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मणिमहेश में शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, रात 12:14 बजे तक रहेगा शुभ मुहूर्त

मणिमहेश  उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान शिव के धाम मणिमहेश पहुंच रहे श्रद्धालु पवित्र ‘डल झील’ में सुबह से ही आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस मौके पर हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मणिमहेश यात्रा 2026 आधिकारिक तौर पर 19 सितंबर तक चलेगी। मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है। जिला चंबा प्रशासन के अनुसार, कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 18,564 फीट है। मणिमहेश को भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ माना जाता है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पवित्र डल झील में स्नान के लिए पहुंचते हैं। हड़सर से 13 किलोमीटर पैदल चढ़ाई मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हड़सर से करीब 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। हड़सर तक वाहन पहुंचते हैं। इसके बाद यात्रा पैदल शुरू होती है। रास्ते में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं। इसके आगे चढ़ाई पार कर मणिमहेश डल झील तक पहुंचा जाता है। झील से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं। मान्यता के अनुसार, गौरी कुंड और शिव क्रोत्री में क्रमश: माता पार्वती और भगवान शिव ने स्नान किया था। ज्यादातर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, मगर काफी लोग हेलीटैक्सी से भी मणिमहेश पहुंचते हैं। प्रशासन ने इस बार चार हेलीटैक्सी के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए करार किया है। राधाष्टमी पर होगा बड़ा शाही स्नान जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर राधाष्टमी पर होने वाले बड़े शाही स्नान पर है। यह 18 और 19 सितंबर को होगा। मणिमहेश यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार मौसम भी दे रहा साथ यात्रा के दौरान इस बार मौसम श्रद्धालुओं का साथ दे रहा है। मौसम अनुकूल रहने से पैदल ट्रैक पर आवाजाही सुगम बनी हुई है। प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर निगरानी कर रहा है। एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि जन्माष्टमी के शाही स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं। डल झील में शाही स्नान चल रहा है। पिछले साल भारी बारिश और बादल फटने के कारण मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी मुश्किलें आई थीं। 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु भरमौर से मणिमहेश के रास्ते में फंस गए थे। यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य प्रशासन ने इस बार मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया है। श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण कराने और उसकी रसीद साथ रखने की सलाह दी गई है। हड़सर बेस कैंप पर स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे यात्रा की अनुमति दी जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, टॉर्च और उचित जूते साथ रखने की अपील की है। यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान शिव के धाम मणिमहेश में पवित्र डल झील में स्नान है। जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब 18-19 सितंबर को होने वाले बड़े शाही स्नान को लेकर भी प्रशासन और श्रद्धालुओं में उत्साह है।

पंजाब में DA को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी, केंद्र के बराबर वेतन-भत्ते के ऑफर पर भी नहीं माने

अमृतसर  पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे डीए विवाद के बीच मान सरकार ने कर्मचारियों को नया ऑफर दिया है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीरवार को दावा किया कि पंजाब सरकार सूबे के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन प्लस डीए देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केवल केंद्र के डीए प्रतिशत की नकल करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को केंद्र के बराबर करने के लिए तैयार है।  वित्तमंत्री ने दावा किया कि पंजाब अपने राजस्व का 51 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का वेतन पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अधिक है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा कि डीए के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाया हुआ है। इसके तहत चरणबद्ध भुगतान योजना के तहत बकाया डीए का किस्तों में भुगतान किया जा रहा है और आगे भी इसी तरह किया जाता रहेगा। मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह बकाया शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकाल का है, जिसे आम आदमी पार्टी की सरकार डीए की दर बढ़ाते हुए चुका रही है। लिहाजा कर्मचारियों को सरकार का सहयोग करना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उन्हें विपक्षी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सरकार कर्मचारियों के साथ फिर बातचीत के लिए तैयार है। क्या है लिक्विडेशन प्लान? पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के छठे वेतन आयोग के तहत लंबित डीए/डीआर के करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार ने पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय पांच वित्तीय वर्षों (2024-25 से 2028-29) में चरणबद्ध तरीके से भुगतान का प्रस्ताव रखा है। वित्तमंत्री का दावा है कि बकाये की अदायगी मासिक किस्तों के जरिये की जा रही है। इसके तहत पेंशनभोगियों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग किस्तों का प्रावधान किया गया था। 85 वर्ष से अधिक उम्र वालों को दो, 75 से 85 वर्ष वालों को 12 और 75 वर्ष से कम उम्र वालों को 42 मासिक किस्तों में भुगतान की रूपरेखा बनाई गई है। अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस लिक्विडेशन प्लान को रद्द कर 14 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। केंद्र-पंजाब के वेतन और डीए में फर्क – पंजाब में क्लर्क इस वक्त 42 प्रतिशत डीए के हिसाब से टेक होम यानी हाथ में आने वाला शुद्ध वेतन 54,812 रुपये प्राप्त करते हैं जबकि केंद्र के अधीन क्लर्कों को 60 प्रतिशत डीए के साथ 36,960 रुपये वेतन मिलता है। – इसी तर्ज पर पंजाब के ड्राइवर 40,612 रुपये वेतन पाते हैं जबकि केंद्र के ड्राइवरों को 36,960 रुपये मिलते हैं। – पंजाब के स्टेनोग्राफर का वेतन 56,374 रुपये है जबकि केंद्र का 47,360 रुपये। – पंजाब के ईटीटी टीचर का 67,592 रुपये वेतन मिल रहा है जबकि केंद्र के टीचरों का वेतन 65,760 रुपये है। – पंजाब के पुलिस कांस्टेबल 54,812 रुपये वेतन पाते हैं, जबकि केंद्र के 36,960 रुपये। – सरकार यदि पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत डीए देती है तो कर्मियों का वेतन और बढ़ जाएगा। कर्मचारियों का कड़ा रुख बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रही पंजाब कर्मचारियों की विभिन्न जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समन्वयक सुखचैन सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी तरह से गुमराह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पंजाब सरकार का लिक्विडेशन प्लान रद्द करते हुए बकाया डीए के भुगतान का आदेश दे चुका है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके अलावा आंदोलन के तहत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेने के बावजूद उनके खिलाफ अनधिकृत रूप से अवकाश लेने पर कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट से याचिका तथा कार्रवाई के नोटिस वापस नहीं लेगी, तब तक कर्मचारी किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं।  वेतन और डीए पर सरकार ने बताए छह प्रमुख तथ्य – पंजाब के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वालों में पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। राज्य की अधिक बेसिक-पे संरचना के कारण कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब के कर्मचारियों का टेक-होम वेतन उनके केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में अधिक है। – राजस्व का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। इसके मुकाबले अखिल भारतीय औसत 38% है। – तीन किस्तों में डीए में 14% की बढ़ोतरी भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2021 में डीए को 28% से बढ़ाकर नवंबर 2024 में 42% किया है। तीन किस्तों में हुई इस बढ़ोतरी के तहत अक्टूबर 2022 में डीए 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42% किया गया। – 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी विरासत में मिली तथ्य पत्र के अनुसार, लगभग 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी 2016-21 की अवधि से संबंधित है और पिछली कांग्रेस तथा अकाली-भाजपा सरकारों से विरासत में मिली है। – विरासत में मिले बकाये में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भगवंत मान सरकार ने विरासत में मिले डीए बकाये को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को इस देनदारी में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। – 60% डीए करने पर सालाना 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पंजाब में डीए को 60% करने पर राज्य के सरकारी खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसके लिए इसे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर होने वाले खर्च के साथ संतुलित करना होगा। क्या बोले मंत्री? – वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि … Read more

पंजाब में फिर बदला मौसम, जालंधर-पठानकोट में बरसे बादल; 9 सितंबर तक बारिश के आसार

जालंधर पंजाब में मौसम बदल गया है। जालंधर, लुधियाना और पठानकोट में शुक्रवार को बारिश हुई। वहीं चंडीगढ़ और मोहाली में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार आज (4 सितंबर) पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, नवांशहर और मोहाली में कुछ जगह भारी बारिश हो सकती है। राज्य का अधिकतम तापमान 0.1 डिग्री गिरा है। बठिंडा में सबसे अधिक 36.6 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 4 और 5 सितंबर को बारिश का जोर रहेगा। इसके बाद भी बारिश की संभावना है। वहीं, मानसून सीजन में बारिश सामान्य से 34% कम हुई है। चंडीगढ़ समेत कई जिलों में बारिश मौसम विभाग के मुताबिक आज गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा में एक-दो जगह बारिश के आसार हैं। 9 सितंबर तक बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार उत्तर हरियाणा में बने चक्रवाती सिस्टम व मानसून ट्रफ के असर से पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश का दौर जारी रहेगा। पंजाब में 9 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिलेगी। बारिश होने से बिजली की मांग घटी पंजाब में बिजली की कुल मांग 11,944 मेगावाट रही, जबकि राज्य में 3,799 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ। 8,146 मेगावाट बिजली ड्रॉ की गई, जो तय शेड्यूल से 68 मेगावाट ज्यादा रही। बिजली की फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्ज दर्ज की गई। हालांकि, वीरवार को दिन में बिजली की मांग 15 हजार मेगावाट से अधिक पहुंच गई थी।

₹5 करोड़ रिश्वत के आरोप पर घमासान, CM मान की पत्नी ने मजीठिया-खैहरा को थमाया नोटिस

चंडीगढ़  पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नही किया तो करवाई की जाएगी।  यह पूरा मामला हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह के आरोपों से जुड़ा है। जिसमें उन्होंने दावा किया था कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने एक रेप केस, जिसमें गुर चहल को मुख्य आरोपी बताया गया, को दबाने और एक कारोबारी के खिलाफ मामला रद्द कराने के लिए कथित तौर पर ₹5 करोड़ की मांग की थी। 2 सितंबर को अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो-वीडियो पोस्ट किया था। मजीठिया ने दावा किया कि इसमें आरोपी से जुड़े कथित बिचौलियों और डॉ. गुरप्रीत कौर के रिश्तेदार के बीच पैसों के लेनदेन संबंधित बातचीत है। इधर, सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा कि आज मुझे सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से एक कानूनी नोटिस मिला है। मैं इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दूंगा और उन्हें चुनौती देता हूं कि मेरे खिलाफ मानहानि का केस या उनकी ‘पुलिस स्टेट’ जो भी कार्रवाई कर सकती है, कर ले। पहले जानिए क्या है पूरा मामला अगस्त 2026 में सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज रणजीत सिंह ने आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि डॉ. गुरप्रीत ने कथित तौर पर एक रेप के मामले में आरोपी से 5 करोड़ रुपए की मांग की थी, और एक व्यवसायी के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करवाने में मदद करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि डॉ गुरप्रीत का एक करीबी रिश्तेदार आरोपी के लगातार संपर्क में था और उसे पैसे देने और अपनी जान बचाने के लिए परेशान कर रहा था। रिटायर्ड जज को नोटिस भेज चुकीं 23 अगस्त को डॉ. गुरप्रीत कौर ने रिटायर्ड जज रणजीत सिंह को नोटिस भेजते हुए 5 करोड़ रुपए के आरोपों को खारिज किया था। कानूनी नोटिस में रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह से अपने बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया था। इसके लिए 24 घंटे की समय-सीमा दी गई थी। नोटिस में दावा किया गया था कि आरोप लगाने वाले रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा के रिश्तेदार हैं। इसमें आरोपों के पीछे राजनीतिक मंशा होने की बात कही गई है। NHRC ने दो सप्ताह में मांगा था जवाब अगस्त में ही लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) की शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का संज्ञान लिया था। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी और दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा था। मजीठिया ने ऑडियो-वीडियो जारी किए 2 सितंबर को अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की तरफ से सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो-वीडियो शेयर की। मजीठिया ने दावा किया कि इसमें आरोपी से जुड़े कथित बिचौलियों और डॉ. गुरप्रीत कौर के रिश्तेदार के बीच पैसों के लेनदेन, पटियाला जेल में आरोपी को कथित सुविधाएं देने और मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात से संबंधित बातचीत है। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने 2 सितंबर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मजीठिया वाला एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का वीडियो शेयर किया था। जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब पुलिस के DGP से सवाल किया कि क्या वे 5 करोड़ रुपए मांगने वाले अमरदीप ग्रेवाल के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। खैरा ने दावा किया कि अमरदीप का कथित ऑडियो और डॉ. गुरप्रीत कौर के साथ कथित CCTV फुटेज इस मामले से जुड़े हैं।

उपराष्ट्रपति के दौरे और जन्माष्टमी से चंडीगढ़ में ट्रैफिक डायवर्ट, नो-पार्किंग में वाहन पर कार्रवाई

चंडीगढ़ उपराष्ट्रपति और पीयू के चांसलर सीपी राधाकृष्णन आज पंजाब यूनिवर्सिटी के दाैरे पर हैं। उपराष्ट्रपति सुबह करीब 11 बजे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से सीधे पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित कार्यक्रम स्थल जाएंगे।  चंडीगढ़ में आज उपराष्ट्रपति चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चांसलर बनने के बाद यह उनका यूनिवर्सिटी का पहला दौरा होगा। इस दौरान वह एसएआईएफ/सीआईएल (सॉफिस्टिकेटेड एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी/सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन लेबोरेटरी) की अपग्रेड की गई अत्याधुनिक रिसर्च सुविधाओं और पीयू टीआईएफ (पूर्व में बायो नेस्ट) का उद्घाटन करेंगे। उपराष्ट्रपति यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने और लंच के बाद करीब 3:30 बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे। इसी दौरान वीआईपी रूट पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा। उपराष्ट्रपति के दौरे का असर शहर के ट्रैफिक पर भी पड़ेगा। वीआईपी मूवमेंट के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट और नियंत्रित किया जाएगा।  चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से प्रभावित रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की है। उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर पुलिस ने पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस की किलेबंदी कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए वीरवार को रूट रिहर्सल भी की गई। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक सुबह 10:30 से 11:30 बजे और दोपहर 2:45 से 3:30 बजे तक कुछ मार्गों पर यातायात आंशिक रूप से डायवर्ट और नियंत्रित रहेगा। इस दौरान एयरपोर्ट से पीयू आने-जाने वाले वीआईपी रूट पर खास निगरानी रहेगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जरूरी होने पर ही इन मार्गों का इस्तेमाल करें। ट्रैफिक की ताजा स्थिति के लिए चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल पर रियल टाइम अपडेट भी देखे जा सकेंगे। इन रूटों पर सबसे ज्यादा असर दक्षिण मार्ग: एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट से न्यू लेबर चौक (सेक्टर 20/21-33/34) तक। सरोवर पथ: न्यू लेबर चौक से सेक्टर 7/8-18/19 चौक तक। मध्य मार्ग: सेक्टर 7/8-18/19 चौक से सेक्टर 11/12-14/15 चौक (पीजीआई चौक) तक। विद्या पथ: पीजीआई चौक से सेक्टर 24/25 लाइट प्वाइंट होते हुए सेक्टर 25 स्थित यूआईईटी कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर।   पीयू में गेट नंबर-2 बंद, पार्किंग भी बदली सुरक्षा के मद्देनजर गेट नंबर-2 पूरी तरह बंद रहेगा। आमंत्रितों, मेहमानों और आधिकारिक कर्मचारियों को गेट नंबर-3 से प्रवेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल वीवीआईपी गेट नंबर-1 से दाखिल होंगे। आम लोगों के वाहनों के लिए लॉ ऑडिटोरियम के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई है। हाईराइज इमारतों पर स्नाइपर तैनात सुरक्षा के लिए वीआईपी मूवमेंट रूट पर आने वाली हाईराइज इमारतों पर स्नाइपर तैनात किए गए हैं। पुलिस ने साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग और नो-पार्किंग जोन में वाहन नहीं खड़े करने की चेतावनी दी है। नियम तोड़ने पर कार्रवाई के साथ वाहन टो किए जा सकते हैं। पुलिस ने लोगों से सहयोग की अपील की है।  

पंजाब का अजब विरोधाभास: विदेश पलायन के बीच वोटरों की संख्या में 45 लाख का इजाफा

चंडीगढ़   पंजाब में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। राज्य के गांवों और शहरों से युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश जा रहे हैं। इसके बावजूद पंजाब की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यह स्थिति राज्य के बदलते सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है। 2009 से 2024 के बीच पंजाब में मतदाताओं की संख्या में करीब 45 लाख की वृद्धि हुई। यह संख्या 1.69 करोड़ से बढ़कर 2.14 करोड़ से अधिक हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में 1,69,58,380 मतदाता थे। 2022 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा 2,14,99,804 तक पहुंच गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदाता आधार करीब 2.15 करोड़ रहा। हालांकि, इसी दौरान मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 78.60 फीसदी मतदान हुआ था। यह 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 62.80 फीसदी रह गया। मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का उत्साह कम हुआ है। विदेश जाने की होड़ इसी अवधि में पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की होड़ तेज हुई है। प्रवासन अध्ययनों के अनुसार कुल विदेश प्रवासन का 73.16 फीसदी हिस्सा 2016 के बाद का है। कनाडा 41.88 फीसदी के साथ पंजाबियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य है। दुबई 16.25 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 9.63 फीसदी के साथ अन्य प्रमुख गंतव्य हैं। 2016 के आसपास 75 हजार विद्यार्थी सालाना कनाडा जाते थे, जो 2022 से 2024 के बीच बढ़कर 1.35 लाख से 1.50 लाख हो गए। उच्च शिक्षा पर असर और आर्थिक बोझ विदेश जाने की इस दौड़ का असर राज्य की उच्च शिक्षा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की कमी आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 14,342 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए 5,636 करोड़ रुपये की कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां बेची गईं। एक बच्चे को विदेश भेजना कई परिवारों के लिए लाखों रुपये की परियोजना बन चुका है। इसके बावजूद विदेश जाने की चाह लगातार बढ़ी है। मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण राजनीति के विशेषज्ञ प्रो कुणाल ने इस विरोधाभास पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि हजारों युवा विदेश जा रहे हैं, पर पंजाब की जनसांख्यिकी बदली है। चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों में हिमाचल और जेएंडके के लोगों की संख्या बढ़ी है। लुधियाना, फतेहगढ़ साहब और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों में बाहरी प्रदेशों से लोग आकर बसे हैं। मतदाता सूची में नाम होना और चुनाव में मतदान करना अलग बातें हैं। विदेश में रहने वाले भारतीयों की मतदाता पात्रता कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।   

पंजाब चुनाव में CM फेस का कितना असर? 1997 से 2022 तक के नतीजे दे रहे बड़ा संकेत

चंडीगढ़ पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले सीएम चेहरा घोषित करने का भी ट्रेंड रहा है। यह पैटर्न असरदार तो रहता है मगर इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मजबूत सीएम फेस के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और अनुकूल राजनीतिक माहौल भी जीत के लिए बड़ा आधार बनते हैं। कमजोर चेहरों और पार्टी विरोधी लहर की वजह से दलों ने नुकसान भी झेला है। साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे। इसके अलावा दलों ने जातीय समीकरणों को भी साधते हुए अपने सीएम फेस घोषित किए। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दौरान भी दलों की ओर से सीएम फेस पर मंथन जारी है। अभी तक आम आदमी पार्टी अपना सीएम फेस घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की रणनीति अबकी इस दिशा में अलग है। सीएम फेस के साथ चुनाव लड़ने के पैटर्न को यदि देखें तो साल 1997 में प्रकाश सिंह बादल शिअद-भाजपा गठबंधन के प्रमुख चेहरे थे। मुद्दे भी असरदार रहे, लिहाजा पार्टी को जीत हासिल हुई। साल 2002 के चुनाव में शिअद की ओर से बादल ही चेहरा थे, मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा। सत्ता विरोधी लहर भी थी। नतीजतन बादल हार गए और कैप्टन अमरिंदर सीएम बने। साल 2007 और 2012 में शिअद-भाजपा गठबंधन ने प्रकाश सिंह बादल के नाम और सरकार के काम पर चुनाव लड़ा। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही प्रमुख चेहरा बनाया गया। पहले चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल, मजबूत ग्रामीण-सिख आधार, अकाली दल का संगठन और गठबंधन का सामाजिक समीकरण जीत का आधार बना, जबकि 2012 में बादल के चेहरे और उनकी पहली पारी के विकास कार्यों पर मतदाताओं ने फिर मुहर लगाई।  नतीजतन लगातार दूसरी जीत हासिल हुई। साल 2017 में भी मुकाबले में बादल और कैप्टन ही प्रमुख चेहरों के तौर पर आमने-सामने थे, मगर 10 साल की शिअद-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, नशे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। हालांकि प्रकाश सिंह बादल का व्यक्तिगत कद बड़ा था, लेकिन सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन का नुकसान हुआ। साल 2022 में बने थे नए समीकरण साल 2022 में कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर छह माह के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाया। ‘साड्डा चन्नी-साड्डा सीएम’ नारा भी दिया गया, मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के वादों ने सत्ता पलट दी। आप ने अपने वादों और गारंटियों के साथ भगवंत सिंह मान को प्रमुख चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा। नतीजतन भगवंत मान की लोकप्रियता ने चन्नी के दलित कार्ड को पीछे छोड़ दिया। साल 2027 के लिए क्या? आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल साल 2027 के लिए भगवंत सिंह मान को सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2027 के लिए अब तक किसी एक नेता को औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। इसी मुद्दे पर अंदरूनी कलह के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कह चुके हैं कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी। जीत के बाद राहुल गांधी सीएम फेस तय करेंगे।  शिरोमणि अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल चुनावी तैयारी में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है मगर पार्टी की ओर से औपचारिक सीएम फेस की घोषणा अभी नहीं हुई है। भाजपा भी साफ कर चुकी है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जीते तो संभवतः जट सिख चेहरे को सीएम बनाया जाएगा।   

बठिंडा में स्कूल वैन चालकों की महापंचायत, नए नियमों को लेकर जताया विरोध

बठिंडा. पंजाब भर के निजी स्कूलों से जुड़ी स्कूल वैनों के चालकों ने अपनी मांगों को लेकर बठिंडा में महापंचायत की। इसमें पंजाब के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में स्कूल वैन चालक और इस कारोबार से जुड़े लोग शामिल हुए। महापंचायत के दौरान सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताते हुए स्कूल वैनों के लिए अलग पॉलिसी बनाने की मांग की गई। पंजाब स्कूल वैन एसोसिएशन के प्रधान गुरप्रीत हैप्पी ने कहा कि सरकार स्कूल वैनों के मामले में दोहरे मापदंड अपना रही है। स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाली वैनों को सामान्य कमर्शियल वाहनों की श्रेणी में रखकर ऐसे नियम और टैक्स लागू किए जा रहे हैं, जिन्हें छोटे वैन चालकों के लिए पूरा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल वैनों पर सालाना करीब 30 हजार रुपये तक का टैक्स लिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार द्वारा पुराने जीपीएस सिस्टम को बदलकर नया सिस्टम लगाने की शर्त के कारण वैन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार नया जीपीएस सिस्टम लगाने पर 35 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक खर्च आने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे स्तर पर स्कूल वैन चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोग इतना बड़ा खर्च कैसे उठा सकते हैं। 365 दिनों में सिर्फ 220 दिन चलती हैं स्कूल वैन गुरप्रीत हैप्पी ने कहा कि स्कूल वैनों का इस्तेमाल सामान्य कमर्शियल वाहनों से बिल्कुल अलग है। स्कूल वैन साल के 365 दिनों में से करीब 220 दिन ही चलती हैं और आमतौर पर इनका रोजाना सफर भी 50 किलोमीटर से अधिक नहीं होता। इसके बावजूद उनसे कमर्शियल वाहनों के बराबर टैक्स और अन्य फीस वसूली जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि स्कूल वैनों की पासिंग कम से कम पांच साल के लिए की जाए, ताकि हर साल पासिंग और इससे जुड़े खर्चों के कारण वैन चालकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। नए-नए नियमों के नाम पर जुर्माना वसूलने का आरोप वैन चालकों ने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों की ओर से स्कूल वैनों के लिए लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं और नियमों के उल्लंघन के नाम पर भारी जुर्माने वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले ही महंगाई, डीजल, बीमा, मरम्मत और अन्य खर्चों से जूझ रहे वैन चालकों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। उन्होंने सरकार पर वैन चालकों के साथ भेदभाव करने और नए-नए नियमों के जरिए उनका काम मुश्किल बनाने का भी आरोप लगाया। मांगें नहीं मानी तो बड़े संघर्ष की चेतावनी एसोसिएशन नेताओं ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से कई बार अपील कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसके चलते वैन चालकों को मजबूर होकर पंजाब भर में स्कूल वैनों का चक्का जाम करने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इस हड़ताल के कारण 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल वैन बंद रहीं, जिससे हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एसोसिएशन ने इस असुविधा के लिए बच्चों और अभिभावकों से माफी भी मांगी, लेकिन साथ ही कहा कि अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए संघर्ष के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। वैन चालकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संघर्ष को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ी तो पंजाब स्तर पर इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

पंजाब में नशे पर सरकार का बड़ा सर्वे, 55 लाख परिवारों से जुटाई जा रही जानकारी

चंडीगढ़. पंजाब में नशे की स्थिति और इससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए शुरू किया गया पहला ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। सरकार ने 30 अगस्त तक 55.61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 55.36 लाख परिवारों का सर्वे कर लिया है। इस तरह लक्ष्य का 99.56 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जा चुका है। हालांकि, 3,48,692 परिवारों ने सर्वे में सहयोग नहीं किया या सर्वे से इन्कार कर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 55.36 लाख परिवारों को कवर करने के दौरान 51.88 लाख सर्वे ऐसे रहे, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए एआइ आधारित प्रणाली के माध्यम से परखा गया। इनमें से 44.63 लाख सर्वे एआइ प्रणाली ने स्वीकार कर लिए, जबकि 7.24 लाख सर्वे को एआइ ने अस्वीकार करते हुए मैनुअल गुणवत्ता जांच के लिए भेजा। यह कुल जांचे गए सर्वे का 13.96 प्रतिशत था। मैनुअल जांच में अधिकांश सर्वे हुए स्वीकार सरकारी सूत्र के अनुसार मैनुअल जांच के लिए भेजे गए 7.24 लाख मामलों में से 7.23 लाख की जांच पूरी हो चुकी है। इनमें 6.77 लाख सर्वे संपादन के बाद स्वीकार कर लिए गए। मैनुअल जांच के बाद केवल 19,432 सर्वे ऐसे बचे, जिन्हें अस्वीकार श्रेणी में रखा गया। यह गुणवत्ता जांच के लिए पात्र कुल सर्वे का महज 0.37 प्रतिशत है। अमृतसर सबसे आगे, फरीदकोट पीछे जिलेवार आंकड़ों में अमृतसर ने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है। यहां 4,75,079 के लक्ष्य के मुकाबले 4,80,030 सर्वे किए गए, जो 101.04 प्रतिशत है। मानसा, तरनतारन, संगरूर और फिरोजपुर ने भी 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल किया। फाजिल्का, मोगा और पठानकोट ने अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया। सबसे कम कवरेज फरीदकोट में 95.32 प्रतिशत रही। इसके बाद एसएएस नगर 98.04, रूपनगर 98.13 और लुधियाना 98.15 प्रतिशत पर रहा। हालांकि संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा अंतर लुधियाना में रहा, जहां लक्ष्य 6,58,844 के मुकाबले 6,46,634 सर्वे हुए। यहां 12,210 परिवार लक्ष्य से कम रहे। परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी जानी अप्रैल में शुरू किए गए इस सर्वे में करीब 28 हजार सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया था। इसका उद्देश्य सिर्फ नशा करने वालों की पहचान करना नहीं था, बल्कि नशे की प्रकृति, लत की अवधि, उपचार की स्थिति और नशामुक्ति केंद्र तक पहुंच जैसी जानकारी जुटाना भी था। परिवार में शिक्षा, रोजगार, मासिक आय, जमीन, कर्ज, पलायन और विदेश जाने से जुड़ी जानकारी भी ली गई। सर्वे में जाति और उपजाति तथा सरकारी सेवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और पानी के स्रोतों तक पहुंच के दौरान भेदभाव से जुड़े सवाल भी शामिल थे। विपक्ष ने इतने व्यापक सवालों को लेकर सरकार पर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जनभावना से जुड़ा डाटा जुटाने का आरोप लगाया था। अब सरकार सर्वे के आंकड़ों को एकत्र कर उनका विश्लेषण करेगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें संबंधित विभागों के सचिव शामिल हैं। समिति आंकड़ों के आधार पर नशे की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों, नशे के प्रकार और प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर नई योजनाओं और नीतियों के लिए सुझाव तैयार करेगी।

Punjab में बड़ी नशा तस्करी का खुलासा, 14 किलो अफीम और Verna कार बरामद

तरनतारन. जिले के थाना वल्टोहा की पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को 14 किलो 110 ग्राम अफीम, वरना कार और एक हजार रुपये की ड्रग मनी समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया है। जिले के एसएसपी सुरिंदर लांबा ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना वल्टोहा के प्रभारी इंस्पेक्टर बलजिंदर सिंह पुलिस पार्टी के साथ गांव दासूवाल में एक स्कूल के नजदीक विशेष नाकाबंदी कर वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड नंबर लगी एक वरना कार को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस के अनुसार कार चालक ने पूछताछ के दौरान अपनी पहचान गुरमीत सिंह उर्फ गीतू पुत्र अमरीक सिंह निवासी मरगिंदपुरा, जिला तरनतारन के रूप में बताई। पुलिस पार्टी ने जब कार की तलाशी ली तो उसमें से 14 किलो 110 ग्राम अफीम बरामद हुई। इसके अलावा पुलिस ने एक हजार रुपये की ड्रग मनी और कार भी कब्जे में ले ली। एसएसपी लांबा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर थाना वल्टोहा में 1 सितंबर को मामला दर्ज किया गया। आरोपी को माननीय अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।