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आगरा कोचिंग सेंटर में बेसमेंट की एमसीबी से धुआं, छात्र सुरक्षित बाहर निकाले गए, प्रशासन सतर्क

लखनऊ लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र की एक चार मंजिला इमारत में सोमवार को लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में ज्यादातर छात्र और युवा थे। इस हादसे ने प्रदेश भर में लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने हादसे की जांच के लिए एसआईटी बनाई है जिसने अपनी जांच शुरू कर दी है। इस बीच मंगलवार को आगरा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक एक बिल्डिंग के बेसमेंट में लगी एमसीबी से धुआं उठने की खबर आई। इस बिल्डिंग में एक प्रतिष्ठित कोचिंग भी चलती है। धुआं उठने की सूचना मिलते ही दहशत के मारे विद्यार्थी कोचिंग से बाहर भाग निकल गए। कोचिंग में नीट और जेईई दोनों की तैयारी कराई जाती है। जिस वक्त एमसीबी से धुआं उठा उस वक्त अच्छी-खासी संख्या में छात्र-छात्राएं वहां मौजूद थे। मिली जानकारी के अनुसार यह कोचिंग तुलसी टॉकीज के पास जिस बिल्डिंग में स्थित है उसके बेसमेंट में एमसीबी लगी है। मंगलवार की सुबह लगभग 10:30 बजे एमसीबी से अचानक धुंआ उठने लगा। धुआं उठने की सूचना पर छात्र-छात्राएं बाहर ओर दौड़े। कोचिंग के स्टॉफ ने भी आनन फानन में छात्रों को फायर सेफ्टी के तहत बनाए गए निकास द्वार से बाहर निकाला। वहीं इस कोचिंग के स्टॉफ ने फायर सुरक्षा के उपकरणों से एमसीबी में उठे धुएं को शांत किया। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंच गई। सूचना पर विद्युत विभाग की टीम भी आ गई और क्षेत्र की पावर सप्लाई को बंद कर दिया गया। जांच के बाद लगभग एक घंटे के बाद विद्युत आपूर्ति को शुरू किया गया। धुआं उठते ही बजा सायरन बिल्डिंग के बेसमेंट में एमसीबी से धुआं उठते ही सायरन बज गया। सायरन की आवाज सुनते ही छात्र कोचिंग से बाहर निकलने लगे। पता चला कि एमसीबी बॉक्स में आग लगी थी जिससे धुआं उठा था। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। कोचिंग सेंटरों पर लगे ताले उधर, लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेश भर में पुलिस और अग्निशमन विभाग अलर्ट पर है। आगरा में भी जांच-पड़ताल के चलते कई कोचिंग सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। पुलिस ने कोचिंग सेंटर हब भगवान टॉकीज के आसपास चेकिंग अभियान चलाया। इस बीच आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने पैनिक क्रिएट करने वाले लोगों को सख्त हिदायत भी दी है। पुलिस ने कहा है कि छात्रों के जीवन से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। कोचिंग सेंटर नियम और शर्तों के हिसाब से ही संचालित होंगे। नियमों को तोड़ने या लापरवाही की छूट किसी को नहीं दी जाएगी।

निपुण भारत मिशन को नई रफ्तार! योगी सरकार ने शुरू किया मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण

निपुण भारत मिशन को नई गति देने में जुटी योगी सरकार, जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू – राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में 20 जनपदों के एसआरजी सदस्य और डायट मेंटर्स ले रहे भाग – प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर हजारों शिक्षकों को देंगे प्रशिक्षण – आधारभूत साक्षरता, गणितीय दक्षता और गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष फोकस – दीक्षा और निपुण टीचर ऐप जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी दिया जा रहा प्रशिक्षण लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों के क्षमता संवर्धन की मजबूत शृंखला तैयार कर रही है। इसी क्रम में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए पांच दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो गया।  राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में सहभागी जनपदों से चयनित राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करते हुए लाखों शिक्षकों तक निपुण भारत मिशन की अवधारणाओं, नवीन शिक्षण पद्धतियों और अधिगम सुधार की रणनीतियों को पहुंचाएंगे। यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के अंतर्गत संचालित राज्यव्यापी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की दूसरी कड़ी है। प्रशिक्षण का पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दो और चरण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में एक सुदृढ़ शैक्षणिक प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके। वर्तमान बैच में प्रदेश के 20 जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रत्येक सहभागी जनपद से दो राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्य और दो डायट मेंटर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना होगी, ताकि निपुण भारत मिशन की रणनीतियां और शिक्षण पद्धतियां प्रभावी ढंग से विद्यालय स्तर तक पहुंच सकें। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री और टीएलएम के उपयोग, कक्षा मूल्यांकन की प्रभावी रणनीतियों तथा दीक्षा, कैच-अप शिक्षण एवं रीडिंग कैंपेन जैसे कार्यक्रम पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल है। प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित शैक्षणिक समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है।

कैंपस में अब नहीं चलेगी प्लास्टिक, कुल्हड़ और जूट को बढ़ावा

 लखनऊ यूपी के स्टेट यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की बोतलें, चम्मच और प्लास्टिक के कप-प्लेट पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा है। अब इनकी जगह पर कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले समेत अन्य का प्रयोग किया जाएगा। वहीं, जनभवन की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्यपाल व कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जॉनी की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय व कॉलेज परिस की कैंटीन, हॉस्टल व कार्यक्रमों में प्लास्टिक की जगह पर कुल्हड़, जूट के थैले व कागज के बर्तन का प्रयोग किया जाए। वहीं, नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाएगी। गीले व सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग की उचित व्यवस्था की जाए। हर उच्च शिक्षण संस्थान में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने के लिए समिति का गठन के साथ हर शुक्रवार व शनिवार को विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। प्लास्टिक की बोतल में रखी कोल्ड ड्रिंक-जूस हो, फिर टिफिन में रखा लंच या प्लास्टिक के बर्तन में रखकर माइक्रोवेब में खाना गरमा रहे हैं तो यह दिमाग के संतुलन को बिगाड़ सकता है। दिमाग में ऐसा केमिकल लोचा पैदा हो सकता है जिससे भूलमने की क्षमता पर कुठाराघात हो सकता है। प्लास्टिक के बर्तन, बोतल बनने में बड़ी मात्रा में बिस्फेनॉल ए यानी बीपीए का इस्तेमाल होता है। यह निष्कर्ष भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन में आए हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ बॉयोलॉजिकल केमिस्ट में प्रकाशित हो चुका है। इन बीमारियों के होने का है खतरा याददाश्त कमजोर होना, सीखने की क्षमता में कमी, चिंता, अवसाद, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, महिला व पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा और डायबिटीज, दिल की बीमारियां होने का खतरा है। 25 किलो से अधिक प्रतिबंधित सामग्री जब्त उधर, हरदोई में यूपी शासन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-6, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक जब्तीकरण अभियान के तहत नगर पालिका परिषद संडीला ने कार्रवाई की। बीते शनिवार को अभियान के दौरान 25 किलो से अधिक प्रतिबंधित पॉलीथिन एवं सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई। साथ ही 82 हजार का जुर्माना भी वसूला गया।

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे CM योगी, हाईलेवल बैठक के बाद ताबड़तोड़ एक्शन

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे सीएम योगी, हाईलेवल मीटिंग के बाद ताबड़तोड़ एक्शन -4 अभियुक्त गिरफ्तार, 4 अफसर तत्काल प्रभाव से सस्पेंड -अब SIT के निशाने पर बड़े अफसर, जांच में तय होगी बड़े अफसरों की जवाबदेही    लखनऊ  अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ताबड़तोड़ एक्शन के मूड में दिख रही है। इमारत में जिस वक्त हादसा हुआ, मुख्यमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंच से घटना की जानकारी मिलने की बात बताई और सभी कार्यक्रमों को रद्द करने की घोषणा के बाद लखनऊ ने लिए निकल पड़े। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत तमाम अफसरों को मौके पर पहुंच कर राहत बचाव कार्य के निर्देश जारी कर चुके थे।  कार्यक्रम से निकलने के बाद लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और राहत बचाव कार्य का जायजा लिया। घटना के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में घायलों की व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए हाल चाल जाना। मौके पर मौजूद चिकित्सकों से घायलों का हाल चाल जाना और बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों को निर्देशित किया।  दुर्घटना के शिकार बने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। घायलों को 50-50 हजार रुपये मदद का ऐलान किया गया।  मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार लोगों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया।  1)    गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन (बिजली विभाग) जानकीपुरम  2)    कमलेन्द्र कुमार सिंह, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर  3)    अनिल कुमार, AE (LDA) 4)    प्रमोद पांडे, JE (LDA) हाई लेवल मीटिंग और ताबड़तोड़ एक्शन किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने पाँच कालीदास मार्ग स्थित अपने आवास पर हाईलेवल मीटिंग आयोजित की जिसमें सभी बड़े और प्रमुख अफसर शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग व प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन के नेतृत्व में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया।  ताबड़तोड़, बड़े अफसरों पर भी कसेगा शिकंजा अग्निकांड के तीन अभियुक्तों- रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर सीतापुर रोड लखनऊ), तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) और सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव) को गिरफ्तार किया गया।  गिरफ़्तारी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अफसरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। ये अफसर हैं बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सेन कलेक्शन गौरव कुमार, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के AE अनिल कुमार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के JE प्रमोद पांडे।  विशेष जांच दल को सात दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को सौंपना है। जांच के दायरे में कई बड़े अफसरों के आने की आशंका है। 2016 में निरस्त किया गया था बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश अवैध निर्माण पर हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश, दो माह से कम समय में पलट गया था फैसला लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया। 1980 में हुआ था आवंटन अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित

लखनऊ अग्निकांड:मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित विशेष जांच दल में धर्मार्थ कार्य, पर्यटन/ संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात भी शामिल अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार होंगे विशेष जांच दल के दूसरे सदस्य जांच दल को सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड प्रकरण पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया।  इस विशेष जांच दल में धर्मार्थ कार्य, पर्यटन/संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने जांच दल को सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि घटनास्थल के निरीक्षण, केजीएमयू में मृतकों के परिजनों से मिलने व घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री ने देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें मुख्यमंत्री ने घटना को लेकर काफी रोष जताते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया गया। इसके सदस्य 7 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

किफायती आवास सुविधाओं के विस्तार को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के मिलेंगे नए अवसर

यूपी में बढ़े पर्यटक तो योगी सरकार ने किया ‘होम स्टे नीति’ में बड़ा बदलाव अब 8 कमरे तक होंगे पंजीकृत, बीएंडबी और होम स्टे इकाइयों के लिए ऑटो रिन्यूअल की सुविधा शुरू किफायती आवास सुविधाओं के विस्तार को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के मिलेंगे नए अवसर पर्यटन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप किया गया संशोधन: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ  उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बीएंडबी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पहले से और आसान बनाया गया है। साथ ही पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योगी सरकार का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से जुड़ने के अधिक अवसर मिल सकें। 6 की जगह अब 8 कमरों के लिए मिली मंजूरी उन्होंने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरे (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम 6 कमरों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी। यह भी साफ किया गया है कि शहरी इलाकों में होम स्टे ऐसी रिहायशी प्रॉपर्टी में चलने चाहिए जो या तो आवेदक की अपनी हो या फिर विकास प्राधिकरण से लीज पर ली गई जमीन पर बनी हो। प्रॉपर्टी के मालिक या उनके परिवार के सदस्यों का वहीं रहना जरूरी है। पर्यटकों को आवास के साथ भोजन की सुविधा बीएंडबी श्रेणी के अंतर्गत आवासीय अथवा लीज पर लिए गए भवनों में अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे। ऐसी इकाइयों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आवास के साथ नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इकाई में केयरटेकर का निवास अनिवार्य होगा और लीज पर लिए गए भवन की लीज अवधि न्यूनतम तीन वर्ष होनी चाहिए। 16 बेड वाली डॉरमेट्री भी इस श्रेणी में पात्र मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों, होटल, मोटल और गेस्ट हाउस जैसी इकाइयों को इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जाएगा। तीन महीने पहले होगा स्वतः नवीनीकरण संशोधन के तहत पंजीकृत इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए पोर्टल आधारित स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की व्यवस्था भी लागू की गई है। अब इकाई संचालक अपने पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से पूर्व विभागीय पोर्टल पर स्वयं नवीनीकरण करा सकेंगे। यह सुविधा पंजीकरण समाप्ति की तिथि से तीन माह पूर्व उपलब्ध रहेगी। पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ेंगे अपर मुख्य सचिव पर्यटन विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि यह संशोधन प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास क्षमता बढ़ाने के लिए यह कदम विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।

बाजार स्ट्रीट क्षेत्रों में भूतल और प्रथम तल पर बन सकेंगे मकान

 लखनऊ क्या बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में दुकान के साथ मकान बनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश शासन ने बाजार स्ट्रीट में नक्शा पास करने को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी है। बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में भूस्वामी के चाहने पर भूतल (Ground Floor)और प्रथम तल (First Floor) का भी आवासीय नक्शा पास किया जाएगा। इन दोनों तलों पर व्यावसायिक नक्शा पास करने की व्यवस्था है। शासन से कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके आधार पर विकास प्राधिकरणों को विस्तृत-दिशा निर्देश भेजा गया है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग शहरों के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार कराता है। इसमें सड़कों की चौड़ाई के आधार पर भू-उपयोग चिह्नित किए जाते हैं। भवन विकास उपविधि में इसके मुताबिक ही नक्शा पास करने की व्यवस्था दी जाती है। आवास विभाग ने पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस जारी किया है। प्राधिकरणों ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा था कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसके कुछ बिंदु को लेकर शासन से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था। इसके आधार पर पूरी स्थिति साफ की गई है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि बाजार स्ट्रीट में व्यावसायिक उपयोग पूरे भूखंड की गहराई के आधार पर दी जाएगी। भूतल व प्रथम तल व्यावसायिक होगा। शेष तलों का इस्तेमाल आवासीय होगा। भूखंड स्वामी के अनुरोध पर भूतल व प्रथम तल पर आवासीय उपयोग की अनुमति भी दी जाएगी। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू उपयोग को मंजूरी दी गई है यूपी में 18 या 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर बाजार स्ट्रीट के रूप में चिह्नित किया गया है। इसका मकसद व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की सुविधा देना है। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू-उपयोग की सुविधा दी गई है। मसलन नीचे दुकान और ऊपर मकान बनाने का नक्शा पास किया जाता है। यूपी में अब आठ कमरे वाले होमस्टे भी होंगे पंजीकृत वहीं, प्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बी एंड बी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया गया है तथा पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्व-नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है। अब आठ कक्ष वाले भवन भी होम स्टे नीति के तहत पंजीकृत किए जाएंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक तथा अधिकतम आठ कक्ष (16 शैय्या) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम छह कक्षों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी।

भीषण आग मामले में SIT जांच शुरू, चार लोग गिरफ्तार और अधिकारी निलंबित

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड की जांच जे हो गई है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए गठित एसआईटी का गठन किया गया है। मंगलवार को SIT की टीम मौके पर पहुंची जांच शुरू कर दी है। एक-एक चीज का निरीक्षण किया जाएगा। बिल्डिंग के दस्तावेज भी मांगे गए हैं। वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने में जुटी है। दरअसल, सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर देर रात उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान किया। जिसके बाद एसआईटी का गठन किया। इसमें अपर मुख्य सचिव पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृत विभाग अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार हैं। 7 दिन में सीएम सौंपेगी SIT सीएम योगी ने एसआईटी से सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई संभावित लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करेगी। मृतकों के परिजनों के केंद्र से 2 लाख और राज्य से 5 लाख का मिलेगा मुआवजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।

कोचिंग सेंटरों और डिजिटल लाइब्रेरी पर प्रशासन की नजर, एक सप्ताह चलेगा अग्नि सुरक्षा अभियान

लखनऊ लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में छात्रों समेत 15 लोगों की मौत के बाद प्रयागराज, आगरा, मुरादाबाद और मेरठ जैसे बढ़े महानगरों में भी जिला प्रशासन, पीडीए और अग्निशमन विभाग सतर्क हो गया है। संभावित हादसों को रोकने के लिए सभी विभाग व जिम्मेदार मंगलवार से वृहद स्तर पर अभियान शुरू करने जा रहे हैं। अग्निशमन विभाग मंगलवार से जिले के कोचिंग संस्थानों और डिजिटल लाइब्रेरी की सघन जांच शुरू करेगा। एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान में अग्नि सुरक्षा मानकों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि सभी प्रमुख कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जांच में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास मार्ग, प्रवेश और निकास द्वारों की चौड़ाई, विद्युत वायरिंग की स्थिति, भवन की संरचना और आपदा की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जांच की जाएगी। विशेष रूप से उन कोचिंग संस्थानों और डिजिटल लाइब्रेरी को प्राथमिकता दी जाएगी, जो संकरी गलियों में संचालित हैं। अग्निसुरक्षा पर संवाद स्थापित करेगा पीडिए लखनऊ की घटना के बाद प्रयागराज प्रधिकरण, पीडीए ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पीडीए के उपाध्यक्ष ऋषिराज ने सभी जोनल अधिकारियों और अभियंताओं को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उपाध्यक्ष ने बताया कि शहर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की जांच की जाएगी। कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों से संपर्क कर अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास, विद्युत सुरक्षा तथा मानकों के अनुपालन को लेकर संवाद स्थापित किया जाएगा। सुधार न होने पर भवन सील किए जाएंगे। जांच के साथ ही दी जाएगी ट्रेनिंग सीएफओ ने बताया कि सभी अग्निशमन अधिकारियों को मंगलवार से सघन चेकिंग अभियान चलाने का लिखित निर्देश जारी किया गया है। अभियान के दौरान आठ बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया गया है। सघन चेकिंग अभियान के दौरान जांच के साथ ही कोचिंग संचालकों व छात्रों को आग बुझाने और बचाव के लिए मॉक ड्रिल के माध्यम से बेसिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आग से बचाव के इंतजामों की जांच करेगी कमेटी लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने शहर के भवनों में आग से बचाव के इंतजामों की स्थिति जांचने के लिए एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। कमेटी होटल, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक इमारतों और अन्य प्रमुख प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जांच करेगी। समिति यह देखेगी कि भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। कमेटी जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट देगी। एक सप्ताह तक चलाया जाएगा विशेष अभियान कोचिंग सेंटरों में अग्निसुरक्षा के मद्देनजर निरीक्षण के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने पांच टीमों का गठन किया है। फायर स्टेशन हैलेट रोड, कटघर, बिलारी, कांठ और ठाकुरद्वारा के लिए गठित ये टीमें एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाकर कोचिंग सेंटरों का निरीखण करेंगी। आपातकालीन निकास मार्ग, भवन की क्षमता और छात्र संख्या, फायर एनओसी की स्थिति, बिना पंजीकरण संचालन की जांच होगी।

एक रास्ता, ऊपर AC-एग्जॉस्ट और नीचे आग… लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों के बाद 4 पर FIR

 लखनऊ लखनऊ के अलीगंज इलाके के जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी, वहां नियम कायदे और सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ा दी गईं थीं. तीन मंजिला इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट भी बनाया गया था. एंट्री एग्जिट के लिए सिर्फ एक छोटा सा रास्ता था और इस रास्ते के ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन, इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल, लगाकर रास्ते को और छोटा कर दिया गया था।  बिना इमरजेंसी गेट के तैयार हुआ था कॉम्पलेक्स बिना किसी इमरजेंसी गेट के तैयार हुए इस रिहायशी इलाके के कमर्शियल कॉम्पलेक्स में आग लगी तो दूसरी मंजिल पर फंसे 15 लोगों की जान चली गई. अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आईएएस अमृत अभिजात और आईपीएस प्रवीण कुमार की एसआईटी गठित है।  आखिर 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? एलडीए (लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी), बिजली विभाग और फायर के कुल चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. साथ ही मामले में अन्य कार्रवाई भी जारी है. लेकिन रेजिडेंशियल नक्शा पास करवा कर बनाए गए इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग में 15 लोगों की जान चली गई, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निगम, फायर डिपार्टमेंट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।  इधर लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राज्य सरकार ने राहत राशि प्रदान की है. सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी गई है. विधायक नीरज बोरा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पीड़ित परिवारों को यह आर्थिक सहायता सौंपी. सरकार का कहना है कि यह राशि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से दी जा रही है।  साथ ही सरकार ने हादसे से प्रभावित सभी परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है. घायलों के बेहतर उपचार और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।  SIT ने तेज की जांच, घटनास्थल पहुंचकर जुटाए सबूत अलीगंज अग्निकांड मामले में सीएम योगी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने मामले की जांच तेज कर दी है. बताया जा रहा है कि जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है, जहां टीम बारीकी से निरीक्षण कर सबूत जुटा रही है।  बताया जा रहा है कि एसआईटी बिल्डिंग में आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही की जांच करेगी. हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने पर जांच का फोकस रहेगा. इसके साथ ही एसआईटी ने सभी संबंधित विभागों से भी रिपोर्ट तलब की है।  लखनऊ के बाद कानपुर में जागा प्रशासन, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग सील लखनऊ में कोचिंग संस्थान से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया है. जांच में इन संस्थानों में भवन एवं सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर ये कार्रवाई की गई।  केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।  प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी. सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।  टूटे सपने, बिखरे परिवार और अपनों की गूंजती चीख-पुकार…. लखनऊ में हर आंख नम, हर जुबां पर सवाल सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुष्का, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविश्य, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजान, जयनिज चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या. ये सिर्फ नाम नहीं हैं. ये वे 15 जिंदगी थीं जिनके अपने-अपने सपने थे. किसी ने करियर की शुरुआत की थी, कोई परिवार की उम्मीद था, कोई अपने माता-पिता का सहारा बनने की तैयारी कर रहा था. लेकिन कुछ मिनटों में सब खत्म हो गया।   बिल्डिंग में आने-जाने का था एक संकरा रास्ता, जांच में खुलासा लखनऊ अग्निकांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि जिस में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, उसमें अंदर और बाहर आने-जाने के लिए एक सकरा रास्ता था, वही से सकरी सीढ़ियां पहली-दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने के लिए थीं. जांच में पता चला है कि यही वजह थी कि जब बिल्डिंग में आग लगी तो धुएं और आग ने रास्ता बंद कर दिया और परिसर में काम करने वाले, पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां निकल नहीं पाए. जिससे उनकी मौत हो गई।  एलडीए ने जांच की तेज लखनऊ अग्निकांड मामले में एलडीए ने भी जांच तेज कर दी है. एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है. ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में गठित इस टीम में के.के. गौतम, मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और रविनंदन सिंह को शामिल किया गया है. टीम घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एलडीए के एई और जेई को निलंबित कर दिया गया है. प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है।