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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बना फ्यूचर-रेडी एयरपोर्ट

लखनऊ,  जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया मानक स्थापित करने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बनकर तैयार हुआ यह एयरपोर्ट जल्द ही अपनी सेवाएं शुरू कर देगा। यह न केवल देश का सबसे आधुनिक हवाई अड्डा होगा, बल्कि फ्यूचर-रेडी टेक्नोलॉजी सिस्टम से सुसज्जित डिजिटल कनेक्टिविटी का केंद्र भी बनेगा। यह एयरपोर्ट ड्यूल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क से लैस होगा, जिससे डेटा कनेक्टिविटी पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित रहेगी। दो स्वतंत्र डेटा सेंटर अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए जा रहे हैं। संपूर्ण एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर एकीकृत नेटवर्क से जुड़ा होगा। एयरपोर्ट परिसर में वीडियो सर्विलांस सिस्टम लगाया जा रहा है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ उड़ानों का नहीं, बल्कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के नए युग का प्रतीक बनने जा रहा है। सुरक्षा और सुविधा दोनों का मिलेगा लाभ यह एयरपोर्ट किसी पारंपरिक हवाई अड्डे की तरह नहीं, बल्कि एक स्मार्ट, फ्यूचर-रेडी डिजिटल नेटवर्क के रूप में आकार ले रहा है। यहां ड्यूल फाइबर ऑप्टिक कनेक्टिविटी होगी — दो स्वतंत्र नेटवर्क, जो सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी तकनीकी अड़चन के बावजूद डेटा प्रवाह कभी न रुके। दो अलग-अलग स्थानों पर बनाए जा रहे स्वतंत्र डेटा सेंटर पूरे सिस्टम का डिजिटल हृदय होंगे। इनकी मदद से टर्मिनल से लेकर रनवे, पार्किंग से लेकर सुरक्षा तंत्र सब कुछ एकीकृत नेटवर्क से जुड़ा रहेगा। हर गतिविधि, हर मूवमेंट, हर सूचना रियल टाइम में मॉनिटर और नियंत्रित होगी। एयरपोर्ट की दीवारों के पीछे एक और अदृश्य व्यवस्था होगी — वीडियो सर्विलांस सिस्टम। यह सिस्टम एयरपोर्ट के हर कोने पर नजर रखेगा। आगमन और प्रस्थान मार्गों पर लगे लाइसेंस प्लेट रिकग्निशन और ड्राइवर इमेजिंग कैमरे वाहनों की स्मार्ट ट्रैकिंग करेंगे, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी। तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल विजन के अनुरूप, एयरपोर्ट में तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब तैयार किए गए हैं। पहला एयरपोर्ट ऑपरेशंस सेंटर (AOC) जो पूरे एयरपोर्ट का मस्तिष्क होगा, जहां से हर गतिविधि का रियल-टाइम कंट्रोल होगा। दूसरा, सिक्योरिटी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (SOCC) जो एयरपोर्ट की सुरक्षा पर निरंतर नजर रखेगा। और तीसरा, एयरपोर्ट इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (AEOC। यह किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। डिजिटल कनेक्टिविटी के स्तर पर जेवर एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वायरलेस नेटवर्क कवरेज पूरे एयरपोर्ट परिसर, रनवे और रिमोट स्टैंड्स तक विस्तृत रहेगा। यात्रियों और स्टाफ के लिए स्मार्ट डिजिटल एक्सेस और रियल-टाइम सूचना प्रणाली भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत इस एयरपोर्ट को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो न केवल आज की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की एआई आधारित सुरक्षा और स्वचालित संचालन प्रणाली का भी समर्थन करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को डिजिटल एविएशन नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाएगी। जेवर एयरपोर्ट न केवल राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि तकनीकी उत्कृष्टता, सुरक्षा और दक्षता के क्षेत्र में भारत की पहचान को भी मजबूत करेगा।

46 साल की खामोशी के बाद संभल में गूंजे जयकारे, 24 कोसी परिक्रमा ने भरा नगर

संभल  46 साल की लंबी खामोशी, डर और असुरक्षा के बाद अब संभल एक बार फिर जयकारों से गूंज उठा है। जय श्री कल्कि, जय श्री राम और हर हर महादेव के जयकारों के बीच जिले की सड़कों पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मौका था संभल के प्राचीन 68 तीर्थ 19 कूप की दो दिवसीय 24 कोसीय वार्षिक तीर्थ परिक्रमा का। भक्ति में डूबे लाखों श्रद्धालुओं ने दो दिन में 24 कोसीय परिक्रमा पूरी की। इस दौरान पूरे परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। जगह-जगह पुलिस, पीएसी और अन्य बलों के जवान तैनात रहे। ‘भगवान कल्कि की नगरी’ के रूप में संभल में इस बदले माहौल को योगी सरकार बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है। परिक्रमा का शुभारंभ प्राचीन तीर्थ बेनीपुरचक स्थित श्रीवंशगोपाल से लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुआ। एसपी डॉ. कृष्ण विश्नोई ने दावा किया कि इस दौरान करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालु यहां जुटे। पहले दिन यात्रा का चंद्रेश्वर मंदिर पर विश्राम हुआ। रविवार को भोर से मंदिर से फिर यात्रा शुरू हुई। शंखनाद, भजन और जयघोषों के बीच निकली यह परिक्रमा 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुक गई थी। योगी सरकार के प्रयासों से 2024 में यह परंपरा फिर से जी उठी। धार्मिक मान्यता है कि इस परिक्रमा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह परिक्रमा श्रीवंशगोपाल तीर्थ से प्रारंभ होकर भुवनेश्वर, क्षेमनाथ और चंदेश्वर तीर्थों से होते हुए पुनः वंशगोपाल तीर्थ पर लौटती है। इन तीन प्रमुख तीर्थों के मध्य 87 देवतीर्थ स्थित हैं, जो सम्भल की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक हैं। बदला-बदला सा है माहौल 1978 के दंगों के बाद संभल में जो भय, अविश्वास और पलायन का माहौल बना, उसने दशकों तक यहां के सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुंचाई। हिंदू परिवारों ने अपने घर, दुकानें और जमीनें छोड़ीं; मंदिरों पर कब्जे हुए और धर्मिक आयोजनों पर रोक लग गई। लेकिन अब माहौल काफी बदला-बदला सा है। बताया जाता है कि संभल पर सीएम योगी लगातार नजर रहती है। संभल पर गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कई बातें उजागर हुईं। कहा जाता है कि इन सच्चाइयों को वर्षों तक दबाए रखा गया था। संभल में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की कोशिशों की भी चर्चा हुई। हिंदुओं के सुनियोजित पलायन का मुद्दा भी उठा। योगी सरकार ने इन सभी मामलों को लेकर कार्रवाई की है। संभल दंगों की साजिश में शामिल होने के आरोप में कई लोगों को जेल भेजा गया है। इसके साथ ही अवैध कब्जों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। धार्मिक धरोहरों का हुआ पुनरुद्धार योगी सरकार ने संभल में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। मिली जानकारी के अनुसार संभल में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-67 के तहत 495 वाद दर्ज हुए। इनमें से 243 मामलों का निस्तारण कर 1067 अतिक्रमण हटाए गए। इस प्रक्रिया में 68.94 हेक्टेयर भूमि कब्जामुक्त कराई गई। यही नहीं, धार्मिक स्थलों पर हुए अवैध कब्जों पर भी कार्रवाई हुई। विशेष अभियान के तहत 37 अवैध कब्जे हटाए गए। इनमें 16 मस्जिदें, 12 मजारें, 7 कब्रिस्तान और 2 मदरसे शामिल थे। कुल 2.623 हेक्टेयर भूमि को मुक्त कराया गया। साथ ही 68 पौराणिक तीर्थस्थलों और 19 प्राचीन कूपों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। कल्कि अवतार मंदिर समेत अनेक प्राचीन स्थलों पर पुनरुद्धार के काम चल रहे हैं। दो नए थाने, 45 नई चौकियां बनीं संभल में योगी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में 2 नए थाने और 45 नई चौकियां स्थापित की हैं। संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन सर्वे की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों के अनुसार बिजली चोरी रोकने के लिए चलाए गए अभियानों से लाइन लॉस 82% से घटकर 18% पर पहुंच गया है। इससे 84 करोड़ रुपये की राजकीय धनराशि की बचत हुई। आर्थिक दृष्टि से भी संभल ने छलांग लगाई है। 2405 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ यह अब प्रदेश में 10वें स्थान पर है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत संभल के मेटैलिक, वुडन और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।  

हापुड़ में योगी का अनाउंस्ड दौरा: गंगा पूजन और अफसरों के साथ हुई रणनीति मीटिंग

हापुड़  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अचानक से हापुड़ पहुंच गए। दोपहर 01:20 बजे हेलीकाप्टर से उतरने के बाद वह सीधे गढ़मुक्तेश्वर गए, जहां पर उन्होंने गंगा में दूध चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। बाद में उन्होंने आरती में भाग लिया। इसके बाद वह पैदल कार्तिक मेले के मुख्य द्वार पर पहुंचे और पैदल ही कुछ दुकानों का निरीक्षण किया। बाद में उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक शुरू कर दी। मुख्यमंत्री का गढ़मुक्तेश्वर पहुंचने पर अधिकारियों ने जोरदार स्वागत किया। गढ़मुक्तेश्वर की पावन धरा में इन कार्तिक मास के प्राचीन गंगा मेले का आयोजन हो रहा है। मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने का कार्यक्रम शनिवार देर शाम को अधिकारियों को मिला था। जिसके बाद अधिकारियों ने मेला स्थल के पास में हैलीपेड से लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे। रविवार सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारियों में जुटे हुए थे। रविवार दोपहर 01:20 बजे मुख्ययमंत्री का हैलीकॉप्टर हैलीपैड पर पहुंचा। जहां पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। मुख्यमंत्री हैलीपेड से सीधे गंगा घाट पर पहुंचे। जहां पर उन्होंने दूध चढ़ाया और पूजा में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने गंगा की आरती की। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्तिक मेले के लिए बनाए गए मुख्य द्वार पर पहुंचे और पैदल ही दुकानों का निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के साथ में समीक्षा बैठक शुरू कर दी।  

गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

  एक ही छत के नीचे 5000 से अधिक लोगों को एक साथ मिलेगा रोजगारः मुख्यमंत्री हर नागरिक को उत्तम स्वास्थ्य सुविधा दिलाना डबल इंजन सरकार का लक्ष्यः योगी आदित्यनाथ कहा – यह केवल अस्पताल नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर की नई परिभाषा है गाजियाबाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में स्थापित यशोदा मेडिसिटी इसका सशक्त उदाहरण है। यह केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की नई परिभाषा है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से न केवल एनसीआर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के नागरिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को अब दिल्ली में महंगे इलाज के लिए भटकने की जरूरत नहीं, क्योंकि गाजियाबाद में ही वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर उपलब्ध हो गया है। इनवेस्टमेंट भी और रोजगार का माध्यम भी उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में जब उत्तर प्रदेश में थर्ड ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित हुई थी, उस समय डॉक्टर पीएन अरोड़ा ने इन्वेस्ट यूपी के साथ एमओयू किया था कि गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी के नाम से अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण करेंगे। इसमें सभी प्रकार की सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं होंगी और विशेष रूप से कैंसर की अत्याधुनिक सुविधा भी, जिसके लिए पहले लोगों को विदेश जाना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि तब यह विश्वास नहीं होता था कि इतनी जल्दी यह संभव होगा, लेकिन डॉक्टर पी.एन. अरोड़ा, डॉक्टर उपासना अरोड़ा और उनकी पूरी टीम ने मात्र तीन वर्षों में इसे साकार कर दिखाया। यह इन्वेस्टमेंट भी है और 5000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी। इस अस्पताल में डॉक्टर, पैरामेडिक्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य हेल्थकेयर से जुड़े 5000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन वर्षों में यह जो काम हुआ है वह उत्तर प्रदेश के बदलते निवेश माहौल और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की शक्ति को दर्शाता है। प्रदेश में स्थापित हुए 42 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 11 वर्षों में हेल्थ सेक्टर में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। उत्तर प्रदेश ने भी इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में अब तक 42 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि दो एम्स (गोरखपुर और रायबरेली) सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिले और हेल्थकेयर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो। योगी आदित्यनाथ ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा कहती है कि“शरीरं माध्यमं खलु धर्मसाधनम्” यानी जीवन के सभी उद्देश्यों की पूर्ति एक स्वस्थ शरीर से ही संभव है। उन्होंने कहा कि यशोदा मेडिसिटी इसी भावना को मूर्त रूप देती है। यहां कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जो अब तक केवल विकसित देशों में ही मिलती थीं। प्रदेश और एनसीआर के नागरिकों के लिए हेल्थकेयर को मिली नई दिशा मुख्यमंत्री ने डॉक्टर पी.एन. अरोड़ा, डॉक्टर उपासना अरोड़ा और उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश और एनसीआर के नागरिकों के लिए हेल्थकेयर की नई दिशा तय की है।  उन्होंने कहा कि डॉ. अरोड़ा का व्यवहार, सेवा भावना और प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती है। वे हर जरूरतमंद का इलाज सुनिश्चित करते हैं, चाहे आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यशोदा मेडिसिटी जैसे प्रोजेक्ट न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं, बल्कि रोजगार और विश्वास का नया अध्याय भी लिख रहे हैं। यह अस्पताल उत्तर प्रदेश की उस नई सोच का प्रतीक है, जो स्वास्थ्य, निवेश और सेवा को एक सूत्र में जोड़ती है। राष्ट्रपति जी का जीवन देश के लिए प्रेरणा मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रदेश सरकार की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति जी का मार्गदर्शन हम सबके लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जी ने शून्य से शिखर तक की यात्रा कैसे की जाती है, यह अपने विराट व्यक्तित्व और कृतित्व से देश की 140 करोड़ आबादी, विशेषकर आधी आबादी के सामने प्रेरणा का स्रोत बनकर दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छठ जैसे पर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित इस पावन अवसर पर वे राष्ट्रपति जी का अभिनंदन करते हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी स्वागत करते हुए कहा कि वे उत्तर प्रदेश के विकास से संबंधित हर मुद्दे पर सहज भाव से मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इस अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, यशोदा मेडिसिटी के अध्यक्ष और एमडी डॉ. पीएन अरोड़ा और डॉ उपासना अरोड़ा उपस्थित रहीं।

यशोदा मेडिसिटी के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया कार्यक्रम को संबोधित

उत्तम स्वास्थ्य पहले गरीब के लिए चिंता का विषय था, आज यह अधिकार के रूप में उसके दरवाजे तक पहुंच रहा : रक्षा मंत्री 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, आज 800 हो गये हैं, एमबीबीएस सीटें केवल 50 हजार थीं, आज यह 1 लाख 20 हजार से ज्यादा हो चुकी हैं : राजनाथ सिंह दक्षिण एशिया में रोबोटिक्स सर्जरी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में पहचानी जाएगी यशोदा मेडिसिटी : राजनाथ सिंह गाजियाबाद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां आयोजित यशोदा मेडिसिटी के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम उस भारत की ओर बढ़ रहे हैं जिसका सपना हमारे पूर्वजों ने देखा था, जो शक्तिशाली और स्वस्थ हो। हमारा हर कदम, हर नीति, हर प्रयास देश के गरीब, वंचित और ग्रामीण जनमानस को समर्पित है। हम मानते हैं कि जब भारत का हर नागरिक स्वस्थ होगा तभी भारत सशक्त होगा। हमें 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए राष्ट्र के नागरिकों का स्वास्थ्य उत्तम होना बहुत जरूरी है। मेडिकल ट्रेनिंग और टेक्निकल रिसर्च को मिलेगी नई दिशा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यशोदा मेडिसिटी के लिए गौरव की बात है कि इसे दक्षिण एशिया में रोबोटिक्स सर्जरी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में मान्यता मिली है। यह उपलब्धि निश्चित रूप से मेडिकल ट्रेनिंग और टेक्निकल रिसर्च को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि हम जब भी किसी सफल इंसान की कहानी पढ़ते हैं, आपको यही देखने को मिलेगा कि हर बड़ी यात्रा की शुरुआत किसी न किसी बड़ी व्यक्तिगत पीड़ा से निकलती है। यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन डॉ पीएन अरोड़ा ने 1986 में अपनी माता को कैंसर की वजह से मृत्युशैया पर देखा, उनकी इसी पीड़ा ने यशोदा मेडिसिटी को जन्म दिया। आज यह अस्पताल समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी है। सरकार एक संरक्षक के रूप में बुजुर्गों के साथ खड़ी है राजनाथ सिंह ने कहा कि यशोदा मेडिसिटी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का उत्तरदायित्वपूर्ण निर्वाह किया है। ठीक उसी प्रकार हम भी समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था ने नया रूप लिया है। पहले जहां यह गरीब के लिए चिंता का कारण होता था, वही आज उसके अधिकार के रूप में उसके दरवाजे तक पहुंच रहा है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि भारत का कोई गरीब किसी भी बीमारी के कारण अपने जीवन की उम्मीद न खोए। इसके लिए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देश के 10 करोड़ परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रूपए के स्वास्थ्य बीमा का कवच प्रदान किया गया है। अब 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना में शामिल किया गया है। ताकि जीवन के उस पड़ाव में जब देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है तब सरकार एक संरक्षक के रूप में उसके साथ खड़ी रहे। जेनरिक मेडिसिन से गांव-गांव में लोग हो रहे लाभान्वित रक्षा मंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आम जनता को अत्यंत किफायती दर पर जेनरिक मेडिसिन उपलब्ध कराई जा रही हैं। आज गांव गांव में लोग इन केंद्रों से लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही हमने एक मजबूत स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर विशेष बल दिया है। 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे वही आज बढ़कर 800 पहुंच चुकी है। 2014 में एमबीबीएस की सीटें केवल 50 हजार हुआ करती थीं, आज यह 1 लाख 20 हजार से ज्यादा हो चुकी हैं। 22 नये एम्स की स्थापना का निर्णय लिया गया। इसमें से 12 पूरी क्षमता के साथ कार्यरत हैं, बाकियों का निर्माण पूरी तेजी पर हैं। जब ये सभी संस्थान पूरी तरह से कार्यरत होंगी तो हमारा हेल्थ नेटवर्क और मजबूत होगा। दक्षिण एशिया में नवाचार की नई परिभाषा गढ़ेगी यशोदा मेडिसिटी अंत में उन्होंने यह कहकर अपनी खुशी जाहिर की कि, यशोदा समूह इस क्षेत्र में सकारात्मक प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि यह संस्था आने वाले समय में न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया में नवाचार की नई परिभाषा गढ़ेगी। रक्षामंत्री ने राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने यहां आकर यहां के चिकित्सक और कर्मचारियों के मन में नई ऊर्जा का संचार किया है। राजनाथ सिंह ने यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन और एमडी डॉ पीएन अरोड़ा, सीईओ डॉ उपासना अरोड़ा और उनकी टीम को बधाई दी। इससे पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यशोदा मेडिसिटी का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में मौजूद रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी का किया उद्घाटन

कोविड महामारी में यशोदा मेडिसिटी का बड़ा योगदान, उत्तर भारत में 'स्टेप्स' मॉडल लागू करने वाला पहला अस्पताल : द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति ने यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन डॉ. पीएन अरोड़ा को दी शुभकामनाएं, कहा- यह अस्पताल बनेगा हेल्थकेयर में बदलाव की मिसाल  'अफोर्डेबल वर्ल्ड क्लास हेल्थ सर्विस टू ऑल' के मिशन को पूरा करेगी यशोदा मेडिसिटी : राष्ट्रपति गाजियाबाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को गाजियाबाद के इंदिरापुरम में यशोदा मेडिसिटी का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे और जनसेवा की भावना की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि देशवासियों को निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों में आकर उन्हें गर्व और खुशी दोनों का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि यशोदा मेडिसिटी ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरी निष्ठा के साथ अपनाया है। कोविड महामारी के दौरान इस संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों का उपचार किया और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भी उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने बताया कि 'सिस्टम फॉर टीबी एलिमिनेशन इन प्राइवेट सेक्टर (स्टेप्स)' के तहत उत्तर भारत का पहला केंद्र यशोदा मेडिसिटी को बनाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान सिकल सेल एनीमिया जैसी जनजातीय क्षेत्रों में होने वाली बीमारियों पर विशेष रूप से काम कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यशोदा मेडिसिटी इस दिशा में और अधिक योगदान देगी। अस्पताल के चेयरमैन और एमडी डॉ. पी.एन. अरोड़ा के प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने सेल्फ मेड हेल्थकेयर मिशन के तहत एक विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित किया है, जो समाज सेवा और राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को अपनी माता यशोदा जी के नाम पर रखना भारतीय संस्कारों और स्वदेशी भावना का उदाहरण है। राष्ट्रपति मुर्मु ने अस्पताल का दौरा भी किया और कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना अत्याधुनिक अस्पताल देखा है, जहां एक ही छत के नीचे सभी परीक्षण और उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों का कीमती समय बचता है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और यह तभी संभव है जब देश का हर नागरिक स्वस्थ हो। उन्होंने कहा कि इस तरह की मेडिसिटी न केवल इलाज के लिए बल्कि अनुसंधान और नवाचार के लिए भी जरूरी हैं। राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि यशोदा मेडिसिटी आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों के साथ मिलकर कैंसर की जीन थैरेपी जैसी स्वदेशी तकनीकों को अपनाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है और सरकार इस दिशा में निरंतर काम कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि निजी क्षेत्र के अच्छे स्वास्थ्य संस्थान देश के लिए अमूल्य योगदान दे सकते हैं। मेडिकल रिस्पॉन्सिबिलिटी के साथ सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी निभाना इन संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। अंत में उन्होंने यशोदा मेडिसिटी से उम्मीद जताई कि यह 'अफोर्डेबल वर्ल्ड क्लास हेल्थ सर्विस टू ऑल' के मिशन को पूरा करेगी और देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएगी। उन्होंने डॉ. पी.एन. अरोड़ा और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं कि वे सेवा, गुणवत्ता और नवाचार के साथ देश को गौरवान्वित करते रहें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएन अरोड़ा, सीईओ डॉ उपासना अरोड़ा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। विशेष शॉल भेंट कर हुआ अतिथियों का स्वागत यशोदा मेडिसिटी के उद्घाटन समारोह में शामिल सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत संस्थान के चेयरमैन और एमडी डॉ पीएन अरोड़ा ने विशेष शॉल भेंट कर किया। शॉल पर रामायण के दृष्यों को रेशम के धागों से उकेरा गया है और प्रत्येक शॉल को बनाने में कारीगरों को एक वर्ष का समय लगा है। इसके साथ ही अतिथियों को शंख और स्मृति चिह्न देकर उनका अभिवादन किया गया।

लखनऊ वाले ध्यान दें: यूपी अग्निवीर भर्ती रैली 8 दिसंबर से, तैयार रहें

लखनऊ  यूपी के युवाओं के लिए सेना में शामिल होने का सुनहरा मौका आया है। प्रदेश में 8 दिसंबर से अग्निवीर भर्ती रैली की शुरुआत होगी। इसके लिए मध्य कमान प्रशासन ने आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, यह भर्ती रैली बरेली स्थित जाट रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित की जाएगी। यूनिट हेडक्वार्टर कोटा के तहत होने वाली यह भर्ती 8 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चलेगी। कार्यक्रम के अनुसार, लखनऊ जिले के अभ्यर्थियों की भर्ती रैली 11 दिसंबर को होगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित तारीख पर समय से पहुंचे।  

UP में बिजली कनेक्शन अभियान तेज, हर गांव में लगेंगे 11 हजार वोल्टेज के ट्रांसफार्मर

अंबेडकरनगर नव वर्ष 2026 विद्युतीकरण से वंचित घर और 500 आबादी से अधिक वाले मजरे जनवरी तक रोशन हो जाएंगे। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (नेफ्ट ओवर हाउसहोल्ड) योजना के अंतर्गत यह कार्य किया जाएगा। अवर अभियंता ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य से संपर्क करके विद्युतीकरण से वंचित घरों को एवं मजरे चिन्हित करेंगे और रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को सौंपेंगे। इसके बाद लखनऊ निदेशालय टीम सत्यापन शुरू करेगी। अकबरपुर, जलालपुर, टांडा, आलापुर चारों सबडिवीजन के 41 विद्युत उपकेंद्र के अधीन विद्युतीकरण से वंचित गांवों में 11 हजार वोल्टेज एवं एलटी लाइन एवं नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद शत-प्रतिशत मजरे घर बिजली से जुड़ जाएंगे। बांस-बल्ली के सहारे चल रहे आपूर्ति से छुटकारा मिलेगा। हर गांव-गली व प्रत्येक घर को रोशन करने की योजना को धरातल पर दिखने लगा है। तीन चरण में यह कार्य पूरा होगा पहले चरण में खंभे लगाए जाएंगे दूसरे में केबल व तीसरे में बिजली आपूर्ति एवं कनेक्शन दिया जाएगा। काम पूरा होने के बाद कोई भी गांव या मजरा बिजली से वंचित नहीं रह जाएगा। शत प्रतिशत घर बिजली कनेक्शन से जुड़ जाएंगे। संतोष, दीपक वर्मा ने बताया कि गांव में विद्युतीकरण न होने से ई-रिक्शा, मोबाइल, चार्जिंग के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। लो-वोल्टेज,बिजली कटौती व ओवरलोड समस्या खत्म के साथ निर्वाध बिजली आपूर्ति मिलेगी।  

प्रतापगढ़ में पुलिस का शिकंजा! 11 फर्जी जमानतदार गिरफ्तार, खुलासा हुआ अपराधियों के पूरे नेटवर्क का

प्रतापगढ़ मुल्जिम ने क्या किया है, कौन है, कितना बड़ा अपराधी है, किस जुर्म में पकड़ा गया है…। इन सवालों का जवाब खोजे बगैर पैसे की खातिर जमानतदार बनने वाले पेशेवरों के खिलाफ कार्रवाई की पहल हुई है। पुलिस ने 33 पर केस दर्ज करके शनिवार को 11 पेशेवरों को पकड़ा है। पेशेवर जमानतदारों की मदद से जेल से छूट रहे बदमाश पुलिस मुठभेड़ व अन्य तरीकों से बदमाशों को पकड़ती है, लेकिन बदमाश पेशेवर जमानतदारों की मदद से कुछ ही दिन में जेल की सलाखों से आजाद हो जाते हैं। ऐसे में जिले में पुलिस द्वारा पेशेवर व फर्जी जमानतदारों के विरुद्ध विशेष अभियान शुरू किया गया है।   इन जमानतदारों ने पुलिस के समक्ष खोले कई राज शनिवार को एसपी दीपक भूकर ने पत्रकारों को बताया कि अभियान के तहत पकड़े गए पेशेवर जमानतदारों से पूछताछ में कई बातों का पता चला है। एसपी ने कहा कि कुछ वकील भी इसमें शामिल बताए गए हैं। पकड़े गए पेशेवर जमानतदारों ने बताया कि वह अपनी जमीन के कागजात, परिचय पत्र आदि अधिवक्ताओं को दे देते थे। अधिवक्ता उनका प्रयोग करते रहते थे। मुल्जिमो को छुड़ाने में दो से तीन हजार रुपये मिलते थे पकड़े गए अधिकांश जमानतदारों ने पांच से अधिक मुल्जिमों की जमानत ली है। हर बार इनको दो से तीन हजार रुपये मिलते थे। साथ ही न्यायालय में जो शपथ पत्र दिया है, उसमें फर्जी तरीके से बताया कि हमारे द्वारा अन्य किसी की जमानत नही ली गई है। शामिल लोगों पर भी होगी कड़ी कार्रवाई  एसपी ने कहा कि इसमें शामिल वकील या अन्य जो भी लोग पाए जाएंगे उन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दर्ज कराए गए केस की जांच के लिए एसआइटी गठित कर दी गई है। इसमें दाे इंस्पेक्टर व चार सब इंस्पेक्टर रखे गए हैं।  

कोर्ट का कड़ा फैसला: राममंदिर केस में वकील को चुकाने पड़े 6 लाख रुपए

नई दिल्ली  पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के बयान को आधार बनाते हुए राममंदिर फैसले को रद्द कराने की मांग करने वाले एक वकील को अदालत से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने वकील महमूद प्राचा पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। दिल्ली की एक जिला अदालत से प्राचा ने 2019 के फैसले को अमान्य घोषित करने की मांग की थी, जिसे हाल ही में खारिज कर दिया गया। प्राचा ने जिला अदालत में उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें अदालत ने उनके दीवानी मुकदमे को नामंजूर कर दिया था। प्राचा ने दावा किया पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (राममंदिर पर फैसला देने वाले पांच जजों में से एक) ने पिछले साल स्वीकार किया कि अयोध्या का निर्णय में उन्होंने वह समाधान दिया जो भगवान श्री राम लला विराजमान ने उन्हें सुझाया, देवता खुद इस मुकदमें में एक पक्षकार बनाए गए थे। पटियाला हाउस कोर्ट में जिला जज धर्मेंद्र राणा ने कहा कि प्राचा की याचिका का कोई ठोस आधार नहीं। यह भ्रमित और अदालत का समय बर्बाद करने के लिए दायर की गई थी। अदालत ने प्राचा पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट की ओर से लगाए गए एक लाख के जुर्माने में 5 लाख का इजाफा करते हुए 6 लाख भरने को कहा। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से लगाया गया जुर्माना अपने उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सका। इसलिए इस तरह के फिजूल मुकदमों को रोकने के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाई जानी चाहिए। गौरतलब है कि अपने भाषण में (जिसका अंग्रेजी अनुवाद आदेश में शामिल किया गया), पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने 'रामलला' का उल्लेख नहीं किया, बल्कि केवल यह कहा था कि उन्होंने अयोध्या मामले में समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना की थी। मशहूर वकील प्राचा ने एक दीवानी वाद दायर कर यह घोषित करने की मांग की थी कि 2019 का अयोध्या फैसला शून्य है। उन्होंने मामले की फिर से सुनवाई की मांग की थी और अपने मुकदमे में श्री रामलला विराजमान को भी प्रतिवादी बनाया था और उनके अभिभावक प्रतिनिधि के रूप में पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ का नाम डाला था। ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2025 में प्राचा की याचिका खारिज कर दी और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए उन पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। प्राचा ने इस आदेश को जिला न्यायालय में चुनौती दी। 18 अक्टूबर 2025 को जिला न्यायाधीश राणा ने फैसला सुनाया। उन्होंने अयोध्या के फैसले और पूर्व सीजेआई के भाषण दोनों के अंश का उल्लेख करते हुए कहा, 'चंद्रचूड़ का ‘भगवान से प्रार्थना’ करने का उल्लेख एक आध्यात्मिक भावना का प्रतीक था, न कि पक्षपात या बाहरी दखल का प्रमाण।' न्यायाधीश राणा ने यह भी साफ किया कि आस्था के स्तर पर ईश्वर से मार्गदर्शन मांगना ‘धोखाधड़ी’ नहीं कहा जा सकता।