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मंत्री राजवाड़े ने शासकीय योजनाओं के धरातल पर बेहतर क्रियान्वयन के दिए निर्देश

रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कोंडागांव जिले के प्रवास के दौरान विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लिया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने नशा मुक्ति केंद्र, आंगनबाड़ी केन्द्रों, सखी वन स्टॉप सेंटर, हॉफवे होम और बालिका गृह का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बनियागांव स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात की और नशे से होने वाले दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए उन्हें सुधार की राह अपनाने की सलाह दी। इसके पश्चात उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हुए बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार और शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी ली। बच्चों की कविताओं, कहानियों और उत्तरों से प्रभावित होकर मंत्री ने उनकी सराहना की और चॉकलेट वितरित किए। निरीक्षण के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किचन और बाथरूम की नियमित सफाई की जाए। श्रीमती राजवाड़े ने सखी वन स्टॉप सेंटर में काउंसलिंग प्रक्रिया को देखा और पीड़ित महिलाओं की समुचित मानसिक सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं हॉफवे होम में अन्य राज्यों से आए व्यक्तियों की जानकारी ली और उन्हें उनके गृह राज्य तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। बालिका गृह में रह रही बेटियों की खेल और पढ़ाई में रुचि को देखकर उन्होंने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। निरीक्षण दौरे में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक श्री पीएस एल्मा, एसडीएम श्री अजय उरांव सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

हस्तशिल्प और महिला स्वावलंबन को बढ़ावा: मंत्री राजवाड़े ने किया शबरी एंपोरियम व फैक्ट्री का अवलोकन

रायपुर महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े आज कोंडागांव जिले के प्रवास पर रहीं। उन्होंने जिले में स्थित शबरी एंपोरियम में बेलमेटल कला की कलाकृतियों का अवलोकन किया और प्रसिद्ध शिल्पकार डॉ. जयदेव बघेल के पुत्र भूपेंद्र बघेल से भेंट कर शिल्प प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही नारियल विकास बोर्ड के कार्यालय पहुंचकर नारियल, कोको और काली मिर्च के उत्पादन की जानकारी ली। कोंडागांव स्थित गारमेंट फैक्ट्री में महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखकर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रसन्नता व्यक्त की। यह फैक्ट्री पिछले तीन वर्षों से संचालित है और इससे 300 महिलाओं को सीधा रोजगार मिला है। उन्होंने ऐसी इकाइयों के विस्तार पर बल देते हुए महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए और अधिक प्रयास करने की बात कही। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पीएस एल्मा, एसडीएम अजय उरांव सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

शिक्षकों की नियुक्ति से खिल उठे छात्र, रायपुर में दूर हुई पढ़ाई की परेशानी

रायपुर कोरबा जिले में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पचरा के हाई स्कूल में विद्यार्थियों की कोई कमी नहीं है। आसपास के एक दर्जन से अधिक गाँव के विद्यार्थी इस विद्यालय बहुत ही उम्मीद के साथ यह सोचकर दाखिला लेते हैं कि यहाँ से पढ़कर, पास होकर आगे की पढ़ाई जारी रखेंगे। पिछले कुछ सालों से उनके गाँव के सबसे नजदीक इस विद्यालय में नियमित शिक्षको की कमी थी। स्कूल में शिक्षकों की कमी उन्हें ही नहीं उनके माता-पिता को भी अक्सर चिंता में डालती थी। जिले में संचालित ऐसे विद्यालय जहाँ युक्ति युक्तकरण के पश्चात भी शिक्षको की कमी रह गई थीं उन विद्यालयों की सूची तैयार कर डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों को नियुक्ति प्रदान की गई है। कोरबा जिला प्रशासन की इस पहल के बाद शासकीय हाई स्कूल पचरा में अब किसी विषय का कालखण्ड खाली नहीं जाता। दूरस्थ क्षेत्र से स्कूल आने वाले हर विद्यार्थियों को इस विद्यालय में शिक्षको से अध्यापन और विषय का ज्ञान मिलता है।    डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। इसी क्रम में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पचरा में संचालित हाई स्कूल में भी शिक्षको की कमी बनी हुई थी। कई विषयों के नियमित शिक्षक नहीं होने से यहाँ के विद्यार्थी उन विषयों की पढ़ाई अन्य शिक्षको के माध्यम से करते तो थे लेकिन उन्हें अक्सर महसूस होती थी कि काश सभी विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध हो। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से की गई मानदेय शिक्षको की नियुक्ति से जहाँ विद्यार्थियों को शिक्षक मिल गए, वहीं गाँव के आसपास रहने वाले बेरोजगार युवाओं को रोजगार के साथ अध्यापन का अवसर भी मिल गया है। पचरा के हाई स्कूल में मानदेय शिक्षक के रुप में अध्यापन कराने वाली शिक्षिका अभिलाषा सिंह तंवर और लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने बीएड किया ताकि स्कूल में पढ़ाई करा सके। जिले में मानदेय शिक्षक की भर्ती होने पर उन्होंने अपना आवेदन किया था, अब नियुक्ति होने के बाद वह स्कूल में पढ़ाती है। उन्होंने बताया कि मानदेय शिक्षक के रूप में स्कूल में अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। मानदेय मिलने से घर का खर्च चलाने में सहूलियत होने लगी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को भी खुशी होती है कि उनका कोई भी विषय खाली नहीं जाता। इस विद्यालय में कक्षा नवमीं में 48 और कक्षा 10वीं में 25 विद्यार्थी है। विद्यालय में गणित,अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षक है। मानदेय शिक्षिकाओं द्वारा हिंदी,सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। विद्यालय में अध्ययन करने वाली छात्राओं विद्या, मानमती, सुहानी यादव ने बताया कि पहले विद्यालय में कम शिक्षक थे। अब नए शिक्षको के आने से सभी विषयों की पढ़ाई होती है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस स्कूल में बहुत दूर-दूर के गाँव से लड़के-लड़कियां पढ़ाई करने आती है। सभी विषयों की पढ़ाई होने से हम लोग का मन भी स्कूल आने में होता है। गौरतलब है कि खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से मानदेय के आधार पर 480 अतिथि शिक्षकों की भर्ती का निर्णय लिया गया है। इन अतिथि शिक्षकों में प्राथमिक शाला के 243, माध्यमिक ष्शाला के 109 और हाई तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में व्याख्याताओं के 128 पदो पर भर्ती की जा रही है। खास बात यह है कि विगत शिक्षण सत्र में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को इस सत्र की नियुक्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ अतिथि शिक्षकों को गत वर्ष दिये जाने वाले मानदेय में भी वृद्धि कर दी गई है। इस सत्र में प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 11 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 13 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 15 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। विगत वर्ष भृत्य को 8000, प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 10 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 12 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 14 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था।

छत्तीसगढ़ के 2.34 लाख वन पट्टाधारी और 32,500 विशेष पिछड़ी जनजाति के किसानों को भी मिल रहा है योजना का लाभ

रायपुर : समृद्ध और खुशहाल किसान – विकसित छत्तीसगढ़ का मजबूत आधार : मुख्यमंत्री साय समृद्ध और खुशहाल किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किश्त की राशि जारी प्रदेश के 25.47 लाख से अधिक किसानों के खातों में 553 करोड़ 34 लाख रुपये का हुआ अंतरण राज्य के अन्नदाताओं को अब तक पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत मिली 9 हजार 700 करोड़ रुपये की राशि छत्तीसगढ़ के 2.34 लाख वन पट्टाधारी और 32,500 विशेष पिछड़ी जनजाति के किसानों को भी मिल रहा है योजना का लाभ रायपुर सावन के पवित्र महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से देशभर के 9.7 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किश्त के रूप में 20500 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के सभागार से प्रदेश के किसानों के साथ वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वृहद किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 2019 से अब तक देशभर के किसानों को 3.75 लाख करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर काम कर रही है और पीएम किसान निधि इसका सशक्त उदाहरण है। मोदी ने कहा कि कृषि विकास में पिछड़े जिलों के लिए ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना’ की शुरुआत की गई है और इसके लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सिंचाई योजनाओं पर भी सरकार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके और उत्पादन में वृद्धि हो। प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को राहत देने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ संचालित है, जो उन्हें संकट से उबारने का कार्य करती है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और 3 करोड़ के लक्ष्य में से आधा काम हमने पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को पवित्र श्रावण मास की शुभकामनाएं देते हुए भगवान महादेव से छत्तीसगढ़ के सतत् कल्याण, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से छत्तीसगढ़ के लगभग 25 लाख से अधिक किसानों को 553 करोड़ 34 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अन्नदाताओं को आर्थिक संबल देकर उनके परिश्रम का सम्मान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप किसानों की उन्नति के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रही है। हमने किसानों से जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। आज छत्तीसगढ़ में किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की कीमत दी जा रही है, जो उनकी आय को और सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के दस दिनों के भीतर ही 3716 करोड़ रुपये की 2 वर्ष की बकाया बोनस राशि का भुगतान कर हमने किसानों के भरोसे को और मजबूत किया। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में ‘किसान क्रेडिट कार्ड योजना’ की शुरुआत हुई, जिसने खेती-किसानी को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले किसान भारी ब्याज दरों पर उधार लेकर खेती करते थे, लेकिन आज केसीसी (KCC) के माध्यम से शून्य ब्याज दर पर ऋण मिल रहा है, जिससे खेती-किसानी और आसान हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए तेज़ी से कार्य किया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और हम बोधघाट परियोजना, महानदी और इंद्रावती नदी को जोड़ने जैसी योजनाओं के माध्यम से बस्तर को सिंचित और समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। साय ने कहा कि दलहन-तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। साथ ही, भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेती ही नहीं, बल्कि मत्स्यपालन, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन जैसे सहायक कृषि कार्यों को भी सशक्त करने में जुटी है। ‘दुधारू पशु वितरण योजना’ को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदेश के 6 जिलों से प्रारंभ किया गया है, जिसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को उसकी उचित कीमत मिलेगी। साय ने कहा कि मिलेट्स (अन्न) जैसे पौष्टिक अनाजों का उत्पादन, कोदो, कुटकी और रागी जैसी पारंपरिक फसलों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को बाजार में बेहतर दाम दिलाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार निरंतर किसानों को इस योजना के तहत राशि सीधे उनके खाते में हस्तांतरित कर रही है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में गांव-गांव में पक्की सड़कें बन गई हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अब किसानों को बिना ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध हो रहा है। हमारी सरकार ने अनेक योजनाएं धरातल पर लाकर किसानों की बेहतरी के लिए कार्य किया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 25.47 लाख से अधिक किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 20वीं किश्त की राशि 553 करोड़ 34 लाख रुपये अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार जय-जवान, जय-किसान, जय-विज्ञान और जय-अनुसंधान की परिकल्पना के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर खेती-किसानी को नई दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वृहद रूप से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ चलाया गया। इस अभियान में कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक लाख से अधिक किसानों से मुलाकात कर … Read more

CIMS में अस्वच्छ भोजन पर बवाल, कोर्ट ने मांगा डीन का स्पष्टीकरण

 बिलासपुर  बिलासपुर के मेडिकल कालेज सिम्स के रेजिडेंट डॉक्टर व भविष्य के डॉक्टर का खाना प्रतिबंधित पालीथीन पैकेट में अस्वच्छ जगह में रखे जाने की खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है. मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले में डीन से जवाब तलब किया है. दरअसल, मीडिया में आई खबरों में बताया गया, कि सिम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों और एमबीबीएस छात्रों, जो सिम्स में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए लाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को पॉलीथीन बैग में बाहर रखा जाता है और वह भी अस्वच्छ स्थिति में. हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेकर सुनवाई की. डीलीवरी बॉय का हॉस्टल में प्रवेश बैन, पार्किंग शेड में छोड़ते हैं पैकेट्स खबरों के मुताबिक प्रत्येक खाद्य पैकेट में एक चिट होती है जिस पर संबंधित रेजिडेंट डॉक्टर/छात्र का नाम लिखा होता है. उक्त खाद्य पैकेट बाहर इसलिए रखे जाते हैं क्योंकि डिलीवरी बॉय को हॉस्टल परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. हालांकि CIMS में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मेस में खाने की व्यवस्था है, लेकिन ज़्यादातर छात्र बाहर से खाना मंगवाना पसंद करते हैं, जो लोग बाहर से खाना पहुंचाते हैं. उन्हें हॉस्टल परिसर में आने की अनुमति नहीं है, इसलिए खाने के पैकेट हॉस्टल के बाहर बने वाहन पार्किंग शेड में छोड़कर चले जाते है. सिम्स के मेस में रोज़ाना खाना बनता है, लेकिन खाने की गुणवत्ता घटिया पाए जाने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स बाहर से खाना मंगाकर खाते हैं. सिम्स के मुख्य वार्डन के मुताबिक मेस का संचालन सिम्स प्रबंधन द्वारा नहीं किया जा रहा है, बल्कि एक समिति गठित की गई है. रेजिडेंट डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र CIMS के मेस/हॉस्टल में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन को ले सकते हैं. मामले को लेकर सिम्स बिलासपुर के डीन अगली सुनवाई से पहले अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने कहा गया है. जिसमें यह बताया जाएगा कि इस संबंध में क्या वैकल्पिक व्यवस्थाएँ की गई हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ की धूम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 2 से 15 अगस्त तक कार्यक्रम

गौरेला पेंड्रा मरवाही भारतीय ध्वज तिरंगा राष्ट्र का प्रतीक है। इस 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर "हर घर तिरंगा" कार्यक्रम का आयोजन तीन चरणों में 2 से 15 अगस्त तक जाना है। प्रथम चरण 2 से 8 अगस्त, द्वितीय चरण 9 से 12 अगस्त और तृतीय चरण 13 से 15 अगस्त 2025 तक किया जाना है, जो "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग थीम पर आधारित होगा। इसके अंतर्गत सभी भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज अपने घर पर फहराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आमजन में देश भक्ति की भावना विकसित हो तथा राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान में वृद्धि हो।           हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता कार्यक्रम अंतर्गत विभिन्न गतिविधिया संचालित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि जिले के अन्तर्गत सार्वजनिक उपक्रमों, स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों आदि के समस्त कर्मचारियों एवं उनके परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। कार्पोरेट और निजी संगठनों को भी सीएसआर संसाधनों सहित भाग लेने और योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना। राज्य सरकार की वेबसाइटों और सोशल मीडिया का उपयोग कर जागरूकता का निर्माण करें तथा "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" आयोजित कार्यक्रम को वेबसाइट https://harghartiranga.com/ के माध्यम से लिंक करें। शासन स्तर पर मॉनिटरिंग कर ग्राम सरपंचों एवं नगरीय निकाय के अन्य सदस्य एवं पदाधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित कर तिरंगा कोड को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त तिरंगा की मांग अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करें। शासकीय स्तर पर प्रत्येक गाँव में तिरंगा वितरण और बिक्री केन्द्र स्थापित करें। स्थानीय स्व-सहायता समूहों को तिरंगा के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करें। ग्राम पंचायतों द्वारा बड़े पैमाने पर समूह में खरीदी को प्रोत्साहित करें। राज्य के सभी जिलों में तिरंगा के वितरक, बिक्री केन्द्र के रूप में पोस्ट आफिस, उचित मूल्य की दुकान का विशाल नेटवर्क स्थापित करें। टोल नाका, चेक पोस्ट आदि में पैम्पलेट स्टीकर वितरण सुनिश्चित करें।         भारत सरकार द्वारा  चरणबद्ध दिए गए गतिविधियों जैसे समस्त शासकीय भवनों एवं संस्थानों आवासीय भवनों में तिरंगा लाईटिंग, रंगोली, सेल्फी जोन एवं तिरंगा फहराना एवं पैम्पलेट, बैनर स्टेडिज आदि के माध्यम से "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यक्रम को सफल बनाने स्थानीय भाषाओं में प्रमुखता से प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यक्रम अंतर्गत सतत् मॉनिटरिंग के लिए भारत सरकार एवं शासन के दिशा निर्देश अनुरूप अपने स्तर पर कार्यवाही करना सुनिश्चित कर तिरंगा वितरण की कार्यवाही एवं नोडल अधिकारी की जानकारी उपलब्ध कराए गए लिंक में अपलोड करावें।  स्वतंत्रता सप्ताह 2 से 15 अगस्त के दौरान "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यकम के सफल कियान्वयन हेतु सभी दिशा-निर्देश का कड़ाई से पालन कराया जाना सुनिश्चित करने कहा गया है।

सूरजपुर जिले को पुल और सड़क निर्माण कार्यों के लिए 26.03 करोड़ की मिली स्वीकृति

रायपुर, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आधारभूत संरचना के विकास को नया आयाम मिलने जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सतत् प्रयासों से लोक निर्माण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल 26 करोड़ 03 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। प्रमुख स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर जिले के सिलफिली एन.एच. 43 से महेशपुर-लटोरी रोड तक 5.80 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण निर्माण कार्य शामिल है, जिसकी लागत 1269.90 लाख रूपये है। इसी प्रकार भवरखोह से गंगापुर-कुम्पी तक 5.10 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है जिसकी लागत 729.51 लाख रूपए और विकासखंड ओडगी के मुख्य मार्ग चोंगा से भोडवानीपारा-मौहारीपारा तक कुल 4.20 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य के लिए 604.03 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।   इन कार्यों के स्वीकृत होने पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सूरजपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही, व्यापार और कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास के हर वादे को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इन परियोजनाओं से जुड़े निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

अस्पतालों और मरीजों को नहीं बांटी गई खराब कैल्शियम गोलियां: अधिकारिक बयान

अस्पतालों और मरीजों को नहीं बांटी गई खराब कैल्शियम गोलियां: अधिकारिक बयान प्रारंभिक जांच में ही पकड़ी गई खराबी, तुरंत बैच पर लगाई रोक रायपुर गुणवत्ताहीन कैल्शियम की गोलियों का वितरण किसी भी मरीज या अस्पताल को नहीं किया गया है। कैल्शियम विटामिन डी 3 टैबलेट्स की खराबी वेयरहाऊस के कर्मियों ने प्रारंभिक जांच में ही पकड़ ली थी। कर्मियों ने इन टैबलेट्स के स्ट्रिप्स से बाहर निकालने पर ही टूटने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों, सीजीएमएससी के क्वालिटी कंट्रोल विभाग और मुख्यालय को दी थी। इसी सूचना पर इन टैबलेट्स के बैच को तत्काल ब्लॉक कर दिया गया था और सप्लाईकर्ता संस्था के प्रतिनिधि को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया था। स्ट्रिप्स से निकालते ही टूटने वाली कैल्शियम विटामिन डी 3 टैबलेट्स को किसी भी मरीज को नहीं दिया गया है नही इन टैबलेट्स को किसी अस्पताल में भेजा गया है।  सीजीएमएससी से मिली जानकारी के अनुसार कैल्शियम विटामिन डी 3 की 500 मिली ग्राम की टैबलेट हेल्थ लाईफ फार्म लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई थी। कुल 65 बॉक्सों में 65 सौ यूनिट की यह खेफ कोरबा वेयरहाऊस को प्राप्त हुई थी। टेबलेट्स के प्राप्त होते ही वेयरहाऊस में ही कर्मियों द्वारा इसका प्रारंभिक परीक्षण किया गया था। परीक्षण में पाया गया था कि टेबलेटस स्ट्रिप्स से बाहर निकालते ही टूट रही हैं। कर्मियों ने इसकी सूचना तत्काल सीजीएमएससी के क्वालिटी कंट्रोल विभाग को दी और इन गुणवत्ताहीन टैबलेट्स के पूरे बैच को ब्लॉक किया गया। सीजीएमएससी ने बताया कि इस खेप का अभी तक कोई मटेरियल प्राप्ति प्रमाण पत्र तैयार नहीं किया गया है। सीजीएमएससी की नीति के अनुसार कोई भी दवा बिना मटेरियल प्राप्ति सर्टिफिकेट के न तो इनवेंटरी में शामिल की जाती है नही किसी संस्था को वितरित की जाती है। ऐसे में गुणवत्ताहीन कैल्शियम विटामिन डी 3 टेबलेट्स को न किसी मरीज को दिया गया है न ही किसी सरकारी अस्पताल में पहुंचाया गया है। प्रदायकर्ता संस्था हेल्दी लाईफ फार्म प्राईवेट लिमिटेड को उपस्थित होकर सैंपल प्रस्तुत करने और स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रदायकर्ता संस्था को खराब बैच वाली दवाओं को बदलकर नई दवाएं देने के भी निर्देश दिए गए हैं। सप्लायर द्वारा टेंडर शर्तों के अनुसार उचित कार्यवाही नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी भी सीजीएमएससी ने दी हैं। सीजीएमएससी ने छत्तीसगढ़ वासियों को आश्वस्त किया है कि राज्य में दवा आपूर्ति प्रणाली न केवल सतर्क है बल्कि गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था भी पूरी तरह से मजबूत है। दवा की सप्लाई होती ही सबसे पहले वेयर हाऊस में ही हर एक बैच का निरीक्षण-परीक्षण होता है। सभी दवाओं का परीक्षण एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त लैबों में कराया जाता है। सीजीएमएससी ने यह भी बताया कि जनता को केवल गुणवत्तायुक्त प्रमाणित दवाई ही उपलब्ध कराई जाती हैं। गुणवत्ताहीन पाए जाने पर दोषपूर्ण बैच को तुरंत रोककर इसका वितरण प्रतिबंधित किया जाता है। दोषी सप्लायर के विरूद्ध तेजी से कार्रवाई की जाती है।

ग्रामीणों में जल सुरक्षा के प्रति जागरूकता की मिसाल बना बामनपुर,गुंजेपरती और नंबी गांव

रायपुर धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में अब विकास के साथ सामाजिक-स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ रही है। प्रशासन इसके लिए तरह-तरह से प्रयास कर लोगों को समझाईश दे रहा है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम एवं उसूर विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले ग्राम बामनपुर, गुंजेपरती और नंबी में जल जीवन मिशन के तहत जल सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर ऐसे ही एक अनोखी और प्रेरणादायक जनजागरूकता पहल की गई। इन गांवों में “हर घर नल से जल” योजना के अंतर्गत पेयजल सुविधा तो उपलब्ध थी, फिर भी कुछ ग्रामीण परंपरागत आदतों या जानकारी के अभाव में नदी और नालों के पानी का उपयोग पीने के लिए कर रहे थे। इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की संभावना बनी हुई थी। जल-जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में प्रशासन ने तय किया कि ग्रामीणों को जल की गुणवता और उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बारे में व्यावहारिक तरीके से समझाने का अभियान चलाया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की देखरेख में यह अभियान प्रारंभ किया गया। जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला की केमिस्ट के नेतृत्व में दल बनाकर गांवों में भेजा गया। वहाँ पहुँचकर उन्होंने सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और ग्रामवासियों की उपस्थिति में नदी नाले के जल और नल से प्राप्त जल का परीक्षण करके अंतर को सबके सामने प्रस्तुत किया। जब ग्रामीणों ने स्वयं देखा कि नदी नाला के जल में हानिकारक तत्व उपस्थित हैं जबकि घर में लगे नल का जल साफ और सुरक्षित है, तो उन्होंने भविष्य में पीने के लिए केवल सुरक्षित नल के जल का उपयोग करने का वादा किया। इस पहल को स्थानीय लोगों ने सराहा और इसे आँखें खोलने वाला अनुभव बताया। यह पहल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि जानकारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जनसामान्य को समझाया जाए, तो वे सकारात्मक बदलाव के लिए तत्पर रहते हैं। यह अभियान जल जीवन मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में एक प्रभावशाली कदम साबित हुआ है। बामनपुर, गुंजेपरती और नंबी जैसे गांव अब केवल जल उपलब्धता में आत्मनिर्भर नहीं हैं, बल्कि जल की गुणवत्ता को लेकर भी सजग हुए हैं।

महासमुंद के किसानों को बड़ी सौगात, PM मोदी ने ट्रांसफर की किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त

महासमुंद : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त का किया हस्तांतरण पीएम किसान सम्मान निधि अंतर्गत जिले के 1 लाख 30 हजार से अधिक किसानों के खाते में लगभग 30 करोड़ 31 लाख रूपए जारी महासमुंद के किसानों को बड़ी सौगात, PM मोदी ने ट्रांसफर की किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जिला स्तरीय कार्यक्रम कृषि विज्ञान केन्द्र भलेसर में हुआ आयोजन महासमुंद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी से किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की। जिसके तहत देशभर किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले किसानों के हित में 20वीं किस्त जारी किया। आज महासमुंद जिले के किसानों को भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि राशि का लाभ मिला। जिले के एक लाख 30 हजार से अधिक किसानों के खाते में लगभग 30 करोड़ 31 लाख रूपए डीबीटी के माध्यम से पहुंचा। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र भलेसर महासमुंद में आयोजित कार्यक्रम में महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा एवं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर विशेष रूप से उपस्थित थे।  इस अवसर पर कलेक्टर विनय लंगेह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, संदीप घोष, हितेश चंद्राकर, विक्रम ठाकुर, देवेंद्र चंद्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, कृषि उपसंचालक एफ आर कश्यप, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में अंचल के किसान उपस्थित थे। इस अवसर पर महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने सभी किसानों को किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त जारी होने पर बधाई दिए। उन्होंने कहा कि पहले के समय में किसान का वजूद सबसे ऊपर रहा है, पहले नौकरी को उतना महत्व नहीं दिया जाता था। आज किसानों का सम्मान फिर से वापस लौट रहा है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो वादा किया था उसे तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के पश्चात तत्काल पूर्ण किया है। आज देश के किसान खुशहाल है और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इस कारण से पढ़े लिखे लोग भी वापस अपने खेतों की ओर लौट रहे हैं और कृषि में उन्नत तकनीक के साथ नए नए प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने सभी किसानों से प्रधानमंत्री जन-धन खाते के अंतर्गत केवाईसी करवाने का आग्रह किया। इसके अलावा आवारा मवेशियों पर नियंत्रण हेतु किसानों से अनुरोध किया ताकि सार्वजनिक सड़कों, बाजारों और अन्य प्रमुख स्थानों पर घूमते व बैठते आवारा मवेशी जो यातायात में बाधा बनते हैं और दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं उससे उनकी रक्षा हो सके।  कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि किसानों के हित में लगातार हमारी सरकार अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है और विकसित भारत की ओर हम बढ़ रहे हैं। और विकसित भारत का यह सपना देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ जो की किसान हैं, उनके विकास के बिना संभव नहीं है।  बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण का सार यह रहा कि हमें स्वदेशी की ओर बढ़ना है, हमें चाहिए कि हमारा पैसा हमारे देश में रहना चाहिए है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसी तरीके से हमें स्वावलंबन की ओर बढ़ना है, आत्मनिर्भर बनना है। इस अवसर पर किसानों को कृषि आधारित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।