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मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी को बस्तर 2.0 का विकास ब्लूप्रिंट सौंपा, दी आमंत्रण

बस्तर 2.0 की शुरुआत: मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी को दिया आमंत्रण, विकास का ब्लूप्रिंट सौंपा बस्तर के लिए 360° प्लान-टूरिज्म, स्टार्टअप, इंफ्रा और इनोवेशन पर फोकस पीएम का बस्तर दौरा बनेगा टर्निंग पॉइंट, बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात रायपुर /नई दिल्ली छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है। ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी। आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।  ‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है। पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है। नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

अब बिना साइन चलेगा काम: छत्तीसगढ़ सरकार ने लागू की ई-ऑफिस प्रणाली, प्रक्रिया हुई पूरी तरह ऑनलाइन

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने ई-ऑफिस प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम निर्णय लिया है. नई व्यवस्था के तहत अब शासकीय पत्राचार में कार्यालयीन ज्ञापन, पत्र और आदेश जैसे दस्तावेजों में केवल मूल प्रति पर ही सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर किए जाएंगे. जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पृष्ठांकित प्रति (एंडोर्समेंट) पर अब हस्ताक्षर करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है. इस फैसले से सरकारी कामकाज में अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करने के साथ-साथ कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद है. शासन का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा और ई-ऑफिस प्रणाली और अधिक प्रभावी बन सकेगी. सभी विभागों और कार्यालयों को इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं. छत्तीसगढ़ में अभी सभी सरकारी विभागों में ई-आफिस के जरिए काम किया जा रहा है। इससे एक अधिकारी के लिए दो जगहों पर हस्ताक्षर करना संभव नहीं है। इस तकनीकी दिक्कत को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सभी आनलाइन और आफलाइन दस्तावेजों में दो जगहों हस्ताक्षर की बाध्यता ही खत्म कर दी है। शासन का कहना है कि प्रतिलिपि सिर्फ सूचनात्मक होती है। इसलिए उसमें हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं। सिर्फ अधिकारी का नाम, पदनाम और कार्यालय का उल्लेश होना ही पर्याप्त है।

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द आर.टी.ई. प्रतिपूर्ति राशि दूसरे राज्यों से बेहतर  रायपुर छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान            शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति             छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ             वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई            यदि कोई निजी विद्यालय आर.टी.ई. के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

नक्सलवाद के अंधकार से बाहर निकली शर्मिला, स्वावलंबन की दिशा में बढ़ी कदम

नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई दंतेवाड़ा में लिख रही हैं बदलाव की इबारत रायपुर ​बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं। ​हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर ​          बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया। ​कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर ​        राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहाँ सिलाई का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे आधुनिक परिधान जैसे सूट और ब्लाउज सिलने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव लौटकर सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर आधुनिक खेती (टमाटर, मूली व भाजियाँ) कर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है। ​सुविधाओं ने बदला नजरिया          ​शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें पहली बार शासन की ओर से इतनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, ​पौष्टिक आहाररू कॉलेज में नियमित रूप से अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हुआ है। ​सक्रिय सहभागितारू बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। ​पारिवारिक प्रेरणा- शर्मिला की दीदी मुड़ो पोयामी (पूर्व नक्सल सदस्य) भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भरता की राह पर हैं। ​गाँव के विकास की उम्मीद ​         शिक्षा और कौशल की ताकत को समझने के बाद शर्मिला अब अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति भी सजग हैं। वे चाहती हैं कि उनके गाँव की कच्ची सड़कों और पेयजल की समस्याओं का जल्द निराकरण हो ताकि विकास की यह लहर सुदूर अंचलों तक पहुँचे। ​शर्मिला पोयामी का यह संघर्षपूर्ण सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की एक सशक्त पहचान बन गया है।

महिलाओं को बड़ी राहत: महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त ट्रांसफर, लाखों लाभार्थियों को फायदा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाओं के लिए अच्छी खबर है. महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी कर दी गई है. इस योजना के तहत पूरे राज्य में 68.48 लाख से ज्यादा महिलाओं के बैंक खातों में ₹641.62 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं.  खास बात यह है कि बस्तर संभाग के दूरदराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रही 'नियद नेल्ला नार' योजना के तहत आने वाले गांवों की 7,773 महिलाओं को भी इस किस्त का लाभ मिला है. महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी छत्तीसगढ़ सरकार ने महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी कर दी है. इस योजना के तहत, 68.48 लाख महिलाओं के खातों में DBT के माध्यम से ₹641.62 करोड़ की राशि हस्तांतरित की गई है. प्रत्येक महिला को ₹1,000 की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है. आपके खाते में पैसे आए है या नहीं? नीचे दिए गए आसान तरीकों से चेक कर सकते हैं.  1,000 रुपये की राशि यह योजना मार्च 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने और महिलाओं के कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. तब से लाभार्थी महिलाओं को हर महीने नियमित रूप से ₹1,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हो रही है. इस योजना के तहत अब तक लाभार्थी महिलाओं को कुल ₹16,881 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी है. KYC सत्यापन की प्रक्रिया इस योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के लिए KYC सत्यापन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है. KYC अपडेट करने की यह प्रक्रिया 3 अप्रैल को E-Governance Services India Limited के माध्यम से शुरू की गई थी और 30 जून तक जारी रहेगी. जल्द से जल्द पूरा करवा लें e-KYC महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की महिला लाभार्थियों विशेष रूप से उन लाभार्थियों जिन्होंने अभी तक अपना e-KYC पूरा नहीं किया है से अपील की है कि वे इसे तत्काल पूरा करवा लें, ताकि इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता बिना किसी रुकावट के सीधे उनके खातों में जमा की जा सके. इन महिलाओं को नहीं मिली 26वीं किस्त महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के तहत लाभार्थियों की कुल संख्या 6,894,633 है. इनमें से उन लाभार्थियों को छोड़कर जिनका KYC सत्यापन अभी लंबित है, 26वीं किस्त 6,848,899 लाभार्थियों को वितरित कर दी गई है. ऐसे चेक करें आपके खाते में महतारी वंदन योजना के तहत ₹1,000 की राशि  आई है या नहीं इसके चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट mahtarivandan.cgstate.gov.in पर जाएं. इसके बाद Application and Payment Status पर क्लिक करें, फिर अपना मोबाइल नंबर या आधार नंबर और साथ में कैप्चा डालें और Submit पर क्लिक करें.  इससे बाद आपको जानकारी मिल जाएगी.

महिलाओं के मोबाइल में बजी खुशियों की घंटी, महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी

महिलाओं के मोबाईल में बजी खुशियों की घंटी,महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी 68.48 लाख महिलाओं के खाते में ट्रांसफर हुए 641.62 करोड़ रूपए  हितग्राही महिलाओं को अब तक 16,240 करोड़ की मदद रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक  सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त की राशि आज जारी की गई। इसके जारी होते ही हितग्राही महिलाओं के मोबाईल में खुशियों के नोटिफिकेशन की घंटी बज उठी। इस योजना के तहत राज्य की 68 लाख 48 हजार 899 महिलाओं को 641 करोड़ 62 लाख 92 हजार रूपए उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। लाभान्वित हितग्राहियों में 7773 महिलाएं नियद नेल्ला नार के योजना के गांवों की रहने वाली है।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए और महिलाओं की बेहतरी के लिए यह योजना मार्च 2024 में शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हर महीने हितग्राही महिलाओं को एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि नियमित रूप से दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक हितग्राही महिलाओं को 16,881 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।  गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं के केवाईसी पूरा किए जाने का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। केवाईसी के अद्यतन की यह प्रक्रिया ई-गवर्नेस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 3 अप्रैल से शुरू की गई है, जो 30 जून तक चलेगी। व्हीएलई द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत भवन में तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड कार्यालय में केवाईसी अद्यतन का कार्य हो रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की ऐसी हितग्राही महिलाओं से जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है, उनसे तत्काल ई-केवाईसी कराने की अपील की है ताकि योजना की सहायता राशि बिना किसी व्यवधान के उनके खाते में पहुंच सके।  महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या 68,94,633 है, जिसमें से केवाईसी हेतु लंबित हितग्राहियों को छोड़कर 68,48,899 हितग्राहियों को 26वीं किश्त का भुगतान किया गया है।

9 नई बायपास सड़कें बनाए जाने से होगा ट्रैफिक का दबाव कम, तेज होगा यातायात

ट्रैफिक का दबाव कम करने और तेज यातायात के लिए बनाई जाएंगी 9 बायपास सड़कें  लोक निर्माण विभाग ने मंजूर किए 448 करोड़ रायगढ़ जिले में तीन, धमतरी और बलौदाबाजार में बनेंगे दो-दो बायपास रायपुर मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने तथा तेज व सुव्यवस्थित यातायात के लिए लोक निर्माण विभाग ने हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में नौ बायपास सड़कों के लिए कुल 448 करोड़ 13 लाख रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने स्थानीय लोगों की मांगों व जरूरतों को देखते हुए इन बायपास सड़कों के लिए प्राथमिकता से राशि मंजूर करने के निर्देश दिए थे। लोक निर्माण विभाग द्वारा रायगढ़ जिले में तमनार बायपास मार्ग के लिए 152 करोड़ 17 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से 6 किमी बायपास सड़क का निर्माण किया जाएगा। विभाग ने रायगढ़ शहर में रिंग रोड (बायपास मार्ग) के लिए 70 करोड़ 47 लाख रुपए मंजूर किए हैं। खरसिया के बायपास क्रमांक-3 कबीर चौक से डभरा रोड तक 2 किमी सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए भी 7 करोड़ 22 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। विभाग ने धमतरी जिले में 4 किमी लंबाई के भखारा बायपास के लिए 14 करोड़ 94 लाख रुपए तथा 1.50 किमी लंबाई के नारी बायपास मार्ग के लिए 7 करोड़ 97 लाख रुपए मंजूर किए हैं। बलौदाबाजार में लटुवा, पनगांव होते हुए 15 किमी लंबे बलौदाबाजार बायपास सड़क के लिए 88 करोड़ 68 लाख रुपए एवं 7 किमी लंबे रिसदा बायपास मार्ग के लिए 20 करोड़ 99 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।  लोक निर्माण विभाग ने बिलासपुर में 13.40 किमी कोनी-मोपका फोरलेन बायपास मार्ग के लिए 82 करोड़ 80 लाख रुपए तथा बेमेतरा जिले में 1.20 किमी कांक्रीटीकृत छिरहा बायपास सड़क के लिए 2 करोड़ 89 लाख रुपए की भी मंजूरी दी है। “राज्य शासन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध, तेज और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। ट्रैफिक का दबाव कम करने बायपास सड़कों, पुलों और ओवरब्रिजों का निर्माण प्राथमिकता से किया जा रहा है। इससे आवागमन और अधिक स्मूथ, तेज एवं व्यवस्थित होगा। हम प्रदेश के समग्र विकास के लिए आधुनिक और मजबूत सड़क अधोसंरचना लगातार विकसित कर रहे हैं।” – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

बर्ड फ्लू की आशंका से हड़कंप: बिलासपुर में AIIMS विशेषज्ञ तैनात, आसपास के गांवों में जांच अभियान तेज

बिलासपुर. जिले में बर्ड फ्लू के मामले को अब केंद्र सरकार ने गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है. इसी क्रम में एम्स के चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की केंद्रीय टीम सोमवार को बिलासपुर पहुंची और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. टीम ने सबसे पहले कोनी स्थित कुक्कुट पालन केंद्र का दौरा किया, जहां बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी. इसके साथ ही आसपास बनाए गए कंटेनमेंट जोन का भी बारीकी से निरीक्षण कर जमीनी हालात का आकलन किया. कर्मचारियों से पूछताछ, मानव संक्रमण पर नजर केंद्रीय टीम ने पोल्ट्री फार्म के कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच की. बर्ड फ्लू के बाद किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण तो नहीं हैं, इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, टीम जरूरत पड़ने पर संदिग्ध लोगों के सैंपल भी ले सकती है, ताकि किसी भी संभावित मानव संक्रमण को समय रहते रोका जा सके. मंगलवार को टीम प्रभावित पोल्ट्री केंद्र के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों अकलतरी, खैरा, नगोई समेत अन्य क्षेत्रों का दौरा करेगी. यहां ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर लोगों की मेडिकल जांच और सैंपलिंग भी की जाएगी. इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का भी जायजा लिया जाएगा. रोकथाम उपायों की होगी गहन समीक्षा केंद्रीय टीम यह भी जांच करेगी कि संक्रमण फैलने के बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम कितने प्रभावी रहे. इसमें संक्रमित पक्षियों को नष्ट करने की प्रक्रिया, शवों के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था, क्षेत्र में सैनिटाइजेशन और डिसइंफेक्शन, सर्विलांस और मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की जा रही है. विशेषज्ञ यह भी तय करेंगे कि भविष्य में ऐसे संक्रमण को रोकने के लिए किन अतिरिक्त उपायों की जरूरत है. पोल्ट्री फार्मों में बायो-सिक्योरिटी, नियमित स्वास्थ्य जांच और सतत निगरानी को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं.

मप्र जल संसाधन विभाग में तबादलों की लहर: शंकर ठाकुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, कई मुख्य अभियंता बदले

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। इस संबंध में जल संसाधन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश में प्रमुख अभियंता से लेकर कई मुख्य अभियंताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जारी आदेश के अनुसार, शंकर ठाकुर (मुख्य अभियंता, सिविल) को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग का प्रभार सौंपा गया है। साथ ही 6 मुख्य अभियंताओं की नई पदस्थापना की गई है। इन मुख्य अभियंताओं को मिली नई पोस्टिंग मक्सी कुजूर को मुख्य अभियंता, महानदी परियोजना, रायपुर बनाया गया है। शंकर राव सोने को मुख्य अभियंता, मिनीमाता (हसदेव) बांगो परियोजना, बिलासपुर की जिम्मेदारी दी है। जितेन्द्र कुमार नेताम को मुख्य अभियंता, हसदेव कछार, बिलासपुर पदस्थ किया गया है। अलेक्जेंडर ग्राहम को मुख्य अभियंता, गोदावरी कछार, जगदलपुर बनाया गया है। अनिल कुमार खलको को मुख्य अभियंता, हसदेव गंगा कछार, अंबिकापुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सतीश कुमार टीकम को मुख्य अभियंता, महानदी-गोदावरी कछार, रायपुर पदस्थ किया गया है।

छत्तीसगढ़ की भूमि में भगवान श्रीराम का वास, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का उद्घाटन

छत्तीसगढ़ की धरती के कण-कण में बसे हैं भगवान श्रीराम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जशपुर जिले के कुनकुरी के सालियाटोली में आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव  में शामिल हुए।  इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय उपस्थित थीं।  मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का  संदेश दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पावन अवसर पर व्यासपीठ पर विराजमान परम पूज्य संत चिन्मयानंद बापूजी को सादर नमन करते हुए कहा कि आज कुनकुरी की यह पावन धरा धन्य हो गई है। उन्होंने कहा कि सालियाटोली का यह स्टेडियम श्रीराम कथा के रसपान से साक्षात श्रीराम का धाम बन गया है और चारों ओर ‘जय श्रीराम’ की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम का छत्तीसगढ़ से अत्यंत गहरा संबंध है। यह माता कौशल्या की पावन धरती है और भगवान श्रीराम का ननिहाल है, जहाँ वे भांजे के रूप में घर-घर में पूजे जाते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का अधिकांश समय दंडकारण्य क्षेत्र एवं छत्तीसगढ़ के जंगलों में बिताया, जिससे यहाँ के कण-कण में राम की उपस्थिति अनुभव होती है। वनवास काल से जुड़े सीता रसोई जैसे अनेक पवित्र स्थल आज भी इस भूमि की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम उस कालखंड में जीवन जी रहे हैं, जब अयोध्या में भगवान श्रीराम की पुनः प्रतिष्ठा हुई है। श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा ने पूरे भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दृढ़ संकल्प से संभव हो सका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प लिया था कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को श्रीरामलला के दर्शन कराए जाएंगे। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने गठन के साथ ही रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की, जिसके माध्यम से अब तक लगभग 42 हजार श्रद्धालु अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय जनमानस के कण-कण में विराजमान हैं। जांजगीर क्षेत्र में रामभक्ति का विशेष स्वरूप देखने को मिलता है, जहाँ रामनामी समुदाय के लोग अपने रोम-रोम में राम का नाम बसाए हुए हैं और अपनी आस्था के प्रतीक स्वरूप अपने शरीर पर ‘राम-राम’ का गोदना अंकित कराते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से 300 मीट्रिक टन सुगंधित चावल और 100 टन से अधिक हरी सब्जियां अयोध्या भेजी गई थीं। यह विशेष भोग ननिहाल के प्रेम और 500 वर्षों के संघर्ष के पश्चात प्रभु की स्थापना के उपलक्ष्य में समर्पित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ से गई डॉक्टरों की टीम एवं मेडिकल स्टाफ ने अयोध्या में रामभक्तों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने अवैध धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया है, जिसके सख्त प्रावधानों के माध्यम से इस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, श्रीमती संयोगिता सिंह जूदेव, सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, सुनील अग्रवाल, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे। 2 अप्रैल से प्रारंभ हुई श्रीराम कथा की भक्तिधारा 8 अप्रैल तक रहेगी प्रवाहित परम पूजनीय संत चिन्मयानंद बापूजी के श्रीमुख से 2 अप्रैल से प्रारंभ हुई श्रीराम कथा की पावन भक्तिधारा 8 अप्रैल तक निरंतर प्रवाहित होती रहेगी। इस दिव्य आयोजन में दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। श्रीराम कथा महोत्सव के आयोजन से कुनकुरी सहित आसपास के समूचे क्षेत्र में गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया है। श्रद्धालुजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ कथा श्रवण कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।