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आईएसएस से लौटे शुभांशु का लखनऊ में होगा भव्य स्वागत और सम्मान

Axiom-4 मिशन पूरा कर हाल ही में भारत लौटे हैं शुभांशु शुक्ला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है सम्मान समारोह का आयोजन अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले देश के पहले अंतरिक्ष यात्री हैं शुभांशु लखनऊ, लखनऊ के बेटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को नागरिक अभिनंदन करेंगे। शुभांशु शुक्ला हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सफल मिशन पूरा कर लौटे हैं। मिशन पूरा कर वह हाल ही में भारत आए हैं और अब पहली बार वह सोमवार को लखनऊ आ रहे हैं। इसी क्रम में योगी सरकार ने देश के नायक को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इस मौके पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई बड़े नेता भी मौजूद रहेंगे। इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है। मिशन पूरा कर वापस लौटे हैं शुभांशु लखनऊ में जन्मे शुभांशु भारतीय वायुसेना के अनुभवी पायलट हैं। वे एक्सिओम-4 मिशन में शामिल होकर पहले भारतीय बने जिन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखा। मिशन के दौरान उन्होंने 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोग किए और दुनिया भर के छात्रों से जुड़े। भारत लौटने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अंतरिक्ष से लाया हुआ तिरंगा और मिशन पैच भेंट किया था, जो पूरे देश के लिए भावुक क्षण था। अब इसी क्रम में सोमवार को शुभांशु लखनऊ पहुंच रहे हैं और योगी सरकार ने इस अवसर पर उनके सम्मान का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। साहस, समर्पण और विज्ञान के प्रति संकल्प का गौरवपूर्ण प्रतीक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभांशु शुक्ला को उत्तर प्रदेश और पूरे भारत का गौरव बताया है। मिशन पूरा कर वापस धरती पर लौटने पर उन्होंने कहा था कि अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराना हर देशवासी के लिए गर्व का विषय है। आपकी उपलब्धि साहस, समर्पण और विज्ञान के प्रति संकल्प का गौरवपूर्ण प्रतीक है। आज हर भारतीय, विशेषकर उत्तर प्रदेश वासी गौरवान्वित है। सीएम ने यह भी कहा कि शुभांशु की सफलता यह साबित करती है कि अब उत्तर प्रदेश का युवा हर क्षेत्र में, चाहे वह विज्ञान हो या तकनीक, दुनिया के मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है। ऐसे में शुभांशु का स्वागत कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें सच करने की प्रेरणा देगा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने अयोध्या राजसदन के मुखिया के निधन पर जताया शोक मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को दी श्रद्धांजलि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी और अयोध्या राज परिवार के मुखिया विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का शनिवार रात हुआ था निधन सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ''प्रभु श्रीराम परिजनों को प्रदान करें दु:ख सहन करने की शक्ति'' अयोध्या,  अयोध्या राजसदन के मुखिया और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (राजा साहब) का शनिवार की रात 11 बजे निधन हो गया। 75 वर्षीय राजा साहब के निधन की खबर से प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री ने लिखा "राजसदन के मुखिया विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का निधन अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।" पिछले साल ही हुआ था उनकी पत्नी का निधन राजसदन के मुखिया विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के भाई शैलेन्द्र मोहन मिश्र ने बताया कि शनिवार रात अचानक उनका ब्लड प्रेशर गिर गया, जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर को तत्काल बुलाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। राजा साहब ने अपने निवास राजसदन में अंतिम सांस ली। पिछले वर्ष ही उनकी पत्नी का निधन हुआ था। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से गहरा जुड़ाव विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र न केवल अयोध्या के राजघराने के सम्मानित मुखिया थे, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से भी गहराई से जुड़े रहे। उन्हें अयोध्या की सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता था। राजनीतिक व सामाजिक गलियारों में गम राजा साहब के निधन से न केवल अयोध्या, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गम का माहौल है। कई मंत्री व जनप्रतिनिधियों के अयोध्या पहुंचने की सूचना है।

सिख गुरुओं ने अपने जीवन का हर क्षण देश, धर्म और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया: मुख्यमंत्री

  – गुरुओं की शिक्षाओं और बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राष्ट्र और धर्म की रक्षा हमारा दायित्व – सीएम योगी – सीएम योगी ने कहा- इतिहास में वही जाति और कोम जीवित रही है जो अपने पूर्वजों के शौर्य और पराक्रम को जीवन का हिस्सा बनाती है – गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है- सीएम योगी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में सिख समुदाय के योगदान की सराहना की गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास में वही जाति और कौम जीवित रहती है, जो अपने पूर्वजों के शौर्य, पराक्रम और बलिदान को जीवन का हिस्सा बनाती है। सिख गुरुओं ने सदैव सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी वीरता, त्याग और बलिदान देश की आत्मा में आज भी जीवित है। सीएम योगी रविवार को गोरखपुर के पैडलेगंज स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पर्यटन विकास कार्यों, गुरुद्वारा भवन के नए स्वरूप और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के प्रथम प्रकाश पर्व पर आयोजित समागम में मुख्यमंत्री ने गुरुवाणी सुनी और संगत के बीच शामिल हुए। गुरुद्वारा समिति की ओर से उन्हें प्रतीक चिन्ह और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया। सिख गुरुओं की परंपरा अनुपम और अटूट रही है- सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं की परंपरा अनुपम और अटूट रही है। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी महाराज तक, हर गुरु ने सनातन धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि  जब भी भारतीय संस्कृति पर संकट आया, सिख गुरुओं ने आगे बढ़कर अपने बलिदान से उसे बचाया। सीएम योगी ने विशेष रूप से गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके बलिदान के 350वें वर्ष में देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कुछ ही समय पूर्व मुख्यमंत्री आवास से नगर कीर्तन और कीर्तन पाठ के जरिए इस आयोजन की शुरुआत हुई। इसी तरह गुरु नानक देव जी महाराज के 550वें प्रकाश पर्व पर भी मुख्यमंत्री आवास पर पहली बार गुरुवाणी का आयोजन हुआ था। चार साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है- सीएम योगी सीएम योगी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने कहाकि जब उन्हें लालच दिया गया कि इस्लाम स्वीकार कर लो, तो जीवन और रियासत दोनों सुरक्षित रहेंगे, लेकिन उन्होंने झुकने के बजाय बलिदान का मार्ग चुना। छोटे साहिबजादों को दीवार में चुनवाकर शहीद कर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए दृढ़ निष्ठा दिखाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही बलिदान आज हम सभी को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 26 दिसंबर को पूरे देश में ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। यह सिख गुरुओं और साहिबजादों के बलिदान को श्रद्धांजलि देने का एक ऐतिहासिक निर्णय है। गुरुद्वारों में सुविधाओं का हुआ विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पैडलेगंज का यह गुरुद्वारा वर्षों से सिख संगत का आस्था केंद्र रहा है। पहले यहां सुविधाओं का अभाव था, लेकिन अब पर्यटन विभाग और सरकार की मदद से इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यहां श्रद्धालुओं के लिए गुरुवाणी पाठ, लंगर और अन्य धार्मिक कार्यक्रम और बेहतर सुविधाओं के साथ हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा केवल किसी जाति या समुदाय तक सीमित नहीं होता। यहां आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत होता है। यही सिख परंपरा और गुरुवाणी का वास्तविक संदेश है। सीएम योगी ने सिख परंपरा के प्रति जताई कृतज्ञता सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर के प्रमुख तीन गुरुद्वारों जटा शंकर, मोहद्दीपुर और पैडलेगंज को बेहतर स्वरूप देने का कार्य किया गया है। यह सिख गुरु परंपरा के प्रति हमारी कृतज्ञता और श्रद्धा का प्रतीक है। सीएम योगी ने कहा कि  आज का दिन हमारे लिए पवित्र इसलिए भी है कि 421 वर्ष पूर्व इसी दिन गुरु ग्रंथ साहिब जी को हरमंदिर साहिब में स्थापित कर उन्हें गुरु के रूप में स्वीकार किया गया। यह परंपरा आज भी पूरे विश्व में आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने अपने जीवन का हर क्षण देश, धर्म और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया। आज हमारा दायित्व है कि उनकी शिक्षाओं और बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करें। सीएम योगी ने गोरखपुर में सिख समुदाय के योगदान को सराहा सीएम ने गोरखपुर में सिख समुदाय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आयोजन पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिख समुदाय को एकजुट करने का अवसर है। उन्होंने लखनऊ में अपने नियमित गुरुपर्व आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि गोरखपुर में इस तरह के आयोजन में शामिल होना उनके लिए विशेष सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा ने देश और सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उनकी प्रेरणा से हमें देश और धर्म के लिए पूरी ईमानदारी से कार्य करना है।  इस दौरान सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, कालीबाड़ी के महंत रविंद्र दास समेत गुरुद्वारा कमेटी के वरिष्ठ सदस्य व सिख समुदाय के कई गणमान्य मौजूद रहे।

कमजोरों के हक छीनने वालों पर योगी सरकार का डंडा, किसी को नहीं मिलेगी ढील

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं का निस्तारण तत्परता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए। बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद रविवार सुबह जनता दर्शन में आए लोगों से मुलाकात की। उन्होंने ध्यान से उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का निस्तारण तत्परता और संवेदनशीलता से किया जाए। 'सरकार हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है' सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘समस्याओं के निस्तारण में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि सरकार जनता की हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में आए लोगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मिले और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। 'सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी' सीएम योगी ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की और सभी को आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति की समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले या कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर भी आए थे। मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी।  

यूपी की सियासत में गरमाहट, प्रयागराज की होर्डिंग से तेज हुई पूजा पाल के भविष्य की अटकलें

लखनऊ  अपने पति राजू पाल की हत्या के सालों बाद मिले ‘न्याय’ के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करके यूपी की सियासत में हलचल मचा देने वाली विधायक पूजा पाल का अगला कदम क्या होगा? यह सवाल इस समय उनसे जुड़े या फिर यूपी की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर शख्स की जुबान पर है। पूजा पाल ने पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने से लेकर मंत्री बनने तक की अटकलें लगनी शुरू हो गईं। यह भी कहा जाने लगा कि पूजा को 2027 में भाजपा अपना उम्मीदवार भी बना सकती है। जानकार उन्हें समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे की काट और चुनाव से पहले भाजपा के हाथ आया हथियार बताने लगे। इस बीच प्रयागराज के धूमनगंज के सुलेम सराय इलाके में लगी एक होर्डिंग ने लोगों को चौंका दिया है। दधिकांदो मेले को लेकर लगाए गए नीले रंग के इस होर्डिंग को देखकर लोग उनके बसपा के पाले में जाने के भी कयास लगाने लगे। दरअसल, विधायक पूजा पाल अतीत में बसपा में रह भी चुकी हैं। 2007 से 2012 तक वह प्रयागराज पश्चिमी सीट से बसपा की ही विधायक थीं। 2019 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई थीं और सपा के ही टिकट पर उन्होंने कौशांबी की चायल सीट से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि राज्यसभा चुनाव में उनका सपा से अलग रुख देखने को मिला। क्रॉस वोटिंग के बाद उनके और सपा के रिश्ते बिगड़ते चले गए। फिर हाल में जब पूजा पाल ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ की तो यूपी के सियासी गलियारों में हलचल मच गई। हर कोई अपने-अपने ढंग से इसकी व्याख्या करने लगा। समाजवादी पार्टी ने पूजा पाल को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए निष्कासित कर दिया। इसके बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूजा पाल के बयान आने लगे। सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात करने के बाद पूजा पाल ने अखिलेश यादव को एक पत्र लिखकर कई चुभते सवाल पूछे और उन्हें खूब सुनाया। यहां तक कह दिया कि यदि मेरी हत्या होती है तो वास्तविक दोषी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को ही माना जाए। पूजा पाल को लेकर यूपी में जबरदस्त सियासी घमासान के बीच उनके समर्थन में भाजपा नेताओं के भी बयान आने लगे। कुल मिलाकर जानकारों को लगने लगा कि जल्द ही पूजा पाल भाजपा ज्वाइन कर सकती हैं लेकिन इसी बीच प्रयागराज में नीले रंग की होर्डिंग लगी तो उनके बसपा में जाने को लेकर भी अटकलें तेज हो गईं। इस होर्डिंग ने कई लोगों को चौंकाया भी। पूजा पाल ने अभी साफ नहीं किया है रुख एक तरफ यूपी की सियासत में पूजा पाल को लेकर कयासबाजियों का सिलसिला तेज है तो दूसरी तरफ उन्होंने खुद अभी तक इस बारे में अधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है। सपा से निष्कासन के बाद उनका अगला कदम क्या होगा, इस पर उनके समर्थकों और विरोधियों सबकी नजर है।  

ट्रेन हादसे से टली बड़ी दुर्घटना, डॉक्टर की मां को RPF ने सुरक्षित निकाला

कानपुर  यूपी के फर्रुखाबाद की एक 60 वर्षीय महिला महिमा गंगवार के लिए कहावत 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' सच साबित हुई, जब वह शनिवार देर रात कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन से गिर गईं। आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) के जवानों की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से उनकी जान बच गई। महिला का बेटा कानपुर के हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। महिमा अपने पति राजवीर सिंह के साथ कानपुर से भोपाल जाने के लिए 12593 गरीब रथ एक्सप्रेस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। ट्रेन आधी रात 12:35 बजे स्टेशन पर आई और उन्हें अपना कोच ढूंढने में देर हो गई। जब तक वे कोच तक पहुंचे, ट्रेन चल पड़ी थी। जल्दबाजी में चढ़ने की कोशिश में महिमा का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच की जगह में गिर गईं। आसपास के लोग शोर मचाने लगे। यह देखकर, वहां मौजूद आरपीएफ के एएसआई सीपी सिंह तुरंत हरकत में आए। उन्होंने महिमा को प्लेटफॉर्म की तरफ खिसकने की हिदायत दी और अपने साथी सिपाहियों अनिल कुमार और श्रवण कुमार को तुरंत ट्रेन की चेन खींचने का आदेश दिया। सिपाहियों ने बिना एक पल की भी देरी किए चेन खींची और ट्रेन रुक गई। इसके बाद, आरपीएफ टीम ने महिमा को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए स्टेशन पर ही बनी मोटर कार से प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ले गए। शुरुआती इलाज के बाद, उन्हें आगे के उपचार के लिए हैलट अस्पताल रेफर किया गया। आरपीएफ ने बताया कि महिमा का बेटा हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। इस घटना के कारण ट्रेन को 15 मिनट की देरी हुई, लेकिन महिमा की जान बच गई। इस घटना प्रत्यक्षदर्शी आरपीएफ की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह घटना आरपीएफ कर्मियों की तत्परता और उनके सेवाभाव का शानदार उदाहरण है। थोड़ी देर तक स्तब्ध रहे लोग चलती ट्रेन से महिमा गंगवार के फिसलने और प्लेटफार्म-सीढ़ियों के बीच उनके फंस जाने की घटना जिसने भी देखी वो कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। आरपीएफ की चुस्ती और त्वरित ऐक्शन से ट्रेन रोक दी गई और महिमा गंगवार की जान बच गई। इसके बाद ही लोगों की जान में जान आई।  

दहेज में जलाई गई निक्की, पिता ने सीएम योगी से की सख्त कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली  ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में दहेज के लालच में एक महिला को उसी के बेटे के सामने जिंदा जला दिया गया। महिला की पहचान निक्की के तौर पर हुई है जिसे उसी के पति ने मारपीट पर जिंदा जला दिया। पुलिस ने बहन कंचन की शिकायत पर पति के साथ-साथ महिला की सास, ससुर और देवर के खिलाफ केज दर्ज किया है। पति को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि अन्यों की तलाश जारी है। घटना गुरुवार रात की है जब पति विपिन ने पहले पत्नी निक्की को मारा, इसके बाद उसे लाइटर से जला दिया। इस खौफनाक घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच निक्की के पिता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आरोपी के एनकाउंटर की मांग की है और उनके घर पर बुलडोजर ऐक्शन की भी मांग की है। मीडिया से बात करके हुए निक्की के पिता भिकारी सिंह पायला ने कहा, वे हत्यारे हैं, उन्हें गोली मार देनी चाहिए और उनका घर तहस-नहस कर देना चाहिए। मेरी बेटी पार्लर चलाकर अपने बेटे का पालन-पोषण कर रही थी। उन्होंने उसे प्रताड़ित किया। पूरा परिवार इस साजिश में शामिल था और उन्होंने मेरी बेटी को मार डाला। उन्होंने बताया कि निक्की अपने ससुराल वालों से अपनी जिंदगी के बारे में ज्यादा बात नहीं करती थी। वह नहीं चाहती थी कि मैं परेशान होऊं, इसलिए उसने शादी को कामयाब बनाने की पूरी कोशिश की। लेकिन वे हत्यारे हैं। निक्की के पिता सीएम योगी आदित्यनाथ से ऐक्शन की मांग करते हुए कहा, वे जेबकतरों के पैर में गोली मार देते हैं और इन हत्यारों को नहीं मारते? यह भाजपा सरकार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपिन किसी और के साथ रिश्ते में था और निक्की को रास्ते से हटाना चाहता था। निक्की ने कहा, बेटे और मां को फांसी होनी चाहिए। मेरी बेटी बहुत दर्द में मरी। शिकायत में क्या-क्या आरोप? निक्की और उसकी बहन कंचन की साल 2016 में एक ही घर में शादी हुई थी। निक्की की शादी विपिन से और कंचन की शादी उसके भाई रोहित से हुई थी। कंचन की तरफ से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक गुरुवार की शाम को पति विपिन और सास दया ने निक्की पर हमला किया। कंचन बचाने आई तो उसे भी मारा गया। इसके बाद विपिन ने पेट्रोल डालकर निक्की को जिंदा जला दिया। निक्की के 8 साल के बेटे का भी एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह पता रहा है कि पापा ने पहले मम्मी को चाटा मारा फिर कुछ डालकर लाइटर से आग लगा दी। इसके अलावा एक और वीडियो सामने आया है जिसमें विपिन निक्की के बाल पकड़कर उसे खींचता नजर आ रहा है। कंचन ने बताया था कि शादी में ससुरालवालों को एसयूवी दी गई थी लेकिन उनकी मांग बढ़ती जा रही थी जिसके चलते वह निक्की को प्रताड़ित करते थे। उसके मायके वालों ने एसयूवी के अलावा एक और गाड़ी भी उन्हें दी थी लेकिन इसके बावजूद वह और 35 लाख रुपए मांग रहे थे।  

जिंदा जलाने वाला दरिंदाः पुलिस एनकाउंटर में विपिन भाटी घायल, पैर में लगी गोली

नोएडा  ग्रेटर नोएडा में अपनी पत्नी निक्की को दहेज के लिए जिंदा जलाने वाला आरोपी विपिन पुलिस की गोली लगने से घायल हुआ है। सिरसा चौराहे के पास उसने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की।  इसके बाद उसको गिरफ्तार कर लिया गया है l बता दें कि विपिन ने अपनी पत्नी निक्की को ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाकर हत्या कर दी थी इसको लेकर दो दिनों से मामला सुर्खियों में हैl पुलिस ने निक्की के पति विपिन के अलावा उसके जेठ और सास ससुर को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है। विपिन ने मासूम बच्चे के सामने पत्नी निक्की की आग लगाकर हत्या की थी और फरार हो गया था। यह है पूरा मामला उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के कासना कोतवाली इलाके के सिरसा गांव में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की क्रूरता से हत्या कर दी गई। ससुराल पक्ष के लोगों ने विवाहिता को बर्बरता से पीटा और फिर उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसने पर महिला की बहन उसे पड़ोसियों की मदद से अस्पताल ले गई, दो अस्पताल बदले, लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। दिल दहलाने वाली घटना के बाद मृतका महिला की बहन और परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।  रूपबास गांव के रहने वाले भिकारी सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री कंचन (29) और निक्की (27) की शादी दिसंबर 2016 में सिरसा गांव के रहने वाले रोहित और उसके भाई विपिन से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी में स्कॉर्पियो गाड़ी और सभी सामान दिया था लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल के लोग 35 लाख रुपये की मांग करने लगे।     शादी के बाद से ही पति विपिन भाटी, जेठ रोहित भाटी, सास दया और ससुर सत्यवीर लगातार 35 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज मांग रहे थे। पीड़ित परिवार ने आरोपियों की मांग पूरी करने के लिए एक और कार भी दे दी, लेकिन प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा। दोनों बहनों के साथ ससुराल के लोग मारपीट करते थे। कई बार पंचायत कर समझौता किया। लेकिन आरोपियों ने समझौते को नहीं माना। वहीं, मृतका निक्की की बड़ी बहन कंचन का आरोप है कि बृहस्पतिवार की शाम करीब 5:30 बजे उसकी सास दया और देवर विपिन ने मिलकर घटना को अंजाम दिया। आरोप है कि सास दया ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया। विपिन ने पीड़ित की बहन निक्की के ऊपर डाल दिया। साथ ही बहन के गले पर हमला किया। बर्बरता से उसे पीटा गया। जिसके बाद उनकी बहन बेहोश हो गई। आरोपियों ने उसे जिंदा जला दिया।    उसने बहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी। कंचन ने इसका विरोध किया तो उसके साथ भी मारपीट की गई। इसी दौरान कंचन ने मारपीट और आग लगाते हुए आरोपियों का वीडियो बना लिया। आनन-फानन निक्की को इलाज के लिए पहले फोर्टिस फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। आरोप है कि घटना के वक्त कंचन का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर भी मौके पर मौजूद थे। कंचन की शिकायत पर पुलिस ने नामजद चार आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया है।   

71 वर्ष की आयु में अयोध्या नरेश विमलेंद्र मोहन मिश्रा का निधन

अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दूसरे ट्रस्टी और अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन मिश्रा का शनिवार देर रात निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. शनिवार रात करीब 12 बजे 71 साल की उम्र में उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली. बता दें कि 5 फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संसद सदन में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में विमलेंद्र मोहन मिश्र को स्थाई सदस्य के रूप में नामित किया गया था. उनके निधन पर ट्रस्ट के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया है. इसके पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक और स्थाई सदस्य कामेश्वर चौपाल का भी निधन हो गया था. दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में किडनी की बीमारी के कारण भर्ती कराए गए थे. लंबे दिनों तक चले इलाज के बाद 6 फरवरी 2025 में निधन हो गया था. बता दें कि विमलेंद्र मिश्रा राजनीति में भी सक्रिय रहे. 2009 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अयोध्या राजवंश के राजा दर्शन सिंह की वंशावली से जुडी कड़ी में स्वर्गीय महारानी विमला देवी के दो पुत्र विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र और शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र हुए.

बाबूराम बने प्रदेश प्रभारी, व्यास मुनि को मिली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी : डॉ संजय निषाद

लखनऊ     आज लखनऊ स्थित अपने आवास 01, विक्रमादित्य मार्ग पर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मा० कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने उत्तर प्रदेश प्रदेश कमेटी की बैठक की। यह बैठक हाल ही में दिल्ली में संपन्न राष्ट्रीय अधिवेशन एवं प्रदेश कमेटी में हुए बदलावों के बाद प्रदेश स्तर पर आयोजित पहली बैठक थी।     बैठक में डॉ. निषाद जी ने महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लेते हुए प्रदेश नेतृत्व में बड़े बदलाव किए। उन्होंने अपने सुपुत्र एवं चौरीचौरा विधायक ई. सरवन निषाद को प्रदेश प्रभारी पद से हटाकर बाबूराम निषाद को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया। साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग, उ.प्र. के सदस्य रविन्द्र मणि निषाद को राष्ट्रीय कमेटी में पदोन्नत किया गया तथा प्रदेश अध्यक्ष पद से  रविन्द्र मणि निषाद को हटाकर व्यास मुनि निषाद को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया।     डॉ. संजय निषाद जी ने कहा कि संगठन में बदलाव समय की आवश्यकता है। नई टीम के साथ नई ऊर्जा का संचार होगा और पार्टी को और मज़बूती मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को आज जिस मुकाम तक पहुँचाने में ई० सरवन निषाद और रविन्द्र मणि निषाद का योगदान रहा है, वह सराहनीय है। लेकिन अब समय है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी दी जाए।     उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग मुझे परिवारवाद का आरोपी बताते थे, उन्हें आज यह देखना चाहिए कि निषाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक कदम उठाया है। मैंने सत्ता में रहते हुए अपने ही पुत्र को पद से मुक्त किया है। शायद ही किसी पार्टी ने ऐसा बड़ा निर्णय लिया होगा। मेरे लिए समाज और संगठन सबसे ऊपर है, परिवार नहीं।     डॉ. निषाद ने कहा कि उनका परिवार हमेशा संघर्षों और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा है। “राजा का बेटा ही राजा बने” की नीति पर सवाल उठाने वालों के लिए यह निर्णय बड़ा संदेश है। अब अपेक्षा है कि अन्य दल भी इसी प्रकार का साहस दिखाकर समाज में सकारात्मक संदेश दें।     बैठक में प्रदेश कमेटी द्वारा विधानसभा एवं त्रिस्तरीय चुनाव की रूपरेखा, आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक आंदोलन, नई जिला स्तरीय कमेटियों के गठन एवं पार्टी विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।