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आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री हुई रवाना, मनोहर लाल ने किया शुभारंभ

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रदेश के 23 जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूबे हुए हैं। खासकर फिरोजपुर, तरनतारन, मोगा, गुरदासपुर और जालंधर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खेत-खलिहान, घर और सड़कें पानी में डूबने से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस त्रासदी की घड़ी में केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ पंजाब सरकार और बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। इसी क्रम में रविवार को केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोनीपत भाजपा कार्यालय से राहत सामग्री से भरे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन ट्रकों में कपड़े, खाद्य सामग्री, पानी की बोतलें, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान शामिल है, जिन्हें सीधे बाढ़ प्रभावित जिलों में भेजा जाएगा। मनोहर लाल ने कहा कि संकट की इस घड़ी में हरियाणा के लोग पंजाब के साथ खड़े हैं। भाजपा संगठन और कार्यकर्ता लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर मदद पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और सहयोग जारी रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर सोनीपत के मेयर राजीव जैन, विधायक निखिल मदान, राई से विधायक कृष्णा गहलोत सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर राहत सामग्री चढ़ाने और उसके वितरण की तैयारी में हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं में देशवासियों की चिंता की है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से पंजाब के प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत मिलेगी और हालात सामान्य होंगे।

भयावह बाढ़ पंजाब में: 13,000 करोड़ से अधिक का आर्थिक और मानविक संकट

पंजाब पंजाब में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। राज्य के 23 जिलों के 1960 गांव बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जहां 1.74 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं और 46 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, लाखों लोगों के घर और सामान का नुकसान हुआ है। पंजाब सरकार के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, राज्य को बाढ़ से अब तक 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शनिवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय टीम के सदस्यों के साथ बैठक में यह आंकड़े साझा करते हुए राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। केंद्रीय टीम को बताया गया कि किसानों के पशुधन का भी काफी नुकसान हुआ है। लगभग एक दर्जन जिलों की सड़कें, पुल, बिजली ट्रांसफार्मर, स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और कई अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान गुरदासपुर और अमृतसर में हुआ है। अधिकारियों ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मुआवजा नियमों में संशोधन की मांग भी की, ताकि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल क्षति के लिए 6800 रुपये प्रति एकड़ के बजाय 50 हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाने चाहिए। जनहानि के लिए 4 लाख रुपये के बजाय 8 लाख रुपये दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, विकलांगता के लिए 1.5 लाख रुपये और दुधारू पशु की मौत पर 75 हजार रुपये दिए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की छतें गिर गई हैं, उनके मुआवजे में भी वृद्धि की जानी चाहिए। हालांकि, पंजाब सरकार के विभिन्न विभाग बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और अंतिम रिपोर्ट बाढ़ खत्म होने के बाद ही तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि केंद्रीय अधिकारियों की एक टीम 4 सितंबर को पंजाब पहुंची थी और उसने दो दिनों तक विभिन्न बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया।    

बाढ़ से बेहाल पंजाब: प्रधानमंत्री मोदी पहुंचेंगे, जानिए किस हद तक होगा मदद पैकेज

पंजाब पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक वह 9 सितंबर को पंजाब जाएंगे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। पीएम मोदी गुरदासपुर जाकर जमीनी स्तर पर हालात देखेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े राहत पैकेज का भी ऐलान कर सकते हैं। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जबकि 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पंजाब दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों तथा मौसमी नालों के उफान के चलते यह स्थिति बनी है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने हालात को और गंभीर कर दिया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को पोंग बांध का जलस्तर मामूली घटकर 1,394.19 फुट दर्ज किया गया, हालांकि यह अब भी उसकी अधिकतम सीमा 1,390 फीट से चार फुट ऊपर है। शुक्रवार शाम बांध का जलस्तर 1,394.8 फुट था। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को बांध में पानी का प्रवाह 99,673 क्यूसेक था, जो घटकर 47,162 क्यूसेक रह गया, जबकि निकासी 99,673 क्यूसेक पर यथावत बनी रही। भाखड़ा बांध के मामले में शनिवार को जलस्तर 1,678.14 फुट दर्ज किया गया, जो शुक्रवार को 1,678.47 फुट था। सतलुज नदी पर बने इस बांध में पानी का प्रवाह 62,481 क्यूसेक और निकासी 52,000 क्यूसेक रही। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाढ़ को पांच दशकों में सबसे भीषण बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब और पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में लगातार हुई बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है, जिससे सभी जिलों के लगभग 2,000 गांव प्रभावित हुए हैं। ताजा बुलेटिन के अनुसार, 3.87 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 46 मौतों की पुष्टि हुई है। एक अगस्त से पांच सितंबर के बीच 14 जिलों से 43 मौतें दर्ज की गई थीं। कुल 23 जिलों के 1,996 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक सात-सात मौतें होशियारपुर और अमृतसर से हुईं। इसके बाद पठानकोट में छह, बरनाला में पांच, लुधियाना और बठिंडा में चार-चार, मानसा में तीन, गुरदासपुर, रूपनगर और एसएएस नगर में दो-दो और पटियाला, संगरूर, फाजिल्का और फिरोजपुर से एक-एक मौत दर्ज की गई। पठानकोट में तीन लोग लापता हैं। इसी बीच, फिरोजपुर जिले के तल्ली गुलाम गांव का 50 वर्षीय व्यक्ति उफनती नदी की तेज धारा में बह गया और उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिले में पानी का स्तर खतरनाक स्तर पर है और लगातार बाढ़ से गांवों में रहने वालों का जीवन कठिन हो गया है। बाढ़ से संबंधित यह आंकड़े एक अगस्त से छह सितंबर तक की अवधि के हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 22,854 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला जा चुका है। चीमा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र को 18 जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, मकानों और पशुधन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि घग्गर नदी का जलस्तर भी 750 फुट के खतरे के निशान को पार कर गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इस अभूतपूर्व बाढ़ पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संवेदनशील रवैया अपनाया है। मंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से जवाबदेही और समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि इस संकट के लिए "राजनीतिक अवसरवाद" के बजाय सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। चीमा ने कहा कि तबाही के बावजूद पंजाब सरकार ने तेज और समन्वित तरीके से कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में लगभग 200 राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां 7,000 से अधिक विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। एनडीआरएफ की 24 और एसडीआरएफ की दो टीमें, 144 नौकाओं की मदद से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शनिवार को निशाना साधते हुए कहा कि वह बाढ़ के लिए नदियों में अवैध खनन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता वित्तीय मदद की घोषणा करने के बजाय सिर्फ “फोटो खिंचवाने” के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करते हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि चौहान ने बाढ़ सहायता के लिए “एक पैसा” भी घोषित नहीं किया, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र से ‘लंबति’ 60,000 करोड़ रुपये की मांग की है। ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। वहीं होशियारपुर जिले में टांडा और मुकेरियां उप-विभागों के निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ है, जहां धान, गन्ना और मक्का जैसी फसलों को भारी क्षति हुई है। उपायुक्त आशिका जैन ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा दिया जाएगा और समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, कपूरथला जिले के उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि ब्यास नदी में पानी का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। 

पंजाब बाढ़ संकट: भूपेश बघेल ने किया जमीनी हालात का जायजा, सुनी लोगों की समस्याएं

फिरोजपुर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने फिरोजपुर के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. नेताओं ने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को समझा. इस दौरान भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान की निंदा करते हुए कहा कि मंत्री का यह दावा कि बाढ़ का कारण खनन है, गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने सवाल उठाया कि डैम के गेट पहले कब खोले गए और अब कब खोले गए? इतना पानी एक साथ क्यों छोड़ा गया? बघेल ने मांग की कि केंद्रीय मंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए.   विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी केंद्र और राज्य सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पानी की उचित व्यवस्था समय पर न होने के कारण बाढ़ जैसे हालात बने. बाजवा ने आरोप लगाया कि नहरों और नालों की सफाई के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. नालों की सफाई नहीं हुई और करोड़ों रुपये का गबन किया गया. उन्होंने इसकी जांच की मांग की. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग ने कहा कि यह स्थिति सरकार की विफलता का नतीजा है. उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़ी है और राशन, भोजन, पशुओं के लिए चारा और अन्य सुविधाएं प्रदान करने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी. भूपेश बघेल ने कहा कि यह बाढ़ केंद्र और राज्य सरकार की लापरवाही का परिणाम है. अगर समय पर डैमों से पानी छोड़ा गया होता, तो यह स्थिति नहीं बनती. उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार अब तक यह रिपोर्ट तैयार नहीं कर सकी कि कितने लोग और पशु मरे, कितने घर क्षतिग्रस्त हुए और कितनी फसलें बर्बाद हुईं.

रेखा गुप्ता ने किया बड़ा खुलासा, पंजाब को आर्थिक सहायता में होंगे इतने करोड़ का योगदान

पटियाला दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (भाजपा) ने पंजाब के मुख्यमंत्री राहत फंड के लिए ₹5 करोड़ की राशि भेजने का ऐलान किया है। यह राशि हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित पंजाबवासियों की तुरंत मदद के लिए सीधे मुख्यमंत्री राहत फंड में दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत और राहत कार्यों में सहयोग करना है। हालिया भारी बाढ़ और उससे हुए बड़े नुकसान को देखते हुए यह मदद तत्काल सहायता के रूप में दी जा रही है। बताया गया कि यह राशि सीधे मुख्यमंत्री राहत फंड में जाएगी, ताकि राहत और पुनर्वास के कार्य जल्द और प्रभावी ढंग से हो सकें। यह सहायता आपात स्थिति में बाढ़ पीड़ित लोगों की तुरंत मदद के लिए है, जिससे राहत कैंप, भोजन-पानी, दवाइयाँ और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने में तेजी आ सकेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने एक संदेश में उम्मीद जताई कि पंजाब जल्द ही इन कठिन हालात से उबर जाएगा।  

पंजाब में प्रशासनिक फेरबदल, कई अधिकारियों के हुए तबादले

पंजाब  पंजाब सरकार ने आज प्रशासनिक फेरबदल करते हुए तीन पुलिस अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की हैं। यह आदेश राज्यपाल की ओर से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालें।  

बिजली घोटाले और गड़बड़ियों पर लगाम, पंजाब पावरकॉम ने उठाए कड़े कदम

लुधियाना  पावरकॉम की सिटी वैस्ट डिवीजन के अंतर्गत पड़ते चौड़ा बाजार कार्यालय में तैनात जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ बाजवा नगर इलाके के रमन चोपड़ा व मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पंजाब केसरी द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद उच्चाधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।  उक्त मामले को लेकर आम जनता में पावरकॉम अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली के खिलाफ सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। उक्त मामले में शिकायतकर्त्ता रमन चोपड़ा और मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक उनकी बाजवा नगर इलाके में स्थित फैक्टरी में लगा बिजली का मीटर शॉर्ट सर्किट होने के कारण जलकर खराब हो गया जिसकी शिकायत उनके द्वारा विभाग को लिखित में देने सहित पावरकॉम की ऑनलाइन साइट पर भी की गई लेकिन शिकायत का समाधान नहीं हुआ। जब मामले संबंधी जे.ई. दीपक कुमार से बात की गई तो कर्मचारी द्वारा उनके साथ कथित बदसलूकी की गई। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ विजीलैंस जांच करवाने और उसे तुरंत सस्पैंड करने की अपील की है। पावरकॉम विभाग के चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ लगे आरोपों की विभागीय जांच की जा रही है। आरोप सही पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक सवाल के जवाब में चीफ इंजीनियर ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ इससे पहले भी उपभोक्ताओं की कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। 

जालंधर में मचा बवाल: सांसद चन्नी लापता, लोग सड़कों पर, Video हो रही तेजी से वायरल

जालंधर  जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जनता उन्हें "लापता सांसद" कहकर पुकार रही है। वजह साफ है कि जालंधर के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। शहर में भी बाढ़ जैसे हालात बने रहे, सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लोग सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, मगर उनके सांसद खुद कहीं और अपनी सक्रियता दिखाते नजर आते हैं। आम जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिस जनता ने 2024 में उन्हें रिकॉर्ड मतों से जीताकर लोकसभा भेजा, उस जनता की सुध लेने में चन्नी पीछे क्यों हैं? यूं तो चरणजीत चन्नी का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले चन्नी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब और भदौर से एक साथ चुनाव लड़ा, मगर दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार साफ संदेश दिया कि मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन हालातों के चन्नी का चमकौर साहिब हलके से लगाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि हाल के दिनों में वे लगातार उसी हलके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बोरियों में मिट्टी भरते, ट्रैक्टर चलाते और राहत कार्यों का हिस्सा बनते नजर आते हैं। दूसरी ओर, जालंधर की जनता इसे "ड्रामा" मान रही है। लोगों का कहना है कि सांसद चन्नी को जालंधर की जनता ने जिताया, मगर वे अभी भी चमकौर साहिब से ही राजनीति चमकाने में लगे हैं। मतदाताओं का कहना है कि चुनावों के दौरान चन्नी ने हर समय जनता के साथ खड़े रहने का वादा किया था, मगर आज जब जनता संकट में है तो वे नदारद हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस पदाधिकारी तक उनसे मिलने को तरस रहे हैं। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (ऑर्गेनाइजेशन) कैप्टन संदीप संधू ने द्वारा हाल ही जारी किए पत्र में विशेषकर सांसद चन्नी का जिक्र किया गया और उनसे आग्रह किया गया कि वे हाईकमान के फैसले के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र जालंधर में सक्रिय रहें। यह आदेश इस बात का संकेत है कि पार्टी भी चन्नी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यदि सांसद की यह कार्यप्रणाली जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जालंधर में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस किस मुंह से 9 विधानसभा हलकों में वोट मांगने जाएगी। भले ही सांसद चन्नी पत्र जारी होने के बाद विगत पिछले दिनों नकोदर व शाहकोट हलकों का हवाहवाई दौरा कर बाढ़ के हालातों में काम करने की अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर खानापूर्ति कर गए है। चन्नी को जालंधर से मिली राजनीतिक संजीवनी, मगर फिर भी जनता से दूरी 2022 में करारी हार झेलने के बाद चन्नी का राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जा रहा था। मगर जून 2024 में जालंधर की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर एक नई राजनीतिक संजीवनी दी। इस जीत ने चन्नी को फिर से राजनीतिक परिदृश्य में स्थापित किया। अब अफसोस है कि चुनाव जीतने के बाद चन्नी का जनता से रिश्ता लगातार कमजोर होता चला गया। वे कब जालंधर आते हैं और कब चले जाते हैं, कहां रहते है, इसका पता गिने-चुने लोगों को ही रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में जालंधर के विभिन्न हिस्सों में "सांसद लापता" के पोस्टर तक लगाए गए। बाढ़ त्रासदी पर सांसद की चुप्पी जालंधर में हाल ही में बाढ़ के हालातों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घर गिर गए, लोग बेघर हुए और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में सांसद का फर्ज था कि वे राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते। मगर चन्नी की चुप्पी और गैरमौजूदगी ने लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। जालंधर के कई ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों का कहना है कि यदि उनके सांसद खुद प्रभावित गांवों व शहर के क्षेत्रों में जाकर हालात देखते तो प्रशासन पर भी काम करने का दबाव बढ़ता। जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी जालंधर की जनता का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्होंने जिस नेता को दोबारा राजनीति की मुख्यधारा में लाया, वही नेता आज उनकी तरफ पीठ फेर चुका है। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि उन्होंने चन्नी साहब को अपना सांसद बनाया ताकि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं, मगर वे तो खुद ही गायब हो गए। फिल्लौर के एक युवक ने तंज कसते हुए कहा, सांसद को खोजने के लिए अब शायद गुमशुदगी का इश्तहार देना पड़ेगा। वहीं शहर में बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घर टूट गए, खेत बर्बाद हो गए, मगर सांसद साहब को यहां आने की फुर्सत नहीं। लोगों का कहना है कि जालंधर की जनता ने उन्हें जिताया, मगर वे आज मात्र चमकौर साहिब के सांसद बने बैठे है।  

भारी बारिश के बाद लुधियाना में तनाव, लोग मांग रहे भाखड़ा जलस्तर नियंत्रण

पंजाब  चंडीगढ़ व पंजाब के कई हिस्सों में शनिवार तड़के सुबह शुरू हुई तेज और लगातार बारिश ने एक बार फिर लोगों में दहशत फैला दी है। गांव ससराली कॉलोनी स्थित धुस्सी बंध, जहां पहले से ही हालात नाजुक बने हुए हैं, लगातार हो रही बारिश से फिर खतरे में आ सकता है। न केवल बांध की मरम्मत का काम प्रभावित होगा, बल्कि यदि रोपड़ से और पानी छोड़ा गया तो हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। उपायुक्त हिमांशु जैन ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया, “कुछ जगहों पर दरारें आई थीं, लेकिन ग्रामीणों, सेना और एनजीओ की मदद से बनाए गए रिंग बंध ने पानी रोक लिया। अब यह इस पर निर्भर करेगा कि भाखड़ा से कितना पानी छोड़ा जाता है।” ससराली गांव के ग्रामीण, जहां बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, लगातार भगवान से बारिश रुकने की प्रार्थना कर रहे हैं। सरपंच सुरेंद्र सिंह नामधारी ने कहा कि बारिश के चलते बंध को मजबूत करने का काम ठप हो गया है क्योंकि न ट्रक और न ही ट्रॉली वहां तक पहुंच पा रही है। उन्होंने सरकार से अपील की कि बंध को मजबूत करने का काम पूरा करने दिया जाए और 2–3 दिन तक भाखड़ा से पानी न छोड़ा जाए। इस बीच, लगातार बारिश से लोग भी परेशान हो चुके हैं। चंदर नगर पुल, जनकपुरी, सलेम टाबरी, बस्ती जोधेवाल, शेरपुर, ग्यासपुरा आदि इलाकों में बारिश लोगों के लिए आफत साबित हो रही है। दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिहाड़ी मजदूर मिस्त्री राम अनुज ने कहा, “बारिश न थमने से लोगों ने निर्माण कार्य रुकवा दिए हैं, जिससे हमारा गुजारा करना मुश्किल हो गया है।” लगातार हो रही बारिश से दूध, सब्जी, अखबार आदि की नियमित आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। सुबह 4:30 बजे से जारी बरसात ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सीएम पंजाब की तबीयत खराब, कैबिनेट मीटिंग रद्द—सिसोदिया और मां पहुंचे अस्पताल

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान लो पल्स रेट (LOw Pulse Rate) की वजह से शुक्रवार मोहाली के फोर्टिस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था. ताजा हेल्थ अपडेट के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है. अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को बयान जारी करते हुए कहा कि 51 वर्षीय मुख्यमंत्री की पल्स रेट में सुधार हुआ है. उनकी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को स्थिर करने के बाद मेडिकल टीमें उनकी लगातार निगरानी कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, मान पिछले दो दिनों से वायरल बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के हवाले से खबर आ रही है कि वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया फोर्टिस अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को मान के आधिकारिक आवास पर उनकी सेहत का जायजा लिया था. पंजाब में बाढ़ संकट के बीच मान की तबीयत बिगड़ने के कारण कैबिनेट बैठक स्थगित कर दी गई थी. CM की सेहत में अब सुधार है। उनकी पल्स रेट पहले से बेहतर हुई है। मेडिकल टीमें लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही हैं। मेडिकल टीमें लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मुख्यमंत्री को धड़कन धीमी होने और कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। यहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका चेकअप किया और निगरानी के लिए भर्ती करने की सलाह दी थी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें एडमिट कर लिया गया था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर अस्पताल लाए गए जानकारी के मुताबिक भगवंत मान पिछले दो दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। इसी वजह से उनका AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा भी टल गया था। तब से वह चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ही आराम कर रहे थे और वहीं पर इलाज चल रहा था। लेकिन शुक्रवार शाम उनकी तबीयत और बिगड़ गई। मुख्यमंत्री की तबीयत खराब होने के चलते शुक्रवार शाम को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक भी स्थगित करनी पड़ी। पिछले साल भी सितंबर माह में तबीयत खराब हुई थी CM भगवंत मान की तबीयत पिछले साल भी बिगड़ी थी। 26 सितंबर 2024 को उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रूटीन चेकअप में पता चला कि उनके फेफड़ों की धमनी में सूजन थी, जिससे दिल पर दबाव बढ़ रहा था और ब्लड प्रेशर अस्थिर हो रहा था। बाद में सामने आया कि मान को लैप्टोस्पायरोसिस नामक संक्रमण है। यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो बरसात और गंदे पानी के संपर्क से फैलता है और शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। लगातार देखरेख और दवाओं के असर से उनकी तबीयत में सुधार आया। तीन दिन बाद 29 सितंबर 2024 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के बारे में जानिए….     कॉमेडी से राजनीति में आए: भगवंत मान का जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरूर जिले के सतोज गांव में हुआ था। उन्होंने संगरूर के SUS कॉलेज से बीकॉम किया। कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी या बिजनेस करने की बजाय कॉमेडियन बन गए। उन्होंने कई स्टेज शो और फिल्मों में काम करके नाम कमाया। अपने चुटकुलों से उन्होंने करोड़ों लोगों का दिल जीता।     पंजाब पीपल्स पार्टी से शुरुआत, पहला चुनाव हारे: भगवंत सिंह मान शुरू से आम आदमी पार्टी में नहीं थे। उन्होंने राजनीति की शुरुआत मनप्रीत सिंह बादल की पंजाब पीपल्स पार्टी से की थी। 2012 में वे लहरागागा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद मनप्रीत कांग्रेस में शामिल हो गए।     2014 में सांसद, 2022 में CM बने: 2014 में भगवंत मान आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और संगरूर लोकसभा सीट से सांसद बने। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ जलालाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2019 में वे फिर संगरूर सीट से सांसद बने। 2022 विधानसभा चुनाव में AAP की जीत हुई। उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।     CM बनने के बाद दूसरी शादी की: भगवंत मान ने CM बनने के बाद हरियाणा के पिहोवा की रहने वाली डॉ. गुरप्रीत कौर से दूसरी शादी की थी। 2019 में उनकी मुलाकात भगवंत मान से हुई। भगवंत मान तब संगरूर से सांसद थे। इसके बाद वह सीएम मान के विशेष कार्यक्रमों में शामिल होती रहीं। CM पद के शपथ ग्रहण समारोह में भी गुरप्रीत कौर मौजूद थीं। स्थिति में सुधार अस्पताल द्वारा जारी एक बयान में बताया गया कि सीएम मान के पहुंचने पर उनकी हेल्थ जांच की गई. अब उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘वह फिलहाल कुशल डॉक्टरों निगरानी में हैं. उनकी पल्स की गति में सुधार हुआ है.’ अस्पताल के कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मुख्यमंत्री की हालत स्थिर है. डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं. भगवंत मान की बीमारी के कारण शुक्रवार शाम को होने वाली पंजाब कैबिनेट की बैठक रद्द कर दी गई. रद्द करनी पड़ गई थी कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को देर शाम मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करने और राज्य में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए शाम 4 बजे बैठक बुलाई थी. सूत्रों ने बताया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में कोई सुधार नहीं होने के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी. कथित तौर पर वायरल बुखार से पीड़ित मान गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ सुल्तानपुर लोधी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं कर पाए. बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने के दौरान हुए बीमार मान इस हफ्ते की शुरुआत में बीमार पड़ने से पहले बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे. वे बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर रहे थे. गुरुवार को पंजाब सरकार ने बचाव और राहत कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए हर बाढ़ग्रस्त गांव में राजपत्रित अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए.