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राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है राज्य सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार जिले के सिरसोदिया में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 400 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने नव-दंपत्तियों पर पुष्पवर्षा कर दिया आशीर्वाद धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण और उनके उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह संकल्पित है। सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल और सहयोग के जीवंत प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर धार जिले के ग्राम सिरसोदिया में 'मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना' के अंतर्गत आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सांस्कृतिक महत्व और सामाजिक आधार  मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले की यह पावन धरा भगवान कृष्ण एवं माता रुक्मणी की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ी है, जिससे इस मांगलिक आयोजन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि विवाह हमारी गौरवशाली संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी और समाज का आधार है। प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ एक सच्चे मित्र की तरह हमेशा खड़ी है। अभिभावक के रूप में निभाई भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं अभिभावक का दायित्व निभाते हुए सभी 400 नव-विवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।         मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेरा यह सौभाग्य है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों के विवाह में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ। भारतीय संस्कृति में विवाह एक श्रेष्ठ और पवित्र संस्कार है यह 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण है जिसे "पाणिग्रहण संस्कार"भी कहा जाता है। सरकार की इस योजना के माध्यम से उन सभी गरीब अभिभावकों की इस चिंता को खत्म किया है।जिससे वे बेटियों की शादी को बोझ नहीं वरदान समझे।  इस योजना के माध्यम से गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों को उनकी बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता की जाती है। नवविवाहित जोड़ों को 49 हजार रूपए की राशि का अर्थिक सहयोग दिया जाता है। क्षेत्रीय विधायक कालुसिंह ठाकुर, प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि,वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित रहे।  

श्री अकाल तख्त ही अकाली दल की नई शुरुआत का केंद्र — करनैल सिंह पीरमोहम्मद का बड़ा बयान

तरनतारन. शिरोमणि अकाली दल की मौजूदा हालत और पार्टी के लगातार गिरते पॉलिटिकल ग्राफ पर गहरी चिंता जताते हुए शिरोमणि अकाली दल (पुनर् सुरजीत) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट करनैल सिंह पीरमोहम्मद ने शिरोमणि अकाली दल बादल पार्टी के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल को कड़ी सलाह दी है। उन्होंने साफ किया कि गलत सलाहकारों के बहकावे में आकर स्वर्गीय जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा जैसे दिग्गज टकसाली नेताओं के परिवारों को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए पॉलिटिकल सुसाइड साबित होगा। पीरमोहम्मद ने कहा कि अकाली गुटों की एकता को मजबूत करने और पंथिक एकता को फिर से कायम करने का एकमात्र तरीका श्री अकाल तख्त साहिब की सुप्रीमेसी के लिए खुद को समर्पित करना है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल को अच्छी सलाह देते हुए कहा कि पार्टी के आगे के फैसले श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति समर्पण के साथ लिए जाने चाहिए और पोस्ट बांटते समय 2 दिसंबर के हुक्मनामे को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ इशारा किया कि सिर्फ राजनीतिक जोड़-तोड़ और पोस्ट बांटने से पार्टी मजबूत नहीं होगी, बल्कि हर वर्कर और टकसाली लीडर को यह एहसास कराना होगा कि पार्टी में उनका मान-सम्मान सुरक्षित है।  गलत सलाहकारों की चालों में फंसकर लिए गए फैसलों ने हमारी ताकत बिखेर दी है और पंथक रैंकों में भारी निराशा पैदा कर दी है। अपनी लीडरशिप को आत्मचिंतन की सलाह देते हुए पीरमोहम्मद ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम निजी फायदे छोड़कर श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मों को सबसे ऊपर मानें। इसी में पंथ के उत्थान और अकाली दल के फिर से खड़े होने का राज छिपा है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (पुनर् सुरजीत) ने पहल करते हुए आठ सदस्यों वाली 'एकता कमेटी' बनाई है, जो श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित पंथिक संगठनों के साथ तालमेल करके पंथिक एकता के विचार को पूरा करेगी।

बाल आयोग का बड़ा कदम, ‘सार्थक अभियान’ से बच्चों के भविष्य को मिलेगा नया बल

सार्थक अभियान’ को मिला बल, बच्चों के भविष्य के लिए बाल आयोग का बड़ा कदम अरुण साव जी की मानवीय संवेदनशीलता पर आभार उपमुख्यमंत्री अरुण साव जी के सहयोग से जूडो खिलाड़ी रंजीता को मिलेगी मदद आयोग अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा की "सार्थक" पहल रंग लाई  रायपुर माननीय उप मुख्यमंत्री अरुण साव जी से छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने भेंट की । उन्होंने छत्तीसगढ़ के बाल गृह कोंडागांव की पूर्व छात्रा कु रंजीता कुरैठी के बारे में बताया कि उसने जूडो में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीते हैं और भारतीय दल में शामिल रही है । डॉ वर्णिका शर्मा ने माननीय अरुण साव जी को बताया कि इस बच्ची को प्रशिक्षण हेतु जापान भेजने और मासिक रूप से अतिरिक्त पोषक आहार के लिए राशि की जरूरत है । माननीय अरुण साव उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ने फौरन अपनी संवेदनशीलता दिखाई और बच्ची से तुरंत वीडियो कॉल पर बात की । उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक सहायता देने की व्यवस्था के निर्देश दिए । डॉ वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा आरम्भ किए गए सार्थक अभियान के तहत पिछले बाल देखरेख संस्थाओं को छोड़कर जाने वाले अट्ठारह वर्ष की आयु के बालक बालिकाओं के भविष्य निर्माण के लिए आयोग द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं । इसी कड़ी में ये प्रयास भी शामिल है । डॉ वर्णिका शर्मा ने आयोग की ओर से माननीय उपमुख्यमंत्री जी की इस सार्थक और संवेदनशील  पहल के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है । इस अवसर पर डॉ वर्णिका शर्मा ने बच्चों के खेल मैदानों को सुरक्षित करने ,आवारा कुत्तों से बच्चों के बचाव और नगरीय क्षेत्र में खुले गड्ढे के चारों ओर बाड़ी लगाकर बच्चों को बचाने के संबंध में भी बातचीत की । उपमुख्यमंत्री जी ने इन विषयों को तत्काल आगामी विभागीय बैठक में शामिल करते हुए ठोस कार्यवाही का आश्वासन दिया ।

सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

सिंहस्थ महापर्व 2028 के अंतर्गत उज्जैन शहर में निरंतर किए जा रहे हैं विकास कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने उज्जैन में 18 करोड़ रुपए की लागत की सड़क का किया लोकार्पण उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ महापर्व 2028 के अंतर्गत उज्जैन शहर में निरंतर विकास के कार्य किए जा रहे हैं। शहर के सौंदर्यीकरण की दिशा में आज एक और सौगात शहरवासियों को मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से सभी नागरिकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन प्रवास के दौरान 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कोठी रोड संकुल से देवास रोड और विक्रम नगर तक मार्ग चौडीकरण और उन्नयन कार्य का लोकार्पण कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकार्पण के बाद मार्ग पर चलकर यहां किए गए विकास कार्यों का अवलोकन किया तथा स्थानीय जनता से भी भेंट की। लोकार्पण के दौरान वेद पाठी बटुकों के द्वारा मंत्रोच्चार और स्वस्ती वाचन किया गया। साथ ही कलापथक दल द्वारा आकर्षक प्रस्तुति और झांझ मंजिरे और डमरु वादन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी इस अवसर पर डमरु वादन किया गया। इस अवसर पर महापौर मुकेश टटवाल, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संजय अग्रवाल, एमआईसी सदस्य शिवेन्द्र तिवारी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि उक्त विकास कार्य नगर निगम के द्वारा किया गया है। लगभग 02 कि.मी. लंबा यह मार्ग देवास रोड़ से कोठी लिंक रोड़ होता हुआ विक्रम नगर की तरफ मिलेगा। यहां पर मार्ग के बीच में और दोनों तरफ पौधारोपण और आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है। साथ ही मार्ग के दोनों तरफ सुबह और शाम की पैदल सैर करने के लिए पेवर ब्लाक भी बनाए गए हैं। इससे सौंदर्यीकरण के साथ-साथ यातायात भी सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होगा। इस मार्ग से जिला न्यायालय परिसर और अन्य प्रमुख कार्यालयों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। जिससे आमजन को सुविधा होगी। मार्ग में प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था भी की गई है। कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र व्यास स्वामी मुस्कुराके ने किया।  

रायपुर: ग्राम माकड़ी में आयोजित हुआ जनसमस्या निवारण शिविर, 13 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की शुरुआत

रायपुर : ग्राम माकड़ी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन विधायक सुउसेण्डी ने 13 करोड़ रूपए की लागत के विकास कार्यों की दी सौगात शासकीय महाविद्यालय सहित 18 निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन रायपुर  राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों का लगातार आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दूरस्थ अंचलों के गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को  कोंडागांव जिले के ग्राम माकड़ी में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और कोंडागांव विधायक सुलता उसेंडी उपस्थित रहीं।  विधायक सुउसेंडी ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकास कार्यों के साथ-साथ आम नागरिकों को व्यक्तिगत योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक गांव के सर्वांगीण विकास हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से क्षेत्र स्वस्थ बस्तर की दिशा में अग्रसर है, जिसके तहत विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से अपील की कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जब घर-घर पहुंचे, तो उन्हें सही जानकारी प्रदान करें, ताकि सभी के लिए स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हेतु सामूहिक सहभागिता पर जोर दिया। साथ ही युवाओं सहित सभी नागरिकों से अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। कलेक्टर ने कहा कि माओवादमुक्त होने के पश्चात शासन द्वारा बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु बस्तर मुन्ने अभियान के साथ सुशासन तिहार का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, योजनाओं के शत-प्रतिशत सेचुरेशन सुनिश्चित करने के लिए ‘नियद नेल्लानार 2.0’ की भी शुरुआत की जा रही है। विधायक ने प्री. मेट्रिक आश्रम में क्लास रूम निर्माण कार्य लागत 19 लाख रूपए, कन्या आश्रम में क्लास रूम निर्माण कार्य लागत 19.39 लाख रूपए, प्री. मे. बालक छात्रावास में क्लासरूम निर्माण लागत 19.39 लाख रूपए, लैब निर्माण कार्य लागत 22.89 लाख रूपए, नीति आयोग द्वारा लाइब्रेरी निर्माण कार्य 42 लाख रूपए, हीरावण्डी से बालेंग तक पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य लंबाई 6.50 किलोमीटर लागत 685.29 लाख रूपए और शासकीय महाविद्यालय माकड़ी निर्माण कार्य लागत 465.84 लाख रूपए सहित कुल लागत 13 करोड़ 79 लाख रूपए के 18 विकास कार्यो का भूमिपूजन किया   27 हितग्राहियों को मिली आवास की चाबी शिविर में ग्रामवासियों से विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर कुल 57 आवेदन प्राप्त हुए। शिविर स्थल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 27 हितग्राहियों को आवास निर्माण पूर्ण होने पर प्रतीकात्मक चाबी वितरित, समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को 07 छड़ी और 10 हितग्राहियों को पेंशन स्वीकृति, शिक्षा विभाग द्वारा 12 जाति प्रमाण पत्र और गणवेश वितरण, श्रम विभाग द्वारा 07 श्रम कार्ड, खाद्य विभाग द्वारा 46 राशन कार्ड, उद्यान विभाग द्वारा  वर्मी बेड प्रदान किए गए। राजस्व विभाग द्वारा  किसान किताब, कृषि विभाग द्वारा  05 हितग्राहियों को उड़द बीज वितरण, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को पोषण किट और 02 गोद भराई कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इसी प्रकार पशुधन विभाग द्वारा श्रीमती योगश्वरी प्रधान को राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता योजना से 70 हजार, उन्नत मादा वत्स पालन योजना अंतर्गत दीपेन्द्र साहू को 14 हजार 625 रूपए और श्रीमती सुपोती मरकाम को 17 हजार 550 रूपए, त्रयी सुकर योजना अंतर्गत मंगलु मरकाम और मुकेश नेताम 09-09 हजार रूपए की अनुदान राशि दी गई। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, सहकारी समिति द्वारा 06 नवीन केसीसी धारक किसानों को ऋण स्वीकृति और राजस्व विभाग द्वारा 09 किसानों को डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक सेवकराम नेताम, दीपेश अरोरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जुगबती पोयाम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रदमा बघेल एवं श्रीमती भगवती नेताम, जनपद उपाध्यक्ष बैसाखु कोर्राम, दीपेश अरोरा, जनपद सदस्य पन्नालाल नेताम, पूजा शर्मा, विरेन्द्र प्रधान, श्रीमती रूखमणी पोयाम, जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, जनपद पंचायत सीईओ गजेंद्र धुरडे, सरपंचगण, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रायपुर: बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान

रायपुर : बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं रायपुर  खैरागढ़, छुईखदान, गंडई जिले के कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशानुसार बीते दिनों विकासखंड छुईखदान के बैगा बहुल ग्राम सरई पतेरा एवं लालपुर में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बैगा जनजाति की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पद्मफुलबासन यादव के मार्गदर्शन में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के महत्व एवं उससे होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि समूह से जुड़कर वे अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं, साथ ही सामाजिक रूप से भी सशक्त बन सकती हैं। इस दौरान महिलाओं को समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। अभियान में लगभग 150 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें से कई महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए संभावित सदस्यों की सूची तैयार कर आगे समूह गठन की प्रक्रिया को गति देने की पहल की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अधिकारी-कर्मचारी, डीपीएम, बीपीएम, एसी, पीआरपी, एफएलसीआरपी, सक्रिय महिलाएं, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पचमढ़ी में गर्म जलवायु में सेब के बागान, मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे स्थान पर पर्यटकों का आकर्षण

नर्मदापुरम  देश के चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल पचमढ़ी विभिन्न वैरायटी के आमों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां शासकीय पोलो उद्यान ने नया प्रयोग करके सभी को हैरान कर दिया है. पचमढ़ी में जल्द ही सेब बागान आकर्षण का केंद्र होंगे. क्योंकि यहां हिमाचल प्रदेश के सेब के पौधे लगाकर उत्पादन करने का प्रयोग सफल हो गया है. दो साल पहले गर्म वातावरण में भी फल देने वाले सेब की तीन वैरायटियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें फल आने लगे हैं. जिसका स्वाद अगस्त-सितंबर महीने में पकने पर मिल पाएगा. इसी के साथ ही प्रदेश की दूसरी सरकारी नर्सरियों में भी सेब के पौधे लगाने की तैयारी होगी. वहीं किसानों को पचमढ़ी के उद्यान में पौधे तैयार करके लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिससे गर्म वातावरण में पैदा होने वाले सेब किसानों की आय का जरिया बन सकें।  सभी वातावरण में मिलते हैं फल पचमढ़ी के शासकीय पोलो उद्यान में लगाए गए 500 पौधों में से 35% फलदार हो गए हैं. वहीं 40% पौधों में फूल लगे हैं, जो जल्द ही फल बनने की प्रक्रिया में पहुंच जाएंगे. दो साल पहले पोलो उद्यान की दो एकड़ जमीन पर हिमाचल प्रदेश की एचआर 99, अन्ना इजरायल और डोरसेट गोल्डन वैरायटी के पौधों का रोपण हुआ था. यह पौधे वहां की प्राइवेट नर्सरियों से लाए गए थे. जो अब चार से पांच फीट तक ऊंचाई के हो गए हैं. सेब की इन वैरियटयों का चुनाव गर्म और सर्द वातावरण में पौधों के पनपने और फल देने के कारण किया गया था. इन वैरायटी के सेब पौधों को ज्यादा ठंडे वातावरण की आवश्यकता नहीं होती है. सामान्य तापमान में भी सेबों की पैदावार होती है. पचमढ़ी के वातावरण में सेब के पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण यह फल देने लगे हैं।  सेब से मिल सकता है लाखों का मुनाफा पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर बताया, "शुरुआत के 4 साल बाद एक सेब के पौधे से 25 से 30 किलो तक फल मिल सकते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे पौधा बड़े पेड़ का रूप लेगा तब उत्पादन दोगुना हो जाएगा. एचआर 99 प्रजाति के 800 पौधे एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं. यदि किसान 1 एकड़ में 500 पौधे लगाकर उत्पादन लेता है तो एक पौधे से 25 किलो के हिसाब से कुल 12500 किलो सेब प्राप्त कर सकता है. जिसका थोक मूल्य 4 से 5 लख रुपए तक जा सकता है।  सेब लगाने का प्रयोग हुआ सफल पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर ने बताया, "2 साल पहले पचमढ़ी में सेब के उत्पादन का प्रयोग किया गया था. जो सफल हुआ है. हिमाचल प्रदेश से जो पौधे ले गए थे आज इनमें फूल और फल दोनों लग रहे हैं. प्रदेश में पचमढ़ी का वातावरण हिमाचल के सेब पौधों के लिए उपयुक्त था, क्योंकि यहां गर्मी में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक रहता है. सर्दी में एक डिग्री तक तापमान पहुंचता है. मिश्रित वातावरण के कारण सेब का बागान लगाने का प्रयोग सफल हुआ है।  उन्होंने आगे बताया, "अगस्त में जो फल लगे हैं वह पकना शुरू होंगे. तब यह देखा जाएगा कि कितने पौधों से कितना उत्पादन हुआ. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ाई जाएगी और मैदानी क्षेत्र की नर्सरी और किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. किसानों को सेब के पौधे और उनका उत्पादन बढ़ाने का उन्नत प्रशिक्षण देने की भी हमारी तैयारी है. भविष्य में पचमढ़ी के साथ कई अन्य स्थानों पर भी सेब के बागान देखने को मिल सकते हैं। 

6.83 लाख महिलाओं को हर महीने मिल रही आर्थिक ताकत, डॉ. बलजीत कौर का बड़ा बयान

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य की विधवाओं और बेसहारा महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के मार्च महीने के लिए सरकार ने 102 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जारी की है। इस बारे में जानकारी शेयर करते हुए सोशल सिक्योरिटी, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार समाज के कमजोर तबके, खासकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह फाइनेंशियल मदद हजारों महिलाओं के लिए एक सहारा बन रही है, जिससे वे अपनी रोज़ाना की ज़रूरतें पूरी कर सकती हैं और भरोसे के साथ ज़िंदगी जी सकती हैं। मंत्री ने कहा कि अभी राज्य की 6,83,004 विधवाएं और बेसहारा महिलाएं इस स्कीम का फायदा उठा रही हैं और उन्हें हर महीने रेगुलर पेंशन दी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए, सरकार ने हर योग्य बेनिफिशियरी को बिना किसी रुकावट के मदद मिले, यह पक्का करने के लिए 1200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट प्रोविजन किया है। उन्होंने कहा कि 58 साल से कम उम्र की विधवा और बेसहारा महिलाएं, 30 साल से ज़्यादा उम्र की अविवाहित महिलाएं और 60,000 रुपये तक की सालाना इनकम वाली महिलाएं इस स्कीम के लिए एलिजिबल हैं। मिनिस्टर ने दोहराया कि पंजाब सरकार महिलाओं के एम्पावरमेंट और वेलफेयर के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और ऐसी स्कीम महिलाओं को इज्ज़तदार ज़िंदगी जीने में मदद कर रही हैं।

किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर कर रहा कार्य: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल. किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभ का धंधा बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खरीफ सीजन-2026 के मद्देनजर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी करते हुए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर तैयारी कर रहा है। किसानों के लिए समसामयिक सलाह मिट्टी परीक्षण कराएं : बोवनी से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। सभी विकासखंडों में निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। बीज उपचार जरूरी : सोयाबीन, मूंग, उड़द व मक्का की बोवनी से पहले फफूंदनाशक व राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करें। इससे 15-20 प्रतिशत उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। मौसम आधारित बोवनी : 4 इंच बारिश के बाद ही बोवनी करें। ‘एमपी किसान ऐप’ पर 7 दिन का मौसम पूर्वानुमान देखकर निर्णय लें। अन्न को अपनाएं : कम पानी में तैयार होने वाली कोदो, कुटकी, रागी जैसी मिलेट फसलों का रकबा बढ़ाएं। सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। प्राकृतिक खेती : रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घन-जीवामृत व वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें। लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी। कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास मंत्री कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विभाग किसानों के कल्याण के लिए युद्ध-स्तर पर कार्य कर रहा है। खरीफ-2026 के लिए 28 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज, 45 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण पूरा कर लिया गया है। कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है औरकंट्रोल रूम सक्रिय हैं। ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ के तहत 75 हजार हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 25 हजार नए खेत तालाब स्वीकृत किए गए हैं। ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से 1.5 लाख किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या 2500 की गई है। ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ में लगभग 90 लाख किसानों को सालाना 6000 रुपये की सहायता दी जा रही है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और निर्यात से जोड़ा जा रहा है। ‘ओडीओपी’ के तहत हर जिले का विशेष उत्पाद ब्रांड किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश का किसान देश में सबसे समृद्ध हो। विभाग का हर अधिकारी-कर्मचारी खेत तक पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करेगा। किसान किसी भी समस्या के लिए कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर, ‘एमपी किसान ऐप’ या नजदीकी कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वयं अपना स्वगणना फॉर्म भरा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जनगणना–2027 अंतर्गत स्व-गणना प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से स्व-गणना फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सहज है। उप मुख्यमंत्री ने समस्त नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह आधुनिक डिजिटल सुविधा नागरिकों को घर बैठे सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से जनगणना में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। कोई भी नागरिक पोर्टल पर लॉगिन कर कुछ आसान प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी एवं अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है। उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और जनगणना कार्य को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। सभी स्व-गणना करें और सशक्त, पारदर्शी एवं डेटा-संपन्न भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। उल्लेखनीय है कि जनगणना–2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य एक मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना हेतु पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस अवधि में नागरिक अपनी स्व-गणना समय रहते पूर्ण कर सकते हैं, जिससे आगामी प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके। इससे नागरिकों को घर, कार्यालय अथवा किसी भी स्थान से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से सुरक्षित रूप से जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलती है। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि डेटा संग्रहण को अधिक सटीक एवं प्रभावी भी बनाता है। जनगणना–2027 में पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जो एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त एवं समावेशी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास के लिए आवश्यक आंकड़ों का संकलन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। जनगणना का द्वितीय चरण, जिसमें जनसंख्या गणना की जाएगी, फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगा। इस दृष्टि से वर्तमान स्व-गणना प्रक्रिया नागरिकों को प्रारंभिक चरण में ही जुड़ने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी शशिकांत शुक्ला उपस्थित रहे।