samacharsecretary.com

JPSC-JSSC CGL समेत भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 15 सितंबर को सुनवाई

रांची Jharkhand High Court Hearing: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार 15 सितंबर को JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. यह मामला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. इस सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है. सरकार ने अब तक दाखिल नहीं किया जवाब मामले की सुनवाई से पहले सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर सकी है. अदालत ने सरकार को 7 सितंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन सोमवार तक सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. वहीं, कुछ मामलों में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है. ऐसे में अदालत के सामने आयोग और सरकार के रुख में अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है. किन परीक्षाओं का मामला पहुंचा हाईकोर्ट हाईकोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, जिनमें अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने की वैधता को चुनौती दी गई है. इनमें JSSC CGL-2023, JPSC संयुक्त सिविल सेवा (11वीं से 13वीं), CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं. इन सभी परीक्षाओं को राज्य सरकार ने पूर्व में रद्द करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अलग-अलग अभ्यर्थियों ने दायर की हैं याचिकाएं JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने के खिलाफ रमेश उरांव और अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है. वहीं, CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को सुभाष मुरमू और अन्य अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है. इसी तरह दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य अभ्यर्थियों ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है. फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के मामले में सौरभ सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है. इन सभी परीक्षाओं से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है. लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए सोमवार की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रखती है या नहीं और हाईकोर्ट आगे इस मामले में क्या निर्देश देता है. अदालत के अगले आदेश से इन विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है.

गयाजी में पिंडदान के लिए खास पैकेज जारी, ₹11,250 से शुरू कीमत; ऑनलाइन ई-पिंडदान भी

पटना Pitru Paksha Mela 2026: गयाजी में पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. यह मेला 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिहार पर्यटन ने खास पिंडदान पैकेज जारी किए हैं. इनमें यात्रा, पिंडदान, पूजा सामग्री, भोजन और ठहरने की सुविधा शामिल है. श्रद्धालु अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से एक दिन या एक रात-दो दिन का पैकेज चुन सकते हैं. जो लोग गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी दी गई है. ऑनलाइन कर सकते हैं बुकिंग पिंडदान पैकेज की बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती है. इसके लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर जाना होगा. बुकिंग या किसी अन्य जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है. पर्यटन विभाग के अनुसार, पैकेज में पंडा-पुजारी की सेवा, जरूरी पूजन सामग्री, परिवहन, आवास और भोजन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. पैकेज-A: पटना से पुनपुन और गयाजी यह एक दिन का पिंडदान पैकेज है. इसमें पटना से श्रद्धालुओं के पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पटना शहर के 10 किलोमीटर के दायरे के अलावा पटना रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से भी परिवहन की सुविधा होगी. श्रद्धालुओं के लिए सेडान या हैचबैक कार उपलब्ध होगी. पुनपुन घाट पर पिंडदान, पिंडदान शुल्क और पूजन सामग्री की सुविधा मिलेगी. इसके बाद गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा. इसमें बजट एसी से लेकर थ्री स्टार होटल तक में ठहरने की सुविधा है. शाकाहारी दोपहर का भोजन भी मिलेगा. पैकेज की कीमत 14,550 रुपये से शुरू होकर 30,650 रुपये तक है. कीमत होटल की श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार तय होगी पैकेज-B: पिंडदान के साथ नालंदा-राजगीर की यात्रा यह एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें पटना से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान से जुड़ी सेवाएं भी पैकेज में शामिल हैं. श्रद्धालुओं को आवास के साथ शाकाहारी नाश्ता, दोपहर और रात का खाना मिलेगा. इस दौरान राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा. धार्मिक अनुष्ठान और यात्रा के साथ बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों को देखने का मौका भी मिलेगा. हालांकि, स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं हैं. इस पैकेज की कीमत 18,850 रुपये से शुरू होकर 40,700 रुपये तक है. पैकेज-C: गयाजी में एक दिन में पूरा पिंडदान गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिन का पैकेज है. गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पैकेज में सेडान या हैचबैक कार की सुविधा होगी. फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा. इसके अलावा पंडाजी की सेवा, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी शामिल है. इसकी कीमत 11,250 रुपये से शुरू होकर 25,250 रुपये तक है. पैकेज-D: देर रात और सुबह पिंडदान करने वालों के लिए यह पैकेज उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है, जो देर रात, सुबह या शाम के समय पिंडदान करना चाहते हैं. इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा होगी. श्रद्धालुओं को सेडान या हैचबैक कार से यात्रा कराई जाएगी. आवास के साथ शाकाहारी दोपहर और रात का भोजन भी मिलेगा. फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की सुविधा इस पैकेज में शामिल है. इसकी कीमत 16,000 रुपये से शुरू होकर 39,500 रुपये तक है. पैकेज-E: गयाजी के साथ राजगीर-नालंदा भी घूम सकेंगे यह भी एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें गयाजी में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा घूमने की सुविधा मिलेगी. गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप होगा. परिवहन, पिंडदान से जुड़ी सेवाएं, पूजन सामग्री और आवास पैकेज में शामिल हैं. श्रद्धालुओं को शाकाहारी नाश्ता, दोपहर का भोजन, अतिरिक्त दोपहर का भोजन और रात का खाना मिलेगा. राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा. इस पैकेज में स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट शामिल नहीं हैं. इसकी कीमत 16,550 रुपये से शुरू होकर 32,850 रुपये तक है. गयाजी नहीं पहुंच सकते तो ऑनलाइन कराएं ई-पिंडदान जो श्रद्धालु किसी वजह से गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी शुरू की गई है. इसकी कुल कीमत 23,000 रुपये है. इसमें GST भी शामिल है. ई-पिंडदान पैकेज में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान या तर्पण की व्यवस्था होगी. पंडित और पुरोहित की सेवा भी इसमें शामिल है. पूजन सामग्री और दक्षिणा की व्यवस्था भी पैकेज का हिस्सा है. पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी. इसकी रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में श्रद्धालु को उपलब्ध कराई जाएगी. पुरोहित तीनों प्रमुख स्थलों पर विधि-विधान से पिंडदान या तर्पण कराएंगे. मंत्रोच्चार, दान-दक्षिणा और पूजन सामग्री समेत पूरे अनुष्ठान की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी.

सड़कों की खुदाई बिना पटना में रुकेगा गंगा का प्रदूषण, 3 नए STP से होगा सीवेज का ट्रीटमेंट

पटना बिहार की राजधानी पटना में गंगा में सीधे गिर रहे सीवेज पर रोक लगाने के लिए अब सड़कों और घनी गलियों में बड़े पैमाने पर खोदाई की जरूरत नहीं होगी। दानापुर कैंट से मित्तन घाट तक गंगा में मिलने वाले 31 प्रमुख नालों को इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आइएंडडी) तकनीक से जोड़ा जाएगा। नालों के पानी को गंगा में पहुंचने से पहले ही रोककर एसटीपी ले जाया जाएगा। वहां उपचार के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना के तहत तीन नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का प्रस्ताव है। इनकी उपचार क्षमता 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी। प्रस्तावित एसटीपी दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट में बनाए जाएंगे। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के अनुसार, परियोजना का काम मानसून के बाद शुरू होगा। 2028 की शुरुआत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। आइएंडडी तकनीक में नालों के अंतिम छोर पर विशेष इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे गंदा पानी गंगा में सीधे गिरने के बजाय वहीं रोक लिया जाएगा। इसके बाद डाइवर्जन चैनल के माध्यम से सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था में शहर की सड़कों को खोदकर हर जगह नई सीवेज लाइन बिछाने की जरूरत कम होगी। परियोजना के तहत दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट के पास एसटीपी प्रस्तावित है। तीनों प्लांट में सीवेज के उपचार के लिए एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे नालों से आने वाले सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा। सीवेज को नालों से एसटीपी तक पहुंचाने के लिए परियोजना में सात स्थानों दानापुर कैंट, दीघा घाट नाला, कुर्जी नाला, राजापुर नाला, मंदिरी नाला, अंटा घाट तथा मित्तन घाट पर इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आइपीएस) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी कुल क्षमता प्रतिदिन 40.89 करोड़ लीटर होगी। अलग-अलग इलाकों से आने वाले सीवेज को इन पंपिंग स्टेशनों पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद पंपिंग सिस्टम के माध्यम से उसे संबंधित एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। कुर्जी और राजापुर नाले की सफल टैपिंग कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग सफल होने के बाद नई व्यवस्था की जा रही है। क्योंकि, इन दोनों नाले का गंदा पानी सीधे दीघा एसटीपी तक पहुंच रहा है। यहां रोजाना 4.50 करोड़ लीटर गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा में सीधे गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकना है। 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त उपचार क्षमता तैयार होने से राजधानी में सीवेज शोधन की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे गंगा में प्रदूषण का दबाव कम होने के साथ पानी की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, तेजी से बढ़ते राजधानी के लिए भविष्य में सीवेज प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था तैयार करने में भी मदद मिलेगी। प्रस्तावित सात इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का विवरण जगह                   क्षमता (प्रतिदिन करोड़ लीटर में) दानापुर कैंट                   1.05 दीघा घाट नाला               8.15 कुर्जी नाला                      6.25 राजापुर नाला                  8.67 मंदिरी नाला                   13.69 अंटा घाट                        2.21 मित्तन घाट                      0.85 प्रस्तावित तीन एसटीपी का विवरण जगह         क्षमता (प्रतिदिन लीटर में)     लागत (करोड़ में) दीघा नहर     8.5 करोड़                           187.17 मंदिरी           24.5 करोड़                        616.55 मित्तन घाट     1.8 करोड़                           39.95 फायदे     गंगा में गंदा पानी जाने से रुकेगा, जलीय जीवों को मिलेगा लाभ।     नई सड़क और गलियों की बार-बार खुदाई से बचेगा शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर।     नई पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क बिछाने के बजाय टैपिंग से लागत घटेगी।     सीवेज का वैज्ञानिक उपचार होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम होगा। एसटीपी की कुल क्षमता का 60.65 प्रतिशत ही उपयोग राजधानी में निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए बनाए गए आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 36.75 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। वर्तमान में प्रतिदिन 22.29 करोड़ लीटर लीटर गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है। एसटीपी की कुल क्षमता का करीब 60.65 प्रतिशत उपयोग हो रहा है। एसटीपी के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट किया जाता है, ताकि बिना शोधन के गंदा पानी सीधे नदियों और जलस्रोतों में नहीं पहुंचे।  

तेजप्रताप यादव को लगातार मिल रही धमकियां, केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल सुरक्षा की मांग

पटना  लगातार मिल रही कथित धमकियों के बीच जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। तेजप्रताप का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से उनके मोबाइल पर बार-बार धमकी भरे फोन आ रहे हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तेजप्रताप ने इस मामले को लेकर 9 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के DGP और बिहार के होम सेक्रेटरी को पत्र भेजकर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सचिवालय थाना, पटना में FIR दर्ज कराने की भी बात कही है। धमकी भरे कॉल का दावा, सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता तेजप्रताप यादव के मुताबिक उन्हें लगातार फोन कॉल के जरिए धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए अविलंब पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही धमकी देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की मांग भी की है। अमित शाह समेत तीन स्तरों पर पहुंचाया मामला तेजप्रताप ने मामले को सिर्फ बिहार सरकार तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ बिहार के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के सचिव को भी पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग की है।इससे साफ है कि तेजप्रताप इस मामले को गंभीर सुरक्षा मुद्दे के तौर पर उठा रहे हैं और केंद्र तथा राज्य—दोनों स्तरों पर कार्रवाई चाहते हैं FIR के बाद अब कार्रवाई पर नजर तेजप्रताप यादव ने बताया कि धमकियों के संबंध में सचिवालय थाना, पटना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। अब इस मामले में पुलिस जांच और धमकी देने वालों की पहचान पर नजर रहेगी। तेजप्रताप की मांग है कि आरोपित व्यक्तियों की पहचान जल्द की जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। “अविलंब पर्याप्त सुरक्षा दी जाए” अपने पत्र में तेजप्रताप ने केंद्र और बिहार सरकार से सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों सरकारें मामले का संज्ञान लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी। अब सवाल-तेजप्रताप की सुरक्षा पर सरकार का क्या फैसला? FIR दर्ज होने और केंद्र तथा राज्य के शीर्ष अधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सरकार के अगले कदम को लेकर है। क्या तेजप्रताप की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और धमकी देने वालों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल तेजप्रताप ने पूरे मामले को लेकर सरकार से तत्काल सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग कर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ा दिया है।

कोयला कर्मियों के परिवारों को राहत, दुर्घटना बीमा और छात्रवृत्ति में हुआ बड़ा इजाफा

धनबाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी कोयला श्रमिकों के नाम विशेष संदेश जारी करेंगे। इसमें श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। नियमित कोयला कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और संविदा श्रमिकों को 40 लाख रुपये तक दुर्घटना बीमा की सुविधा प्रमुख है। खनन दुर्घटना में मृत्यु पर अनुग्रह राशि 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किए जाने की भी जानकारी दी गई है। साथ ही एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 के तहत 1.25 करोड़ से अधिक आजीविकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इससे वित्तीय निश्चितता, परिचालन स्थिरता, निरंतर रोजगार और खनन क्षेत्रों से जुड़े समुदायों के हितों की रक्षा में मदद मिलेगी। दुर्घटना में परिवारों को 25 लाख, स्वास्थ्य-सुरक्षा पर जोर ‘वी केयर’ पहल के तहत खनन दुर्घटना में मृत्यु होने पर नियमित और संविदा, दोनों श्रेणियों के श्रमिकों के परिवारों को समान रूप से 25 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त नियमित कर्मियों के लिए एक करोड़ और संविदा श्रमिकों के लिए 40 लाख रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध है। श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आवधिक चिकित्सा परीक्षण, निवारक स्वास्थ्य जांच तथा विशेषज्ञ स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कोयला कंपनियों के कर्मचारियों को यूनिफॉर्म के लिए प्रतिवर्ष 12,500 रुपये देने की व्यवस्था भी संदेश में शामिल है। वहीं, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र श्रमिकों को 8.33 प्रतिशत प्रदर्शन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआइ) का लाभ देने की जानकारी दी जाएगी। बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ी 350 प्रतिशत, पूर्व कर्मियों को ई-निवारण की सुविधा ‘प्रेरणा-सीआइएल छात्रवृत्ति योजना’ के तहत कोयला कर्मचारियों के बच्चों की छात्रवृत्ति राशि में करीब 350 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवारों को ई-निवारण पोर्टल के जरिए अपनी शिकायतों की स्थिति देखने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कोयला श्रमिक देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने पहली बार एक अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार कर उसे दोबारा हासिल किया है। वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद भारतीय कोयले ने बिजली संयंत्रों में ईंधन की कमी नहीं होने दी।

Gold, Silver और Bronze श्रेणी में होंगे स्कूल प्रमाणित, अगले माह तक पूरी हो सकती है प्रक्रिया

रांची स्कूल प्रमाणीकरण कार्यक्रम के तहत इस बार 1,400 स्कूलों का मूल्यांकन किया गया है। इस क्रम में इन स्कूलों के 2.25 लाख बच्चों के शिक्षण स्तर का भी मूल्यांकन हुआ है। कार्यक्रम के तहत स्कूलों के नामांकन, प्रशिक्षण तथा मूल्यांकन का कार्य संपन्न हो चुका है। अब मूल्यांकन के बाद सामने आए तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इस आधार पर स्कूलों का प्रमाणीकरण होगा। प्रदर्शन के आधार पर स्कूलों को गोल्ड, सिल्वर तथा कांस्य श्रेणी में प्रमाणपत्र दिया जाएगा।झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, राज्य के सभी 24 ज़िलों के नामांकित 1,400 सरकारी स्कूलों का मूल्यांकन किया गया है। मूल्यांकन चरण पूरा होने के बाद कार्यक्रम अब अपने अगले चरण में जाएगा, जहां फ़ाइनल स्कोरिंग के लिए बच्चों के मूल्यांकन, स्कूल के माहौल, वहां उपलब्ध सुविधाएं और बच्चों तथा शिक्षकों की उपस्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के शिक्षण स्तर को बेहतर बनाना तथा नवाचार व बेहतर सुविधाओं के लिए विद्यालयों के बीच प्रतियोगिता को बढ़ाना है। अगले माह तक विद्यालयों के प्रमाणीकरण पूरा होने की संभावना है। बताते चलें कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष विद्यालयों का प्रमाणीकरण किया जाता है। बेहतर प्रदर्शन करनेवाले विद्यालयों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है, जिससे विद्यालयों की सुविधाएं और भी बेहतर की जाती हैं। गोल्ड श्रेणी प्राप्त करनेवाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है। स्कूलों के मूल्यांकन में वहां उपलब्ध सुविधाओं के अलावा साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल की स्थिति, बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता, सामुदायिक सहभागिता तथा बच्चों के परिणाम को भी देखा जाता है।

बिहार की 8 MLC सीटों पर चुनावी बिगुल जल्द, 30 जिलों में पड़ेंगे वोट; PK ने बढ़ाई टेंशन

पटना  Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की चार स्‍नातक और चार श‍िक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव भले आठ सीटों के लिए हो रहा है, लेक‍िन 30 ज‍िलों के मतदाता वि‍धान पर‍िषद सदस्‍य चुनने के लिए मतदान करेंगे। इन जिलों में करीब 150 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। वर्तमान विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अगले चार सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना है। प्रशांत क‍िशोर की एंट्री से रोचक मुकाबले के आसार इस चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बांकीपुर विधायक और जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। वहीं, राजद ने छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। राजद के इस कदम से महागठबंधन में सहयोगी कांग्रेस की नाराजगी की चर्चा भी तेज हो गई है। उधर, एनडीए के भीतर भी सब कुछ सहज नहीं दिख रहा है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन का एलान कर दिया है। किन आठ सीटों पर होना है चुनाव? शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र     पटना- प्रो. नवल किशोर यादव, भाजपा     दरभंगा- डॉ. मदन मोहन झा, कांग्रेस     सारण- आफाक अहमद, निर्दलीय     तिरहुत- संजय कुमार सिंह, भाकपा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र     पटना- नीरज कुमार, जदयू     दरभंगा- सर्वेश कुमार, निर्दलीय     कोसी- एनके यादव, भाजपा     तिरहुत- बंशीधर व्रजवासी, निर्दलीय पटना से नीरज कुमार लगा चुके हैं हैट्रिक पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के नीरज कुमार का मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प रहने की उम्मीद है। नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने राजद के आजाद गांधी को हराया था। अब उनके सामने अपनी सीट बचाने के साथ जीत का सिलसिला कायम रखने की चुनौती होगी। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना के अलावा नालंदा और नवादा जिले आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 25 विधानसभा क्षेत्र हैं। देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी तिरहुत सीट तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण होगा। यह सीट देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी। वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में निर्दलीय बंशीधर व्रजवासी ने जीत दर्ज की थी। अब उनके सामने दोबारा चुनाव जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी। तिरहुत स्नातक क्षेत्र में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिले आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 28 विधानसभा क्षेत्र हैं। 14 जिलों में फैला है कोसी निर्वाचन क्षेत्र कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का दायरा सबसे बड़ा है। इसमें सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और बांका समेत 14 जिले शामिल हैं। यहां कुल 64 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस सीट से भाजपा के एनके यादव विधान पार्षद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने राजद के नितेश कुमार को पराजित किया था। भाजपा के लिए इस सीट को बरकरार रखना चुनौती होगी, जबकि विपक्षी दल यहां सेंध लगाने की कोशिश करेंगे। दरभंगा में निर्दलीय सर्वेश कुमार के सामने चुनौती दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय सर्वेश कुमार वर्तमान विधान पार्षद हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में जदयू के दिलीप कुमार चौधरी को हराया था। इस क्षेत्र में दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले आते हैं। कुल 37 विधानसभा क्षेत्र इसके दायरे में हैं। यहां भी दलों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज कर चुके सर्वेश कुमार के सामने इस बार राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की चुनौती होगी शिक्षक सीटों पर भी दिलचस्प होगा मुकाबला   शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना की सीट पर प्रो. नवल किशोर यादव लंबे समय से भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। करीब तीन दशक से इस सीट पर भाजपा का प्रभाव रहा है दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा विधान पार्षद हैं। वहीं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय आफाक अहमद और तिरहुत से भाकपा के संजय कुमार सिंह वर्तमान सदस्य हैं। 2020 में 25 सितंबर को घोषित हुआ था चुनाव कार्यक्रम वर्ष 2020 में इन विधान परिषद सीटों के चुनाव की घोषणा 25 सितंबर को की गई थी। 28 सितंबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और 5 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए गए थे। 6 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच हुई थी, जबकि 8 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तिथि थी। 22 अक्टूबर को मतदान हुआ और 12 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए गए थे।

गयाजी में पिंडदान से राजगीर-नालंदा दर्शन तक, श्रद्धालुओं के लिए खास टूर पैकेज तैयार

पटना  पितृपक्ष मेला-2026 में देश-विदेश से गयाजी और बिहार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्यटन विभाग ने विशेष तैयारी की है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (BSTDC) ने पिंडदान और धार्मिक पर्यटन को जोड़ते हुए पांच विशेष पैकेज जारी किए हैं। ये पैकेज 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इन पैकेजों में श्रद्धालुओं को पिंडदान अनुष्ठान, पंडा-पुजारी की सेवाएं, पूजन सामग्री, परिवहन, आवास और भोजन जैसी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाएंगी। श्रद्धालु अपनी यात्रा अवधि और बजट के अनुसार एक दिवसीय अथवा एक रात्रि-दो दिवसीय पैकेज चुन सकेंगे। ऑनलाइन बुकिंग के लिए श्रद्धालु BSTDC की वेबसाइट  https://bstdc.bihar.gov.in/Pitripaksha/पर जा सकते हैं। जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है। पैकेज-ए : पटना से गयाजी तक एक दिन में पिंडदान इस पैकेज में पटना से पुनपुन घाट होते हुए गयाजी और फिर पटना वापसी की सुविधा मिलेगी। पटना शहर के 10 किलोमीटर क्षेत्र, रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से श्रद्धालुओं को पिकअप और ड्रॉप की सुविधा दी जाएगी। सेडान या हैचबैक कार से यात्रा कराई जाएगी। पुनपुन घाट पर पिंडदान के साथ गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की व्यवस्था होगी। पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी पैकेज में शामिल है। होटल की श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार इसकी कीमत 14,550 से 30,650 रुपये तक है। पैकेज-बी : पिंडदान के साथ नालंदा-राजगीर की सैर एक रात्रि-दो दिवसीय इस पैकेज में पटना से पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान कराया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण कराया जाएगा। आवास के साथ शाकाहारी नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन शामिल है। हालांकि स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं होंगे। इसकी दर 18,850 से 40,700 रुपये तक है। पैकेज-सी : गयाजी में एक दिन में पूरा पिंडदान गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिवसीय पैकेज है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट अथवा 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी। फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान के साथ पंडाजी की सेवाएं, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी भोजन शामिल है। इसकी कीमत 11,250 से 25,250 रुपये तक निर्धारित की गई है। पैकेज-डी : देर रात और सुबह पिंडदान करने वालों के लिए खास यह पैकेज खासतौर पर उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है जो देर रात, सुबह या शाम के समय पिंडदान करना चाहते हैं। इसमें गयाजी स्टेशन, एयरपोर्ट या पूजा स्थल से पिकअप-ड्रॉप, कार, आवास और भोजन की सुविधा रहेगी। फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की व्यवस्था के साथ इसकी कीमत 16,000 से 39,500 रुपये तक है। पैकेज-ई : पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा भ्रमण एक रात्रि-दो दिवसीय इस पैकेज में गयाजी में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा घूमने का मौका मिलेगा। परिवहन, पिंडदान सेवाएं, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी भोजन पैकेज में शामिल हैं। राजगीर में विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण कराया जाएगा। पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट अलग से देने होंगे। इसकी कीमत 16,550 से 32,850 रुपये तक है। गयाजी नहीं पहुंच पाने वालों के लिए ई-पिंडदान जो श्रद्धालु किसी कारण गयाजी नहीं पहुंच सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी शुरू की गई है। इसकी कुल कीमत 23,000 रुपये, जीएसटी सहित निर्धारित है। ई-पिंडदान में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान अथवा तर्पण कराया जाएगा। इसमें पुरोहित की सेवाएं, पूजन सामग्री, दक्षिणा और पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल है। अनुष्ठान की रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह श्रद्धालु स्वयं गयाजी पहुंचे बिना भी प्रमुख पिंडदान स्थलों पर विधि-विधान से अनुष्ठान करा सकेंगे।

राज्य के पांच सौ पचपन विद्यालयों में छात्रों को रोजगारपरक कौशल और व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

 पटना  बिहार में कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), बिहार यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से इसके लिए रणनीति तैयार कर रहा है। स्कूलों में वोकेशनल कोर्स संचालित करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसी कड़ी में 16 और 17 सितंबर 2026 को पटना में दो दिवसीय आवासीय विचार-विमर्श कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें जिला स्तर के व्यावसायिक नोडल पदाधिकारी के अलावा प्रत्येक जिले से एक-एक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक-शिक्षिका शामिल होंगे। किसी एक ट्रेड का चयन करेंगे विद्यार्थी राज्य के 555 विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू की जानी है। नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी अपने विद्यालय में आवंटित ट्रेड में से किसी एक का चयन कर उसका अध्ययन कर सकेंगे। व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही रोजगारपरक कौशल से लैस करना है, ताकि वे आगे नौकरी के साथ अपना उद्यम भी शुरू कर सकें और अपने कौशल से आय अर्जित कर सकें। हर विद्यालय में दो ट्रेड की होगी पढा़ई व्यावसायिक शिक्षा के तहत प्रत्येक विद्यालय में दो-दो ट्रेड संचालित किए जाएंगे। ट्रेड का आवंटन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय स्तर से किया जाएगा। प्रत्येक ट्रेड के लिए जाब रोल भी निर्धारित किए गए हैं। यानी विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी जाएगी कि संबंधित ट्रेड का प्रशिक्षण लेने के बाद वे किन क्षेत्रों में रोजगार हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर इलेक्ट्रानिक्स एंड हार्डवेयर ट्रेड में नौवीं व 10वीं के विद्यार्थी जूनियर टेक्निशियन- सोलर ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसे जाब रोल के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को सोलर पैनल इंस्टालेशन टेक्निशियन जैसे रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला में आने वाले शिक्षकों को लाने होंगे दस्तावेज कार्यशाला में शामिल होने वाले शिक्षकों को अपने साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कापी लानी होगी। प्रतिभागियों को अपना विवरण निर्धारित गूगल फार्म में 14 सितंबर तक भरना होगा। इससे प्रशिक्षण स्थल पर उनके आवासन की समुचित व्यवस्था की जा सकेगी। इन ट्रेड्स में होगी पढ़ाई     इलेक्ट्रानिक्स एंड हार्डवेयर     टेलीकॉम     आइटी     प्लंबिंग     कृषि     अपैरल     मेड अप्स एंड होम फर्निशिंग     रीटेल  

575 शिकायतें, सिर्फ 269 पर कार्रवाई; झारखंड में अवैध खनन रोकने में प्रशासन फेल

रांची झारखंड में अधिकारियाें के ढीले रवैये के कारण अवैध खनन रुक नहीं रहा है। अवैध खनन के आरोपियों की पहचान करना तो दूर की बात है, कार्यालय तक पहुंचनेवाली शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। विभागीय सचिव की समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई और हालात गंभीर दिखे। स्थिति यह है कि झारखंड में पिछले एक वर्ष में अवैध खनन एवं परिवहन से संबंधित 575 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 269 पर ही कार्रवाई हो सकी है। 306 मामलों में अभी भी जिला स्तर से कार्रवाई का इंतजार है। ज्यादातर मामले में आरोपियों पर एफआईआर भी नहीं दर्ज हो पा रही है। खनन सचिव पुलिस-प्रशासन से सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। यहां यह बताना जरूरी है कि सर्वाधिक शिकायत धनबाद से आई है तो पाकुड़, गिरिडीह और साहिबगंज से भी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं। झारखंड में अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। अधिकारियों के स्तर से कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध खनन करनेवालों का मनोबल बढ़ जाता है खान एवं भूतत्व विभाग की रिपोर्ट कम से कम यही बता रही है। पिछले दिनों विभिन्न माध्यमों से 575 शिकायतें जिलों में खनन पदाधिकारी तक पहुंची, लेकिन इनमें से महज 269 मामलों में कार्रवाई की गई है। पूरे राज्य में तीन जिले गोड्डा, खूंटी और गुमला ऐसे हैं जहां शिकायतों पर शत-प्रतिशत कार्रवाई होने के आंकड़े मिले हैं। मजेदार बात यह है कि गोड्डा जिले के लिए एक ही शिकायत मिली थी, खूंटी के लिए दो और गुमला के लिए पांच। राज्य में गढ़वा एक ऐसा जिला रहा जहां के लिए कोई शिकायत नहीं मिली है। सरकार ने सभी जिलों से प्राप्त एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) के आधार पर यह जानकारी सामने आई है। आधे से अधिक जिलों में टास्क फोर्स की बैठक से संबंधित कोई जानकारी नहीं राज्य सरकार के पास अगस्त महीने में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक से संबंधित कोई जानकारी अपलोड नहीं की गई है। स्थापित व्यवस्था के अनुसार सभी जिलों को हर महीने बैठक कर इससे संबंधित मिनट्स को जेम्स पोर्टल पर अपलोड करना होता है। अगस्त महीने में राज्य के 13 जिलों से ऐसी बैठक से संबंधित कोई रिपोर्ट अपलोड नहीं है। सबसे अधिक शिकायतें धनबाद से, अवैध खन में गोफ में समा जाते लोग झारखंड में अवैध खनन से सर्वाधिक प्रभावित जिलों की बात करें तो सबसे अधिक शिकायतें धनबाद से मुख्यालय तक आती हैं और इस पर कार्रवाई का प्रतिशत भी बहुत कम है। नतीजा आए दिन देखने को मिलता है। इस जिले में अवैध खनन के कारण बड़ी घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। रविवार को भी धनबाद में अवैध खनन की कोशिशों में दो लोगों की मौत हुई है और कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की भी जानकारी मिल रही है। ऐसी जानकारियों की पुष्टि झारखंड में यदा-कदा ही हो पाती है और यही कारण है कि अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। धनबाद के लोग अवैध खनन का दंश दशकों से झेल रहे हैं और हर वर्ष कई लोगों की जान अवैध खनन के परिणाम के स्वरूप बने गोफ में समा जाने से होती है। झारखंड के अन्य कई जिलाें में अवैध खनन के कारण लोगों की जान तो जा ही रही है, विधि-व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। इसे रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां औपचारिकताओं तक ही सीमित हैं। क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि कहीं ना कहीं ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं। धनबाद समेत आसपास के तमाम जिलों में इस तरह की घटनाएं बार-बार होने के बावजूद प्रशासनिक विफलता के कारण इसे रोका नहीं जा पा रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जब तक आम लोग इसे रोकने के लिए आगे नहीं आएंगे और पुलिस, प्रशासन एवं नेतृत्वकर्ताओं से इसे रोकने के लिए जिद नहीं करेंगे तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। जिम्मेदार लोगों को इसके लिए सतर्कतापूर्वक काम करना होगा।