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ऑनलाइन आतंक का नेटवर्क बेनकाब: टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड की पहचान उजागर

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किला के पास हुए विस्फोट की जांच में सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव साल 2019 से ही हो गया था। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का योगदान रहा। जांच से यह भी पता चला है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अक्सर इनके नाम सामने आते हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच से सीमा पार आतंकवाद की रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। ये भारत के लिए काफी चिंताजनक हैं। इस बदली रणनीति के तहत पाकिस्तान और दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठे आतंकी आका डिजिटल प्लेटफार्मों का सहारा लेकर उच्च शिक्षित पेशेवरों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं। सीमा पार बैठ ऐसे चुने मोहरे जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि टेरर मॉड्यूल के सदस्यों को शुरू में सीमा पार के आतंकी आकाओं ने फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एक्टिव पाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. मुजफ्फर राठेर और डॉ. उमर उन नबी की गतिविधियों को देखकर ही उनका सलेक्शन सीमा पार के आतंकियों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए किया। आईईडी बनाने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल अधिकारियों ने बताया कि ऐसे भारत विरोधी लोगों को तुरंत ‘टेलीग्राम’ पर एक निजी ग्रुप में जोड़ा गया। यहीं से उन्हें बरगलाना शुरू किया गया। जांच में यह भी पाया गया है कि आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने हमलों को अंजाम देने के लिए संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का तरीका सीखने के लिए यूट्यूब का भी खूब इस्तेमाल किया। सीमा पार के 3 आतंकी आकाओं के नाम पूछताछ से मिले निष्कर्षों और डिजिटल फुटप्रिंट की छानबीन से पता चला कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी नाम के आतंकी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से बैठकर अपनी गतिविधियां चला रहे है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों में अक्सर इन्हीं आतंकी आकाओं के नाम सामने आते हैं।  

क्यों छीना जा सकता है अल फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा? जानिए किसने थमाया नोटिस

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जांच में केंद्र में रही अल फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस पर भी अब खतरे के बादल उमड़ आए हैं। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के 'अल्पसंख्यक दर्जे' को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने भी मान्यता से जुड़े दावों को लेकर कॉलेज को नोटिस जारी किया था।   नोटिस का कारण NCMEI ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब जांचकर्ताओं ने 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके में शामिल दो व्यक्तियों का संबंध इस संस्थान से पाया है। आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया है। नोटिस में अल-फलाह से उनकी मैनेजिंग बॉडी, ट्रस्ट के ढांचे, फंडिंग (पैसे) के स्रोतों, नियुक्ति की प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम, 2004 के नियमों के पालन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। आयोग ने ट्रस्ट डीड, मैनेजमेंट की संरचना, एडमिशन के आंकड़े, शिक्षकों की नियुक्तियां, गवर्निंग बॉडी की बैठकों के विवरण और पिछले तीन सालों के वित्तीय विवरण के मूल रिकॉर्ड भी मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "पेश न होने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर संस्थान के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जा सकती है।" इस बीच हरियाणा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एक सत्यापन रिपोर्ट (verification report) दाखिल करे। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता मिलने के बाद से किए गए निरीक्षणों (inspections), निगरानी कार्यों और विभाग व यूनिवर्सिटी के बीच हुए पत्राचार (बातचीत) का पूरा विवरण होना चाहिए। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, NCMEI अब निम्नलिखित बातों की जांच करेगा। क्या यूनिवर्सिटी का संचालन अभी भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है जिसका ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व है? क्या यूनिवर्सिटी के स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव आया है? क्या अल्पसंख्यक दर्जे के लिए जरूरी शर्तें अभी भी बरकरार हैं? 10 नवंबर को हुए धमाके के बाद से इस संस्थान पर जांच और सख्त हो गई है। उस धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान गई थी। जांच में पाया गया है कि विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने वाले डॉ. उमर उन-नबी और इस मामले में आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, दोनों ही इस यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मामले से जुड़े चार डॉक्टरों का नाम अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया है। इन डॉक्टरों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों के नाम: मुजफ्फर अहमद राथर अदील अहमद राथर मुजम्मिल शकील गनी शाहीन शाहिद 18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) की जांच के तहत हुई है, जो मान्यता (accreditation) के फर्जी दावों और पैसों की गड़बड़ी से जुड़ी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है। इससे पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर किए गए मान्यता से जुड़े दावों पर सफाई मांगी थी। NAAC के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब भेज दिया है। उन्होंने परिषद को बताया है कि वेबसाइट से वे दावे हटा दिए गए हैं। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के प्रशासन और कुलपति (Vice-Chancellor) ने इस मामले पर हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। NCMEI की 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आयोग और दस्तावेज मांगेगा, नई जांच शुरू करेगा, या फिर संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे (minority status) की समीक्षा करके उसे वापस लेगा। फिलहाल कई एजेंसियां अल-फलाह ग्रुप के रोजगार रिकॉर्ड, वित्तीय डेटा और संस्थान द्वारा किए गए अन्य दावों की जांच कर रही हैं।

मदनी का वार: ‘मुस्लिम दबाने की कोशिश’—कांग्रेस ने भी सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट की चल रही जांच के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा भारत में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है। मौलाना अरशद मदनी ने दावा किया कि भारत में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने विदेशों में मुस्लिम नेताओं के उच्च पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया, लेकिन भारत में ऐसे पदों पर पहुंचने वालों को जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर-इलेक्ट जोहरान ममदानी और लंदन के मेयर सादिक खान का उल्लेख किया।   उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति भी नहीं बन सकता और यदि कोई बनता है तो उसे जेल भेज दिया जाता है, जिसका उदाहरण आजम खान हैं। उन्होंने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में हो रही जांच का भी हवाला दिया। मदनी ने आरोप लगाया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रही है कि मुसलमान कभी सिर न उठाए। भाजपा नेता यासिर जिलानी ने मदनी के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्हें भ्रमित करने वाला और गुमराह करने वाला बताया। जिलानी ने कहा कि मुसलमानों के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती और हिंदुओं से बेहतर कोई बड़ा भाई नहीं हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आजम खान और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक के खिलाफ मामले कानूनी उल्लंघनों पर आधारित हैं। जिलानी ने कहा कि आजम खान विभिन्न अपराधों में शामिल हैं। आजम खान और उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को हाल ही में एक दोहरे पैन कार्ड जालसाजी मामले में 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक अन्य भाजपा नेता मोहसिन रजा ने आरोप लगाया कि मदनी और उनका परिवार देश के मुसलमानों को लूटता रहा है और वे दोषारोपण की राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता उदित राज ने मौलाना अरशद मदनी के बयानों का समर्थन किया और सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उदित राज ने कहा कि वह मदनी के बयान का समर्थन करते हैं और उन्होंने सवाल किया कि मुसलमानों के घर बुलडोजर से क्यों गिराए जा रहे हैं? उन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में किसी ने आतंकवादी गतिविधि की होगी, लेकिन उनका कहना है कि पूरे विश्वविद्यालय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।  

सांसों पर संकट! दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने को GRAP में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली  दिल्ली एनसीआर और आसपास के इलाकों के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) में बड़े बदलाव किए हैं। CAQM ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को एक स्टेज पहले कर दिया है। यानी, जो पाबंदियां पहले सबसे खराब हवा होने पर लगती थीं, अब वे उससे थोड़ी बेहतर हवा होते ही लागू हो जाएंगी। इस आदेश के मुताबित ग्रैप IV के तहत 'गंभीर' एक्यूआई के लिए लागू किए जाने वाले उपाय ग्रैप 3 के तहत लागू किए जाएंगे।  सीएक्यूएम की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक GRAP IV के तहत उपाय अब GRAP III के तहत लागू होंगे, इसलिए एनसीआर राज्य सरकारें यह तय करेंगी कि क्या सरकारी, नगर निगम और प्राइवेट ऑफिसों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) करने को कहा जा सकता है। वहीं केंद्र सरकार, केंद्र सरकार के ऑफिसों में कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने पर निर्णय ले सकती है। इस बीच, GRAP की समय-सारिणी में बदलाव का निर्देश देते हुए, वर्तमान में GRAP चरण II के तहत उपाय GRAP चरण I के अंतर्गत किए जाएंगे। अब GRAP I के तहत, बिजली की सप्लाई बिना रुकावट के सुनिश्चित की जाएगी ताकि लोग जनरेटर न चलाएं। ट्रैफिक जाम कम करने के लिए सिग्नल पर ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात होंगे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस/मेट्रो) बढ़ाए जाएंगे। इसी तरह GRAP III के उपाय GRAP II के तहत लागू किए जाएंगे। नए GRAP II में, दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्य सरकारें दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में सरकारी ऑफिसों और नगर निकायों के समय में बदलाव करेंगी। राज्य सरकारें एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में सराकरी कार्यालयों और नगर निकायों के समय में बदलाव करने का निर्णय ले सकती हैं।  

इंटरनेशनल टेरर लिंक! दिल्ली में बम के बाद सामने आई चीन-तुर्की-पाकिस्तान की नई साजिश

नई दिल्ली  पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के इशारे पर दिल्ली में अंजाम दिए गए बम धमाके के 10 दिन बाद ही अब 'बंदूक' वाली एक साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े हथियार तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान, चीन और तुर्की से जुड़े हुए हैं। पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया गया है, जो तरह-तरह से भारत में खून-खराबे और तबाही की साजिश रचने में व्यस्त रहता है। दिल्ली पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मनदीप, दलविंदर, रोहन और अजय के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चीन और तुर्की में बने 10 अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 92 जिंदा कारतूस की बरामदगी हुई है। बरामद पिस्टल्स में तुर्की में निर्मित PX-5.7 और चीन में निर्मित PX-3 शामिल हैं। ये पिस्टल बेहद खतरनाक हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्स में होता है। खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क गिरोह का सीधा संबंध आईएसआई से मिला है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। पता लगाया जा रहा है कि इस तरह के कितने पिस्टल पहले आ चुके हैं और नई खेप किन लोगों तक पहुंचना था। ड्रोन से पंजाब भेजते थे हथियार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तुर्की और चीन में निर्मित इन बंदूकों को भारत भेजने का काम आईएसआई की ओर से किया जा रहा था। यह भी पता चला है कि हथियारों को पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा था। तस्करी से जुड़े गुर्गे ड्रोन के जरिए पंजाब में सीमा पार गिराते थे। यहां से इन पिस्टल को दिल्ली लाया गया था। पिस्टल की सप्लाई दिल्ली और आसपास के इलाकों में अपराधियों को होनी थी।

प्रदूषण की भारी मार: दिल्ली-एनसीआर का AQI 600+, लोगों का बाहर निकलना मुश्किल

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कई हिस्सों में आज सुबह वायु गुणवत्ता (Air Quality) एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि यह गंभीर प्लस (Severe Plus) की श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। 600 के पार पहुंचा AQI कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 600 के आंकड़े को भी पार कर गया है। यह बताता है कि हवा में प्रदूषक कणों (Pollutants) की मात्रा बेहद अधिक हो गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज़्यादा प्रदूषित क्षेत्रों की स्थिति कुछ इस प्रकार है: इलाका     दर्ज AQI     श्रेणी वज़ीरपुर     691     गंभीर प्लस (सबसे प्रदूषित) आनंद विहार     620     गंभीर प्लस जहांगीरपुरी     583     गंभीर प्लस बहादुरगढ़     550     गंभीर प्लस इन इलाकों के अलावा लोनी, रोहिणी और नोएडा सेक्टर-116 में भी प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। यह खतरनाक स्तर लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी दे रहा है खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही श्वसन संबंधी बीमारियों (Respiratory Ailments) से जूझ रहे लोगों के लिए स्थिति बहुत गंभीर है। अधिकारियों को तत्काल इस पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।  

खराब वायु गुणवत्ता के कारण दिल्ली स्कूलों में खेलकूद रोकी गई

नई दिल्ली दिल्ली में हवा की हालत बेहद खराब हो चुकी है और अब यह दमघोंटू होती जा रही है। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) के लगातार बहुत खराब श्रेणी में होने की वजह से दिल्ली सरकार ने स्कूलों में स्पोर्ट्स और आउटडोर एक्टिविटीज को रद्द करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय पर आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट (CAQM) से कहा था कि दिल्ली के स्कूलों में नवंबर और दिसंबर में खेल गतिवधियों को रोकने के लिए निर्देश जारी करने पर विचार किया जाए। सीएक्यूएम ने अपनी अडवाजरी में कहा है कि सभी तरह की केल प्रतियोगिताओं को टाल दिया जाए। यह भी कहा गया है कि दिल्ली में हवा की मौजूदा गुणवत्ता बच्चों की सेहत के लिए जोखिम भरा है। सीएक्यूएम की सलाह दिल्ली-एनसीआर के सभी स्कूल, कॉलेज यूनिवर्सिटीज और मान्यता प्राप्त खेल संघों के लिए है। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ रही और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मामूली गिरावट के साथ 370 दर्ज किया गया, जो बृहस्पतिवार को 391 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने पहले यह अनुमान लगाया था कि वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में जा सकती है। सीपीसीबी के अनुसार, एक्यूआई 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ माना जाता है। सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल 23 निगरानी स्टेशनों ने ‘बेहद खराब’ वायु गुणवत्ता दर्ज की, जबकि 13 स्थानों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ देखा गया। वजीरपुर में एक्यूआई सबसे अधिक 442 दर्ज किया गया। आर के पुरम, बवाना, आनंद विहार, जहांगीर पुरी और रोहिणी में भी यह 400 से ऊपर ही रहा।

सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश: लग्ज़री पेट्रोल-डीजल वाहनों पर पाबंदी, EV नीति होगी सख्ती से लागू

नई दिल्ली Ban on Luxury Petrol-Diesel Cars: दिल्ली की हवा जब नवंबर आते-आते धुएँ की चादर ओढ़ लेती है, तब सिर्फ इंसान नहीं, नीतियों की भी सांस फूलने लगती है. ऐसे वक्त में सुप्रीम कोर्ट का एक सुझाव ने देश के लग्जरी कार के मालिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अदालत का कहना है अब समय आ गया है कि लग्ज़री पेट्रोल-डीजल लग्जरी कारें धीरे-धीरे सड़क से हटाई जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा है कि, पेट्रोल और डीजल से चलने वाली लग्जरी कारों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने पर विचार होना चाहिए. यह सुझाव उस समय आया है जब देश इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दिशा में तेज़ी से बढ़ तो रहा है, लेकिन लग्ज़री सेगमेंट में अब भी ज़्यादातर लोग पारंपरिक इंजन वाली (पेट्रोल-डीजल) कारों को ही प्राथमिकता देते हैं. यह सुझाव सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसका प्रतिनिधित्व वकील प्रशांत भूषण कर रहे थे. याचिका में मांग की गई है कि सरकार की मौजूदा ईवी नीतियों को ज़मीन पर सख्ती से लागू किया जाए, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को वास्तव में बढ़ावा मिल सके. क्या है कोर्ट का सुझाव? 13 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि, शुरुआत लग्ज़री इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों पर पाबंदी से हो सकती है. अदालत के मुताबिक, बड़ी इलेक्ट्रिक कारें अब आसानी से उपलब्ध हैं और उन्हीं सुविधाओं के साथ आती हैं जिन्हें VIP और बड़े कॉरपोरेट घराने अपने वाहन चुनते समय देखते हैं. ऐसे में इन लग्जरी मॉडलों को चरणबद्ध तरीके से हटाने से आम जनता प्रभावित नहीं होगी. बेंच ने यह भी सुझाव दिया कि बड़े महानगरों में पायलट प्रोजेक्ट चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय EV की ओर प्रोत्साहित किया जा सकता है. बेंच का कहना है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी वैसे ही चार्जिंग स्टेशनों की मांग भी बढ़ेगी. साथ ही चार्जिंग इंफ्रा को बेहतर होनी शुरू हो जाएगी. क्या समीक्षा लायक हो चुकी है EV पॉलिसी सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय काम कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सभी नीतियों, नोटिफिकेशन और डेवलपमेंट की एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मौजूदा EV पॉलिसी, जो 5 साल से अधिक पुरानी हैं, अब समीक्षा लायक हो चुकी हैं. अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी, जिसमें विस्तृत रिपोर्ट पेश की जानी है. लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों की मांग भारत में लग्जरी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक (EV) की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि आम बाजार में यह सिर्फ 2–3 प्रतिशत है. यही वजह है कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में BMW और Mercedes-Benz जैसी कंपनियों ने जबरदस्त इलेक्ट्रिक कार बिक्री दर्ज की है. दिलचस्प बात यह है कि 1 करोड़ रुपये से ऊपर की इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भी अब पहले से कहीं तेज़ी से बिक रही हैं. यानी ऐसे लोग जो वाहन पर ज्यादा पैसा खर्च करने में सक्षम है वो इलेक्ट्रिक कारों को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.  टॉप 5 लग्ज़री कार ब्रांड्स की सालाना बिक्री (यूनिट में) क्रम         ब्रांड            वित्त वर्ष 24                 वित्त वर्ष 25 1.     मर्सिडीज-बेंज        18,123                    18,928 2.       बीएमडब्ल्यू           15,420                15,995 3.     जगुआर लैंडरोवर      4,436                   6,183 4.      ऑडी                    7,049                  5,993 5.     वोल्वो                    2,150                   1,750 इन आंकड़ों से साफ दिखता है कि वित्त वर्ष 25 में मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जबकि ऑडी और वोल्वो की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. जगुआर लैंडरोवर ने सबसे अधिक तेजी दिखाई है और FY24 के मुकाबले FY25 में अच्छी ग्रोथ हासिल की है. कुल मिलाकर, मार्केट में जर्मन ब्रांड्स का दबदबा कायम है और Mercedes-Benz अभी भी लग्ज़री सेगमेंट की सबसे अधिक बिकने वाली कार ब्रांड बनी हुई है. कितनी कारों पर पड़ेगा असर भारत में पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में लग्ज़री कारों का मार्केट शेयर बहुत ही कम है. ये देश में बेची वाली कुल कारों का तकरीबन 1% है. जो साल 2030 तक बढ़कर 4-5% पहुंचने की उम्मीद है. लग्ज़री कारों की मार्केट प्रेजेंस का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि, बीते अक्टूबर में टाटा नेक्सन बेस्ट सेलिंग कार बनी और इसके कुल 22,083 यूनिट बेचे गए थे. जो मर्सिडीज-बेंज की सालान बिक्री (18,928) से भी ज्यादा है. खैर, 37-38.8%. मार्केट शेयर के साथ मर्सिडीज-बेंज लग्ज़री कार सेग्मेंट की लीडर बनी हुई है. दूसरी ओर तकरीबन 32% बाजार पर बीएमडब्ल्यू का कब्ज़ा है. जगुआर और ऑडी के बीच थर्ड पोजिशन को लेकर खींचतान जारी है, जिसमें FY25 में जगुआर आगे है. वाहनों के इस बिक्री के आंकड़ों में इन ब्रांड्स के इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं.  ये कार ब्रांड्स होंगे प्रभावित अगर यह प्रतिबंध लागू होता है तो इसका सीधा असर उन लग्ज़री कार ब्रांड्स के खरीदारों पर पड़ेगा जो इलेक्ट्रिक विकल्प होने के बावजूद पेट्रोल या डीजल वाली लग्जरी कारें चुनते हैं. भारत में कई लग्जरी ब्रांड अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बेच रहे हैं, लेकिन ग्राहकों का बड़ा हिस्सा अब भी पुराने पावरट्रेन को ही तरजीह देता है. ऐसे में यह बदलाव पूरी तरह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर धकेल सकता है और कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पड़ सकते हैं. इस सुझाव पर अमल किया जाता है तो, इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, जगुआर लैंडरोवर और ऑडी जैसे ब्रांड्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. हालांकि इन ब्रांड्स ने भी इंडियन मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों का पोर्टफोलियो बढ़ाना शुरू कर दिया है. लेकिन अभी भी महंगी और लग्ज़री कार खरीदारों के बीच पेट्रोल-डीजल … Read more

घर में आई खुशियों की बहार, सीमा हैदर और पाकिस्तानी भाभी ने मनाया जश्न

ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर इन दिनों बहुत खुश है। वजह ही कुछ ऐसी है। दो साल पहले चार बच्चों को लेकर पड़ोसी मुल्क से भागकर आई सीमा हैदर और सचिन की जिंदगी लगातार बदलती जा रही है। दोनों की चर्चित प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई कि लाखों लोग अब भी हर दिन उनके बारे में जानना चाहते हैं। और लोगों की इसी उत्सुकता से सीमा और सचिन की बल्ले-बल्ले हो गई है। यूट्यूब की कमाई से कुछ दिन पहले एक कमरा बनवाने वाली सीमा हैदर नया शानदार घर बनवा रही है।   अपने नए घर को बनते देख सीमा हैदर और सचिन मीणा खुशी से झूम रहे हैं। अपने यूट्यूब अकाउंट पर दोनों अपने प्रशंसकों के साथ इस खुशी को साझा भी कर रहे हैं। बीच-बीच में वे वीडियो बनाकर दिखाते हैं कि कंस्ट्रक्शन का काम किस तरह चल रहा है और कितना तैयार हो चुका है। सीमा हैदर एक वीडियो में कहती है कि पुराना घर काफी छोटा था और परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने की वजह से बहुत दिक्कत होती थी। पांच बच्चों और पति-पत्नी के लिए एक कमरे में गुजारा करना कठिन था। सीमा हैदर ने कहा कि भगवान, प्रशंसकों और यूट्यूब के आशीर्वाद से उन्होंने ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में ही एक नया प्लॉट खरीदा है और इस पर अब नया मकान बनाया जा रहा है। दो मंजिले में मकान को बेहद खुबसूरती के साथ बनाया जा रहा है। सीमा और सचिन ने यह तो नहीं बताया कि उन्होंने प्लॉट और इस मकान में कितना पैसा खर्च किया है, लेकिन जाहिर एनसीआर में जमीन खरीदने और मकान बनवाने का खर्च का अंदाजा यहां रहने वाले लोग आसानी से लगा सकते हैं। जाहिर है कि यूट्यूब और सोशल मीडिया के अन्य प्लैटफॉर्म से सीमा और सचिन की अच्छी कमाई हो रही है। सीमा के भारत आने के बाद से ही सचिन उस किराने की दुकान में नौकरी छोड़ चुका है जहां वह कभी दिन के 8-10 घंटे बिताकर गुजारा लायक कमा पाता था।  

आतंकी कनेक्शन का दोहराव! अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर रिपोर्ट के सनसनीखेज़ खुलासे

नई दिल्ली  दिल्ली कार ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सुर्खियों में आया. दरअसल, दिल्ली में ब्लास्ट करने वाले उमर नबी का कनेक्शन इसी यूनिवर्सिटी से था. तभी से यूनिवर्सिटी पर जांच तेज कर दी गई है. हाल ही में इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट आई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ. बता दें कि 2008 में अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में भी एक अल-फलाह स्टूडेंट का नाम सामने आया था. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008 इंडियन मुजाहिदीन का सक्रिय सदस्य मिर्जा शादाब बेग भी अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का ही छात्र रह चुका है. बेग ने 2007 में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन) पूरा किया था. इसके बाद साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों में वह शामिल पाया गया था. यह आतंकी पिछले कई सालों से गायब है. सूत्रों के मुताबिक, इसकी लोकेशन अफगानिस्तान में बताई जाती है.   धौज स्थित यूनिवर्सिटी पर जांच दिल्ली धमाके के बाद फरीदाबाद के धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर से जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है. अल-फलाह कॉलेज की शुरुआत अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रूप में हुई थी. बाद में 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अमेंडमेंट एक्ट के तहत इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. 2008 जयपुर ब्लास्ट में अहम भूमिका मिर्जा शादाब बेग इंडियन मुजाहिदीन के लिए एक बेहद अहम सदस्य था. 2008 के जयपुर धमाकों में विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए मिर्जा शादाब बेग उडुपी गया था. वहीं पर मिर्जा ने रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग मुहैया कराए थे, जिनसे IED तैयार किए गए. इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण बेग बम बनाने की तकनीक में काफी माहिर माना जाता था. अहमदाबाद-सूरत धमाकों में बड़ी भूमिका अहमदाबाद धमाकों से करीब 15 दिन पहले बेग अहमदाबाद पहुंचा था और उसने पूरे शहर की रेकी की थी. बेग ने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, IED फिटिंग और बम तैयार करने का काम किया था. इसके अलावा, गोरखपुर में हुए 2007 के बम धमाकों में भी शादाब बेग का नाम सामने आया था. इन धमाकों में 6 लोग घायल हुए थे. बाद में आईएम से लिंक जुड़ने पर गोरखपुर पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क कर ली थी.