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पेट्रोल डीजल की कमी पर पंजाब विधानसभा में आया निंदा प्रस्ताव

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र में बुधवार को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की संभावित कमी का मुद्दा जोरशोर से उठा। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश कर कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और केंद्र की गलत विदेश नीति के कारण देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कमी का सीधा असर पंजाब में गेहूं की खरीद प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अगले महीने से राज्य में गेहूं की खरीद शुरू होने वाली है और इसके लिए बड़ी मात्रा में परिवहन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इस समय पंजाब के गोदाम पहले से ही भरे हुए हैं और अनाज की ढुलाई में दिक्कत आ रही है। यदि ईंधन की कमी हुई तो नई फसल को रखने में भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। शिक्षामंत्री ने इस मुद्दे को बताया गंभीर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि गैस की कमी के कारण नंगल और बठिंडा स्थित उर्वरक संयंत्र बंद हो गए हैं। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों के लिए यूरिया की कमी पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ पक्षपात कर रही है। उनका कहना था कि हरियाणा के पानीपत संयंत्र को पूरी गैस आपूर्ति दी जा रही है, जबकि पंजाब के संयंत्रों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही। इस दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इस विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस पर विस्तार से चर्चा होना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि निंदा प्रस्ताव पर वीरवार को सदन में विस्तृत बहस करवाई जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध कर दिया। वीरवार को होगी प्रस्ताव पर चर्चा  सत्र के दौरान यह भी मुद्दा उठाया गया कि आने वाले गेहूं खरीद मौसम के लिए राज्य को लगभग पांच लाख जूट बेल की आवश्यकता है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से केवल तीन लाख बेल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शेष के लिए प्लास्टिक बेल लेने का सुझाव दिया गया है। मंत्रियों ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पेट्रोलियम आधारित कच्चे पदार्थ की आपूर्ति प्रभावित होती है तो प्लास्टिक बेल की उपलब्धता भी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि प्लास्टिक दाना भी पेट्रोलियम पदार्थ से तैयार होता है। सदन में यह भी बताया गया कि बांग्लादेश के साथ संबंध ठीक न होने के कारण जूट की आपूर्ति में भी दिक्कत आ रही है। इससे आने वाले खरीद मौसम में अनाज की पैकिंग और भंडारण की समस्या बढ़ सकती है। उल्लेखनीय है कि जब यह प्रस्ताव सदन में पेश किया गया, उस समय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। अब इस प्रस्ताव पर वीरवार को विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

पंजाब विधानसभा में बच्चों की मोबाइल लत पर गंभीर चर्चा

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा में बुधवार को बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की लत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने काल अटेंशन नोटिस के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर दिलाते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या पंजाब में भी बच्चों की ओर से इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने या इसके लिए उम्र सीमा तय करने पर विचार किया जा रहा है। राणा इंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री प्रसारित हो रही है जो बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसके कारण अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों और राज्यों ने इस खतरे को देखते हुए बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि यह केवल आईटी विभाग का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा विषय है जिस पर हेल्थ, एजुकेशन, पुलिस और सोशल वेलफेयर विभाग सहित कई विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और बच्चों के हित में आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है। कई देश इस पर बना चुके सख्त नियम अमन अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया में बच्चों पर इंटरनेट मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। अधिकतर इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं देते, लेकिन इसके बावजूद बच्चे आसानी से इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से कई देशों में सख्त नियम बनाने पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के नियमों पर विचार किया जा रहा है, जबकि अमेरिका के कुछ राज्यों—जैसे यूटा और आर्कांसस—में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी करने जैसे कानून बनाए गए हैं। अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि भारत में भी इस दिशा में चर्चा शुरू हो चुकी है। कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने और बच्चों में डिजिटल एडिक्शन को कम करने के लिए नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। कुछ राज्यों में स्कूलों के भीतर मोबाइल फोन के उपयोग पर पहले ही सख्ती की गई है। अत्यधिक गलत इस्तेमाल नुकसानदायक उन्होंने कहा कि नई तकनीक के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इंटरनेट मीडिया के जरिए जहां जानकारी तक तेजी से पहुंच, शिक्षा के नए अवसर और दुनिया से जुड़ने की सुविधा मिलती है, वहीं इसका अत्यधिक और गलत इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार के साथ-साथ समाज भी बच्चों को इसके जिम्मेदार उपयोग के लिए जागरूक करे। इस दौरान सेहत मंत्री डा बलबीर सिंह ने भी कहा कि यह विषय उनके विभाग से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की बढ़ती लत बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल एडिक्शन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके कारण बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और स्लीप डिसऑर्डर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण के जरिए लोग हो रहे जागरुक डाॅ. बलबीर सिंह ने बताया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जिलों में मनोवैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दे रही है ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों और उनके अभिभावकों को सही मार्गदर्शन मिल सके। इसके अलावा चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि बच्चों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग को लेकर ठोस नीति और व्यापक जागरूकता अभियान चलाना समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

पंजाब में आंधी-तूफान के साथ हो सकती है बारिश

चंडीगढ़. गर्मी का सामना कर रहे पंजाब और चंडीगढ़ के लोगों को आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 14 मार्च से कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। यह सिलसिला करीब तीन दिन तक जारी रह सकता है, जिस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन 14 से 16 मार्च के तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव एक नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के सक्रिय होने के कारण होगा। जिससे आने वाले दिनों में मौसम के करवट लेने की संभावना जताई जा रही है। 

पंजाब में नर्सरी और कैदियों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाकर होगा पुनर्वास

चंडीगढ़. पंजाब की जेलों में कैदियों के पुनर्वास, स्वास्थ्य और आय के नए साधन विकसित करने के लिए विधानसभा कमेटी ने कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। कमेटी ने सेंट्रल जेल पटियाला में बनाई गई नई नर्सरी का दौरा करने के बाद सुझाव दिया कि यहां विभिन्न किस्म के फूलों, पौधों और सब्जियों की पौध तैयार कर बिक्री शुरू की जाए। इससे जेल विभाग को आय प्राप्त होगी और कैदियों को रोजगार के साथ एक उपयोगी हुनर भी सीखने का अवसर मिलेगा। कमेटी ने सेंट्रल जेल पटियाला में स्थापित नई नर्सरी का निरीक्षण किया। दौरे के दौरान विभागीय अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल नर्सरी में आठ से नौ प्रकार की पौध तैयार की जा रही है। अभी यह नर्सरी सीमित क्षेत्र में विकसित की गई है, लेकिन आने वाले समय में इसमें और पौध लगाकर इसका विस्तार किया जाएगा। कमेटी ने महसूस किया कि जिस क्षेत्र में यह नर्सरी स्थित है वहां आसपास अन्य नर्सरियां नहीं हैं। साथ ही यह स्थान जेल मेन रोड पर होने के कारण शहर और गांवों के काफी लोग रोजाना यहां से गुजरते हैं। ऐसे में यदि जेल की नर्सरी में विभिन्न पौधों और सब्जियों की पौध तैयार कर बिक्री शुरू की जाती है तो यह योजना काफी सफल हो सकती है। इससे न केवल विभाग को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी बल्कि नर्सरी में काम करने वाले कैदियों को दिहाड़ी भी मिल सकेगी। सजा पूरी कर जेल से बाहर जाने के बाद कैदियों के पास इस काम का अनुभव और हुनर भी होगा, जिससे वे अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं। कमेटी ने सिफारिश की है कि जेलों में विभिन्न किस्म के फूलों, पौधों और सब्जियों की पौध तैयार करवाई जाए और इन्हें जेल विभाग द्वारा संचालित पेट्रोल पंपों और बिक्री केंद्रों के माध्यम से रोजाना बेचा जाए। इससे जेल विभाग और कैदियों दोनों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। कमेटी के दौरे के दौरान यह भी सामने आया कि पहले जेलों में कैदियों को ताजा सब्जियां उपलब्ध करवाई जाती थीं, लेकिन अब यह व्यवस्था बंद हो चुकी है। इसके कारण कैदियों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की शिकायतें सामने आई हैं और कैदियों ने इसको लेकर रोष भी व्यक्त किया है। कमेटी ने सिफारिश की है कि कैदियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल जेल पटियाला सहित पंजाब की अन्य जेलों में भी ताजा सब्जियां दोबारा उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि जो कैदी अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं वे अपनी पसंद के अनुसार ताजी सब्जियां तैयार कर सकें। जेल कैंटीनों की व्यवस्था में सुधार की सिफारिश इसके अलावा कमेटी ने जेलों की कैंटीन व्यवस्था में सुधार की भी सिफारिश की है। दौरे के दौरान अच्छे आचरण वाले कैदियों ने कमेटी के ध्यान में लाया कि चंडीगढ़ की बुरैल जेल की कैंटीन में पंजाब की जेलों की तुलना में खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरत का अधिक सामान उपलब्ध होता है। कैदियों ने मांग की कि बुरैल जेल की तर्ज पर सेंट्रल जेल पटियाला की कैंटीन में भी रोजमर्रा की जरूरत का सामान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए। कमेटी ने इस मांग को उचित बताते हुए संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की है, ताकि कैदियों को जरूरी सामान आसानी से उपलब्ध हो सके। चंडीगढ़ 22 सेक्टर में पहले से एक शोरूम  इसके साथ ही कमेटी के ध्यान में यह भी आया कि बुरैल जेल प्रबंधन ने कैदियों द्वारा तैयार किए गए फर्नीचर, पेंटिंग, आटा-दाल, दलिया, मिठाइयां, बेकरी आइटम, स्नैक्स, गमले, पौधे और सजावटी वस्तुओं की बिक्री के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में एक शोरूम स्थापित किया हुआ है। इस शोरूम में जेल में तैयार की गई अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएं उचित कीमतों पर आम लोगों के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं और लोग इन्हें उत्साह के साथ खरीदते भी हैं। कमेटी का मानना है कि ऐसे प्रयासों से जहां कैदियों का मनोबल बढ़ता है वहीं उनका समय भी रचनात्मक कार्यों में व्यतीत होता है। इससे जेल का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और कैदियों में आपसी सहयोग और रुचि की भावना भी विकसित होती है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि बुरैल जेल की तर्ज पर पंजाब की जेलों में भी कैदियों द्वारा तैयार किए गए सामान की बिक्री के लिए व्यवस्था की जाए, ताकि इन उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचाया जा सके। इससे जेल प्रशासन और कैदियों दोनों को आर्थिक लाभ होगा और कैदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

Punjab में पेट्रोल-डीजल शार्टेज के हालात नहीं

पठानकोट. मिडिल ईस्ट में तनाव जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे पेट्रोल-डीजल की कीमत को लेकर लोगों की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। देश की जनता के इसी संदेह को दूर करने के लिए सरकारी सूत्रों ने बीते सोमवार को कहा कि देश में पर्याप्त फ्यूल रिजर्व और सप्लाई के इंतजाम है। लेकिन, फिर भी लोग घबराए हुए हैं कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई कहीं बंद ना हो जाए। कच्चे तेल की मौजूदा स्थिति से घरेलू स्तर पर फ्यूल की कीमतों पर तुरंत असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन पठानकोट के अध्यक्ष परमजीत सिंह नरूला ने बताया कि उनकी कंपनी इंडियन ऑयल के पास प्रयाप्त मात्रा में डीजल और पेट्रोल का स्टॉक है और अभी तक गैस के दामों में वृद्धि देखने को मिली है लेकिन, पेट्रोल-डीजल के दामों पर किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पठानकोट समेत पंजाब के अन्य हिस्सों में डीजल-पेट्रोल की सप्लाई रेगुलर आ रही है और बिना वजह लोग बिना वजह तेल के बंद होने की झूठी अफवाएं न फेलाएं। अगर भविष्य में युद्ध लंबा चलता है तो उसके बाद कहीं कुछ कमी देखने को मिल सकती है और इंटरनेशनल दामों के हिसाब से ही जरूरत अनुसार तेल के दामों में वृद्धि होगी।

CGWB की ररिपोर्ट- पंजाब में कई इलाकों के कुओं का बढ़ा जल स्तर

नई दिल्ली/चंडीगढ़. पंजाब में भूजल स्तर को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के ताजा आंकड़ों ने मिली-जुली तस्वीर पेश की है। पिछले दस वर्षों के दौरान राज्य में निगरानी किए गए करीब 57 प्रतिशत कुओं में भूजल स्तर बढ़ा है, जबकि 43 प्रतिशत कुओं में गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी सोमवार को जल शक्ति मंत्रालय ने संसद में साझा की। मंत्रालय के अनुसार जिन इलाकों में जलस्तर बढ़ा है, वहां ज्यादातर मामलों में बढ़ोतरी 0 से 2 मीटर के बीच दर्ज की गई है। यह आंकड़े CGWB द्वारा भूजल स्तर में दीर्घकालिक उतार-चढ़ाव का आकलन करने के लिए एकत्र किए गए थे। राज्यसभा में सांसद संत बलबीर सिंह के सवाल के जवाब में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर गिरने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई, सिंचाई के अक्षम तरीके और क्षेत्र विशेष की भू-वैज्ञानिक परिस्थितियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर-पश्चिमी राज्यों, खासकर पंजाब में, सालाना पुनर्भरण क्षमता से अधिक भूजल निकासी के कारण जल स्तर पर दबाव बढ़ा है। हालांकि मंत्री ने यह भी बताया कि भूजल की पूर्ति कई प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों से होती रहती है। इनमें बारिश, सिंचाई से लौटने वाला पानी, नहरों का रिसाव और सतही जल स्रोतों से होने वाला रिचार्ज शामिल है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पानी राज्य का विषय है, इसलिए इसके संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े अधिकतर कदम राज्य सरकारें ही योजना बनाकर लागू करती हैं। केंद्र सरकार इन प्रयासों को तकनीकी सहयोग और आंशिक वित्तीय सहायता देकर मजबूत करती है। भूजल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम (NAQUIM) शुरू किया है। इसके तहत पंजाब में 50,369 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया गया है और तैयार किए गए एक्विफर मैप तथा प्रबंधन योजनाएं राज्य एजेंसियों को सौंप दी गई हैं। इसके अलावा NAQUIM 2.0 के तहत लुधियाना और संगरूर जिलों के उन क्षेत्रों में विशेष अध्ययन किया गया है जहां पानी की गुणवत्ता खराब है या भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इसका उद्देश्य भूजल प्रबंधन के लिए अधिक सटीक वैज्ञानिक जानकारी जुटाना है। पंजाब में भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के लिए 45,592 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हुए कृत्रिम रिचार्ज की मास्टर प्लान भी तैयार की गई है और इसे राज्य सरकार के साथ साझा किया गया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भूजल के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक मॉडल कानून राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है। अब तक पंजाब सहित 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपनाकर लागू कर दिया है। इसके साथ ही CGWB समय-समय पर भूजल संरक्षण, प्रदूषण रोकने और दूषित पानी के सुरक्षित उपयोग को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित करता है। पंजाब में अब तक 41 जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 6,000 से अधिक लोग शामिल हुए। भूजल की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत करने के लिए CGWB ने नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी लागू किया है। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में अधिक बार और घनी सैंपलिंग की जा रही है। जून 2024 से रासायनिक परीक्षणों के नतीजे हर पखवाड़े राज्य सरकार के साथ साझा किए जा रहे हैं।

Regular DGP नियुक्ति का पंजाब सरकार से फिर मांगा पैनल

चंडीगढ़. पंजाब में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एक बार फिर राज्य सरकार को पत्र लिखकर योग्य अधिकारियों का पैनल भेजने को कहा है। आयोग ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजाब सरकार की ओर से जवाब नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार, UPSC के सचिव शशि रंजन कुमार ने पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा को पत्र लिखकर मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द योग्य अधिकारियों का पैनल भेजने के निर्देश देने को कहा है। यह पत्र 5 मार्च को भेजा गया बताया जा रहा है। दरअसल, 18 फरवरी को भी UPSC ने पंजाब सरकार को पत्र लिखते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार डीजीपी पद के लिए रिक्ति 5 फरवरी 2026 से मानी जाएगी। आयोग ने राज्य सरकार से दस दिनों के भीतर प्रस्ताव और योग्य अधिकारियों की सूची भेजने को कहा था। आयोग ने चेतावनी भी दी थी कि अगर समय पर पैनल नहीं भेजा गया तो वह आदेश के पालन के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। इससे पहले 5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों पर सख्त टिप्पणी की थी जो लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी के सहारे काम चला रहे हैं। अदालत ने UPSC को ऐसे राज्यों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। पंजाब में मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जुलाई 2022 में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव को कई वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार करते हुए कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। वह पिछले करीब तीन साल आठ महीने से इस पद पर बने हुए हैं। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया से अलग रास्ता अपनाने के लिए जून 2023 में पंजाब विधानसभा ने पंजाब पुलिस (संशोधन) विधेयक 2023 पारित किया था। इसमें डीजीपी के चयन के लिए राज्य सरकार के नियंत्रण वाली सात सदस्यीय समिति बनाने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि यह विधेयक राज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था और अभी लंबित बताया जा रहा है। UPSC की प्रक्रिया के अनुसार, राज्य सरकार योग्य अधिकारियों का पैनल भेजती है। इसके बाद आयोग वरिष्ठता, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन नामों का चयन करता है, जिनमें से राज्य सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करती है।

पंजाब के 3.34 लाख परिवारों को 31 मार्च से पहले मिलेगा अनाज

लुधियाना. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न टीमों द्वारा कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा की अगुवाई में ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ से संबंधित 75 फीसदी परिवारों को उनके हिस्से का अनाज बांटने का काम निपटा लिया गया है। सरकार द्वारा योजना से जुड़े प्रत्येक परिवार तक गेहूं का लाभ पहुंचाने के लिए 31 मार्च तक की आखिरी तारीख निर्धारित की गई है। खाद्य सप्लाई विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न टीमों द्वारा 10 मार्च तक 3,34000 परिवारों को उनके हिस्से के फ्री गेहूं का कोटा जारी कर दिया गया है। मौजूदा समय दौरान बाकी रहते अन्य परिवारों को राशन डिपुओं के मार्फत गेहूं बांटने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक लुधियाना जिले में ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ से जुड़े राशन कार्ड धारकों की संख्या 4,40,672 बताई जा रही है जिसमें लाभपात्र परिवारों के कुल 16,62,310 सदस्य मैंबर दर्ज हैं। उक्त परिवारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा 25,159 मीट्रिक टन गेहूं का कोटा जारी किया गया है। यहां इस बात का जिक्र करना भी अनिवार्य होगा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मौजूदा समय दौरान योजना से जुड़े लाभ पात्र परिवारों में 1 जनवरी से लेकर 31 मार्च तक के 3 महीने की फ्री गेहूं बांटी जा रही है जिसमें राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक सदस्य को प्रति महीने की 5 किलोग्राम गेहूं के हिसाब से 3 महीने की 15 किलो फ्री गेहूं का लाभ दिया जा रहा है। गेहूं का दाना-दाना गरीब परिवारों की अमानत : कंट्रोलर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा ने राशन कार्ड धारकों को अपील की है कि वह 31 मार्च से पहले ही अपने नजदीकी राशन डिपो से गेहूं प्राप्त कर लें ताकि बाद में उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े क्योंकि सरकारी नियमों के मुताबिक 31 मार्च के बाद उक्त परिवारों को गेहूं का लाभ नहीं मिल सकेगा। गेहूं का दाना-दाना योजना से जुड़े गरीब परिवारों की अमानत है जिसमें किसी भी तरह की लापरवाही या फिर हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंजाब सरकार ने की भारत-अमेरिका व्यापार पर केंद्र की आलोचना

चंडीगढ़. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ पंजाब विधानसभा में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा लाए गए निंदा प्रस्ताव पर कांग्रेस व शिअद भी साथ दिखे। नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब सरकार को समझौते के खिलाफ मजबूती के साथ खड़ा होना चाहिए। कांग्रेस समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि हमारे यहां छोटे किसान है, जबकि अमेरिका में एक किसान के पास 50 से लेकर 200 एकड़ जमीन है। अमेरिका साढ़े चार से पांच लाख करोड़ रुपये तक किसानों को सब्सिडी देता है। वहां पर फसलों का 100 प्रतिशत बीमा है, जबकि हमारे ऐसा कुछ नहीं। कांग्रेस के विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भी निंदा प्रस्ताव का समर्थन तो किया लेकिन साथ ही कहा कि सरकार का काम इलाज करना होता है। समझौते का असर कैटल फीड बनाने वाली इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा। अभी पंजाब में बने कैटल फीड की मांग दक्षिण भारत में भी है, लेकिन इस समझौते से नुकसान होगा। समझौते से किसानों का भविष्य दांव पर: चीमा वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बजट बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि व्यापार समझौते से किसानों का भविष्य दांव पर लग जाएगा। इससे भारतीय कृषि को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ देश के किसानों को अनुचित वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि 2024 में भारत के साथ अमेरिका के कृषि व्यापार में 1.3 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आज का समझौता इस घाटे को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। वित्त मंत्री ने भाजपा नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह भारत के लोगों के हितों से अधिक विदेशी कॉरपोरेट के हितों को प्राथमिकता दे रही है।" कृषि अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है: भुल्लर कैबिनेट मंत्री लालजीत भुल्लर ने प्रस्तावित समझौता पंजाब की कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका से सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात की अनुमति दी गई तो इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है।

बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर पंजाब सरकार लगाएगी बैन

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा सत्र में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार बच्चों के मोबाइल उपयोग पर पाबंदी लगाने पर विचार करेगी। यह आश्वासन डॉ. बलबीर सिंह ने स्पीकर की मांग पर दिया। स्पीकर ने कहा कि बच्चों की मानसिक सेहत पर मोबाइल का बुरा असर पड़ रहा है। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस पर अच्छी चर्चा करके कदम उठाए जाएंगे। बच्चों में मोबाइल एडिक्शन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिस पर अभिभावकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल से उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए अब सेकेंडरी स्तर पर कई काउंसलिंग कोर्स और गाइडेंस प्रोग्राम शुरू किए गए हैं, ताकि बच्चों को सही दिशा दी जा सके और उन्हें मोबाइल की लत से बाहर निकाला जा सके। इस समस्या के समाधान के लिए माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ अधिक से अधिक क्वालिटी टाइम बिताएं, बातचीत करें और उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें। बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए उन्हें सकारात्मक विकल्प देने होंगे। खेलें, आउटडोर गतिविधियों, किताबें पढ़ने की आदत, पेंटिंग और म्यूजिक की ओर प्रेरित करना आवश्यक है। इससे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर होगा। कई देशों ने बच्चों के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाए हैं। भारत के कुछ राज्यों में भी इस दिशा में पहल की गई है।