samacharsecretary.com

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने कुशीनगर में दिखाई असीम संभावनाओं की राह तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव से बौद्ध पर्यटन केंद्रों में जुड़ेंगे कई ऐतिहासिक अध्याय लखनऊ उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की योगी सरकार की आकांक्षा में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनने जा रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह आध्यात्मिक गलियारा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली माध्यम बन रहा है। हाल ही में कुशीनगर में संपन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ा है जिसने इन केंद्रों पर वैश्विक निवेश के दरवाजे खोले हैं जो उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।  आस्था से अर्थव्यवस्था तक का सफर उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है और इसके आंकड़े स्वयं इसकी कहानी कह रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु पर 82 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। यह संख्या बताती है कि विश्वभर के बौद्ध अनुयायी और पर्यटकों की दृष्टि में अब उत्तर प्रदेश की पहचान एक अनिवार्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरी है। इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि विदेशी पर्यटकों के लिए अनुभव को सहज और आकर्षक बनाया जा सके। बौद्ध सर्किट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। कुशीनगर कॉन्क्लेव से वैश्विक मंच पर यूपी की छाप कुछ दिनों पहले हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने कुशीनगर को एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर केंद्र में ला खड़ा किया है। इस भव्य आयोजन में 2,300 से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आये विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे वास्तविक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि कॉन्क्लेव के दौरान 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि बौद्ध सर्किट केवल श्रद्धा की धरती ही नहीं, बल्कि निवेश और विकास की उर्वर भूमि भी है। 2047 का विजन को बौद्ध सर्किट से मिलेगी उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धार्मिक पर्यटन के विजन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है। पर्यटन विभाग के ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ का  रोडमैप इसे और विस्तार देगा जिसमें बौद्ध सर्किट की भी बड़ा योगदान होगा। इस रोडमैप के तहत राज्य का लक्ष्य है कि पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या, जो अभी सात है, उसे बढ़ाकर 20 तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना है।  आध्यात्मिक राजधानी का सपना, बौद्ध सर्किट की ताकत भगवान बुद्ध ने जिस धरती पर अपना पहला उपदेश दिया, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया और जहां उनके अनुयायियों ने सदियों तक ज्ञान की लौ जलाए रखी, वह धरती आज उत्तर प्रदेश के रूप में एक नई वैश्विक पहचान गढ़ने को तैयार है। राज्य सरकार की सुनियोजित नीतियां, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्तावों ने यह पहचान गढ़ी है।

बंगाल में ‘हजार करोड़ की डील’ के वीडियो के बाद ओवैसी की पार्टी ने हुमायूं कबीर की पार्टी से तोड़ा गठबंधन

कोलकाता पश्चिम बंगाल में बीच चुनाव भी गठबंधनों का गणित बदलने का सिलसिला जारी है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी बना ली थी. हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन कर असदुद्दीन ओवैसी  की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अपनी सियासी जड़े जमाने की कोशिश में थी।  इस बार मिलकर चुनावी रणभूमि में उतरने का ऐलान करने वाली दोनों पार्टियों की राहें अब जुदा हो गई हैं. ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है. एआईएमआईएम ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल से पोस्ट कर कहा है कि पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ेगी. आगे किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं किया जाएगा।  एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर के बयानों से किनारा करते हुए कहा है कि पार्टी किसी भी ऐसे बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिसमें मुस्लिमों की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाए जाएं. एआईएमआईएम की ओर से कहा गया है कि आज के हालात में पार्टी ने हुमायूं कबीर के दल के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है।  एआईएमआईएम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा है कि बंगाल के मुस्लिम देश के सबसे गरीब, उपेक्षित और उत्पीड़न का शिकार समुदायों में से एक हैं. पार्टी ने लेफ्ट और टीएमसी पर तंज करते हुए कहा कि दशकों तक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष शासन के बावजूद पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों के लिए कुछ खास नहीं किया गया।  ओवैसी की पार्टी ने इसी पोस्ट में यह भी कहा है कि किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने को लेकर एआईएमआईएम की नीति यह है कि हाशिए पर मौजूद समुदायों को एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिले. एआईएमआईएम की ओर से यह ऐलान हुमायूं कबीर का वीडियो वायरल होने के बाद आया है।  वायरल वीडियो में क्या था तृणमूल कांग्रेस ने एक वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बीजेपी के साथ मिलकर एक हजार करोड़ रुपये का खेल करने की बात थी. टीएमसी ने दावा किया था कि मुस्लिमों की भावनाओं का इस्तेमाल कर उनके वोट बीजेपी की ओर मोड़ने की कोशिशें हो रही हैं. फिरहाद हकीम ने टीएमसी नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वीडियो जारी किया, जिसमें हुमायूं कबीर किसी से बात करते दिखाई दे रहे हैं।  हुमायूं कबीर इस वीडियो में कहते दिखाई दे रहे हैं कि बाबरी मस्जिद बनेगी या नहीं, ये छोड़ो. एक हजार करोड़ रुपये आएंगे. मुस्लिम बहुत भोले हैं, उनको बेवकूफ बनाना बहुत आसान है. टीएमसी ने हुमायूं कबीर और बीजेपी के बीच हजार करोड़ रुपये की डील का दावा किया था. इस वीडियो पर हुमायूं कबीर की सफाई भी आई थी. हुमायूं कबीर ने वीडियो को एआई जेनरेटेड बताते हुए कहा था कि टीएमसी की ओर से लगाए गए सभी आरोप गलत हैं।   हुमायूं कबीर ने क्या कहा था हुमायूं कबीर ने कहा था कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह हैं. साल 2019 के बाद इनमें से किसी से भी कोई संपर्क नहीं है. उन्होंने टीएमसी को चुनौती दी कि 2019 के बाद किसी बीजेपी नेता से मुलाकात की फोटो या सबूत हो, तो दिखाएं. हुमायूं कबीर ने इस मामले में फिरहाद हकीम और कुणाल घोष के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही थी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: बुनकरों की आय और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी प्रमुख प्राथमिकता

बुनकरों की आय, सम्मान और स्थायित्व सुनिश्चित करना प्राथमिकता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्लस्टर आधारित विकास से बुनकरों को बाजार, डिजाइन और तकनीक से जोड़ें: मुख्यमंत्री हथकरघा क्षेत्र को वैल्यू चेन मॉडल पर विकसित करें, केवल उत्पादन तक सीमित न रहें:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री का जोर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्रांडिंग से बुनकरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जाए पॉवरलूम बुनकरों के विद्युत बिल में कमी लाने के लिए बेहतर प्रयासों की जरूरत, तैयार करें व्यवहारिक कार्ययोजना: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुनकर केवल परंपरा के संवाहक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त आधार हैं। ऐसे में उनकी आय, सम्मान और आजीविका की स्थिरता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बुनकरों के सामने कच्चे माल की बढ़ती लागत, डिजाइन और आधुनिक तकनीक का अभाव तथा सीमित बाजार पहुंच जैसी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल योजनागत सहायता से नहीं, बल्कि एक सुदृढ़ एवं समन्वित तंत्र विकसित कर ही संभव है। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में परिणामोन्मुख, क्लस्टर-आधारित नई कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। गुरुवार को हथकरघा विभाग की समीक्षा बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में लगभग 1.99 लाख बुनकर कार्यरत हैं और उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश में छठवें स्थान पर है। कालीन, दरी एवं मैट के उत्पादन में प्रदेश अग्रणी है, जबकि बेडशीट, फर्निशिंग और ब्लैंकेट जैसे उत्पादों में भी राज्य की मजबूत उपस्थिति है। वर्ष 2024-25 में देश का कुल हथकरघा निर्यात ₹1178.93 करोड़ रहा, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान ₹109.40 करोड़ (लगभग 9.27 प्रतिशत) रहा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बुनकर बहुल क्षेत्रों की पहचान कर वहां क्लस्टर विकसित किए जाएं, ताकि उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन को एकीकृत किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये क्लस्टर केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर पूर्ण वैल्यू चेन के रूप में विकसित हों, जहां डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच एक ही ढांचे में सुनिश्चित हो। बैठक में क्लस्टर चयन, बेसलाइन सर्वे, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, प्रभावी क्रियान्वयन तथा सतत अनुश्रवण जैसे पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक क्लस्टर में सीमित संख्या में बुनकरों को संगठित कर पंजीकृत इकाइयों के रूप में विकसित किया जाए, जिससे सामूहिक उत्पादन और विपणन को बढ़ावा मिले। साथ ही, इन क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरणों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो। डिजाइन और विपणन को सुदृढ़ बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पाद की सफलता बाजार की मांग के अनुरूप होने पर ही संभव है। उन्होंने ‘डिजाइनर-कम-मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव’ तथा ‘डिजाइन हाउस/सोर्सिंग-बाइंग एजेंसी/एक्सपोर्ट हाउस’ जैसे संस्थागत तंत्र को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। इससे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, बड़े बाजारों तक पहुंच और बुनकरों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और ब्रांडिंग के विस्तार पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि बुनकरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जा सके।  बैठक में मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों के विद्युत बिल में कमी लाने के लिए बेहतर प्रयासों की जरूरत भी बताई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस संबंध में हतकरघा विभाग और पॉवर कॉर्पोरेशन मिलकर कार्ययोजना तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे बुनकरों की विद्युत लागत में कमी आएगी और उन्हें दीर्घकालिक राहत मिलेगी। उन्होंने इस दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का बुनकर समुदाय राज्य की समृद्ध परंपरा, रोजगार और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अतः ऐसी संतुलित, पारदर्शी और व्यावहारिक नीति तैयार की जाए, जिससे बुनकरों को वास्तविक राहत मिले, उद्योग को नई गति मिले और प्रदेश की पारंपरिक बुनकरी को सशक्त आधार प्राप्त हो सके। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान जी की उपस्थिति रही।

लखनऊ कोर्ट ने रोहिंग्या-बांग्लादेशी मानव तस्करी केस में 9 आरोपियों को दोषी करार, 7-8 साल की सजा

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानव तस्करी के एक बड़े मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है. NIA और यूपी एटीएस से जुड़े इस केस में विशेष न्यायाधीश जैनेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने नौ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई है।  अदालत ने जिन्हें सजा सुनाई है, उनमें मोहम्मद नूर समेत रहमतुल्ला, शबीउररहमान, इस्माइल, अब्दुल शकूर, आले मियां, मोहम्मद रफीक, बप्पन और मोहम्मद हुसैन शामिल हैं. इन सभी को मानव तस्करी का दोषी पाया गया है. इनमें से मोहम्मद नूर सहित कई को 8 साल की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को 7 साल की कैद हुई है. सभी दोषियों पर अलग-अलग राशि का जुर्माना भी लगाया गया है।  जांच एजेंसियों के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह था, जो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में एंट्री दिलाता था. इस गैंग का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और यह लंबे समय से एक्टिव था।  गैंग का तरीका बेहद संगठित और सुनियोजित था. महिलाओं को शादी का झांसा देकर उन्हें बेच दिया जाता था, जबकि पुरुषों और बच्चों को फैक्ट्रियों में काम दिलाने के नाम पर शोषण का शिकार बनाया जाता था. इस तरह यह गिरोह मानव तस्करी कर रहा था।  इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब यूपी एटीएस ने मोहम्मद नूर को सर्विलांस पर लिया. इसके बाद 26 जुलाई 2021 को उसे गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया. उसकी गिरफ्तारी के बाद कई पीड़ितों को मुक्त कराया गया और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई गई।  जांच के दौरान दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई और गैंग के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में यह भी सामने आया कि त्रिपुरा बॉर्डर के जरिए पैसों लेकर अवैध तरीके से घुसपैठ कराई जाती थी, जिसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया जाता था. इस पूरे ऑपरेशन के जरिए सुरक्षा एजेंसियों ने एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। 

ईमानदार है आम उपभोक्ता, बिना गलती किसी का बिजली कनेक्शन न काटा जाए: मुख्यमंत्री

विशेषज्ञ समिति बनाकर स्मार्ट मीटर शिकायतों की जांच कराएं:मुख्यमंत्री ईमानदार है आम उपभोक्ता, बिना गलती किसी का बिजली कनेक्शन न काटा जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, ऊर्जा मंत्री और पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक फील्ड में दौरा कर उपभोक्ताओं की समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित कराएं हेल्पलाइन नम्बर एक्टिव रहे, सनस्याओं का करायें समुचित समाधान: मुख्यमंत्री निर्बाध और पारदर्शी बिजली हमारी प्राथमिकता, कृषि फीडरों का पृथक्करण का काम समय से पूरा कराएं: मुख्यमंत्री बेहतर हुई डिस्कॉम्स की राष्ट्रीय रेटिंग, मुख्यमंत्री योगी ने कहा रिफॉर्म जारी रखें  मुख्यमंत्री योगी का निर्देश, गर्मी में पीक डिमांड पूरी करने में कमी न हो, तैयारी पूरी रखें न्यूनतम 05 आवास वाले मजरों में भी विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाए, पीएम कुसुम योजनाओं से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के निर्देश विजिलेंस को मुख्यमंत्री योगी का निर्देश, ऐसी कार्रवाई न करें कि आम आदमी परेशान हो मुख्यमंत्री का निर्देश, ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए आम आदमी को न होना पड़े परेशान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त उपभोक्ताओं की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए इसकी गहन जांच के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से ईमानदार होता है और यदि उसे समय पर सही बिल प्राप्त हो, तो वह भुगतान करने में कोई हिचक नहीं करता। मुख्यमंत्री ने ओवरबिलिंग की समस्या की वास्तविक स्थिति का पता लगाने हेतु विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है, तो उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का वास्तविक लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे, इसके लिए विश्वसनीय आपूर्ति, तकनीकी दक्षता और जवाबदेही को आधार बनाकर कार्य किया जाए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस में कमी, उपभोक्ता सेवाओं के डिजिटलीकरण तथा राजस्व संग्रह में सुधार को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बिलिंग और भुगतान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को समय पर और सटीक बिल उपलब्ध कराने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली को उपभोक्ता विश्वास के अनुरूप बनाने तथा शिकायतों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऊर्जा मंत्री एवं पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित व प्रभावी निराकरण सुनिश्चित कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर पूरी तरह सक्रिय रहें तथा प्राप्त शिकायतों का समुचित और समयबद्ध समाधान किया जाए, ताकि आम उपभोक्ता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या वर्ष 2017 के 1.65 करोड़ से बढ़कर 2026 में 3.71 करोड़ से अधिक हो गई है, जो लगभग 126 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में विद्युत भार में लगभग 80 प्रतिशत तथा ऊर्जा बिक्री में 63 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में कुल ऊर्जा बिक्री 1.27 लाख मिलियन यूनिट तथा कनेक्टेड लोड 84,000 मेगावाट से अधिक है। घरेलू उपभोक्ता कुल कनेक्शनों का 87 प्रतिशत हैं, जबकि राजस्व में वाणिज्यिक एवं औद्योगिक वर्ग का योगदान सर्वाधिक है। डिस्कॉम्स के प्रदर्शन में सुधार पर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि राष्ट्रीय रेटिंग में और सुधार सुनिश्चित किया जाए तथा वितरण अवसंरचना को और सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया को और तेज किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जहां नए विद्युत पोल लगाए जा रहे हैं, वहां उनकी गहराई, केबल की गुणवत्ता एवं अन्य तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बिजली लाइनों को चरणबद्ध रूप से भूमिगत किए जाने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित एवं गति देने के निर्देश दिए। प्रिवेंटिव मेंटेनेंस को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉल्ट-फ्री सप्लाई के लिए नियमित रखरखाव अनिवार्य है। बैठक में बताया गया कि प्री एवं पोस्ट मानसून अभियानों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत तथा बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति में लगभग 48 प्रतिशत की कमी आई है। स्मार्ट मीटरिंग एवं राजस्व सुधार की समीक्षा में बताया गया कि 84 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं तथा फीडर मीटरिंग में लगभग 95 प्रतिशत प्रगति हुई है।  ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि न्यूनतम 05 आवास वाले मजरों में भी विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही डबल ग्रुप सप्लाई एवं कृषि फीडर पृथक्करण के कार्यों को समयबद्ध पूर्ण किया जाए, ताकि ओवरलोडिंग की समस्या का समाधान हो सके। उपभोक्ता सेवाओं के अंतर्गत 1912 कॉल सेंटर, ऑनलाइन पोर्टल, सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत निस्तारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा सिंगल विंडो मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए गए। उत्पादन क्षमता के संतुलित विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तापीय इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित रखा जाए तथा ग्रीष्मकालीन मांग के दृष्टिगत आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि उत्पादन से जुड़े सभी मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 12,247 मेगावाट तापीय तथा 526.4 मेगावाट जल विद्युत क्षमता उपलब्ध है तथा वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच ₹3,143 करोड़ का संचयी लाभ अर्जित किया गया है। घाटमपुर की 660 मेगावाट इकाई अप्रैल में संचालन प्रारंभ करेगी। मुख्यमंत्री ने 5,600 मेगावाट की नई परियोजनाओं; मेजा, ओबरा-डी एवं अनपरा-ई को शीघ्र स्वीकृति देकर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही 500 मेगावाट सौर एवं 50 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने तथा न्यूक्लियर पावर के लिए चल रहे सर्वेक्षण को शीघ्र पूर्ण करने को कहा। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत 4.60 लाख से अधिक रूफटॉप (1560 मेगावाट) स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने निर्देश … Read more

एलडीए की सबसे सस्ती स्कीम, वरुण नगर में घर बनाने का सपना होगा सच और जून में शुरू होगी बुकिंग

लखनऊ   एलडीए की ओर से अब तक की सबसे सस्ती जमीन वाली आवासीय योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जेठ के किसी बड़े मंगल पर लॉन्च कर सकते हैं। वरुण नगर योजना हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने पर हजरतगंज से सीधे जुड़ जाएगी। एलडीए की जो चार नई आवासीय योजनाएं आ रही हैं उनमें वरुण नगर योजना में जमीन सबसे सस्ती होगी। आगरा एक्सप्रेस-वे के पास प्रस्तावित इस योजना में जमीन की कीमत अधिकतम 2500 रुपये प्रति वर्गफीट होगी। एलडीए की अन्य तीन प्रस्तावित आवासीय योजनाओं में किसी में भी जमीन की कीमत इतनी कम नहीं होगी। इस योजना का भूमि पूजन में जेठ में पड़ने वाले किसी एक बड़े मंगल पर मुख्यमंत्री के हाथों से कराने की योजना पर काम चल रहा है। राजधानी में एलडीए की चार नई आवासीय योजनाएं आने वाली हैं। इसमें सीतापुर रोड और आईआईएम रोड पर नैमिष नगर, सुल्तानपुर रोड पर आईटी सिटी और वेलनेस सिटी तथा आगरा एक्सप्रेसवे पर वरुण नगर योजना शामिल है। आईटी और बेलनेस सिटी के लिए जमीन लैंडपूलिंग से ली जा रही है जबकि नैमिष नगर और वरुण नगर में सहमति के आधार पर बैनामा से खरीदी जा रही है। जानिए, किस योजना में जमीन का कितना रेट है प्रस्तावित इनमें आईटी सिटी में जमीन का रेट करीब 4000 रुपये प्रति वर्गफीट प्रस्तावित है। वेलनेस सिटी में यह रेट 4200 रुपये प्रति वर्गफीट रहने का अनुमान है। नैमिष नगर में जमीन का रेट करीब 3000 रुपये प्रति वर्गफीट प्रस्तावित है जबकि वरुण नगर में यह रेट करीब 2500 रुपये प्रस्तावित है। ऐसे में चारों योजनाओं में यह सबसे सस्ती योजना होगी। बोते वर्ष मोहान रोड पर एलडीए ने अनंत नगर योजना लॉन्च की थी, वहां पर जमीन का रेट 3900 रुपये प्रति वर्गफीट रखा गया था। इसलिए यहां कम होगी कीमत जानकारों ने बताया कि चारों योजनाओं में सबसे महंगी जमीन वेलनेस सिटी की है। उसके बाद आईटी सिटी और फिर नैमिष नगर और उसके बाद वरुण नगर की है। यहां पर एलडीए की जमीन का रेट करीब 70 लाख रुपये बीघा पड़ रहा है जबकि नैमिष नगर में यही रेट करीब 1.25 करोड़ रुपये बीघा पड़ रहा है। आईटी सिटी और वेलनेस सिटी में जमीन लैंडपूलिंग से ली जा रही है। ऐसे में यहां पर एलडीए को जमीन खरीदनी नहीं पड़ रही है मगर यहां पर अभी जो रेट है वह 1.25 करोड़ से लेकर 1.50 करोड़ रुपये बीघा चल रहा है। एलडीए लैंडपूलिंग के तहत जमीन देने वालों को रुपये के बदले 25 प्रतिशत विकसित जमीन दे रहा है। तब 20 मिनट में पहुंचेंगे हजरतगंज योजना से जुड़े एक जानकार ने बताया कि हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने की योजना है। इसके बनने के बाद वरुण नगर से कालिदास चौक (हजरतगंज क्षेत्र) तक का सफर महज 20 मिनट में पूरा हो जाएगा। ऐसे में यह योजना एक तरह से गोमती नगर के टक्कर की हो जाएगी क्योंकि यहां पर 300 एकड़ का पार्क और 150 एकड़ की एक झील भी विकसित की जा रही है। हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने की योजना कई वर्ष से चल रही है मगर अभी अमल में नहीं आ सकी है। बसपा सरकार में लालबहादुर शास्त्री मार्ग और सदर तक कुछ हिस्से पर रोड बनी है। कालिदास चौक से पारा के मोहान रोड तक हैदर कैनाल करीब नौ किमी लंबाई में है। इस पर एलिवेटेड रोड बनने से शहर के करीब दस लाख से अधिक की आबादी का आवागमन आसान हो जाएगा। ये है योजना की पूरी डिटेल – 2664 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होगी वरुण नगर योजना – 2100 प्लॉट निकाले जाएंगे – कैलाश और काशी, दो खंड में बंटी होगी योजना योजना में शामिल गांव: भलिया, आदमपुर, इंदवारा, बहरु, जलियामऊ, मदारपुर, इब्राहिमगंज, नकटौरा, गहलवारा, तेजकृष्ण खेड़ा, रेवरी व सकरा। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का कहना है कि वरुण नगर योजना का भूमि पूजन जून माह में बड़े मंगल के दिन कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इस योजना में लोगों को जमीन काफी किफायती दर पर मिलेगी जिससे वह खुद के आशियाने का सपना पूरा कर सकेंगे।  

योगी सरकार में युवाओं का बढ़ा इनोवेटिव बिजनेस की ओर रुझान, हजारों स्टार्टअप का हुआ गठन

योगी सरकार में इनोवेटिव बिजनेस में बढ़ा युवाओं का रुझान, इनोवेशन से स्थापित हो रहे हजारों स्टार्टअप सीएम युवा पहल से आत्मनिर्भर बन रहे युवा, नए क्षेत्रों में बढ़ रही भागीदारी प्रदेश में 10 हजार से अधिक इनोवेटिव उद्यम हुए स्थापित, युवाओं में बढ़ा आत्मविश्वास फूड, ट्रेनिंग, डिजिटल और सर्विस सेक्टर में इनोवेटिव मॉडल बना युवाओं की पहली पसंद बैंकों के सहयोग से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिली मजबूती अब तक 10% इनोवेटिव उद्यम स्थापित, 2026-27 में 25% तक ले जाने का लक्ष्य लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सीएम युवा योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में इनोवेशन आधारित स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं, जिससे हजारों युवाओं को न केवल रोजगार मिल रहा है बल्कि वे खुद रोजगार सृजनकर्ता भी बन रहे हैं। सीएम युवा योजना के माध्यम से प्रदेश में अब तक 10 हजार से अधिक इनोवेटिव उद्यम स्थापित किए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि युवाओं में उद्यमिता को लेकर आत्मविश्वास तेजी से बढ़ा है। खास बात यह है कि युवा पारंपरिक व्यवसायों से आगे बढ़कर नए और आधुनिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। 25% उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य सीएम युवा के नोडल अधिकारी और ज्वाइंट कमिश्नर इंडस्ट्रीज सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार, ‘सीएम युवा’ जैसी योजनाओं के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश अब आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम युवा के माध्यम से अब तक स्थापित कुल उद्यमों में 10% इनोवेटिव मॉडल पर आधारित उद्यम हैं। मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसे 25% तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  इन सेक्टर्स में युवाओं की विशेष रुचि अगर सेक्टरवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फूड और रेस्टोरेंट व्यवसाय युवाओं की पहली पसंद बनकर उभरा है, जहां सर्वाधिक 763 उद्यम स्थापित हुए हैं। इसके अलावा कंप्यूटर ट्रेनिंग (370), पैथोलॉजी सैंपलिंग (260), फास्ट फूड (253), फ्रेंचाइजी आधारित मॉडल (253) और ऑनलाइन टीचिंग (189) जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। वहीं जिम (170), मोबाइल आईटी एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म (120), ट्रैवल एंड टूरिज्म (117) और क्लाउड किचन (117) जैसे उभरते क्षेत्रों में भी स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। लखनऊ, आजमगढ़ और हरदोई टॉप 3 में जनपदवार प्रदर्शन की बात करें तो राजधानी लखनऊ 287 उद्यमों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद आजमगढ़ (286), हरदोई (262), जौनपुर (लगभग 250), अंबेडकर नगर (241), कानपुर (236), वाराणसी (229), रायबरेली (225), बरेली (208) और फिरोजाबाद (197) जैसे जनपद इनोवेटिव मॉडल अपनाने में अग्रणी बनकर उभरे हैं। योगी सरकार की इस पहल ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को नई दिशा दी है।  बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका इस पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में बैंकों की भूमिका भी बेहद अहम रही है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक ने सर्वाधिक 2133 इनोवेटिव मॉडलों को ऋण उपलब्ध कराया है। इसके अलावा एसबीआई (1549), बैंक ऑफ बड़ौदा (1170), पंजाब नेशनल बैंक (1018), बैंक ऑफ इंडिया (774), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (589), केनरा बैंक (585), इंडियन बैंक (573), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (399) और यूको बैंक (182) ने भी युवाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके स्टार्टअप को गति दी है।

ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार का बल, ज्ञान संरक्षण को मिल रही नई दिशा

वैश्विक मंच तक पहुंचेगा भारतीय ज्ञान, कानपुर की प्राचीन पांडुलिपियां होंगी डिजिटल ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार का बल, ज्ञान संरक्षण को मिल रही नई दिशा मंदिरों, मठों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण ज्ञान भारतम् मोबाइल एप से होगा सर्वे, जीपीएस आधारित डाटा संग्रह शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को मिलेगा वैश्विक स्तर पर अध्ययन का अवसर लखनऊ/कानपुर  उत्तर प्रदेश में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार ने मिशन मोड में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कानपुर नगर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों की तरह कानपुर में भी मंदिरों, मठों, आश्रमों, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सदियों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, इतिहास और साहित्य से जुड़ा बहुमूल्य ज्ञान निहित है, जिसे अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा। ज्ञान भारतम् ऐप से सर्वेक्षण कार्य इस अभियान के तहत ज्ञान भारतम् ऐप की मदद से सर्वेक्षण कार्य किया जाएगा। सर्वे टीम पांडुलिपियों की पहचान कर उनका जीपीएस लोकेशन, फोटोग्राफ, संख्या और वर्तमान स्थिति का विवरण ऐप में अपलोड करेगी। इसके बाद संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ टीम इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करेगी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहल केवल धरोहर संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर नई पीढ़ी और वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के बाद देश-विदेश के शोधकर्ता, विद्यार्थी और अध्येता इन पांडुलिपियों का अध्ययन कर सकेंगे। पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल संग्रहकर्ताओं के पास बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल संग्रहकर्ताओं के पास ही सुरक्षित रहेगा। प्रशासन और संस्कृति विभाग केवल उनके डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेंगे, जिससे धरोहर संरक्षित रहते हुए ज्ञान का व्यापक प्रसार संभव हो सके। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।  इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, पर्यटन अधिकारी अर्जिता ओझा, एडीआईओएस प्रशांत द्विवेदी, धर्मप्रकाश गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश में 13.35 करोड़ मतदाता तय करेंगे भविष्य, निर्वाचन आयोग ने सात लाख नामों को सूची से हटाने की तैयारी की पूरी

लखनऊ प्रदेश में शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। करीब सात लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने की उम्मीद है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में ज्यादा नाम काटे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक,अंतिम मतदाता सूची में करीब 13.35 करोड़ लोगों के नाम होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सूची में महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक संख्या में होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची जारी करेंगे। बीती 6 जनवरी को 12.55 करोड़ मतदाताओं की मसौदा सूची जारी की गई थी। उसके बाद 6 मार्च तक लोगों से इस ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां ली गईं। कुल 86.69 लाख लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के लिए फॉर्म-6 भरा। वहीं 3.18 लाख लोगों ने नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरा है। मतदाता सूची में 1.04 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके नाम का मिलान माता-पिता, बाबा-दादी व नाना-नानी से न होने के कारण इन्हें नोटिस दिया गया था। वहीं 2.22 करोड़ लोग तार्किक विसंगति वाले थे। सूत्र बताते हैं कि नाम कटवाने व नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से करीब सात लाख के नाम काटे जाने की उम्मीद है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची में 13.35 करोड़ लोगों के नाम हो सकते हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 12.55 करोड़ वोटरों में से 6.88 करोड़ पुरुष व 5.67 करोड़ महिलाएं थीं। नाम जुड़वाने के लिए आए 86.69 लाख फॉर्म-6 में से 43.06 लाख पुरुषों के और 43.62 लाख महिलाओं के फॉर्म थे। वहीं, 3.18 लाख फॉर्म-7 भरे गए हैं। इसमें से 1.46 लाख पुरुषों के और 1.31 लाख फॉर्म महिलाओं के आएं हैं। वहीं नोटिस पाने वाले जिन मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, उनमें भी महिलाओं व पुरुषों में कोई बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के नाम अधिक होने की उम्मीद है।  

सीएम योगी के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने किया हवाई सर्वे

सीएम योगी के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने किया हवाई सर्वे आपदा प्रभावित जनपदों का जाना हाल, प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत पहुंचाने के दिए निर्देश किसानों के साथ खड़ी है योगी सरकार, मुख्यमंत्री ने पीड़ित किसानों को हरसंभव मदद का दिया है भरोसा उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने फतेहपुर व आजमगढ़ में बैठक कर दिए निर्देश  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को आपदा से सर्वाधिक प्रभावित बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, उन्नाव तथा लखनऊ जनपदों का हवाई सर्वेक्षण किया। योगी सरकार ने प्रदेश में इस सप्ताह हुई असामयिक वर्षा, तेज हवाओं और चक्रवात के कारण किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान का जायजा लेने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।  किसानों के लिए खड़ी है सरकार  उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया संकट की घड़ी में सरकार साथ खड़ी है। योगी सरकार पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता समेत हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से इन सभी जनपदों के प्रशासन को विस्तृत सर्वेक्षण करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। आजमगढ़ व फतेहपुर में देखी जमीनी हकीकत  हवाई सर्वेक्षण के उपरांत आजमगढ़ तथा फतेहपुर जनपदों में स्थिति की जमीनी हकीकत परखने के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इन बैठकों में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान फसल सर्वेक्षण कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई और सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पूरी तत्परता के साथ आपदा प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूर्ण कर शासन को विस्तृत आख्या प्रेषित करें, ताकि प्रभावित अन्नदाताओं को अविलंब राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके।