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चंडीगढ़ विधेयक पर केंद्र का फैसला आया; CM मान बोले— पंजाब की हक़ की लड़ाई हुई मजबूत

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ से संबंधित प्रस्तावित विधेयक को फिलहाल संसद में पेश न करने के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े किसी भी मुद्दे में राज्य की जनता और सरकार की राय लेना बेहद जरूरी है. आपको बता दें कि सीएम मान का यह बयान उस समय आया जब गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर कोई विधेयक नहीं लाया जाएगा. मुख्यमंत्री मान ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब राज्यों को सम्मान के साथ निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि पंजाब के हितों और भावनाओं को अनदेखा कर किसी भी केंद्रीय निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी पंजाब से संबंधित हर बड़े फैसले से पहले राज्य से विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या विवाद न हो.   गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद पंजाब की राजनीतिक हलचल में हल्का बदलाव देखा गया. जिसके चलते मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ से जुड़े बदलावों पर आधारित कोई विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश नहीं होगा. यह बयान पंजाब में उठे राजनीतिक सवालों और जनता की चिंता को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है. मुख्यमंत्री मान ने दोहराया कि चंडीगढ़ का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान, अधिकार और सम्मान से जुड़ा है. आपको बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को खुशी से कहा कि केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ विधेयक को वापस लेने और इसे संसद में न लाने का फैसला किया है.   आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग और पार्टी के अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के रुख की सराहना करते हुए कहा कि पंजाब के अधिकारों के मुद्दे पर मान सरकार ने स्पष्ट, मजबूत और दृढ़ स्थिति अपनाई है. नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मान ने इस विषय पर पंजाब की आवाज को प्रभावी रूप से केंद्र तक पहुंचाया है, जिससे राज्य की चिंताओं को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से सुना गया. पंजाब में जारी राजनीतिक बयानबाजी और कई दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शांत, संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ मुद्दे को सही दिशा में आगे बढ़ाया. उनके इस व्यवहार को राज्यहित में एक परिपक्व और सूझबूझ भरा कदम माना जा रहा है. समग्र रूप से, चंडीगढ़ विवाद के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने न केवल नेतृत्वकारी भूमिका निभाई, बल्कि राज्य के हितों और अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोबारा स्पष्ट किया. उनकी इस भूमिका को पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक वर्गों द्वारा सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है.  

पंजाब-हरियाणा में ठिठुरन बढ़ी: फरीदकोट 4°C, हिसार रहा सबसे ठंडा शहर

चंडीगढ़ पंजाब के फरीदकोट में मंगलवार को न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पड़ोसी राज्य हरियाणा के हिसार में सबसे कम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ ही फरीदकोट, पंजाब का सबसे ठंडा स्थान रहा। फरीदकोट में सोमवार को भी पंजाब में सबसे कम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। चंडीगढ़ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस, गुरदासपुर में सात डिग्री, अमृतसर में 7.8 डिग्री, लुधियाना में 7.4 डिग्री, पटियाला में 8.4 डिग्री और फिरोजपुर में 6.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।   हरियाणा के सिरसा में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस, करनाल में 8 डिग्री, अंबाला में 10.3 डिग्री, रोहतक में 8.2 डिग्री और भिवानी में 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 7.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बाल विकास में बड़ी पहल: फिरोजपुर के 1261 आंगनबाड़ी केंद्रों में 13 हजार से ज्यादा बच्चे लाभान्वित

फिरोजपुर  जिला सामाजिक सुरक्षा और स्त्री बाल विकास विभाग फिरोजपुर की ओर से आंगनबाड़ी योजना के तहत जिले में कुल 1261 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जिला प्रोग्राम ऑफिसर रिचिका नंदा ने बताया कि इनमें से लगभग तीन सौ केंद्र अपनी इमारतों में चल रहे हैं, जबकि करीब पांच सौ साठ केंद्र प्राइमरी स्कूलों के साथ समन्वय कर संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कई केंद्र किराये की इमारतों, पंचायत भवनों और सामुदायिक केंद्रों में चलाए जा रहे हैं, ताकि जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक सभी सेवाएं सुचारु रूप से पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और छह महीने से छह वर्ष तक के बच्चों को हर महीने पौष्टिक आहार दिया जाता है, ताकि देश का आने वाला भविष्य मजबूत और निरोगी बन सके। साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित टीकाकरण की सुविधा भी उपलब्ध है।   मातृ वंदना योजना से आर्थिक सहयोग रिचिका नंदा ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर प्रत्येक मां को पांच हजार रुपये और दूसरे बच्चे के रूप में बेटी होने पर छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वर्तमान में जिले के करीब 13633 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अनाथ बच्चों के लिए सहारा उन्होंने बताया कि अनाथ बच्चों के लिए भी सरकार पेंशन योजना चला रही है, जिसके तहत उनके पालन-पोषण से लेकर युवावस्था तक मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। जिले में कई अनाथ बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

लॉटरी का चस्का: पंजाब में 1200 करोड़ का कारोबार, तीन राज्यों के टिकटों की हुई जबरदस्त बिक्री

जालंधर पंजाब में लॉटरी का कारोबार बढ़ता जा रहा है और यह 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पंजाब के प्रमुख छह जिले लॉटरी के हब हैं लेकिन प्रदेश का कोई भी जिला इससे अछूता नहीं है क्योंकि हर जगह ही यह कारोबार फैला हुआ है। पंजाब सरकार की भी लॉटरी से 250 करोड़ रुपये के राजस्व पर नजर है और इसमें हर साल बढ़ोतरी हो रही है। करोड़पति बनने की चाह जहां कई लोगों की किस्मत बदल रही है वहीं इसकी लत लोगों को बर्बाद भी कर रही है। पंजाब में नगालैंड, सिक्किम व केरल के टिकटों की भी बिक्री हो रही है। प्रदेश के प्रमुख रूप से छह जिले लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा, पटियाला और जीरकपुर इसके हब हैं लेकिन बाकी के जिलों में भी लॉटरी के कारोबार ने अपने पैर जमा रखे हैं। पंजाब सरकार त्योहारों के मौके पर बंपर लॉटरी निकलती है जिसमें 11 करोड़, ढाई करोड़, डेढ़ करोड़ और एक करोड़ और इसके नीचे के इनाम निकाले जाते हैं। पंजाब राज्य लॉटरी निदेशालय इसका पूरा कामकाज देखती है लेकिन रोज लगने वाली पर्ची की लॉटरी का भी क्रेज बढ़ गया है। रोज लोग लाइनों में लगकर लॉटरी की पर्ची खरीदते हैं और शाम तक लॉटरी के नतीजे आने का इंतजार करते हैं। लॉटरी की यह लत अधिक खतरनाक है जो कई बार लोगों को बर्बादी पर राह पर भी धकेल रही है। इसके अलावा ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं जो लोगों के साथ ठगी का साधन भी बनता जा रहा है। इसे लेकर अधिकतर लोग धोखाधड़ी का शिकार भी हो चुके हैं। सरकार कई बार लोगों को इसे लेकर सतर्क कर चुकी है कि वे इसके झांसे में न आएं क्योंकि सरकार ऑनलाइन ऐसी लॉटरी की टिकटों की बिक्री नहीं करती है और यह पूरी तरह से फर्जी है। सरकार का राजस्व भी लॉटरी से बढ़ रहा है।  वर्ष 2024-25 में लॉटरी से सरकार को 235 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था और वर्ष 2025-26 में 250 करोड़ राजस्व का लक्ष्य रखा गया है। लॉटरी से कमाई में केरल टॉप पर है। पिछली वित्तीय वर्ष में केरल ने लॉटरी से 13,500 करोड़ रुपये की कमाई की थी। लुधियाना के एक लॉटरी विक्रेता ने बताया कि प्रदेश में रोजाना औसत 3 से 4 करोड़ रुपये से अधिक की लॉटरी की टिकटें बिकती है लेकिन यह बिक्री एक सी नहीं रहती है। कभी इसमें बढ़ोतरी होती है और कभी कमी भी आती है। लोहड़ी बंपर पर मिलेंगे 23.47 करोड़ रुपये के इनाम पंजाब सरकार ने अब लोहड़ी बंपर की शुरुआत कर दी है जिसमें लॉटरी के कुल विजेताओं को 23.47 करोड़ रुपये का इनाम दिए जाएंगे। 17 जनवरी 2026 को यह ड्रॉ निकाला जाएगा। हाल ही में दिवाली बंपर में एक सब्जी बेचने वाले की 11 करोड़ रुपये की लॉटरी निकली थी। राजस्थान के अमित सेहरा बठिंडा घूमने आए थे और तभी उन्होंने लाॅटरी का टिकट खरीदा था। पंजाब सरकार की बैसाखी, राखी, दिवाली जैसे मौकों पर निकाली जा रही बंपर लाॅटरी की टिकटें 100 से 500 रुपये तक में मिलती हैं। ऑनलाइन लॉटरी में झांसे में न आने की दी सलाह   पंजाब राज्य लॉटरी निदेशालय के निदेशक शौकत अहमद पार्रे ने ऑनलाइन लॉटरी के झांसे में न आने की लोगों को सलाह दी है। इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है जिसमें बताया गया है कि पंजाब में ऑनलाइन लॉटरी स्कीम की बिक्री बैन है। पंजाब राज्य लॉटरी इसी तरह की कोई स्कीम नहीं निकालती है। निदेशालय के नाम पर मैसेज और ईमेल भेजकर लोगों को लॉटरी निकलने की बात कही जाती है और टैक्स की राशि जमा करवाने की बात कहकर ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया जाता है। किसी भी तरह की ऑनलाइन टिकट की खरीदारी न करें। लॉटरी के नतीजे निदेशालय की वेबसाइट पर जाकर ही ड्रॉ में चैक करें। रोजाना तीन से चार वक्त ड्रा निकाले जा रहे सरकारी लॉटरी के साथ गैर कानूनी लॉटरी का ट्रेंड बढ़ रहा है जिससे सरकार को जीएसटी के राजस्व से भी हाथ धोना पड़ रहा है। अनुमान के अनुसार गैर कानूनी लॉटरी का कुल कारोबार पचास फीसदी तक है और श्रमिक कालोनियों में लाॅटरी के टिकट बेच कर खूब कमाई की जा रही है।  प्रदेश में पंजाब सरकार के अलावा गोवा, नगालैंड, सिक्कम, मिजोरम आदि राज्य सरकारों की बंपर, मासिक, साप्ताहिक एवं डेली लॉटरी चल रही हैं। डेली लॉटरी में रोजाना तीन से चार वक्त ड्राॅ निकाले जा रहे हैं। इनमें टिकट की कीमत सात, दस रुपये होती है और यह कम से कम पांच टिकटों का सेट ही मिलता है। लाॅटरी का चस्का भी शराब, सिगरेट एवं नशे जैसा ही है। अगर किसी तो लग जाता है तो यह जल्दी से छूटता नहीं। ज्यादातर रोज कमाने वाले लोग ही रोजाना लॉटरी खेलते हैं। ऐसे ही एक शख्स ने बताया कि वह अपनी रोजाना की कमाई का पांच से दस फीसदी हिस्सा लॉटरी में लगा देता है और कभी छोटे-छोटे इनाम भी निकल आते हैं। मसलन यदि सात रुपये के पांच टिकट लिए और उनका लॉटरी में नंबर आ गया तो छह सौ रुपये बन जाते हैं। उनका कहना है कि अब यह एक चस्का सा लग गया है और छूट नहीं पा रहा। सैंकड़ों परिवारों को आर्थिक बर्बादी की तरफ धकेल लाॅटरी का गोरखधंधा पंजाब में त्योहारों पर निकलने वाले सरकारी बंपर हों या गली-मोहल्लों में चलने वाला डेली लॉटरी का खेल, अमृतसर में इन दिनों लॉटरी का कारोबार काफी जोरों पर चल रहा है। साथ ही अवैध लॉटरी का गोरखधंधा सैकड़ों परिवारों को आर्थिक बर्बादी की तरफ भी धकेल रहा है। पंजाब में सरकारी बंपर लॉटरी टिकट जैसे लोहरी, दिवाली बंपर बहुत लोकप्रिय हैं। लोग त्योहारी जोश में बड़ी-इनामी टिकटों के लिए एक रात में किस्मत बदल जाने की उम्मीद में कतारों में खड़े होते हैं। ऐसे ड्रॉ बड़े इनाम रखते हैं इसलिए टिकट की बिक्री जोरों से होती है। एक तरफ राज्य सरकार लॉटरी टिकट बेचकर राजस्व जुटाती है वहीं दूसरी तरफ गैर-कानूनी ढंग से चल रहा लाॅटरी का गोरखधंधा लोगों को बर्बाद भी कर रहा है। इस पर एक गंभीर विश्लेषण की जरूरत है कि पल भर में करोड़पति बनने का … Read more

धर्मेंद्र की मृत्यु पर पंजाब में गम, साहनेवाल से मुंबई तक चले जीवन और करियर की यात्रा

साहनेवाल  बाॅलीवुड के ही-मैन एवं प्रख्यात अभिनेता धर्मेंद्र की माैत की सूचना से पूरा पंजाब गमगीन है। धर्मेंद्र पिछले लंबे समय बीमार थे और उनका मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज चल रहा था। सोमवार को उनके निधन की सूचना से प्रशंसकों में  शोक की लहर दाैड़ गई। धर्मेंद्र के गांव साहनेवाल में लोग गमजदा हैं।  साहनेवाल में मांगी जा रही थीं दुआएं साहनेवाल में गांव की चौपाल पर उनके लिए दुआएं की जा रही थी। 91 वर्षीय सतपाल सिंह ने कहा कि धर्मेंद्र के निधन की खबर से वे बेहद दुखी हैं। धर्मेंद्र का साहनेवाल से गहरा नाता है। उनका बचपन साहनेवाल में ही गुजरा और वे हमेशा साहनेवाल को याद करते रहते थे। फगवाड़ा में गुजरा था बचपन धर्मेंद्र का जन्म लुधियाना के पास साहनेवाल में हुआ था। उनका बचपन फगवाड़ा में बीता। उनके पिता मास्टर केवल कृष्ण चौधरी आर्य हाई स्कूल में गणित और सामाजिक अध्ययन पढ़ाते थे। धर्मेंद्र ने 1950 में यहीं से मैट्रिक की। 1952 तक रामगढ़िया कॉलेज में आगे की पढ़ाई की और फिर एक सपने के साथ मुंबई चले गए।  आर्य हाई स्कूल में उनके सहपाठी, वरिष्ठ एडवोकेट एस.एन चोपड़ा ने बताया कि धर्मेंद्र मृदुभाषी, विनम्र और हमेशा मुस्कुराते रहते थे। उनमें एक खास चमक थी। प्रसिद्धि ने उनकी विनम्रता को कभी नहीं बदला। हरजीत सिंह परमार ने कहा कि जब भी वह आते, तो हमारे साथ बैठना, पुरानी बातें करना, मजाक करना और पुरानी यादें ताजा करना चाहते थे। वह कभी किसी स्टार की तरह नहीं आए, वह हमारे दोस्त की तरह आए।  

350वां शहीदी दिवस: पंजाब मुख्यमंत्री ने आनंदपुर साहिब में नमन कर किया महान बलिदान को स्मरण

चंडीगढ़ सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के पावन अवसर पर रविवार को श्री आनंदपुर साहिब में धार्मिक समारोह का आयोजन हुआ। इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाबा बुढ़ा दल छावनी में श्री अखंड पाठ साहिब के समक्ष मत्था टेका। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर समारोह की तस्वीर पोस्ट की। मुख्यमंत्री मान के साथ पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे। भगवंत मान ने कहा, "नौवें पातशाह साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित श्री आनंदपुर साहिब स्थित बाबा बुढ़ा दल छावनी में श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ के अवसर पर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।" उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में पंजाबियों के कल्याण, भाईचारे और एकता के लिए प्रार्थना की। शहीदी दिवस को समर्पित सभी कार्यक्रमों में गुरु साहिब जी सदा अंग-संग सहाई बने रहे और सभी कार्य मर्यादा अनुसार संपन्न हों। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हिंद दी चादर गुरु साहिब ने मानवता, धर्म और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अरविंद केजरीवाल ने 'एक्स' पर तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री आनंदपुर साहिब में नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ हुआ। इस दिव्य समागम में उपस्थित होकर गुरु साहिब जी के चरणों में नतमस्तक होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।" इस खास मौके पर श्री आनंदपुर साहिब को खूबसूरत फूलों और लाइटों से सजाया गया था। हजारों की संख्या में संगत दूर-दूराज से पहुंची और गुरु महाराज के सामने नतमस्तक हुई। बाबा बुढ़ा दल के मुखी और प्रमुख संत-महापुरखों ने भी अखंड पाठ साहिब का भोग डाला।

पंजाब सरकार 25 नवंबर से करेगी रक्तदान अभियान की शुरुआत, गुरु साहिब की शहादत को समर्पित

चंडीगढ़  श्री आनंदपुर साहिब में 23 नवंबर से शुरू होने जा रहा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस का भव्य समागम पूरे पंजाब में श्रद्धा और भावनाओं का एक अद्भुत माहौल बना चुका है. 23 नवंबर से शुरू होने वाले समागम का 25 नवंबर को अंतिम दिन होने वाला है, जिसका कार्यक्रम अपने आप में बहुत गहरा संदेश ले कर आता है. पंजाब सरकार ने इस दिन को सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि मानव सेवा, प्रकृति संरक्षण और “सरबत दा भला” की असली भावना के रूप में तैयार किया है. 25 नवंबर की सुबह मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में अखंड पाठ साहिब का भोग होगा. यह भोग तीन दिन की उस निरंतर अरदास का प्रतीक है जो श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को सम्मान और श्रद्धा के साथ समर्पित है. यह पल लाखों लोगों के लिए बेहद भावनात्मक होने वाला है, क्योंकि अखंड पाठ का भोग सिख इतिहास में पूर्णता, सम्मान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसके तुरंत बाद शुरू होगा पंजाब सरकार का एक ऐतिहासिक प्रयास राज्यव्यापी रक्तदान अभियान. गुरु साहिबान की शिक्षाएँ सिखाती हैं कि मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं. रक्तदान, जीवनदान है, और 25 नवंबर को पूरे पंजाब में एक साथ होने वाला यह अभियान इस बात का जीवंत स्वरूप है कि सिख पंथ आज भी मानव सेवा की उसी परंपरा पर चल रहा है. फिर आएगी पर्यावरण संरक्षण की बारी 3.50 लाख पौधों के राज्यव्यापी पौधारोपण अभियान की. यह सिर्फ पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को गुरु साहिबान के संदेश “प्रकृति और सृष्टि का सम्मान” से जोड़ने का एक बड़ा कदम है. पंजाब सरकार ने इस समागम को सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज, पर्यावरण और इंसानियत के उत्थान से जोड़कर इसे और अधिक सार्थक बनाया है. गुरबानी कीर्तन से लेकर “सरबत दा भला एकता केंद्र” तक के कार्यक्रम इस दिन की आध्यात्मिक गहराई को और बढ़ा देंगे. “सरबत दा भला” सिख धर्म की वह मूल आत्मा है जिसमें पूरे मानव समाज की भलाई की कामना की जाती है. इसी भावना के तहत 25 नवंबर को एक बड़ा राज्यव्यापी अंगदान प्रतिज्ञा अभियान रखा गया है. यह समाज को वह संदेश देता है कि दूसरों को जीवन देना ही सबसे बड़ा धर्म है. शाम को विरासत-ए-खालसा में होने वाला भव्य ड्रोन शो इस तीन दिवसीय समागम का सुंदर समापन करेगा. रोशनी और तकनीक के माध्यम से गुरु साहिब की शहादत, खालसा पंथ की विरासत और पंजाब की परंपरा को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. जनभावना साफ है, पंजाब सरकार ने इस समागम को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, प्रकृति, इतिहास और आध्यात्मिकता का एक विशाल संगम बनाया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की नेतृत्व क्षमता की हर तरफ तारीफ हो रही है कि उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को दुनिया भर में सम्मान दिलाने के लिए इतने व्यापक और प्रभावशाली कार्यक्रमों की योजना बनाई. 25 नवंबर के कार्यक्रम यह दिखाते हैं कि सिख संस्कृति सिर्फ पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं यह इंसानियत, बलिदान, सेवा, दान, प्रकृति और संपूर्ण मानव समाज की भलाई का महा संदेश है. पंजाब सरकार ने इस संदेश को जिस भव्यता और गंभीरता के साथ पेश किया है, उसने पूरे समागम को ऐतिहासिक बना दिया है.  

पंजाब BJP की सक्रियता बढ़ी, जाखड़ की शाह से मुलाकात में बिल वापसी मुद्दा प्रमुख

नई दिल्ली  चंडीगढ़ को अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में शामिल करने वाले प्रस्तावित बिल को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने स्पष्ट किया है कि वे शीघ्र ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिल पर पुनर्विचार कर वापस लेने का अनुरोध करेंगे। विशेष बातचीत में जाखड़ ने कहा कि चंडीगढ़ पर पंजाब की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके केवल प्रशासनिक सुगमता के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “पंजाब के लिए चंडीगढ़ केवल भौगोलिक इकाई नहीं है, यह हमारी भावनाओं से जुड़ा शहर है। ऐसे किसी भी प्रयास को वापस लिया जाना चाहिए। हम केंद्र से समय मांगकर यह मुद्दा उठाएंगे और बिल को वापस लेने की मांग करेंगे।”   BJP पंजाब कोर कमेटी की बैठक रविवार सुबह पंजाब बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक हुई, जिसमें केंद्र के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। इसमें यह राय बनी कि बिल का समय बेहद संवेदनशील है और इससे पंजाब में अनावश्यक अविश्वास का माहौल बन सकता है। बैठक के बाद जाखड़ ने कहा, “चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है। चंडीगढ़ या पानी के मुद्दे पर पंजाब बीजेपी राज्यहितों के साथ मजबूती से खड़ी है। जो भी भ्रम पैदा हुआ है, उसे हम केंद्र से बातचीत कर दूर करेंगे। एक पंजाबी होने के नाते मैं आश्वस्त करता हूं कि हमारे लिए पंजाब सबसे पहले है।” बैठक में पंजाब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा, संगठन मंत्री मंत्री श्रीनिवासुलु तथा केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, कोर कमेटी के ज्यादातर सदस्यों ने माना कि प्रस्तावित बिल का समय ठीक नहीं है और इससे पंजाब की “भावनात्मक प्रतिक्रिया” प्रभावित हो सकती है।

चंडीगढ़ पर बड़ा कदम: अनुच्छेद 240 के तहत खत्म हो सकता है पंजाब-हरियाणा का हस्तक्षेप

चंडीगढ़  केंद्र सरकार चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पेश किया जाना है। इस कदम का उद्देश्य चंडीगढ़ के प्रशासन को अन्य केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के साथ लाना है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल करना है।   इस कदम से चंडीगढ़, अन्य गैर-विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश जैसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव और पुडुचेरी के समान हो जाएगा। वर्तमान में पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के राज्यपाल द्वारा संभाला जाता है। अनुच्छेद 240 के तहत आने वाले सभी केंद्र शासित प्रदेशों में स्वतंत्र प्रशासक होते हैं। यह बदलाव चंडीगढ़ को एक स्वतंत्र प्रशासक देने की संभावना को जन्म देगा। संविधान का अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीधे नियम बनाने का अधिकार देता है। यह राष्ट्रपति को उन केंद्र शासित प्रदेश के लिए शांति, प्रगति और सुशासन हेतु नियम बनाने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए किसी भी विनियमन में संसद द्वारा बनाए गए किसी भी अधिनियम को निरस्त करने या संशोधित करने की शक्ति होती है और इसे संसद के अधिनियम के समान कानूनी बल और प्रभाव प्राप्त होता है। पंजाब कर रहा विरोध यह कदम पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के लिए एक अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है, क्योंकि दोनों चंडीगढ़ पर अपना पूर्ण दावा करते हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित अन्य नेताओं ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। मान ने जोर देकर कहा कि चंडीगढ़ हमेशा पंजाब का अभिन्न अंग रहेगा। साहनी ने कहा कि चंडीगढ़ के विभाजन के बाद पंजाब की राजधानी बनने का ऐतिहासिक महत्व है और केंद्र ने कई समझौतों के तहत चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी बनाने का वादा किया था। विरोध करने वाले नेताओं का मानना है कि यह संशोधन पंजाब के ऐतिहासिक और प्रशासनिक नियंत्रण को खत्म करने, राज्य के संघीय अधिकारों पर हमला करने और पंजाब को उसकी राजधानी से दूर करने की साजिश है। अगस्त 2016 में भी केंद्र ने सेवानिवृत्त नौकरशाह केजे अल्फोंस को चंडीगढ़ का स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त करने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के कड़े विरोध के बाद इसे टाल दिया गया था।  

डीएल बनवाने में बढ़ी परेशानी: पंजाब सरकार ने सभी शॉर्टकट किए बंद

पंजाब  पंजाब में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना पहले जैसा आसान नहीं होगा। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी और पुराने परीक्षण प्रणाली की कमजोरियों को देखते हुए, पंजाब सरकार ने नए और उन्नत ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए उठाया गया है। अब तक लाइसेंस प्राप्त करने के लिए जो भी पारंपरिक तरीका अपनाया जाता था, जिसमें इंस्पेक्टर के निर्णय पर निर्भरता होती थी, उसे पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब, उम्मीदवारों को डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो न केवल अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने इस उद्देश्य के लिए 'हेमा' नामक एक नया सॉफ्टवेयर लागू किया है, जिसे माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित किया गया है। इस सॉफ्टवेयर के तहत अब लाइसेंस के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षण होंगे, जिसमें इंस्पेक्टर की कोई भूमिका नहीं रहेगी। नई प्रक्रिया के अनुसार, टेस्ट ट्रैक पर लगाए गए सेंसर, कैमरे, आरएफआईडी और एआई-आधारित स्कोरिंग सिस्टम से ड्राइविंग की हर गलती पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अगर ड्राइवर किसी नियम का उल्लंघन करता है, जैसे लेन बदलना, गति सीमा पार करना या रिवर्स करना, तो वह तुरंत फेल कर दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अब जुगाड़ के जरिए लाइसेंस प्राप्त करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। पंजाब में सड़क दुर्घटनाओं का विश्लेषण करने पर पता चला कि ज्यादातर हादसे ड्राइवरों की बुनियादी ड्राइविंग गलतियों के कारण होते हैं, जैसे रिवर्स कंट्रोल, ओवरटेकिंग में गलती, अचानक ब्रेक लगाना, और लेन बदलने में लापरवाही।   इस नए टेस्ट सिस्टम को सबसे पहले मोहाली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। ट्रांसपोर्ट विभाग के प्रशासनिक सचिव, वरुण रूजम ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी और सिस्टम की सख्ती से ड्राइविंग कौशल पर जोर दिया जाएगा। अगले तीन से चार महीने में इसे राज्य के सभी जिलों में लागू कर दिया जाएगा। अब, अगर ड्राइवर एक भी गलती करता है, तो उसे ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त नहीं हो सकेगा।