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CM योगी ने विश्वकर्मा मंदिर में की पूजा, शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना की सराहना की

लखनऊ भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती पर शिल्पकारों-कारीगरों सहित समस्त प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो देश शिल्पकारों व कारीगरों को सम्मान देता है, वही आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसी भावना को अपनाकर पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का प्लेटफार्म दिया है। उन्होंने शिल्प व कारीगरी को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़कर शिल्पकारों-कारीगरों को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाया है। सीएम योगी गुरुवार सुबह जटाशंकर स्थित श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। विश्वकर्मा मंदिर में सीएम योगी ने पूजा की मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान से आराधना करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सोनार का काम करने वालों सहित कारीगरी के तमाम पेशे से जुड़े लोगों के लिए उनकी शिल्प कला ही स्वावलंबन का आधार थी। पर, यह हुनर, शिल्प-कारीगरी आजादी के बाद दशकों तक उपेक्षा का शिकार रही। पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में पहली बार डबल इंजन सरकार ने शिल्पकारों-कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और रोजगार के विभिन्न आयामों के साथ जोड़कर उन्हें आगे बढ़ाया है। डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन से यूपी में आज तीन करोड़ से अधिक लोग कारीगरी, शिल्प से जुड़कर रोजगार और स्वावलंबन की राह पर सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। भगवान विश्वकर्मा सृष्टि और PM मोदी नए भारत के शिल्पी- योगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है तो साथ ही आज नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन भी है। आज हर कारीगर, शिल्पी जिसके पास कोई विशिष्ट शिल्प है, वह पूजन के जरिये सृष्टि के शिल्पी प्रभु विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के सुदीर्घ स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा, ‘गुरु गोरखनाथ की पावन धरा से भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सृष्टि के शिल्पी के श्रीचरणों में नमन करते हुए मैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों की तरफ से हृदय से बधाई देता हूं। यह प्रार्थना है कि लंबे समय तक उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे और उनकी विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो।’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव पुस्तक का विमोचन भी किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष ने सीएम का स्वागत किया मुख्यमंत्री का स्वागत श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति के अध्यक्ष दयानंद शर्मा ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, स्थानीय पार्षद छट्ठीलाल गुप्ता, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति से जुड़े जयप्रकाश शर्मा, अनूप शर्मा, अजय विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।

मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 का किया शुभारंभ, 25 ट्रेड के कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के अवसर पर प्रदर्शनी एवं मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित कर मुंबई से डांस कराने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, तब कारीगरों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि तब स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं थी। हमारी सरकार ने परंपरागत कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उसे बाजार की आवश्यकता से जोड़ने का काम किया। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रदान की टूलकिट  मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उत्तर प्रदेश में 2019 से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, टूलकिट तथा स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे कारीगर मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और उनकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी अद्भुत शिल्पकला से भगवान विश्वकर्मा ने समाज के कल्याण में योगदान दिया। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जुड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उद्योग या कारीगरी का क्षेत्र नहीं होगा, जहां विश्वकर्मा पूजन की परंपरा न रही हो। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई करनी थी, तब समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले नल और नील भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। सौ योजन समुद्र में बिना पिलर के सेतु का निर्माण कुछ ही दिनों में पूरा होना उस समय की अद्भुत कारीगरी और शिल्पकला को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के उन्हीं मानस प्रतिनिधियों के रूप में आज हमारे कारीगर और हस्तशिल्पी समाज के सामने हैं। पहले कारीगर उद्यमी था, फिर श्रमिक बनने को मजबूर हुआ मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत उस समय दुनिया में विकसित था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबी और पैसे का हवाला देकर कारीगरों को सुविधाओं से वंचित रखा। उनके पास हुनर और कारीगरी थी, लेकिन बाजार उनसे दूर कर दिया गया। बैंकिंग व्यवस्था से उन्हें दूर रखा गया और डिजाइन तथा तकनीक की बदलती मांग के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह श्रमिक बनने और बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हो गया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने पर उन्होंने प्रदेश के कारीगरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उस समय हस्तशिल्पी और कारीगर हताश और निराश थे तथा पलायन कर रहे थे। जिनके परिश्रम से प्रदेश में रौनक और रोजगार का सृजन होता था, वही कारीगर कथित बीमारी, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति यह थी कि कारीगरों के हित में काम करने के बजाय लोग कारीगरों से वसूली और उनका शोषण करते थे। प्रशिक्षण के साथ मानदेय और टूलकिट भी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह समझा कि बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे परंपरागत कार्य करने वाले लोग रोजाना मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा तो प्रशिक्षण अवधि में उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। इसलिए सरकार ने केवल प्रशिक्षण देने के बजाय प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और उसके बाद बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट दी जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज की बाजार और समाज की मांग के अनुरूप विकसित करना है। 16 से बढ़कर 25 ट्रेड, परंपरागत कारीगरों के साथ युवाओं को भी अवसर मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल किए गए थे। इनमें 11 पारंपरिक ट्रेड-बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी थे। अब सरकार ने पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पारंपरिक कार्यों से समाज का पेट भरता रहा, उनके करने वालों को लंबे समय तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सरकार ने अब ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा युवाओं की रुचि और आज की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की मरम्मत, विद्युत उपकरणों का रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी रुचि के अनुसार किसी भी ट्रेड में जा सकता है। इन 25 ट्रेड का मूल उद्देश्य एक ही है कि कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। ₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगर को उद्यमी बनाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ बैंक से जोड़ना भी जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को ₹5 लाख तक का … Read more

ग्रेटर नोएडा में 25-29 सितंबर तक यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो, 45 हजार से ज्यादा खरीदार जुटेंगे

योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को नई उड़ान देगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का होगा आयोजन, अब तक 45 हजार से ज्यादा घरेलू खरीदारों का पंजीकरण आयोजन में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की होगी भागीदारी, पार्टनर कंट्री के रूप में होंगे सम्मिलित प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष किया जाएगा प्रस्तुत लखनऊ/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश में निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योगी सरकार की पहल को चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के माध्यम से नई गति मिलने जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में घरेलू खरीदारों के साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर पंजीकरण, प्रचार और आमंत्रण प्रक्रिया चल रही है। 1.5 लाख से ज्यादा घरेलू खरीदारों के पंजीकरण का लक्ष्य यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में घरेलू बिजनेस-टू-बिजनेस खरीदारों के लिए अब तक 45 हजार से ज्यादा पंजीकरण किए जा चुके हैं और जैसे जैसे आयोजन की तिथि नजदीक आ रही है, पंजीकरण की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। घरेलू खरीदारों का लक्ष्य 1.5 लाख से अधिक रखा गया है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी के लिए करीब  1500 पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें साक्षात्कार भी आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि 500 से ज्यादा खरीदारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है और 300 से अधिक खरीदारों के टिकट सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार आयोजन में उत्तर प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए खरीदारों और प्रदर्शकों के बीच व्यावसायिक संवाद का व्यापक मंच तैयार किया जा रहा है। योगी सरकार की निवेश एवं निर्यातोन्मुखी नीतियों के संदर्भ में यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, एमएसएमई इकाइयों, निर्यातकों और औद्योगिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आ रहा है। 36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक ट्रेड शो के लिए 36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक किया जा चुका है, जबकि लगभग 1,000 वर्गमीटर क्षेत्र की बुकिंग और संभावित है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक सामर्थ्य को विभिन्न सेक्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन की थीम उत्तर प्रदेश के उत्पादों, निवेश संभावनाओं, औद्योगिक आधारभूत ढांचे और वैश्विक व्यापारिक अवसरों को एक मंच पर लाने पर केंद्रित है। जापान समेत पांच देशों की भागीदारी की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के तहत जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया की पुष्टि की जा चुकी है। थाईलैंड की भागीदारी की स्थिति अभी प्रतीक्षित है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, खरीदारों और कारोबारी संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों, व्यापारिक साझेदारी और निर्यात संभावनाओं पर संवाद का अवसर मिलेगा। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने और प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित यह ट्रेड शो राज्य की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के सामने रखने का माध्यम बनेगा। 20 नॉलेज सेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी ट्रेड शो में उद्घाटन एवं समापन समारोह के अतिरिक्त 20 नॉलेज सेशन भी संभावित है। जानकारी के अनुसार 25 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रस्तावित स्लॉट भी निर्धारित किए गए है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापार, उद्योग, निर्यात और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। उद्घाटन समारोह 25 सितंबर 2026 को पूर्वाह्न में प्रस्तावित है, जबकि समापन एवं पुरस्कार समारोह 29 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित किए जाने की योजना है। राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस बैंड का प्रस्ताव भी है।

सिख समाज के हित में यूपी सरकार के कार्यों की जानकारी लेकर दिल्ली LG से मिले सरदार परविंदर सिंह

लखनऊ  दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू जी के लखनऊ आगमन पर उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के वरिष्ठ सदस्य एवं उत्तर प्रदेश सिख गुरुद्वारा कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष सरदार परविंदर सिंह के नेतृत्व में कमेटी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उनसे शिष्टाचार भेंट की। भेंट के दौरान सरदार परविंदर सिंह ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में सिख समाज के हित में किए जा रहे कार्यों एवं लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी उपराज्यपाल महोदय को दी। सरदार परविंदर सिंह ने बताया कि वीर बाल दिवस के आयोजन की पहल उन्होंने वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री जी के समक्ष रखी थी और वर्ष 2018 में पुनः आग्रह किया था कि चारों साहिबजादों की महान शहादत को देखते हुए वीर बाल दिवस (साहिबजादा दिवस) को सम्मानपूर्वक मनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार मुख्यमंत्री जी ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए लखनऊ से इसकी शासकीय स्तर पर शुरुआत की तथा मुख्यमंत्री आवास पर पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश और कीर्तन-गुरबाणी का आयोजन कराया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कक्षा 8, 9 एवं 10 के पाठ्यक्रम में श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी एवं चारों साहिबजादों के इतिहास को शामिल किया गया है। वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रदेश के लगभग तीन करोड़ विद्यार्थी भाषण, निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, जिससे नई पीढ़ी तक सिख गुरुओं और साहिबजादों के इतिहास एवं बलिदान की जानकारी पहुंच रही है। सरदार परविंदर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा पिछले वर्षों में सिख धर्म के गुरुओं के प्रकाश उत्सव, शहीदी पर्व एवं अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर लगभग 100 कार्यक्रमों में सहभागिता की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अनुरोध पर लखनऊ में खालसा चौक का निर्माण कराया गया तथा प्रदेश के विभिन्न गुरुद्वारों के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए भी सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सिख समाज को राजनीतिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में प्रतिनिधित्व और भागीदारी देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। उन्होंने उपराज्यपाल महोदय को बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ सिख समाज की धार्मिक भावनाओं और गौरवशाली इतिहास को भी सम्मान दिया जा रहा है। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू जी को भेंट किया गया तथा शॉल और पुष्पगुच्छ देकर उनका सम्मान किया गया। इसके अतिरिक्त गुरुद्वारा यहियागंज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में भी सरदार परविंदर सिंह ने सहभागिता की और प्रतिनिधिमंडल की ओर से उपराज्यपाल महोदय का स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्रतिनिधिमंडल में सरदार तरनजीत सिंह, सरदार हरप्रीत सिंह, सरदार चरणजीत सिंह होरा, सरदार कवलजीत सिंह एवं सरदार त्रिलोचन सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सरदार परविंदर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सिख समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा सिख समाज के हित में किए जा रहे कार्यों के लिए उनका आभार व्यक्त करता है और प्रदेश में सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव तथा राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर सहयोग करता रहेगा।

जनभवन में सीएम योगी की मौजूदगी में गंगासागर नमो नम: का हुआ लोकार्पण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनभवन परिसर में आयोजित गंगासागर नमो नम: लोकार्पण कार्यक्रम में सम्मलित हुए। इससे पूर्व जनभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने छात्राओं को उपहार देकर शिक्षा से लगाव के लिए प्रेरित किया। गंगासागर नमो नम: लोकार्पण के अवसर पर पूजन भी किया गया। वहीं उपस्थित सभी गणमान्य आरती में भी शामिल हुए। जनभवन में छात्राओं ने भजन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी प्रस्तुत किया।

खेलों के नए केंद्र के रूप में दुनिया के सामने आएगा मेरठ

मेरठ  मेरठ अब सिर्फ खेल प्रतिभाओं की धरती के रूप में नहीं, बल्कि खेल शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण के उभरते केंद्र के तौर पर भी देश-दुनिया के सामने अपनी पहचान दर्ज कराने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-4.0 में प्रदेश के खेल क्षेत्र की बदलती तस्वीर पेश की जाएगी। इसके लिए पहली बार खेल विभाग का अलग पवेलियन तैयार किया जा रहा है। करीब 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस पवेलियन में मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। खेल विभाग के इस मंच पर प्रदेश की खेल उपलब्धियों, आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। खेल निदेशालय, प्रादेशिक विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग, स्पोर्ट्स कॉलेज और खेल यूनिवर्सिटी इसमें संयुक्त रूप से भाग लेंगे। डिजिटल डिस्प्ले से लेकर मॉडल और वीडियो प्रस्तुति तक, अलग-अलग माध्यमों से प्रदेश में खेल क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी दी जाएगी। खेल पढ़ाई से करियर तक, मेरठ की यूनिवर्सिटी पर नजर ट्रेड शो में आने वाले लोगों को मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों, प्रवेश व्यवस्था, पात्रता और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के नए विकल्पों की जानकारी मिलेगी। प्रदेश की प्रमुख खेल परियोजनाओं को थ्री-डी मॉडल के जरिए भी समझाया जाएगा। मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी के साथ अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में विकसित हो रही खेल सुविधाओं के मॉडल पवेलियन में रखे जाएंगे। प्रदेश में तैयार हो रहे खेल ढांचे पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के जरिए भी आगंतुकों को विस्तार से जानकारी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां भी पवेलियन का हिस्सा होंगी। तस्वीरों, वीडियो और डिजिटल स्क्रीन पर खिलाड़ियों की सफलताओं को प्रदर्शित कर प्रदेश की खेल प्रतिभा की कहानी बताई जाएगी। मैदान से डिजिटल दुनिया तक दिखेगा खेलों का नया अंदाज युवाओं को सीधे खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए पवेलियन में इंटरएक्टिव गेमिंग जोन भी तैयार किया जा रहा है। फुटबॉल, हॉकी और टेबल टेनिस समेत चार खेलों पर आधारित डिजिटल गेम में आगंतुक खुद हिस्सा ले सकेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहन के तौर पर छोटे उपहार दिए जाएंगे। पवेलियन में जेन-जी को ध्यान में रखते हुए फिटनेस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े संदेश भी दिए जाएंगे। वहीं खेलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और खिलाड़ियों के डिजिटल डेटा को व्यवस्थित करने की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य खेल प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उनके प्रदर्शन के विश्लेषण तक तकनीक की बढ़ती भूमिका को सामने लाना है। युवा कल्याण विभाग की ओर से युवक मंगल दल और महिला मंगल दल की गतिविधियों, पुरस्कारों और उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। खेल विभाग के विशेष सचिव विनीत कुमार के अनुसार प्रदेश में खेल विद्यालयों, खेल विश्वविद्यालयों, स्पोर्ट्स हॉस्टल और उच्च उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाली प्रतिभाओं को अवसर देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर है।

‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

लखनऊ पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। शामली के आयुष मलिक प्रकरण को सामने रखते हुए सोम ने कहा कि पहले लव जिहाद लड़कियों के साथ चलता था, अब लड़कों के साथ हो रहा है। इसीलिए UCC जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अच्छे परिवारों के लड़कों का बड़े स्तर पर ‘माइंडवॉश’ किया जा रहा है और इसके पीछे फंडिंग से लेकर एक खास नैरेटिव तैयार करने तक का काम हो रहा है। सोम ने कहा कि शामली का मामला इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में विदेशी और ‘सो-कॉल्ड सेक्युलर’ लोग भी शामिल हैं। उनके मुताबिक यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़े स्तर पर फंडिंग करके युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सोम ने इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया। यूसीसी ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा संगीत सोम ने यूसीसी को इसका समाधान बताते हुए कहा कि समान नागरिक कानून ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक कानून लागू होना चाहिए और जिस मजबूती के साथ इसे लागू करने की जरूरत है, उसी तरह इसे लागू किया जाना चाहिए। एक दिन पहले भी सोम ने यूसीसी का विरोध करने को लेकर अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोला था। ‘मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी’ सोम ने अपने बयान में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। सोम ने तीनों नेताओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और दावा किया कि शामली का प्रकरण इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश, राहुल और ओवैसी देश में शांति नहीं चाहते और हमेशा देश को बांटने की राजनीति करते हैं। सोम ने कहा कि सनातनी इसे समझ चुके हैं और 2027 में इनकी औकात पता चलेगी। दंगा करेंगे तो सात पुश्तें याद रखेंगी प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा कि यूपी में धार्मिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद इन लोगों को पता है कि दंगा करेंगे तो ऐसा इलाज होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी। सोम ने एक वर्ग की बढ़ती आबादी को भी चिंता का विषय बताते हुए यूसीसी को पूरी दमदारी से लागू करने की मांग की।

पोलियो वैक्सीन बनाने वाली बिबकॉल कंपनी होगी बंद, 90 कर्मचारियों का भविष्य अधर में

बुलंदशहर 37 साल पहले बुलंदशहर में स्थापित हुई बिबकॉल कंपनी अब बंद हो जाएगी। ये कंपनी पोलियो ड्राप बनाती थी। 2022 में इसका प्रोडक्शन पूरी तरह से बंद हो चुका है। कभी भारत के पोलियो उन्मूलन अभियान की अहम ताकत रही सरकारी वैक्सीन कंपनी भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बिबकॉल) अब अपने अस्तित्व के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। दो साल से इस कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली है। अफसरों के मुताबिक दिल्ली में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बिबकॉल को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। बिबकॉल की स्थापना 10 मार्च 1989 को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन करना और वैक्सीन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। कंपनी का प्लांट उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के चोला में स्थापित किया गया था। 1990 के दशक में बिबकॉल ने ओपीवी उत्पादन की दिशा में काम शुरू किया और बाद में इसे डब्लयूएचओ-जीपीएम प्रमाणन भी मिला। 2000 के दशक की शुरुआत में कंपनी को भारत सरकार और यूनिसेफ की ओर से बड़े वैक्सीन सप्लाई ऑर्डर मिले। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बिबकॉल ने भारत के पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम में बड़ी मात्रा में ओपीवी की आपूर्ति की। पोलियो उन्मूलन अभियान में रही अहम भूमिका भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान बिबकॉल देश की उन सरकारी संस्थाओं में शामिल थी जिन्होंने बड़े पैमाने पर ओरल पोलियो वैक्सीन उपलब्ध कराने में योगदान दिया। वर्ष 2015 में सरकार ने भी कहा था कि बिबकॉल ने भारत के इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के लिए अरबों डोज की ओपीवी सप्लाई की और देश को पोलियो मुक्त बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में बिबकॉल के पीएसयू पर सरकार ने अहम फैसला किया है जिसके तहत अब सरकार वैक्सीन और बायोलॉजिकल बनाने वाली इस कंपनी के पीएसयू को पूरी तरह से बंद करने वाली है। क्यों लिया गया ये फैसला बिबकॉल कंपनी को लगातार नुकसान हुआ, जिसकी वजह से आर्थिक तंगी के कारण कंपनी ने पिछले करीब दो साल से कर्मचारियों को लंबे समय तक वेतन नहीं दिया। जिसके कारण इस कंपनी को बंद करने का फैसला किया गया। वर्ष 2022 में बंद हो गया था प्रोडक्शन बिबकॉल सरकारी कंपनी है, जो वैक्सीन और बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। इसकी मुख्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने दिसंबर 2022 के आखिर में अपने मुख्य प्रोडक्ट, ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन बंद कर दिया था। इसके बाद से ही कंपनी को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। यह कंपनी बच्चों के लिए पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जिंक टैबलेट, डायरिया मैनेजमेट किट और अन्य दवाएं बनाने का काम करती है। भारत को पोलियो मुक्त बनाने में इस कंपनी ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। करीब 90 कर्मचारी अभी सेवारत कंपनी की स्थापना के समय और बीच में प्रोडक्शन बढ़ाने पर स्थाई और स्थाई मिलाकर लगभग 300 अधिकारी कर्मचारी इसमें सेवारत थे। इसके बाद जब प्रोडक्शन कम हुआ तो कर्मचारियों अधिकारियों की संख्या घटती गई और इनमें से कुछ सेवानिवृत हो गए और कुछ की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई। बिबकॉल के सीनियर प्लांट सुपरिंटेंडेंट सुनील शर्मा ने बताया कि वर्तमान में लगभग 90 अधिकारी कर्मचारी सेवारत हैं। बिबकॉल बंद होने का बेहद दुख है। हम वर्ष 2022 से अपने वेतन और कंपनी को चलाने की मांग को लेकर जगह-जगह संपर्क कर रहे थे मगर विफलता ही हाथ लगी। पूर्व वाइस प्रेसीडेंट बिबकॉल सुनील शर्मा ने बताया, पोलियो वैक्सीन बनाने वाली बिबकॉल कंपनी को आज नई दिल्ली में हुई कैबिनेट की बैठक में बंद करने का निर्णय लिया गया है।

76वें जन्मदिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत केजीएमयू में हुआ कार्यक्रम

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेशभर में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गुरुवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ में 500 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी के उपचार के साथ मरीजों के पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल भी सरकार की प्राथमिकता है। हम सब टीबी को मिलकर हराएंगे।  उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सेवा में लगातार 25 वर्षों से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके ‘सेवा ही संकल्प’ के भाव को आत्मसात करते हुए प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ देश और दुनिया में लगातार प्रयास हो रहे हैं और भारत ने टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और प्रभावी उपचार के माध्यम से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। स्वच्छता की भूमिका महत्वपूर्ण उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी से बचाव और उपचार में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। मरीजों और उनके परिवारों को अपने घर एवं आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। एकजुट प्रयासों से ही भारत और उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। टीबी मरीजों के उपचार के साथ उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें। संविधान स्थल का भी हुआ शुभारंभ केजीएमयू में डिप्टी सीएम द्वारा संविधान स्थल का शुभारंभ भी किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमारे राष्ट्र की आत्मशक्ति है। संविधान स्थल विद्यार्थियों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य एवं संविधान के प्रति निष्ठा के भाव को और सशक्त करने का कार्य करेगा। पोषण पोटली का किया वितरण कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई तथा प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया गया। इनकी रही उपस्थिति  इस अवसर पर केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, प्रति कुलपति प्रो. अंजू अग्रवाल, कुलसचिव अर्चना गहरवार, डीन पैरामेडिकल प्रो. के.के. सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रश्मि कुशवाहा, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं उपाध्यक्ष, नेशनल टीबी टास्क फोर्स प्रो. सूर्यकांत सहित केनरा बैंक, इंडियन बैंक एवं रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती पर कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, उर्वरा भूमि, भरपूर जल संसाधन और युवा जनशक्ति थी। मुख्यमंत्री ने कहा, बीमारू यूपी नहीं था, बीमारू तो यूपी को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता थी, जो हमारे हस्तशिल्प और कारीगरों का अपमान करते थे।   विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले परंपरागत कारीगर हताशा और निराशा के साये में जीने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन व्यवस्था के अधिकारी और गुर्गे कारीगरों से वसूली करते और उनका शोषण करते थे।   सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी पर हमला मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, जिन्हें सैफई में महोत्सव कराकर वहां मुंबई से लोगों को लाकर डांस कराने से फुर्सत न हो और बर्मिंघम की बग्घी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत हो, वे कारीगरों के बारे में कब सोचते। वे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में कब सोचते। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कारीगरों के लिए योजना लागू की तो वे लोग हंसते थे।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना लागू की गई। इसके बाद 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। इसका उद्देश्य परंपरागत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और बैंक ऋण से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना था।   कारीगर श्रमिक नहीं, उद्यमी बने मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हमारा कारीगर और हमारा हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि कारीगर रोज काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उसकी आय प्रभावित न हो, इसकी भी व्यवस्था की गई है।   योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पांच हजार रुपये मानदेय और इसके बाद 15 हजार रुपये तक की आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। कारीगरों को बैंक से जोड़कर अपना उद्यम स्थापित करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।   कारीगरों को 10 लाख तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा है। कारीगरों के लिए इसकी सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा, गारंटी हमारा कारीगर नहीं देगा, ब्याज भी वह नहीं देगा, ब्याज हम देंगे, बस उसको आप लोन दीजिए।   उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूंजी की कमी किसी कारीगर के उद्यमी बनने की राह में बाधा न बने।   अब 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड लिए गए थे। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पारंपरिक ट्रेड शामिल थे। अब मूर्तिकार, दुधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा जैसे नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं।   युवाओं की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबरिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे आधुनिक ट्रेड को भी योजना में जगह दी गई है। अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।   बॉटम फाइव से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यूपी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश देश के बॉटम फाइव राज्यों में आता था। आज देश की दो या तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उसमें उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान और सहयोग देने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयां स्थापित कराई गई हैं और इनमें 3.25 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है।   ट्रेड शो में 12 से 15 हजार करोड़ के ऑर्डर की उम्मीद मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो आयोजित होगा। इसमें प्रदेश में बने उत्पादों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक प्रदर्शक और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल होंगे।   उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार और ऑर्डर मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पैसा सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों की जेब में जाएगा।   छह लाख से अधिक कारीगरों को मिला लाभ एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी के माध्यम से छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को लाभ मिला है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में नए ट्रेड जोड़कर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।   उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि प्लेज पार्कों के लिए स्वीकृत की गई है। महिला उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज उपादान सहायता की व्यवस्था भी की गई है। टूलकिट बांटी, मार्जिन मनी ऋण पोर्टल शुरू मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा भेंट की। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ भी किया।   मुख्यमंत्री ने अयोध्या के श्रवण कुमार को हलवाई और रामतीर्थ को कुम्हार की टूलकिट दी। बाराबंकी की रमा जायसवाल व वंदना को दर्जी, उन्नाव के रणजीत को नाई, हरदोई के बाबूराम को मोची, कानपुर के शिवसेवक को लोहार, अवधेश को सुनार, रायबरेली के शाहिद को बढ़ई, इटावा के विजयपाल को राजमिस्त्री और लखनऊ के मनीष को धोबी के … Read more