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उप मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने आज विभागीय मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर सड़कों एवं पुल-पुलियों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तत्परता से तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए।  साव ने बैठक में कहा कि सभी मुख्य अभियंता कार्यालय कॉर्पोरेट दफ्तरों की तरह पूरी क्षमता और दक्षता से काम करें। उन्होंने विभाग की कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए फील्ड से लेकर कार्यालय तक तेज गति और जवाबदेही से काम करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग करने और इनके खराब होने पर संबंधित ठेकेदारों से त्वरित मरम्मत कराने को कहा, ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़कों की स्थिति खराब पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसी सड़कों का तत्काल ठेकेदारों से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता को भारत सरकार के साथ लगातार समन्वय कर स्वीकृतियों एवं कार्यों में तेजी लाने को कहा।  उप मुख्यमंत्री  साव ने सभी मुख्य अभियंताओं को प्राथमिकता वाले कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने फील्ड पर निकलकर प्राथमिकता वाली सड़कों के कार्यों की प्रगति का हर सप्ताह निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए कलेक्टरों के साथ समन्वय कर भू-अर्जन की कार्यवाहियों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने ब्लैक-स्पॉट्स दूर करने के साथ ही सड़कों व पुलों के निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा के सभी मानकों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने निर्माण कार्यों और निर्माण सामग्रियों में गुणवत्ता पर जोर देते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों तक लंबित काम विभाग की छवि खराब करता है। इस तरह की स्थिति न बने। हर हाल में समय-सीमा में काम पूर्ण करने का प्रयास करें। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, अपर सचिव  एस.एन. वास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं के साथ ही सेतु संभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता भी बैठक में मौजूद थे।

विष्णु के सुशासन की नई तस्वीर, पुजारी कांकेर में पहली बार हुआ जनसमस्या महाशिविर

रायपुर माओवाद प्रभावित और अत्यंत सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर में पहली बार प्रशासन का ऐसा व्यापक शिविर आयोजित हुआ, जहां कभी जनताना सरकार की जन–अदालत लगती थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगाई। शिविर में पहली बार सभी विभागों का अमला एक साथ गांव पहुंचा, जिसे देखने और योजनाओं का लाभ लेने बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ग्रामीण पूरे समय शिविर में मौजूद रहे और स्थानीय भाषा में योजनाओं की जानकारी लेकर लाभ उठाने के लिए आवेदन भी किए। इस शिविर में पुजारी कांकेर सहित मारुड़बाका, नेलाकांकेर, संकनपल्ली, तिम्मापुर, ईलमिड़ी, सेमलडोडी, लंकापल्ली, एंगपल्ली, गलगम, उसूर, आवापल्ली, चिंताकोंटा, मुरदंडा, चेरकडोडी, नुकनपाल, पुसगुड़ी और मुरकीनार ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। शिविर में प्राप्त आवेदनों में से 29 का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों पर कार्यवाही जारी है। शिविर में क्रेडा, जल जीवन मिशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, कृषि, उद्यानिकी, वन, मत्स्य, विद्युत, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित सभी विभागों ने योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त किए। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्षमती जानकी कोरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प का परिणाम है कि आज पुजारी कांकेर जैसे क्षेत्र में प्रशासनिक अमला पहुंचा है, जहां कभी माओवाद के भय से साप्ताहिक बाजार भी बंद हो जाते थे। अब ग्रामीण खुलकर अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रख रहे हैं। शिविर में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायक उपकरण, बैशाखी, वाकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र, मत्स्य जाल, आईस बॉक्स, मृदा परीक्षण प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोदभराई और नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और स्वास्थ्य सलाह दी, वहीं पशुधन विकास विभाग ने पशुओं के उपचार एवं संक्रमण से बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की। एसडीएम उसूर भूपेन्द्र गावरे के नेतृत्व तथा सीईओ जनपद पंचायत उसूर प्रभाकर चंद्राकर के समन्वय से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सुशासन तिहार को लेकर पंचायतों में उत्साह, CM साय आज कई आयोजनों में होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज विभिन्न आधिकारिक और निजी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनका दिन व्यस्त कार्यक्रमों से भरा रहेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश का दौरा भी शामिल है। सुबह महर्षि वाल्मीकि सभागृह में कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे मध्यप्रदेश के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री साय मंडला जिले के जेवरा रिपटा पहुंचेंगे, जहां वे पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के निवास पर आयोजित वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री का मध्यप्रदेश दौरा पूरा होगा और वे वापस रायपुर लौट आएंगे। पंचायतों में बड़े पैमाने पर मेगा आयोजन प्रदेश में सुशासन तिहार के अंतर्गत आज ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर मेगा आयोजन किए जा रहे हैं। इस दौरान एक ही मंच पर चावल महोत्सव, रोजगार दिवस और आवास दिवस का आयोजन कर ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। कार्यक्रम में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। साथ ही 90 दिनों के भीतर स्वीकृत आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया है। ‘मोर गांव-मोर पानी-मोर तरिया’ अभियान के तहत जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। योजनाओं की जानकारी को आसान बनाने के लिए QR कोड आधारित प्रणाली भी शुरू की गई है, जिससे ग्रामीण सीधे अपने मोबाइल पर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ महिला समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।

वैज्ञानिक उपलब्धि से मिला किसानों को आर्थिक संबल

रायपुर बस्तर की पहचान अब धीरे-धीरे बदल रही है। पारंपरिक खेती वाले इस क्षेत्र में अब बागवानी के नए प्रयोग सफल होने लगे हैं। महात्मा गाँधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित क्रांतिकारी डेब्रिधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर के वैज्ञानिकों की 09 वर्षों की सतत मेहनत ने इतिहास रच दिया है। पहली बार बस्तर में लीची के पौधों में सफल फलन हुआ है, जिसे कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस सफलता की शुरुआत वर्ष 2016-17 में हुई थी, जब तत्कालीन वैज्ञानिक डॉ. गणेश प्रसाद नाग ने अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर से लीची की उन्नत किस्मों को लाकर जगदलपुर स्थित महाविद्यालय प्रक्षेत्र में रोपण कराया। उस समय बस्तर की जलवायु में लीची की खेती को लेकर कोई ठोस उदाहरण मौजूद नहीं था, बावजूद इसके वैज्ञानिकों ने इसे चुनौती के रूप में लिया और शोध कार्य शुरू किया।     उद्यानिकी महाविद्यालय प्रक्षेत्र में इंद्रा लीची-2, अंबिका लीची-1, चाइना, शाही और रोज सेंटेड जैसी पांच प्रमुख किस्मों के करीब 40 पौधे लगाए गए। शुरुआती वर्षों में इन पौधों की वृद्धि, जलवायु के प्रति अनुकूलन क्षमता और उत्पादन पर लगातार अध्ययन किया गया। लंबे इंतजार और वैज्ञानिक प्रबंधन के बाद अब इन पौधों में फल लगना शुरू हो गया है। फल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रामकुमार देवांगन ने पौध प्रावर्धन, पुष्पन, फल सेट सुधार, ट्रेनिंग, प्रूनिंग और फ्रूट क्रैकिंग जैसी समस्याओं पर गहन शोध किया। वहीं डॉ. भागवत कुमार भगत ने लीची के मूल्य संवर्धन जैसे जूस, जैली और अन्य उत्पाद पर काम कर इसे बाजार से जोड़ने की दिशा में पहल की है।     उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि रतन सक्सेना ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में लीची की सफल फलन केवल एक शोध सफलता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, धैर्य और नवाचार के माध्यम से बस्तर जैसे पारंपरिक कृषि क्षेत्र में भी उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि लीची जैसी नगदी फसल का सफल उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और क्षेत्र में बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। कुलपति ने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई फसल तकनीकों का विकास करना ही नहीं, बल्कि उन्हें किसानों तक पहुंचाकर उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करना है।  प्रो. सक्सेना ने वैज्ञानिकों के 09 वर्षों के सतत प्रयास, अनुसंधान क्षमता और समर्पण की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र लीची उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाएगा। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर कृषि, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला परिवर्तनकारी कदम बताया। वहीं उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर के वर्तमान अधिष्ठाता डॉ. नाग ने बताया कि जिन उन्नत किस्मों को विकसित करने में सफलता मिली है, उनके पौधे अब किसानों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा, ताकि वे इस नई फसल को आसानी से अपना सकें। लंबी शोध से मिली ऐतिहासिक सफलता, किसानों के लिए साबित होगी गेम चेंजर       साल 2016-17 में इस परियोजना की शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर की गई थी। अनुसंधान केंद्र, अंबिकापुर से लाई गई पांच उन्नत किस्मों इंद्रा लीची-2, अंबिका लीची-1, चाइना, शाही और रोज सेंटेड को केडीसीएचआरएस जगदलपुर के प्रक्षेत्र में रोपित किया गया। शुरुआती वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती बस्तर की जलवायु के अनुसार पौधों को अनुकूल बनाना था। वैज्ञानिकों ने सिंचाई, पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया। लगभग 09 वर्षों के धैर्यपूर्ण प्रयासों के बाद पौधों में सफल फलन हुआ, जो इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में भी लीची की खेती संभव है।   लीची की सफल खेती बस्तर के किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही है। अब तक सीमित फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान इस नगदी फसल को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। बाजार में लीची की अच्छी मांग और कीमत मिलती है, जिससे किसानों…

ई-चालान धारकों के लिए अलर्ट: रायपुर में आज अंतिम दिन, नहीं भरा जुर्माना तो बढ़ सकती है परेशानी

रायपुर. रायपुर में 2025 के लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए आज अंतिम अवसर दिया गया है। यदि वाहन मालिक अपने चालान का समाधान नहीं करते हैं, तो आगे चलकर वाहनों की जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ई-चालान मामलों को 9 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए 7 मई तक आवेदन करना अनिवार्य है। प्राप्त आवेदनों को ट्रैफिक पुलिस लोक अदालत में पेश करेगी। इस प्रक्रिया के लिए कालीबाड़ी स्थित यातायात मुख्यालय में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा नौ अन्य ट्रैफिक थानों में भी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल रजिस्ट्रेशन के बाद ही मामलों को लोक अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 2025 के अब तक एक लाख से अधिक ई-चालान लंबित हैं। इन मामलों को पहले नियमित अदालत में भेजा गया था, लेकिन वाहन मालिकों की अनुपस्थिति के कारण समाधान नहीं हो सका। एसीपी ट्रैफिक सतीश ठाकुर ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 से पहले के सभी लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। संबंधित वाहन स्वामियों को कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस भी भेजे जा रहे हैं। पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में लंबित चालानों पर कार्रवाई और तेज की जाएगी।

इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम

रायपुर बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय “सल्फी” को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। हर्षवर्धन “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके। उन्होंने बताया कि सल्फी का रस पेड़ से निकालने के कुछ समय बाद ही प्राकृतिक रूप से किण्वित होने लगता है, जिससे यह हल्का मादक पेय बन जाता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हर्षवर्धन ने अपने प्रयोगों के माध्यम से इस फरमेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सल्फी की मूल गुणवत्ता और स्वाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके। बस्तर की संस्कृति से जुड़ी है सल्फी सल्फी बस्तर की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग “बस्तर बीयर” के नाम से भी जानते हैं। यह कैरियोटा यूरेन्स (Caryota urens) नामक ताड़ प्रजाति के पेड़ से निकलने वाला मीठा रस है। ताज़ा सल्फी का स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और ताज़गीभरा होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद इसमें प्राकृतिक खमीर बनने लगता है, जिससे यह हल्का नशीला हो जाता है।ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सल्फी का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष है। विवाह, पारंपरिक उत्सव और सामाजिक आयोजनों में इसे प्रमुखता से परोसा जाता है। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सल्फी पर निर्भर है। स्थानीय लोग इसे पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी भी मानते हैं। जीआई टैग दिलाने का सपना हर्षवर्धन का सपना है कि बस्तर की इस पारंपरिक पेय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। वे चाहते हैं कि सल्फी को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक पेय के रूप में प्रचारित किया जाए और भविष्य में इसे बस्तर के लिए जीआई टैग भी प्राप्त हो।उनका मानना है कि यदि सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो यह बस्तर के आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

झगराखाण्ड नगर पंचायत में “नारी शक्ति अधिनियम” पर चर्चा से पहले ही छिड़ा सियासी संग्राम, महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर परिषद पर उठे गंभीर सवाल

एमसीबी/झगराखाण्ड झगराखाण्ड नगर पंचायत की आगामी सामान्य सभा का एजेंडा इस बार “नारी शक्ति अधिनियम” और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है, लेकिन बैठक से पहले ही यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। नेता प्रतिपक्ष हेमलता कोमल कुमार ने परिषद की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए महिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि परिषद में निर्वाचित महिला पार्षदों को ही समान अधिकार और विकास कार्यों में भागीदारी नहीं मिल रही, तो महिला सशक्तिकरण की बातें केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। उनका आरोप है कि अधोसंरचना मद से प्राप्त लगभग 3 करोड़ रुपये की विकास राशि के वितरण में खुला भेदभाव किया गया है। हेमलता कोमल कुमार के अनुसार परिषद में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला पार्ष दों के वार्डों को एक भी विकास कार्य नहीं दिया गया, जबकि कुछ प्रभावशाली वार्डों में बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत कर शुरू भी कर दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के काम पहले ही चुनिंदा क्षेत्रों में प्रारंभ हो चुके हैं और बची हुई राशि भी उन्हीं वार्डों में खर्च करने की तैयारी चल रही है। नेता प्रतिपक्ष ने इसे राजनीतिक पक्षपात बताते हुए कहा कि विपक्ष से निर्वाचित महिला पार्षदों को योजनाबद्ध तरीके से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब अपनी ही परिषद में महिलाओं के साथ समान व्यवहार नहीं हो

IPL को लेकर रायपुर में जबरदस्त दीवानगी, टिकट बिक्री शुरू होते ही हाउसफुल

रायपुर. आईपीएल 2026 के दो बड़े मुकाबलों को लेकर राजधानी रायपुर इस समय पूरी तरह क्रिकेट के जुनून में डूबी हुई है। 10 मई को मुंबई इंडियंस (MI) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच हाई-वोल्टेज मैच खेला जाएगा। 13 मई को RCB बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की भिड़ंत होगी। इस बीच जहां एक इन मुकाबलों के टिकट कुछ ही मिनटों में सोल्ड आउट हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी ने कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। 10 मई को मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच होने वाले मुकाबले के लिए दूसरे चरण की टिकट बिक्री शुरू होते ही भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 2600 से 8000 रुपये तक की कीमत वाले टिकट कुछ ही मिनटों में बिक गए। खासकर 2600 और 2700 रुपये वाले लगभग 3000 से अधिक टिकट तुरंत खत्म हो गए। पहले चरण में ही स्टेडियम की आगे की सीटें भर चुकी थीं, जिसके कारण दूसरे चरण में उपलब्ध अधिकतर टिकट पीछे की सीटों के ही थे। इसी वजह से महंगे टिकट (लगभग 8000 रुपये) भी देर शाम तक लगभग खत्म हो गए। वहीं 13 मई को आरसीबी और कोलकाता नाइट राइडर्स के मुकाबले के प्रति दर्शकों की रुचि अपेक्षाकृत कम नजर आ रही है। अब तक इस मैच के लगभग 60 प्रतिशत टिकट ही बिक पाए हैं, जबकि करीब 40 प्रतिशत टिकट अभी भी उपलब्ध हैं। मैच की लोकप्रियता के बीच टिकटों की कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ गई है। बाजार में एजेंट और दलाल सक्रिय होकर टिकटों को कई गुना कीमत पर बेच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, लगभग 3000 रुपये वाला टिकट 6000 रुपये या उससे अधिक में बेचा जा रहा है। लोअर और अपर स्टैंड के टिकट 5500 से 8000 रुपये तक पहुंच गए हैं, जबकि प्रीमियम ए और बी स्टैंड के टिकट 16000 रुपये तक में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों ने आम दर्शकों के लिए टिकट हासिल करना और मुश्किल कर दिया है, जिससे ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही टिकट खत्म होने की स्थिति बन रही है। मुंबई इंडियंस रायपुर पहुंची, हार्दिक पांड्या अनुपस्थित 10 मई के मुकाबले के लिए मुंबई इंडियंस की टीम रायपुर पहुंच चुकी है। रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, नमन धीर और अन्य खिलाड़ी भारी सुरक्षा के बीच एयरपोर्ट से सीधे होटल पहुंचे। फैंस ने एयरपोर्ट पर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया। हालांकि कप्तान हार्दिक पांड्या टीम के साथ नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में यदि वे समय पर नहीं जुड़ते हैं, तो सूर्यकुमार यादव के कप्तानी संभालने की संभावना जताई जा रही है। टीम फिलहाल नवा रायपुर के मेफेयर होटल में ठहरी हुई है। 9 मई को विराट कोहली के साथ रायपुर पहुंचेगी RCB रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम 9 मई को विराट कोहली के साथ रायपुर पहुंचेगी। टीम यहां 5 दिनों तक रुककर दोनों मुकाबलों की तैयारी करेगी। खिलाड़ियों का अभ्यास सत्र शाम के समय रखा गया है ताकि गर्मी से बचा जा सके। सुरक्षा कारणों से अभ्यास सत्र में दर्शकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है और होटल में भी फैंस का प्रवेश रोक दिया गया है। स्टेडियम में सख्त सुरक्षा और व्यवस्थाएं प्रशासन ने दोनों टीमों की सुरक्षा और गोपनीयता को देखते हुए कड़े इंतजाम किए हैं। स्टेडियम और होटल परिसर में आम लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी में हैं।

सेवा सेतु छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

रायपुर छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं। इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया। प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है। व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल “सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।  

विष्णु सरकार ने बड़े प्रशासनिक बदलाव किए, नई टीम से अधिकारियों से उम्मीदें जुड़ीं

रायपुर  छतीसगढ़ में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की हुआ है। तबादलों की इस आंधी में कई अहम बदलाव हुए हैं जो प्रदेश सरकार के लिहाज से काफी अहम है। इस फेरबदल को रिजल्ट ओरिएंटिड तरीके से देखा जा रहा है। काफी लंबे से समय से इंतजार किए जा रहे आईएएस अफसरों के तबादले आज हो गए हैं। इन अधिकारियों में एसीएस स्तर से लेकर कलेक्टर तक शामिल रहे। इस बड़े फेरबदल को इसिलए महत्वपूर्ण कहा जा रहा है क्योंकि इसे सीएम विष्णुदेव साय ने की नई प्रशासनिक टीम कहा जा रहा है जो आगामी चुनाव तक काम करेगी। दरअसल छतीसगढ़ सरकार को ढाई साल पूरे हो गए हैं।अब बचे समय में नतीजे लाने की जिम्मेवारी है । लिहाजा नतीजे देने वाले अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। सात कलेक्टरों को हटाकर नए चेहरों को तैनाती दी गई है। जानकारी आ रही है कि बलरामपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हटाया गया है। वहीं एसीएस ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऋचा को नतीजे देने वाली अफसर के रूप में पहचाना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख तो बनाए गए हैं, साथ ही उन्हें बिजली कंपनी का अध्यक्ष भी बनाया गया है। वहीं बात अगर गृह एवं जेल विभाग की करें तो पहली बार महिला अधिकारी की तैनाती हुई है। निहारिका बारीक को इस अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह वित्त विभाग अब डॉ. रोहित यादव संभालेंगे। मुकेश बंसल को पीडब्ल्यूडी और छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश बंसल से सरकार उम्मीद कर रही है कि चुनाव मोर्चे पर जाने से पहले तक स्थिति बेहतर हो जाए। वहीं इन तबादलों में सबसे ज्यादा चर्चा बसवराजू एस के मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर होने को लेकर रही। उन्हें अब कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग का प्रभार सौंपा गया है। 7 जिलों के कलेक्टरों को भी बदला गया है। सरकार ने संदेश  साफ और स्पष्ट है कि लोक हित योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लिहाजा सरकार ने बेहतर नतीजों की दिशा में बड़ा फेरबदल करके पहला कदम बढ़ा दिया है। देखना होगा सरकार कितनी सफल हो पाती है और ये अधिकारी लक्ष्यों के कितने करीब पहुंच पाते हैं।