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बलरामपुर में 803 करोड़ से विकास का नया अध्याय, गांवों से शहर तक बदलेगी तस्वीर

बलरामपुर। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बलरामपुर को 803.19 करोड़ रुपये की 78 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। श्रावस्ती और गोंडा लोकसभा क्षेत्रों में फैले जनपद में 273.42 करोड़ की 30 परियोजनाओं का लोकार्पण और 529.77 करोड़ की 48 परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ। गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने, रेलवे फाटक के जाम से निजात दिलाने और शहर में पेयजल व सीवरेज व्यवस्था सुधारने पर जोर रहा। सड़क, पुल-पुलिया, सिंचाई और शिक्षा से जुड़े इन कार्यों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। चुनावी सरगर्मी बढ़ने से पहले विकास परियोजनाओं की यह सौगात राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।   292 करोड़ के ओवरब्रिज से मिलेगी जाम से राहत राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर गोंडा-बलरामपुर रेलखंड के बलरामपुर और झारखंडी स्टेशनों के बीच समपार संख्या-136 पर 292 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दो लेन का रेलवे ओवरब्रिज बनेगा। इससे रेलवे फाटक बंद होने पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। बलरामपुर से श्रावस्ती और बहराइच की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों का आवागमन सुगम होगा।   गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ेंगे संपर्क मार्ग अहिरनडीह, प्रतापपुरवा-सेमरहना और रमवापुर-गुलरालीडीह संपर्क मार्गों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण से गांवों का मुख्य सड़कों से संपर्क बेहतर होगा। कुआनो नदी पर चोरघटा क्षेत्र में आरसीसी बॉक्स कल्वर्ट और कटरा सोनार जिला मार्ग पर गोपियापुर नाले के पास लघु सेतु व पहुंच मार्ग का निर्माण कराया जाएगा। इससे बरसात में आवागमन की बाधाएं कम होंगी। किसानों को उपज बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी। उतरौला-चंदनपुर मार्ग के शेष हिस्से के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर 75 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।   176 करोड़ से मजबूत होंगी शहरी सुविधाएं बलरामपुर नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 123 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार सीवरेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रथम चरण का लोकार्पण हुआ। इससे गंदे पानी के निस्तारण और शोधन की व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही 53 करोड़ रुपये से अधिक की पेयजल पुनर्गठन योजना भी जनता को समर्पित की गई। इससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी।   विश्वविद्यालय तक फोरलेन सड़क, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय तक 26 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी फोरलेन सड़क का लोकार्पण किया गया। जिले में 24 करोड़ रुपये से अधिक से नवीन समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय का भवन बनेगा। जिला ग्राम्य विकास संस्थान के आवासीय और अनावासीय भवनों पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पुलिस लाइन में 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार जी+8 ट्रांजिट हॉस्टल भी समर्पित किया गया।   सिंचाई और बाढ़ से बचाव के कार्यों पर जोर नहरों और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदियों के किनारे बाढ़ से बचाव के कार्य भी कराए गए हैं। नदी कटान से प्रभावित 72 परिवारों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 'मां पाटेश्वरी विला' का निर्माण हुआ है। कुल 78 परियोजनाओं में सर्वाधिक 39 लोक निर्माण विभाग और 23 सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की हैं। नगर विकास विभाग की पांच, गृह विभाग की तीन और बेसिक शिक्षा विभाग की तीन परियोजनाएं शामिल हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की दो तथा माध्यमिक शिक्षा, पर्यटन और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की एक-एक परियोजना है।

योगी सरकार का महिला सुरक्षा पर फोकस, ऐप से जुड़ेंगी महिलाएं; लखनऊ से 75 जिलों की होगी निगरानी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था तैयार कर रही है। इसके तहत महिला सुरक्षा के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल तैयार किया जा रहा है, जिसमें एप के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और उस पर एक्शन लेने की प्रक्रिया को और सुगम बनाने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में क्यूआर कोड स्कैन करते ही महिला अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगी। वहीं एप के माध्यम से महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा तंत्र से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी। निगरानी के लिए व्यवस्था को प्रदेश स्तर पर जोड़ा जाएगा इस पहल की खास बात यह होगी कि महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों और उनसे संबंधित कार्रवाई की निगरानी के लिए व्यवस्था को प्रदेश स्तर पर जोड़ा जाएगा। लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से सभी 75 जिलों पर नजर रखने की योजना है। कमांड सेंटर में तैनात विशेष सेल महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग के साथ ही जरूरत के अनुसार विभिन्न विभागों और संबंधित तंत्र के बीच समन्वय की भूमिका निभाएगा। इससे शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने और उनके निस्तारण की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास होगा। क्यूआर स्कैन करते ही मिलेगी सुविधा प्रस्तावित व्यवस्था में महिलाओं को शिकायत के लिए अलग-अलग माध्यमों की तलाश करने की जरूरत कम होगी। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद महिला शिकायत दर्ज कर सकेगी। इसके साथ ही एप के जरिए ऑनलाइन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की तैयारी है। यानी तकनीक को महिला सुरक्षा के तंत्र से सीधे जोड़कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने पर जोर है। महिला सुरक्षा से जुड़ी किसी समस्या की जानकारी मिलने पर संबंधित तंत्र तक उसकी पहुंच आसान हो, यही इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए लखनऊ में स्थापित किए जाने वाले कमांड सेंटर से जिलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। यहां बनने वाला स्पेशल सेल जरूरत के अनुसार विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करेगा। लखनऊ से सभी 75 जिलों पर नजर प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी को एकीकृत स्वरूप देने की तैयारी है। लखनऊ स्थित कमांड सेंटर को इसका प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां से प्रदेश के सभी 75 जिलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। विशेष सेल के माध्यम से विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। इस व्यवस्था में तकनीक आधारित शिकायत तंत्र और प्रदेश स्तर की निगरानी को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इससे एक ओर महिला के लिए शिकायत दर्ज कराने का रास्ता आसान होगा तो दूसरी ओर प्रदेश स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी रहेगी। इसे देश में पहली बार शुरू की जा रही ऐसी पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। आयोग की भूमिका को भी मिलेगा और प्रभावी स्वरूप महिला सुरक्षा के इस व्यापक प्रयास के बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की भूमिका को भी और प्रभावी बनाने पर जोर है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल के विस्तार के उपरांत गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की।  

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

बलरामपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर की विकास यात्रा पर आधारित लघु फिल्म भी देखी। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाबी, लैपटॉप, स्वीकृति पत्र आदि प्रदान किया। सीएम ने बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। महिलाओं को फलों समेत पोषण की पोटली दी। उन्होंने यहां विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉल आदि का भी अवलोकन किया।  मुख्यमंत्री ने कराया बच्चों का अन्नप्राशन  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर बच्चों का अन्नप्राशन कराया।  साथ ही महिलाओं को फलों समेत पोषण पोटली दी। उन्होंने यहां लगे विभिन्न विभागों के स्टॉल आदि का भी अवलोकन किया। सभी से जनपदों में चल रहे विभागीय कार्यों की जानकारी भी ली।  सीएम के हाथों इन्हें मिला सम्मान  विकास यादव- उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना- लैपटॉप  मो. शादाब- उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना- लैपटॉप किरन वर्मा- कस्टम हायरिंग सेंटर- चाबी हिमांशु यादव- कस्टम हायरिंग सेंटर- चाबी अजय कुमार पाल- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख का चेक  हसन रजा- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख का चेक  गुफरान अंसारी- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख का चेक किशना देवी- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र  उर्मिला देवी- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र संगीता- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र ननका देवी- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र गुड़िया वर्मा/पिंकी- एनआरएलएम के तहत 45 लाख का चेक ।

योगी सरकार मरीजों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट, बेकार एंबुलेंस को लेकर की कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षित यात्रा के लिए योगी सरकार के निर्देशों के तहत परिवहन विभाग ने अनफिट एवं अनधिकृत एंबुलेंस के खिलाफ तीन दिवसीय विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान में नियमों का उल्लंघन करने वाली 772 एंबुलेंस के चालान किए गए, जबकि 135 एंबुलेंस को बंद कराया गया। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि अभियान के दौरान विभागीय प्रवर्तन टीमों ने निजी क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस की जांच की। जांच में नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य एंबुलेंस सेवाओं के संचालन में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन सुनिश्चित करना है, ताकि मरीजों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिल सके। परिवहन आयुक्त ने कहा कि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा में वाहनों का फिट होना और सभी आवश्यक दस्तावेजों का वैध होना बेहद जरूरी है। अनफिट या अनधिकृत एंबुलेंस का संचालन मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। वैध परमिट व नियमों का पालन अनिवार्य उन्होंने वाहन स्वामियों और एंबुलेंस संचालकों से अपील की कि वे अपने वाहनों का संचालन करने से पहले पंजीकरण, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी अभिलेख पूरे रखें। निर्धारित मानकों का पालन करते हुए ही एंबुलेंस का संचालन करें, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  परिवहन विभाग के अनुसार, अवैध और अनफिट वाहनों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य एंबुलेंस सेवाओं में नियमों का अनुपालन बढ़ाना और सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के मामले, बचाव पर देना होगा ध्यान: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

लखनऊ उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र के लोगों में भी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। युवाओं में हार्ट अटैक के मामले सामने आना चिंता का विषय है। ऐसे में बीमारियों के इलाज के साथ ही उनकी रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए खानपान की आदतों में सुधार, नियमित व्यायाम और व्यापक जनजागरूकता अभियान जरूरी हैं। उप मुख्यमंत्री शनिवार को द वीक मेटाबॉलिक हेल्थ समिट 2026 के उत्तर प्रदेश संस्करण में ‘बिल्डिंग ए हेल्दियर यूपी फॉर टुमॉरो: फ्रॉम विजन टू एक्शन’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मोटापा, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव को बीमारियों के बढ़ते बोझ के प्रमुख कारणों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा मन और शरीर स्वस्थ नहीं होगा, तब तक हम अपने देश और प्रदेश के विकास में प्रभावी योगदान नहीं दे सकेंगे। बेहतर स्वास्थ्य के लिए आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज जीवनशैली में तेजी से बदलाव हो रहा है। उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियां अब कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही हैं। इसे देखते हुए लोगों को अपनी दिनचर्या और खानपान पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। मोटापे से बचने के लिए खानपान पर नियंत्रण जरूरी डिप्टी सीएम ने मोटापे को बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि लोगों को इस बात के प्रति जागरूक होना चाहिए कि वे कितना भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर को कितनी कैलोरी की जरूरत है। उन्होंने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स के अत्यधिक सेवन से बचने तथा स्वस्थ खानपान की आदतें अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे सक्रिय रखना जरूरी है। जिस तरह किसी वाहन को नियमित इस्तेमाल और रखरखाव की जरूरत होती है, उसी तरह मानव शरीर को भी सक्रियता और देखभाल की आवश्यकता होती है। इसके लिए जिम जाना या कठिन व्यायाम करना ही जरूरी नहीं है। तेज कदमों से पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और घर के सामान्य काम करना भी शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। हर उम्र के लोगों को अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम शामिल करना चाहिए। अस्पतालों में बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक करने की व्यवस्था हो ब्रजेश पाठक ने कहा कि अस्पतालों में केवल बीमारियों के इलाज पर ही नहीं, बल्कि उन्हें रोकने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए अस्पतालों में ऐसे कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा सकता है, जो लोगों को बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, टेलीविजन और सोशल मीडिया के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। इन अभियानों में लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि कौन-सी आदतें बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं और किन आदतों से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ता है। डिप्टी सीएम ने चिकित्सा विशेषज्ञों से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव सरकार के साथ साझा करने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनस्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से नीतियों में जरूरी बदलाव के सुझावों पर सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जनभागीदारी जरूरी उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इंसेफेलाइटिस, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बेहतर परिणामों को बनाए रखने के लिए जनसहयोग जरूरी है। उन्होंने लोगों से घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने और मच्छरों के पनपने की संभावनाओं को खत्म करने की अपील की। कूलर में जमा पानी और बेकार पड़े टायरों में इकट्ठा होने वाले पानी को नियमित रूप से साफ करने पर भी जोर दिया। ब्रजेश पाठक ने समिट के आयोजन के लिए द वीक और आयोजक टीम को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस तरह का संवाद उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने में मददगार साबित होगा। कार्यक्रम में केजीएमयू वीसी डॉ. सोनिया नित्यानंद, द वीक के चीफ एसोसिएट एडिटर रियाद और द वीक दिल्ली की ब्यूरो चीफ नम्रता बीजी आहूजा आदि उपस्थित थे।

यूपी में रामपुर ने बनाया रिकॉर्ड, एक साल में 1.79 लाख आयुष्मान कार्ड बनाकर प्रदेश में पाया पहला स्थान

आयुष्मान कार्ड बनाने में रामपुर प्रदेश में प्रथम, एक साल में बने 1.79 लाख कार्ड – सीएम योगी के नेतृत्व में पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की मुहिम को मिली रफ्तार, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को किया सम्मानित – लखनऊ में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में रामपुर को मिला प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न – जनता दर्शन में डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कैंसर पीड़ित और दिव्यांग लाभार्थियों को सौंपे आयुष्मान कार्ड लखनऊ  योगी सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में रामपुर ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में रामपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पिछले एक वर्ष के दौरान सर्वाधिक 1 लाख 79 हजार आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कैंसर पीड़ित को सौंपा आयुष्मान कार्ड रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। रामपुर में विभिन्न विभागों के समन्वय और अभियान के प्रभावी संचालन से बड़ी संख्या में पात्र लोगों को योजना से जोड़ने में सफलता मिली है। आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के क्रम में जिलाधिकारी ने जनता दर्शन के दौरान गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दिव्यांग लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए। इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल रहे। राजकुमार माहेश्वरी के पैर की सर्जरी होनी है। इसके अलावा स्वार तहसील क्षेत्र के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। रामपुर में अब तक बने 6.91 लाख से अधिक कार्ड जिलाधिकारी ने बताया कि रामपुर में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक कुल 6,91,928 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। पिछले एक वर्ष में 1.79 लाख कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। वहीं, जनता दर्शन के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को कार्ड उपलब्ध कराने से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: विभागीय जांच में लागू हुआ मानकीकृत प्रारूप, 10 बिंदुओं की चेकलिस्ट अनिवार्य

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह जांच प्रक्रिया में एकरूपता के लिए लागू हुआ मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची हर आरोप का अलग परीक्षण, साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दर्ज होगा स्पष्ट एवं कारणयुक्त निष्कर्ष जांच की हर प्रक्रिया का होगा अभिलेखीकरण, कमियों वाली रिपोर्ट को पूर्णता के लिए लौटाया जाएगा जांच और दंड निर्धारण की भूमिका अलग, सक्षम प्राधिकारी ही करेगा नियमों के तहत अंतिम निर्णय समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने जारी किया शासनादेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विभागीय जांच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। समाज कल्याण विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची लागू की है। विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है।  जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता योगी सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभागीय जांच प्रक्रिया को स्पष्ट एवं व्यवस्थित किया है। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत जांच अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण करना होगा। इससे जांच आख्या की गुणवत्ता बेहतर होगी और शासन स्तर पर मामलों के परीक्षण में भी स्पष्टता आएगी। प्रत्येक आरोप का होगा स्वतंत्र और साक्ष्य आधारित परीक्षण नई व्यवस्था की खास बात यह है कि आरोप-पत्र में दर्ज प्रत्येक आरोप का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा। जांच अधिकारी को आरोप, संबंधित अधिकारी के उत्तर, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के साथ मौखिक सुनवाई का विवरण भी दर्ज करना होगा। इसके आधार पर प्रत्येक आरोप के संबंध में स्पष्ट और कारणयुक्त निष्कर्ष दिया जाएगा। इससे विभागीय जांच प्रक्रिया अधिक तथ्यपरक और निष्पक्ष बनेगी। 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची से मजबूत होगी व्यवस्था जांच आख्या के साथ 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची और अनुपालन प्रमाण-पत्र संलग्न करना जरूरी होगा। इसमें आरोप-पत्र की तामीली, लिखित उत्तर, अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर, गवाहों की जिरह और मौखिक सुनवाई सहित आवश्यक प्रक्रियाओं का विवरण शामिल होगा। निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा पालन नहीं होने पर जांच आख्या को पूर्णता के लिए वापस भेजा जा सकेगा। इससे जांच प्रक्रिया में गुणवत्ता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी। जांच और दंड निर्धारण की भूमिका स्पष्ट, निष्पक्षता को मिलेगा बल योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे। दंड के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार लिया जाएगा। इससे विभागीय जांच में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया मजबूत होगी।

यूपी में नकली नोटों का नेटवर्क उजागर, 500 रुपये के 315 जाली नोटों के साथ दो गिरफ्तार

बदायूं नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से डेढ़ लाख रुपये से अधिक के नकली नोट और नोट छापने के उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपियों के चार साथी पहले ही कासगंज जिले की सोरों पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है। अलापुर थाना पुलिस ने थानाध्यक्ष सनी चौधरी के नेतृत्व में मुखबिर की सूचना पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भसराला गांव निवासी यावर अली पुत्र मकसूद अली और नुरुलहसन पुत्र रहीसुल हसन के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से 500 रुपये के 315 नकली नोट बरामद किए हैं। इनकी कुल कीमत एक लाख 57 हजार 500 रुपये है। इसके अलावा 500 रुपये के छह अधबने नोट और नकली नोट छापने की एक डाई बरामद हुई है। पुलिस को मौके से हरे टेप का एक बंडल, ग्लू स्टिक, एक मोबाइल फोन, दो कटर ब्लेड, एक्सटेंशन बोर्ड और सफेद कागज का एक बंडल भी मिला है। असली के साथ नकली नोट मिलाकर खपाते पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे काफी समय से नकली नोट तैयार कर रहे थे और उन्हें धीरे-धीरे बाजार में चला रहे थे। इसके लिए नकली नोटों को असली नोटों के साथ आगे-पीछे लगाकर इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, यावर अली कासगंज जिले के सोरों थाने में दर्ज एक मामले में वांछित चल रहा था। उसके दो साथी रूपकिशोर उर्फ राजू और गोविंद चार सितंबर को सोरों पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। नुरुलहसन भी पहले अलापुर में नकली नोटों के मामले में पकड़ा गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। डेढ़ लाख के नकली नोट के साथ दो गिरफ्तार एसपी सिटी अभिषेक सिंह ने बताया कि नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले यावर अली और नुरुलहसन को गिरफ्तार किया गया है। यावर अली पर आठ और नुरुलहसन पर नौ मुकदमे दर्ज हैं। आरोपियों के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। इस गिरोह में कौन-कौन लोग काम कर रहे हैं।

UP Politics: अखिलेश ने CM योगी को दी अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, क्या स्वीकार करेंगे सीएम?

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती पर पलटवार किया है. बलरामपुर की सभा में उन्होंने अखिलेश को भी अयोध्या से नामांकन करने को कहा और माफिया, राम मंदिर और विपक्ष की भाषा पर भी बोले. उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश पर सवाल उठाए।  अखिलेश दो दिन के दौरे पर अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने भागवत कथा में हिस्सा लिया, संतों से आशीर्वाद लिया और जनसभा में बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है तो अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं. चुनाव आयोग और प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि राज्य न्याय और मानवता से चलता है और अयोध्या की जनता चुनाव में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।  इसी पर योगी ने बलरामपुर में जवाब दिया. उन्होंने कहा, “अखिलेश, अयोध्या हमारी पावन धाम है. हम सियासत के लिए नहीं, विकास के लिए अयोध्या जाते हैं.” आगे बोले, “आइए, आपको ऑफर देता हूं. आप भी अयोध्या से नामांकन करिए और मैं भी. चलिए, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं.” योगी ने अयोध्या को अपनी आस्था की स्थली बताया।  योगी ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा. उनका आरोप था कि पहले माफिया जिस जमीन पर पैर रखता था, उस पर कब्जा कर लेता था. सपा के गुंडे व्यापारियों को फोन कर धमकाते और संपत्ति हड़प लेते थे. उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले बलरामपुर की सड़कें सबसे खराब थीं. अब वोट तस्करी और बदमाशों की अराजकता की जगह विकास और बदलाव का आधार बन रहा है और इलाके को आकांक्षात्मक जिले से संभावनाओं वाला जिला बनाने पर काम हो रहा है।  योगी ने राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का जिक्र कर कहा कि इनके निर्माण में रुकावट बनने वाले आज प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर रहे हैं, पर विरोध की भी एक सीमा होती है. कांग्रेस और सहयोगी दलों पर उन्होंने शिष्टाचार भूलने और अभद्र भाषा बोलने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक ऐसे प्रयास देश को गुमराह करने और अराजकता की ओर ले जाने वाले हैं।  इससे पहले मौर्य ने कहा था कि अखिलेश भागवत कथा में गए, पर राम मंदिर में दर्शन करने नहीं गए. उनके मुताबिक रामलला के दर्शन न करने वालों की रामभक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि देश और दुनिया से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं।  अखिलेश ने अयोध्या में वादा किया था कि सपा की सरकार बनी तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये मिलेंगे. उन्होंने भेदभाव न होने, दुकान और मकान न उजाड़े जाने और अयोध्या की पहचान मजबूत करने के लिए विकास कार्यों में तेजी का भरोसा भी दिया था। 

UP News: बाढ़ से खेतों की सुरक्षा के लिए योगी सरकार की पहल, 25.59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन सुरक्षित

योगी सरकार ने बाढ़ से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की, किसानों को मिली राहत   बाढ़ सुरक्षा के अब तक 1549 प्रोजेक्ट पूरे होने से 2.21 करोड़ की आबादी को मिला लाभ यूपी में बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए व्यापक इंतजाम, भूमि और आबादी को मिला संरक्षण सभी 75 जनपदों में नहरों, जलाशयों और नलकूपों का नेटवर्क भी किया गया मजबूत लखनऊ उत्तर प्रदेश में बाढ़ के खतरे से आबादी और कृषि भूमि को सुरक्षित रखने के लिए योगी सरकार ने बाढ़ सुरक्षा के कार्यों को गति दी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक लगभग 1,549 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इन कार्यों के माध्यम से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को बचाने के साथ 2.21 करोड़ से अधिक आबादी को लाभान्वित किया गया है। बाढ़ सुरक्षा के इन इंतजामों से किसानों की जमीन, ग्रामीण आबादी और खेती-किसानी से जुड़ी आजीविका को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिली है। 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सुरक्षा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुताबिक प्रदेश में बाढ़ से बचाव के लिए पूरी की गई परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य बाढ़ के प्रभाव को कम करना और आबादी व कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है। 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि का संरक्षण किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाढ़ से खेतों में खड़ी फसल, उपजाऊ जमीन और कृषि गतिविधियों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में बाढ़ सुरक्षा के कार्यों से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि की सुरक्षा को मजबूती मिली है। 2.21 करोड़ आबादी को मिला लाभ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखने के लिहाज से भी इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2.21 करोड़ से अधिक आबादी को लाभ मिलने से बाढ़ के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के प्रयासों को बल मिला। बाढ़ से घरों, ग्रामीण संपर्क मार्गों और स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए बाढ़ सुरक्षा संबंधी कार्यों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को भी राहत प्रदेश में जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक कुल 1,300 सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी की गई हैं। इनके माध्यम से 24.11 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ और 1.90 करोड़ से अधिक किसानों को लाभान्वित किया गया है। सिंचाई सुविधाओं के इस विस्तार से खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने और किसानों को कृषि कार्यों में सहायता देने की दिशा में काम किया गया। वहीं इसके अतिरिक्त प्रदेश के 75 जनपदों में 76,527 किलोमीटर नहरों की लंबाई, 71 जलाशयों और 36,342 नलकूपों के जरिए सिंचाई व्यवस्था के व्यापक नेटवर्क को मजबूत किया गया है।