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पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क पर शिकंजा, ISI कनेक्शन के आरोप में 18 युवक पकड़े गए

लुधियाना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के पंजाब में फैलते नेटवर्क को तोड़ने के लिए पंजाब पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। कार्रवाई के दौरान विभिन्न जिलों में छापे मारकर कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। अकेले लुधियाना में 18 युवकों को पूछताछ के लिए राउंडअप किया है।  खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर शुरू हुए अभियान में सामने आया कि दुबई में बैठा शहजाद भट्टी सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था। पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए अधिकांश युवक भट्टी को सोशल मीडिया पर फॉलो करते थे और उसके वीडियो व संदेश लगातार साझा कर रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं को पैसों और नशे का लालच देकर ड्रग्स तस्करी, अवैध हथियारों की सप्लाई और आतंकी गतिविधियों में कूरियर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि संदिग्धों के नेटवर्क और गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से पंजाब में भट्टी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा। 

हाईकोर्ट की फटकार के बाद पंजाब स्कॉलरशिप घोटाले में शिकंजा, 304 करोड़ गबन मामले में केस दर्ज

चंडीगढ़. राज्य के 304 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में वर्षों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब पहली बार आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस ब्यूरो ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए चलाई गई पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर छह पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से हाल ही में जांच में देरी पर कड़ी टिप्पणी किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। यह मामला शैक्षणिक सत्र 2016-17 से जुड़ा है। छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों की पढ़ाई के लिए निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों को राशि जारी की जाती थी। वर्ष 2019 में इस योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। उस समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे। सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग का जिम्मा तत्कालीन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के पास था। घोटाले के उजागर होने के बाद राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ, लेकिन कई वर्षों तक किसी के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ। मामले की जांच पहले विभागीय स्तर पर और फिर उच्चस्तरीय प्रशासनिक समितियों के माध्यम से कराई गई। कांग्रेस सरकार के बाद सत्ता में आई आम आदमी पार्टी सरकार ने जनवरी 2023 में इस पूरे मामले को विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दिया था। इसके बावजूद करीब तीन साल तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विजिलेंस की धीमी कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद अब केस दर्ज किया गया है। इन पूर्व अधिकारियों पर मामला विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(डी) और 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 465, 466, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर वर्ष 2020 में गठित तीन आईएएस अधिकारियों—केएपी सिन्हा, वीपी सिंह और जसपाल सिंह—की उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आम आदमी पार्टी सरकार ने 2023 में केस विजिलेंस को सौंपा था। जिन छह अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें पूर्व उपनिदेशक परमिंदर सिंह गिल, पूर्व डिप्टी कंट्रोलर चरणजीत सिंह, पूर्व सेक्शन अधिकारी मुकेश भाटिया, पूर्व सुपरिंटेंडेंट राजिंदर चोपड़ा और वरिष्ठ सहायक रहे राकेश अरोड़ा व बलदेव सिंह शामिल हैं। विभाग ने पहले ही इन अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था और इनके खिलाफ विभागीय आरोप पत्र भी जारी किए गए थे। उच्चस्तरीय समिति की जांच में सामने आया था कि छात्रवृत्ति राशि जारी करने में विभाग ने तय नियमों का पालन नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने 'पिक एंड चूज' नीति अपनाते हुए कुछ चुनिंदा संस्थानों को लाभ पहुंचाया। कई ऐसे निजी शिक्षण संस्थानों को भुगतान कर दिया गया जो योजना के लिए पात्र ही नहीं थे। कुछ संस्थानों को निर्धारित राशि से कई गुना अधिक भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। यह आया जांच में सामने जांच में यह भी सामने आया कि जिन संस्थानों के ऑडिट में पहले ही गड़बड़ियां पकड़ी जा चुकी थीं, उन्हें भी दोबारा भुगतान किया गया। कई मामलों में भुगतान संबंधी फाइलों में छेड़छाड़ की गई। नोटशीट से टिप्पणियां हटाई गईं, रिकॉर्ड में बदलाव किया गया और कुछ फाइलों के दस्तावेज बदले गए। यहां तक कि जिन संस्थानों को पहले राशि मिल चुकी थी, उन्हें फिर से भुगतान जारी कर दिया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत को क्लीन चिट दी थी और अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि इतने बड़े घोटाले में केवल अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों की जा रही है और राजनीतिक जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।अब एफआईआर दर्ज होने के बाद विजिलेंस ब्यूरो मामले में विस्तृत जांच करेगा। पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी को छापामारी पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।। आरोपितों के वित्तीय लेनदेन और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड दोबारा खंगाले जाएंगे। इतने वर्षों बाद दर्ज हुई यह एफआईआर छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को नई दिशा मिलेगी।

स्व-गणना पूरी, अब होगी डोर-टू-डोर जांच; 30 जून तक देना होगा गाड़ी से इंटरनेट तक का पूरा ब्योरा

लुधियाना पंजाब में जनगणना के पहले चरण के तहत स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सिर्फ 1.5 लाख लोगों ने ही इसका लाभ उठाया है, जो 2011 की जनगणना के हिसाब से राज्य की कुल जनसंख्या का मात्र 0.54% है।   लुधियाना में लगभग 25,000 निवासियों ने स्व-गणना प्रक्रिया पूरी की है, जो राज्य में सबसे अधिक है। मोहाली में लगभग 10,000 लोगों ने स्व-गणना की है। अब शुक्रवार से गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे और 30 जून तक यह प्रक्रिया चलेगी। स्व-गणना के तहत लोगों को मोबाइल एप या वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज करने की सुविधा दी गई थी लेकिन अधिक लोग इसके लिए आगे नहीं आए हैं। घरों की गणना के दौरान लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में गाड़ियों की संख्या, लैपटॉप या कंप्यूटर की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा और पीने के पानी का मुख्य स्रोत जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा घर की बुनियादी सुविधाओं और स्थिति से जुड़े सवाल भी इसमें शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 के बीच पहले चरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने गणना की प्रक्रिया को जून माह तक पूरे करने का फैसला लिया है। इससे पहले अमृतसर, जालंधर और मलेरकोटला में प्री-टेस्ट भी किया गया था और जो भी दिक्कतें सामने आई थीं, उन्हें दूर किया गया है। जनगणना प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए अतिरिक्त, संयुक्त और सहायक आयुक्त के साथ नगर योजनाकार और अधीक्षक अभियंता की तैनाती की है, जो जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। ये जानकारी भी की जाएगी दर्ज   घरों की सूची तैयार करते समय गणनाकर्मी भवन संख्या, फर्श दीवार और छत की सामग्री, घर के उपयोग और उसकी स्थिति से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इसके साथ परिवार संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और दंपतियों की संख्या भी पूछी जाएगी। स्नान सुविधा, रसोईघर और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन जैसी सुविधाओं का ब्योरा भी लिया जाएगा।

पेट संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए संजीवनी बनी भगवंत मान सरकार की सेहत योजना

चंडीगढ़  पंजाब भीषण गर्मी और गैस्ट्रोएंटेराइटिस तथा डिहाइड्रेशन के बढ़ते मामलों की मार झेल रहा है, ऐसे में भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ हज़ारों परिवारों के लिए मज़बूत सहारा बनकर उभरी है. तेज़ गर्मी का असर अब केवल खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों के वार्डों तक पहुंच गया है, जहां डिहाइड्रेशन और पेट संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में मरीज़ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. हालांकि, बढ़ती बीमारी के बीच पूरे राज्य में कई परिवारों को मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से कैशलेस इलाज से राहत मिल रही है।  जनवरी से अप्रैल तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 3,279 गंभीर मामलों में कैशलेस उपचार प्रदान किया गया, जिसमें केवल गैस्ट्रो और पेट संबंधी बीमारियों पर ₹73.42 लाख ख़र्च किए गए. सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पेट संक्रमण, उल्टी, कमज़ोरी और गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है. योजना के उपचार रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ही 1,400 से अधिक मरीज़ों ने डिहाइड्रेशन से जुड़ी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का इलाज करवाया।  इन मामलों में मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज़ सबसे अधिक रहे, जिनकी संख्या 1,050 से अधिक रही. लगभग 115 मरीज़ गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित थे, जबकि 250 से अधिक मरीज़ों को बार-बार उल्टी के कारण शरीर में द्रव की कमी और अत्यधिक थकान के चलते अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।  गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफ़ेसर एवं प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर के अनुसार अत्यधिक गर्मी पेट संक्रमण के मामलों में वृद्धि कर रही है. उन्होंने कहा,“तेज़ गर्मी में भोजन जल्दी ख़राब हो जाता है और दूषित पानी तथा अस्वच्छ खानपान बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं.” उन्होंने आगे कहा,”मरीज़ अक्सर दस्त, पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बुखार जैसी शिकायतें लेकर अस्पताल पहुंचते हैं. गंभीर स्थिति में देरी से इलाज मिलने पर रक्तचाप गिरने, किडनी संबंधी जटिलताओं और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से मानसिक भ्रम जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।  जहां बुजुर्गों में इस मौसम में रिकवरी धीमी होती है और जल धारण क्षमता भी कम होती है. वहीं डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी देते हुए कहा,” बच्चे भी तेज़ी से डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं. बच्चों में उल्टी और दस्त के कारण तरल पदार्थ तेज़ी से कम हो जाता है.” आंकड़ों के अनुसार इस गर्मी के स्वास्थ्य संकट का सबसे अधिक प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है. अप्रैल में 1,290 से अधिक बुजुर्गों ने इस योजना के तहत इलाज करवाया, जबकि लगभग 120 बच्चे उपचार प्राप्त कर चुके हैं।  होशियारपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां केवल मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस से पीड़ित 250 से अधिक बुज़ुर्ग मरीज़ों का इलाज किया गया. जालंधर में भी इसी श्रेणी के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हुए. पटियाला, लुधियाना, रूपनगर, बरनाला, संगरूर, बठिंडा और शहीद भगत सिंह नगर में भी समान प्रवृत्ति देखी गई।  वहीं श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब और गुरदासपुर जिलों में उल्टी और डिहाइड्रेशन के कई मामले सामने आए, जिनमें कई मरीज़ों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. हालाँकि,असंख्य परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत केवल इलाज ही नहीं बल्कि आर्थिक बोझ से मुक्ति भी रही है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र नागरिकों को बिना किसी ख़र्च के जाँच, दवाइयाँ, आईवी फ्लूड, हाइड्रेशन थेरेपी और अस्पताल में इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है।  अधिकारियों के अनुसार, सेहत कार्ड ने लोगों को अधिक ख़र्च के डर से इलाज में देरी करने के बजाय समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया है. यह विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है, जिनमें से कई परिवार पहले स्थिति गंभीर होने तक अस्पताल जाने में देरी करते थे।  डॉ. शशि कांत धीर ने सलाह दी कि, “बच्चों के माता-पिता को गर्मियों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि बच्चों को पर्याप्त पानी देना, हल्के सूती कपड़े पहनाना, दोपहर की तेज़ धूप से बचाना और घर का बना ताज़ा भोजन देना.” उन्होंने यह भी आग्रह किया कि यदि बच्चों में बुखार, उल्टी, सुस्ती या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो माता-पिता तुरंत चिकित्सा सहायता लें।  इस समय जब राज्य में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं रह गई है. भीषण गर्मी से जूझ रहे कई पंजाबी परिवारों के लिए यह समय पर इलाज और स्वास्थ्य सेवा की एक महत्त्वपूर्ण गारंटी बन गई है, जिससे उपचार के दौरान आर्थिक बोझ का डर नहीं रहता। 

ट्रेनिंग ली, फिर भी ड्यूटी से नदारद! लुधियाना में 1000 कर्मियों पर FIR का खतरा

लुधियाना लुधियाना में जनगणना ड्यूटी से भागने वाले 1000 से ज्यादा कर्मचारियों पर FIR दर्ज होगी। नगर निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने चारों जोनों के जनगणना अफसरों को हिदायतें दे दी हैं कि जो कर्मचारी किट लेकर नहीं गया है. लुधियाना में जनगणना की जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर को सौंपी गई। निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल ने अलग-अलग विभागों के साथ निजी संस्थानों 6500 के करीब कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी सौंपी। निगम ने जनगणना के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी। कर्मचारी ट्रेनिंग में भी शामिल हुए, लेकिन जब उन्हें किट ले जाने के लिए कहा तो 1000 से ज्यादा कर्मचारी पहुंचे ही नहीं। नगर निगम कमिश्नर समेत तमाम अफसर रात तक कर्मचारियों को बुलाने के लिए तरले काटते रहे। जोनल कमिश्नर कर्मचारियों से करते रहे संपर्क जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों वीरवार को सुबह से ही कर्मचारियों को किट व आईकार्ड ले जाने के लिए संपर्क करते रहे। नगर निगम पिछले 3-4 दिन से कर्मचारियों को किट बांट रहा था। निगम अफसरों को कर्मचारियों के न पहुंचने का अंदेशा नहीं था क्योंकि वह लगातार ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे थे। एक कर्मचारी के हिस्से 150 घर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस होल्ड की गणना होनी है। लुधियाना नगर निगम एरिया में एक कर्मचारी को 150 घरों की जिम्मेदारी दी गई है। कर्मचारियों को 15 मई से 13 जून तक यह गणना करनी है। रोजाना पांच से छह घरों की गणना भी करता है तो इस दौरान वो आसानी से 150 घरों की गणना पूरी कर सकता है। उन्होंने बताया कि लुधियाना में काफी संख्या में लोग स्वगणना कर चुके हैं। इसके बावजूद वो जनगणना ड्यूटी से भाग रहे हैं। जनगणना एक्ट 1948 के तहत हो सकती है यह कार्रवाई, जानिए.. सीधे दर्ज होगी FIR: जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों ने बताया कि जनगणना की ड्यूटी पर न आने या काम बीच में छोड़ने पर पुलिस केस (FIR) दर्ज किया जा सकता है। जेल और जुर्माना: सेखों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अगर दोषी पाए गए तो कर्मचारी या अधिकारी को सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। नौकरी पर संकट: ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ विभाग की तरफ से भी कड़ी कार्रवाई की जाती है, जिससे नौकरी पर खतरा बन सकता है। सटीक जानकारी जरूरी: यह कानून सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, आम जनता पर भी लागू होता है। गलत जानकारी देने या गणनाकार को रोकने पर भी कार्रवाई हो सकती है। आज से शुरू होनी है डोर-टू डेार हाउस लिस्टिंग नगर निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने बताया कि आज से डोर-टू-डोर हाउस लिस्टिंग का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने स्वगणना कर दी है उन्हें सिर्फ एसई आईडी देनी होगी। नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि इस प्रक्रिया में जो भी सूचनाएं देंगे वो पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगी।

IPL टिकटों से बढ़ी नजदीकियां, कैश पहुंचाने का आरोप; चंडीगढ़ क्रेस्ट घोटाले में बड़ा खुलासा

चंडीगढ़  हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के वित्त निदेशक अमित दीवान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पंचकूला में सामने आए 590 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में गिरफ्तारी के बाद अब चंडीगढ़ के 83 करोड़ रुपए के क्रेस्ट घोटाले में भी सीबीआई ने जाँच की शुरू।  सीबीआई ने अंबाला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर अमित दीवान को हिरासत में लेकर चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया। अदालत ने पूछताछ के लिए आरोपी का चार दिन का रिमांड मंजूर किया है। अब उसे 18 मई को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। जांच में यह भी सामने आया है कि स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट घोटाले के कथित मास्टरमाइंड कारोबारी विक्रम वाधवा के खाते में भी क्रेस्ट फंड से जुड़े 75 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। सीबीआई ने वाधवा का भी दो दिन का रिमांड हासिल किया है। कैश और आईपीएल टिकटों का खेल सीबीआई जांच के मुताबिक अमित दीवान की आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि से गहरी सांठगांठ थी। आरोप है कि रिभव ऋषि ही क्रेस्ट फंड से अमित दीवान को लाभ पहुंचाता था। जांच एजेंसी को जानकारी मिली है कि कई बार 25 से 50 लाख रुपए तक कैश दीवान तक पहुंचाया गया। सीबीआई अब दोनों आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि सरकारी फंड से कितनी बार नकदी निकाली गई और उसे कहां इस्तेमाल किया गया। जांच में यह खुलासा भी हुआ है कि अमित दीवान और रिभव ऋषि की नजदीकियां आईपीएल मैचों से शुरू हुई थीं। रिभव ने दीवान को आईपीएल टिकटें देकर संपर्क बढ़ाया, जिसके बाद दोनों ने कथित तौर पर सरकारी फंड में गड़बड़ी शुरू की। सरकारी रकम शेल कंपनियों में लगाई करीब दो महीने पहले चंडीगढ़ पुलिस ने स्मार्ट सिटी में 116.84 करोड़ और क्रेस्ट में करीब 83 करोड़ रुपए के घोटाले का पर्दाफाश किया था। यह रकम आईडीएफसी बैंक में एफडी के रूप में जमा थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मिलीभगत कर एफडी से रकम निकालकर शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश किया। इसके बदले कुछ सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी गई। बाद में यह मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। डिलीवरी बॉय के जरिए पहुंचती थी रकम सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने दो युवकों को खास तौर पर रकम पहुंचाने के लिए नौकरी पर रखा था। इन्हें डिलीवरी बॉय की तरह इस्तेमाल किया जाता था और सरकारी फंड की रकम इधर-उधर पहुंचाई जाती थी। अब सीबीआई उन दोनों युवकों की तलाश कर रही है। आईडीएफसी बैंक से जुड़े घोटालों में शहर के कई ज्वेलर्स की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसी के चलते वीरवार को सीबीआई ने सावन और माणिक समेत शहर के करीब एक दर्जन ज्वेलर्स के शोरूमों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए और बैंक खातों की जांच भी शुरू कर दी है। आत्महत्या के लिए उकसाने का केस भी दर्ज अमित दीवान को पंचकूला बैंक घोटाले में 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में एचपीजीसीएल के फाइनेंस ऑफिसर बलवंत सिंह ने हरियाणा सचिवालय की आठवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बलवंत सिंह ने अपने सुसाइड नोट में अमित दीवान पर प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए थे।  

CBI ने कोर्ट में खोला राज, HPGCL अधिकारी को मौज-मस्ती करवाकर खेला गया करोड़ों का घोटाला

चंडीगढ़. हरियाणा पावर जेनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के वित्त निदेशक अमित दीवान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पंचकूला में हुए 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में पकड़े जाने के बाद दीवान का नाम चंडीगढ़ में 83 करोड़ के क्रेस्ट घोटाले में भी सामने आ गया है। चंडीगढ़ सीबीआई ने वीरवार को अंबाला जेल से प्रोडक्शन वारंट लेकर दीवान को गिरफ्तार किया और फिर उसे चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपित अमित दीवान की आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि से सांठगांठ थीं। रिभव ही क्रेस्ट के फंड से दीवान की खूब मौज करवाता था। रिभव ने कई बार अमित दीवान को 25 से 50 लाख रुपये कैश दिए। इसी रकम से वह कई बार घूमने भी जाता था। सीबीआई अब दोनों के बैंक अकाउंट भी खंगाल रही है। सीबीआई पता लगा लगा रही है कि कितनी बार आरोपित ने क्रेस्ट के फंड से कैश निकाला था। सीबीआई उसके बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांसजेक्शन की भी जांच कर रही है। सीबीआई ने आरोपित से पूछताछ के लिए कोर्ट से चार दिनों का रिमांड हासिल किया। आरोपित को अब 18 मई को कोर्ट में पेश किया जाएगा। स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट दोनों घोटालों के मास्टरमाइंड कारोबारी विक्रम वधवा का भी सीबीआई ने दो दिनों का रिमांड लिया है। उसके खाते में भी क्रेस्ट के फंड से जुड़ी 75 लाख की ट्रांजक्शन मिली है, जिसकी सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। वधवा को 16 मई को सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। दो महीने पहले चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) में 83 करोड़ का घोटाला पकड़ा गया था। आईपीएल टिकट से शुरू हुआ खेल एचपीजीसीएल में वित्त निदेशक रहते हुए अमित दीवान ने सरकारी फंड में खूब गड़बड़ी की। आरोपित ने आईडीएफसी के पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि के साथ मिलकर फर्जी कंपनियां बनाई जिनमें 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी लेनदेन किए। इन दोनों की मुलाकात आईपीएल मैच से शुरू हुई थी। रिभव ऋषि ने अमित दीवान से नजदीकियां बढ़ाने के लिए उसे आईपीएल मैच की टिकटें दी। इसके बाद दोनों ने मिलकर सरकारी फंड का दुरुपयोग शुरू कर दिया। रिभव ने क्रेस्ट में भी करोड़ों का गबन किया और कई बार बड़ी रकम दिवान को पहुंचाई। रुपये के लेनदेन के लिए रखे थे डिलीवरी बाय सीबीआई जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने दो लड़कों को खास वजह से नौकरी पर रखा जिन्हें डिलीवरी का काम सौंपा गया था। उन्हीं के सरकारी फंड में रखी रकम को ईधर उधर पहुंचाया जाता था। सीबीआइ उन लड़कों का भी पता लगा रही है। चंडीगढ़ पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर हुआ केस दो महीने पहले चंडीगढ़ पुलिस ने स्मार्ट सिटी में 116.84 करोड़ और क्रेस्ट में करीब 83 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया था। स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट की बड़ी रकम आईडीएफसी बैंक में एफडी के रूप में जमा था। आरोपितों ने मिलीभगत कर एफडी में जमा रकम को निकालकर शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश किया गया। इसके बदले सरकारी अधिकारियों को मोटी रकम रिश्वत के रूप में दी गई। चंडीगढ़ प्रशासन ने इन दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की थी। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद सीबीआई ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज की। दीवान पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का भी केस अमित दीवान को पंचकूला में हुए घोटाले में 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में दीवान को बर्खास्त भी कर दिया गया। इसके बाद उसका नाम लेकर एचपीजीसीएल के फाइनेंस ऑफिसर बलवंत सिंह ने हरियाणा सचिवालय की आठवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी। बलवंत ने सुसाइड नोट में अमित दिवान पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद उस पर सेक्टर-3 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था।

मां-बेटे की सफलता की प्रेरणादायक कहानी, एक साथ 12वीं पास कर रचा इतिहास

शाहकोट  शाहकोट के गांधी चौक स्थित गो अहेड इंस्टीट्यूट ऑफ सक्सेस शाहकोट से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी रुकावट आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। संदीप कौर और उनके बेटे जशनदीप सिंह ने एक साथ 12वीं कक्षा की परीक्षा पास करके एक अनोखी मिसाल कायम की है। जानकारी के अनुसार संदीप कौर अपने बेटे का दाखिला ट्यूशन के लिए करवाने हेतु संस्थान में आई थीं। यहां के शैक्षणिक माहौल और विद्यार्थियों की मेहनत देखकर वे स्वयं भी काफी प्रेरित हुईं। संस्थान की मुखिया बलजीत कौर और अध्यापिका प्रभजोत कौर की प्रेरणा और मार्गदर्शन में संदीप कौर ने ओपन स्कूल में दाखिला लिया और 24 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन के साथ मां और बेटे दोनों ने 12वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली। यह सफलता केवल एक परिणाम नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक संदेश है जो जिंदगी की परेशानियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। संस्थान प्रमुख बलजीत कौर ने बधाई देते हुए कहा कि गो अहेड इंस्टीट्यूट ऑफ सक्सेस शाहकोट पिछले कई वर्षों से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है और भविष्य में भी यह प्रयास जारी रहेंगे। इस मौके पर अध्यापक प्रभजोत कौर, दिवाशू चौधरी, रिधिया गुप्ता, अरशदीप कौर, मनप्रीत कौर, सोनिया आदि उपस्थित थे।

42 डिग्री के पार पहुंचा पारा, पंजाब के 5 जिलों में बारिश की संभावना; कल से चलेगी लू

अमृतसर  पंजाब के मौसम में आने वाले दिनों में लगातार बदलाव देखने को मिलने वाला है। एक तरफ मौसम विभाग के अनुसार 15 मई, आज राज्य के कई जिलों में गरज चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जबकि इसके बाद 16 मई से दक्षिण पंजाब के कुछ हिस्सों में लू चलने का यलो अलर्ट जारी कर दिया गया है।  वीरवार शाम पंजाब के कुछ जिलों में हल्की बारिश देखने को मिली, जबकि पूरा दिन लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। बीते दिनों एक्टिव हुए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर आज खत्म होने लगेगा। जिसके बाद लू का असर देखने को मिलेगा। एक सप्ताह के अंदर राज्य के अधिकतर शहरों का तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने का अनुमान है। बठिंडा रहा सबसे गर्म वीरवार को पंजाब के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से आसपास दर्ज किया गया, लेकिन दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर ज्यादा दिखाई दिया। सबसे अधिक अधिकतम तापमान बठिंडा में 42.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा फाजिल्का में 40.9, पटियाला में 40.4, फरीदकोट में 40 और अमृतसर तथा लुधियाना में 38.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 15 मई को अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का सहित कुछ सीमावर्ती जिलों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके चलते लोगों को दोपहर के समय खुले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जानें आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम 16 मई-  बठिंडा और मानसा जिलों में लू चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि इन इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ सकता है और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर सकती हैं। 17 मई-  बठिंडा और मानसा में गर्मी का असर बरकरार रहने की संभावना है। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में भी तेज धूप और गर्म हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी है। 18 मई- दक्षिण पंजाब के जिलों फाजिल्का, मुक्तसर, फरीदकोट, बठिंडा और मानसा में लू चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है।  

ईंधन बचत के लिए चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला, अब ऑफिस की जगह घर से होगा काम

चंडीगढ़. राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने के लिए लागू किए गए सख्त कदमों के बाद अब चंडीगढ़ प्रशासन भी इसी तरह के उपायों पर विचार कर रहा है। इस संबंध में शुक्रवार को अहम निर्णय लिया जा सकता है। यूटी के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेंगे। सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन सरकारी कार्यालयों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की व्यवस्था लागू करने, सरकारी वाहनों के ईंधन उपयोग में कटौती करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदमों पर विचार कर रहा है। निजी कंपनियों को भी सीमित कर्मचारियों के साथ कार्यालय संचालन और घर से काम को प्रोत्साहित करने की सलाह दी जा सकती है। प्रशासन शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है। जबकि लोक भवन कार्यालय मैं काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बुधवार को वाहन ना लेकर आने की हिदायत जारी कर दी गई है। इस दिन कर्मचारी साइकिल पर या अपने परिवार के अन्य सदस्य के साथ राजभवन में आएंगे। इस तरह का प्रयास प्रशासन के अन्य सरकारी कार्यालय में भी लागू किया जा सकता है। बुधवार का दिन नो व्हीकल डे के तौर पर रखा जाएगा। प्रशासन सार्वजनिक परिवहन दिवस” जैसी पहल पर भी विचार कर सकता है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों को बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार शुक्रवार को होने वाली बैठक के बाद इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।