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सैनिक स्कूल में ऑडिटोरियम का उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की स्मृति में बना है ऑडिटोरियम मंगलवार को जीबीआर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में होगा श्रद्धांजलि अर्पण कार्यक्रम पिपरौली में मंगलवार को राजकीय आईटीआई का भी लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 9 दिसंबर को गोरखपुर के सैनिक स्कूल में देश के पहले सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) स्वर्गीय बिपिन रावत की स्मृति में बने ऑडिटोरियम का उद्घाटन और उनकी प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसका निर्माण सैनिक स्कूल प्रोजेक्ट में राज्य सरकार द्वारा कराया गया है। पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर जीबीआर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की तरफ से होने वाले आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री इस महान सैन्य अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ जनरल रावत के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन करेंगे। मंगलवार को ही दोपहर बाद मुख्यमंत्री, पिपरौली ब्लॉक के नरकटहा में पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सीएसआर फंड से बने राजकीय आईटीआई का भी लोकार्पण करेंगे।  सैनिक स्कूल में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धाजंलि अर्पण और उनकी याद में बनाए गए ऑडिटोरियम के उद्घाटन का कार्यक्रम मंगलवार सुबह 10 बजे से होगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लाखेड़ा, जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन के सचिव मंजीत नेगी और जनरल बिपिन रावत की सुपुत्री कृतिका और तारिणी रावत की भी उपस्थिति रहेगी। गोरखपुर के सैनिक स्कूल में निर्मित जनरल बिपिन रावत ऑडिटोरियम की क्षमता 1000 से अधिक लोगों के बैठने की है।  सीएम योगी देंगे पिपरौली क्षेत्र में नए राजकीय आईटीआई का उपहार गोरखपुर दौरे के दौरान मंगलवार दोपहर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिपरौली क्षेत्र के ग्राम नरकटहा में बने राजकीय आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) का लोकार्पण करेंगे। इस आईटीआई का निर्माण पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से 16 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। पिपरौली क्षेत्र का आईटीआई गोरखपुर का 11वां और पीपीपी मोड में संचालित होने वाला तीसरा राजकीय आईटीआई होगा।

परिवहन मंत्री का बड़ा ऐलान: इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार, देश के सभी जिलों में पहुंचेंगी बसें

लखनऊ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी (ICES-2025) की 7वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े शहरों में पर्यावरणीय चुनौतियां तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति ने पिछले 200 वर्षों में पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचाई है, इसलिए अब छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव लाने की जरूरत है। मंत्री ने बताया कि डीजल बसें प्रदूषण का मुख्य कारण हैं, इसलिए विभाग ने इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले 15 शहरों में ई-बसेें चलती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 43 हो गई है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सभी जिलों में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ की वायु गुणवत्ता में सुधार का बड़ा कारण इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या है। कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक सहमति बनना समय की जरूरत है। उन्होंने देश-दुनिया से आए विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए स्थानीय और वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। लोकसेवा आयोग के सदस्य ए.के. वर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्लोबल सोच, राष्ट्रीय नीतियां, स्थानीय कार्य और व्यक्तिगत जागरुकता—चारों स्तरों पर कार्रवाई जरूरी है। ग्लोकल एनवायरनमेंट एंड एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.डी. गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानवता के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है। कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक रामकुमार वर्मा की स्मृति में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड की शुरुआत की गई, जो इस वर्ष डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार को दिया गया। समारोह में परिवहन मंत्री को अमेरिकन यूनिवर्सिटी की ओर से मानद उपाधि भी प्रदान की गई। सम्मेलन का आयोजन भाषा विश्वविद्यालय, जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, अमेरिकन यूनिवर्सिटी, ईसीआरडी परिषद और जेसा के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संयोजन डॉ. नलिनी मिश्रा और डॉ. राजकुमार सिंह ने किया। पौधे को मिलता है उर्वरक का सिर्फ 30% हिस्सा अमेरिका की नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. विनय पी. अनेजा ने कहा कि कृषि में उपयोग होने वाले उर्वरक का केवल 30% हिस्सा ही पौधे को मिलता है, जबकि 70% बर्बाद होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन का अत्यधिक दोहन गंभीर खतरा बन चुका है। अमोनिया-आधारित उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी, जल और ओजोन परत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और बढ़ती आबादी के बीच नाइट्रोजन संतुलन बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।  

एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह का मुख्य महोत्सव बुधवार को

सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे अध्यक्षता, मुख्य अतिथि होंगे उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम परिसर में होगा समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह एमपी शिक्षा परिषद के स्मृतिशेष अध्यक्ष पर केंद्रित पुस्तक का भी होगा विमोचन गोरखपुर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह का मुख्य महोत्सव (समापन कार्यक्रम) बुधवार (10 दिसंबर) को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) आरोग्यधाम, बालापार रोड के परिसर में भव्यतापूर्वक होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरक्षपीठाधीश्वर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह शामिल होंगे। समारोह में उत्कृष्टता के आधार पर एमपी शिक्षा परिषद की संस्थाओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और संस्थापक सप्ताह समारोह के तहत आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ट्रॉफी, पदक व नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर एमपी शिक्षा परिषद के स्मृतिशेष अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी होगा। मुख्य महोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह बुधवार प्रातः 9.30 बजे से प्रारम्भ होगा।  1932 में पूर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण के ध्येय से ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ द्वारा स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह का शुभारंभ 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ था। शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी उपस्थित थे। 10 दिसंबर को इसका समापन सप्ताह भर चली विभिन्न प्रतियोगिताओं के मेधावियों को पुरस्कृत करने के साथ होगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों पुरस्कृत होंगी। इस दौरान परिषद की सर्वश्रेष्ठ संस्था, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक, सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी, इंटरमीडिएट, स्नातक व परास्नातक के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को स्वर्ण पदक भी प्रदान किया जाएगा। पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह पर केंद्रित पुस्तक का होगा विमोचन संस्थापक समारोह के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति स्वर्गीय प्रो. यूपी सिंह पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। इस पुस्तक ‘जीवन के साधना पथ का गृहस्थ सन्यासी प्रो. उदय प्रताप सिंह एवं जीवन मूल्य’ का प्रकाशन प्लाक्षा प्रकाशन ने किया है।

गंगा एक्सप्रेसवे के खुलने से मेरठ-प्रयागराज का सफर केवल 8 घंटे में पूरा

हापुड़  जनवरी में मेरठ से प्रयागराज तक का सफर सुहाना हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो गया है। इनका ट्रायल दिसंबर में करने की तैयारियां की जा रही हैं। ट्रायल से पहले एक्सपर्ट की टीम निरीक्षण करने के बाद कुछ जरूरी प्रमाण पत्र जारी करेगी। उसके बाद ट्रायल रन की तिथि का एलान कर दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में इसको जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। एक्सप्रेस-वे के तीसरे खंड में उन्नाव-हल्द्वानी सेक्शन में मात्र दो प्रतिशत कार्य ही अब बाकी है। इसके अलावा मेरठ-बदायूं सहित पूरा एक्सप्रेस-वे फर्राटा भरने के लिए तैयार है। मेरठ से प्रयागराज तक के 594 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे पर कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर हैं। इनमें से 1497 स्ट्रक्चर का कार्य पूरा हो गया है। मेरठ से बदायू तक के प्रथम सेक्टर में 129 किमी की लंबाई में कुल बड़े 322 स्ट्रक्चर हैं। इनमें सिंभावली सहित सभी पर कार्य पूरा हो चुका है। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार दिसंबर में इसका ट्रायल रन पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद अंतिम परीक्षण करके 15 जनवरी तक प्रधानमंत्री इसका उदघाटन करेंगे। एक्सप्रेस-वे पर पांच स्थानों पर लडाकू विमान उतारने योग्य स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। जिसका प्रयोग आपात स्थिति में किया जा सकेगा। प्रदेश को आने वाले साल में गंगा एक्सप्रेस-वे के रूप में प्रयागराज तक का नया हाईवे मिल जाएगा। इस 594 किलोमीटर के एक्सप्रेस वे का निर्माण पूरा हो गया है। इसके बाद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ व प्रयागराज के औद्योगिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारा बनाया जा रहा है। इससे प्रदेश के दोनों सिरों के लोगों के आवागमन का एक और सुगम पथ संचालित हो जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा एक्सप्रेसवे के कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस 36,230 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए 7453.13 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। अभी इसका विस्तार हरिद्वार किया जा रहा है। छह लेन में बनाए गए इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की सामान्य रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में लड़ाकू विमानों के लिए 3.5 किलोमीटर हवाई पट्टी का भी निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं ऐसे तीन और स्थान विकसित करने की तैयारी है।     गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। अब इसके ट्रायल की तैयारी है। हमारा प्रयास है कि दिसंबर में ट्रायल रन कराकर जनवरी में इसका उदघाटन करा लिया जाएगा। हमारी ओर से उदघाटन के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इस संबंध में यूपीडा व एनएचएआइ के अधिकारियों के साथ जल्द ही बैठक का आयोजन किया जाएगा। – संदीप कुमार, एडीएम गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ-प्रयागराज) नवीनतम निर्माण स्थिति विवरण                                                                     स्थिति एक्सप्रेस-वे निर्माण की कुल स्थिति                       लगभग 98 प्रतिशत पूरा मुख्य कैरिजवे का काम                                     99 प्रतिशत पूरा हो गया मेरठ और बदायूं के बीच खंड                           130 किलोमीटर का निर्माण ट्रायल के लिए तैयार प्रस्तावित ट्रायल रन का समय                            दिसंबर 2025 का पहला सप्ताह एक्सप्रेसवे का उद्घाटन                                   जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में मेरठ से प्रयागराज यात्रा का समय (एक्सप्रेसवे के बाद)     केवल 6 घंटे

काशी तमिल संगमम-4 में दक्षिण भारत से आए प्रतिनिधियों ने की उत्तर प्रदेश के गुड गवर्नेंस की प्रशंसा

  योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री हमारे राज्य में होता, तो हमारा शहर भी और अधिक विकसित हो सकता था -मोनालीसा, प्रतिनिधि  दक्षिण भारतीय प्रतिनिधि ने योगी सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए 10 में 10 नंबर दिए प्रतिनिधियों ने यात्रा के दौरान महिला सुरक्षा के इंतज़ाम को देखकर उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था को सराहा  काशी के हेरिटेज को रिवाइव करके संजो कर रखा है, इंफ्रास्ट्रक्चर और सौंदर्यीकरण का कार्य काफी बेहतरीन है -पृथवी राज  काशी की सड़के पहले सकरी थी, यातायात बहुत ख़राब था,गंदगी थी अब इसमें सभी कार्यो में काफी सुधार हुआ है–तिलकवदी वाराणसी वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम-4.0 में दक्षिण भारत  से आए प्रतिनिधियों के समूह ने उत्तर प्रदेश के विकास समेत अन्य कामों को देखा, सराहा और गुड गवर्नेंस के लिए खुल कर सराहना की। दक्षिण भारत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों, प्रशासनिक प्रबंधन और कानून व्यवस्था की प्रशंसा की। वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के भ्रमण के बाद प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यो को लेकर अपनी राय रखी।  प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जो जमीन पर स्पष्ट दिखाई देते हैं। प्रतिनिधियों ने योगी सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए 10 में 10 नंबर दिए।  चेन्नई से पहली बार वाराणसी आई मोनालीसा ने कहा की उत्तर प्रदेश में गुड गवर्नेंस है। योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बहुत कार्य किया है, “योगी जैसा मुख्यमंत्री हमारे राज्य में होता, तो हमारा शहर भी और अधिक विकसित हो सकता था। उन्होंने यात्रा के दौरान महिला सुरक्षा के इंतज़ाम को देखकर उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था की तारीफ़ की। संतोष कुमार ने योगी सरकार के कार्यो को देखते हुए कहा कि उन्हें 10 में से 10 नंबर दिया जा सकता है। पुडुचेरी से आए आर्किटेक्ट  पृथ्वीराज  ने कहा कि सरकार ने काशी के हेरिटेज को रिवाइव करके बहुत अच्छे से संजो के रखा है। शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर और सौंदर्यीकरण काफी बेहतरीन है। तिलकवदी ने कहा कि काशी की सड़के पहले सकरी थी, यातायात बहुत ख़राब था,गंदगी थी अब सभी कार्यो में काफी सुधार आया है।  तमिलनाडु के विरुधुनगर के दीपक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा, परिवहन, आवास और आयोजन स्थल पर किए गए इंतजाम अत्यंत प्रभावी और व्यवस्थित थे। उनका कहना था कि पूरे आयोजन में अनुशासन और सौहार्द का जो वातावरण देखने को मिला, वह उत्तर प्रदेश प्रशासन की गुड गवर्नेंस को दर्शाता है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयोजित यह संगम उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के संगम का श्रेष्ठ उदाहरण बन चुका है। प्रतिभागियों का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना इस आयोजन में जीवंत होती दिख रही है। 2 दिसंबर से शुरू हुआ दो-सप्ताह का ये कार्यक्रम तमिलनाडु और काशी के बीच सेतू बनकर सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को मजबूत कर रहा है । इस आयोजन में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि,सात विभिन्न श्रेणियों में जिसमे छात्र, शिक्षक, लेखक , मीडिया प्रतिनिधि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पेशेवर एवं शिल्पकार, महिलाएँ तथा आध्यात्मिक विद्वान शामिल हो रहे है।

महाकुंभ 2025 की तरह माघ मेला 2026 को दिव्य भव्य और नव्य स्वरूप प्रदान कर रही है योगी सरकार

प्रयागराज माघ मेले की प्रकाश व्यवस्था में भी मिलेगी नव्यता की झलक: योगी सरकार माघ मेले में आने वाले आगंतुकों के रास्ते रोशन करेगी नियॉन और स्पाइरल लाइट्स: योगी सरकार प्रयागराज प्रयागराज में माघ मेले में त्रिवेणी के तट पर आस्था का जन समागम एकत्र होगा । योगी सरकार की तरफ से इस आयोजन को दिव्य ,भव्य और नव्य स्वरूप देने के लिए माघ मेला क्षेत्र से जुड़े शहर के उन मार्गों और गलियों को भी आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है जहां से होकर पर्यटक और श्रद्धालु माघ मेला पहुंचेंगे । इसी क्रम में शहर की हर मुख्य मार्ग और संपर्क मार्ग को रोशनी से भरने की तैयारी है।नगर निगम यह जिम्मेदारी उठा रहा है । सड़क किनारे के वृक्षों को रोशनी के माध्यम से नया स्वरूप दिया गया है।  नियॉन और स्पाइरल रोशनी से जगमग होंगे माघ मेला आगंतुकों के रास्ते प्रयागराज में 3 जनवरी से लगने जा रहे आस्था के महा जन समागम माघ मेला 2026 की तैयारियों को लेकर सभी विभाग अपनी तैयारियों में जुटे हैं। मेला क्षेत्र के अंदर और बाहर आगंतुकों के गुजरने वाले मार्गों को सजाने संवारने की कवायद भी चल रही है। नगर निगम प्रयागराज के यांत्रिक विभाग के चीफ इंजीनियर ( विद्युत) डॉ संजय कटियार बताते हैं कि माघ मेले में आने वाले पर्यटकों के  स्वागत के लिए की संगम नगरी की  सड़कों के साथ उनके दोनों ओर की प्रकाश व्यवस्था को भी भव्य स्वरूप दिया जा रहा है।   शहर में सड़क किनारे लगे वृक्षों का नया लुक देने के लिए महाकुंभ 2025  की तर्ज पर नियॉन और स्पाइरल लाइट की संयोजित प्रकाश व्यवस्था की गई है। इस  व्यवस्था में शहर के महत्वपूर्ण मार्गों के 260 वृक्षों के तनों, शाखाओं और पत्तियों में अलग अलग थीम की रोशनी लगाई गई है। इनमें नियॉन और स्पाइरल लाइट्स को इस तरह संयोजित किया गया है जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कैसे रात के अंधेरे में पूरा वृक्ष आलोकित हो गया है। प्रयागराज एयरपोर्ट से लेकर संगम तक जाने वाले  पर्यटक और श्रद्धालु इस भव्य प्रकाश व्यवस्था का अवलोकन कर सकेंगे। शहर की 23 सड़कों,  06 आरओबी और 02  फ्लाईओवर में  शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, तलवार आदि के आकार के मोटिव्स भी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी तरफ खींचेंगे । महाकुंभ में की गई इस व्यवस्था को माघ मेले के आयोजन में भी धरातल में उतारा जा रहा है। इसके लिए अलग से कोई बजट की व्यवस्था नहीं है क्योंकि ये अभी भी एक साल की गारंटी के अवधि में हैं।  शहर की सड़क और गलियां होंगी जगमग माघ मेला क्षेत्र के अलावा शहर के सभी वार्डों की हर गली और प्रमुख मार्ग में प्रकाश की बेहतर व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रयागराज नगर निगम की तरफ से इसके लिए विस्तारित क्षेत्र और मूल क्षेत्र में पूर्व में बनाई गई 150 करोड़ की योजना के अंतर्गत इसे धरातल पर उतारा जा रहा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिकी डॉ संजय कटियार के मुताबिक विस्तारित क्षेत्र में 28 वार्डों में मार्ग प्रकाश को बेहतर करने के लिए लगभग 25 करोड़ का बजट बजट आबंटित भी हो चुका है। इसमें झूंसी, फाफामऊ और नैनी क्षेत्र में 11 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट्स लगाई जा रही हैं। मेला प्रशासन की तरफ से मिली 4,400 से अधिक स्ट्रीट लाइट को भी उपयोग में लाया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि माघ मेला पहुंचने वाले आगंतुक शहर के जिस भी मार्ग से निकलें वहां की गलियां और सड़कें उन्हें जगमगाती मिले।

थाना प्रभारी की हत्या: महिला सिपाही मीनाक्षी गिरफ्तार, एक हफ्ते तक थी प्रभारी के घर पर

जालौन उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की संदिग्ध हालत में हुई मौत के मामले में फंसी महिला कांस्टेबल मीनाक्षी शर्मा को पुलिस ने रविवार को न्यायालय में पेश किया। उसे यहां से जेल भेज दिया गया। इससे पहले पुलिस ने उससे पांच घंटे पूछताछ की। कई सवालों पर मीनाक्षी ने चुप्पी साध ली। बस इतना बोली कि जब वह कमरे में पहुंची तो प्रभारी घायल पड़े थे। कुठौंद थाने के सरकारी आवास में शुक्रवार देर रात थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की पिस्टल से चली गोली से मौत हो गई थी। उनका शव मच्छरदानी के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला था। पिस्टल उनके सीने पर ही रखी हुई थी।  घटना के तुरंत बाद कोंच में तैनात महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा उनके आवास से चिल्लाती हुई बाहर आई और थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी देकर मौके से भाग निकली। उसके भागने की फुटेज थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी।  मीनाक्षी पर लगाया था हत्या का आरोप इसी बीच जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची थाना प्रभारी की पत्नी माया राय ने मीनाक्षी पर हत्या का आरोप लगाते हुए एसपी को तहरीर सौंपी। इसके बाद कुठौंद थाने में मीनाक्षी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोपी सिपाही से की पूछताछ हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने महिला सिपाही मीनाक्षी से सख्ती से पूछताछ की। वह अधिकतर सवालों पर चुप्पी साधे रही। पुलिस ने प्रश्न किया कि क्या उसने अरुण राय की हत्या की है तो उसने कहा कि वह जब कमरे में पहुंची तो वह घायल अवस्था में कमरे में पड़े। इस पर वह चिल्लाते हुए थाना परिसर में पहुंच गई थी। एक सप्ताह से थाना प्रभारी के आवास पर थी मीनाक्षी: सूत्र उसकी ये बातें पुलिस के गले नहीं उतर रही हैं। सूत्रों की माने तो आरोपी महिला सिपाही एक सप्ताह से थाना प्रभारी के आवास पर थी। उसका शुक्रवार की रात को थाना प्रभारी से विवाद हुआ था। इसके बाद पूरी घटना हुई है। पुलिस ने नहीं तलाश पाई ये फुटेज पुलिस इस पर भी जांच कर रही है कि महिला सिपाही भागते हुए तो थाने के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में दिख रही है। वहीं महिला कब परिसर में पहुंची इसका सीसीटीवी फुटेज अभी तक नहीं ढूंढ़ पाई है। सीएम योगी से निष्पक्ष जांच की मांग रविवार को पुलिस ने आरोपी महिला सिपाही को कोर्ट में पेश किया यहां से उसे जेल भेज दिया गया। अरुण राय की पत्नी माया राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए। कॉल डिटेल रिपोर्ट ने खोले कई राज, कई पुलिसकर्मियों के उड़े होश सूत्रों के मुताबिक, मीनाक्षी शर्मा के मोबाइल की कॉल डिटेल और चेट रिकॉर्ड खंगालने पर जानकारियां कई चौंकाने वाली सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कॉल लॉग में दर्ज बातचीत ने कई पुलिस अधिकारियों के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। कई पुलिस कर्मियों से करती थी बातचीत कुछ पुलिसकर्मी यह जानकर सदमे में बताए जा रहे हैं कि मीनाक्षी किन-किन से संपर्क में थी और किन परिस्थितियों में बातचीत हुई। यह मामले को नया मोड़ दे सकता है। हालांकि, इस पर कोई अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि वह कई पुलिस कर्मियों से बातचीत करती थी।

योगी आदित्यनाथ सरकार के सुधारवादी कदमों से एमएसएमई सेक्टर में नई ऊर्जा

लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार की सरल नीतियों और मजबूत कानून व्यवस्था ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में छोटे उद्योगों को नई गति मिल रही है। वर्तमान में राज्य में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार देने का काम कर रही हैं। उत्तर प्रदेश ने पिछले आठ वर्षों में जिस रफ्तार से औद्योगिक माहौल को बदला है वह उत्तर भारत के आर्थिक नक्शे पर एक नई कहानी गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि उत्तर प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने का लगातार ठोस प्रयास कर रही है।  योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2017 में सरकार के गठन के समय औद्योगिक प्रक्रियाओं का भारी उलझाव और निवेशकों का कम विश्वास था, लेकिन सरकार ने समयबद्ध मंजूरी व्यवस्था, सिंगल विंडो (एकल खिड़की) प्रणाली और जिलों में निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करके इस स्थिति को तेजी से बदला। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश छोटे उद्योगों का एक बड़ा केंद्र बन गया है। जो प्रदेश के युवाओं के लिए तेजी से रोजगार सृजन का कार्य कर रहे हैं। ठोस नीतियों से छोटे उद्योगों को रफ्तार आठ वर्षों में योगी सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत आधार दिया है। 2017 से अब तक के प्रयासों से इन इकाइयों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उत्तर प्रदेश माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज प्रमोशन पॉलिसी 2022 ने पिछड़े क्षेत्रों में 10 से 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी दी है। यह पॉलिसी एससी-एसटी और महिला उद्यमियों के लिए अतिरिक्त लाभ प्रदान करती है। निवेश मित्र पोर्टल और एकल खिड़की प्रणाली ने अनुमोदन प्रक्रिया का काफी हद तक सरलीकरण कर दिया है।  डिजिटल प्लेटफॉर्म से तेज निवेश प्रक्रिया निवेश मित्र और एमएसएमई वन कनेक्ट पोर्टल ने उद्योग स्थापना को आसान किया है। वर्तमान में 19 लाख से अधिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इन प्लेटफॉर्म से जीईडी प्रमाणन और पीएमईजीपी आवेदन आसान हो गए हैं। ऋण प्रवाह में भी उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2025 में एमएसएमई को लगभग 2.48 लाख करोड़ रुपये के ऋण प्रदान किया जा चुके हैं।  महिला उद्यमियों और युवाओं के लिए विशेष योजनाएं महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता मिल रही है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत युवाओं को लगभग 1200 करोड़ रुपये की ऋण सब्सिडी दी जा चुकी हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी ने पारंपरिक कारीगरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने एमएसएमई से 25 प्रतिशत खरीद अनिवार्य की है, जिसमें महिलाओं के लिए 03 प्रतिशत और एससी-एसटी इकाइयों के लिए 04 प्रतिशत तक का कोटा निर्धारित किया हुआ है।  कृषि-तकनीकी उद्योगों को नई दिशा कृषि और तकनीकी आधारित छोटे उद्योगों का प्रदेश में विस्तार हो रहा है। लखनऊ-कानपुर में इनोवेशन हब्स, ड्रोन निगरानी और एआई-आधारित खेती को प्रोत्साहित कर रहे हैं। विकसित यूपी 2047 विजन में 33 क्षेत्रीय नीतियां एमएसएमई को लक्षित करती हैं। ये प्रयास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे रहे हैं और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए-नए अवसरों का सृजन कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश विकसित भारत का मजबूत स्तंभ बन रहा है। छोटे उद्योग अब राज्य की प्रगति का इंजन हैं।

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार अधिक समावेशी आवासीय क्षेत्रों के विकास का रोडमैप कर रही तैयार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रयासरत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार विजन 2047 के अंतर्गत एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। प्रदेश के नगरीय आवासीय क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित, हरित तथा जलवायु के अनुकूल बनाने की दिशा में रोडमैप का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के मोहल्लों को जलवायु तथा पर्यावरण समावेशी स्वरूप देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर, शुद्ध हवा, सुरक्षित जलापूर्ति तथा स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहरी विकास को केवल सड़कों व भवनों तक सीमित न रखते हुए उसे पर्यावरण संतुलन तथा जनस्वास्थ्य से भी जोड़ना है। यह पूरी कार्ययोजना दो प्रमुख आधारों पर केंद्रित है- पहला, जलवायु सहिष्णु हरित अवसंरचना का विस्तार, वहीं दूसरे घटक के तौर पर जल सुरक्षा एवं पारिस्थितिकीय संतुलन को मजबूत बनाने पर जोर है। इन्हीं दोनों स्तंभों के माध्यम से प्रदेश के शहरी आवासीय क्षेत्रों का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। हरित अवसंरचना से सुरक्षित व स्वस्थ आवासीय क्षेत्र का विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर फोकस कर रही है। योजना के अनुसार, प्रत्येक नगरी क्षेत्र के लिए सिटी सेंट्रिक क्लाइमेट एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से वर्षा, तापमान, जलभराव, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन जैसी स्थानीय जलवायु संकटों का आकलन कर उनके समाधान लागू किए जाएंगे।  कई योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी  कार्ययोजना के अनुसार, नगरीय हरित आवरण को लेकर कई पहलों को बड़े पैमाने पर जमीन पर उतारा जाएगा। इसके अंतर्गत, नगरों में पार्क, हरित पट्टियां, हरित गलियारे व खुले हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आवासीय इलाकों में शुद्ध हवा, तापमान संतुलन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य बेहतर हो सके। साथ ही, मोहल्ला स्तर पर जलवायु नियोजन को लागू किया जाएगा, ताकि स्थानीय समस्याओं जैसे जलभराव, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याओं की रेगुलकर मॉनिटरिंग कर रियल टाइम में कार्ययोजना क्रियान्वित कर सीधा नियंत्रण स्थापित किया जा सके। जल सुरक्षा और स्वच्छता को मिलेगा स्थायी आधार इस योजना का दूसरा मुख्य उद्देश्य जल सुरक्षा व इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी यानी पारिस्थितिकीय सततता को सुदृढ़ करना है। इसके तहत शहरों के तालाबों, झीलों और जलाशयों के पुनरुद्धार की योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे वर्ष भर जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। वर्षा जल संचयन को प्रत्येक आवासीय क्षेत्र में विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके।  विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली होगी विकसित प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण के लिए विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर फोकस है। कार्ययोजना के अनुसार, मोहल्ला स्तर पर कचरे के पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा निस्तारण की व्यवस्था लागू होगी, जिससे स्वच्छता को स्थायी आधार मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा तथा प्रदूषण में व्यापक स्तर पर कमी आएगी। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार का मानना है कि इन सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश के नगरीय आवासीय क्षेत्र न केवल पर्यावरण के अनुकूल बनेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित व स्वच्छ जीवन की मजबूत नींव तैयार करेंगे जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी रोलमॉडल बनेगा।

सीएम योगी का मुरादाबाद दौरा: विकास योजनाओं पर अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक

मुरादाबाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को मुरादाबाद दाैरे पर पहुंचे। सर्किट हाउस पहुंचने के बाद उन्होंने मंडल के जनप्रतिनिधियों और अफसरों के साथ समीक्षा बैठक शुरू कर दी है।  मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पश्चिमी यूपी के तीन जिलों के दाैरे पर हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने मुरादाबाद से की है। बरेली से उनका हेलिकाॅप्टर सुबह 11:15 मुरादाबाद सर्किट हाउस पहुंचाया। वह यहां पर एक घंटे तक रहेंगे। सर्किट हाउस में होने वाली बैठक में मंडलभर के जनप्रतिनिधि को बुलाया गया है। इनके अलावा बैठक में जिले के अफसरों भी माैजूद हैं।संभावना है कि एसआईआर के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही पंचायत चुनाव को लेकर भी मुख्यमंत्री योगी खाका खींचेंगे।  बैठक के बाद वह गाजियाबाद के लिए रवाना हो जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था चौकस मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए हैं। सर्किट हाउस को रविवार रात में ही पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था। सर्किट हाउस के पास फायर ब्रिगेड सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिला पुलिस ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए दो एएसपी, तीन सीओ, छह इंस्पेक्टर, 28 उपनिरीक्षक, 73 सिपाही और 17 महिला सिपाही सहित 200 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई है। पुलिसकर्मियों को सर्किट हाउस हेलीपैड, सभागार के बाहर और सर्किट हाउस गेट के साथ ही आसपास रोड पर तैनात किया गया है। सर्किट हाउस गेट पर जांच के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया गया।