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6 फ्लैग स्टाफ रोड बनेगा दिल्ली का पहला स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर

नई दिल्ली दिल्ली में 'शीशमहल' के नाम से चर्चित पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले को अब रेखा गुप्ता सरकार ने नया रूप में देने का फैसला लिया है। अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास 6, फ्लैग स्टाफ रोड सिविल लाइंस स्थित सरकारी बंगले को दिल्ली गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर बनाने का फैसला लिया गया है। विवादों में रहे इस बंगले में राज्य के CIP गेस्ट के ठहरने की व्यवस्था होने के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी जगह उपलब्ध कराएगी। 2023 में भाजपा ने बंगले के कथित 45 करोड़ रुपये के सौंदर्यीकरण और लग्जरी सुविधाओं को लेकर इसे 'शीशमहल' करार किया था। सरकार जल्द ही इसे लेकर औपचारिक घोषणा कर सकती है।     केजरीवाल के इस्तीफे और बंगले के निर्माण को लेकर शुरू हुई जांच के बाद से ही यह बंगला खाली पड़ा है।     खाली पड़े इस बंगले का इस्तेमाल कैसे हो, इसे लेकर सरकार में लंबे समय से चर्चा चल रही थी।     पहले चर्चा थी कि इसे आधिकारिक तौर पर सीएम आवास घोषित किया जाएगा, लेकिन सीएम रेखा गुप्ता ने इसमें रहने से इनकार कर दिया।     उसके बाद इसे म्यूजियम बनाने को लेकर भी योजना बनाई गई, लेकिन अब उस योजना को भी खारिज कर करके दिल्ली सरकार ने गेस्ट हाउस बनाने का फैसला किया है दिल्ली को मिलेगा पहला स्टेट गेस्ट हाउस     दिल्ली में सरकार का अभी तक अपना कोई स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है।     द्वारका में एक स्टेट गेस्ट हाउस बनाने की योजना है, लेकिन अभी तक उस पर काम शुरू नहीं हो पाया है।     इसलिए सरकार ने फैसला किया है कि राज्य के जो भी VVIP गेस्ट होंगे वह इस बंगले में रुकेंगे।     देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधिमंडल, विशिष्ट अतिथियों और उच्चस्तरीय अधिकारियों की मेजबानी इस बंगले में की जाएगी।     सरकारी बंगले को VIP मेहमानों के लिए गेस्ट हाउस के साथ-साथ कला और संस्कृति केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।     यहां एक सभागार और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम भी विकसित किया जाएगा।     परिसर में प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और सरकारी समारोह का भी आयोजन किया जाएगा। क्योंकि इसके अंदर एक बड़ा परिसर भी है जहां इस तरह के आयोजन किए जा सकते हैं।

दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाए जाएंगे, रिज क्षेत्र में लगेंगे पीपल, नीम और बरगद

नई दिल्ली  तीन-चार वर्षों में दिल्ली के रिज क्षेत्र की सूरत बदलने वाली है। यहां से विलायती कीकर और बबूल जैसे पेड़ों को हटाकर उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल और ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, जामुन जैसे देसी प्रजाति के पेड़ लगाए जाएंगे। इस तरह पूरे रिज क्षेत्र को 'दिल्ली का लंग्स' यानी फेफड़ा बनाया जाएगा, जो शहर को स्वच्छ हवा मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाएगा। आम लोगों को प्रकृति से जोड़ने के लिए रिज एरिया में खास तरह के 8 वन भी बनाए जाएंगे और उनमें अलग-अलग तरह के देसी प्रजाति के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही रिज एरिया में मौजूद वॉटर बॉडीज और पुरातात्विक संरचनाओं का संरक्षण भी किया जाएगा। यहां 70 से अधिक छोटे तालाब और कुछ छोटे रेस्तरां भी बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली में पौधरोपण महाअभियान की शुरुआत करते हुए ये जानकारियां साझा कीं। इस अभियान के तहत दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाए जाएंगे। प्रदूषण कम करने पर जोर अभियान के तहत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सरकारी विभागों, स्कूलों, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। सरकार का कहना है कि इससे राजधानी का हरित क्षेत्र बढ़ेगा, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और आने वाले वर्षों में दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने में मदद मिलेगी।

PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली  1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं। 2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया। फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।  

दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 पार, 2028 तक होंगी 13000 बसें

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर आज मंगलवार को 300 नई इलेक्ट्रिक बसें उतरेंगी। दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 के पार पहुंच जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दावा है कि 2028 तक दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 100 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक होंगी। इसके लिए वह अभी से पीएम ई-ड्राइव के तहत ऑर्डर प्लेस कर चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि 2028 तक डीटीसी के पास कुल 13 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें होंगी। मुख्यमंत्री इन 300 बसों को आज हरी झंडी दिखाएंगी आज मंगलवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री इन 300 बसों को हरी झंडी दिखाएंगी। अभी DTC के पास 6223 बसें हैं, जिनमें 4680 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इसमें 12 मीटर वाली स्टैंडर्ड बसों के अलावा 9 मीटर वाली देवी बसें भी शामिल हैं। DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी ईवी पॉलिसी आने के बाद सरकार ने अब दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसें लाने का प्रावधान किया है। यानी DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी। दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पीएम ई-ड्राइव के तहत 2800 नई बसें खरीदने को लेकर एक और कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें 9 मीटर वाली 1400 बसें भी शामिल हैं। ये नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएंगी और अप्रैल 2027 तक सड़कों पर चलाने की तैयारी है। यानी 2027 तक डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का आंकड़ा 8000 को पार कर जाएगा। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट नोट तैयार कर वित्तीय मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। महाकाल से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह, 2 अक्टूबर से होगी शुरुआत     5,000 के पार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या दिल्ली में     13,000 इलेक्ट्रिक बसें होगी DTC के पास 2028 तक     पीएम ई-ड्राइव के तहत किया जा चुका है ऑर्डर प्लेस     नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएगी, अप्रैल 2027 तक चलाने की तैयारी आप पर असर दिल्ली में बसों की संख्या बढ़ने से सबसे ज्यादा फायदा उसमें सफर करने वाले लाखों यात्रियों को होगा। बसों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी। जिन रूटों पर अभी भीड़ ज्यादा है, वहां बसों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। छोटी बसें आने से संकरी सड़कों पर बसों की आवाजाही बढ़ेगी। इसके लिए सरकार IIT दिल्ली के साथ मिलकर दिल्ली को तीन जोन में बांटकर बस रूट रेशनलाइजेशन का काम भी कर रही है, जिससे कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में मांग के हिसाब से बसों की संख्या करीब 6500 है। अगले साल यह संख्या 8 हजार करने के साथ-साथ 2028 तक 13 हजार से अधिक करना है।  

बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने को दिल्ली के सभी स्कूलों में बनेगी बाल संरक्षण समिति अब

नई दिल्ली राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते 5633 स्कूलों में बाल संरक्षण समिति का गठन होगा। एलजी तरनजीत सिंह संधू और सीएम रेखा गुप्ता ने सोमवार को बाल संरक्षण के तहत यह फैसला किया है। जुलाई के दौरान बाल संरक्षण माह के तहत विभिन्न कार्यक्रमों, सुरक्षा उपायों और जागरूकता अभियान को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।     शिक्षा विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पॉक्सो अधिनियम के निर्देशों के अनुसार दिल्ली के सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा जांच सूची (चेक लिस्ट) लागू की जा रही है।     इनमें 1,077 दिल्ली सरकार के स्कूल, 198 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 2612 एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड और 1,746 प्राइवेट स्कूल शामिल हैं। विभाग शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों और मुख्य प्रशिक्षकों को पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रशिक्षण दे रहा है। जुलाई के बाद भी जारी रहेगा अभियान दिल्ली पुलिस ने बताया कि स्कूलों, पार्कों, खेल परिसरों, बाल भवन, अनाथालयों और बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। एलजी और सीएम ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यक्रम जुलाई तक सीमित न रहें, वह संस्थानों की नियमित और स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनें। POCSO मामलों के लिए नई व्यवस्था सीएम ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यक्रमों और गतिविधियों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित जरूरी है। सभी स्कूलों में पॉक्सो मामलों के निस्तारण के लिए एसओपी लागू की जाए। अभिभावकों के प्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और विद्यालय प्रमुखों को शामिल करते हुए संयुक्त निरीक्षण दल गठित कर सभी स्कूलों का निरीक्षण किया जाए।  

दिल्ली-पंजाब से 6 संदिग्ध गिरफ्तार, हथियार और पेट्रोल बम बरामद

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली और पंजाब से 6 संदिग्धों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध दो अलग-अलग नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे। एक नेटवर्क आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था जबकि दूसरा अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद किए हैं दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क के 3 संदिग्धों को पंजाब से जबकि एक को दिल्ली से पकड़ा गया था। बताया जाता है कि इन संदिग्धों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी थी। आतंकी अपने नापाक मंसूबे में कामयाब हो पाते उससे पहले ही पुलिस ने नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। दिल्ली को दहलाने की थी योजना दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया था कि संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश में जुटे थे। ये सभी संदिग्ध पकड़े जाने से बचने के लिए पाकिस्तानी आकाओं की ओर से मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। खुफिया इनपुट पर ऐक्शन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिले थे कि पाकिस्तानी ISI एजेंट शहजाद भट्टी अपने गुर्गों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी वारदात को अंजाम देने की कोशिशों में जुटा है। इसके लिए इस टेरर नेटवर्क ने पंजाब के युवाओं की भर्ती की है। इसके बाद मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की गई। टेरर नेटवर्क पर लगातार कस रहा शिकंजा दिल्ली पुलिस सेल के हाथ लगे एक गुर्गे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह शहजाद भट्टी नेटवर्क के पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था। वह ड्रोन के जरिए हथियार जुटा रहा था। उसके खुलासे के बाद पंजाब से दो और संदिग्धों को दबोचा गया था। उनके पास से एक जिगाना पिस्टल, 4 कारतूस और 2 मोबाइल बरामद किए गए थे। बाद में दिल्ली से चौथे संदिग्ध गगनप्रीत को दबोचा गया था। इसके बाद से लगातार इस टेरर नेटवर्क के गुर्गों को पकड़ा जा रहा है।

पूर्व CM अरविंद केजरीवाल का सरकारी आवास अब कल्चरल सेंटर बनेगा, बड़े फैसले से सियासत गरमाई

 नई दिल्ली दिल्ली की बीजेपी सरकार ने सिविल लाइंस स्थित 6-फ्लैगस्टाफ रोड पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास को लेकर बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली सरकार अब इस आधिकारिक आवास को स्टेट गेस्ट हाउस और अत्याधुनिक कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करेगी।  दरअसल बीजेपी सरकार दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के इस आवास को शीशमहल कहती है. अब इसी आवास में दिल्ली सरकार वीवीआईपी मेहमानों की मेजबानी करेगी. इसे लेकर सरकार ने पूरा प्लान तैयार किया है।  यहां सरकारी मेहमानों के लिए स्थायी सुविधा का इंतजाम किया जाएगा. देश-विदेश से यहां आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों, विशिष्ट अतिथियों और उच्चस्तरीय अधिकारियों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस गेस्ट हाउस तैयार किया जाएगा. इसे स्टेट गेस्ट हाउस और अत्याधुनिक कल्चरल सेंटर के रूप में तैयार किया जाएगा।  अनियमितताओं के चलते भाजपा ने इसे दिया था शीशमहल नाम यह बंगला उस दौरान कराए गए पुनर्निर्माण में अनियमिताएं सामने आने के कारण चर्चा में रहा था। भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था, जिसे शीशमहल नाम दिया था, गत दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कई जगह भाजपा ने चुनावी रथ पर इसका माडल प्रदर्शित किया था। सरकार का कहना है कि अपना स्टेट गेस्ट हाउस नहीं होने से विभिन्न राज्यों और देशों से आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों तथा विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं करनी पड़ती थीं। नए फैसले के बाद यह कमी दूर होगी और सरकारी मेहमानों के लिए एक स्थायी एवं आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बंगले में कम से कम होगी तोड़फोड़ योजना के अनुसार परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिथि कक्ष विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा सम्मेलन कक्ष, बैठक स्थल और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बहुउद्देशीय सभागार भी तैयार किया जाएगा। यहां कला प्रदर्शनियां, संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियां, साहित्यिक आयोजन, सांस्कृतिक संवाद, सरकारी समारोह तथा विभिन्न विभागों के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य इस परिसर को प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ दिल्ली की कला, संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि बंगले में इस तरह से गतिविधयां शुरू की जाएंगी कि बंगले में कम से कम तोड़फोड़ की जरूरत पड़े। मूल संरचना से छेड़छाड़ नहीं होगी इस बड़े बदलाव को लेकर सरकार की रणनीति बहुत स्पष्ट है कि भवन की मूल संरचना के साथ कम से कम छेड़छाड़ की जाए. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस आलीशान इमारत को बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ से बचाना है. बिना किसी भारी संरचनात्मक बदलाव के, मौजूदा भवन को ही कुछ इस तरह से अनुकूलित किया जाएगा कि यह अपनी नई उपयोगिता यानी गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर के ढांचे में पूरी तरह से फिट बैठ सके।  क्‍या आप इसे अंदर से देख पाएंगे? चूंकि यह एक उच्च सुरक्षा वाला स्टेट गेस्ट हाउस होगा, इसलिए इसके आवासीय और वीवीआईपी हिस्सों में आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. हालांकि, परिसर के जिस हिस्से को सांस्कृतिक गतिविधियों और मल्‍टी परपज ऑड‍िटोर‍ियम के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहां होने वाली कला प्रदर्शनियों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान आम जनता को भी प्रवेश करने का अवसर मिल सकेगा।  1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान कराया गया था इसका निर्माण यह दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी बंगलों में से एक है और लुटियंस क्षेत्र के बाहर स्थित बड़े सरकारी आवासों में इसकी गिनती होती है। इसका निर्माण 1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान कराया गया था, 2004 से 2008 के बीच तत्कालीन दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष प्रेम सिंह को आवंटित रहा। बाद में विधानसभा के उपाध्यक्ष अमरीश गौतम यहां रहे। 2015 से यह दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल का आधिकारिक आवास बना। जिसमें से पुनर्निमाण के दौरान काफी निर्माण तोड़ा जा चुका है। पीडब्ल्यूडी के आठ वरिष्ठ अभियंताओं के कैरियर पर लगाया धब्बा इस बंगले में पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण पर हुए खर्च को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट और अन्य जांचों में भी निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए थे। इस बंगले से जुड़े निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में लोक निर्माण विभाग के आठ वरिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिससे उनके सेवा रिकार्ड पर प्रतिकूल असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई का असर उनके सेवा रिकार्ड, पदोन्नति और भविष्य की नियुक्तियों पर भी पड़ा है।  

“अनशन का अनुभव वांगचुक को, बाकी लोग क्यों डालें जान जोखिम में” बोले अभिजीत दीपके

नई दिल्ली नीट पेपर लीक की वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर डटी हुई है। आंदोलन को समर्थन दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं। वांगचुक के साथ कुछ छात्र भी अनशन पर कर रहे हैं, जिन्हें लगातार इसे खत्म करने के लिए मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सीजेपी बनाकर सनसनी मचा देने वाले अभिजीत दीपके भी इन छात्रों से कह रहे हैं कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है और उन्हें अनशन करके जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए। दीपके का कहना है कि सोनम वांगचुक को अनशन का अनुभव है, इसलिए उन्हें ही करने देना चाहिए। सीजेपी के मंच पर सोनम वांगचुक लगातार 9 दिन से अनशन पर हैं। बताया जा रहा है कि उनका वजन तेजी से घट रहा है। हालांकि, चार दिन में ही फॉलोअर्स के मामले में भाजपा और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ देने वाले अभिजीत दीपके जमीन पर अपेक्षा मुताबिक भीड़ नहीं उतार पाए हैं। कुछ समर्थकों और छात्रों के साथ जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे दीपके का एक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें वह यह कहते नजर आ रहे हैं कि लड़ाई लंबी चलने वाली है और इसलिए सोनम वांगचुक को छोड़कर बाकी सदस्यों को अनशन नहीं करना चाहिए, उन्हें फिट रहने की जरूरत है। लड़ाई लंबी चलेगी, सबको फिट रहना है: दीपेक एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में दीपके ने कहा, 'मैंने तो बहुत मनाया है। सारे लोगों से मैंने कहा है कि प्लीज आप लोग भूख हड़ताल मत कीजिए। क्योंकि अगर सारे लोग भूख हड़ताल करने लग गए… सरकार को तो परवाह नहीं है। अगर सरकार को परवाह होती तो 20 बच्चों की मौत नहीं होने देती। एक मौत के बाद ही या पेपर लीक के बाद ही इस्तीफा आ जाता। तो मैंने सबसे कहा है कि भूख हड़ताल मत करिए। सबको फिट रहना है तभी जाकर यह लड़ाई लंबे दौर पर चलती रहेगी। सोनम सर को भूख हड़ताल का अनुभव है तो वह अपने आपको संभाल सकते हैं। इन बच्चों की सेहत को लेकर मुझे थोड़ी टेंशन हो रही है। और मैं फिर से रिक्वेस्ट करता हूं कि ऐसा मत करिए। हमारा प्रोटेस्ट लंबा चलने वाला है तो हम अपनी जान रिस्क में क्यों डालें? सोनम सर बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। लेकिन उसके लिए जो बाकी चीजें मैंनेज करनी पड़ती है, उसके लिए तो हमें रहना पड़ेगा। फिर से मैं वही कह रहा हूं कि सारे लोग भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे तो यह प्रोटेस्ट मैनेज कौन करेगा।' ठूंस-ठूंसकर खाते लोगों को देख वांगचुक दुखी, एक दिन के अनशन की अपील दीपके का यह बयान ऐसे समय पर वायरल हुआ है जब पिछले दिनों सोनम वांगचुक ने इस बात को लेकर दुख जाहिर किया कि जंतर-मंतर पर जुटने वाले लोग 'ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं।' वांगचुक ने सभी लोगों से एक-एक दिन के अनशन की अपील करते हुए कहा कि कम से कम दिनभर ना खाएं ताकि दिन में खाना बांटने की जरूरत ना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ज्यादा खाते हैं वह मोटे होंगे, बीमार पड़ते हैं और अनशन करने वालों से पहले मर जाएंगे।

18 साइबर ठगी मामलों से जुड़ा फर्जी सिम रैकेट उजागर, ‘शिवम टेलीकॉम’ पर कार्रवाई

नई दिल्ली  सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों को अवैध रूप से प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक लाइसेंसधारी टेलीकॉम पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा एक्टिव किए गए सिम कार्ड देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 18 से अधिक साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए गए थे। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बलजीत नगर निवासी शिवा के तौर पर हुई है। आरोपी रोड किनारे स्टॉल लगाकर 'शिवम टेलीकॉम' के नाम से सिम बेचता था। डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि दिल्ली में कार्यरत ऐसे टेलीकॉम PoS एजेंटों के बारे में पता किया जा रहा था, जिनसे जारी सिम कार्ड बार-बार साइबर अपराधों में उपयोग हो रहे थे। जांच के दौरान शिवा सिम्स, नीतीश टेलीकॉम और शिवम टेलीकॉम संदेह के दायरे में आए। 2 जुलाई को आरोपी को पकड़ा जांच में पता चला कि आम लोगों के नाम पर एक्टिवेट किए गए सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे। एसएचओ इंस्पेक्टर योगराज दलाल के नेतृत्व में टीम बनाई गई। जांच में सामने आया कि शिवम टेलीकॉम के माध्यम से अवैध रूप से एक्टिव किए गए 11 सिम कार्ड देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 18 साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल हुए थे। इसके बाद 2 जुलाई को आरोपी को हिंदूराव अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।     आरोपी के सिम कार्डों से देश के अलग-अलग राज्यों में हुई 18 से ज्यादा साइबर ठगियां     सड़क किनारे स्टॉल लगाकर बेचता था सिम, 11 सिम कार्डों से खुली बड़ी साजिश की पोल 500-600 रुपये में बेचता था एक सिम पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह आम ग्राहकों के आईडी प्रूफ और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी और सहमति के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करता था। इसके बाद वह इन प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्डों को 500 से 600 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बिचौलियों और साइबर अपराधियों को बेच देता था। आरोपी जानबूझकर केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन के नियमों का उल्लंघन करता था। वह असली ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करता और उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाता था।  

एन्यूमेरेशन फॉर्म को लेकर भ्रम, लोग बूथों पर तलाश रहे BLO

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। अब कई इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर टु डोर नहीं पहुंच रहे हैं। लोग उन्हें खोजते हुए बूथों पर पहुंच रहे हैं। यहां नंबर लेकर फोन लगा रहे हैं और अपने घर बुला रहे हैं। इससे समस्या और बढ़ती जा रही है। कई इलाकों में आरडब्ल्यूए ने बूथों पर बीएलओ के बैठने की व्यवस्था की है। ताकि लोगों को आसानी से समझाकर फॉर्म भरवाए जा सकें। यहीं उनको फॉर्म भी बांटे जा रहे हैं। लेकिन, पूरी व्यवस्था ऐसे नहीं चल रही है। कई बीएलओ डोर टु डोर सर्वे भी कर रहे हैं। इससे भ्रम पैदा हो रहा है। लोगों में नाराजगी, कॉल करके घर बुला रहे बीएलओ को     कई इलाकों के लोग दूसरे बूथों पर जाकर फॉर्म मांग रहे हैं। लेकिन, फॉर्म नहीं मिल रहे हैं।     मटियामहल विधानसभा के 78 नंबर वार्ड में बने बूथ में बुजुर्ग एजाज खान पहुंचे थे।     उन्होंने बताया कि हमें मालूम हुआ कि यहां एन्यूमेरेशन फॉर्म मिल रहे हैं। यहां आकर पता चला कि हमारे इलाके चमड़े वाली गली के बीएलओ यहां नहीं हैं।     इनसे नंबर लिया है और बीएलओ से बात की है। उन्होंने कहा है कि वह जल्द पहुंचकर फॉर्म देंगी।     लोगों को एन्यूमेरेशन फॉर्म भरने के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में वह गलतियां कर रहे हैं।     वहीं बीएलओ एक-एक फॉर्म ही दे रहे हैं। लोगों को पता नहीं है कि उन्हें दो फॉर्म दिए जाने हैं।     ऐसे में वह बीएलओ से दूसरा फॉर्म मांग रहे हैं और विवाद की स्थिति बन रही है।     चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, बीएलओ को दो फॉर्म देने हैं।     अगर कोई फॉर्म नहीं भर पा रहा है तो पेंसिल से भरने को कहा जाना चाहिए।     उसको ठीक करके वापस पेन से भरना चाहिए। जरूरी है कि बीएलओ दो फॉर्म दे।