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इंदौर की घटनाओं का असर दिल्ली तक: BJP नेता बोले—आम जनता को मुफ्त बोतल वाला पानी दिया जाए

नई दिल्ली इंदौर में दूषित जल पीने से कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बीच दिल्ली सरकार से भी लोगों को बोतलबंद पानी आपूर्ति की मांग की गई है। यह मांग किसी और ने नहीं खुद भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक सरदार आरपी सिंह की है। उन्होंने दिल्ली सरकार को शहरवासियों को बोतलबंद पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल जाने की आशंका बनी रहती है। आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह को पत्र लिखकर उनसे इस सलाह पर विचार करने का आग्रह किया है। भाजपा के प्रवक्ता और राष्ट्रीय राजधानी में राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक सिंह ने मुफ्त पानी देने का तरीका भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि मुफ्त बोतलबंद पानी की आपूर्ति बोतलों पर विज्ञापनों और सुरक्षित पेयजल बुक करने संबंधी ऐप के जरिए प्रायोजित की जा सकती है। आरपी सिंह ने कहा- हमेशा रहती है आशंका उन्होंने कहा, ‘पानी की पाइपलाइन की मरम्मत पर चाहे जितना भी ध्यान दिया जाए, मलजल लाइन और अन्य स्रोतों से इसके दूषित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बोतलबंद पानी से यह सुनिश्चित होगा कि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिले।’ सिंह ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की आपूर्ति को भी घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीनों के जरिए और शुद्ध किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, गरीब लोगों का स्वास्थ्य दांव पर है क्योंकि वे महंगी आरओ मशीन नहीं लगवा सकते और असुरक्षित पेयजल पर निर्भर रहते हैं या निजी निर्माताओं का वह बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध होती है।’  

जेएनयू परिसर में विवादित नारेबाजी: पीएम मोदी–अमित शाह को लेकर ‘कब्र खुदेगी’ के नारे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगा केस में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में जमकर नारेबाजी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कैंपस में जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शन के कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में लेफ्ट स्टूडेंट्स 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर विरोध दर्ज किया। उन्होंने ट्वीट किया 'मोदी शाह की कब्र खुदेगी जेनयू की धरती पर…' शरजील उमर को जमानत नहीं मिलने के बाद ये नारे जेएनयू में टुकड़े इकोसिस्टम द्वारा लगाए गए। यह शहरी नक्सलियों का भारत विरोधी समूह है।' पूनावाला ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि ‘कांग्रेस इकोसिस्टम के स्टूडेंट्स अब धमकी दे रहे हैं। वे नारे लगा रहे थे कि जेएनयू कैंपस पर मोदी-शाह की कब्र खुदेगी। ऐसे नारे हमने कांग्रेस के कार्यक्रम में भी सुने हैं। सोचिए जिन लोगों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आरोप तय किए हैं जिन्हें प्रथम दृष्टया आतंकवाद के लिए जिम्मेदार पाया है। एक साल तक उनको जमानत नहीं मिल सकती। ऐसे लोगों के बचाव में आते-आते आज देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को मारने की धमकी दी जा रही है।’ वहीं एबीवीपी के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने कहा, 'कल जेएनयू में 'एबीवीपी-आरएसएस की कब्र खुदेगी' के नारे लगाए गए। जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी आम बात हो गई है। एबीवीपी-आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता हैं। क्या वे करोड़ों कार्यकर्ताओं के करोड़ों कब्र खोदने की बात कर रहे हैं? हमने यह भी देखा कि न्यूयॉर्क के मेयर ने एक 'आतंकवादी' को पत्र लिखकर उसे रिहा करने की बात कही। हम उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं।' आपत्तिजनक नारेबाजी पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा ‘शरजिल इमाम और उमर खालिद के समर्थन में जिस तरह जेएनयू में नारे लगे है, वाह निंदनीय है। छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए जो बेहद निंदनीय है। जेएनयू में हुआ यह घटनाक्रम विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। ऐसे लोगों की हिम्मत इसलिए बढ़ती है क्योंकि दिल्ली विधानसभा में ऐसे विधायक है जो ऐसे छात्रों को समर्थन दे रहे हैं। पीएम द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं नीति के बारे में बोला जा सकता है लेकिन देश के खिलाफ जाकर पीएम और गृह मंत्री को धमकी देना बेहद निंदनीय है।’  

दिल्ली पलूशन बना वजह? सोनिया गांधी को सांस लेने में परेशानी, दोबारा कराया गया एडमिट

नई दिल्ली कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एडमिट कराया गया है। उन्हें सीने में दर्द की समस्या थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य है और चेस्ट फिजिशियन की निगरानी में उन्हें रखा गया है। अस्पताल के एक सूत्र ने कहा कि वह रूटीन चेकअप के लिए ही आई हैं, लेकिन उन्हें खांसी की समस्या काफी ज्यादा है। विशेष तौर पर दिल्ली में बढ़े हुए पलूशन के चलते उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होती रहती हैं। एक बार फिर से ऐसी ही समस्या उभरने की आशंका है। वह सोमवार की रात को अस्पताल पहुंची थीं और फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। बीते साल ही वह 79 वर्ष की हुई थीं।   सर गंगा राम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उनकी जांच करने पर पाया गया कि उन्हें अस्थमा की समस्या थोड़ी बढ़ गई है। ऐसा सर्दी के मौसम और पलूशन के चलते हुआ है। फिलहाल एहतियात के तौर पर उन्हें एडमिट कर लिया गया है और उनकी सेहत की निगरानी की जा रही है। फिलहाल उनकी सेहत एकदम स्थिर है। उन्हें कुछ दवाएं भी दी जा रही हैं, जिनका उनकी सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी सेहत का जायजा लेने के बाद एक या दो दिन में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। 2020 में पलूशन के चलते गोवा जाने की डॉक्टरों ने दी थी सलाह इससे पहले भी सोनिया गांधी को पलूशन के चलते समस्याएं होती रही हैं। वर्ष 2020 में डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली के पलूशन से बचाव के लिए वह गोवा भी गई थीं। दिल्ली में एयर क्वॉलिटी ना सुधरने तक उन्हें गोवा में ही रहने की सलाह दी गई थी। चिकित्सकों की मानें तो एक बार फिर से उन्हें पलूशन के चलते समस्या बढ़ी है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही थी।  

प्रदूषण को लेकर दिल्ली विधानसभा में हंगामा, ‘आप’ विधायकों ने किया विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में सोमवार को शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले आम आदमी पार्टी ने वायु प्रदूषण और खराब हवा को लेकर परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजधानी के लोग पिछले कई महीनों से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार समस्या को हल करने के बजाय आंकड़ों से छेड़छाड़ कर रही है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पिछले चार महीनों से दिल्ली के लोग ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। दिल्ली के बच्चे घुटन महसूस कर रहे हैं और बुजुर्गों की जान खतरे में है। एम्स जैसे बड़े अस्पताल भी कह रहे हैं कि दिल्ली में रहना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन दिल्ली सरकार क्या कर रही है? सरकार एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई मापने वाले मॉनिटरों में हेरफेर कर रही है।" आतिशी ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक स्थिति छिपाकर लोगों को गुमराह कर रही है। इस बीच, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने विधानसभा सत्र को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सत्र दिल्ली विधानसभा का एक महत्वपूर्ण सत्र है। मंत्री आशीष सूद ने आईएएनएस से बताया, "सरकार इस सत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को सदन के सामने रखेगी। सरकार के कामकाज और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।" वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने पलटवार कर पूर्व सरकार पर निशाना साधा। भाजपा विधायक सूर्य प्रकाश खत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को दिल्ली की जनता के सामने लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "सीएजी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पिछली सरकार की गलतियों और गड़बड़ियों का सच सामने आ सके। यह हमारी जिम्मेदारी है, नहीं तो दिल्ली की जनता कैसे जानेगी कि पिछले 11 वर्षों में उन्हें किस तरह की परेशानियों और धोखे का सामना करना पड़ा?" भाजपा विधायक चंदन कुमार चौधरी ने भी पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार दिल्ली को एक आधुनिक और विकसित शहर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है, लेकिन पूर्व सरकार घोटालों में उलझी रही। आज पेश की जाने वाली सीएजी रिपोर्ट में उन घोटालों का पूरा ब्योरा सामने आएगा। दिल्ली विधानसभा के इस शीतकालीन सत्र में एक तरफ जहां 'आप' प्रदूषण को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा सीएजी रिपोर्ट के जरिए पूर्व सरकार की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं, बाकी 5 आरोपियों को मिली राहत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी है. हालांकि शीर्ष अदालत ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि दिल्ली दंगों में इन दोनों आरोपियों की भूमिका अन्य से अलग थी. इस दोनों की भूमिका इस पूरे मामले के षड्यंत्र के केंद्र में दिखती है. ऐसे में इनको जमानत नहीं दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि आदेश काफी विस्तृत है, इसलिए केवल कुछ महत्वपूर्ण अंश ही पढ़े जाएंगे. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मामले में त्वरित सुनवाई बेहद आवश्यक है. बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि जांच और ट्रायल में हुई देरी के लिए अभियोजन यानी दिल्ली पुलिस जिम्मेदार है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इसी टिप्पणी में शरजील और उमर के लिए उम्मीद दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो सकता है कि मामले की त्वरित सुनवाई हो और सुनवाई के दौरान ये दोनों निर्देश पाए जाते हैं तो उनको राहत मिल सकती है. 5 आरोपियों को दर्जनभर शर्तों पर जमानत सर्वोच्च अदालत ने गुलफिशा फातिमा, मेरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी है। अदालत ने कहा कि इन अभियुक्तों को जमानत दिए जाने से उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों में किसी प्रकार की ढील या कमजोरी नहीं मानी जाएगी। इन्हें कुछ शर्तों (लगभग 12 शर्तें) के अधीन जमानत पर रिहा किया जाएगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो ट्रायल कोर्ट अभियुक्तों को सुनवाई का अवसर देने के बाद जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगा। हाई कोर्ट ने भी जमानत से किया था इनकार आरोपियों ने फरवरी 2020 के दंगों की 'बड़ी साजिश' रचने से जुड़े मामले में जमानत से इनकार के दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। 10 दिसंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल एसवी राजू और वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा के बीच लंबी दलीलें चली थीं। दिल्ली पुलिस ने इन दलीलों के साथ किया था जमानत याचिका का विरोध दिल्ली पुलिस ने उमर, शरजील और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि फरवरी 2020 में दंगे अचानक नहीं हुए थे बल्कि भारत की संप्रभुता पर हमला करने के लिए पूर्व नियोजित तरीके से इन्हें अंजाम दिया गया था। उमर, शरजील और अन्य आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि वे 2020 के दंगों के 'सरगना' हैं, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। शरजील इमाम और उमर खालिद की तरफ से क्या दलीलें शरजील इमाम की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत में कहा था, 'वह आतंकवादी नहीं हैं, जैसा कि प्रतिवादी (पुलिस) ने उन्हें कहा है। वह राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं, जैसा कि सरकार ने कहा है। वह इस देश के नागरिक हैं, जन्म से नागरिक हैं और उन्हें अब तक किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है।' उन्होंने दलील दी कि इमाम को 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जो कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से पहले की बात है। उमर खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि फरवरी 2020 में जब दंगे भड़के थे तब उनका मुवक्किल दिल्ली में नहीं था और उसे इस तरह कैद में नहीं रखा जा सकता। गुलफिशा फातिमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत को बताया कि कार्यकर्ता ने छह साल जेल में बिताए हैं और उन्होंने मुकदमे में देरी को 'आश्चर्यजनक और अभूतपूर्व' बताया। खालिद, इमाम और अन्य की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए, दिल्ली पुलिस ने कहा कि फरवरी 2020 के दंगे कोई स्वतःस्फूर्त घटना नहीं थे, बल्कि भारत की संप्रभुता पर एक 'सुनियोजित, पूर्व नियोजित और सुनियोजित' हमला थे। फैसले में कहा गया कि देरी न्यायिक जांच को और अधिक सख्त बनाने का एक कारण बनती है. आदेश में कहा गया, “अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में केंद्रीय स्थान रखता है. विचाराधीन कैद को सजा के रूप में नहीं माना जा सकता. स्वतंत्रता से वंचित करना मनमाना नहीं होना चाहिए. यूएपीए एक विशेष कानून है, जो यह तय करता है कि ट्रायल से पहले जमानत किन परिस्थितियों में दी जा सकती है.” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से अलग है. यह अदालत की प्रमुख टिप्पणियों में से एक है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम यूएपीए की धारा 43(डी)(5) के तहत निर्धारित कसौटी पर खरे नहीं उतरते. ऐसे में इन दोनों की याचिकाएं खारिज की जाती है. पांच अन्य आरोपियों को राहत सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. लेकिन दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसी मामले में गल्फिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी.

भारी बारिश की चेतावनी: कल बिगड़ेंगे मौसम के हालात, इन राज्यों में IMD का रेड/ऑरेंज अलर्ट

नई दिल्ली इस साल मानसून ने देशभर में जोरदार दस्तक दी और कई राज्यों में अच्छी से लेकर भारी बारिश देखने को मिली। लगातार हुई बारिश के कारण कई जगह पुराने रिकॉर्ड भी टूट गए। मानसून का औपचारिक सीजन खत्म होने के बाद भी कुछ राज्यों में बारिश का सिलसिला अभी जारी है, जबकि कई इलाकों में ठंड बढ़ने लगी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 की तरह 2026 में भी बारिश सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कल यानी 5 तारीख को कई राज्यों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केरल में मौसम का हाल केरल में हर साल की तरह इस बार भी मानसून सबसे पहले पहुंचा था और राज्य में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि मानसून के बाद भी यहां बारिश पूरी तरह नहीं थमी है। मौसम विभाग के मुताबिक, कल केरल के कई इलाकों में रुक-रुककर तेज बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।   कर्नाटक में बारिश का दौर जारी कर्नाटक में भी मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई थी और अब भी कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी है। मौसम विभाग का कहना है कि कल राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है और बादल जमकर बरस सकते हैं। इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार, केरल के अलावा पुडुचेरी, कराईकल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी कल भारी बारिश होने की संभावना है। मेघालय में सुबह के समय बारिश के साथ ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ इलाकों में भी तेज बारिश के आसार हैं।

नई दिल्ली में दर्दनाक घटना: होटल बिल्डिंग से कूदने पर शख्स की मौत, मचा हड़कंप

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित मशहूर ली मेरिडियन होटल में सोमवार को एक दुखद घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार, होटल की ऊंची बिल्डिंग से एक व्यक्ति ने कूदकर अपनी जान दे दी। घटना की खबर मिलते ही होटल में और आसपास के इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलने पर दिल्ली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मृतक के शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस मृतक की पहचान नहीं कर पाई है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि व्यक्ति होटल का मेहमान था या किसी अन्य कारण से वहां मौजूद था। होटल में अफरातफरी होटल स्टाफ और वहां मौजूद अन्य लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। घटना के समय होटल परिसर में सामान्य गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन शख्स के कूदने से कर्मचारियों और मेहमानों में दहशत फैल गई। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने होटल के सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक गतिविधि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है। इस घटना ने राजधानी के पॉश इलाके में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

बालकनी में मोबाइल सिग्नल तलाशते वक्त हुआ हादसा, नोएडा में IOC के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर की जान गई

नोएडा नोएडा के सेक्टर 104 में 55 साल के शख्स की 17वें फ्लोर गिरकर मौत हो गई। शख्स की पहचान अजय गर्ग के तौर पर हुई जो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) थे। वह एटीएस वन हेलमेट सोसायटी में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। घटना शनिवार सुबह 10.20 मिनट की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक वह फोन का नेटवर्क ढूंढते हुए बालकनी में गए थे और इसी दौरान वह बालकनी से गिर गए।   मीडया रिपोर्ट के मुताबिक अजय गर्ग के फोन में फ्लैट के अंदर अछानक नेटवर्क नहीं आ रहे थे। इसलिए वह बालकनी में चले गए। सिग्नल ढूंढते ढूंढते अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गए। सोसाइटी के लोगों ने उन्हें जमीन पर पड़ा देखा और तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस सोसाइटी के CCTV फुटेज खंगाल रही है और परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी। अजय गर्ग और उनकी पत्नी मूल रूप से कानपुर के रहने वाले थे। उनका बेटा मुंबई में रहता है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अजय गर्ग की पत्नी बदहवास हो गईं। लोग अजय गर्ग को आनन फानन में अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके बेटे देवांग को भी मामले की जानकारी दी गई।  

गिग वर्कर्स के लिए खुशखबरी! राघव चड्ढा ने कहा– सही दिशा में कदम, मोदी सरकार की तारीफ

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने नए लेबर कोड के तहत गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह गिग वर्कर्स की कड़ी मेहनत को "मान्यता, सुरक्षा और सम्मान" देने की दिशा में पहला कदम है।   रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025' नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं। राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।” राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यहां तक ​​कि कई बार संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है। केंद्र सरकार के कदम का भी किया स्वागत 'आप' सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।” नए नियमों से गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता और यूनिक पहचान मिलेगी राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के 'दुख-दर्द" के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं। राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, 'गिग वर्कर्स' और 'प्लैटफॉर्म वर्कर्स' की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है। क्या होंगे फायदे यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है। इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- 'वन-स्टॉप-सॉल्यूशन' भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।  

हवा हुई साफ तो GRAP-3 से मिली राहत, लेकिन दिल्ली-NCR में नियम अब भी बरकरार

नई दिल्ली दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 380 से घटकर 236 रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदूषण स्तर में गिरावट को बताता है। वायु गुणवत्ता में इस सुधार को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की GRAP उप-समिति ने बड़ा फैसला लिया है। CAQM की उप-समिति ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में GRAP के स्टेज-3 के तहत लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा लिया है। हालांकि, प्रदूषण पर नजर बनाए रखने के लिए GRAP के स्टेज-1 और स्टेज-2 के तहत लागू सभी पाबंदियां NCR में जारी रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार, मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और प्रदूषण के स्तर में आई गिरावट के चलते यह निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर वायु गुणवत्ता दोबारा खराब होती है, तो आवश्यकतानुसार सख्त कदम फिर से लागू किए जा सकते हैं। GRAP-3 के तहत लगे ये प्रतिबंध हटाए     गैर-जरूरी निर्माण व तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक।     खनन, पत्थर तोड़ने और क्रशर यूनिट्स पर प्रतिबंध।     NCR में डीज़ल जनरेटर सेट के उपयोग पर रोक (सिर्फ आपात सेवाओं को छोड़कर)     बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-IV डीजल चारपहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक।     सड़कों पर अतिरिक्त मशीन स्वीपिंग और पानी का छिड़काव की अनिवार्यता।   GRAP-I और GRAP-2 के ये प्रतिबंध अभी लागू रहेंगे GRAP-I के प्रतिबंध:     सड़कों पर नियमित मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव।     कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक।     खुले में निर्माण सामग्री रखने पर सख्ती।     होटल-रेस्तरां में कोयला और लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध।     ट्रैफिक जाम कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाना। GRAP-2 के प्रतिबंध:     NCR के अंदर बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों पर रोक (सिर्फ आवश्यक वस्तुएं लाने वाले ट्रक को छूट)     डीजल जेनरेटर के उपयोग पर सख्ती।     पार्किंग फीस बढ़ाकर निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना।     सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए अतिरिक्त निगरानी।     प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी कार्रवाई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करें और अनावश्यक रूप से प्रदूषण फैलाने से बचें, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार का यह सिलसिला बना रहे।