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हाईकोर्ट का फैसला: पति के लिए आपत्तिजनक भाषा और अलगाव की जिद को माना मानसिक अत्याचार

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी द्वारा पति को ‘पालतू चूहा’ कहने और ससुराल के माता-पिता से अलग रहने की जिद को मानसिक क्रूरता करार दिया है. अदालत ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए पति को तलाक की मंजूरी दे दी. साथ ही, पत्नी को 5 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता और बेटे के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया है. मामला एक दंपती का है, जहां पत्नी ने पति पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने पत्नी के व्यवहार को ही क्रूरता माना. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था में पति को माता-पिता से अलग करने की जिद रखना स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता है. न्यायमूर्ति ने जोर देकर कहा, पारंपरिक परिवार संरचना में ऐसी मांगें वैवाहिक संबंधों को तोड़ने का आधार बन सकती हैं. फैमिली कोर्ट का फैसला सही फैमिली कोर्ट ने पहले ही पति की याचिका पर तलाक मंजूर किया था, लेकिन पत्नी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान पति ने दावा किया कि पत्नी का अपमानजनक व्यवहार और अलग रहने की जिद ने उनके जीवन को नर्क बना दिया. अदालत ने सबूतों की जांच के बाद फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया. यह फैसला वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता की परिभाषा को विस्तार देता है. पीड़ित पतियों को राहत मिलेगी! कानूनी विशेषज्ञों का मानना है हाईकोर्ट के इस फैसले से पतियों को राहत मिलेगी, जो पत्नियों के ऐसे व्यवहार से परेशान हैं. वहीं, इस मामले में पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश देकर अदालत ने आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित किया. मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद पति ने राहत की सांस ली.

स्वास्थ्य सेवाओं और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर में

रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज भटगांव विधानसभा अंतर्गत भैयाथान में कई कार्यक्रमों में भाग लेकर क्षेत्रवासियों से संवाद स्थापित किया और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की। मंत्री श्रीमती राजवाड़े इस दौरान ग्राम बंजा के उपस्वास्थ्य केंद्र में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को निःशुल्क परामर्श एवं उपचार की सुविधा दी गई, जिससे लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। मंत्री भैयाथान स्थित मंगल भवन में आयोजित अग्रसेन जयंती समारोह में भाग ली। समाज के प्रबुद्धजनों एवं नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य रूप दिया। इस अवसर पर मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा, “अग्रसेन महाराज के आदर्शों को जीवन में अपनाकर हम समाज में भाईचारे, समानता और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत कर सकते हैं। हमें समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।” भैयाथान प्रवास के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, जनपद कार्यालय, विकासखंड कार्यालय एवं शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से विभिन्न कार्यों की जानकारी ली और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की।

श्रद्धालुओं के सपनों को साकार कर रही है मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायगढ़ जिले के 1200 से अधिक श्रद्धालुओं ने उठाया योजना का लाभ रायपुर रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम ऑडिटोरियम में रामलला दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान में भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने भगवान राम की छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। रामायण आरती के साथ वातावरण राममय हो उठा।  चौधरी ने श्रद्धालुओं का चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कहा कि यह योजना वास्तव में बुजुर्गों के सपनों को साकार करने वाली योजना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी का भगवान राम से गहरा नाता है। माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की बेटी थीं, इसलिए भगवान राम को हम भांजा मानते हैं। उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में 14 वर्षों का वनवास समाप्त हुआ था, लेकिन कलियुग में राममंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक अयोध्या का भव्य मंदिर आज साकार हुआ है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि श्रद्धालुओं को रामलला और प्रमुख तीर्थों का दर्शन कराया जाएगा। आज रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना हजारों परिवारों के लिए आशीर्वाद बन चुकी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने गांवों में राम के आदर्शों और उनके चरित्र का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं जिला पंचायत सीईओ  जितेंद्र यादव ने बताया कि तीर्थयात्रियों के लिए आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा की संपूर्ण व्यवस्था की जाती है। प्रत्येक यात्री को विशेष पहचान पत्र भी प्रदान किया गया। इच्छुक श्रद्धालु आगामी यात्राओं के लिए जिला पंचायत और नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव जिले के विभिन्न विकासखण्डों से अब तक 1206 श्रद्धालु (745 पुरुष एवं 461 महिलाएं) अयोध्या, काशी और अन्य तीर्थों का दर्शन कर चुके हैं। सम्मेलन में श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया। पुसौर निवासी  खगेश्वर पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, वर्तमान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के प्रयास से ही यह संभव हुआ। राजकुमारी साव ने यात्रा को सहज और सुखद बताते हुए कहा कि पूरी यात्रा परिवार जैसे वातावरण में पूरी हुई। उमेश सिंह सिदार ने कहा कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु लगातार कार्य कर रही है। वहीं सावित्री भगत ने कहा कि अयोध्या दर्शन उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। सुनील थवाईत ने बताया कि यात्रा में स्वच्छ भोजन, सुरक्षा और स्वागत की उत्कृष्ट व्यवस्था रही। काशी और अयोध्या के दर्शन उनके जीवन के सबसे सुखद क्षण रहे। सम्मेलन में योजनाओं से जुड़ी अविस्मरणीय स्मृतियों को समेटे हुए वीडियो प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक ग्रुप फोटो लिया गया। श्रद्धालुओं को स्मृति स्वरूप रामचरितमानस की पुस्तक, शाल, फल और यात्रा के फोटोग्राफ भेंट किए गए। इस अवसर पर नगर निगम रायगढ़ महापौर  जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दीपक सिदार, नगर निगम सभापति  डिग्रीलाल साहू, जिला पंचायत सदस्य मती सुषमा खलखो सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ  जितेंद्र यादव और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

नक्सल प्रभावित बस्तर में खेलों की नई पहल, ओलंपिक 2025-26 के लिए पंजीयन प्रारंभ

रायपुर बस्तर अंचल के युवाओं को खेलों की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “बस्तर ओलंपिक 2025-26” का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए खिलाड़ियों का पंजीयन शुरू हो गया है। सरकार ने सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर बस्तर ओलंपिक प्रतियोगिता में अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग इस आयोजन का मुख्य आयोजन विभाग होगा जबकि गृह (पुलिस) विभाग को नोडल विभाग नियुक्त किया गया है। विकासखण्ड स्तर पर आयोजन समिति का गठन संबंधित कलेक्टरों द्वारा किया जाएगा। जिला और संभाग स्तरीय समितियां सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार गठित की गई हैं। जिला स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत या किसी वरिष्ठ राज्य प्रशासनिक अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। शुभंकर एवं लोगो बस्तर ओलंपिक का शुभंकर और लोगो पिछले वर्ष की तरह इस बार भी “वन भैंसा” और “पहाड़ी मैना” होंगे। इनका उपयोग व्यापक प्रचार-प्रसार में किया जाएगा। शासन ने सभी जिलों को प्रतियोगिता में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने, पंजीयन सुविधा और अन्य तैयारियाँ तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए है। यह आयोजन बस्तर क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और शासन एवं जनता के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी। राज्य शासन की मंशा है कि इस आयोजन के माध्यम से बस्तर अंचल की खेल प्रतिभाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिले तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा मिले। इस आयोजन की खासियत यह है कि नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों एवं आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों को सीधे संभाग स्तर पर प्रतिभागिता का अवसर दिया जाएगा। इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा। वेटलिफ्टिंग और हॉकी की प्रतियोगिताएं जिला स्तर से होंगी जबकि अन्य खेलों में विकासखण्ड से लेकर संभाग स्तर तक मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन त्रिस्तरीय स्वरूप में विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर पर किया जाएगा। आयोजन में 11 खेल होंगे जिसमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराते, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साकशी जैसे खेल शामिल होंगे। प्रतियोगिता जूनियर एवं सीनियर वर्ग में होगी। प्रतियोगिता में शामिल खेल आयोजन में एथलेटिक्स के अंतर्गत 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो और 4×100 मीटर रिले रेस का आयोजन होगा। तीरंदाजी में इंडियन राउंड 30 और 50 मीटर, वेटलिफ्टिंग में जूनियर व सीनियर वर्गों के लिए अलग-अलग भार वर्ग और कराते में आयु एवं वजन के आधार पर वर्ग निर्धारित किए गए हैं। कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और फुटबॉल में भी खिलाड़ियों को व्यापक अवसर मिलेगा। रस्साकशी केवल महिला सीनियर वर्ग के लिए प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में आयोजित होगी। पंजीयन 22 सितंबर से 20 अक्टूबर तक प्रतियोगिता के लिए पंजीयन प्रक्रिया 22 सितंबर से 20 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इसके बाद 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक विकासखण्ड स्तरीय, 5 से 15 नवंबर तक जिला स्तरीय और 24 से 30 नवंबर तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिता दो आयुवर्गों में होगी, जूनियर वर्ग 14 से 17 वर्ष तक तथा सीनियर वर्ग जिसमें कोई आयु सीमा नहीं रहेगी।

रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम की संभावना, जानिए कैसे होगा कानून व्यवस्था का बेहतर नियंत्रण

रायपुर  कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी है। सीएम विष्णुदेव साय के बाद राज्य के गृहमंत्री और डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने भी कमिश्नरी सिस्टम को लेकर अहम जानकारी दी है। विजय शर्मा ने कहा कि हम कमिश्नरी प्रणाली लेकर आ रहे हैं, जिससे पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित होगी और पुलिस त्वरित निर्णय ले सकेगी। जीरो पॉइंट पर निर्णय लेने के लिए प्रैक्टिस चल रही है। क्या है कमिश्नरी सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस आयुक्त के पास कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से संबंधित सभी शक्तियां होती हैं। ज्यादा शक्तियां होने से पुलिस को तेजी से निर्णय ले सकती है। इस सिस्टम के तहत पुलिस आयुक्त के पास जिला मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां हो जाती हैं। कई जगहों पर लागू है यह सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम देश के कई राज्यों में बड़े शहरों में लागू है। जिले का एसपी पुलिस का मुखिया होता है। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना एसपी की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन यह सिस्टम लागू होने के बाद एसपी, एसएसपी की जगह पुलिस कमिश्नर होता है। पुलिस कमिश्नर किस रैंक के अधिकारी को बनाया जाएगा यह फैसला राज्य सरकार करती है। राज्य सरकार डीआईजी से लेकर एडीजी स्तर तक के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दे सकती है। जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है वह अनुभवी अफसर होते हैं। राज्य सरकार उसके अधिकारों को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। कौन-कौन से अधिकार देने हैं यह राज्य सरकार तय करती है। यह जरुरी नहीं है कि सारे अधिकार डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट के जैसे हों। क्या बदलाव होंगे कमिश्नरी बन जाने से सबसे बड़ा फर्क यह पड़का है कि जिला पुलिस का मुखिया एक अनुभवी और ऊंचे रैंक वाला अधिकारी होता है। बहुत सारे काम उसकी मंसा के अनुरुप होते हैं। पुलिसिंग व्यवस्था प्रभावी बनती है। जरुरत के मुताबिक पुलिस फोर्स मिल सकती है। इसका फायदा आम जनता को भी मिलता है। छोटे मोटे दंड वाले अपराधों की तफ्तीस का अधिकार हेड कांस्टेबल को मिल जाता है। जिससे अपराध को नियंत्रण पर में मदद मिलती है। अभी ऐसे मसलों का निपटारा एसएआई या एसआई रैंक के अधिकारी करते हैं।

कुलियों का प्रदर्शन: परिवार के भरण-पोषण पर संकट, बैटरी वाहनों का विरोध तेज

रायपुर राजधानी रायपुर के रेल यात्रियों को आज रेलवे स्टेशन में कुली नहीं मिले। क्योंकि रायपुर रेलवे स्टेशन पर कुलियों ने अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। रायपुर रेलवे स्टेशन पर बैटरी वाहनों के आने को लेकर कुलियों ने जोरदार विरोध किया। कुलियों का कहना है कि पहले ही चक्के वाली ट्रॉली के कारण काम नहीं मिलता था। स्टेशन में बैटरी वाले वाहनों के आने से उनका काम पूरी तरह से बंद हो जाएगा। इस मामले में कुलियों का कहना है कि भाटापारा, तिल्दा, दुर्ग रेलवे स्टेशनों में बैटरी कार का परिचालन किया जाना है। बैटरी कार के परिचालन से हम लाइसेंसी पोर्टर्स के बचे-खुचे कार्य पर प्रभाव पड़ेगा और आमदनी कम होने से परिवार चलाना मुश्किल होगा। विदित हो कि पूर्व में भी एस्केलेटर, लिफ्ट, रैंप एवं बैटरी गाड़ी (निःशुल्क) इत्यादि के कारण लगभग 80 प्रतिशत कार्य पहले ही कम हो चुका है। इसके लिए हमारे द्वारा किसी भी प्रकार का विरोध नहीं किया गया था, क्योंकि हमारा रेलवे स्टेशन संपूर्ण सुविधाओं से परिपूर्ण रहना चाहिए। लेकिन बैटरी कार के परिचालन से समस्त कुली परिवार प्रभावित होंगे। कुलियों का कार्य कम होने से आर्थिक संकट गहरा जाएगा। कुलियों के समक्ष अपने परिवार के भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। बैटरी कार का परिचालन रायपुर, भाटापारा और दुर्ग में नहीं किया जाए, जिससे कि लाइसेंसी कुली अपने-अपने परिवार का भरण-पोषण बिना किसी मानसिक दबाव के कर सकें।

मुख्यमंत्री ने जताया विश्वास – मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का सपना होगा साकार

नारायणपुर के अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता : दो इनामी नक्सली ढेर रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नारायणपुर ज़िले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों की ओर से चलाए गए सफल अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 2 नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए हैं। दोनों पर 40-40 लाख रुपये का इनाम घोषित था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता केवल नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव ही नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को और भी गति प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और समर्पण से ही प्रदेश आज शांति और विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के विज़न और माननीय केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह जी के नेतृत्व में नक्सलवाद का अंत अब पहले से कहीं अधिक निकट और निश्चित होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अवश्य साकार होगा।

कोयला घोटाला: सौम्या चौरसिया के निज सचिव की गिरफ्तारी, EOW ने स्पेशल कोर्ट में पेश किया

रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में EOW ने कार्रवाई तेज कर दी है. रविवार को कई जगहों पर छापेमारी के बाद सोमवार को पूर्व IAS सौम्या चौरसिया के निज सचिव रहे जयचंद कोसले को गिरफ्तार कर ACB/EOW की विशेष कोर्ट में पेश किया है. जयचंद कोसले पर आरोप है कि उन्होंने सौम्या चौरसिया का निज सचिव रहते हुए कोल घोटाले से 50 लाख रुपए कमाया है. EOW आय कोर्ट से जयचंद को 14 दिन के पुलिस रिमांड में लेने का प्रयास कर रही है. प्रदेश में कुल 10 ठिकानों पर रेड बता दें, आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने ‘शराब घोटाला’ और ‘कोयला घोटाला’ मामलों में  रविवार की सुबह राजधानी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की. राजधानी रायपुर में शराब कारोबारी अवधेश यादव और उनके सहयोगियों के छत्तीसगढ़ स्थित 3 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की. इसके अलावा सौम्या चौरसिया के निजी सहायक रहे जयचंद कोसले के सभी ठिकानों पर भी दबिश कार्रवाई पूरी कर ली गई है. दोनों घोटालों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, नगदी और तकनीकी उपकरण जब्त किए गए जिनकी जांच फिलहाल जारी है. साथ ही यह कार्रवाई सुबह से रात लगभग 11ः30 बजे तक चली. रेड कार्रवाई के दूसरे दिन आज जयचंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है. क्या है कोयला घोटाला मामला ? ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की. जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई. 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था. खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था. यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है. पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया. इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी. इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई. कहां खर्च की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया. साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्‍तेमाल किया गया. आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा. क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामला? ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान साल 2019 से 2022 तक लाइसेंसी शराब दुकानों पर डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बेची जाती थी, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था. उस दौरान शराब को स्कैनिंग से बचाने के लिए नकली होलोग्राम भी लगाया जाता था, ताकि वह किसी की पकड़ में न आ सके. इस होलोग्राम को बनाने के लिए घोटाले में संलिप्त लोगों ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में होलोग्राफी का काम करने वाली PHSE (प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फ़िल्म्स प्राइवेट लिमिटेड) कंपनी को टेंडर दिया था. ईडी ने अपनी जांच के बाद यह बताया है कि यह कंपनी होलोग्राम बनाने के लिए पात्र नहीं थी, फिर भी नियमों में संशोधन करके यह टेंडर उसी कंपनी को दे दिया गया था. ईडी के टेंडर दिलाने के एवज में कंपनी के मालिक से भारी कमीशन लिया गया था. यह जानकारी सामने आने के बाद जब कंपनी के मालिक विधु गुप्ता को ईडी ने गिरफ्तार किया तो उसने कांग्रेस सरकार में CSMCL में एमडी अरुणपति त्रिपाठी, बिजनेसमैन अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम लिया. ED ने जब इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो मामले में और भी खुलासे होने लगे. इसके बाद साल 2024 के अंत में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम सामने आया. सूत्रों के मुताबिक ED की जांच में पता चला है कि कवासी लखमा को शराब घोटाले से पीओसी से हर महीने कमिशन मिलाता था.

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने दो नक्सलियों को ढेर किया

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में आज सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में अब तक दो माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। साथ ही AK-47 समेत भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र के अबूझमाड़ में मुठभेड़ हुई। सुबह से शुरू जारी है। माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षाबलों ने सर्च अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान माओवादियों के साथ रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी है। सुरक्षाबलों और पुलिस को अब तक घटना स्थल से दो पुरुष माओवादियों के शव के साथ हथियार बरामद हुए हैं। माओवादियों से एक एके-47 राइफल, अन्य हथियार, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, माओवादी साहित्य, प्रचार-प्रसार सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं जब्त की है। मारे गए माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सर्च अभियान अभी भी जारी है। अभियान पूर्ण होने पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

CGPSC परीक्षा घोटाला: रिटायर्ड IAS सहित पांचों आरोपी CBI कोर्ट में हुए पेश

रायपुर CGPSC घोटाला मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को आज सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया गया है. पांचों आरोपी पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पीएससी के सचिव रहे पूर्व आईएएस जीवनलाल ध्रुव, सुमीत ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल को सीबीईओ ने गिरफ्तार किया. कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड पर सभी को सीबीआई रिमांड पर सौंपा था. आज रिमांड पूरी होने पर फिर से सभी को कोर्ट में पेश किया गया है. इससे पहले 7 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी सीजीपीएससी घोटाले में सीबीआई ने आज लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक रही आरती वासनिक, पीएससी के सचिव रहे पूर्व आईएएस जीवनलाल ध्रुव और उनके बेटे सुमित ध्रुव समेत निशा कोसले, दीपा आदिल को गिरफ्तार किया था. इससे पहले 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. सीबीआई ने 18 नवंबर को तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 10 जनवरी को पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष के भतीजे, डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयनित) और ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, सीजीपीएससी) शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, 12 जनवरी को शशांक गोयल और भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चयनित) और साहिल सोनवानी (डिप्टी एसपी पद के लिए चयनित) को गिरफ्तार किया गया. वर्तमान में सभी आरोपी जेल में बंद हैं. जानें क्या है सीजीपीएससी घोटोला सीजीपीएससी घोटाला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में 2020 से 2022 के बीच हुई अनियमितताओं से जुड़ा मामला है. आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा कर, प्रभावशाली राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी तथा अन्य उच्च पदों पर चयनित किया गया. इस घोटाले ने प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए. छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई. जांच एजेंसी ने छापेमारी कर कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद किए और पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया. वर्तमान में यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है.