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सीएम योगी के निर्देश पर कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान, अवैध सेंटरों पर कसेगा शिकंजा

सीएम योगी के निर्देश पर कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान प्रशासन, प्राधिकरण व फायर सर्विस की संयुक्त टीमों ने किया निरीक्षण, सौ से अधिक संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई कानपुर के काकादेव में 30 से अधिक कोचिंग संस्थान हुए सील, सुरक्षा मानकों व नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई लखनऊ,  लखनऊ में हुए दुखद हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर सभी जनपदों में कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण का महाअभियान शुरू कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग, प्राधिकरण और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयुक्त टीमें बनाकर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी का निरीक्षण किया। लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा आदि महानगरों के साथ अन्य जनपदों में भी यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अनियमितताएं मिलने पर सौ से अधिक कोचिंग संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी। अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य मानकों की जांच लखनऊ में हुई दुःखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सभी जिलों में जांच के सख्त निर्देश दे थे। कुछ जिलों में देर शाम में ही जांच कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। मंगलवार को यह अभियान और तेज रहा। उन कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई जो गैर पंजीकृत थे। टीमों ने विशेष तौर पर अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य सुरक्षा मानकों की पड़ताल की। जांच का क्रम देर रात तक जारी था। प्रयागराज के मुख्य अग्नि शमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नगर में 97 पंजीकृत संस्थानों में केवल 15 कोचिंग संस्थानों ने से एनओसी ली है। फायर विभाग ने दस टीमों का गठन किया है, जो लगातार जांच करेंगीं। इसी क्रम में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग को सील कर दिया।  कानपुर में पार्किंग को बना दिया बच्चों का क्लासरूम, फायर एनओसी भी वैध नहीं कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते और अग्निशमन अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों में मानकों के अनुपालन की जांच का काम सोमवार शाम से ही शुरू कर दिया था। मंगलवार शाम तक यहां के सबसे बड़े शैक्षणिक हब काकादेव में 30 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया गया। इन सभी को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। सबसे गंभीर उल्लंघन भवनों के बेसमेंट में पाया गया, जिनका आवंटन सिर्फ पार्किंग के लिए था, लेकिन वहां अवैध रूप से सैकड़ों बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम बना दिए गए थे। मीरजापुर में भी लगभग एक दर्जन संस्थान सील किए गए।  वाराणसी में भी मिली अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी, जौनपुर और चंदौली में भी जांच वाराणसी  विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने बनारस में भी सोमवार से ही कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों की जांच शुरू कर दी। इस दौरान कई संस्थानों को सील किया गया है। कई संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन पाया गया है। जौनपुर और चंदौली में जांच की जा रही है। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि कई कोचिंग सेंटर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं निर्धारित भवन मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे थे, उन्हें सील किया गया।

खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करें, किसानों को समय पर उपलब्ध हों सभी संसाधन: मुख्यमंत्री

असामान्य वर्षा की आशंका के दृष्टिगत प्रदेशव्यापी तैयारी तेज, पूरी तरह सतर्क रहें सभी विभाग: मुख्यमंत्री खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करें, किसानों को समय पर उपलब्ध हों सभी संसाधन: मुख्यमंत्री बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसली ऋण की व्यवस्था पर विशेष जोर, जमीनी स्तर पर हो सतत निगरानी पशुधन संरक्षण, चारा भंडारण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश खरीफ अभियान, पेयजल, पशुधन संरक्षण एवं जल संरक्षण की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की विस्तृत समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा के अंतर्गत आने वाले विभागों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि मौसम की अनिश्चितता और वर्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रदेश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। ऐसे में किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई जल, विद्युत आपूर्ति, फसली ऋण तथा वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पूर्व तैयारी रखने के निर्देश दिए।  बैठक में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए 110.65 लाख हेक्टेयर आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि वर्ष 2025 में 106.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस वर्ष धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन तथा कुल खरीफ उत्पादन का लक्ष्य 302.62 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। 22 जून तक 5.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई तथा 4.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान नर्सरी का आच्छादन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए किसानों को समय पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। संभावित अल्पवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न परिस्थितियों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है। आवश्यकता पड़ने पर उर्द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल तथा अन्य कम अवधि वाली फसलों के आच्छादन को बढ़ाया जाएगा। किसानों को संदेश सेवा, आकाशवाणी, दूरदर्शन तथा अन्य माध्यमों से कृषि संबंधी तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतम कवरेज तथा किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बीज उपलब्धता की समीक्षा में बताया गया कि खरीफ 2026 में अनुदान पर बीज वितरण का लक्ष्य 2.29 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1.77 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है तथा 1.12 लाख क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित रहे और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता की नियमित निगरानी की जाए तथा कृत्रिम कमी अथवा कालाबाजारी की किसी भी शिकायत पर कठोर कार्रवाई की जाए। उद्यान विभाग की समीक्षा में बताया गया कि सूखा प्रबंधन की रणनीति के तहत 125 हाईटेक नर्सरियों के माध्यम से 15 करोड़ सब्जी पौध उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने सिंचाई तथा लघु सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि नहर प्रणाली का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए और अंतिम छोर तक सिंचाई जल पहुंचाया जाए। प्रत्येक ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर सिंचाई संसाधनों तथा कृषि आवश्यकताओं का आकलन किया जाए। कम सिंचाई वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने संभावित सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारा, पानी और चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। भूसा संग्रहण अभियान के अंतर्गत 131.40 लाख क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 136.01 लाख क्विंटल भूसा संग्रहित किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 103 प्रतिशत है। पशुओं के लिए टीकाकरण अभियान निरंतर संचालित हैं तथा मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से चौबीसों घंटे सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने चारा भंडारण तथा पशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। पंचायती राज विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल स्रोतों के संरक्षण, हैंडपंपों के अनुरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को अभियान के रूप में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच

एसआईटी ने की अग्निकांड स्थल की पड़ताल, घायलों से भी मिला जांच दल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच घायलों से मिली जानकारी व साक्ष्य के आधार पर कई लोगों से होगी पूछताछ: अमृत अभिजात एफएसएल की टीम ने मौके से जुटाए महत्वपूर्ण साक्ष्य, निर्धारित समय में आएगी जांच रिपोर्ट: प्रवीण कुमार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर अलीगंज अग्निकांड की समग्र जांच तेज गति से जारी है। मंगलवार को दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) घटनास्थल पर पहुंचा। टीम ने इसके बाद केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की और उनसे घटना के संबंध में जानकारी ली। उत्तर प्रदेश विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने भी घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। एसआईटी के सदस्य अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और एडीजी (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने करीब एक घंटे से अधिक समय तक बारीकी से पूरी बिल्डिंग का निरीक्षण किया। अमृत अभिजात ने कहा कि घटनास्थल की विभिन्न प्रकार से फोटो ली गई हैं। साक्ष्य जुटाकर जांच को तेजी से अंजाम दिया जा रहा है। अग्निकांड से संबंधित व्यक्तियों व विभागों से भी पूछताछ होगी। उसके बाद जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। एडीजी प्रवीण कुमार ने बताया कि हम लोगों ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया है। साथ में फॉरेंसिक की टीम ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनके आधार पर कुछ लोगों से पूछताछ की जाएगी। घटना से संबंधित हर विभाग के दायित्व को जांच दायरे में शामिल किया गया है। अग्निकांड पीड़ितों से भी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय सीमा में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। घटनास्थल से निकलने के बाद एसआईटी ने केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की। अयोध्या मामले में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी  अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। एफएसएल ने जुटाए घटनास्थल से नमूने घटनास्थल पर एफएसएल डायरेक्टर आदर्श कुमार और विशेषज्ञों की टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। इसमें मलबा, जले हुए उपकरण और तार समेत अन्य नमूने शामिल हैं। गौरतलब है कि हादसे की सूचना मिलते ही सीएम योगी ने अलीगढ़ दौरा बीच में रद्द कर घटनास्थल का मुआयना किया था। उन्होंने केजीएमयू में पीड़ितों से भी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया। एसआईटी को 7 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी है। अब तक मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा पर योगी सरकार सख्त, अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ पूरे यूपी में चलेगा विशेष अभियान

विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार सख्त, अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ पूरे प्रदेश में जारी रहेगा विशेष अभियान   सभी जिलाधिकारियों को लगातार सर्वे और कार्रवाई के निर्देश, पंजीकृत कोचिंग संस्थानों का भी हो रहा सुरक्षा ऑडिट    सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण को लेकर नहीं किया जाएगा कोई समझौता किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगाः उच्च शिक्षा मंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेशभर में संचालित कोचिंग संस्थानों के विनियमन को प्रभावी बनाने तथा अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों के विरुद्ध विशेष अभियान तेजी के साथ चलाया जा रहा है।   उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश है कि वे अपने जनपदों में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वेक्षण कर सूची तैयार करें। जो संस्थान उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। पंजीकृत संस्थानों का भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप निरीक्षण कराया जा रहा है। इसमें भवन व्यवस्था, अग्निशमन, विद्युत सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच शामिल है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   उच्च शिक्षा मंत्री उपाध्याय ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित सर्वोपरि हैं। सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश में संचालित प्रत्येक कोचिंग संस्थान निर्धारित मानकों का पालन करे।   उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और विश्वसनीय शैक्षिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित शिक्षण वातावरण मिले और कोचिंग संस्थानों में निर्धारित मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित हो।   इस संबंध में विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव द्वारा पत्र भी जारी किया गया। अब जिलाधिकारियों द्वारा अपने जनपदों में अभियान चलाकर बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ ही पंजीकृत संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण भी कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार विजेताओं को दी बधाई, कहा- प्रदेश के लिए गौरव की बात

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी शुभकामनाएं राष्ट्रपति ने मंगलवार शाम प्रदान किया पद्म पुरस्कार इस विशिष्ट उपलब्धि ने देश और दुनिया में बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री चिरंजी लाल यादव व अनिल रस्तोगी को कला, रघुपत सिंह (मरणोपरांत) को कृषि, संगीतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. मंगला कपूर को मिला पद्मश्री लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में वर्ष 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए। इसमें उत्तर प्रदेश की कई विभूतियों को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर पोस्ट कर पद्म पुरस्कार से अलंकृत विभूतियों को शुभकामनाएं दीं।  'कांसा नक्काशी' की कला को सहेजने, संवारने में चिरंजी लाल का अमूल्य योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा चिरंजी लाल यादव को कला के क्षेत्र में 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। सीएम ने पोस्ट किया कि पिछले पांच दशकों से 'कांसा नक्काशी' की समृद्ध कला को सहेजने, संवारने और उसे राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में आपका योगदान अमूल्य और सराहनीय है। आपकी इस विशिष्ट उपलब्धि ने देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है। रघुपत जी की तपस्या ने भारतीय कृषि को नई दिशा प्रदान की: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने लिखा कि राष्ट्रपति द्वारा स्व. रघुपत सिंह जी को कृषि के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान हेतु 'पद्म श्री' (मरणोपरांत) से सम्मानित किया जाना अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायी है। पांच दशकों से अधिक समय तक कृषि सेवा के प्रति उनकी तपस्या ने भारतीय कृषि को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपना जीवन पारंपरिक बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित कर किसानों के जीवन को समृद्ध बनाने में असाधारण योगदान दिया। आत्मनिर्भर कृषि व जैव विविधता संरक्षण को सशक्त बनाने में उनकी भूमिका सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। 'रस्तोगी जी ने कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गौरवभूषित' मुख्यमंत्री ने अनिल रस्तोगी को भी पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। उन्होंने लिखा कि प्रख्यात रंगकर्मी एवं विद्वान अनिल कुमार रस्तोगी को कला क्षेत्र में 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किया जाना उत्तर प्रदेश वासियों के लिए हर्ष व गर्व का विषय है। 1,000 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों व वैश्विक नाट्य महोत्सवों के माध्यम से आपने भारतीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवभूषित किया है। आपके शोध पत्र, आपकी उत्कृष्ट शिक्षा, संस्कार एवं विद्वता के जीवंत प्रमाण हैं। रंगमंच के लिए आपका योगदान रंगकर्मियों के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद है। मंगला कपूर जी की परिश्रम और समर्पित साधना का राष्ट्रीय अभिनंदन है पद्मश्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश की सुप्रसिद्ध संगीतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. मंगला कपूर जी को 'पद्म श्री' से अलंकृत किया जाना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। दुर्लभ रागों का दस्तावेजीकरण और 40 से अधिक मौलिक रचनाओं का संकलन उनकी प्रतिभा और तपस्या का प्रमाण है। यह सम्मान उनके अथक परिश्रम और समर्पित साधना का राष्ट्रीय अभिनंदन है।

योगी सरकार का ‘संभव 6.0’ अभियान शुरू, गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक कुपोषण पर होगा बड़ा वार

योगी सरकार का 'संभव 6.0' अभियान शुरू, गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक कुपोषण से मिलेगी मुक्ति  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग चला रहा राज्यव्यापी अभियान आईसीडीएस, स्वास्थ्य, पंचायती राज, यूनिसेफ समेत कई संस्थाओं के सहयोग से तैयार हुई व्यापक कार्ययोजना पोषण सुरक्षा का नया संकल्पः साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड से होगी प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग हर 15 दिन पर जिला कार्यक्रम अधिकारियों के साथ होगी राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने मातृ एवं बाल कुपोषण को कम करने तथा पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 'संभव 6.0' अभियान की शुरुआत की है। अभियान का राज्य स्तरीय शुभारम्भ बीती 18 जून को लखनऊ से किया गया। इस वर्ष अभियान की थीम गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा निर्धारित की गई है, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 'संभव 6.0' अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, यूनिसेफ तथा अन्य विकास सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। अभियान के दौरान सभी विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे। प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे, जबकि जुलाई से सितम्बर 2026 तक प्रत्येक 15 दिन पर राज्य स्तर से जिला कार्यक्रम अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित होगी। व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जाएंगे संचालित सभी मंडलों और जनपदों के लिए माइक्रो प्लान साझा किया गया है। इसके तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों को अभियान की रणनीति और लक्ष्यों से भलीभांति अवगत कराया जा सके। इसके साथ ही आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग के संयुक्त सहयोग से प्रदेशभर में विशेष पोषण पाठशाला का आयोजन किया जाएगा, जहां परिवारों को संतुलित आहार, शिशु देखभाल और मातृ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। कुपोषण में कमी और स्वस्थ भविष्य है अभियान का लक्ष्य 'संभव 6.0' जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण पर आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य गर्भधारण से लेकर बाल्यावस्था तक पोषण संबंधी सेवाओं को सुदृढ़ करना है। जुलाई 2026 में जिला पोषण समिति (डीएनसी) की बैठकों के दौरान सभी जनपदों में अभियान का औपचारिक शुभारम्भ किया जाएगा। अभियान के परिणामों का प्रारम्भिक आकलन अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अभियान के प्रभाव और उपलब्धियों का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए नियोजन विभाग के माध्यम से तृतीय पक्ष मूल्यांकन कराया जाएगा। इससे वास्तविक प्रगति का आकलन संभव हो सकेगा और भविष्य की रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन

अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी

'शिक्षक सर्वोपरि' के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार, एसीएस ने रखा व्यापक रोडमैप – अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी – यूट्यूब लाइव संवाद में लाखों शिक्षकों से जुड़े अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, कक्षा कक्ष को बताया शिक्षा सुधारों का केंद्र – निपुण भारत मिशन का विस्तार कक्षा 5 तक, स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में आउट ऑफ स्कूल बच्चों पर फोकस – 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, 21 हजार नई भर्तियों की प्रक्रिया से शिक्षकों में उत्साह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सरकार शिक्षक सशक्तीकरण, छात्र नामांकन, अधिगम सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर एक साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से संवाद करते हुए शिक्षा विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए। संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बनाई गई योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और कक्षा में उसके कार्य से तय होती है। इसलिए शिक्षा सुधारों में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और नामांकन पर विशेष फोकस रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की सूचनाओं की सहायता से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। नियमित उपस्थिति और सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप शिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा। उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालयों, प्रिंट समृद्ध सामग्री और अभिभावक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उसे वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही विद्यालयों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई। शिक्षकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी। संवाद के अंत में उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: BSB स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मुख्यधारा से जुड़ने का मौका

छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता, बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार – यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति – छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल – जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

नोएडा ने रचा नया इतिहास, देश की पहली स्मार्ट कचरा व्यवस्था शुरू; सफाई व्यवस्था होगी पूरी तरह हाईटेक

नोएडा  नोएडा प्राधिकरण शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वह सड़क पर किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकी से लैस कचरा पेटियों (डस्टबिन) की व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही इन डस्टबिन में कचरा भर जाएगा, कंट्रोल रूम में घंटी बजने लगेगी। इससे प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो जाएगा और कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था देश में पहली बार नोएडा में लागू की जा रही है। प्रथम चरण में इसे सार्व जनिक शौचालयों पर लागू किया जाएगा। प्राधिकरण ने शहर में 320 सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना की है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित हो रहे हैं। इस माॅडल की सराहना करते हुए मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने अन्य नगर निगमों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन डस्टबिन को शौचालयों के बाहर स्थापित किया जाएगा, जो जीपीएस और सेंसर से युक्त होंगे। इनकी मानिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) द्वारा की जाएगी, जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की सभी गाड़ियों की निगरानी होती है। हालांकि नियमित डस्टबिन की सफाई और कचरा कलेक्शन का कार्य जारी रहेगा। यदि डस्टबिन में कचरा भर जाता है और कंट्रोल रूम पर घंटी बजती है, तो कचरा उठाने वाली गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन से कचरा हटा देगी। इससे सड़क पर कचरा फेंकने वालों को रोका जा सकेगा। शहर की जनसंख्या के अनुसार, वर्तमान में साढ़े छह लाख की आबादी के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा था। नई जनगणना के अनुसार, लगभग पांच लाख मकान और 14.5 लाख की आबादी सामने आई है। इस बदलाव के चलते कचरा कलेक्शन के लिए नए नियमों के तहत कार्ययोजना बनाई जाएगी। कम से कम दो टेंडर जारी किए जाएंगे, जिससे गली, गांव, सेक्टर, सोसायटी और बाजारों में कचरा एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। जनगणना के बाद शहर की स्थिति     नई जनगणना के हिसाब से करीब पांच लाख मकान     नई जनगणना के हिसाब से करीब आबादी 14.5 लाख     पुरानी जनगणना के हिसाब से करीब दो लाख मकान     पुरानी जनगणना के हिसाब से शहर की आबादी 6.5 लाख शहर में शौचालयों की स्थिति     पब्लिक टाॅयलेट : 117     कम्यूनिटी टाॅयलेट : 67     पिंक टाॅयलेट : 16     यूरिनल ब्लाॅक्स : 120     "तमाम फाइव स्टार व थ्री स्टार होटल्स में अत्याधुनिक शौचालय तैयार किए गए है, नोएडा में भी सड़क किनारे लग्जरी टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया जा रही है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीकी से लैस डस्टबिन को शौचालयों के बाहर लगवाजाएगा, जिसमें कचरा डालने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वैसे अधिकांश शौचालय उन्हीं जगहों पर बने है, जहां पर वेंडिंग जोन बाजार,आम जनमानस के आने जाने के पर्याप्त स्थान है।"     -इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।  

मिर्जापुर में बनेगी भव्य गंगा पैड़ी! बलुआ लाल पत्थरों से संवरेगा घाट, काशी जैसा होगा नजारा

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वाराणसी के काशी की तरह गंगा के किनारे 6 किलोमीटर निर्माण का निर्माण कराया जाएगा. पैड़ी के माध्यम से सभी गंगा घाट को एक किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ख्याल रखते हुए घाटों का निर्माण कराया जाएगा. पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया है।  प्रस्ताव मंजूर होने और धन आवंटन के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा. पैड़ी को विंध्याचल से मिर्जापुर तक जोड़ा जाएगा, इसमें लोगों के टहलने के साथी अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेगी, जहां इसका लाभ आम लोग उठा सकेंगे. नए और अत्यधिक घाटों का निर्माण हो जाने के बाद न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बल्कि, घाट के आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।  50 फीट चौड़ी होगी पैड़ी लोक निर्माण विभाग के द्वारा विंध्याचल से फतहा गंगा घाट को जोड़ने के लिए 400 करोड रुपए की योजना तैयार की गई है. प्रस्तावित योजना के तहत 50 फीट चौड़ी पैड़ी का निर्माण काशी की तर्ज पर कराया जाएगा. यह करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा, इससे मिर्जापुर से विंध्याचल के जितने भी गंगा घाट है, सभी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे. वहीं, गंगा के तटीय क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा. लोक निर्माण विभाग के द्वारा परियोजना शासन में भेज दिया गया है. परियोजना मंजूर होने के बाद काम शुरू किया जाएगा. प्रस्तावित योजना में लोगों के लिए मॉर्निंग वॉक और रोजगार व पर्यटन को बढ़ाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।  मौजूद होगी सुविधाएं पैड़ी में घाट के किनारे रंग-बिरंगे फूलों को लगाया जाएगा. आराम करने के लिए बलुआ लाल पत्थरों से चबूतरे बनाए जाएंगे. ताकि, कोई आसानी से बैठकर आराम कर सके. पैड़ी के निर्माण को लेकर कुछ जगहों पर जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी. सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. लोक निर्माण विभाग जमीन को अधिग्रहित करेगा. पैड़ी बन जाने के बाद मिर्जापुर के गंगा के तटीय इलाकों का विकास होगा. रोजगार के साथ सुबह टहलने के लिए समस्याएं खत्म होगी।  शासन को भेजा गया प्रस्ताव प्रांतीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि गंगा के तट पर काशी के तर्ज पर पैड़ी का निर्माण किया जाना है. 400 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार करके शासन को भेजा गया है. 6 किलोमीटर लंबा और 50 मीटर चौड़े घाटों का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद घाटों के निर्माण का काम तेजी के साथ किया जाएगा।