samacharsecretary.com

सरकारी स्कूल छात्रों के लिए राहत: नौवीं–दसवीं में फेल विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के उन विद्यार्थियों को एक और मौका दिया है जो नौवीं या 10वीं में लगातार असफल हो रहे हैं। निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) के माध्यम से 10वीं में दाखिले के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई 2026 तय की गई है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें इस योजना के लिए प्रेरित करें और आवश्यक दस्तावेज जुटाकर समय पर आवेदन सुनिश्चित करें। इस योजना का उद्देश्य स्कूल छोड़ने की कगार पर पहुंचे विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाना है, ताकि वे 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें। सिर्फ दिल्ली के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कर सकेंग आवेदन निर्देशों के अनुसार, केवल वही विद्यार्थी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे, जो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे और नौवीं या 10वीं में कम से कम दो बार फेल या कंपार्टमेंट लाए हैं। वहीं, जो विद्यार्थी पहली बार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में फेल हुए हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपने स्कूल में ही पढ़ाई जारी रखनी होगी। दाखिले की पूरी प्रक्रिया आनलाइन एमआइएस माड्यूल के जरिए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा पूरी की जाएगी। ये कक्षाएं दिल्ली के करीब 75 निर्धारित सरकारी स्कूलों में संचालित की जाएंगी, जहां अलग-अलग स्टडी सेंटर बनाए जाएंगे। निदेशालय ने कहा कि पांच विषयों तक का पंजीकरण शुल्क सरकार वहन करेगी, लेकिन परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को देना होगा। 300 रुपये की परीक्षा शुल्क तय परीक्षा शुल्क 300 रुपये प्रति विषय, प्रायोगिक के लिए 150 रुपये प्रति विषय और ट्रांसफर आफ क्रेडिट के लिए 230 रुपये प्रति विषय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थियों को विषय चयन में भी विकल्प दिए गए हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान के साथ विज्ञान, पेंटिंग और गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थी डाटा एंट्री आपरेशन विषय को अतिरिक्त रूप से चुन सकते हैं।  

लो विजिबिलिटी के कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों का लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग

नई दिल्ली नई दिल्ली में रविवार-सोमवार की रात को खराब मौसम और लो विजिबिलिटी के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस आपात स्थिति के चलते दिल्ली जाने वाले कुल 15 विमानों को अचानक लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर डाइवर्ट किया गया। वहीं, सुबह लखनऊ का मौसम खराब होने से दिल्ली चंडीगढ़ समेत तीन स्थानों से आ रही फ्लाइटें लैंड नहीं कर पाईं। डाइवर्ट होकर लखनऊ पहुंचने वाले विमानों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों उड़ानें शामिल थीं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में काठमांडू, मस्कट और फुकेट से आने वाले विमान प्रमुख रहे। वहीं घरेलू स्तर पर जयपुर से सर्वाधिक 4 उड़ानें लखनऊ भेजी गईं। इनके अलावा हैदराबाद (2 उड़ानें), मुंबई, गुवाहाटी, कोयंबटूर, औरंगाबाद और बेंगलुरु की उड़ानों को भी सुरक्षित रूप से उतारा गया। दिल्ली में मौसम में सुधार की सूचना मिलने के बाद, लखनऊ में सुरक्षित रूप से उतारे गए सभी विमानों को रवाना कर दिया गया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम से यात्रियों को भारी असुविधा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई उड़ानें घंटों की देरी से चल रही जा थीं। एयरलाइन कंपनियां और एयरपोर्ट प्राधिकरण स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थे और यात्रियों को समय-समय पर अपडेट दिया जा रहा था। लखनऊ में भी मौसम खराब लखनऊ में भी सोमवार सुबह मौसम खराब हो गया। जिससे यहां भी उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। खराब विजिबिलिटी के कारण दिल्ली और चंडीगढ़ समेत तीन शहरों से आने वाली फ्लाइटें लैंड नहीं कर सकीं और कुछ देर तक हवा में चक्कर लगाती रहीं। पायलटों को मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ा जिससे उड़ानों में देरी हुई। 29 अप्रैल को भी डायवर्ट हुईं थी फ्लाइटें इससे पहले भी मौसम खराब होने से 29 अप्रैल को फ्लाइटों को डायवर्ट किया गया था। मध्य से लेकर पूर्वी यूपी के कई जिलों में बुधवार को तेज आंधी और बारिश का असर फ्लाइटों के संचालन पर पड़ा। वाराणसी की दो और पटना की एक उड़ान को चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर डाइवर्ट किया गया। कई फ्लाइटें तय समय से लेट रहीं। स्पाइस जेट की पुणे से वाराणसी जा रही फ्लाइट एसजी 186 को दिन के 3:55 बजे और अकासा एयर की मुंबई से वाराणसी जा रही उड़ान क्यूपी 1428 शाम 5: 38 लखनऊ पहुंची थी। कोलकाता से पटना जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई- 895 शाम 7:56 बजे लखनऊ भेजी गई। लखनऊ में यात्री विमान में बैठे रहे, क्योंकि क्रू का फ्लाइट टाइम पूरा हो चुका था। रात 10 बजे दूसरे क्रू की व्यवस्था कर विमान को पटना रवाना किया गया था। एयर इंडिया की लखनऊ से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट आइएक्स 1618 शाम 7:35 बजे उड़ान नहीं भर सकी थी।

रेखा सरकार की योजना फेल? ‘पिंक सहेली कार्ड’ से महिलाओं ने बनाई दूरी

नई दिल्ली दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ योजना फिलहाल उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 5.56 लाख कार्ड जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 से 6 प्रतिशत यानी करीब 6,000 से 8,000 महिलाएं ही इनका इस्तेमाल कर रही हैं। पुरानी व्यवस्था से नए सिस्टम में बदलाव बना चुनौती इस योजना की शुरुआत 2 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की थी। इसका उद्देश्य पिछली आप सरकार द्वारा 2019 में शुरू किए गए पिंक टिकट सिस्टम को खत्म कर केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ (NCMC) प्रणाली लागू करना था। इसके जरिए यह सुनिश्चित करना भी मकसद था कि केवल दिल्ली में रहने वाली 12 साल से ऊपर की महिलाएं ही मुफ्त यात्रा का लाभ ले सकें। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं पुराने पिंक टिकट का ही इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित रह गया है। रोजाना 6-7 लाख महिला यात्री, फिर भी कार्ड का कम उपयोग दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के अनुसार, राजधानी में रोजाना करीब 23 लाख लोग बसों में सफर करते हैं, जिनमें 6 से 7 लाख महिलाएं शामिल होती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से आधी से भी कम महिलाएं पिंक स्मार्ट कार्ड का उपयोग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी टिकट सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा। अब होगा सर्वे और फिर सख्ती DTC अब इस कम उपयोग के पीछे के कारणों को समझने के लिए सर्वे कराने की तैयारी में है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या महिलाओं के पास कार्ड नहीं है, क्या वे अन्य राज्यों से हैं या फिर बस कंडक्टर कार्ड इस्तेमाल के लिए प्रेरित नहीं कर रहे है। इसके अलावा, बसों में औचक निरीक्षण भी की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि कार्ड का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा। जुलाई से अनिवार्य हो सकता है कार्ड अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई से पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य किया जा सकता है, और धीरे-धीरे पिंक टिकट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले मई-जून में बसों के अंदर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। 450 करोड़ का है बजट महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना पहली बार 2019 में लागू की गई थी, जिसके तहत अब तक 150 करोड़ से ज्यादा पिंक टिकट जारी किए जा चुके हैं। वहीं, मौजूदा सरकार ने इस योजना को जारी रखते हुए 2026-27 बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे यह साफ है कि सरकार इस सुविधा को और मजबूत करना चाहती है। कैसे बनता है पिंक सहेली कार्ड? फिलहाल यह कार्ड दिल्ली के 58 केंद्रों पर जारी किया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली का आधार कार्ड जरूरी है, आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए, 12 साल या उससे अधिक उम्र की कोई भी महिला आवेदन कर सकती है।

ब्रेन डेड महिला के परिवार का बड़ा फैसला, एक जिंदगी ने पाई नई धड़कन

नई दिल्ली शोक की गहरी छाया के बीच जब उम्मीद की एक किरण जन्म लेती है, तो वह इंसानियत की सबसे सुंदर तस्वीर बन जाती है। चंडीमंदिर स्थित कमांड हॉस्पिटल में 2 मई 2026 को कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक 41 साल की महिला को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उसके परिवार ने अपने दर्द को परे रखकर अंगदान का निर्णय लिया। एक ओर जहां परिवार अपूरणीय क्षति के दुख में डूबा था, वहीं दूसरी ओर उसी फैसले ने एक 14 साल के बच्चे की धड़कनों को नया जीवन दे दिया। यह कहानी सिर्फ एक ट्रांसप्लांट की नहीं, बल्कि साहस, संवेदना और मानवता के मोती को एक साथ पिरोया, जिसने कई जिंदगियों में उम्मीद की रोशनी भर दी। कैसे अंजाम दिया मिशन ब्रेन डेथ के बाद महिला का दिल इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल को भेजा गया। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए अपोलो अस्पताल की एक स्पेशल टीम ने तुरंत एक चार्टर्ड प्राइवेट जेट की व्यवस्था की और चंडीगढ़ पहुंचकर दिल को सुरक्षित तरीके से दिल्ली लाया गया। तय समय-सीमा के भीतर इस हार्ट ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया गया, जिससे एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहे 14 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी मिल गई। फिलहाल बच्चा आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में स्थिर है। कमांड हॉस्पिटल की जमकर तारीफ इस जटिल और समयबद्ध ऑपरेशन को सफल बनाने में कई एजेंसियों का अहम योगदान रहा। कमांड हॉस्पिटल के कर्नल अनुराग गर्ग के प्रयास की खूब तारीफ की गई। वहीं इस काम के लिए हरियाणा ट्रैफिक पुलिस, पंजाब ट्रैफिक पुलिस ने चार्टर्ड फ्लाइट के लिए बिना देर किए व्यवस्था की और इस मिशन को अंजाम दिया गया। दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस ने बदरपुर ट्रैफिक इंचार्ज एसआई अनिल कुमार की निगरानी में एयरपोर्ट से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे दिल को महज 20 मिनट में अस्पताल पहुंचा दिया गया। इस पूरे मिशन में प्राइवेट जेट टीम ने भी अहम भूमिका निभाई। अपोलो अस्पताल ने डोनर परिवार की इस असाधारण उदारता को नमन करते हुए भारतीय सेना, कमांड हॉस्पिटल, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) और सभी संबंधित एजेंसियों का आभार जताया। क्या बोले डॉक्टर अस्पताल ने कहा कि यह घटना अंगदान के महत्व और सामूहिक प्रयास की ताकत का एक मजबूत उदाहरण है। अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकेश गोयल ने बताया कि बच्चा पिछले एक साल से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहा था और हर महीने उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि हार्ट ट्रांसप्लांट ही उसके जीवन को बचाने का एकमात्र विकल्प था। दो महीने पहले ही उसे नोट्टो (NOTTO) में रजिस्टर किया गया था, लेकिन पिछले हफ्ते उसकी हालत फिर बिगड़ गई थी। डॉ. गोयल के मुताबिक, 2 मई को कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर में एक उपयुक्त डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ। महिला को दो हफ्ते पहले ब्रेन हेमरेज हुआ था और वह ब्रेन डेड हो गई थीं। उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लेकर कई जिंदगियां बचा लीं। डॉक्टर के मुताबिक हार्ट ट्रांसप्लांट में समय बेहद अहम होता है और चार घंटे के भीतर दिल को प्रत्यारोपित कर रक्त संचार बहाल करना जरूरी होता है। डॉक्टरों की टीम दोपहर 1:30 बजे चार्टर्ड फ्लाइट से चंडीगढ़ रवाना हुई और शाम 7:30 बजे दिल्ली लौट आई। ग्रीन कॉरिडोर की मदद से दिल को आधे घंटे में अस्पताल पहुंचाया गया और आधी रात तक सफल ट्रांसप्लांट पूरा कर लिया गया। मरीज को अब कार्डियक सर्जरी आईसीयू में रखा गया है।

राजधानी को मिलेंगे नए मेट्रो कॉरिडोर, हजारों यात्रियों को होगा फायदा

नई दिल्ली राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के स्थापना दिवस के मौके पर रविवार को दिल्ली सरकार फेज-5B के तहत नई परियोजनाओं की घोषणा कर सकती है। अधिकारियों के अनुसार, फेज-4 के पूरा होते ही फेज-5 के काम में तेजी लाने की रणनीति बनाई जा रही है। सीएम रेखा गुप्ता भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। बताते चले इससे पहले केंद्र सरकार फेज- 5A के तहत तीन कॉरिडोर को मंजूरी दे चुकी है, जिनमें एरोसिटी-एयरपोर्ट टर्मिनल-1, कालिंदी कुंज-बॉटनिकल गार्डन और आरके आश्रम-इंद्रलोक (सेंट्रल विस्टा) कॉरिडोर शामिल हैं। इन पर निर्माण प्रक्रिया जारी है। फेज-5B के तहत दिल्ली-एनसीआर में कुल 15 नए कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें से 7 दिल्ली में बनाए जा सकते हैं। इन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 97 किमी होगी और इनमें 65 स्टेशन शामिल होंगे। परियोजना की अनुमानित लागत 4S,204.56 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इनमें से चार कॉरिडोर को प्राथमिकता देते हुए 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बाकी तीन कॉरिडोर बाद में बनाए जाएंगे। 97 किमी का होगा नेटवर्क     रविवार को डीएमआरसी के स्थापना दिवस के मौके पर होना है कार्यक्रम     इसके तहत 97 किमी के नेटवर्क में 65 स्टेशन है प्रस्तावित     15 नए कॉरिडोर है प्रस्तावित, इनमें 7 दिल्ली में बन सकते हैं     48,204.56 करोड़ आंकी जा रही है अनुमानित लागत इसकी कौन-कौन से रूट शामिल? प्रमुख प्रस्तावित कॉरिडोर में मयूर विहार फेज-3 से शास्त्री पार्क (13.19 किमी), सेंट्रल विस्टा से वसंत कुंज (14.5 किमी), समयपुर बादली से नरेला स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स (11.6 किमी) और मायापुरी से कश्मीरी गेट (12 किमी) शामिल हैं। इसके अलावा सीजीओ कॉम्प्लेक्स से सूर्य विहार फरीदाबाद तक 18 किमी लंबा कॉरिडोर बनाने की योजना है।  

विवेक विहार में आग के कहर ने ली 9 जानें, चार मंजिला इमारत में लगी आग

 नई दिल्ली  पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में रविवार तड़के एक आवासीय इमारत में आग लगने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि विवेक विहार फेज-1 में चार मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना तड़के करीब तीन बजकर 48 मिनट पर मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंचे। तुरंत ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया। विवेक विहार की बिल्डिंग में कैसे लगी आग? दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि इस आग की घटना में 9 लोगों की मौत हो गई है। आग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर बने फ्लैटों में लगी थी। बचाव और आग बुझाने के काम के दौरान, बिल्डिंग से 10-15 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल ले जाया गया। भीषण अग्निकांड में 9 लोगों की मौत पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आग बुझाने के लिए दमकल की कुल 12 गाड़ियां भेजी गईं। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस के दलों ने बचाव और निकासी प्रयासों में सहायता की। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान हो गई है। जान गंवाने वालों में एक डेढ़ साल का मासूम भी है। भीषण अग्निकांड में इन लोगों ने गंवाई जान चार मंजिला इमारत में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग मंजिल पर शव मिले हैं। पुलिस ने मृतकों के बारे में जानकारी दी है। जानिए भीषण अग्निकांड किन-किन लोगों ने गंवाई जान। दूसरी मंजिल (पीछे की तरफ) पर मृतक: 1. अरविंद, पिता – छोटे लाल, निवासी – B-13, दूसरी मंज़िल, विवेक विहार; उम्र – 60 वर्ष 2. अनीता जैन, पत्नी – अरविंद जैन; उम्र – 58 वर्ष 3. निशांत जैन, पिता – अरविंद जैन; उम्र – 35 वर्ष 4. आँचल जैन, पत्नी – निशांत जैन; उम्र – 33 वर्ष 5. मास्टर आकाश जैन, पिता – निशांत जैन; उम्र – 1.5 वर्ष पहली मंजिल पर मृतक: 1. शिखा जैन, पत्नी – नवीन; उम्र – 45 वर्ष तीसरी मंजिल पर मृतक – एक ही परिवार के सदस्य: 1. पति – नितिन जैन; उम्र – लगभग 50 वर्ष 2. पत्नी – शैले जैन; उम्र – लगभग 48 वर्ष 3. बेटा – सम्यक जैन; उम्र – लगभग 25 वर्ष घायल: नवीन जैन; उम्र – 48 वर्ष एसी ब्लास्ट से आग लगने की आशंका ऐसी आशंका जताई जा रही की एसी ब्लास्ट से घर में आग लगी है। हालांकि, अभी मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आग लगने की असल वजह क्या है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। फायर कंट्रोल रूम को इस हादसे की सूचना तड़के 3:48 बजे मिली थी, करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पा लिया गया। चार मंजिला बिल्डिंग में कैसे फैली आग? अधिकारियों ने बताया कि आग बुझाने के बाद भी काफी देर तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा। खासकर ऊपरी मंजिलों पर, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अंदर फंसा न रह जाए। पुलिस के अनुसार, आग ने इमारत की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित कई फ्लैट को अपनी चपेट में ले लिया। कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और करीब 14 से 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ लोग पीछे के फ्लैट में फंसे होने की आशंका थी, हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी के अंदर फंसे होने से इनकार किया है।  AC ब्लास्ट से लगी आग की आशंका इस घटना के चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने की वजह एसी में ब्लास्ट हो सकता है. हालांकि, आग लगने के सही कारणों का अभी आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।  बताया जा रहा है कि यह चार मंजिला इमारत थी, जिसमें कुल 8 फ्लैट बने हुए थे. आग लगने के समय ज्यादातर लोग सो रहे थे, जिससे कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके।  कूलिंग ऑपरेशन जारी दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस के मुताबिक, फिलहाल आग पूरी तरह से काबू में है और कूलिंग ऑपरेशन जारी है. साथ ही, इमारत में सर्च ऑपरेशन चलाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई और अंदर फंसा न हो।  इस दर्दनाक हादसे ने इलाके में दहशत फैला दी है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। 

श्याम स्वीट्स दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने उड़ाए लाखों रुपये

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने चावड़ी बाजार में दुकान से 3.85 लाख रुपए की चोरी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि आरोपी दुकान में ही काम करता था। उसे घटना के 36 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया है। क्या था पूरा मामला? दिल्ली के हौज काजी पुलिस थाने में 29 अप्रैल को चोरी के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह चावड़ी बाज़ार इलाके में 'श्याम स्वीट्स' नाम से एक दुकान चलाता है। 28 अप्रैल को रात करीब 9 बजे, उसने अपने मैनेजर और हेल्पर (जिसकी पहचान संजय के रूप में हुई है) को रात 10 बजे तक दुकान बंद करने का निर्देश देकर दुकान छोड़ दी। हालांकि, उसी रात हेल्पर ने कथित तौर पर दुकान की चाबियां लीं, दुकान को फिर से खोला और कैश बॉक्स में रखे 3.85 लाख रुपए लेकर फरार हो गया। सीसीटीवी से हुई आरोपी की पहचान दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की पहचान की। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी फरार है और उसके पास केवल उसका मोबाइल नंबर ही एक अहम सुराग के तौर पर उपलब्ध था। जांच में आया सामने अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी निगरानी शुरू की गई, जिससे लोकेशन का पता चला। छानबीन के दौरान सामने आया कि आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर के बीच घूम रहा है। पुलिस ने कहा, "गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। इसके बावजूद टीम ने लगातार उसका पीछा किया और उसके सुरागों पर नजर रखी। दृढ़ संकल्प और आपसी तालमेल का प्रदर्शन करते हुए टीम ने सफलतापूर्वक आरोपी को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया।" मध्य प्रदेश का रहने वाला है आरोपी आरोपी की पहचान संजय शर्मा के रूप में हुई है, जो ग्वालियर का रहने वाला है। पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी 8वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और पिछले 12 से 13 सालों से दिल्ली में मिठाइयों की दुकानों पर रुक-रुककर काम कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि दीपावली के दौरान उसने कुछ समय के लिए उसी दुकान पर भी काम किया था।  

राजधानी में सनसनी: जज अमन कुमार शर्मा का शव फंदे से लटका मिला

दिल्ली दिल्ली के जज अमन कुमार शर्मा ने आत्महत्या कर ली है। शनिवार को सफदरजंग इलाके में उनका शव फंदे से लटका मिला। जानकारी के मुताबिक थाना सफदरजंग एन्क्लेव को आज एक पीसीआर कॉल मिली जिसमें आत्महत्या के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान पुलिस को जानकारी दी गई कि 30 साल के अमन कुमार शर्मा ने अपने आवास पर सुसाइड कर लिया है। वह दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में डीएलएसए (DLSA) के पद पर तैनात थे। घटना की जानकारी अमन के जीजा शिवम ने दी। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले में जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी भी प्रकार की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। हालांकि, जांच प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पूरी की पढ़ाई आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जज ने 19 जून, 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2018 में पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पढ़ाई पूरी की। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई तरह के आपराधिक और दीवानी (सिविल) मामलों की सुनवाई की। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) और सिविल जज के रूप में अपनी सेवाएं दीं। पिछले महीने वकील ने की आत्महत्या पिछले महीने ही दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में स्थित एक होटल की 15वीं मंजिल से कूद कर 26 साल के वकील ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को रॉयल प्लाजा होटल में हुई इस घटना की सूचना रविवार रात करीब सवा नौ बजे दी गई। मृतक की पहचान दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजेश सिंह के रूप में हुई है, जो उसी दिन शाम में होटल में ठहरने आया था। पुलिस के एक बयान के मुताबिक, पुलिस दल ने होटल पहुंच कर पाया कि महावीर एनक्लेव निवासी सिंह ने इमारत की 15वीं मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी। पुलिस के मुताबिक, मृतक कमरे में अकेला ठहरा हुआ था। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद उसे तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल की जांच के लिए अपराध दल और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के दल बुलाए गए। साक्ष्य इकट्ठा किए गए तथा होटल परिसर में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई। जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें वकील ने किसी को दोषी नहीं ठहराया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़ित कुछ मुद्दों को लेकर डिप्रेशन में था।  

‘नमो यमुना’ क्रूज इस महीने से दिल्ली में, 5 KM का सफर और किराया होगा कितना?

नई दिल्ली दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार एक नई सेवा की शुरुआत करने जा रही है। नमो भारत के बाद अब राजधानी में लोग 'नमो यमुना' में भी सफर कर पाएंगे। इसी महीने (मई) के अंत से तक यमुना नदी में नमो यमुना क्रूज की शुरुआत करने की तैयारी है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यमुना में क्रूज की शुरुआत 20 फरवरी को ही होनी थी, जब दिल्ली में भाजपा सरकार को एक साल पूरे हुए थे। लेकिन कुछ काम पूरे नहीं होने की वजह से लॉन्च को टाल दिया गया था। सरकार अब इसे जल्द ही शुरू करना चाहती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसका उद्घाटन कर सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'बोट अब तैयार है और पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है। सफेद और नीले रंग के बोट पर 'नमो भारत' लिखा है और इसे अभी सोनिया विहार स्पोर्ट्स क्लब में रखा गया है। बोट को एक सफेद कपड़े से ढंका गया है।' 5 किलोमीटर का सफर दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने  एचटी को बताया कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक महीने के भीतर उद्घाटन पर फैसला लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सोनिया विहार और जगतपुरी के बीच एक घंटे की बोट राइड का संचालन किया जाएगा। यमुना में 5 किलोमीटर का यह सफर होगा। क्रूज के जरिए लोग घाटों और प्राकृतिक सुंदरता को निहार सकेंगे। कितना होगा किराया इस क्रूज में सफर के लिए प्रति व्यक्ति करीब 500 रुपये का टिकट लगेगा। दोनों 'स्टेशनों' पर टिकट काउंटर और वेटिंग एरिया विकसित किया गया है। सरकार वाटर स्पोर्ट्स पर भी विचार कर रही है। सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक इसका संचालन किया जा सकता है। गर्मी और इस मौसम में पानी की कमी लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि बोट एयर कंडिशंड है। उन्होंने कहा, 'नदी सूखेगी नहीं।'उन्होंने कहा कि वजीराबाद में सालभर पानी का अच्छा स्तर रहता है, इसलिए इस जगह का चुनाव किया गया है। मुंबई की इंस्पिरेशन मरीन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बनाया गया आइलैंड बोट्स 40 (IB-40) एक 40 फीट का नदी क्रूज बोट है। यमुना की सफाई, रिवर फ्रंट भाजपा सरकार का बड़ा एजेंडा दिल्ली में लंबे समय बाद सत्ता में आई भाजपा ने चुनाव से पहले यमुना को लेकर कई बड़े वादे किए थे। यमुना की सफाई और रिवर फ्रंट बनाने का वादा किया गया है। दोनों ही मोर्चे पर सरकार काम शुरू कर चुकी है। यमुना की सफाई और रिवर फ्रंट तैयार होने के बाद यमुना में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाए जाने की योजना है।

उत्तम नगर दिल्ली में बुलडोजर एक्शन फिर से शुरू, ट्राइब्यूनल ने राहत की अर्जी खारिज की

नई दिल्ली  उत्तम नगर की उसी पुनर्वासित कालोनी में  सुबह एक बार फिर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जहां कुछ दिन पहले तरुण नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बार निगम पूरी कानूनी तैयारी के साथ पहुंचा था। जैसे ही निगम के लिए गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डिमालिशन पर रोक हटाई, वैसे ही निगम ने उन विवादित इमारतों को गिराना शुरू कर दिया जो कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई थीं। के अनुसार तरुण की हत्या के कुछ दिन बाद ही जब निगम ने इस मामले में आरोपितों में से एक के घर के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाया था, तब इस मामले में 13 पक्षकारों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की राहत देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था। 28 अप्रैल को याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल पहुंचे। 29 अप्रैल हुई सुनवाई में निगम ने दलील दी कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए स्टे हटा दिया। इसके अगले ही दिन निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी। निगम पश्चिमी जोन के अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान दो संपत्तियों पर निगम ने हथौड़ा चलाया। इनमें एक संपत्ति वह थी जिसपर तीन प्लाटों को जोड़कर इमारत खड़ी की गई थी। वहीं दूसरी संपत्ति ऐसी थी, जिसपर दो प्लाट को जोड़कर घर बनाया गया था। सुबह जब निगम की टीमें कार्रवाई करने पहुंचीं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। इस इलाके में कई आवासीय इकाइयों को आपस में जोड़कर बड़ी इमारतें बना ली गई थीं. एक मामले में तीन घरों को मिलाकर एक ढांचा बनाया गया, जबकि दूसरे मामले में दो इकाइयों को जोड़ा गया था. इस मामले में आरोपी के परिवार ने पहले 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उन्हें 15 दिनों की अंतरिम राहत दी थी।  कोर्ट ने परिवार को एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया. 29 अप्रैल को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने ठोस आधार की कमी की बात कही. इसके बाद स्टे ऑर्डर हटा लिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2026 को होगी।  क्या था पूरा मामला? बता दें कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित जेजे कॉलोनी, हस्तसाल में होली के दौरान तरुण के परिवार की एक बच्ची ने पानी का गुब्बारा फेंका था. गुब्बारे का पानी पड़ोसी महिला पर गिर गया. इसी बात पर दो पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें 26 साल के तरुण की मौत हो गई थी. अब उसी मामले के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का डंडा चला है।