samacharsecretary.com

22 मार्च को बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का आयोजन, जगदलपुर में

बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन  22 मार्च को जगदलपुर में ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम होगी आयोजन अलग-अलग श्रेणियों में कुल 25 लाख रूपए तक का पुरस्कार  रायपुर  छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर लाने के उद्देश्य से “बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह आयोजन राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। 22 मार्च को आयोजित होने वाली यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से प्रारंभ होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचेगी। यह रूट प्रतिभागियों को बस्तर के प्राकृतिक और ऐतिहासिक सौंदर्य से रूबरू कराएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम के साथ राज्य की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा। मैराथन में 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर जैसी अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, जिसमें देशभर से धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। विजेता प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रूपए तक का आकर्षक पुरस्कार रखा गया है। साथ ही प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और रनिंग फोटोज़ दिए जाएंगे। कार्यक्रम में ज़ुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसी गतिविधियां भी होंगी। प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाईट https://www.bastarheritage.run/registration एवं https://www.bastarheritage.run/registration  का अवलोकन कर सकते हैं।

प्रदेशवासियों को चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) की बधाई, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) की दी शुभकामनाएं भगवान झूलेलाल की जयंती पर सिंधी समुदाय को नववर्ष की बधाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल जी की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर सिंधी समाज को चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान झूलेलाल जी समरसता, सहिष्णुता और जल संरक्षण के प्रतीक हैं। उनकी शिक्षाएँ आज भी मानवता को जोड़ने का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) सिंधी समाज का प्रमुख सांस्कृतिक पर्व है, जो न केवल झूलेलाल जी की जयंती के रूप में, बल्कि नववर्ष के रूप में भी पूरे उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की और कहा कि ऐसे पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर किया नमन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर किया नमन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि (20 मार्च) पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी साहस, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतीक हैं। उनका नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अमर वीरांगनाओं में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का डटकर विरोध किया। उन्होंने अपने राज्य और मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष किया और स्वाधीनता के लिए बलिदान दिया।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी अवंती बाई नारी शक्ति और सामाजिक चेतना का प्रतीक थीं। उन्होंने समाज को जागरूक करने का कार्य किया और न केवल महिलाओं बल्कि पूरे राष्ट्र को संघर्ष की राह दिखाई। उनकी वीरता, बलिदान और नेतृत्व क्षमता भारत के इतिहास में नारी सशक्तिकरण का अमिट उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत का इतिहास वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। रानी अवंती बाई लोधी जैसी महान नारियों की कहानियाँ हमें आज भी राष्ट्रभक्ति, त्याग और साहस की प्रेरणा देती हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि आत्मसम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे रानी अवंती बाई को लोधी के आदर्शों से प्रेरणा लें और उनके बलिदान को स्मरण कर देश और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।

सुनियोजित शहरी विकास और अवैध प्लॉटिंग पर रोक की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 सुनियोजित शहरी विकास और अवैध प्लॉटिंग पर रोक की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय  छत्तीसगढ़ में सुनियोजित शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा -वित्त मंत्री ओपी चौधरी रायपुर   छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है। सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी  आवास एवं पर्यावरण विभाग के मुख्यतः रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों पर ही निर्भर है। प्रदेश में बढ़ती आर्थिक विकास के फलस्वरूप, शहरों के व्यवस्थित विकास की आवश्यकता आज और बढ़ गई है। मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से नगर विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। अहमदाबाद जैसे कई प्रमुख शहरों में रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाएं, नगर विकास योजना बनाकर, योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई हैं। वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी रायपुर मास्टर प्लान के अंतर्गत एम.आर.-43 मार्ग का निर्माण नगर विकास योजना के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है। संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के दायरे का विस्तार किया जा रहा है । नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरणों के अलावा राज्य शासन के अभिकरणों, स्थानीय नगर निकाय  और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा भी नगर विकास योजना क्रियान्वित की जा सकेगी। इससे योजनाओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय विकास को भी नई गति मिलेगी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना, अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाना और उद्योग व आवास के लिए व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी परिदृश्य को अधिक सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में सुनियोजित और संतुलित शहरी विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक था। इस संशोधन के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाकर विकास कार्यों को गति दी जाएगी, जिससे शहरों में बेहतर अधोसंरचना, व्यवस्थित आवास और उद्योगों के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप विकसित करना है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सके।

आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय

वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा से पारित आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नाम अब छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल -वित्त मंत्री ओ पी चौधरी रायपुर राज्य में आवासीय और शहरी अधोसंरचना विकास को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह संशोधन द्वारा अब मंडल का नाम छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल किया गया है एवं मंडल की भूमिका को विस्तार देते हुए उसे एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सदन में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का गठन मूलतः मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 के तहत किया गया था। राज्य गठन के बाद यह संस्था प्रदेश में आवासीय योजनाओं, नगरीय अधोसंरचना और किफायती आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में मंडल द्वारा लगभग 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य शासन द्वारा 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। मंत्री चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मंडल का दायरा बढ़ाकर उसे एक आधुनिक एवं बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे शहरीकरण को सुव्यवस्थित रूप मिलेगा और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “संकल्प से सिद्धि” के मंत्र के साथ प्रदेश में योजनाबद्ध शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले समय में एक सशक्त और विकसित राज्य के रूप में उभरेगा।

‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम होगी आयोजन

रायपुर ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम होगी आयोजन छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर लाने के उद्देश्य से “बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह आयोजन राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। 22 मार्च को आयोजित होने वाली यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से प्रारंभ होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचेगी। यह रूट प्रतिभागियों को बस्तर के प्राकृतिक और ऐतिहासिक सौंदर्य से रूबरू कराएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम के साथ राज्य की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा। मैराथन में 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर जैसी अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, जिसमें देशभर से धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। विजेता प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रूपए तक का आकर्षक पुरस्कार रखा गया है। साथ ही प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और रनिंग फोटोज़ दिए जाएंगे। कार्यक्रम में ज़ुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसी गतिविधियां भी होंगी। प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाईट  

बिहान योजना से फुलकुंवर बनीं आत्मनिर्भर उद्यमी

रायपुर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खडगवां ब्लॉक के ग्राम बेलबहरा की रहने वाली फुलकुंवर की कहानी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। एक समय था जब फुलकुंवर एक साधारण गृहिणी के रूप में अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही थीं और उनके पति राम विशाल खेती-किसानी के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार की मासिक आमदनी लगभग 40 से 50 हजार रुपए के बीच थी, लेकिन बढ़ती जरूरतों के बीच यह आय पर्याप्त नहीं थी और परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। जीवन में बदलाव की शुरुआत उस दिन हुई जब फुलकुंवर ने “जय माँ दुर्गा स्व सहायता समूह” की बैठक में भाग लिया। इस दौरान क्लस्टर “अटल महिला संकुल संगठन देवाड़ाड” के अंतर्गत आयोजित बैठक में सीआरपी पूनम साहू द्वारा बिहान योजना की जानकारी दी गई। इस योजना ने फुल कुवर के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने समूह से जुड़कर बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण प्राप्त किया और उस राशि का उपयोग सेंट्रिंग प्लेट खरीदने में किया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे पक्के मकानों में सेंट्रिंग प्लेट किराये पर देना शुरू किया। उनका यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। धीरे-धीरे उनकी आय में जबरदस्त वृद्धि होने लगी और आज फुलकुंवर सालाना 1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इस आय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बन गई हैं। फुल कुवर की सफलता के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, स्व-सहायता समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी और बिहान कार्यालय से समय-समय पर मार्गदर्शन लेना प्रमुख कारक रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सही दिशा और अवसर मिले तो कोई भी महिला अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

आबकारी आरक्षक के 200 पदों पर भर्ती का अंतिम चयन परिणाम जारी

रायपुर आबकारी विभाग के अंतर्गत आबकारी आरक्षक के रिक्त 200 पदों की पूर्ति हेतु सीधी भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल रायपुर (व्यापम) द्वारा 27 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उक्त भर्ती परीक्षा का अंतिम उत्तर तथा परीक्षा परिणाम व्यापम की वेबसाइट पर 19 सितम्बर 2025 को प्रदर्शित किया गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग को उपलब्ध कराये गये परीक्षा परिणाम की प्राप्तांक सूची एवं परीक्षा से संबंधित अन्य अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन में उल्लेखित वर्गवार, प्रवर्गवार रिक्तियों की संख्या के लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को मेरिट क्रम में चिन्हांकित किया गया। उनके मूल प्रमाण पत्रों (दस्तावेजों) का सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की जॉच के लिए बुलाया गया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी सत्यापन में अनुपस्थित एवं शारीरिक मापदण्ड में अपात्र पाये गये कुल 128 अभ्यर्थियों के नामों पर चयन प्रक्रिया में विचार नहीं करने संबंधी 12 मार्च 2026 को पत्र  जारी किया गया। शेष पात्र अभ्यर्थियों में से व्यापम द्वारा जारी मेरिट क्रम के आधार पर वर्गवार, प्रवर्गवार आबकारी आरक्षक पद के कुल 200 पदों के विरूद्ध 200 पदों पर अभ्यर्थियों की उपलब्धता अनुसार चयन सूची तथा 43 अनुपूरक (प्रतीक्षा) सूची जारी गई है।  अधिकारियों ने बताया कि आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में व्यापम द्वारा जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग में दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड में पात्र पाये गये अभ्यर्थियों में से चयन हेतु उपयुक्त पाये गये अभ्यर्थियों की सूची मंडल की वेबसाईट  https://vyapamcg.cgstate.gov.in/ पर अपलोड कर दी गई है। 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग हेतु हुए समझौते

रायपुर उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे उज्बेकिस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी आगामी शैक्षणिक वर्ष से कृषि के क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान हेतु छत्तीसगढ़ आएंगे और छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु उज्बेकिस्तान जाएंगे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर तथा उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए हैं। उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधि मंडल के विगत दिनों उज्बेकिस्तान प्रवास के दौरान ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी, समरकंद स्टेट वेटेरिनरी, तेरमेज़ इंस्टीट्यूट तथा देनोव इंस्टीट्यूट के बीच शिक्षा, अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता विकास आदि क्षेत्रों में सहयोग हेतु अनेक समझौते हस्ताक्षरित किए गए। इन समझौतों से छात्र और संकाय विनिमय कार्यक्रमों संयुक्त अनुसंधान पहलों, शैक्षणिक गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैश्विक भागीदारी बढ़ेगी।  कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जिनमें चांवल अनुसंधान, औषधीय फसलों की खेती, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता प्रमुख हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उज्बेकिस्तान में कृषि आधारित उद्योगों के विकास में भारतीय किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु काफी रूचि दिखाई। डॉ. चंदेल ने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान जाते हैं उसी प्रकार भविष्य में उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा प्राप्त करने लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार के परिप्रेक्ष्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में 28 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर गया था। यह भ्रमण भारतीय एवं उज्बेक संस्थानों के बीच शैक्षणिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा कृषि विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, संरक्षित खेती, कृषि उद्यमिता एवं प्रमुख फसलों की मूल्य श्रृंखला विकास में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने हेतु किया गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं शासकीय प्रतिनिधियों से भेंट कर संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसंधान सहयोग एवं संस्थागत साझेदारी के अवसरों की पहचान की। प्रतिनिधि मंडल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. हुलास पाठक भी शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था साथ ही भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी का निर्माण करना था। यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उजबेकिस्तान के प्रमुख विश्वविद्यालयों अनुसंधान संस्थानों और नीति संगठनों के साथ जुड़कर कृषि विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी कृषि उद्यमिता संरक्षित खेती और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों का पता लगाया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पाँच प्रमुख सस्थानो, तेरमेज़ पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट, डेनोव इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एक पेडागोजी, ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी और समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में प्रत्यायन और रेटिंग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के साथ भी एक विस्तृत बैठक की। इस यात्रा ने उज्बेकिस्तान की तेजी से विस्तार कर रही उच्च शिक्षा प्रणाली के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की और कौशल विकास, संकाय प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण समाधानों में सहयोग के नए रास्ते खोले। तेरमेज पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट में एक एमओयू को औपचारिक रूप दिया गया और शैक्षणिक सहयोग तथा पाठयक्रम विकास पर चर्चा हुई। डेनोव इंस्टीट््यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडागोजी में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उच्च्य स्तरीय बातचीत में भाग लिया जिसमें उद्यमिता शिक्षा जैव प्रौद्योगिकी और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया गया। उच्च शिक्षा में उनके शैक्षणिक योगदान और नेतृत्व के सम्मान में डॉ गिरीश चंदेल और प्रो हुलास पाठक को उनकी यात्रा के दौरान विजिटिंग प्रोफेसरशिप सम्मान से सम्मानित किया गया। ताशकंद स्टेट एथेरियन यूनिवर्सिटी में कृषि जैव प्रौद्योगिकी खारा प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास में सहयोग पर बर्चा हुई, जिसके बाद एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी के दौरे से उन्नत स्मार्ट प्रयोगशाला सुविधाओं और किसान-समूह-आधारित मूल्य श्रृंखला मॉडलों विशेष रूप से कपास और डेयरी क्षेत्रों में देखने का अवसर मिला।  प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के इन अभिनव दृष्टिकोणों की सराहना की। समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रतिनिधिमंडल ने चांवल अनुसंधान औषधीय पौधों और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान प्रदान के अवसरों पर चर्चा की। इस दौरे में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया जिसमें इनक्यूबेशन के अवसर कृषि आधारित उद्योगों का विकास और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना शामिल है।  हल्दी, अदरक, लहसुन, लेवेंडर और औषधीय पौधों जैसी फसलों के लिए मूल्य श्रृंखला विकास पर विशेष चर्चा हुई साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त ब्रांडिंग पहलों की संभावनाओं पर भी बात हुई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में भारतीय दूतावास के साथ भी बातचीत की जहाँ राजदूत सु स्मिता पंत के साथ की गई चर्चा कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। प्रतिनिधि मंडल ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में केसर लैवेंडर, हींग, बेरी और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों की पहचान की। इस दौरे ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के लिए एक मजबूत नींव रखी है, जो सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।  

जगदलपुर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देशभर के जनजातीय खिलाड़ी सात खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इसमें देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3000 खिलाड़ी भागीदारी करेंगे। आयोजन के दौरान पुरूष एवं महिला वर्गों में राजधानी रायपुर में पांच खेलों तथा बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में एक-एक खेल होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के कुल 164 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरूष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। तीनों शहरों में नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए चिन्हांकित खेल स्थलों व मैदानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने का काम जोरों पर है। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय फुटबॉल मैदान और स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में फुटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी की स्पर्धाएं होंगी। वहीं रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वीमिग पूल में तैराकी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग संचालनालय के ओपन मैदान में तीरंदाजी तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ओपन ग्राउंड में वेट-लिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं संपन्न होंगी। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देश के दो परंपरागत खेलों कबड्डी और मलखंब को भी डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है। कबड्डी की स्पर्धाएं रायपुर के सरदार बलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में होगा।