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पंजाब में बाढ़ से हाहाकार, शिक्षा ठप, राहत-बचाव में जुटा प्रशासन

पंजाब  पंजाब में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात इतने बिगड़े कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और पॉलिटेक्निक संस्थान 7 सितंबर तक बंद करने का आदेश जारी करना पड़ा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी सक्रियता दिखाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पंजाब भेजने का फैसला किया है। चौहान गुरुवार को प्रभावित जिलों का दौरा करेंगे और किसानों की स्थिति का जायजा लेंगे। प्रदेश में अब तक 30 लोगों की मौत और चार लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है। साढ़े तीन लाख से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में हैं। भारी बारिश और नदियों के उफान ने राज्य के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया है। पंजाब सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे राज्य को प्राकृतिक आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।   मुख्यमंत्री-राज्यपाल का दौरा मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया बुधवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू कर दिया है। दोनों नेता राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद भी उन्होंने किया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राहत कार्यों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान से बात कर ताजा हालात की जानकारी ली है। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि पंजाब के लोगों को इस आपदा में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। चौहान ने बताया कि उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और कृषि मंत्री से फोन पर बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट ली है। वे बृहस्पतिवार को पंजाब आकर हालात देखेंगे। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जो भी मदद ज़रूरी होगी, उसे तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा संस्थान 7 सितंबर तक बंद शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि पहले तीन सितंबर तक छुट्टियां घोषित की गई थीं, लेकिन हालात बिगड़ने पर इन्हें 7 सितंबर तक बढ़ाना पड़ा। उन्होंने सभी संस्थानों को आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा है। हालांकि, परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और कॉलेज स्तर पर दाखिला लेने वाले युवाओं में इसे लेकर चिंता है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि अकादमिक कैलेंडर प्रभावित न हो, इसके लिए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं। फसल और पशुधन को बड़ा नुकसान राज्य सरकार ने माना है कि बाढ़ से लगभग 3.75 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिनमें से अधिकांश धान की खड़ी फसल थी। कटाई से पहले ही फसल का जलमग्न होना किसानों पर दोहरी मार साबित हो रहा है। साथ ही पशुधन के नुकसान से ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह आपदा लंबे समय तक आर्थिक असर छोड़ सकती है। सरकार ने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।   आगे और बिगड़ सकते हैं हालात मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में राज्य सरकार को राहत और बचाव कार्यों को और तेज करना होगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर और बढ़ता है तो अधिक गाँवों के डूबने का खतरा है। कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, वार फुटिंग पर सेवाएं मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती हैं। सभी विभागीय कर्मचारी सातों दिन और चौबीसों घंटे ड्यूटी पर रहेंगे। किसी को भी अनुपस्थित रहने की छूट नहीं होगी। डीसी को आपदा कानून के तहत अधिकार जिला उपायुक्तों को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2025 की धारा 34 के तहत अधिकार दिया गया है कि वे तत्काल ज़रूरी आदेश जारी कर सकें। इसका मकसद यह है कि राहत और बचाव कार्यों में कोई देरी न हो और फैसले सीधे ज़मीनी स्तर पर लागू किए जा सकें। सभी विभागों पर कड़ी निगरानी आदेश में कहा गया है कि सभी विभागीय अधिकारी अपने-अपने आपातकालीन कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करें। पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को तुरंत सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया गया है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों को मोबाइल और लैंडलाइन नेटवर्क सुचारु बनाए रखने को कहा गया है। पंचायतों और शहरी निकायों की भूमिका पंचायत राज संस्थान और शहरी निकायों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का दायित्व सौंपा गया है। सरकार ने साफ कहा है कि स्थानीय निकाय ही सबसे पहले प्रभावित लोगों तक पहुँचेंगे और उन्हें जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार से पूरा सहयोग मिलेगा।

भगोड़े AAP विधायक के गंभीर आरोप, कहा- दिल्ली टीम है ‘अब्दाली’

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस से फरार घूम रहे AAP के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया है कि उनका एनकाउंटर भी हो सकता है। उन्होंने बुधवार को एक वीडियो जारी कर रहा है कि पंजाब सरकार ने मेरे पीछे 500 पुलिस वाले लगा रखे हैं। उन्हें पूर्व पत्नी से रेप के मामले में पुलिस खोज रही है। उनकी तलाश में पुलिस करनाल भी पहुंची थी, जहां वह अपने एक रिश्तेदार के यहां ठहरे थे। पुलिस पहुंची तो वह दीवार फांदकर भाग निकले। पुलिस ने उनका पीछा भी किया, लेकिन वह स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार होकर निकल गए। उन्हें पुलिस पकड़ नहीं सकी। अब उन्होंने एक वीडियो जारी किया है और कहा कि उन्हें एनकाउंटर का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस मुझे एक गैंगस्टर घोषित करना चाहती है और एनकाउंटर दिखाकर मेरी हत्या की जा सकती है। विधायक ने कहा कि पुलिस के साथ मेरी कोई झड़प नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जब मेरी गाड़ी पर फायरिंग की तो मैं दूसरे दरवाजे से निकल रहा था। पुलिस के साथ मेरी कोई भिड़ंत या झड़प जैसी स्थिति नहीं बनी। यही नहीं विधायक ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि मैं बाल-बाल बच गया। इससे पहले भी एक वीडियो विधायक ने जारी किया था। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली लॉबी मुझे परेशान कर रही है। उन्होंने कहा था कि मेरी पंजाब के अपने साथी विधायकों और मंत्रियों से अपील है कि खड़े हों और अपनी बात रखें। पठानमाजरा ने कहा कि बाहरी शक्तियां पंजाब पर कब्जा जमाना चाहती हैं। पठानमाजरा ने कहा कि वह पुलिस का सम्मान करते हैं, लेकिन वे फिलहाल दिल्ली के आदेश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है, लेकिन पूर्व पत्नी से जुड़े एक पुराने केस में मुझे फंसाया जा रहा है। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने कहा कि मैंने कभी पुलिस से विवाद नहीं किया। उनकी तरफ से जब मुझे पर फायर हुआ तो मैं भागा। आज भगवान की कृपा से मैं जिंदा बैठा हूं। यही नहीं विधायक ने AAP की दिल्ली टीम की तुलना अहमद शाह अब्दाली से की। पठानमाजरा ने कहा कि जब अब्दाली पंजाब को झुका नहीं पाया तो फिर दिल्ली लॉबी के नेताओं की इतनी हिम्मत कहां है। विधायक ने कहा कि मेरी पंजाब के नेताओं से अपील है कि एकजुट हों और इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि मुझे तो पंजाब पुलिस गैंगस्टर ही घोषित करना चाहती है। मेरे पीछे 8 से 10 एसपी भेजे गए। 5 डीएसपी और एक दर्जन एसएचओ आए। कुल 500 पुलिसकर्मियों को मेरे पीछे भेजा गया था।  

बाढ़ से जूझ रहे लोगों के बीच पहुंचे मंत्री, किया नुकसान का आकलन

पंजाब  कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और बरिंदर कुमार गोयल ने आज संगरूर जिले में घग्गर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया । मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री अरोड़ा और गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार संकट को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 15,688 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, और हज़ारों प्रभावित निवासी वर्तमान में राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। 12 ज़िलों के 1,000 से ज़्यादा गांव या तो जलमग्न हैं या बुरी तरह प्रभावित हैं, और लगभग 94,000 हेक्टेयर कृषि भूमि, जिसमें कटाई के करीब पहुंच चुके धान के खेत भी शामिल हैं, जलमग्न हो गई है। घग्गर नदी का वर्तमान जल प्रवाह 12,000 क्यूसेक है, जबकि नदी की क्षमता 12,200 क्यूसेक है। जल स्तर 747.7 फीट पर है, जो खतरे के निशान 748 फीट से थोड़ा नीचे है। इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने रात में नदी के किनारों पर पुलिस गश्त का निर्देश दिया है। घग्गर का जलस्तर खतरे के निशान पर : मूनक-खनौरी क्षेत्र से गुज़रने वाली घग्गर नदी का जलस्तर दो साल बाद एक बार फिर खतरे के निशान के पर पहुंच गया है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से आसपास के गांवों के लोगों की सांसें फूल रही हैं, क्योंकि हरियाणा की ओर बढ़ते हुए घग्गर नदी की चौड़ाई कम होती जा रही है, जिससे घग्गर उफान पर आकर तबाही मचा रही है। सोमवार देर शाम तक पानी खतरे के निशान 748 से बस तीन इंच ही दूर रह गया था जो कि आज दोपहर बाद खतरे के निशान पर‌ पहुंच गया है। घग्गर की स्थिति कभी भी गंभीर हो सकती है। दूसरी ओर घग्गर नदी के किनारों में बड़ी बड़ी दरारें आनाखतरे की घंटी है।

PU छात्रसंघ चुनाव: मतदान जारी, पुलिस ने संभाला मोर्चा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में आज छात्रसंघ चुनाव को लेकर जबरदस्त हलचल देखने को मिली। एक तरफ जहां लगातार हो रही बारिश छात्रों के लिए चुनौती बनी रही, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय कैंपस पूरी तरह से चुनावी रंग में रंगा नजर आया। करीब 17,000 छात्र अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। छात्रसंघ के विभिन्न पदों के लिए मतदान जारी है, जिसमें प्रेजिडेंट पद पर 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। बारिश के बावजूद उम्मीदवार अपने-अपने डिपार्टमेंट्स के बाहर छाता लेकर खड़े दिखे और वोट के लिए अपील करते नजर आए। यूनिवर्सिटी बनी पुलिस छावनी चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए 11 डीएसपी, 10 एसएचओ, 10 इंस्पेक्टर, 9 चौकी इंचार्ज और 988 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। एसएसपी कंवरदीप कौर खुद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं। 

छात्रों के लिए बड़ी खबर! पंजाब सरकार ने बढ़ाई छुट्टियां, नई तारीख घोषित

पंजाब  पंजाब में लगातार हो रही भारी बारिश और राज्य के कई जिलों में बने बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए पंजाब के स्कूलों में छुट्टियां एक बार फिर बढ़ा दी गई हैं। इस संबंध में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने खुद ऐलान किया है कि राज्य के सभी स्कूल अब 7 सितंबर (रविवार) तक बंद रहेंगे। इसके बाद 8 सितंबर सोमवार को स्कूल दोबारा खुलेंगे। शिक्षा मंत्री ने लिखा, "माननीय मुख्यमंत्री पंजाब श्री भगवंत सिंह मान जी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पंजाब में बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी सरकारी/एडिड/मान्यता प्राप्त/प्राइवेट स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 7 सितंबर 2025 तक छुट्टियां घोषित की जाती हैं।  बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पहले 27 से 30 अगस्त तक राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियां घोषित की थीं। इसके बाद 31 अगस्त को रविवार होने के कारण स्कूल बंद रहे और फिर शिक्षा मंत्री ने छुट्टियों को 3 सितंबर तक बढ़ाने का ऐलान किया था। अब हालात बिगड़ते देख सरकार ने एक बार फिर छुट्टियाँ बढ़ाते हुए स्कूलों को 7 सितंबर तक बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है।  

लगातार हो रही बारिश के बीच भयानक सड़क हादसा, लगा लंबा जाम

लुधियाना लगातार हो रही बारिश के बीच चंडीगढ़ रोड पर मोहिनी रिसोर्ट के सामने एक ट्रक पलट गया, जिसकी वजह से यातायात धीमा चल रहा है। ट्रैफिक पुलिस के एएसआई मोहन सिंह ने आकर मौका संभाला तथा ट्रैफिक को सुचारू ढंग से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त ट्रक हिमाचल से लुधियाना माल लेकर आ रहा था लेकिन शहर के नजदीक पहुंचते ही पलट गया, जिसकी वजह से यातायात बाधित हो रहा है। पुलिस द्वारा हाइड्रा क्रेन मंगवा कर ट्रक को वहां से हटाने के प्रयास शुरू कर दिए गए है। 

बैरक बदलने की मांग लेकर अदालत पहुंचे मजीठिया, कोर्ट ने क्या कहा?

मोहाली  पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा नाभा जेल में अपनी बैरक बदलने के लिए अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत में दायर अर्जी पर बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट एच.एस. धनोआ पेश हुए, जबकि सरकार की ओर से प्रीतइंदर पाल सिंह और फैरी सोफेट विशेष पी.पी. और मंजीत सिंह अतिरिक्त पी.पी. के रूप में पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस अर्जी पर अगली सुनवाई की तारीख 6 सितंबर तय की है। गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में अर्जी दायर कर अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें (बिक्रम सिंह मजीठिया) सामान्य कैदियों के साथ न रखा जाए। उनकी बैरक बदली जानी चाहिए, क्योंकि एक तरफ सरकार उनकी सुरक्षा की बात करती है, दूसरी तरफ उन्हें आम कैदियों के साथ रखा जा रहा है। जिस बैरक में उन्हें रखा जाता है, वहां कैमरे लगे हैं और गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को भी उनके साथ रखा जा रहा है। 

‘आप’ पार्टी ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभियान, पंजाब बाढ़ पीड़ितों को मिलेगी राहत

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ से उत्पन्न त्रासदी को देखते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने देशभर के अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। 'आप' के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब सरकार मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पूरी तरह से राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर पार्टी के हजारों वालंटियर्स प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब और सिख समुदाय ने हमेशा दुनिया को निःस्वार्थ सेवा और सहयोग का संदेश दिया है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या युद्ध जैसी परिस्थिति, सिख समाज सबसे पहले पीड़ितों की मदद के लिए खड़ा होता है और गुरुद्वारों में लंगर लगाकर राहत पहुंचाता है। अब समय है कि हम सब भी उनसे प्रेरणा लेकर सेवा के इस कार्य में शामिल हों। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि इंसानियत के नाते सभी को मिलकर पंजाब के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए। 'आप' के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि पंजाब के कई जिले, हजारों गांव, लाखों परिवार और अनगिनत पशु इस बाढ़ की चपेट में आए हैं। राज्य सरकार और कई सामाजिक संगठन मिलकर राहत कार्य चला रहे हैं, लेकिन नुकसान बहुत व्यापक है। पंजाब के लोग हमेशा दूसरों की मदद करते हैं, इसलिए इस समय पूरे देश का कर्तव्य है कि वे पंजाब की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने बताया कि इस आपदा में राशन से ज्यादा जरूरत मच्छरदानियों, तिरपाल, दवाइयों और बच्चों के कपड़ों जैसी चीजों की है, क्योंकि बाढ़ का पानी घरों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा चुका है। राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया कई हफ्तों तक चलेगी। आम आदमी पार्टी ने निर्णय लिया है कि देशभर के सभी 'आप' के कार्यालयों को पंजाब राहत अभियान का केंद्र बनाया जाएगा। वहां से आवश्यक सामग्री एकत्रित कर पीड़ितों तक पहुंचाई जाएगी।

CM भगवंत मान की आंखों में आए आंसू, बाढ़ पीड़ितों को दिया हिम्मत का संदेश

फिरोजपुर पंजाब में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। चारों तरफ हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज फिरोजपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ की मार झेल रहे सरहदी गांवों के लोगों से मुलाकात की और उनकी परेशानियां सुनीं। इतने गंभीर हालात देखकर और लोगों की बदहाली देखकर मुख्यमंत्री मान की आंखों में भी आंसू आ गए। बाढ़ पीड़ित एक महिला ने अपना दुख सुनाते हुए कहा कि सब कुछ बह जाएगा और हमारा कुछ भी नहीं बचेगा। इस पर मुख्यमंत्री भावुक होकर बोले कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, यह प्राकृतिक आपदा है और सब कुछ मुझ पर छोड़ दो। बताने योग्य है कि मुख्यमंत्री मान न केवल बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, बल्कि बाढ़ प्रबंधन पर भी व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद करने के सख्त निर्देश दिए हैं। आज मुख्यमंत्री की ओर से एक उच्च स्तरीय बैठक भी की जाएगी जिसमें पूरे राज्य में चल रहे राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। बैठक में बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए अन्य जरूरी कदम उठाने पर भी चर्चा होगी। 

क्या इतिहास दोहराएगा खुद को? पंजाब की भयावह बाढ़ ने दिलाई 1988 की याद

पंजाब  पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने 1988 की भयंकर बाढ़ की यादें फिर से ताजा कर दी हैं। उस वक्त सतलुज, व्यास और रावी नदियाँ बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं, जिससे 500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। आज भी बाढ़ से कई जिले बहुत प्रभावित हुए हैं। खासकर गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, जालंधर और रूपनगर जैसे जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशान हैं। यहाँ के लोग अपनी जिंदगी फिर से सही करने के लिए बड़ी मेहनत कर रहे हैं। बाढ़ की वजह सिर्फ इंसान नहीं पंजाब में बाढ़ सिर्फ बारिश और नदियों के बढ़ने की वजह से नहीं आती। इंसानों की कई गलतियों की वजह से भी बाढ़ बढ़ती है। जैसे नालों और नहरों की साफ-सफाई न होना, नदियों के रास्ते बंद हो जाना, कमजोर और टूटे हुए बांध, हरियाली की कमी, अवैध खनन और जंगलों की कटाई। साथ ही, नदी किनारे बिना अनुमति के घर और अन्य निर्माण भी बाढ़ की समस्या बढ़ाते हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश का तरीका बदल गया है और अब बारिश ज्यादा और अनियमित होती है, जिससे बाढ़ की स्थिति खराब हो रही है। नदियों में गाद जमा होने से पानी सही तरह से नहीं बह पाता क्योंकि सरकारें सालों से नदियों से गाद निकालने में कामयाब नहीं हो पाईं।  1988 की बाढ़ ने पंजाब को कर दिया था बर्बाद साल 1988 की बाढ़ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए बहुत बड़ी तबाही लेकर आई थी। इस बाढ़ में उत्तर भारत में 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें से 383 सिर्फ पंजाब में थे। उस साल मार्च से लगातार बारिश हो रही थी, लेकिन सितंबर में सतलुज, रावी और व्यास नदियाँ बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। 11 मार्च को गुरदासपुर में रावी नदी अचानक उफान पर आई, जिससे 40 गाँव पानी में डूब गए। जुलाई में सतलुज और रावी नदियों के पानी ने कई जिलों को पूरी तरह डुबो दिया। सितंबर के आखिरी दिनों में भाखड़ा और पौंग बाँधों के दरवाज़े खोलने से बाढ़ और भी बढ़ गई। 1993 की बाढ़ से भी मची थी भारी तबाही साल 1988 के पांच साल बाद, 1993 में भी पंजाब में बड़ी बाढ़ आई। इस बार करीब 300 लोग मारे गए और 6,200 मवेशी पानी में डूब गए। अमृतसर, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर और संगरूर जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के अध्ययन से पता चला कि 1988 की बाढ़ नदियों के बहुत बढ़ जाने की वजह से आई थी, लेकिन 1993 की बाढ़ नहरों और तटबंधों में दरारें आने की वजह से ज्यादा नुकसान पहुंचाई। क्यों बढ़ती जा रही है तबाही? जानकारी से पता चलता है कि पंजाब में नदियों के किनारे बने तटबंध और बांध सही तरीके से रखरखाव नहीं होते। नहरों की सफाई भी ठीक से नहीं की जाती, जिससे पानी का बहाव ठीक से नहीं हो पाता। जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है और प्राकृतिक जलमार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। नहरों, रेलवे ट्रैक, सड़कों और खेती के कारण पानी का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो गया है। साथ ही, बाढ़ वाले इलाकों में बिना अनुमति के बन रहे घर और कमजोर बांधों की वजह से बाढ़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है। साल 2023 की बाढ़ और जलवायु परिवर्तन का असर एक अध्ययन के मुताबिक साल 2023 की बाढ़ जलवायु परिवर्तन के कारण आई असामान्य और भारी बारिश की वजह से हुई थी। हिमाचल प्रदेश में 7 से 11 जुलाई 2023 तक सामान्य से 436% अधिक बारिश हुई जिससे ब्यास, घग्गर और सतलुज नदियाँ पंजाब के निचले इलाकों में घुस गईं। लगभग 2.21 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया, जिसमें खासकर धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। सरकारें क्यों रही नाकाम? एक प्रोफेसर के अनुसार पंजाब में बाढ़ प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान होने के बावजूद बाढ़ का प्रभाव कम करने में असफल रहे हैं। तटबंधों का कमजोर होना, नदियों के किनारे अवैध अतिक्रमण, और वित्तीय व राजनीतिक कमी ने स्थिति को खराब कर दिया है। साल 1988 से 2010 तक के आंकड़े बताते हैं कि सहायक नदियों की सफाई न होना, तटबंधों का टूटना, नहरों में कट लगाना और जल निकासी प्रणाली की कमी प्रमुख कारण रहे हैं।