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नया छत्तीसगढ़, नई उम्मीदें: पर्यटन से गांवों की तस्वीर बदलने वाले नायकों की अनकही कहानी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। छत्तीसगढ़ का बस्तर, पर्यटन के नक्शे पर अपनी पहचान, संस्कृति और प्रकृति की अनुपम छटा वाले पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जा रहा है। वास्तव में बस्तर का वन क्षेत्र बेहद निराला है। प्रकृति की हरियाली और स्वच्छता पर्यटकों को आकर्षित करता है। धीरे-धीरे बस्तर न केवल विकास की धारा से जुड़ रहा है बल्कि पयर्टन के हिसाब से भी तेजी से बदल रहा है। यहां का खूबसूरत इलाका अपनी अनोखी आदिवासी संस्कृति, घने जंगलों की छटा सबका ध्यान खींच रहा है। साथ ही, यहां के लोगों का भावपूर्ण और अतिथि सत्कार भी दुनिया भर के पर्यटकों को लुभा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार  छत्तीसगढ़ अब अपनी माटी की खुशबू, समृद्ध जनजातीय परंपराओं और गांवों के नैसर्गिक सौंदर्य के दम पर देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर छाने को तैयार है। राज्य सरकार ने पर्यटन के विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए नई औद्योगिक नीति (2024-2030) में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार की है। इसी कड़ी में अब ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है। इन तीनों निर्णयों से गांवों में रोजगार, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण का नया अध्याय शुरू होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का यह त्रिआयामी मॉडल पर्यटन को स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करेगा। विश्व प्रसिद्ध बस्तर का दशहरा  बारिश का मौसम बीतने के बाद से ही यहां हरे-भरे जंगल, पहाड़ और उनके उफनते पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। इसलिए आज की तारीख में बस्तर भी देश के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में एक साबित हो रहा है। हालांकि बस्तर का दशहरा बहुत पहले से प्रसिद्ध है, 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर के दशहरा में कुछ खास होने वाला है, लेकिन हाल के दिनों में इस अवसर पर जुटने वाले सैलानियों की संख्या में खासा इजाफा दर्ज किया गया है। इस वर्ष भी यहां का दशहरा देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। नवरात्रि और दशहरा के अलावा यहां दीपावली पर भी दुनिया भर से भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। बस्तर के सहज जीवन से वैश्विक पहचान तक बस्तर के बालक ‘चेन्दरू मंडावी’ की बाघ ‘टेंबू’ के साथ दोस्ती ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के सहज ग्रामीण जीवन का डंका बजाया था।उसी नाम से राज्य सरकार ने ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम 2025’ लागू किया गया हैजो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होगा। इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में लगे जमीनी नायकों या संस्थाओं को 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय ज्यूरी इसका चयन करेगी और विजेता को राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित कर उन पर एक सचित्र स्मारिका जारी की जाएगी। बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'चेन्दरू' राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत की गई है। यह पुरस्कार बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्होंने स्वीडिश फिल्म 'जंगल सागा' से अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की थी। गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं।  होमस्टे से पर्यटक गांव की जीवनशैली जानेंगे  पुरस्कार और प्रोत्साहन के साथ-साथ राज्य सरकार की होमस्टे नीति इस पूरे ढांचे को व्यावहारिक धरातल प्रदान कर रही है। अब पर्यटक महंगे होटलों की बजाय गांवों में पारंपरिक घरों का अनुभव कर सकेंगे। पर्यटक गांव के ही घरों में रुकेंगे। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। पर्यटकों को ग्रामीणों के घरों में ठहरने, उनका पारंपरिक भोजन करने, चारपाई का उपयोग करने, खेत-खलिहान घूमने और कुएं का पानी आदि देखने-अनुभव करने का अवसर मिलता है। होमस्टे के जरिए पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा  होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से ग्रामीण, जनजातीय और पर्यटन क्षेत्रों के परिवारों को अपने  घरों को पर्यटन सुविधा में बदलकर अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय खान-पान, कला, परंपरा, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा नए होमस्टे की स्थापना तथा मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता के साथ संचालकों को आतिथ्य, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी इस नीति में किया गया है। इससे मिलने वाला पैसा सीधे ग्रामीण परिवार, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों की जेब में जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा। इस नीति से बस्तर और सरगुजा के अंचलों से लेकर मैदानी गांवों तक, होमस्टे के जरिए पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर समृद्धि के नए द्वार खोले गए छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन, मनोरंजन और अन्य सामाजिक सेवा सेक्टर को विशेष रूप से शामिल किया गया है। पर्यटन परियोजनाओं को सामान्य उद्योगों की तरह ही न्यूनतम पूंजी निवेश पर विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएं दी जा रही … Read more

‘निगम के अफसर रोज सुबह फील्ड में उतरें, अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश’

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने भिलाई नगर निगम के अधिकारियों को नागरिकों को समय पर सेवाएं देने और शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिक कस्टमर हैं, इसलिए सेवाओं में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को रोज सुबह फील्ड निरीक्षण करने और दीपावली से पहले शहर को कचरामुक्त बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत चल रहे अधूरे निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताई। प्रमुख सचिव  बोरा ने नवा रायपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में भिलाई नगर निगम में लंबित कार्यों और नागरिक सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कार्यप्रणाली में सुधार लाने और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश क्षीरसागर, सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल और भिलाई नगर निगम की आयुक्त सु सुरुचि सिंह भी बैठक में मौजूद थीं। 'रोज सुबह निरीक्षण कर भेजें रिपोर्ट' प्रमुख सचिव ने जोन कमिश्नरों, उपायुक्तों और अपर आयुक्तों को प्रतिदिन सुबह मॉर्निंग विजिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने क्षेत्रों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर कमियों और कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट निर्धारित ग्रुप में साझा करें, ताकि समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। 'दीपावली से पहले शहर को करें कचरामुक्त' स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बोरा ने सभी जोन कमिश्नरों को दीपावली से पहले भिलाई को कचरामुक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत कचरा प्रबंधन, प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना और संचालन से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने कचरे के उचित प्रसंस्करण और स्वच्छता व्यवस्था की लगातार निगरानी पर भी जोर दिया। 'अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश'  बोरा ने 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की धीमी प्रगति पर प्रमुख नाराजगी जताई। उन्होंने लंबित निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने, तकनीकी समस्याओं का तत्काल निराकरण करने और नियमित निगरानी के जरिए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने को कहा। 'आवास निर्माण में बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों की सुविधाओं का ध्यान रखें' प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 की समीक्षा के दौरान  बोरा ने आवास निर्माण में बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने आवासों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सभी के अनुकूल बनाने तथा पात्र हितग्राहियों के लंबित प्रकरणों का जल्द निराकरण करने को कहा। उन्होंने ई-बस सेवा योजना शुरू करने की तैयारियों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। जल संरक्षण और राजस्व वसूली पर जोर प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में जल प्रदाय, जल संरक्षण, मिशन अमृत और तालाबों के रखरखाव से जुड़े कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  बोरा ने संपत्ति कर वसूली, ग्रीन बॉन्ड, बिजली बिलों और अन्य वित्तीय विषयों की समीक्षा करते हुए राजस्व संग्रहण सुधारने को कहा। ऑनलाइन नागरिक सेवाओं, ई-ऑफिस और डिजिटल व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। 'निदान-1100 की शिकायतों का समय पर करें निराकरण' प्रमुख सचिव ने निदान-1100 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की नियमित निगरानी और निर्धारित समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने और लंबित प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, संयुक्त संचालक  मिथिलेश अवस्थी और मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा सहित नगरीय प्रशासन विभाग, सूडा और भिलाई नगर निगम के अधिकारी तथा अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने देशभर के टूर ऑपरेटरों के समक्ष प्रस्तुत की राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाएं

रायपुर  देश के पर्यटन मानचित्र पर छत्तीसगढ़ को एक आकर्षक और विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार  पहल कर रहा है। इसी कड़ी में 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने सहभागिता करते हुए राज्य की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, जनजातीय परंपराओं और पर्यटन की विविध संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच संवाद एवं सहयोग को नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का विशेष जोर पर्यटन अधोसंरचना के विकास, पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण तथा पर्यटन के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने पर है। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की सहभागिता इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। विभिन्न राज्यों के पर्यटन अधिकारियों से संवाद, सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा एवं प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे की विशेष उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान प्रबंध संचालक  चौबे ने मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव  इलैयाराजा सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा प्रबंध संचालकों से मुलाकात की। इन बैठकों में पर्यटन क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग बढ़ाने, विभिन्न राज्यों के प्रमुख पर्यटन स्थलों के संयुक्त प्रचार-प्रसार, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा अंतर्राज्यीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। चर्चा के दौरान इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि विभिन्न राज्यों के बीच पर्यटन संबंधों को मजबूत बनाकर पर्यटकों को विविध पर्यटन अनुभवों से परिचित कराया जा सकता है। इससे पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, होटल व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े अन्य सेवा क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। चित्रकोट से सिरपुर और बस्तर से सरगुजा तक पर्यटन की विविधता को मिली पहचान मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट के माध्यम से देशभर से आए टूर ऑपरेटरों और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ की विविध पर्यटन विशेषताओं से परिचित कराने का अवसर मिला। राज्य के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों, भोरमदेव मंदिर, मैनपाट के प्राकृतिक सौंदर्य तथा बस्तर की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति जैसे पर्यटन आकर्षण छत्तीसगढ़ को अन्य राज्यों से अलग पहचान प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां के घने वन, जलप्रपात, पर्वतीय क्षेत्र, वन्यजीव अभ्यारण्य, प्राचीन मंदिर, पारंपरिक लोककलाएं, हस्तशिल्प और जनजातीय जीवनशैली पर्यटकों को विविध अनुभव प्रदान करते हैं। राज्य में इको टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ आने का दिया आमंत्रण, पर्यटन स्थलों के प्रत्यक्ष अनुभव पर जोर ट्रैवल मार्ट के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे ने विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए आमंत्रित किया। इस आमंत्रण का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्थलों और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। ऐसे भ्रमण से राज्य के पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा उन्हें विभिन्न पर्यटन पैकेजों और यात्रा कार्यक्रमों में शामिल करने की संभावनाओं को बल मिलेगा। इसके साथ ही अन्य राज्यों के टूर ऑपरेटरों और पर्यटन व्यवसायियों के साथ संपर्क बढ़ने से छत्तीसगढ़ के अपेक्षाकृत कम चर्चित किंतु अत्यंत आकर्षक पर्यटन स्थलों को भी व्यापक पहचान दिलाने में सहायता मिल सकती है। अंतरराज्यीय पर्यटन सर्किट और नए पर्यटन बाजारों की संभावनाओं को मिलेगा बढ़ावा छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति इसे मध्य भारत के प्रमुख पर्यटन केंद्रों से जोड़ने की महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करती है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों के साथ पर्यटन क्षेत्र में समन्वय बढ़ने से भविष्य में संयुक्त पर्यटन सर्किट, थीम आधारित यात्रा कार्यक्रम और बहुराज्यीय पर्यटन पैकेज विकसित करने की संभावनाओं को प्रोत्साहन मिल सकता है। विशेष रूप से धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्रों में विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग से पर्यटकों को एक ही यात्रा में विविध अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा सकती है। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ाने तथा राज्य को घरेलू पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। पर्यटन के माध्यम से स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को केवल भ्रमण और मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए स्थानीय विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, गाइडों, होटल एवं होमस्टे संचालकों, परिवहन व्यवसायियों, हस्तशिल्पियों और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। राज्य में ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे एक ओर पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की मौलिक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कला, शिल्प, खानपान और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा। राष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर लगातार मजबूत हो रही छत्तीसगढ़ की उपस्थिति छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित ट्रैवल मार्ट, पर्यटन प्रदर्शनियों, रोड शो और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े आयोजनों में निरंतर सहभागिता की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य राज्य के पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना, देशभर के टूर ऑपरेटरों के साथ व्यावसायिक संबंध विकसित करना और छत्तीसगढ़ को पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पसंदीदा गंतव्य के रूप में … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन

*रायपुर  संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति, शंकर नगर, रायपुर द्वारा बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर में आयोजित होने वाले गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री माननीय श्री विजय शर्मा के करकमलों से किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आयोजन के 15वें वर्ष में प्रवेश करने पर समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गरबा उत्सव के सफल आयोजन की कामना की। समिति के संयोजक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर, रायपुर में आयोजित होने वाला यह गरबा उत्सव अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस वर्ष उत्सव का आयोजन 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक किया जाएगा। आयोजन के दौरान प्रत्येक दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गरबा प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। श्रीवास्तव ने बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित यह उत्सव मां दुर्गा की आराधना, भक्ति एवं पारंपरिक गरबा संस्कृति का अनूठा संगम है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। समिति द्वारा गरबा उत्सव को भव्य रूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। समिति ने समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं गरबा प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर उत्सव की शोभा बढ़ाने की अपील की है। इस अवसर पर समिति से अनिता खंडेलवाल, संगीता मिश्रा, दीपक श्रीवास्तव, अमरजीत सिंह,  सुमन मुथा,  नेहा खंडेलवाल, ललित साहू, हर्ष वर्मा, अंकुर अग्रवाल, श्रुति जैन, ललित साहू उपस्थित रहे।

हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षक भर्ती परीक्षा टली, सभी आरक्षित श्रेणियों को मौका मिलने तक नहीं होगा एग्जाम

 बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की डिवीजन बेंच ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया।इसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी। बता दें कि भर्ती परीक्षा में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था। उल्लेखनीय है कि सहायक शिक्षक भर्ती के कुल 2,292 पदों के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। वहीं शिक्षक भर्ती के 1,654 पदों में के लिए लिखित परीक्षा 25 अक्टूबर को होनी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं मिला। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है। हालांकि, समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी कर सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (बी) श्रेणी को शामिल किया।हालांकि, अधिसूचना जारी होने से पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसलिए इस श्रेणी को वर्तमान भर्ती में शामिल करना कानूनी रूप से संभव नहीं था। संशोधित विज्ञापन जारी कर सकती है सरकार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि संशोधन केवल सहायक शिक्षक भर्ती के लिए जारी किया गया है, शिक्षक भर्ती के लिए नहीं। परीक्षा की तारीखें नजदीक होने के कारण डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को होने वाली सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा और 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षा तब तक नहीं होगी, जब तक विज्ञापन में सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल कर संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं दिया जाता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य शासन नियमानुसार संशोधित विज्ञापन जारी कर सकता है या सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकाल सकता है। दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप कोरबा की रहने वाली मीनाक्षी मंगलेकर और बाकी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है। इससे वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। याचिका में इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी गई है। संशोधित विज्ञापन में भी दृष्टिबाधितों को शामिल नहीं किया सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में संशोधन की सूचना 9 अक्टूबर को रायपुर और बिलासपुर के अखबारों में प्रकाशित की गई है। इसे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। संशोधन में आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है। शासन ने कहा कि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 निकल चुकी है। ऐसे में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देना संभव नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संशोधन के जरिए आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है, तो दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की श्रेणी को शामिल नहीं करने का प्रथम दृष्टया कोई उचित कारण नजर नहीं आता। जानिए… क्या है दिव्यांगों के लिए आरक्षण का नियम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के तहत सरकारी संस्थानों में सीधी भर्ती के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को कम से कम 4% आरक्षण देने का प्रावधान है। इसमें दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले व्यक्ति भी शामिल हैं। आरक्षण का लाभ लेने के लिए सामान्यतः 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जरूरी है। याचिका में इसी 4% आरक्षण के तहत दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए पद आरक्षित नहीं करने को चुनौती दी गई है।  

दुर्ग से हरिद्वार और गोंदिया से कटरा तक स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग, सांसद ने रेलवे को लिखा पत्र

 रायपुर  आगामी त्योहारी मौसम में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से विशेष प्रबंध करने का आग्रह शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के महाप्रबंधक को पत्र प्रेषित किया है। सांसद ने पत्र में नवरात्र, दीपावली, छठ पूजा और क्रिसमस पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के यात्रियों की सुविधा के लिए दो महत्वपूर्ण मार्गों पर नई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है। सांसद संतोष पांडेय ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार तथा ऋषिकेश की यात्रा करते हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित ट्रेनों में भारी वेटिंग चल रही है। अत: दुर्ग से हरिद्वार के बीच एक सीधी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का परिचालन तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। इससे नियमित ट्रेनों पर यात्रियों का अत्यधिक दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को कंफर्म टिकट के साथ सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा। गोंदिया-माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग के लिए मांग सांसद ने दूसरी महत्वपूर्ण मांग जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम जाने वाले यात्रियों के लिए रखी है। उन्होंने गोंदिया से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत जताई है। इस ट्रेन का मार्ग गोंदिया से प्रारंभ होकर राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, उसलापुर और कटनी मुड़वारा होते हुए निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मार्ग से उत्तर भारत जाने वाले हजारों यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। रेल विकास संगठन का भी मिला समर्थन सांसद ने अपने पत्र के साथ छत्तीसगढ़ रेल विकास संगठन द्वारा प्राप्त मांग पत्र को भी संलग्न किया है। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि जनभावनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों ट्रेनों के संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इन ट्रेनों के चलने से न केवल आम यात्रियों को दलालों और भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।  

अंबिकापुर में 3 करोड़ से सुधरेंगे 150 किलोमीटर लंबे विभिन्न मार्गों के क्षतिग्रस्त हिस्से, दिसम्बर तक काम पूरा करने का लक्ष्य

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव के निर्देश के बाद अंबिकापुर में सड़कों को गड्ढामुक्त करने की मुहिम तेज हो गई है। सरगुजा प्रवास के दौरान सड़कों की बदहाल स्थिति सुधारने और मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के उनके निर्देशों पर लोक निर्माण विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। शहर के महामाया चौक से लरंग साय चौक तक सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों की बीटी पैच मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है। विभाग को वित्तीय वर्ष 2026-27 में वार्षिक संधारण मद से 3 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। इस राशि से लोक निर्माण विभाग के अंबिकापुर संभाग के विभिन्न मार्गों के कुल 150 किलोमीटर हिस्सों का संधारण किया जाएगा। सभी निर्धारित मरम्मत कार्यों को दिसम्बर तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि सड़कों पर बने गड्ढों की शीघ्र मरम्मत की जाए, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने सड़क संधारण कार्यों में तेजी लाने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया था। उनके निर्देशों के अनुपालन में लोक निर्माण विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत के कार्य शुरू कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने अंबिकापुर में महामाया चौक से लरंग साय चौक तक बीटी पैच मरम्मत का काम प्रारंभ किया है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों और गड्ढों को दुरुस्त कर आवागमन सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग स्वीकृत संधारण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने तेजी से काम कर रहा है। मरम्मत पूरी होने से वाहन चालकों और आम नागरिकों को सड़क के गड्ढों से होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। साथ ही आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगा। विभाग द्वारा अन्य स्वीकृत संधारण कार्यों को भी तय समय-सीमा में पूरा करने आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के समापन समारोह में हुए शामिल

रायपुर  सरगुजा की धरती खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है। यहां के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने की। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नई पहचान देने के साथ युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उक्त बातें पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 के समापन समारोह में कही। इस अवसर पर लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। समापन समारोह में शामिल होकर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके खेल कौशल, जोश और जीत के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और खेलों के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ने के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सद्भाव की भावना भी मजबूत होती है। सरगुजा की प्रतिभाएं प्रदेश और देश का नाम करेंगी रोशन पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरगुजा अंचल के युवाओं में प्रतिभा, परिश्रम और संघर्ष की अद्भुत क्षमता है। यहां के खिलाड़ी यदि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और नियमित अभ्यास के साथ आगे बढ़ें, तो निश्चित रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ऐसे खिलाड़ियों को आगे आने, अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और संकल्प है कि सरगुजा की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिले, युवा खेलों के प्रति प्रोत्साहित हों और अपनी उपलब्धियों से सरगुजा सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में परिवार, समाज, शिक्षकों और खेल प्रशिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण अंचलों में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है। खेलों से विकसित होता है अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का गुण मंत्री  अग्रवाल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जीवन में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख देते हैं। खेल के मैदान में मिली जीत आत्मविश्वास बढ़ाती है, वहीं हार हमें अपनी कमियों को पहचानकर और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में केवल विजेता बनना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरे समर्पण, मेहनत और खेल भावना के साथ भाग लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर अभ्यास करना चाहिए। आज ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भविष्य में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरगुजा का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को बढ़ावा देने और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों ने देश के युवाओं में खेलकूद, स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा खेल सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य कर रही है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित अवसर उपलब्ध कराना खेलों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, ऊर्जावान और अनुशासित युवा ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लखनपुर में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, खेल भावना और उत्साह का शानदार प्रदर्शन पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के दौरान खिलाड़ियों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का वातावरण रहा। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक दक्षता, खेल कौशल और जीत के जज्बे का प्रदर्शन किया। ग्रामीण अंचलों से आए खिलाड़ियों की सहभागिता ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया। खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को परखने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेलों के प्रति अपनी रुचि को नई दिशा देने का अवसर मिला। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें केवल उचित मंच और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। खिलाड़ियों की सफलता में अभिभावकों और प्रशिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी अत्यंत आवश्यक है। खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ता उत्साह आने वाले समय में सरगुजा को खेल प्रतिभाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा। सभी प्रतिभागी खिलाड़ी बधाई के पात्र, निरंतर मेहनत से हासिल करें नई ऊंचाइयां समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में उतरने वाला प्रत्येक खिलाड़ी सम्मान और प्रोत्साहन का पात्र है। प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी अपनी सफलता को आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं और जो खिलाड़ी इस बार विजयी नहीं हो सके, वे निराश होने के बजाय और अधिक मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अगली प्रतियोगिता की तैयारी करें। उन्होंने विश्वास … Read more

डिजिटल क्रॉप सर्वे की डेडलाइन तय, कलेक्टरों को डेटा वेरिफिकेशन और त्रुटियां सुधारने के निर्देश

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य 10 नवम्बर तक पूरा करें कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में कलेक्टरों को दिए निर्देश डिजिटल क्रॉप सर्वे की मॉनिटरिंग, त्रुटियों के सुधार और डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर रायपुर,  मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसल की वास्तविक स्थिति के सत्यापन तथा सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में अब तक 93.84 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल के क्षेत्रफल को वास्तविक स्थिति के आधार पर दर्ज करना है। इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण तथा संबंधित जानकारी को डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए। 10 नवंबर तक पूरा करें सर्वे का शेष कार्य मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कलेक्टरों को निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन खसरों का नक्शा उपलब्ध नहीं है या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर पॉलीगॉन तैयार किए जाएं और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड की जाए। इसके लिए जिलों में उपलब्ध ग्रामवार डेटा का उपयोग करते हुए शेष खसरों में धान अथवा अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए। पिछले वर्ष के फसल संबंधी रिकॉर्ड का भी आवश्यकतानुसार संदर्भ लिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सर्वे का कार्य 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य मैदानी अमले को सक्रिय कर ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे का कार्य केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक फसल स्थिति के आधार पर पूरा होना चाहिए। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं का होगा निराकरण मुख्य सचिव ने बताया कि 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में डिजिटल क्रॉप सर्वे से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को ग्राम सभाओं के आयोजन की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि वे अपनी फसल संबंधी जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति होने पर अपनी आपत्ति और समस्या प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए और आवश्यक सुधारों को रिकॉर्ड में अद्यतन किया जाए। कलेक्टर ग्रामसभा सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करें तथा सुधार के लिए प्राप्त आवेदनों और प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें। डेटा की गुणवत्ता और क्रॉस वेरिफिकेशन पर विशेष जोर मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधार किया जाए। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद त्रुटियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रत्येक जिले में सर्वे की प्रगति के साथ उसकी गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से धान सहित सभी फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र फसल क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए। विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन मुख्य सचिव ने विशेष श्रेणी के किसानों का अलग से पंजीयन कर उनकी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक में अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसान, वन क्षेत्रों के ग्रामों से संबंधित किसान, ग्राम कोटवार तथा शासकीय पट्टाधारी किसानों की जानकारी शामिल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों के किसानों का सर्वे और पंजीयन भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर 10 नवंबर तक संबंधित रिपोर्ट अपलोड की जाए। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पात्र किसानों का पंजीयन और फसल संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज हो। मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए सही डेटा, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सर्वे का कार्य वास्तविक स्थिति के आधार पर पूरा हो तथा किसानों को अपनी समस्याएं रखने और उनमें सुधार कराने का अवसर मिले।बैठक में मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की भी समीक्षा करने और संबंधित प्रगति पर आवश्यक ध्यान देने के निर्देश दिए।  बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग  श्रीमती फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के मरडीह, फुंगी और कुरमंतपारा का किया दौरा, हाथियों से हुए नुकसान का लिया जायजा

रायपुर  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के हाथी प्रभावित ग्राम मरडीह, फुंगी और कुरमंतपारा का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मंत्री  अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों, एसडीएम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  अग्रवाल ने प्रभावित गांवों के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और हाथियों के कारण उत्पन्न परिस्थितियों तथा उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और राहत संबंधी कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाथियों से प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो तथा उनके नुकसान का नियमानुसार आकलन कर मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के साथ पूरी की जाए। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में न हो अनावश्यक विलंब मंत्री  राजेश अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हाथियों के कारण हुए नुकसान का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ आकलन किया जाए। प्रभावित परिवारों के प्रकरणों में आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में विभागीय समन्वय बनाए रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर शासन पूरी तरह संवेदनशील है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत दिलाने के लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा। जनता की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता: मंत्री  अग्रवाल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही आज मैं स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचा हूं। प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझना और उन्हें समय पर राहत दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। मैंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नुकसान का शीघ्र आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। जनता की सुरक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत और हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़े रहना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें तथा वन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जागरूकता, सतर्कता और प्रशासन के साथ समन्वय से संभावित खतरों को कम किया जा सकता है। मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान तथा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, एसडीएम, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।