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कोरिया में डांसर पर नोट उड़ाने पर रोजगार सहायक को नौकरी से हटाया

कोरिया. जिले से संस्कृति को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह के नाम पर अश्लीलता का नंगा नाच परोसा गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित रोजगार सहायक जिंदर सोनवानी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। सोनहत ब्लॉक के ग्राम पंचायत पोड़ी में फुटबॉल टूर्नामेंट का समापन था। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शिवकुमारी, भाजपा नेता मनोज साहू और जनपद अध्यक्ष आशा सोनपाकर जैसे अतिथि शामिल हुए थे। विवाद तब शुरू हुआ जब अतिथियों के जाने के बाद रात को स्कूल परिसर में ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ के नाम पर फिल्मी गानों पर डांस पार्टी शुरू हुई। मिली जानकारी के अनुसार, इस डांस प्रोग्राम के लिए कोरबा की एक ‘नाचा पार्टी’ को 10 लाख रुपये के भारी-भरकम खर्च पर बुक किया गया था। जैसे ही डांस और पैसे लुटाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिला प्रशासन हरकत में आया। सोनवानी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

रायगढ़ में ग्रामीणों ने असली के पैकेट में पकड़ा नकली दही

रायगढ़. जिले में गुरुवार शाम पिकअप लोड दही के डिब्बे व दूग्ध उत्पाद के पैकेट में ब्रांड का लेबल चेंज किया जा रहा था। तभी मोहल्लेवासियों की सूचना में इसे पकड़ लिया गया है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दो दिनों में जांच पूरी की। जहां नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 2 लाख मिलावटी दूग्ध उत्पाद को जब्त किया गया है। चक्रधर नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि जिला दुर्ग से एक संदिग्ध पिकअप वाहन के माध्यम से रायगढ़ शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मात्रा में दुग्ध उत्पादों का विक्रय किया जा रहा है। इन उत्पादों में खाद्य लेबल और रैपर से छेड़छाड़ की जा रही है। नदंनम की जगह वैद्य फूड्स का लेबल लगाया जा रहा है। पिकअप वाहन में दही व कॉटेज एनालॉग जैसे दुग्ध उत्पाद 5 व 15 किलोग्राम के बंद प्लास्टिक जारों एवं पैकेटों में थे। इसके बाद पुलिस ने पिकअप को थाने लाकर मामला फूड एंड सेफ्टी विभाग के सुपुर्द किया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम तत्काल थाना परिसर पहुंची। वाहन में भरे दुग्ध उत्पादों की जांच शुरू की।जांच के दौरान यह बात सामने आया कि छोटे अतरमुड़ा गांधी नगर, केलोविहार की रहने वाली कस्तूरी डेयरी की प्रोपराइटर सोनिया जायसवाल के द्वारा बिक्री के लिए वैद्य फूड्स प्रोडक्ट्स शंकर नगर भिलाई-3, कुम्हारी, जिला दुर्ग से मंगाए गए थे।

पेंड्रा में प्रेमी संग भागी विधवा महिला, को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया

पेंड्रा. जिले से हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। खोडरी चौकी क्षेत्र के रानीझाप गांव में एक गंभीर और सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, एक विधवा महिला को कथित तौर पर अर्ध नग्न कर गांव में घुमाया गया। यह घटना तब हुई जब महिला शादीशुदा एक पुरुष के साथ भागी थी। दरअसल, पेंड्रा के रानीझाप गांव में एक विधवा महिला को निर्वस्त्र कर पीटा गया। महिला लगभग तीन महीने पहले एक शादीशुदा व्यक्ति के साथ भाग गई थी। गांव लौटने पर उस व्यक्ति के परिजनों ने महिला के साथ यह बर्ताव किया। ग्रामीणों और महिला के परिजनों ने उसे बचाया और पुलिस को सूचना दी। यह घटना खोडरी चौकी अंतर्गत ग्राम रानीझाप में शनिवार सुबह करीब 10 बजे हुई। 35 वर्षीय पीड़ित महिला लगभग एक साल पहले अपने पति के निधन के बाद विधवा हो गई थी। उसका गांव के ही 35 वर्षीय शादीशुदा व्यक्ति हरि प्रसाद राठौर से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों 29 अक्टूबर को घर से भाग गए थे और मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ग्राम मालाचुवा में रह रहे थे। शुक्रवार को जब वे गांव वापस लौटे, तो विवाद की स्थिति बन गई। इसके बाद महिला और हरि प्रसाद के परिजन खोडरी चौकी पहुंचे थे। चौकी में महिला ने हरि प्रसाद के साथ रहने की इच्छा जताई, जिसके बाद सभी अपने गांव रानीझाप लौट आए। हरि प्रसाद और महिला को गांव के भुल्लन गोंड़ ने शुक्रवार रात को अपने घर में शरण दी थी। शनिवार सुबह करीब 10 बजे हरि प्रसाद की पत्नी सरोज राठौर, भाई मनोज और यशोदा राठौर सहित अन्य लोग इकट्ठा हुए। उन्होंने महिला को पीटना शुरू कर दिया, उसे निर्वस्त्र किया और पूरे गांव में घुमाया। हमलावरों ने महिला पर गोबर भी पोता और उसे पीटते हुए गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित काली मंदिर तक ले गए। इसके बाद पीड़ित महिला के परिजनों और ग्रामीणों, जिनमें अमर सिंह धुर्वे और दशरथ विश्वकर्मा शामिल थे, ने उसे बचाया। उन्होंने महिला को कपड़े पहनाए और पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस गांव पहुंची और घायल महिला को अपने साथ ले गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।  

छत्तीसगढ़ में 15 हजार युवाओं को जल्द मिलेगी नौकरी

जांजगीर. भाजपा सरकार युवाओं के भरोसे पर पूरी तरह खरी उतरी है। पहले युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो गया था और इंजीनियरिंग से उनका मोहभंग हो रहा था लेकिन इस साल स्थिति बदली है और इंजीनियरिंग की सीटों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को हुनरमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा मांगने वाले नहीं, बल्कि देने वाले बनें। इसी दिशा में 28 से 31 जनवरी तक रायपुर में रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है जहां 15 हजार से अधिक युवाओं को ऑफर लेटर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार हर सेक्टर में सक्रियता से काम कर रही है और अब तक करीब साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये के एमओयू किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के युवा खेल के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है। भ्रष्टाचार पर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और भी बड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। कौशल विकास, रोजगार और तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब ने जांजगीर दौरे के दौरान यह जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का सीएम साय ने वर्चुअल किया शुभारंभ

बीजापुर. मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए बीजापुर जिले को दो नई बस सेवाओं की सौगात दी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों में आवागमन को सुगम बनाते हुए परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर जिलेवासियों एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बस सेवा प्रारंभ होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सेवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तृतीय चरण के अंतर्गत बीजापुर जिले में जिन बस मार्गों पर संचालन प्रारंभ किया गया, उनमें कचलारम से जगदलपुर (तोयनार-धनोरा मार्ग होते हुए), कोतापाल-बीजापुर-नैमेड, भैरमगढ़-गीदम (एक फेरा वापसी) प्रतिदिन कुल 190 किलोमीटर, तथा पामेड़ से बीजापुर (कोण्डापल्ली-तर्रेम-बासागुड़ा-आवापल्ली मार्ग होते हुए) कुल 104 किलोमीटर शामिल हैं। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सीईओ जिला पंचायत नम्रता चौबे ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। ग्रामीण बस सेवा के प्रारंभ होने से बीजापुर जिले के सुदूर एवं आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ एवं नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

रायपुर: स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं, साधारण जीवन के असाधारण दस्तावेज

रायपुर : स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण 'स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां' विषय पर हुई परिचर्चा छत्तीसगढ़ ने बीते 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार नई दिशा दी, इनमें  शुक्ल भी शामिल : डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी रायपुर   नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।  इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

खड़गवाँ से बेलबहरा मार्ग को मिलेगा नया रूप, रायपुर में आवागमन होगा आसान

रायपुर : खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग होगा सुगम, आवागमन को मिलेगा बड़ा लाभ सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण को पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की मिली प्रशासकीय मंजूरी रायपुर मनेंद्रगढ़ विधानसभा के खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग पर सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण के लिए पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति लोक निर्माण विभाग द्वारा मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दी गई है। इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को मनेंद्रगढ़ मुख्यालय की स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा साथ ही खडगंवा और बैंकुंठपुर की दूरी भी घटेगी। पुल निर्माण से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके पूरा होते ही पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला नजदीक हो जाएगा, जिससे आवागमन सुगम बनेगा। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पुल बनने के बाद बस सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। स्थानीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री  अरुण साव को मनेंद्रगढ़ की समस्त जनता की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित कर उनका आभार प्रकट किया है । स्थानीय नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पुल निर्माण से विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों से सीधा संपर्क स्थापित होगा।

‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर हुई परिचर्चा

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

दिल्ली के राजपथ से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा, शहरी पथ-विक्रेताओं को पीएम का आमंत्रण: अरुण साव

रायपुर छत्तीसगढ़ के शहरी पथ-विक्रेताओं को पीएम मोदी का न्यौता मिलना बड़ी बात : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव नई दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष एक नई और ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी पथ-विक्रेता भी सहभागी बनेंगे। यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी पथ-विक्रेताओं को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर देश के माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम अपने संदेश में देशभर के पथ-विक्रेता भाई-बहनों को संबोधित करेंगे। उप मुख्यमंत्री-सह-नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरूण साव ने आज नगर पालिका परिषद मुंगेली के पथ-विक्रेता  बाबूलाल बुनकर और नगर पालिका परिषद लोरमी के शहरी पथ-विक्रेता  सोना कुमार कैवर्त्य से वीडियो कॉल पर बात की। इस दौरान दोनों से उनके कार्यों की चर्चा कर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मिलित होने पर बधाई दी। दोनों पथ-विक्रेता प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभान्वित हैं तथा अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी एवं परिश्रम से आजीविका अर्जित कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री  साव ने दोनों पथ-विक्रेताओं से वीडियो काल से चर्चा कर इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अवसर छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायी है। वर्षों से देश की शहरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे पथ-विक्रेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान एवं पहचान दिलाने की दिशा में यह एक सार्थक कदम है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व में उनकी भागीदारी सामाजिक समावेशन, आत्मनिर्भर भारत और समावेशी विकास की भावना को सशक्त रूप से दर्शाती है। छत्तीसगढ़ के पथ-विक्रेताओं को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं लोटस टेंपल (कमल मंदिर) का भ्रमण भी कराया जाएगा। यह भ्रमण उनके लिए न केवल ज्ञानवर्धक होगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय मूल्यों को और अधिक गहराई से समझने का अवसर भी प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से देशभर के लाखों शहरी पथ-विक्रेताओं को स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा तथा सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह जैसे राष्ट्रीय मंच पर पथ-विक्रेताओं की सहभागिता इस योजना की सफलता और इसके सामाजिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।                  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने राज्य के दो पथ-विक्रेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह के राष्ट्रीय आयोजन में आमंत्रित किए जाने पर कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह क्षण विशेष रूप से गौरवपूर्ण है। राज्य के शहरी पथ-विक्रेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इससे न केवल पथ-विक्रेताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि राज्य के अन्य पथ-विक्रेताओं को भी स्वावलंबन, अनुशासन और मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। राज्य शासन एवं नगरीय निकायों द्वारा भी पथ-विक्रेताओं के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें सम्मानजनक आजीविका, सुरक्षित कार्यस्थल तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। गणतंत्र दिवस समारोह में भागीदारी इन प्रयासों की सार्थकता को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करती है। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ के शहरी पथ-विक्रेताओं की सहभागिता समानता, सम्मान और समावेशी विकास के मूल्यों को सुदृढ़ करती है। यह पहल संदेश देती है कि राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग, हर नागरिक और हर मेहनतकश की भूमिका महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ के लिए यह न केवल गर्व का विषय है, बल्कि सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी है।