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ड्रग्स के खिलाफ महासंग्राम: राज्यपाल का आह्वान—अब एकजुट होकर लड़ना होगा पंजाब को

चंडीगढ़. पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने राज्य की सबसे बड़ी चुनौती यानी नशे की समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाना केवल सरकार या पुलिस बल का कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की एक सामूहिक और साझा जिम्मेदारी है। राज्यपाल के अनुसार, जब तक समाज का हर व्यक्ति इस बुराई के खिलाफ अपनी भूमिका नहीं समझेगा, तब तक इस समस्या को जड़ से मिटाना संभव नहीं होगा। उन्होंने जन-जन से इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है। युवा पीढ़ी के संरक्षण पर विशेष ध्यान राज्यपाल ने युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए एक ठोस रणनीति अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा राज्य की असली शक्ति हैं और उन्हें सुरक्षित रखना ही प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहाँ नशे के लिए कोई स्थान न हो। कटारिया ने स्पष्ट किया कि युवाओं को खेल और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करना इस लड़ाई का एक अहम हिस्सा है ताकि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या गलत रास्ते पर न भटकें। पंचायतों और ग्राम सभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के प्रभाव को कम करने के लिए राज्यपाल ने पंचायतों को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों को अपने गांवों को नशामुक्त करने के लिए संकल्प लेना चाहिए। स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करके नशे के सौदागरों की पहचान करना और उनके खिलाफ सामूहिक आवाज उठाना बेहद जरूरी है। राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि प्रशासन ऐसे साहसी प्रयासों को पूरा सहयोग प्रदान करेगा और सूचना देने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। नशा मुक्ति और पुनर्वास का संकल्प नशे की चपेट में आ चुके व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्यपाल ने उनके पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि एक मरीज की तरह देखा जाना चाहिए जिन्हें सही इलाज और सामाजिक समर्थन की जरूरत है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार और उनके विस्तार की योजना पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सामूहिक इच्छाशक्ति और एकजुटता के साथ पंजाब जल्द ही अपनी खोई हुई खुशहाली और गौरव वापस प्राप्त करेगा।

शहीद परिवारों का सम्मान सर्वोपरि: रक्षा सेवा कल्याण विभाग के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

चंडीगढ़ पंजाब के रक्षा सेवा कल्याण मंत्री मोहिंदर भगत ने पंजाब सचिवालय में विभाग के कामकाज का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विभाग के प्रमुख सचिव सुमेर सिंह गुर्जर और निदेशक भूपिंदर सिंह ढिल्लों विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और उनके आश्रितों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करना और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना था। मुआवजा वितरण और लंबित मामलों पर चर्चा अधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री को सूचित किया कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से संबंधित विभिन्न मामलों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभिन्न युद्धों के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अधिकांश शहीदों के परिवारों को पंजाब सरकार द्वारा पहले ही आर्थिक मुआवजा दिया जा चुका है। बैठक के दौरान उन शेष मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई जो अभी प्रक्रिया में हैं। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि फाइलों के निपटारे में होने वाली देरी को कम किया जाए ताकि लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके। रिक्त पदों को भरने और बजट पर ध्यान विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने कहा कि मानव संसाधन की कमी को दूर करना आवश्यक है ताकि सेवा वितरण सुचारू रूप से चलता रहे। इसके साथ ही, विभागीय बजट के सही उपयोग और नई परियोजनाओं के लिए धन के आवंटन पर भी मंथन किया गया। सरकार का लक्ष्य रक्षा सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है ताकि सेवानिवृत्त सैनिकों को एक ही छत के नीचे सभी जरूरी सुविधाएं मिल सकें। शहीदों के प्रति सम्मान और सरकारी प्रतिबद्धता बैठक को संबोधित करते हुए मोहिंदर भगत ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के प्रति पंजाब सरकार पूरी श्रद्धा और सम्मान रखती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़ी हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। सरकार शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी और उनके आश्रितों की हर संभव सहायता के लिए निरंतर प्रयास जारी रखेगी। यह बैठक सैनिकों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए शेड्यूल जारी: शिक्षा विभाग ने दी 26 अप्रैल की हरी झंडी

चंडीगढ़. पंजाब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा (P-TET) के आयोजन के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की है। लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का समय आ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का आयोजन राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। प्रवेश पत्र और परीक्षा केंद्र का विवरण परीक्षा के सफल संचालन के लिए विभाग द्वारा सभी जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की स्थिति देख सकते हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले निर्धारित केंद्र पर पहुँचें। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी स्थिति में परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज ले जाना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता शिक्षा विभाग ने नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी और जैमर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में संलिप्त पाए जाने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। भविष्य के शिक्षकों के लिए बड़ी उम्मीद P-TET परीक्षा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र हो जाएंगे। पिछले कुछ समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के बाद, इस परीक्षा के आयोजन से युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय में पुनरावृत्ति पर ध्यान दें और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन का विशेष ख्याल रखें।  

PSEB का बड़ा विजन: ‘क्रिएटर्स, नॉट कंज्यूमर्स’ मंत्र के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय नेशनल AI सम्मेलन

चंडीगढ़.  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने चंडीगढ़ स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समापन गूगल और इंटेल द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के साथ हुआ, जिसने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एआई को गहराई से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर कक्षाओं में एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। छात्रों के लिए 'निर्माता' बनने का विजन PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने एआई के नैतिक उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों की समस्या समाधान कौशल को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि इसके निर्माता बनें। डिजिटल युग में एआई उपकरणों को सही मित्र की तरह चुनने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर सीखने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। गूगल और इंटेल की विशेष कार्यशालाएं सम्मेलन के दौरान गूगल के सत्रों ने शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, इंटेल द्वारा 'कार्यस्थल पर एआई' विषय पर आयोजित कार्यशाला में 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरणों को प्रभावी ढंग से तैनात करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेतृत्व और अकादमिक अखंडता पर चर्चा स्कूल प्रमुखों के लिए आईकेजी पीटीयू द्वारा आयोजित 'स्कूल लीडर्स के लिए एआई' कार्यशाला में एआई उपकरणों को संस्थागत प्रबंधन में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और एआई-सक्षम वातावरण में अकादमिक अखंडता बनाए रखने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। नीव एआई (Neeev AI) द्वारा संचालित छात्र-केंद्रित कार्यशाला ने युवाओं को एआई अनुप्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों के लिए प्रेरित किया। भविष्य की डिजिटल चुनौतियों की तैयारी चेयरमैन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को एआई तकनीक के निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं और इसके पीछे आवश्यक कौशल सेट के बारे में गहराई से बताया गया। पंजाब के छात्रों ने इस उभरती तकनीक के प्रति जबरदस्त जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता दिखाई है। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नवाचार-आधारित डिजिटल भविष्य का निर्माण करने में भी सक्षम बनाएगी।

कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का किया रिव्यू

चंडीगढ़. पंजाब के डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर मिनिस्टर श्री मोहिंदर भगत ने शुक्रवार शाम पंजाब सेक्रेटेरिएट में डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू करने के लिए टॉप अधिकारियों के साथ एक खास मीटिंग की। इस मौके पर डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुमेर सिंह गुर्जर, डायरेक्टर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (रिटायर्ड) खास तौर पर मौजूद थे। मीटिंग के दौरान, अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में काफी प्रोग्रेस हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग युद्धों के दौरान शहीद हुए ज़्यादातर सैनिकों के परिवारों को पंजाब सरकार ने पहले ही मुआवजा दे दिया है। इसके अलावा, बाकी मामलों और उनकी मौजूदा स्थिति पर भी डिटेल में चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि खाली पोस्ट भरने के लिए भी तेज़ी से कार्रवाई की जा रही है। इस मौके पर डिपार्टमेंट के बजट और दूसरे ज़रूरी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए कमिटेड है कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री श्री भगत ने अधिकारियों को एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े सभी मामलों को प्रायोरिटी के आधार पर लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार देश की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुर सैनिकों का पूरा सम्मान और सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और उन्हें हर मुमकिन मदद देने की लगातार कोशिश की जा रही है।

ED छापेमारी के बाद सियासी घमासान: CM भगवंत मान ने केंद्र सरकार को घेरा

लुधियाना. पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई समाप्त हो गई है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम शुक्रवार सुबह अचानक लुधियाना स्थित मंत्री के आवास पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की गहन जांच शुरू की। ईडी की तरफ से बयान नहीं हुआ जारी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। सीए मान लगा चुके केंद्र पर आरोप  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। फिलहाल, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

इमिग्रेशन नियमों का असर: कनाडा में पंजाबी युवाओं की वापसी के आसार, नोटिस जारी

चंडीगढ़. कनाडा में लागू किए गए नए इमिग्रेशन कानून के बाद वहां रह रहे हजारों पंजाबी युवाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कनाडा में इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने नए C-12 बिल के पास होने के बाद करीब 30 हजार ऐसे लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जो वर्क परमिट खत्म होने के बाद शरणार्थी के तौर पर रह रहे थे। इनमें लगभग 9 हजार पंजाबी स्टूडेंट्स और वर्कर्स बताए जा रहे हैं, जिन पर अब डिपोर्टेशन की कार्रवाई की आशंका मंडरा रही है। यह कदम सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और वास्तविक जरूरतमंदों को ही शरण देने के लिए उठाया गया है। इस फैसले के विरोध में पंजाबी स्टूडेंट्स समेत कई देशों के छात्रों ने विनिपेग में प्रदर्शन कर सरकार से राहत की मांग की। प्रदर्शन कारियों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से हजारों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। कनाडा सरकार द्वारा लागू किए गए नए इमिग्रेशन नियमों को वर्ष 2025 से प्रभावी माना गया है। इस बदलाव के चलते वे विदेशी नागरिक भी कानून के दायरे में आ गए हैं, जो पहले से ही कनाडा में रहकर काम कर रहे थे। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे पंजाबी स्टूडेंट्स शामिल हैं, जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्क परमिट या शरण के आधार पर वहां काम करना शुरू किया था। नए नियमों के बाद इन स्टूडेंट्स की स्थिति असमंजस में पड़ गई है। शरण से जुड़ी प्रक्रिया सख्त होने के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी के विरोध में भारतीय स्टूडेंट्स लगातार अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से उनका करियर और मेहनत दोनों खतरे में पड़ गए हैं। वहीं बता दें कि जिन शरणार्थियों को नोटिस जारी किया गया है उन्हें एक मौका दिया जाएगा ताकि वह उक्त नए कानून के तहत अपनी योग्यता साबित कर सकें। शरणार्थी को जिस दिन नोटिस पर लिखी तारीख मिलती है उसके 21 दिन के अंदर उन्हें अपना जवाब देना होगा। वहीं उन्हें सलाह दी जाती है कि किसी इमीग्रेशन वकील से सलाह-मशविरा करके ही जवाब दें। इस नए नियम के तहत कनाडा आने के एक साल के अंदर ही आवेदन करना होगा। अगर साल के बाद आवेदन किया जाता है तो उसे अयोग्य करार दिया जाएगा।

सीमावर्ती क्षेत्र में विकास की नई लहर: अमृतसर के अटारी में 121 सड़कों के कायाकल्प की शुरुआत

अमृतसर.  अटारी में बुनियादी ढांचे का कायाकल्प अमृतसर के अटारी विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए विकास का नया सवेरा हुआ है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने क्षेत्र की मुख्य और लिंक सड़कों को शानदार बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत 57.80 करोड़ रुपये की लागत से 121 सड़कों का नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। यह सड़कें लगभग 137 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं, जो न केवल स्थानीय यातायात को सुगम बनाएंगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेंगी। सीमावर्ती क्षेत्रों की ऐतिहासिक अनदेखी का अंत परियोजना का शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अटारी जैसे सामरिक महत्व वाले सीमावर्ती क्षेत्रों को दशकों तक विकास की मुख्यधारा से बाहर रखा गया। मान के अनुसार, पिछली सरकारों की गलत नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण युवाओं का भविष्य अंधकारमय हुआ और वे पलायन करने पर मजबूर हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार का लक्ष्य पंजाब के हर उस कोने तक विकास पहुँचाना है, जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं। नहरी पानी और कृषि विकास पर जोर विकास कार्यों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी सिंचाई के लिए उपयोग किया जा रहा था, जो अब बढ़कर 71 प्रतिशत हो गया है। आगामी धान के सीजन तक इस आंकड़े को 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों की नलकूपों पर निर्भरता कम होगी और भूमिगत जल स्तर को बचाने में मदद मिलेगी। नशे के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई सड़क निर्माण के अलावा, मुख्यमंत्री ने राज्य को नशामुक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में ड्रग्स की सप्लाई लाइन को पूरी तरह तोड़ दिया गया है और तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती शासकों ने अपने स्वार्थ के लिए नशे के व्यापार को संरक्षण दिया था, लेकिन वर्तमान प्रशासन पंजाब को फिर से 'रंगला पंजाब' बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। रोजगार और सरकारी सेवाओं का विस्तार मुख्यमंत्री ने पंजाब के युवाओं को योग्यता के आधार पर दी गई 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियों का ब्योरा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि अब सरकारी विभागों में पद केवल सिफारिश पर नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर भरे जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे के विकास, मुफ्त बिजली और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे कदमों के माध्यम से सरकार आम आदमी के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रही है। अटारी की इन सड़कों के निर्माण से पर्यटन और व्यापार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।  

चुनावी माहौल में ED का एक्शन: 3 दिन में दो बड़े आप नेताओं के घर छापेमारी, सीएम मान ने बताया ‘चुनावी खेल’

चंडीगढ़ पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने महज तीन दिनों के भीतर आम आदमी पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के आवासों पर छापेमारी की। इस अचानक हुई कार्रवाई से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जहाँ एक तरफ एजेंसियां इसे अपनी नियमित जांच का हिस्सा बता रही हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई मान रहा है। मुख्यमंत्री मान का केंद्र पर तीखा हमला इन छापों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा अपनी हार के डर से केंद्रीय जांच एजेंसियों को आगे कर देती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक 'चुनावी खेल' है जिसका मकसद आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकना और नेताओं के मनोबल को तोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी धमकियों से उनकी सरकार और पार्टी झुकने वाली नहीं है। लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने इस मुद्दे को लोकतंत्र की गरिमा से जोड़ते हुए कहा है कि विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का अनुचित प्रयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि तीन दिनों के भीतर दो नेताओं को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि एजेंसियां किसके इशारे पर काम कर रही हैं। पार्टी का तर्क है कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। इस घटनाक्रम ने पंजाब में केंद्र और राज्य सरकार के बीच के तनाव को और गहरा कर दिया है। चुनावी समीकरणों पर छापों का असर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन छापों का असर आने वाले चुनावों के प्रचार और समीकरणों पर पड़ना तय है। जहाँ आम आदमी पार्टी इसे 'विक्टिम कार्ड' के रूप में पेश कर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल भ्रष्टाचार के मुद्दों को हवा देंगे। फिलहाल, राज्य में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद पंजाब की सियासत को और अधिक गरमा सकता है।

मरीजों के लिए बड़ी राहत: PGI में आधुनिक सुविधाएं, न्यूरो विभाग नए सेंटर में शिफ्ट

चंडीगढ़. PGI ने मरीजों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संस्था ने 20 अप्रैल, 2026 से अपनी न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी OPD सर्विस (ट्रॉमा OPD को छोड़कर) को एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में शिफ्ट करने का फैसला किया है। PGI प्रशासन के मुताबिक नए ओ.पी.डी. ब्लॉक में इस समय चल रही ये सेवाएं 18 अप्रैल को दोपहर बाद बंद कर दी जाएंगी ताकि नई जगह पर उचित कार्रवाइयों को सुविधाजनक बनाया जा सके। नई OPD एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के लेवल 2 पर काम करेगी। PGI के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि मरीजों को एक ही छत के नीचे कंसल्टेशन, डायग्नोसिस और एडवांस्ड ट्रीटमेंट देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे इलाज प्रक्रिया में तेजी आएगी और मरीज को बेहतर अनुभव मिलेगा। OPD का समय और दिन वही रहेंगे। न्यूरोलॉजी आउटपेशेंट डिपार्टमेंट OPD सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी, जबकि गुरुवार को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक स्पेशल क्लिनिक लगेगा। न्यूरोसर्जरी आउटपेशेंट डिपार्टमेंट मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक काम करेगा। मरीज़ गेट नंबर 3 के जरिए एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर जा सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि मरीज़ों की सुविधा के लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए गए हैं।