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उद्योगों को बढ़ावा: यूपी में फुटवियर यूनिट्स को ज़मीन, बिजली और पूंजी पर बड़ी छूट

लखनऊ योगी सरकार ने फुटवियर और लेदर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए पहली बार “यूपी फुटवियर नीति” तैयार की है। इस नीति के तहत ज़मीन, बिजली और पूंजी निवेश पर भारी छूट दी जाएगी। 150-200 करोड़ तक के निवेश पर कंपनियों को 30-50% पूंजी सब्सिडी मिलेगी। बुलंदशहर व अन्य ज़िलों में ज़मीन पर 35%, बिजली दरों पर 50% तक छूट दी जाएगी। मशीनरी पर GST की आंशिक वापसी होगी और 200 नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होंगे। 700 करोड़ से अधिक निवेश सीएम योगी ने यह सुझाव दिया कि यदि डिजाइन, अनुसंधान, उत्पादन के साथ-साथ प्रशिक्षण को एकीकृत किया जाए तो यह क्षेत्र न केवल बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित कर सकता है। सरकार का लक्ष्य 10 लाख से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना है। 700 करोड़ से अधिक निवेश और यूपी को फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। योगी ने फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स जैसी अधोसंरचना सुविधाओं की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेष प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए सीएम योगी ने कहा कि इस नीति के तहत न केवल लेदर और नॉन-लेदर फुटवियर निर्माण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मशीनरी निर्माण, विशेष रूप से चमड़ा सिलाई, कटिंग, मोल्डिंग और नॉन-लेदर सेफ्टी शूज़ बनाने वाली तकनीकों से संबंधित इकाइयों को भी समर्थन मिलना चाहिए। हील्स, थ्रेड्स, टैग्स, इनसोल, लेस, केमिकल्स,लेबल्स के निर्माण को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

मकान निर्माण पर बढ़ा बोझ: LDA ने ‘चढ़ावे’ के नाम पर बढ़ाया शुल्क

लखनऊ राजधानी में अब मकान का नक्शा पास करना और महंगा हो जाएगा. पूरे लखनऊ शहर के लोगों को अब मकान का नक्शा पास कराते समय सुख-सुविधा शुल्क देना होगा. एलडीए ने इसकी दरें भी करीब तीन गुना बढ़कर 200 से 500 प्रति वर्ग मीटर कर दी है. यह शुल्क शहीद पथ, किसान पथ और ग्रीन कॉरिडोर के विकास के नाम पर देना होगा. पहले यह शहीद पथ और किसान पथ के अगल-बगल 250 मीटर के दायरे में मकान बनवाने वालों से ही लिया जाता था. ये फैसला मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में हुई एलडीए बोर्ड की बैठक में लिया गया. बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकारी विभागों द्वारा बनाई गई 7:50 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे भी मकान का नक्शा पास होगा, बस मार्ग 200 मीटर लंबा होना चाहिए. एलडीए की इस बैठक में दो और योजनाओं को भी मंजूरी मिली है, जिनमें बीकेटी में विकसित की जाने वाली नैमिष नगर योजना के साथ-साथ आगरा एक्सप्रेस-वे की वरुण विहार योजना शामिल है. वरुण विहार योजना को 2664 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा. साथ ही नैमिषनगर योजना को 1084 हेक्टेयर में पूरा करने की तैयारी है. इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बैठक में ऐशबाग, बसंतकुंज, विराजखंड, गोमतीनगर जैसे क्षेत्रों में भी विकास की योजनाओं पर चर्चा की गई. यहां के सेक्टर-4 में एलडीए की तरफ से सुख-सुविधाओं से लैस अपार्टमेंट बनाए जाएंगे.

मंदिर प्रवेश पर सरकार की शर्त: सिर्फ सनातनी हिंदुओं को ही मिले अनुमति, सुप्रीम कोर्ट में रखी दलील

नई दिल्ली. बांके बिहारी मंदिर के मैनैजमेंट के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति पर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सहमति जताई है। इसके साथ ही यूपी सरकार ने यह मांग भी रखी है कि इस समिति का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त जज सनातनी हिंदू होने चाहिए। इसका अर्थ हुआ कि किसी अन्य पंथ या मजहब को मानने वाले को समिति के मुखिया के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह समिति तब तक मंदिर का प्रबंधन करेगी, जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से मंदिर में कॉरि़डोर निर्माण और अन्य सुविधाओं के लिए यूपी सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश पर फैसला नहीं हो जाता। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच से कहा है कि हमें अंतरिम समिति के गठन से कोई आपत्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव है कि हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को समिति का मुखिया बना दिया जाए। इस पर यूपी सरकार का कहना है कि हमें सभी शर्तें स्वीकार हैं, लेकिन पैनल का हेड उसी व्यक्ति को बनाया जाए, जो आस्था से सनातनी हिंदू हो। इस समिति के मुखिया के पास मंदिर के प्रशासन का जिम्मा होगा। इसके अलावा मंदिर के फंड का भी वह मैनेजमेंट कर सकेगा और उसके विकास पर उसे खर्च करने की अनुमति देगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंदिर के लिए बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए सरकार की ओर से फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा आधा हिस्सा मंदिर ट्रस्ट से भी लेने की तैयारी है। इसके लिए अध्यादेश लाया गया है और मंदिर प्रशासन ने इसे ही चुनौती दी है। वहीं यूपी सरकार का कहना है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए भी ऐसी ही नीति का पालन किया गया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम समिति की बात रखी है, जो अध्यादेश की वैधता पर फैसले तक काम करेगी। इस पर सरकार ने कहा कि हम समिति के लिए तैयार हैं, लेकिन उसका मुखिया ऐसा शख्स होना चाहिए, जो खुद एक सनातनी हिंदू हो। ऐसा इसलिए ताकि श्री बांके बिहारी जी महाराज की गरिमा और पवित्रता बनी रह सके।

यूपी पंचायत चुनाव में गड़बड़ी! पोर्टल से हटाई गईं पंचायतें, 50 हजार लोग नहीं कर सकेंगे मतदान

प्रतापगढ़ पंचायत चुनाव होने में अभी वक्त है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मतदाता पुनरीक्षण का काम भी जोर पकड़ने लगा है। जनगणना के पहले निर्वाचन आयोग ने पोर्टल से 45 मिनी पंचायतों का नाम हटा दिया गया है। पहले 1,193 ग्राम पंचायतें पोर्टल पर थीं, मगर अब 1,148 ग्राम पंचायतें की बची हैं। वर्ष 2020-21 में पंचायत चुनाव हुआ था। इस दौरान 26 लाख 19 हजार 516 मतदाताओं ने मतदान किया था। इस दौरान निर्वाचन आयोग की पोर्टल पर 1,193 ग्राम पंचायतों का ब्योरा दर्ज था। इसमें 45 ग्राम पंचायतें निकाय में शामिल हो गईं। इसमें मानधाता ब्लाक के पूरे तोरई, सराय देवराय, गौरा, छतौना, सराय हरि नारायण, लाखापुर, मानधाता, मिश्रपुर तरौल, अहिना, जिलौली, गंभीरा, सराय भूपत, बगियापुर, पूरे मोतीलाल और जगदीशपुर शामिल हुआ है। साथ ही सदर के राजापुुर कला, बाबागंज के बहोरिकपुर, जगापुर, फतूहाबाद, ऐंधा, कालाकांकर के चौरही, बजहाभीट, मिरगड़वा, लाटतारा, संडवा चंद्रिका के गड़वारा, भदौसी, शिवराजपुर, डंगरी, चौरा, आशापुर निकाय में शामिल हुईं। जनगणना के पहले निर्वाचन आयोग ने 45 ग्राम पंचायतों का नाम पोर्टल से हटा दिया है। पोर्टल पर कुल 1,148 ग्राम पंचायतें ही दिख रही हैं। पंचायतों का नाम हटाने से इस बार के पंचायत चुनाव में बूथ और मतदान केंद्रों में कमी आना भी स्वाभाविक है। चुनाव में लाखों रुपये खर्च होने से बचत हो सकेगी। अतिरिक्त मतदान कार्मिक नहीं लगाए जाएंगे। इस मुहल्ले के लोग अब निकाय चुनाव में सहभागी बन सकेंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी/एडीएम आदित्य प्रजापति ने बताया कि जनगणना शुरू होने के पहले आधा दर्जन से अधिक निकायों में शामिल 45 ग्राम पंचायतों का नाम निर्वाचन आयोग की पोर्टल से हटाया गया है। निर्वाचन आयोग से यह कार्रवाई हुई है। अब पोर्टल पर केवल 1,148 ग्राम पंचायतों का ही ब्योरा दिख रहा है।

छवि धूमिल करने का प्रयास बेअसर होगा, बसपा स्वतंत्र राह पर कायम : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बयान जारी कर अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक नीति को दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी न तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एनडीए गठबंधन के साथ है और न ही कांग्रेस के इंडी गठबंधन से जुड़ी है। मायावती ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" के सिद्धांतों पर चलती है, जो दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए समर्पित है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, "जैसा कि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ना तो बीजेपी के एनडीए गठबंधन के साथ है और ना ही कांग्रेस के इंडिया समूह (गठबंधन) के साथ है, और ना ही किसी और के साथ है, बल्कि इन दोनों व अन्य और किसी भी जातिवादी गठबंधनों से अलग अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के अंबेडकरवादी सिद्धांत व नीति पर चलने वाली पार्टी है।" मायावती ने आगे लिखा, इसके बावजूद भी ख़ासकर दलित, आदिवासी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी तथा इन वर्गों के प्रति जातिवादी मानसिकता रखने वाले कुछ मीडिया बी.एस.पी. की इमेज को बीच-बीच में धूमिल करने व राजनीतिक नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं, जिसको लेकर पार्टी को लगातार अपने लोगों को इनसे सतर्क करते रहने की जरूरत पड़ती रहती है।" पोस्ट में आगे लिखा कि इस क्रम में अभी हाल में एक यूट्यूब चैनल में ’’बीजेपी के साथ आ गयी मायावती कर दिया बड़ा ऐलान?’’ इस शीर्षक से गलत, तथ्यहीन व विषैली ख़बर चलायी है, जबकि उसके भीतर न्यूज़ में कुछ और है। इस प्रकार से चैनल द्वारा पार्टी की इमेज को ख़ासकर चुनाव के पूर्व इस प्रकार का आघात पहुंचाने का जो यह घिनौना प्रयास किया गया है उसकी जितनी भी निंदा व भर्त्सना की जाए, वह कम है। चैनल को इसके लिए माफी भी ज़रूर मांगनी चाहिये। मायावती ने आगे कहा, "साथ ही, पार्टी के लोगों से यह विशेष आग्रह है कि वे राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मीडिया के इस प्रकार के घिनौने हथकण्डों से हमेशा ज़रूर सावधान रहें और किसी के भी बहकावे में ना आएं, क्योंकि जातिवादी तत्व अपने अम्बेडकरवादी कारवां को कमजोर करने के घिनौने षड्यंत्र में हमेशा किसी न किसी रूप में लगे रहते हैं।"

पीडीए पाठशाला पर कार्रवाई नहीं संभव : अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

लखनऊ  समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भी पढ़ाई को लेकर किसी पर एफआईआर नहीं कराई, लेकिन यह सरकार सोचती है कि पुलिस से पीडीए पाठशाला बंद हो जाएगी। हालांकि ऐसा नहीं होगा। सपा मुखिया अखिलेश यादव मंगलवार को राजधानी में जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर प्रेस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्कूलों के विलय पर एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीडीए पाठशाला को पुलिस नहीं रोक सकती है। समाजवादी संकल्प लेते हैं कि जब तक सरकार स्कूलों में शिक्षक और प्रिंसिपल नहीं पहुंचाती, पीडीए पाठशाला और ट्यूशन चलती रहेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को पाठशालाओं की स्थिति देखने की सलाह दी और याद दिलाया कि उनकी सरकार ने अभिनव-संस्कृति स्कूल खोला था। सपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि उसने कई स्कूल बंद कर दिए हैं। कुछ का विलय भी किया है। जब तक उन स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती नहीं हो जाती, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता तब तक छात्रों को पढ़ाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बलिया से निकला पत्र इनकी सोच को बताता है। यह सरकार बुनियादी सवाल न पूछे जाने के लिए ऐसा करती है। अखिलेश ने प्रयागराज बाढ़ से पीड़ित लोगों का भी जिक्र किया और सरकार से राहत की मांग की। उन्होंने तालाबों पर भाजपा के कब्जे का आरोप लगाया है। अयोध्या, बनारस, लखनऊ की जमीनों की रजिस्ट्री भी संदिग्ध तरीके से कराई गई है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा बताए कि भारत का क्षेत्रफल पहले कितना था और अब कितना है। जिस दिन यह जवाब देंगे, हम भी तिरंगा लेकर निकलेंगे। उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई समाजवादी सिद्धांतों से ही कम हो सकती है। वस्त्र बदलने से कुछ नहीं बदलता, न ही कोई लाभ मिलता है। अखिलेश ने चुनाव आयोग पर बेईमानी का आरोप लगाया और कहा, “कैमरे में कैद है कि पुलिस चुनाव में वोट डलवाने में लगी थी, लेकिन आयोग ने कार्रवाई नहीं की। उसे भुला नहीं गया है।" उन्होंने गोसाईगंज नगरपालिका चुनाव में नकली आधार और वोटर आईडी बनाने की मशीन लगाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास नकली आधार आईडी बनाने की मशीन है। 

मंदिर-मस्जिद विवाद पर कोर्ट की कार्रवाई स्थगित, 21 अगस्त को आएगा अगला अपडेट

संभल   चंदौसी की एक दीवानी अदालत ने मंगलवार को स्थानीय बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर को लेकर जारी विवाद की सुनवाई 21 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। यह मामला दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिविजन) आदित्य सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था। मुस्लिम पक्ष ने पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी कि यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं, लेकिन 19 मई को उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी और निचली अदालत को सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया था। हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वकील  गोपाल शर्मा ने कहा कि आज बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण, अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 21 अगस्त तय की है। बारिश और वकीलों की हड़ताल के चलते टली सुनवाई मुस्लिम पक्ष के वकील शकील अहमद वारसी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि बारिश के कारण बार एसोसिएशन हड़ताल पर है, जिसके कारण अगली तारीख दी गई है। यह विवाद पिछले वर्ष 19 नवंबर से शुरू हुआ, जब अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल जिला अदालत में एक मुकदमा दायर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के ऊपर किया गया था। सर्वे के बाद भड़की हिंसा में 4 की हो गई थी मौत बताया जा रहा है कि अदालत के आदेश पर उसी दिन (19 नवंबर) एक सर्वेक्षण किया गया, उसके बाद 24 नवंबर को एक और सर्वेक्षण किया गया। दूसरे सर्वेक्षण के कारण संभल में काफी अशांति फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप 4 लोगों की मौत हो गई और 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और मस्जिद समिति के प्रमुख जफर अली के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। साथ ही 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जाति और धर्म आधारित आदेश पर नाराज, अधिकारी सस्पेंड

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के उस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें ग्राम सभा की जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को खास जाति (यादव) और धर्म (मुस्लिम) से जोड़कर निर्देशित किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस आदेश को ‘भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य’ बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए संबंधित संयुक्त निदेशक एस.एन. सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा और सोच न सिर्फ शासन की नीति के खिलाफ है, बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष, तथ्यों और कानून के अनुसार होनी चाहिए, न कि जाति या धर्म के आधार पर। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से ऐसी गलती न हो, इसका सख्त ख्याल रखा जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार समरसता, सामाजिक न्याय और सभी के समान अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियां किसी भी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह पर आधारित नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीति संविधान और न्याय की मूल भावना पर आधारित है, न कि किसी भेदभाव पर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सहारनपुर में एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों को भी घेरा। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म के बढ़ते गौरव से कांग्रेस और सपा परेशान हैं। पहले की सरकारें आतंकियों को संरक्षण देती थीं और सनातन धर्म की परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास करती थीं, लेकिन अब भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सहारनपुर क्षेत्र की उपेक्षा को समाप्त कर दिया है और विकास तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। इस पूरे मामले से सरकार का यह संदेश साफ है कि जाति और धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई न तो स्वीकार की जाएगी और न ही उसे बर्दाश्त किया जाएगा।  

अलीगढ़ में रक्षा उत्पादन की नई क्रांति, CM योगी बोले- अब देश की शान बनेगा शहर

अलीगढ़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना आज देश के अंदर एक मॉडल बनकर उभरी है। सीएम योगी ने लोगों से अपील की कि आज स्वदेशी अपनाना हम सब लोगों की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हमारा ही पैसा अगर हमारे ही कारीगर और हस्तशिल्पियों के पास जाएगा तो यह विकास और समृद्धि का आधार बनेगा। प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका का निर्वहन करेगा। सीएम ने कहा कि 2018 में शुरू हुआ डिफेंस कॉरिडोर आज ब्रह्मोस मिसाइल जैसे उन्नत हथियारों का उत्पादन कर रहा है। यह मिसाइल विश्व में अद्वितीय है और भारत के हर दुश्मन को जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए भारत की सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलीगढ़ ड्रोन और हार्डवेयर उद्योग में भी अपनी पहचान बना रहा है, जो स्थानीय कारीगरों को रोजगार और समृद्धि प्रदान कर रहा है। सीएम योगी ने मंगलवार को अलीगढ़ के नुमाइश मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में 958 करोड़ रुपए की 186 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "अगर हमारा यह पैसा विदेशी हाथों में जाएगा, तो आतंकवाद के रूप में, धर्मांतरण के रूप में, अव्यवस्था के रूप में, विस्फोट के रूप में, भारत को अस्थिर करने के लिए भारत के खिलाफ ही इस्तेमाल किया जाएगा।" सीएम योगी ने आने वाले सभी त्योहारों पर लोगों से अपने स्वजनों को स्वदेशी उत्पादों को गिफ्ट के रूप में देने की अपील की। समारोह में सीएम योगी ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, सहायता राशि, टैबलेट, आवास की चाबियां और आयुष्मान कार्ड वितरित किए। सीएम ने स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भगवान कृष्ण के रूप में सजे बच्चों को दुलारते हुए उन्हें चॉकलेट, माखन और खिलौने भेंट किए। जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने अलीगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह ने अलीगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके सपनों को साकार करते हुए हम 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' के माध्यम से ताला उद्योग को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं। उन्होंने राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय जल्द ही अलीगढ़ को उच्च शिक्षा का नया केंद्र बनाएगा, जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को जीवित रखने के साथ-साथ युवाओं को उज्ज्वल भविष्य प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को दोहराते हुए सीएम योगी ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ का ताला उद्योग, पीतल की मूर्तियां, और हार्डवेयर आज देश-विदेश में मांग को पूरा कर रहे हैं। विदेशी सामान खरीदने से हमारा पैसा आतंकवाद और अस्थिरता को बढ़ावा देता है। जब हम विदेशी सामान खरीदते हैं, तो उसका मुनाफा आतंकवाद, धर्मांतरण और देशविरोधी ताकतों को मिलता है। उन्होंने मुरादाबाद, फिरोजाबाद, भदोही, और मेरठ जैसे जिलों के ओडीओपी उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये स्थानीय कारीगरों की समृद्धि और रोजगार का आधार बन रहे हैं। स्वदेशी उत्पादों को अपनाना और इसे बढ़ावा देना आज की जरूरत है। इसी से हम अपने राष्ट्र को मजबूत कर सकते हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता अभियान पर जोर देते हुए कहा कि सभी लोग स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। 'सिंगल यूज प्लास्टिक' का उपयोग बंद करें, ताकि नालियां न चोक करें और जलभराव की समस्या न हो। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के लिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की अपील की और कहा कि 13 से 15 अगस्त तक हर घर, प्रतिष्ठान और शिक्षण संस्थान में तिरंगा लहराएं। स्वाधीनता संग्राम के स्मारकों की सफाई करें और शहीदों को श्रद्धांजलि दें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ झंडा नहीं, भारत के गौरव, बलिदान और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सीएम योगी ने डबल इंजन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अलीगढ़ और उत्तर प्रदेश के कई जिले दंगों और अराजकता से जूझ रहे थे। आज बेहतर कानून व्यवस्था के कारण निवेश और विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। हाल ही में हुई 60,244 पुलिसकर्मियों की भर्ती में अलीगढ़ से 1,344 युवाओं का चयन हुआ, जिसे उन्होंने स्थानीय परिवारों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि आगे हम यूपी पुलिस में 30 हजार और भर्तियां करने वाले हैं। उन्होंने कहा, "2017 से पहले सरकारी नौकरियां कुछ परिवारों की बपौती थीं, लेकिन अब चयन मेरिट के आधार पर हो रहा है। लॉजिस्टिक्स और निवेश परियोजनाएं इस बात का प्रमाण हैं।" सीएम योगी ने कहा कि अलीगढ़ ने मूर्ति के निर्माण को लेकर के पूरे देश के अंदर एक नया केंद्र बिंदु बना है। सीएम ने रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के लिए उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सभी लोग अपने स्वजनों को स्वदेशी उत्पादों को उपहार में दें। इससे हमारी मेहनत का पैसा हमारे घर में ही रहेगा। योगी ने कहा कि सरकार 8 से 10 अगस्त तक महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा प्रदान कर रही है। सीएम ने जनप्रतिनिधियों के योगदान को सराहते हुए कहा कि आपके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों ने डबल इंजन सरकार को समर्थन देकर अलीगढ़ के विकास को गति दी है। हम उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रेमी के साथ संबंध, फिर रेप का आरोप! कैमरे में कैद हुई हकीकत

गोरखपुर गोरखपुर से मुंबई जा रही ट्रेन में युवती के साथ यौन उत्पीड़न के केस ने दिलचस्प मोड़ आया है। खबर है कि GRP को जांच में पता चला है कि महिला झूठे आरोप लगा रही है और वह अपने प्रेमी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद अस्पताल पहुंची थी। खास बात है कि महिला ने पुलिस के बार-बार कहने के बाद भी शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। 30 वर्षीय युवती ने आरोप लगाए थे कि उसके साथ चलती ट्रेन में यौन उत्पीड़न हुआ था। रिपोर्ट के अुसार, 13 जुलाई को दादर GRP को अस्पताल से एक फोन आया। पुलिस को जानकारी दी गई कि एक महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिसके निजी अंगों पर चोट के निशान हैं। पुलिस पूछताछ में महिला ने चलती ट्रेन में यौन हिंसा की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने बताया कि वह एक दिन पहले गोरखपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में प्रयागराज से मुंबई जा रही थी। उसने बताया कि वह ट्रेन में वॉशरूम गई और उस समय वहां एक अनजान शख्स भी पहुंच गया। महिला के आरोप थे कि उस शख्स ने यौन हिंसा से पहले अंदर से गेट बंद कर लिया था। महिला अपमान होने की बात कहकर पुलिस शिकायत से इनकार करती रही। बाद में पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की, जिसमें एक एनजीओ की मदद भी ली गई। पुलिस ने इस संबंध में स्वत: संज्ञान FIR दर्ज कर ली। ऐसे खुला राज पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मौका-ए-वारदात पर भी पहुंची। जांच में पता चला कि महिला अपने प्रेमी के साथ मुंबई जा रही थी और दोनों ने 12 जुलाई की रात एक गेस्ट हाउस में गुजारी थी, जहां दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए। इसके चलते उसे गुप्तांगों में चोट लगी थी और वह अस्पताल में भर्ती हो गई थी।