samacharsecretary.com

अवैध अवकाश पर कड़ा एक्शन: नगर निगम ने कसी लगाम, दो अधिकारी निलंबित

भिलाई नगर. भिलाई नगर निगम क्षेत्र में जनगणना के कार्य की शुरुआत 1 मई से शुरू होने वाली है इसके पूर्व जनगणना प्रगणकों का प्रशिक्षण 10 अप्रैल को होने वाला है। नगर निगम के आयुक्त ने इस कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं बिना बताए अब कोई भी अधिकारी कर्मचारी अवकाश में नहीं जा सकते। जनगणना के प्रथम चरण में मकानों की सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य माह 1 मई से 30 मई के मध्य किया जायेगा जिसका प्रशिक्षण 10 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। नगर निगम भिलाई के समस्त अधिकारी, कर्मचारी बिना अनुमति के अवकाश पर नहीं जाएंगे एवं मुख्यालय नही छोड़ेंगे। कॉलोनी के अनुमोदन में खेला टाउन प्लानिंग राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक स्तर के दो अधिकारियों को राज्य शासन ने निलंबित करने का आदेश दिया है। इन अफसरों पर एक कॉलोनी के अनुमोदन के दौरान करोड़ों रूपये की गंभीर अनियमितता किए जाने का आरोप लगा है। एक अधिकारी सूर्यभान सिंह ठाकुर वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ हैं, वहीं दूसरी महिला अधिकारी उप संचालक के पद पर राजनांदगांव में सेवारत है। मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव शत्रुहन यादव ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि 15 जनवरी 2026 को नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा सत्यम परिवेश कॉलोनी के अनुमोदन अभिन्यास में करोड़ों रूपये का हेरफेर की गई है, जिस संबंध में राजनांदगांव में पदस्थ रहे संयुक्त संचालक सूर्यभान सिंह ठाकुर जो वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ है, कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रकरण में दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद जांच हेतु गठित की गई समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन में सूर्यभान ठाकुर एवं राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक कमला सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है, जिसके कारण निलंबित किए जाने का आदेश जारी किया है।

ऑनलाइन पोस्ट ने खोला राज: दुर्लभ गिलहरियों का शिकारी पुलिस के हत्थे चढ़ा

बीजापुर. जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। दुर्लभ वन्य जीव मालाबार जायंट स्क्विरल (गिलहरी) का शिकार करने वाले एक आरोपी को वन विभाग की टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया है। इस मामले की खास बात यह रही कि आरोपी ने शिकार का वीडियो खुद ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया था, जो उसके लिए ही सबूत बन गया। वन विभाग की राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने वायरल वीडियो को ट्रैक करते हुए आरोपी की पहचान की और बीजापुर जिले के तोड़मा क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि यह गिलहरी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति है, जिसका शिकार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। बता दें कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर दुर्लभ गिलहरी के शिकार का वीडियो अपलोड किया था, जिसमें करीब 9 मालाबार जायंट स्क्विरल (गिलहरी) नजर आ रहे हैं। वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीएम साय की दिल्ली यात्रा पूरी, नक्सलवाद पर केंद्र की कार्रवाई को कहा धन्यवाद

रायपुर. दिल्ली दौरे से लौटे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई. नक्सलवाद की समाप्ति के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. 4 दशकों के नक्सलवाद से बस्तर मुक्त हुआ है, वहां अब विकास कार्य किस तरह किए जाएंगे, इसकी जानकारी प्रधानमंत्री को दी. मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात हुई. वहीं असम के चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा की बहुत अच्छी स्थिति रहेगी. असम में सरकार बनेगी. भाजपा के लिए अच्छी स्थिति है. बता दें कि मुख्यमंत्री साय अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट सौंपा है. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है. 

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय मनेन्द्रगढ़/एमसीबी नगरीय निकायों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे प्लेसमेंट कर्मचारियों की पीड़ा अब शब्दों से आगे बढ़कर आंदोलन की दहलीज पर पहुंच गई है। लंबे समय से लंबित केन्द्रीय वेतनमान की मांग को लेकर कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ यादव के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कर्मचारियों की पीड़ा साफ झलकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा श्रम सुधार के तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए श्रम कोड लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और “समान कार्य के लिए समान वेतन” का अधिकार देना है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक इन प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे हजारों कर्मचारियों के मन में गहरी निराशा घर कर गई है। कर्मचारियों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में उनका वर्तमान वेतन उनके जीवन की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम नहीं है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च हर मोर्चे पर वे संघर्ष कर रहे हैं। सबसे अधिक पीड़ा उन्हें इस बात की है कि समान कार्य करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता बनी हुई है। महासंघ ने शासन से मांग की है कि नए श्रम कोड के अनुरूप केन्द्रीय दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सर्कुलर जारी किया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित इन कर्मचारियों को राहत मिल सके और उनके साथ हो रहे आर्थिक अन्याय का अंत हो सके। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पहले चरण में प्रदर्शन और ज्ञापन, दूसरे चरण में कार्य बहिष्कार और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर नगरीय निकायों की दैनिक सेवाओं पर पड़ना तय है। फिलहाल शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों के तेवर और उनके भीतर पनपता आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जहां सिर्फ मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण: पक्के घर से सम्मानजनक जीवन की शुरुआत

नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।  यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।

बालोद का औराटोला बना मिसाल: आत्मनिर्भरता से ‘लखपति दीदी ग्राम’ की पहचान

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।  जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।  इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं। कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है। बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है। प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे … Read more

बिलासपुर में खास मुलाकात: तेंदुलकर परिवार ने गांव पहुंचकर जानी लोगों की समस्याएं

लोरमी. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का परिवार शनिवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी पहुँचा। इस दौरान सचिन तेंदुलकर की पत्नी डॉ. अंजली तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक तेंदुलकर ने ग्रामीणों से मुलाकात की और क्षेत्र में संचालित शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मुंगेली जिले के घने जंगलों में बसे इस आदिवासी ग्राम में तेंदुलकर परिवार के पहुँचते ही उत्सुकता और खुशी का माहौल बन गया। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। इस एक दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा की जमीनी स्थिति को समझना रहा। क्षेत्र में गनियारी जनस्वास्थ्य समिति द्वारा निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित की जा रही हैं। तेंदुलकर परिवार इसी समिति के कार्यों का अवलोकन करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ यहाँ पहुँचा था। दौरे के दौरान डॉ. अंजली तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया। साथ ही उन्होंने बालवाड़ी पहुँचकर आदिवासी बच्चों से मुलाकात की और उनके रहन-सहन, खान-पान एवं वन क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को लेकर स्थानीय समिति के सदस्यों से विस्तार से चर्चा की। तेंदुलकर परिवार की इस यात्रा ने न केवल ग्रामीणों में उत्साह बढ़ाया, बल्कि क्षेत्र में चल रही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

उत्तर बस्तर कांकेर : विशेष लेख : कभी बंदूक थामकर हिंसा करने वाले माओवादी अब सीख रहे हुनर नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के शिक्षा पर भी विशेष ध्यान  उत्तर बस्तर कांकेर जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की मार्ग अपनाया  था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हुनर दिखाते हुए काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का ‘लोगो’, ग्राम पंचायतों के लिए बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग सहित अन्य सजावटी सामग्री तैयार की जा रही है, साथ ही कपड़े का थैला, कार्यालयों के लिए बस्ता भी तैयार किया जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुशल और दक्ष बनाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। यहां पर उन्हें काष्ठशिल्प के साथ ही इलेक्ट्रिशियन, ड्रायविंग, सिलाई, राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियॉ अब विभिन्न व्यवसाय में दक्ष हो रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के बाद आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकें। चौगेल कैंप बना कौशल प्रशिक्षण केंद्र वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। शासन द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर घोषित किया जा चुका है। हिंसा की राह त्यागकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को सरकार कौशल विकास का प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत भानुप्रतापपुर विकासखंड के पास ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैम्प में विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कभी बीएसएफ का कैम्प रहा चौगेल (मुल्ला) का यह कैम्प अब हुनर सिखाने वाला गढ़ बन चुका है। यहां पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठयक्रमों जैसे- काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग, राजमिस्त्री इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दी जा रही है। पढ़ने के लिए पाठ्य सामग्री, पुस्तकें, पेन-पेंसिल दिए गए हैं तथा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां भी दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां जैसे कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। चौगेल पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वाहन चालक के साथ ही कांकेर में घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प एवं असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने हेतु कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी, पशुधन विकास विभाग के साथ ‘बिहान’ के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है।  प्रशिक्षण उपरांत नियोजन करने वाला पहला जिला बना कांकेर पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण उपरांत नक्सली पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने वाला कांकेर पहला जिला बन चुका है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने हाथों से तीन नक्सली पीड़ित और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा, इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया, जहां उन्हें 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। इन्होंने चौगेल कैम्प में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया था तथा उन्हें निजी क्षेत्र में नियोजित किया गया है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया, वहीं प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।