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ट्रैफिक पुलिस ला रही खास APP: अब नागरिक मोबाइल से दर्ज कर सकेंगे ध्वनि प्रदूषण की शिकायत

 लखनऊ  राज्य में अब नागरिकों को जल्द ही मोबाइल एप्लीकेशन (एप) के जरिए ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने की सुविधा मिलने जा रही है। यातायात निदेशालय एप विकसित करने की योजना पर तेजी के साथ काम कर रहा है। इस काम में विभिन्न जिलों की यातायात पुलिस के विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। इस एप के जरिए नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की फोटो व वीडियो अपलोड करके सीधी शिकायत करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एडीजी, यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए सतीश गणेश ने बताया कि डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में राज्य में वाहनों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को कम करने की योजना पर काम किया जा रहा है। राज्य भर में प्रेशर हॉर्न, मॉडीफाइड साइलेंसर व हूटर की बड़ी समस्या है। यातायात पुलिस ने तीन से पांच और 18 से 19 अप्रैल के बीच राज्य भर में अभियान चलाकर 6039 वाहनों का चालान प्रेशर हार्न के उपयोग को लेकर किया है, जबकि 11 हजार से अधिक वाहनों का चालान मॉडीफाइड साइलेंसरों व हूटर लगाने को लेकर किया गया है। इन वाहनों से 3.97 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। वहीं प्रेशर हार्न लगाने वाले वाहन चालकों से 2.42 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। उन्होंने बताया कि वाहनों से फैलने वाले ध्वनि प्रदूषण को समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियान को लेकर आम नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इसी सिलसिले में यातायात निदेशालय मोबाइल एप विकसित करा रहा है। नागरिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की सीधी शिकायत एप के जरिए कर सकेंगे। एप पर आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल एप की सुविधा जल्द ही नागरिकों को उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।  

तेज आंधी और बारिश से उत्तर प्रदेश में भारी तबाही, 52 लोगों ने गंवाई जान

उत्तर प्रदेश   वायुमंडल के निचले क्षोभमंडल में वेस्ट यूपी के ऊपर चक्रवाती परिस्थिति बन गई। साथ ही दक्षिण राजस्थान से आ रही पुरवा की मदद मिलने से बुधवार को प्रदेश में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार तक आंधी है। नतीजतन प्रदेश में बुधवार को कुदरत का कहर टूट पड़ा। दोपहर बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आई भीषण आंधी और बारिश के कारण हुए हादसों में अब तक कुल 52 लोगों की मौत हो चुकी है। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और साइन बोर्ड उखड़ गए, जिससे यातायात और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। पूर्वांचल और प्रयागराज मंडल में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली। भदोही में 10 और मिर्जापुर में एक वृद्ध समेत कुल 11 लोगों की जान चली गई। भदोही के औराई में मंदिर की दीवार गिरने से पूजा करने गई दो महिलाओं सहित चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, प्रयागराज में शाम को आई आंधी ने 10 लोगों की जान ले ली, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 7 और प्रतापगढ़ के 3 लोग शामिल हैं। सिद्धार्थनगर में भी टिनशेड गिरने की घटना के बाद एक बच्चे की मौत हो गई। मध्य यूपी और रुहेलखंड में हादसों का सिलसिला मध्य यूपी के जिलों में आंधी-तूफान ने 15 लोगों की बलि ले ली। इसमें अकेले फतेहपुर में सर्वाधिक 8 मौतें हुईं। इसके अलावा उन्नाव में तीन, हरदोई में दो और झांसी व कानपुर देहात में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। रुहेलखंड के बरेली मंडल में सुबह 11 बजे आई आंधी ने बदायूं में छह और बरेली में चार लोगों सहित कुल 10 लोगों की जान ले ली। अवध और मुरादाबाद मंडल का हाल अवध क्षेत्र में भी आंधी का कहर बरपा, जहां सीतापुर में पेड़ गिरने से दो और रायबरेली में करंट लगने से एक किशोरी समेत 3 लोगों की मौत हो गई। रायबरेली के डलमऊ में रेलवे फाटक टूट गया और लालगंज में कार पर पेड़ गिर गया। मुरादाबाद मंडल के संभल में दीवार और पोल गिरने से महिला समेत दो लोगों की मौत हुई, जबकि अमरोहा में 8 लोग घायल हुए हैं। मंडल में 250 से अधिक बिजली के पोल गिरने से ग्रामीण इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति है। यातायात और बिजली व्यवस्था चरमराई तेज हवाओं के कारण वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर साइन बोर्ड गिरने से रूट डायवर्ट करना पड़ा। गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, वायुमंडल में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत कार्य तेज करने और पीड़ितों को तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। अब थमेगा सिलसिला, गर्मी बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार वर्षा के बावजूद प्रदेश के अनेक भागों में तापमान में दर्ज बढ़ोतरी हुई है। नतीजतन आज बुन्देलखण्ड के बांदा में तापमान 45.4 डिग्री दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहने और प्रदेश के दक्षिणी जिलों में लू की स्थिति होने का पूर्वानुमान है।

अगले छह माह तक विदेश यात्राओं से परहेज करें मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी: मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का आह्वान करते हुए शासन में मितव्ययिता, ऊर्जा संरक्षण और जनप्रेरक आचरण की नई कार्यसंस्कृति विकसित करने का संदेश दिया है। उन्होंने मंत्रीगणों से अपनी वाहन फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करने का भी आह्वान किया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने अगले छह माह तक प्रदेश सरकार के सभी मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं से परहेज करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सम्पन्न विस्तारित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक उत्तरदायी, अनुशासित और संसाधन-संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पेट्रोल और डीजल की खपत को न्यूनतम रखने संबंधी आह्वान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल को स्वयं आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रीगण सप्ताह में एक निर्धारित दिन मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कारपूलिंग अथवा साइकिल जैसी सुविधाओं का उपयोग करें, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और आमजन भी इससे प्रेरणा लें। उन्होंने शासन एवं प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल और वर्चुअल माध्यमों के अधिकतम उपयोग पर बल देते हुए निर्देश दिए कि अंतरजनपदीय बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विधानसभा एवं विधान परिषद की स्टैंडिंग कमेटियों की बैठकें यथासंभव हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने सचिवालय और निदेशालय स्तर पर एयरकंडीशनर एवं लिफ्ट के आवश्यकता-आधारित उपयोग के निर्देश देते हुए एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने तथा प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, रेल यात्रा और कारपूलिंग को बढ़ावा देने के साथ 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ व्यवस्था अपनाने पर भी बल दिया। ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को शासन की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग तथा जनजागरूकता अभियानों को रिहायशी कॉलोनियों, विद्यालयों और महाविद्यालयों तक विस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए नई नीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए स्वच्छ एवं ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने सामाजिक आयोजनों में भी मितव्ययिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह एवं अन्य समारोहों के लिए घरेलू स्थलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक व्यय पर रोक लगे और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिले। ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को व्यवहार में उतारने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रीगण उपहार स्वरूप उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें, जिनका निर्माण उत्तर प्रदेश में होता है। उन्होंने कहा कि 'एक जिला-एक उत्पाद' योजना के अंतर्गत प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पादों की समृद्ध श्रृंखला उपलब्ध है, जिन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि इसके लिए आवश्यक नीतिगत बदलाव तत्काल किए जाएं। उन्होंने कॉमर्शियल एलपीजी उपयोगकर्ताओं को भी पीएनजी से जोड़ने की आवश्यकता बताई। आयातित वस्तुओं के न्यूनतम उपयोग पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने तिलहन उत्पादन, प्राकृतिक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने खाद्य तेल की खपत कम करने तथा इसके प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही। साथ ही, सोने के अनावश्यक आयात को हतोत्साहित करने और वर्षा जल संरक्षण को जनांदोलन का रूप देने की अपील भी की। बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल में शामिल नए मंत्रियों का औपचारिक परिचय कराया। उन्होंने कहा कि शासन के सभी अंगों में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सबसे अधिक होती है और जनता प्रतिदिन नेताओं एवं मंत्रियों के कार्यों का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का आचरण ही जनता के लिए सबसे बड़ा संदेश बनता है। नवनियुक्त मंत्रियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बड़ा दायित्व है और आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत समय भी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में सभी मंत्रियों को कम समय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने नए मंत्रियों को वरिष्ठ एवं अनुभवी मंत्रियों से संवाद बनाए रखते हुए सीखने और प्रभावी कार्यशैली विकसित करने की सलाह दी। साथ ही निर्देश दिया कि कैबिनेट मंत्री विभागीय नीतिगत विषयों में अपने सहयोगी राज्य मंत्रियों का अभिमत अवश्य लें।

योगी सरकार ने मंत्री व अधिकारियों की फ्लीट में 50% कमी का निर्देश दिया

लखनऊ पेट्रोल और डीजल कम खर्च करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद विधानसभा की विभिन्न संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित अध्ययन भ्रमण कार्यक्रमों को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे ने इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी किया। इसके मुताबिक देशहित व वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए संसदीय समितियों के सभी अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए विधानसभा की ओर से यह निर्णय लिया गया है, ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सभी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। जनप्रतिनिधियों व संस्थाओं की यह जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रहित के प्रत्येक आह्वान में सहभागी बनें और परिस्थितियों के अनुरूप संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी का परिचय दें। मुख्यमंत्री, मंत्रियों आदि की फ्लीट में 50 प्रतिशत की कमी करें: योगी इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री के आह्वान से जुड़ने की मंगलवार को अपील की है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से कहा कि ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीद न करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को प्रदेश में व्यावहारिक रूप से अपनाए जाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, डीजीपी, सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव की बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री व मंत्रियों आदि की फ्लीट में तत्काल 50 प्रतिशत की कमी की जाए। काफिले से अनावश्यक वाहनों को हटाया जाए। वर्क फ्राम होम को दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को भी प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने पीएनजी, मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों आदि के उपयोग पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री जी का सरकारी बैठकों, सेमिनारों, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप आदि के वर्चुअली आयोजन पर जोर रहा। औद्योगिक विकास विभाग व आईआईडीसी द्वारा औद्योगिक संस्थानों, बड़े स्टार्टअप्स आदि में वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रेरित किया जाए। वहीं जहां बड़ी संख्या में कार्मिक कार्यरत हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुशंसा के लिए राज्य स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाए। मंत्री सांसद एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें मुख्यमंत्री ने वैश्विक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रदेशवासियों को जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया में उथल-पुथल है, ऐसे में सभी को सावधानी बरतनी होगी। प्रधानमंत्री के आह्वान का पालन करने के लिए राज्यों को तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे आयोजित किया जाए। इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, स्कूलों-कॉलेजों के विद्यार्थियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को भी जोड़ें।

सीएम योगी के ‘एक जिला-एक नदी’ अभियान से कृषि व पर्यावरण क्षेत्र में बड़ा सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'एक जिला-एक उत्पाद' की वैश्विक सफलता के बाद अब 'एक जिला-एक नदी' अभियान के जरिए जल संरक्षण और पर्यावरण पुनरुद्धार की नई इबारत लिख रही है। इसके जरिए नदियों को साफ करने, विलुप्त हो चुकी जलधाराओं को पुनर्जीवित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र में सकारातमक बदलाव लाने का काम किया जा रहा है। स्वच्छ गंगा मिशन के तहत नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने कई विभागों के साथ मिलकर प्रदेशभर में छोटी नदियों के पुनरुद्धार के लिए परिवर्तनकारी पहल की है। पीलीभीत में 16 ग्राम पंचायतों में फैली 47 किलोमीटर के क्षेत्र में गोमती नदी का पुनरुद्धार किया गया। कई जगहों पर नहर को चौड़ा व गहरा किया गया। साथ ही 23 तालाबों का जीर्णोद्धार करने और घाटों के निर्माण के माध्यम से नदी ने अपना निरंतर प्रवाह फिर से प्राप्त कर लिया है। इससे 1,53,000 से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जबकि 500 से अधिक किसानों ने प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाया। घाटों पर शाम की आरती और योग सत्रों ने गोमती को एक पवित्र और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित किया है। बुलंदशहर में ‘वीबी-जी राम जी’ के जरिए 29 किलोमीटर में नीम नदी का पुनरुद्धार किया गया। इसमें किसानों ने भी स्वेच्छा से सहयोग किया। इस पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में सराहना भी की थी। इसके साथ ही कारवान नदी और काली नदी का भी पुनरुद्धार किया गया, जहां दर्जनों ग्राम पंचायतों में गाद निकालने, पौधरोपण और सामुदायिक भागीदारी से घाटों पर सिंचाई, जैव विविधता और सांस्कृतिक प्रथाओं को बहाल किया गया। इसी तरह छोटे-छोटे नालों में बदल चुकी संभल की सोत नदी को जनभागीदारी से जीवनदान दिया गया। रामपुर में रेवती, नाहल और नीली, तीन मौसमी धाराओं को पुनर्जीवित किया गया। यहां नहरों की सफाई, रिचार्ज पिट (वर्षा जल संचयन), फिल्टर कक्ष और पौधरोपण से बड़ा बदलाव आया। पूरे प्रदेश में दिखेंगे बेहतर परिणाम राज्य स्वच्छ गंगा मिशन परियोजना निदेशक जोगिन्द्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में छोटी नदियों के जीर्णोद्धार से शानदार परिणाम सामने आए हैं। ये नदियां जो कभी लगभग विलुप्त हो चुकी थीं, अपने वास्तविक रूप में लौट रही हैं। इससे बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। साथ ही सिंचाई के लिए जिलों में बेहतर जल धाराएं उपलब्ध हुई हैं। इन छोटी नदियों और जल संसाधनों को पुनर्जीवित एवं संरक्षित करने के लिए प्रशासनिक विभागों के साथ ‘वीबी-जी राम जी’ को भी जोड़ा गया। इससे रोजगार सृजन से ग्रामीण आजीविका मजबूत हुई। इन जलस्रोतों के जरिए किसानों को आस-पास के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने में भी मदद मिल रही है। नदियों के पुनरुद्धार के साथ घाटों पर सांस्कृतिक परंपराओं का भी पुनर्जीवन हो रहा है। लगभग सभी जगहों पर अब दैनिक आरती और योग सत्र भी हो रहे हैं। सीएम योगी के विजन 'एक जिला-एक नदी कार्यक्रम' के बेहतरीन परिणाम जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेंगे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट,प्रतीक यादव के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई

लखनऊ उत्तर प्रदेश के प्रभावी राजनीतिक परिवार मुलायम सिंह यादव फैमिली के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत ने लोगों को दुखी कर दिया है। फिटनेस और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े प्रतीक यादव के निधन के बाद कई प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। प्रतीक के दोस्तों का दावा है कि उनके शरीर पर चोट के निशान थे। बॉडी नीली पड़ गई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कोई चोट के निशान न होने की बात कही गई है। डॉक्टरों की टीम के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव की शरीर पर किसी तरह का बाहरी चोट का कोई निशान नहीं मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, मौत की असली वजह अब भी साफ नहीं हो सकी है। इस कारण डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा है। उनके हार्ट को भी सुरक्षित रखा गया है। इसकी जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच की जा सकेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या? केजीएमयू के तीन डॉक्टरों के पैनल ने प्रतीक यादव की बॉडी का पोस्टमार्टम किया। डॉ. मौसमी सिंह ने पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व किया। इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार रायपुरिया और डॉ. फातिमा हर्षा भी शामिल रहे। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है। बाहरी चोट को लेकर कई प्रकार की बातें पहले से हो रही थी। सूत्रों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव के शरीर पर चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिलने की बात सामने आ रही हैं। उनकी छाती का भी एक्सरे कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद किसी साजिश जैसी बात पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। प्रतीक की मौत का कारण क्या? प्रतीक यादव की मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें प्रतीक यादव की मौत की असली वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) बताई गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म ऐसी स्थिति है, जहां शरीर में खून का थक्का यानी ब्लड क्लॉट बन जाता है। अक्सर पैरों की नसों में इस प्रकार की समस्या आती है। यह थक्का नसों से बहकर सीधे फेफड़ों की धमनियों में जाकर फंस जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म से फेफड़ों तक ऑक्सीजन और खून का पहुंचना अचानक रुक जाता है। प्रतीक यादव के मामले में क्लॉट इतना बड़ा था कि इसने अचानक सांसें रोक दीं। इसने दिल पर बहुत ज्यादा दबाव डाल दिया, जिससे महज कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई। हार्ट रखा गया सुरक्षित प्रतीक यादव का वेट काफी बढ़ गया था। इसको देखते हुए डॉक्टरों ने उनके हार्ट को सुरक्षित रख लिया है। प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक से मौत का मामला सामने आने के बाद इसकी आगे दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सुरक्षित रखे गए हार्ट से जांच कराई जाएगी। वहीं, बिसरा को जांच के लिए भेजा जाएगा। इससे साफ होगा कि प्रतीक यादव के शरीर में किसी प्रकार के विषैले तत्व या अन्य कारण तो मौजूद नहीं थे। सस्पेक्टेड पॉइजनिंग से इनकार सिविल अस्पताल प्रशासन की ओर से सस्पेंक्टेड पॉइजिंग से इनकार किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने साफ किया कि हमारी तरफ से इस प्रकार की बात कभी भी नहीं कही गई है। अस्पताल के निदेशक जीपी गुप्ता ने कहा कि बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे प्रतीक यादव के ड्राइवर अस्पताल आए थे। यहां से डॉक्टर को तुरंत चलने को कहा गया। मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। उस समय प्रतीक यादव के शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। निदेशक का कहना है कि बाद में उन्हें अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि परिजन पहले प्रतीक यादव के शव को घर ले जाना चाहते थे। बाद में उन्होंने खुद शव के पोस्टमार्टम कराने की इच्छा जताई। पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पंचनामा कर शव को केजीएमयू भेजा गया।  

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, 7500 गो आश्रय स्थलों पर तैयार होगी जैविक खाद

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। सरकार अब प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों पर गोबर से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार कराएगी, जिसे किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसे गोसंरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। इस योजना के तहत तैयार होने वाली जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हर किसान तक इसे आसानी से पहुंचाया जा सके। कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के तौर पर उभरा है। योगी सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को किसानों की आय, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जोड़ना है। इसी उद्देश्य के तहत इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोबर के जरिए बढ़ेगी गांवों की आमदनी उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार ने गोसंरक्षण को ग्रामीण समृद्धि के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। पहली बार प्रदेश में गाय के गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पशुपालन से जुड़ी आय में बड़ा इजाफा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर आधारित जैविक खाद निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासकर युवाओं और पशुपालकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को मिलेगा डीएपी-यूरिया के साथ जैविक विकल्प योगी सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे किसानों को डीएपी और यूरिया के साथ जैविक खाद का विकल्प भी मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था अलग से की गई है। गोसंरक्षण में शीर्ष राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो-तस्करी की घटनाएं आम थीं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पूरी तरह बंद कराया गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश गोसंरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला राज्य बनकर उभरा है। पारदर्शिता बढ़ी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए, जहां गोवंश संरक्षण के साथ जैविक उत्पाद निर्माण और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में राशि भेज रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है और पारदर्शिता बढ़ी है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों में इस समय 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। योगी सरकार अब इन गोशालाओं को गोबर की खाद के प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। एक गाय से रोज लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यही संसाधन जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाएंगे।

अपर्णा यादव के घर पहुंचे मुख्यमंत्री, प्रतीक के निधन पर जताया शोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के घर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनके पति प्रतीक यादव के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि दी। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का बुधवार सुबह आकस्मिक निधन हो गया था। मुख्यमंत्री ने अपर्णा यादव, उनके बच्चों व अन्य परिजनों को ढांढस भी बंधाया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को अथाह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। सीएम ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं भी जताईं।

तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता क्रांति की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, योगी सरकार ने नैक आधारित सुधारों को दी नई रफ्तार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी विश्वविद्यालयों को नैक मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए व्यापक सुधार अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी संस्थानों को अकादमिक उत्कृष्टता, रिसर्च, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करना है। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए “स्टेट क्वालिटी फ्रेमवर्क (एसक्यूएफ)” को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस फ्रेमवर्क के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए नैक, एनआईआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) और एनबीए (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिएशन) आधारित गुणवत्ता मानकों को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है। इससे तकनीकी संस्थानों की रैंकिंग, शैक्षणिक गुणवत्ता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार आने की उम्मीद है। प्रदेश में वर्तमान समय में 14 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, एचबीटीयू, एमएमएमयूटी और एकेटीयू जैसे प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ 771 निजी इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी संस्थान संचालित हो रहे हैं। इतने बड़े नेटवर्क को एक समान गुणवत्ता ढांचे से जोड़ना योगी सरकार की तकनीकी शिक्षा सुधार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की रणनीति केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों को व्यावहारिक रूप से तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कॉलेजों के लिए सेल्फ-असेसमेंट प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है, ताकि संस्थान स्वयं अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सकें। इसके अलावा इंजीनियरिंग कॉलेजों को एसआईआरएफ (स्टेट इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, जिससे डेटा आधारित मूल्यांकन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेशभर में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने की भी तैयारी की गई है। इन कार्यशालाओं के जरिए संस्थानों को नैक की आवश्यकताओं, दस्तावेजीकरण, रिसर्च आउटपुट, फैकल्टी डेवलपमेंट और छात्र सुविधाओं से जुड़े मानकों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कॉलेजों में उपलब्ध डेटा और नैक दिशा-निर्देशों के बीच अंतर का भी मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके। विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार योगी सरकार का यह प्रयास प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के कई तकनीकी संस्थान केवल सीट भरने तक सीमित माने जाते थे, लेकिन अब सरकार उन्हें गुणवत्ता आधारित शिक्षा मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में रिसर्च, इनोवेशन, इंडस्ट्री कनेक्ट और स्किल डेवलपमेंट पर बढ़ते फोकस को भी इस पहल से मजबूती मिलने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य ऐसे तकनीकी संस्थान विकसित करना है जो केवल डिग्री न दें, बल्कि छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करें। योगी सरकार की यह पहल “एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” के लक्ष्य से भी जुड़ी मानी जा रही है। बेहतर तकनीकी शिक्षा, कुशल मानव संसाधन और उद्योगों के लिए प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती है। यही वजह है कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को सरकार विकास की दीर्घकालिक रणनीति के केंद्र में रख रही है।

कानपुर में हजारों लोगों को क्रोमियम मुक्त शुद्ध गंगाजल मिलेगा

कानपूर कानपुर में गंगा किनारे बसे जाजमऊ के लोगों को शुद्ध गंगाजल मिलेगा। उन्हें टेनरी के कचरे की वजह से क्रोमियमयुक्त जहरीला पानी नहीं पीना पड़ेगा। जहां भूगर्भ जल में क्रोमियम मिल गया है, उन्हें भी राहत मिलेगी। एचबीटीयू के वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसी फफूंदी खोजी है, जो क्रोमियम को अपनी सतह पर सोख लेती है और पानी क्रोमियम मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है। यह फफूंदी जाजमऊ की मिट्टी में ही खोजी गई है। एचबीटीयू के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एंड बायोलॉजिकल साइंसेज ने इसकी खोज की है। इसके बाद फफूंदी को पुणे की नेशनल केमिकल लैबोरेट्री में भेजा गया। पता चला कि इसके पहले एस्परजीलस प्रॉलीफरेंस नाम की इस फफूंदी का किसी को पता नहीं था। इस पर इसे एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए नाम दिया गया। पुणे लैब में फफूंदी को एनसीआईएम1473 कोड नंबर दिया गया। इस फंगस को लैब में भी विकसित किया जा सकता है यह शोध जर्नल ऑफ केमिस्ट्री एंड एनवायरमेंट और अन्य जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध के अगुवा स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एंड बायोलॉजिकल साइंसेज के डीन प्रोफेसर ललित कुमार सिंह ने बताया कि इस फंगस को लैब में विकसित किया जा सकता है। पानी में डालकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। फफूंदी जो क्रोमियम को सोखती है, उसे रिकवर भी कर लिया जाता है।  इसे निकालकर पानी को शुद्ध करके क्रोमियम का अन्य जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। टेनरी के बगल के मैदान की मिट्टी से निकाली गई है फफूंदी क्रोमियम निकालने में फफूंदी का प्रयोग करने के बाद अब पानी के दूसरे घातक धातु तत्वों को निकालने में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्रोमियम एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए के शोध में चार साल का समय लगा है। इस शोध को और विस्तारित करेंगे जिससे लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल सके। यह फफूंदी एक टेनरी के बगल के मैदान की मिट्टी से निकाली गई। इसके बाद इस पर कार्य किया गया, तो जल शुद्धिकरण में उपयोगिता पता चली। एक पात्र में बगास डाली गई। उसमें एस्परजीलस प्रोलीफरेंस एलए को डालकर विकसित किया गया। जब फफूंदी विकसित हुई तो इसमें क्रोमियम युक्त पानी डाला गया। क्रोमियम के कण फफूंदी की सतह पर जम गए। जो पानी बाहर निकला, वह शुद्ध रहा। इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत तौर पर या किसी स्थान पर सामूहिक तौर पर जल शुद्धिकरण के लिए किया जा सकता है।  -प्रोफेसर ललित कुमार सिंह, डीन, एचबीटीयू ये बीमारियां हो सकतीं क्रोमियम के कारण त्वचा में जलन, नाक के अल्सर, फेफड़े और सांस की बीमारियां, कैंसर, त्वचा पर क्रोम अल्सर, पाचन तंत्र की समस्या, लिवर, किडनी और तंत्रिकाओं को नुकसान, अस्थमा आदि बीमारियां हो सकती हैं। हजारों लोग क्रोमियम युक्त पानी पीने को मजबूर शहर में करीब 75 हजार से अधिक आबादी क्रोमियम युक्त पानी पीने के लिए मजबूर है। जाजमऊ, वाजिदपुर, नौरैयाखेड़ा, मोतीपुर, मदारपुर, प्योंदी, किसनपुर समेत आसपास के 20 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा शहर के बीच में जूही बंबुरहिया, तेजाब मिल काॅलोनी आदि इलाकों के भूगर्भ जल में क्रोमियम मिला हुआ है। क्रोमियम की वजह से लोगों की सेहत खराब हो रही है। उन्हें विभिन्न प्रकार के रोग हो रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जाजमऊ और दूसरे इलाकों में कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई और उनके सैंपल लिए गए। साथ ही इन क्षेत्रों के पानी के सैंपल की भी जांच कराई थी। रिपोर्ट में क्रोमियम युक्त पानी की पुष्टि हुई है।