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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों का सूक्ष्म परीक्षण कर उन्हें अनुमोदित किया गया। प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए, राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के अनुमोदन हेतु परीक्षण पश्चात कुल 3,189 प्राथमिक कार्यों के लिए 246 करोड़ 54 लाख रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की मुख्य विशेषताएँ और प्रमुख निर्णय बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (च्टज्ळ) वाले कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 कम्युनिटी-मैनेज्ड क्रेच (पालना-घर) की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दी गई। सांस्कृतिक धरोहर व शिक्षा  जनजातीय क्षेत्रों के पवित्र सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं संरक्षण के पायलट प्रोजेक्ट के साथ-साथ प्राथमिक शालाओं (कक्षा 1 से 5) में 2 वर्षों के लिए बहुभाषी शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास हेतु भी मंजूरी प्रदान की गई। अन्य विकास कार्य बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति एवं धरोहर, नवीकरणीय ऊर्जा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, ग्राम व समुदाय विकास सहायता, खेलकूद, पशुपालन, अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों के लिए आय सृजन की योजनाएं, तथा सुदृढ़ीकरण एवं प्रशासनिक व्यय से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत उन्हें अनुमोदित किया गया। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अनुमोदित प्रस्तावों का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर तक बसे जनजातीय अंचलों तक पहुंच सके। इस उच्च स्तरीय बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह सहित कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

वनोपज से आजीविका बढ़ाने की छत्तीसगढ़ की पहल को नीति आयोग की सराहना

रायपुर छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज आधारित आजीविका और महिला सशक्तीकरण के लिए संचालित वन धन विकास केन्द्रों के मॉडल को नीति आयोग ने अन्य राज्यों के लिए उपयोगी और अनुकरणीय बताया है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) के दल ने राज्य का अध्ययन भ्रमण कर वन धन विकास केन्द्रों की कार्यप्रणाली और जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने की पहल का अध्ययन किया। दल ने विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों को वनोपज के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। नीति आयोग की महानिदेशक मती निधि छिब्बर के नेतृत्व में आए दल को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक मती संजीता गुप्ता ने राज्य में संचालित आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और पीएम-जनमन के अंतर्गत वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से महिला समूहों को उपलब्ध कराए जा रहे आजीविका के अवसरों तथा संग्रहण से लेकर उत्पाद निर्माण और विपणन तक की व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण दिया। महानिदेशक मती निधि छिब्बर ने राज्य शासन और लघु वनोपज संघ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिला समूहों को विभिन्न चरणों में निरंतर सहयोग मिलने से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े समूहों को भी वन धन विकास केन्द्रों से जोड़ने तथा भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करने का सुझाव दिया। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य में लघु वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।  बैठक में राज्य नीति आयोग और ट्राइफेड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े ने महिला एवं बाल विकास विभाग के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में किया राज्य का प्रतिनिधित्व

रायपुर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-चिंतन शिविर में सराहना मिली। महिला एवं बाल विकास मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े ने सुषमा स्वराज भवन, चाणक्यपुरी में आयोजित इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के महिला एवं बाल विकास मंत्री और विभागीय सचिव भाग ले रहे हैं। भारत सरकार की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रीअन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्रीसावित्री ठाकुर, भारत सरकार के सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित रहे। शिविर में आंगनबाड़ी सेवाओं में सुधार, मिशन वात्सल्य, महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्यों के अनुभव साझा करना और महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर मंथन करना है। सम्मेलन के प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ के ‘वजन त्यौहार’ की विशेष रूप से सराहना की गई। इस पहल के माध्यम से बच्चों के वजन और पोषण की स्थिति के प्रति परिवारों तथा समुदाय को जागरूक किया जा रहा है। बच्चों की नियमित वृद्धि पर निगरानी रखने और कुपोषण में कमी लाने के प्रयासों में जनभागीदारी को जोड़ना इस पहल की प्रमुख विशेषता है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के लिए तैयार स्वास्थ्य प्लान और साप्ताहिक आहार चार्ट को भी सराहना मिली। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई इन व्यवस्थाओं से बाल गृहों में उनकी देखभाल को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। मंत्रीराजवाड़े की सहभागिता में राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ के ये अनुभव राज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्राथमिकताओं और कार्यप्रणाली को सामने लाए। सम्मेलन के आगामी सत्रों में चारों प्रमुख विषयों पर चर्चा जारी रहेगी। कार्यक्रम के दूसरे दिन, 9 अक्टूबर को, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होंगे।

वन्यप्राणियों के रेस्क्यू के लिए मिलेगा आधुनिक वाहन

रायपुर छत्तीसगढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने और वन्यप्राणियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप ने कांकेर में राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में रेडियो कॉलरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी एवं मोबाइल अलर्ट सिस्टम के लिए 60 लाख रुपए की मंजूरी की घोषणा की। उन्होंने वन्यप्राणियों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस वाहन उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।  वन मंत्री  कश्यप ने बताया कि भालू और तेंदुओं की गतिविधियों एवं लोकेशन की निगरानी के लिए 40 लाख रुपए की लागत से रेडियो कॉलरिंग परियोजना शुरू की जाएगी। वहीं, 20 लाख रुपए की लागत से एआई आधारित मॉनिटरिंग और मोबाइल अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके जरिए वन्यप्राणियों की गतिविधियों की निगरानी के साथ संभावित खतरे की सूचना ग्रामीणों को मोबाइल पर मिल सकेगी।  कश्यप ने कहा कि वन्यप्राणियों का संरक्षण केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनसहभागिता से वन्यजीव संरक्षण का आह्वान किया। वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत पर तीन पुस्तकों का विमोचन  समारोह में वन मंत्री  कश्यप ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत पर आधारित तीन पुस्तकों एवं पुस्तिकाओं का विमोचन किया। इनमें गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य की जैव-विविधता पर आधारित 'Gomarda: The Hidden Emerald of Chhattisgarh', बाघिन के दृष्टिकोण से जंगल के अनुभवों को प्रस्तुत करने वाली 'अचानकमार की जीती-जागती कहानी झुमरी की जुबानी' तथा गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के प्राचीन शैलचित्रों और पुरातात्विक धरोहरों पर केंद्रित 'Timeless Imprints: Guru Ghasidas Tamor Pingla Tiger Reserve' शामिल हैं। इस अवसर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन और वन्यप्राणी संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।    कार्यक्रम में विधायक  आशाराम नेताम, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण कुमार पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  ओ.पी. यादव सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर, डीएफओ,  स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

गंभीर अपराध, जनहानि और यूएपीए से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य पात्र प्रकरणों की वापसी पर जोर

रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने आज महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में नक्सल प्रकरणों की वापसी, आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित जवानों एवं नागरिकों के परिवारों को दी जा रही सहायता की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध एवं न्यायालयों में प्रक्रियाधीन लोगों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए। गंभीर अपराध, जनहानि तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य पात्र प्रकरणों की वापसी के लिए निर्धारित प्रक्रिया को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रकरणों की वापसी की कार्रवाई नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाए। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बैठक में सभी जिलों से प्राप्त प्रकरण वापसी संबंधी आवेदनों की जिलावार एवं प्रकरणवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने प्रकरण वापसी के लिए प्रस्तावित संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित जिलों में जिला स्तरीय प्रकरण वापसी समितियों की बैठक अगले 15 दिनों के भीतर आयोजित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही राज्य स्तरीय समिति की बैठक 5 नवंबर तक संपन्न कराने के निर्देश दिए। अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों की वापसी और पुनर्वास पर विशेष जोर  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों को वापस राज्य में लाने की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे व्यक्तियों की वापसी के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया जाए। राज्य लौटने वाले आत्मसमर्पित व्यक्तियों को पुनर्वास केंद्रों में रखकर उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप आजीविकापरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सकें। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अब तक लगभग 900 पुनर्वासितों के राज्य वापस लौटने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने सभी पुनर्वासितों को मोबाइल फोन और प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराने के साथ उनके आवश्यक पहचान पत्र एवं राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुनर्वास से संबंधित व्यवस्थाओं के साथ हथियारों की मैपिंग के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। पुनर्वासितों को भूमि आवंटन, रोजगार, आवास और आर्थिक सहायता का पूरा लाभ मिले उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने शासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली सहायता एवं सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण पर अलग-अलग चर्चा करते हुए भूमि आवंटन, रोजगार उपलब्ध कराने, आवास वितरण और अन्य पुनर्वास सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को मिलने वाले सभी लाभ समय पर उपलब्ध कराए जाएं और कोई भी पात्र पुनर्वासित सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने पुनर्वासितों को मिलने वाली इनाम राशि के लंबित भुगतान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रत्येक लंबित प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले महीने आयोजित होने वाली समीक्षा बैठक से पहले पुनर्विचार से संबंधित सभी मामलों पर चर्चा कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने सभी पात्र पुनर्वासितों को प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों की सराहना की। साथ ही सभी पुनर्वासितों के आयुष्मान कार्ड एवं राशन कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने पुनर्वास से संबंधित जानकारियों को सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए, जिससे आमजन को शासन द्वारा किए जा रहे पुनर्वास प्रयासों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त हो सके। इलवद पंचायत के लंबित विकास कार्यों की समीक्षा, ग्रामीणों की मांग के अनुरूप हों कार्य स्वीकृत  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने इलवद पंचायत के अंतर्गत लंबित विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक प्रस्तावित एवं लंबित कार्य की स्वीकृति की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति के समय यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य स्थानीय ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं और उनकी मांग के अनुरूप हों। उन्होंने ग्रामीणों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। नक्सल हिंसा में शहीद जवानों के परिजनों और प्रभावित नागरिकों को मिले सभी निर्धारित लाभ  उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने वर्ष 2001 से अब तक नक्सल घटनाओं में शहीद हुए जवानों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति एवं अन्य निर्धारित लाभ प्रदान किए जाने की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अब तक की कार्रवाई पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए लंबित प्रकरणों पर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण किया जाए, ताकि पात्र परिजनों को निर्धारित सहायता एवं सुविधाएं प्राप्त हो सकें। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नक्सल घटनाओं में जान गंवाने वाले आम नागरिकों की जानकारी भी ली। उन्होंने मृत नागरिकों के आश्रित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता एवं अन्य लाभों की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी पात्र परिवारों को अनिवार्य रूप से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने नक्सल घटनाओं में घायल जवानों एवं घायल नागरिकों को प्रदान की जा रही सहायता, उपचार और अन्य सुविधाओं की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। शहीदों की स्मृति में बनेंगे जनोपयोगी स्मारक, बड़े घटनास्थलों पर दर्ज होगी वीर सपूतों की गाथा  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों एवं जान गंवाने वाले आम नागरिकों की स्मृति में स्मारक निर्माण की योजना की समीक्षा की। उन्होंने स्मारकों के लिए तैयार किए गए मानक डिजाइन पर चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि इन स्मारकों को केवल स्मृति स्थल तक सीमित न रखकर जनोपयोगी स्वरूप भी दिया जाए। उन्होंने स्मारकों को यात्री प्रतीक्षालय एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को भी इनका लाभ मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर नक्सल घटनाओं में बड़ी संख्या में जवान या आम नागरिकों की मृत्यु हुई है, वहां बड़े स्मारक बनाए … Read more

50 सीटों के साथ इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू करने की तैयारी, जिले के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी व्यावसायिक शिक्षा

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियों की ओर अग्रसर है। जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज शुरू करने की तैयारी की जा रही है। करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित हाईस्कूल भवन में प्रारंभिक रूप से कॉलेज का संचालन किया जाएगा। कॉलेज में 50 सीटों पर इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रारंभ करने की तैयारी है। इस पहल से जिले के विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा। कंडोरा में निर्मित हाईस्कूल भवन में हाईस्कूल संचालन की अनुमति नहीं मिलने के बाद शासन द्वारा उपलब्ध अधोसंरचना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए यहां फिजियोथेरेपी कॉलेज संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे एक ओर पहले से निर्मित भवन का उपयोग सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर जिले में स्वास्थ्य शिक्षा के नए अवसर विकसित होंगे। मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में यह पहल जशपुर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 50 सीटों पर प्रवेश की तैयारी, विद्यार्थियों को जिले में ही मिलेगा उच्च शिक्षा का अवसर फिजियोथेरेपी कॉलेज की शुरुआत से जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने के नए अवसर मिलेंगे। प्रारंभिक रूप से 50 सीटों के साथ कॉलेज संचालन की तैयारी की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए अन्य शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। कॉलेज के संचालन से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को भी मिलेगा लाभ जिले में फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। वर्तमान में जिले के अनेक मरीजों को फिजियोथेरेपी उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार होने से ऐसे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। कॉलेज के माध्यम से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने के साथ फिजियोथेरेपी सेवाओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस फिजियोथेरेपी कॉलेज के लिए चराईडांड के पास करीब 13 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से स्थायी हाईटेक कैंपस विकसित करने की योजना है। स्थायी परिसर के निर्माण तक कंडोरा में पहले से तैयार भवन का उपयोग कॉलेज संचालन के लिए किया जाएगा। स्थायी कैंपस विकसित होने से भविष्य में विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में जिले की क्षमता का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज की प्रस्तावित शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे जिले के युवाओं को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के नए अवसर मिलने के साथ भविष्य में स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी।

सफाई व्यवस्था बेहतर करने और नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज खुद स्कूटी चलाकर अम्बिकापुर शहर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था और डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने आवासों के हितग्राहियों से बातचीत की और अधिकारियों को नागरिक सुविधाएं बेहतर बनाने तथा सड़क निर्माण एवं मरम्मत के काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। केरसु तालाब में सफाई व्यवस्था तत्काल सुधारने के निर्देश शहर भ्रमण के दौरान उप मुख्यमंत्री  साव ने विभिन्न क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं नागरिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। केरसु तालाब में सफाई की आवश्यकता पाए जाने पर उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों एवं आवासीय क्षेत्रों में नियमित सफाई के साथ स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर करने एवं नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों से मिले उप मुख्यमंत्री  साव ने सुभाष नगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के तहत बने 493 आवासीय इकाईयों का निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राहियों से मुलाकात कर वहां में मिल रही सुविधाओं और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। साथ ही पक्का मकान मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। हितग्राहियों ने आवास मिलने पर खुशी जताई और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।  साव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन हितग्राहियों को आवास आबंटित किए गए हैं, उनका वहां निवास सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने आवासीय परिसर में साफ-सफाई, जरूरी सुविधाओं और शेष निर्माण कार्यों जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। स्वच्छता दीदियों के काम की सराहना की उप मुख्यमंत्री ने डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर पहुंचकर कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण की व्यवस्था देखी। उन्होंने अम्बिकापुर के कचरा प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि शहर में लगभग 480 स्वच्छता दीदियां घर-घर से कचरा एकत्र करने और उसके प्रबंधन का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। उनके प्रयासों से शहर में स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था बनी है। उप मुख्यमंत्री  साव द्वारा स्कूटी से अंबिकापुर शहर के भ्रमण के दौरान महापौर मती मंजूषा भगत, नगर निगम के सभापति  हरमिंदर सिंह टिन्नी, कलेक्टर  अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत की सीईओ सु रोमा वास्तव और नगर निगम के आयुक्त  विनय कुमार अग्रवाल सहित पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा अभियंतागण भी उनके साथ थे।

प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य स्तरीय रोजगार मेले का उत्साहपूर्ण समापन, दो दिनों में 13 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे।  इस अवसर पर उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री के करकमलों से लगभग 1,100 चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए। 7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ रही सरकार मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘प्रयास’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक अवसर छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। इसके लिए शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। 95 से अधिक नियोक्ता संस्थानों ने युवाओं को दिए रोजगार के अवसर राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की। आयोजन स्थल पर लगभग 50 स्टॉल स्थापित किए गए, जहां विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, साक्षात्कार और चयन किया गया। मेले में आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, स्नातक सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। रोजगार विभाग के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी शिक्षा विभाग, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण की भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही। कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं ने भी बड़ी संख्या में रोजगार मेले में हिस्सा लिया। इस तरह रोजगार मेला केवल नियुक्तियों का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधे संवाद और समन्वय का प्रभावी मंच भी बना। ई-रोजगार पोर्टल बनेगा ‘स्किल मार्केट’ रोजगार मेले में अभ्यर्थियों के पंजीयन, आवेदन, उपस्थिति और चयन संबंधी प्रक्रियाओं को ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया गया। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायता मिली। राज्य सरकार द्वारा ई-रोजगार पोर्टल को आगे ‘स्किल मार्केट’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उद्योगों की आवश्यकताओं और उपलब्ध रिक्त पदों के साथ रोजगार के इच्छुक युवाओं की शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे एक ओर युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर खोजने में आसानी होगी, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। जिन्हें आज अवसर नहीं मिला, उनके लिए आगे भी खुलेंगे रोजगार के द्वार मुख्यमंत्री  साय ने रोजगार मेले में शामिल उन युवाओं का भी उत्साहवर्धन किया, जिन्हें इस बार रोजगार का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार आगे भी रोजगार मेलों, कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ समन्वय के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने रोजगार मेले के सफल आयोजन के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रदेश एवं अन्य राज्यों से आए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों के प्रतिनिधियों को बधाई दी। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को रोजगार और आजीविका के वास्तविक अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में प्रदेशभर से युवाओं की व्यापक भागीदारी उनके उत्साह और बेहतर भविष्य की आकांक्षा को दर्शाती है। उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधार के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार थर्ड … Read more

बाढ़ से तबाह हुई फसल, छत्तीसगढ़ के किसानों ने 21 क्विंटल प्रति एकड़ मुआवजे की उठाई मांग

जगदलपुर. अर्नब तूफान के बाद इंद्रावती नदी में आई बाढ़ ने बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक के नदी किनारे बसे इलाकों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हुई, मिट्टी और कीचड़ भर गया और किसानों के सामने अब मुआवजे का सवाल खड़ा हो गया है। इसी मांग को लेकर नदी किनारे के कई गांवों के किसान, सरपंच और जनपद सदस्य बस्तर सांसद महेश कश्यप से मिलने पहुंचे। किसानों का कहना है कि नुकसान इतना बड़ा है कि सामान्य राहत राशि से उनकी भरपाई संभव नहीं है। किसानों की ये है मांग किसानों की मांग है कि फसल नुकसान का आकलन सिर्फ सरकारी राहत दर से नहीं, बल्कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर के आधार पर किया जाए। किसानों का तर्क है कि खेती में जुताई, खाद-बीज और दवा समेत बड़ी रकम पहले ही खर्च हो चुकी थी और फसल घर पहुंचने से ठीक पहले बाढ़ ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी। 19 एकड़ फसल प्रभावित- किसान नगरनार के किसान घनश्याम सेठिया के मुताबिक उनकी करीब 26 एकड़ जमीन में से 19 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि प्रति हेक्टेयर 8 हजार रुपये जैसी राहत किसानों के वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है। किसानों को झेलनी पड़ी दोहरी मार वहीं जनपद सदस्य अर्जुन सेठिया ने कहा कि तूफान और खातीगुड़ा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। कई खेतों में मिट्टी और कीचड़ भर गया, पशुओं के लिए घास और पैरा तक नहीं बचा। किसानों ने साफ कहा है कि वे मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, कलेक्टर और प्रधानमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा मुआवजा चाहिए जिससे कर्ज के साथ खेती में हुए खर्च की भरपाई हो सके और किसान दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। सांसद ने कही मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात वहीं इस मामले पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा अर्नब तूफान के बाद तीन दिन लगातार बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे हजारों एकड़ फसल बर्बाद हुई है। किसानों की मांग है कि उन्हें 21 क्विंटल धान खरीदी के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे कर्ज चुका सकें और परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से चर्चा करने के साथ ही प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता की मांग करेंगे।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि बढ़ी, अब 31 दिसंबर 2026 तक मिलेगा लाभ

31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि राजनांदगांव क्षेत्र में 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को 19.46 करोड़ की राहत  रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड के राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत चार जिलों में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत पुराने बिजली बिलों के बकाये से जूझ रहे 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। योजना के अंतर्गत अब तक मूल बकाया राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में कुल 19 करोड़ 46 लाख रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब इस योजना की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है। चार जिलों में व्यापक क्रियान्वयन       राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में इस योजना का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके माध्यम से बीपीएल, घरेलू एवं कृषि श्रेणी के पात्र उपभोक्ताओं को पुराने बकाये के निपटारे पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार छूट दी जा रही है। अब तक योजना के तहत 65,062 उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं की कुल संख्या       उपभोक्ता अपने नजदीकी वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में पहुंचकर बकाया राशि का निपटारा कर सकते हैं। बकाया बिजली बिलों का निपटारा कर उपभोक्ता न केवल स्वयं को आर्थिक बोझ से मुक्त कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली सेवा भी सुनिश्चित कर सकते हैं। समय पर बिल का भुगतान और बकाया का निपटारा कर उपभोक्ता बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान कर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्नदाताओं को संबल प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी पुराने बोझ के बिजली सेवाओं का लाभ उठा सकें।  प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 31,392 निष्क्रिय उपभोक्ता तथा 33,669 पात्र सक्रिय उपभोक्ता शामिल हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं द्वारा अब तक लगभग 5 करोड़ 89 लाख रुपये की बकाया राशि बिजली कंपनी में जमा कराई जा चुकी है, जिससे कंपनी के राजस्व संग्रहण को भी गति मिली है। विभिन्न संभागों में सक्रिय भागीदारी       राजनांदगांव क्षेत्र के सात विद्युत संभागों में उपभोक्ताओं ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कवर्धा संभाग के 24,415 उपभोक्ता, पंडरिया संभाग के 21,234 उपभोक्ता, राजनांदगांव संभाग के 6,023 उपभोक्ता, डोंगरगढ़ संभाग के 5,351 उपभोक्ता, खैरागढ़ संभाग के 3,670 उपभोक्ता, मोहला संभाग के  3,076 उपभोक्ता और डोंगरगांव संभाग के 1,293 उपभोक्ताआंे को लाभान्वित किया गया है। 66 वितरण केंद्रों और 3 जोनों में विशेष अभियान       राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने बताया कि योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र के 66 वितरण केंद्रों और 03 जोनों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट और बकाया निपटारे की प्रक्रिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। 31 दिसंबर 2026 तक उठाएं लाभ      मुख्य अभियंता श्री मेश्राम ने 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया बिजली बिल वाले पात्र बीपीएल, घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विलंब न करें। उपभोक्ता 31 दिसंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पुराने बकाये का यह समाधान न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक बोझ से मुक्त करता है, बल्कि उनकी विद्युत सेवाओं को भी सुचारू रखता है।