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छत्तीसगढ़ रजत जयंती पर विशेष लेख :सुशासन की नई पहल: समयबद्ध छात्रवृत्ति से शिक्षा की राह हुई आसान

 डॉ. ओम प्रकाश डहरिया,   सहा. जनसम्पर्क अधिकारी  रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में उनके बैंक खाते में ऑनलाईन होने से अब उक्त वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह आसान हो गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में मंत्रालय, महानदी भवन से इन वर्गों के लगभग 2 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में 84.66 करोड़ रूपए की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति ऑनलाईन अंतरित की है। उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति ऑनलाईन भुगतान की शुरूआत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के हाथों पहली बार 10 जून 2025 को हुई। राज्य में संचालित सभी प्री. मैट्रिक छात्रावासों एवं आश्रमों में प्रवेशित बच्चों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही शिष्यवृति की प्रथम किश्त राशि 77 करोड़ रूपए एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में अध्ययनरत छात्रों हेतु भोजन सहाय की प्रथम किश्त के रूप में राशि 8.93 करोड़ रूपए, इस प्रकार कुल 85 करोड़ रूपए की राशि जारी कर एक अभिनव पहल की गई थी। इसके ठीक बाद दूसरे चरण में 17 जून 2025 को 8370 विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि 6.2 करोड़ रूपए का ऑनलाइन अंतरण किया गया था। मुख्यमंत्री श्री साय के हाथों आश्रम-छात्रावासों के 1 लाख 86 हजार 50 विद्यार्थियों को शिष्यवृति की द्वितीय किश्त की राशि 79 करोड़ 27 लाख रूपए एवं पो. मैट्रिक छात्रवृत्ति के 12 हजार 142 विद्यार्थियों को 5 करोड़ 38 लाख 81 हजार रूपए उनके बैंक खातों में राशि अंतरित की गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को सबके लिए आसान बनाने  के उद्देश्य से अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग तथा कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं की शिक्षा चिंता की और उन्होंने आदिमजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम -छात्रावास में रहकर शिक्षा अध्ययन कर रहे के बच्चों के शिक्षा को आसान बनाने के लिए यह नयी पहल की है। आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व और विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा के गहन प्रयासों से  कमजोर वर्गाें के विकास एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने बिना रूकावट के शिक्षा ग्रहण हेतु सुविधा प्रदान करने का यह प्रयास सार्थक हो रहा है। आदिम जाति कल्याण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के प्रयासों से प्री. मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति तथा शिष्यवृत्ति भुगतान के लिए नयी व्यवस्था में माह जून, सितंबर, अक्टूबर एवं दिसंबर में विद्यार्थियों को अब ऑनलाईन भुगतान किया जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों को शैक्षणिक अध्ययन के दौरान होने वाली आर्थिक समस्या से निजात मिली है। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस नयी व्यवस्था से पूर्व विद्यार्थियों को दिसंबर एवं फरवरी-मार्च में वर्ष में एक बार छात्रवृति एवं शिष्यवृति की राशि प्रदान की जाती थी।   दरअसल आश्रम छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी हो या यहां रहकर अध्ययन कर चुके विद्यार्थी हो अथवा आश्रम छात्रावासों में रहकर उच्च पदों में कार्य कर रहे विद्यार्थी क्यों न हो। वे समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण की परेशानियों से भलीभांति वाकिफ हैं। वास्तव में एक विद्यार्थी को अध्ययन सामग्री क्रय करने के लिए जब पैसे की जरूरत हो उस वक्त छात्रवृत्ति और शिष्यवृत्ति की राशि उनके बैंक खातों में पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। छात्रावासी विद्यार्थियों की इस परेशानी को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा सहित विभागीय अमलों ने संवेदनशीलता के साथ कितनी मशक्कत की होगी यह किसी से छिपा नहीं है। इसी का परिणाम है कि विभाग आश्रम छात्रावास के बच्चों के छात्रवृत्ति के लिए की गई तय सीमा से लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलना लाजिमी है। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की अधिकतर आवश्यकताएँ सरकार द्वारा पूरी की जाती हैं, लेकिन छात्रवृत्ति उन्हें व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्रता देती है। इससे वे किताबें, स्टेशनरी व अन्य जरूरी सामान स्वयं खरीद सकते हैं। जब यह सहायता समय पर मिलती है, तो विद्यार्थी बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं और उनका ध्यान पढ़ाई से भटकता नहीं है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से न केवल बच्चों की शैक्षिक यात्रा आसान होती है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन भी मिलता है। वे यह सोचने लगते हैं कि यदि अभी उन्हें सहायता मिल रही है तो आगे भी मिलेगी, जिससे वे कॉलेज या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर अग्रसर होते हैं। इससे राज्य में एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक युवा पीढ़ी का निर्माण होता है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर स्कॉलरशिप देने की प्रक्रिया से छत्तीसगढ़ में समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में आसान होगी।

किसान ने ₹40 हजार के सिक्कों से की स्कूटी की खरीदारी, शोरूम मालिक भी हुआ भावुक

जशपुर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला मुख्यालय में मेहनत की कमाई का एक अद्भुत दृश्य सामने आया, जिसने देवनारायण होंडा शोरूम में मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया. यहाँ एक किसान अपने परिवार के साथ स्कूटी खरीदने पहुंचा, लेकिन भुगतान का तरीका सबसे हटकर था. किसान ने स्कूटी की कीमत का एक बड़ा हिस्सा सिक्कों में चुकाया. वह बोरे में भरकर 10 और 20 रुपये के सिक्के लेकर आया था, जिनकी कुल कीमत 40 हज़ार रुपये थी. किसान ने बताया कि उसने ये पैसे पिछले 6 महीनों की कड़ी मेहनत से बचाकर इकट्ठे किए थे. खास बात यह रही कि सिक्कों की इस बड़ी राशि को गिनने में शोरूम के कर्मचारियों को घंटों का समय लगा. स्कूटी की बाकी की राशि का भुगतान किसान ने नोटों में किया. किसान की सादगी और उसकी कड़ी मेहनत से प्रभावित होकर, शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने एक मिसाल पेश की. आनंद गुप्ता ने न सिर्फ खुशी-खुशी इन सिक्कों को स्वीकार किया, बल्कि किसान की मेहनत को सम्मान देते हुए किसान परिवार को स्कूटी के साथ एक खास उपहार भी भेंट किया. यह कहानी न केवल स्कूटी खरीदने के एक अनोखे तरीके को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि मेहनत की कमाई का मूल्य कितना बड़ा होता है.

डिप्टी सीएम साव, मंत्री केदार और मंत्री चौधरी ने राज्योत्सव व प्रधानमंत्री के नवा रायपुर प्रवास की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

रायपुर. उप मुख्यमंत्री अरुण साव  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के साथ राज्योत्सव तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नवा रायपुर प्रवास की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्योत्सव की तैयारियों में जुटे अधिकारियों के साथ विभिन्न व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने अधिकारियों को संपूर्ण आयोजन में किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए पूरी क्षमता और योग्यता से समय पूर्व सभी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में राज्योत्सव पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आगमन को ऐतिहासिक और यादगार बनाना है। इसके लिए तैयारियों में कोई कोर-कसर न छोड़ें। प्रधानमंत्री के प्रवास के दौरान सभी कार्यक्रमों के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए तेजी से कार्य करते हुए सभी व्यवस्थाओं को मूर्त रूप दें। उप मुख्यमंत्री  साव तथा मंत्रीद्वय केदार कश्यप और ओ.पी. चौधरी ने राज्योत्सव के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम स्थल पर सेक्टर्स की स्थिति, बैठक क्षमता, परिक्रमा पथ के लोकेशन एवं सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था व पेयजल व्यवस्था के साथ ही वीवीआईपी सेक्टर की क्षमता, सुव्यवस्थित पहुंच मार्ग तथा सभी कार्यक्रमों के व्यवस्थित आयोजन की रुपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, रायपुर नगर निगम के आयुक्त विश्वदीप और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

मधुमक्खी हमले से बचने के चक्कर में पिता-पुत्र की तालाब में डूबकर मौत

जगदलपुर करपावंड थाना क्षेत्र के ग्राम चोकनार में पिता-पुत्र की तालाब में डूबने से मौत हो गई. दोनों जंगल में शहद निकालने गए थे. इस दौरान मधुमक्खियों ने उनपर हमला कर दिया. मधुमक्खियों से बचने के लिए दोनों ने तालाब में छलांग लगा दी. तालाब में काफी देर तक डूबे रहने से उनकी मौत हो गई. काफी देर बाद भी उनके बाहर न निकलने पर ग्रामीणों ने तालाब में खोजबीन की और उनके शव को तालाब से बाहर निकाला. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आगे की कार्रवाई में जुट गई है.

बस्तर ओलिंपिक 2025: खेलों से शांति और समरसता का संदेश

रायपुर, छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग में युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ का आयोजन किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन प्रदेश के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बनेगा। बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति लोगों में उत्साह का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें 1 लाख 63 हजार 668 पुरुष और 2 लाख 27 हजार 621 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह  संख्या न केवल बस्तर के युवाओं का खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बस्तर की धरती पर अब खेल एक नई सामाजिक चेतना और समान भागीदारी का प्रतीक बन चुके हैं। बस्तर की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भीतर निहित नैसर्गिक खेल प्रतिभा को पहचानना है। यह पहल केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास व संवाद का सेतु बनेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था – “बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है, यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।"यह मॉडल पूरे देश में ‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ की अनूठी पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, कराते, वेटलिफ्टिंग और हॉकी जैसे खेल शामिल हैं। इसमें न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिलेगा। बस्तर ओलंपिक में जूनियर (14-17 वर्ष) और सीनियर वर्ग के अलावा विशेष श्रेणी के प्रतिभागियों—नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए व्यक्ति और आत्मसमर्पित नक्सलियों—को भी सम्मिलित किया जा रहा है। यह पहल खेल के माध्यम से पुनर्वास, पुनर्जीवन और सामाजिक एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। प्रतियोगिताएं तीन स्तरों—विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर—पर आयोजित हो रही हैं।  विकासखण्ड स्तर पर प्रतियोगिता 25 अक्टूबर से, जिला स्तर पर 5 नवम्बर से और संभाग स्तर पर 24 नवम्बर से आयोजित की जाएगी। विजेताओं को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की जाएगी। नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा। यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा। ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ के लिए वन भैंसा और पहाड़ी मैना को शुभंकर (Mascot) बनाया गया है, जो बस्तर की जीवंतता और सामुदायिक शक्ति का प्रतीक हैं। यह आयोजन न केवल खेलों का, बल्कि बस्तर की संस्कृति, सौहार्द और विकास के नए युग का उत्सव बनेगा।

गजमार पहाड़ की नई पहचान: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया विकास कार्यों का अवलोकन

रायपुर, प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने रायगढ़ के गजमार पहाड़ स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में जारी सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर कलेक्टर रायगढ एवं डीएफओ रायगढ़ उपस्थित रहे।              पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित होगा          निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि शासन की योजनाओं का केवल निर्माण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन ही असली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य जनसामान्य को वास्तविक लाभ पहुंचाना है और इसके लिए योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि हनुमान मंदिर परिसर में हो रहे सौंदर्यीकरण कार्यों से न केवल धार्मिक पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि गजमार पहाड़ी रायगढ़ की शान है। ऐसा स्थल शहर के बीच इतनी ऊँचाई और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है। गजमार पहाड़ी इको टूरिज्म स्थल के रूप में होगा विकसित             वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी की पहल पर रायगढ़ जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र गजमार पहाड़ी स्थित हनुमान धाम अब आधुनिक स्वरूप में इको पार्क और इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित होगा। बीते दिवस वित्त मंत्री श्री चौधरी ने 08 करोड़ रुपए की लागत से यहां होने वाले विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमि पूजन किया था। गजमार पहाड़ी मंदिर विकास योजना की जानकारी देते हुए डीएफओ ने कहा कि विभागीय मार्गदर्शन और सुव्यवस्थित योजना के तहत पहाड़ मंदिर को नया स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालु एवं पर्यटक आसानी से ऊपर तक पहुंच सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत स्वीकृत सीढ़ियों का विकास कार्य, अवेयरनेस एक्टिविटी के लिए ओपन प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। वाच टॉवर, चिल्ड्रन एरिया और कैंटीन जैसी सुविधाओं से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मिलेगा      साथ ही वाच टॉवर, चिल्ड्रन एक्टिविटी एरिया, कैन्टीन, पैगोड़ा, पब्लिक वाशरुम, वाश एरिया निर्माण, यूटिलिटी एरिया, पार्किंग एवं प्रवेश स्थल का विकास कार्य, पाथ-वे निर्माण एवं प्रवेश द्वार निर्माण कार्य हो रहा है। इन सभी सुविधाओं के विकसित हो जाने पर गजमार पहाड़ी न केवल धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि पर्यटन और स्वास्थ्य गतिविधियों के दृष्टिकोण से भी एक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।

माओवादी मोर्चे पर निर्णायक सफलता: कमांडरों की मौत से संगठन की रीढ़ टूटी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में पंजाब सरकार के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुण्डियन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री साय को 9वें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान, त्याग और मानवता के प्रति उनके संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालुओं, संत महात्माओं और विभिन्न राज्यों के गणमान्य नागरिकों के सम्मिलित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंजाब सरकार के मंत्रियों द्वारा दिए गए आमंत्रण के लिए हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया। मुलाकात के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने जीवन में धर्म, मानवता और समानता के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री साय ने पंजाब सरकार के इस आयोजन की सराहना करते हुए इसके सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान न केवल सिख समाज के लिए बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए अमर संदेश है, जिसने हमें सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा दी है।

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को दिया आमंत्रण

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में पंजाब सरकार के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुण्डियन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री साय को 9वें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान, त्याग और मानवता के प्रति उनके संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालुओं, संत महात्माओं और विभिन्न राज्यों के गणमान्य नागरिकों के सम्मिलित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंजाब सरकार के मंत्रियों द्वारा दिए गए आमंत्रण के लिए हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया। मुलाकात के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने जीवन में धर्म, मानवता और समानता के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री साय ने पंजाब सरकार के इस आयोजन की सराहना करते हुए इसके सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान न केवल सिख समाज के लिए बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए अमर संदेश है, जिसने हमें सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा दी है।

रायपुर : महतारी वंदन योजना ने बदली श्यामा की ज़िंदगी, बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर सरकारी योजनाएं तभी असर दिखाती हैं, जब वे सीधे आमजन के जीवन में बदलाव लाएं। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना ऐसी ही तस्वीर लिख रही है। मुंगेली जिले के ग्राम किरना की श्यामा नेताम इसका उदाहरण है। कभी मजदूरी और सीमित खेती पर आश्रित यह परिवार आज आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से खड़ा है, वो भी एक छोटे से प्रयास और बड़ी सोच की वजह से। श्यामा को बकरी पालन का अनुभव तो था, मगर पूंजी की कमी बड़ी बाधा थी। इसी बीच महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपए ने उनकी उम्मीद को नई दिशा दी। श्यामा ने राशि खर्च करने के बजाय उसे कुछ महीने तक बचाया और उसी से एक बकरी खरीदी। यहीं से शुरू हुआ बदलाव का सफर, रकम भले छोटी थी, लेकिन हौसला बड़ा। धीरे-धीरे बकरियों की संख्या बढ़ी और आज श्यामा परिवार की आय में 3000 रुपए प्रति माह जोड़ रही हैं। बच्चों की पढ़ाई हो या रोजमर्रा का खर्च, सब कुछ अब पहले से ज्यादा व्यवस्थित है। सबसे बड़ी बात श्यामा अब खुद को आश्रित नहीं, आत्मनिर्भर कहने लगी हैं। श्यामा नेताम कहती हैं कि ‘योजना ने मुझे नया हौसला दिया। अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हूँ। पहले घर चलाना मुश्किल था, लेकिन अब अपने दम पर परिवार संभाल पा रही हूँ। यह योजना सच में महिलाओं के लिए नई शुरुआत है। यह बदलाव यूं ही नहीं आया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना का मकसद महिलाओं को केवल सहारा नहीं, आर्थिक स्वतंत्रता देना है। इस योजना की बदौलत श्यामा जैसी हजारों महिलाएं अपनी पहचान और सम्मान की नई कहानी लिख रही हैं। गांव में आज श्यामा प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी मुस्कान बताती है कि छोटे अवसर भी बड़ा भविष्य बना सकते हैं, बस जरूरत है विश्वास, निरंतरता और सही दिशा की।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने लिया तैयारियों का जायजा, एक नवंबर को पीएम मोदी करेंगे राज्योत्सव का शुभारंभ

रायपुर : राज्योत्सव के मंच से उभरेगा डिजिटल और विकसित छत्तीसगढ़ संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने लिया तैयारियों का जायजा, एक नवंबर को पीएम मोदी करेंगे राज्योत्सव का शुभारंभ ‘नई सोच, नया छत्तीसगढ़’ थीम पर होगा भव्य आयोजन रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष राज्य सरकार भव्य रजत राज्योत्सव मनाने जा रही है। राजधानी नया रायपुर में 1 नवंबर को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी पांच दिवसीय राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम को ऐतिहासिक और आधुनिक स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान देश के पहले आदिवासी डिजिटल संग्रहालय, नया विधानसभा भवन और ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ‘शांति शिखर’ अकादमी का भी उद्घाटन करेंगे। वे सत्य सांई हॉस्पिटल में हृदय उपचार से लाभान्वित बच्चों से भी मुलाकात करेंगे। संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने लिया तैयारियों का जायजा संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने राज्योत्सव की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्योत्सव स्थल पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। इसके अलावा फूड जोन और शिल्पग्राम के साथ ही यहां आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए विभिन्न स्टॉल लगाये जाएंगे। मुख्य मंच पर आकर्षक सांस्कृति कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी होगी। मंत्री अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में राज्योत्सव और संग्रहालय का अवलोकन कर राज्य की गौरवगाथा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर मनाया जा रहा राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विकास यात्रा का उत्सव है। संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृति में बनाए जा रहे नवीन आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और पुरखौती मुक्तांगन का निरीक्षण कर पुरखौती मुक्तांगन में नवनिर्मित रामवनगमन पथ, सीताबेंगरा एवं रामगढ़ की पहाड़ी की प्रतिकृति का अवलोकन किया और यहां किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त डॉ. सरांश मित्तर, संस्कृति विभाग के संचालक  विवेक आचार्य सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  डिजिटल तकनीक से लैस है आदिवासी संग्रहालय नवा रायपुर में विकसित देश का पहला आधुनिक आदिवासी डिजिटल संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जननायकों, वीरता और लोक संस्कृति की गाथा को नवीन तकनीक और वर्चुअल रियलिटी माध्यम से प्रस्तुत करेगा। संग्रहालय में पारंपरिक कलाओं के साथ डिजिटल इंटरएक्टिव अनुभव भी दर्शकों को आकर्षित करेंगे। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘इस वर्ष राज्योत्सव ‘नई सोच, नया छत्तीसगढ़’ थीम पर मनाया जा रहा है, जो राज्य के डिजिटल, सांस्कृतिक और विकासशील स्वरूप का प्रतीक बनेगा।‘ उन्होंने यहां एआई पर आधारित डिजिटल स्वचालित कैमरे लगाये गए हैं, जिसमें कैमरे के सामने आने पर स्वतः ही आदिवासी वेषभूषा पर छायाचित्र खिंच जाती है।  25वें राज्योत्सव में देश-विदेश के कलाकारों की प्रस्तुतियां, भारतीय वायुसेना का सूर्यकिरण एयर शो, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, स्थानीय उत्पादों के स्टॉल, डिजिटल एक्सपीरियंस जोन और वीआर जोन विशेष आकर्षण रहेंगे। राज्योत्सव स्थल पर तीन विशाल डोम बनाए जा रहे हैं, जिनमें 60 एलईडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं। करीब 40 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था, 300 शौचालय, 20 बेड का अस्थायी हॉस्पिटल, आईसीयू यूनिट और 25 एम्बुलेंस तैयार रखी गई हैं। इसके अलावा नए चौराहों का सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था का कार्य भी अंतिम चरण में है।