ने आम नागरिकों को 'आविष्कारशील' तस्करों में बदल दिया है, जिनकी इंजीनियरिंग की महारत बड़े-बड़े मैकेनिकों को मात दे सकती है। बिहार में शराब तस्करी का 'निंजा तकनीक' तस्करों ने हाल ही में वो अपनाया है जिसे पुलिस 'निंजा तकनीक' कहती है। फरवरी में एक व्यक्ति को अपनी मोटरसाइकिल से बंधी खोखली प्लास्टिक की कुर्सियों के अंदर छिपाई गई दर्जनों बोतलों के साथ पकड़ा गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा' से प्रेरणा लेते हुए, किशनगंज जिले में ताजे टमाटर और गोभी के नीचे छिपाई गई 862 लीटर विदेशी शराब ले जाते हुए तस्करों को पकड़ा गया। मुजफ्फरपुर जाने वाला एक साधारण सब्जी का ट्रक लग रहा था, लेकिन आखिरकार व्हिस्की की गंध सब्जियों की खुशबू पर भारी पड़ गई और भेद खुल गया। नवादा में पुलिस ने एक ऐसी मोटरसाइकिल बरामद की जिसका ईंधन टैंक पूरी तरह से शराब के लिए इस्तेमाल किया गया था। बाइक को चालू रखने के लिए तस्करों ने सीट के नीचे एक छोटा सा अलग पेट्रोल बॉक्स लगाया था। शराब के पाउच या बोतलें कटे हुए गैस सिलेंडरों, पानी के टैंकरों और एम्बुलेंस के अंदर भी ठूंस दी जाती हैं। सारण में 'स्वच्छ भारत अभियान' और 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' जैसे सरकारी नारों वाला एक टैंकर हरियाणा निर्मित व्हिस्की के 330 कार्टन से भरा पाया गया। शराब तस्करी में इस्तेमाल कोडवर्ड का मतलब बिहार में शराब तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कोड वर्ड्स और उनके असली मतलब जानें।     प्योर मिल्क: पॉश इलाकों में 'महंगी स्कॉच व्हिस्की' के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड।     सोनपापड़ी: पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई गई 'महंगी शराब' का गुप्त नाम।     प्रोटीन शेक: वाट्सऐप ग्रुप्स पर 'शराब की बोतलों' के ऑर्डर के लिए कोड।     संन्यासी बाबा: स्थानीय शराब नेटवर्क के 'मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड' का नाम।     समोसेवाला/ग्रॉसरीवाला: घर पर शराब पहुंचाने वाले 'युवा डिलीवरी एजेंटों' की पहचान।     हेल्थ एंड फिटनेस: शराब के शौकीनों के लिए बना गुप्त 'वाट्सऐप सप्लाई ग्रुप'।     ट्यूशन मैम/नर्स मैम/पार्लरवाली: होम डिलीवरी करने वाली 'महिला एजेंटों' के कोड।     खुशियां: डिलीवरी एजेंटों की ओर से प्रीमियम 'विदेशी शराब' के लिए संबोधन।     निंजा तकनीक: खाली कुर्सियों या सब्जियों के नीचे 'शराब छिपाने' का तरीका।     दूधवाला: मोटरसाइकिल पर दूध के केन में 'शराब की खेप' ढोने वाला। सूखे नशे की चपेट में … Read more

गंगा दशहरा पर जल स्त्रोतों की साफ-सफाई में योगदान दें प्रदेशवासी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के प्रेरक मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पानी को सहेजने के कार्य में जन-जन को जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनभागीदारी आधारित जल संचय अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं बल्कि प्रदेशवासियों की जागरूकता, सहभागिता और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जल संरक्षण और प्रकृति अनुरूप रहन-सहन की व्यवस्था भारतीय जीवनशैली और परम्पराओं में सदियों से रची-बसी है। हमारे यहां नदी-तालाब-कुंओं की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना गया है। इन गतिविधियों के धार्मिक महत्व को देखते हुए गंगा दशहरा 25 मई को जल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और पौधरोपण के लिए श्रमदान तथा अन्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों का पुण्य प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक नागरिक गंगा दशहरा पर अपने आस-पास के जल स्त्रोतों और जल संरचनाओं की साफ-सफाई तथा रखरखाव के कार्य से जुड़ें। जनसामान्य की यह पहल मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में एक आदर्श व अनुकरणीय राज्य के रूप में देश में प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए। जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल करना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संचय भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 लाख 64 हजार 119 कार्य पूर्ण हुए हैं। जिला स्तर पर डिण्डौरी और खण्डवा जिले देश में क्रमश: प्रथम और द्वितीय रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर, सुरक्षित और सस्टेनेबल धरती सौंपना हमारा दायित्व है, जो बिना पर्याप्त जल की उपलब्धता के संभव नहीं है। अत: जल संरक्षण के कार्य में जन-जन को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों, स्वंयसेवी संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, व्यापारिक संगठनों तथा अन्य सभी संस्थाओं से पानी बचाने की गतिविधियों में जुड़ने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी बचाने और जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने के लिए भी लोग आगे आएं। जल संरक्षण के लिए स्कूल, कॉलेज और संस्थाएं कर रही हैं जन-जन को प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार, नगरीय और ग्राम स्तर पर अनेक गतिविधियां संचालित कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 2 लाख 43 हजार 887 कार्यों के लिए 6 हजार 232 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में 45 हजार 132 खेत-तालाब, 68 अमृत सरोवर, 77 हजार 975 डगवेल रिचार्ज औ वॉटर शेड से संबंधित 3 हजार 346 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। नगरीय क्षेत्र में भी तालाबों, कुंओं, बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने, नाले-नालियों की साफ-सफाई आदि का कार्य जारी है। नगरीय निकायों द्वारा 3 हजार 40 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग इकाईयां स्थापित की गई हैं। जन सहयोग से बड़े पैमाने पर प्याऊ सेवा संचालित की जा रही हैं। स्कूल, कॉलेजों और जन अभियान परिषद से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से जन-जन को अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही, विवाद से बचने की दी सलाह : मौलाना रजवी

बरेली यूपी के बरेली शहर में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। मौलाना ने शरीयत का हवाला देते हुए इस फैसले को सही बताया है। शनिवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि कोर्ट का निर्णय पूरी तरह सही और दुरुस्त है। शरियत के नजरिये का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि अगर किसी जगह नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है, इसलिए ऐसे किसी भी कार्य से बचना जरूरी है जिससे सामाजिक सौहार्द्र प्रभावित हो। दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थान सबके लिए है। धार्मिक आजादी के नाम पर इस पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब सार्वजनिक भूमि की बात आती है तो ये साफ है कि ये सबके लिए है और कानून से कंट्रोल होती है। कोई भी शख्स नियमित धार्मिक आयोजनों के इस्तेमाल के लिए इस पर दावा नहीं कर सकता। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने आबादी भूमि के हिस्से के निजी परिसर में नमाज की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थान के इस्तेमाल पर आम जनता के आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सभी की बराबर पहुंच करे। आपराधिक केस है तो शासनादेश के तहत जारी करें चरित्र प्रमाण पत्र : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्यआदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र रोका नहीं जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को शासन द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतीश कुमार की याचिका पर उसके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती व सरकारी वकील को सुनकर दिया है। याची ने याचिका में एडीजी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याची का चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि याची के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है।

CID की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के घोटाले में नकदी और संपत्ति बरामद

 रांची झारखंड के जिला कोषागारों से अवैध तरीके से वेतन निकासी के करोड़ों रुपये के घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई की। SIT ने गुरुवार को बोकारो के एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपित के घर से नकदी की बरामदगी   यह इस घोटाले में अब तक की चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार सिपाही काजल मंडल बोकारो स्टील सिटी का निवासी है। पुलिस की पूछताछ और उसकी निशानदेही पर SIT ने बोकारो स्थित उसके आवास पर छापेमारी की, जहां से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह राशि अवैध तरीके से सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मुख्य आरोपित के साथ साठगांठ जांच में यह खुलासा हुआ है कि काजल मंडल इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और लेखापाल (Accountant) कौशल कुमार पांडेय का सक्रिय सहयोगी था। कौशल पांडेय ने यात्रा मद (Travel Allowance) और अन्य मदों से प्राप्त अवैध राशि काजल मंडल के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सिपाही ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में इस राशि को घर में छिपाने की बात स्वीकार की है। इस मामले में SIT पूर्व में ही तीन अन्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है:         कौशल कुमार पांडेय: मुख्य आरोपित, लेखापाल (एसपी कार्यालय)।         सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: सहयोगी गृह रक्षक।         अशोक कुमार भंडारी: एएसआई (ASI) और सहयोगी। ये तीनों वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। अब काजल मंडल सहित सभी चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर अन्य साथियों और नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। जब्त संपत्तियों का विवरण SIT ने इस घोटाले की जांच के दौरान अब तक करोड़ों की संपत्ति और दस्तावेज जब्त किए हैं :         भूमि व मकान: बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल और 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज। साथ ही, उक्त भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान।         फिक्स्ड डिपॉजिट: विभिन्न बैंकों में जमा 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज (Seize) कर दिया गया है।         नकद: ताजा कार्रवाई में जब्त 8.75 लाख रुपये। राज्य सरकार के आदेश पर SIT की पैनी नजर झारखंड सरकार के कड़े रुख के बाद CID की विशेष टीम बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज अवैध निकासी के मामलों की जांच कर रही है। SIT ने इन सभी मामलों को टेकओवर करते हुए रांची के CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड पर पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।