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पर्यटन का ‘अनदेखा रत्न’ है झारखंड, आनंद महिंद्रा ने साझा की सारंडा के जंगलों और झरनों की मनमोहक झलक

रांची महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक दिलचस्प पोस्ट शेयर करते हुए झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर अपनी सोच साझा की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या लिखा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित हिल स्टेशन : आनंद महिंद्रा आनंद महिंद्रा ने लिखा कि भारत में छुट्टियों की योजना बनाते समय आमतौर पर गोवा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे लोकप्रिय स्थानों का ही नाम सामने आता है. उन्होंने यह बताया की उनकी नजर @IndiaAesthetica द्वारा पोस्ट की गई मनमोहक तस्वीरों पर पड़ी. ये तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित मेघातुबुरु हिल स्टेशन की हैं, जिसे ऊंचाई के कारण “बादलों की पहाड़ी” के नाम से जाना जाता है. करीब 4,300 फीट की ऊंचाई पर बसा यह स्थान सरंडा वन के बीच स्थित है, जो 700 पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां से सूर्यास्त का नजारा, जंगल के झरने और प्राकृतिक दृश्य काफी आकर्षक हैं और यह इलाका अभी भी काफी हद तक अछूता है.      झारखंड में और भी कई खास जगहें उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि झारखंड में पर्यटन सुविधाएं बहुत सीमित हैं – बहुत कम रिसॉर्ट और ज्यादातर गेस्टहाउस है. आनंद महिंद्रा ने झारखंड के बारे में और जानकारी जुटाई तो पता चला कि यहां नेतरहाट के प्रसिद्ध सूर्योदय, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, देवघर का पवित्र ज्योतिर्लिंग, रांची के आसपास के जलप्रपात और प्राचीन सारंडा जंगल मौजूद हैं. फिर भी यह जगह अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. झारखंड में समझदार यात्रियों के लिए बहुत कुछ है. बस अब तक इसका खुलकर प्रचार नहीं किया है.

मिशन ‘प्रगति यात्रा’, मुख्यमंत्री आज वाल्मीकि नगर में करेंगे गंडक नहर और लव-कुश पार्क का निरीक्षण, पर्यटन को लगेंगे पंख

 वाल्मीकि नगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी रविवार को वाल्मीकि नगर के दौरे पर आ रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर पूरे इलाके में जबरदस्त हलचल है। माना जा रहा है कि सीएम आज उत्तर बिहार के इस अहम पर्यटन केंद्र को करोड़ों रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण वाल्मीकि नगर हवाई अड्डे के विस्तार का शिलान्यास हो सकता है, जिससे अब बड़े विमानों की उड़ान का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हवाई अड्डे के लिए 38.64 करोड़ का प्लान सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 38.64 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध जमीन के अलावा करीब 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण होना है। जैसे ही जमीन की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य में तेजी आएगी। इससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए वाल्मीकि नगर पहुंचना और भी आसान हो जाएगा। 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे CM तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे और सीधे वाल्मीकि नगर पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर वे 'मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा' के तहत दोन नहर सेवा पथ के बहाली कार्यों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही गंडक नहर शाखा के निरीक्षण का भी प्रोग्राम है। इसके अलावा वे लव-कुश पार्क का निरीक्षण करेंगे और वाल्मीकि नगर सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सीएम इको टूरिज्म पार्क और गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे। क्या बगहा बनेगा नया राजस्व जिला? सीएम के आगमन के साथ ही बगहा को 'राजस्व जिला' बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले सीएम इस पर कोई बड़ा संकेत दे सकते हैं। फिलहाल, शनिवार को ही डीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हवाई अड्डे और कन्वेंशन सेंटर का बारीकी से निरीक्षण कर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी, नीतीश सरकार ने पुलिस के लिए नए हथियारों और गोला-बारूद के प्रस्ताव को दी मंजूरी

पटना बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार पुलिस अब अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने जा रही है। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें करीब 43.42 करोड़ रुपये की लागत से नए हथियार और ट्रेनिंग के लिए गोला-बारूद खरीदने की बात कही गई है। 9mm की पिस्टल से लैस होंगे जवान इस बड़ी खरीद में सबसे खास है '(9mm) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल'। गृह विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित राइफल फैक्ट्री से इन पिस्टलों की सप्लाई होगी। पुलिस इसे दो चरणों में खरीदेगी। पहले चरण में 2,500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1,500 पिस्टल ली जाएंगी। सिर्फ इन पिस्टलों की खरीद पर ही करीब 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। ट्रेनिंग के लिए आएंगी 1.20 लाख विशेष गोलियां बिहार पुलिस ने प्रैक्टिस के लिए 1.20 लाख ब्लैंक गोलियां खरीदने का फैसला किया है। इन गोलियों का इस्तेमाल ट्रेनिंग के दौरान किया जाएगा। पुणे की खड़की फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां और महाराष्ट्र के जलगांव फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां आएंगी। इन विशेष गोलियों पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बिहार पुलिस इन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सीधे देश की प्रतिष्ठित फैक्ट्रियों से करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों को चुना गया है। गृह विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब खरीद की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

स्टेट बार काउंसिल मतगणना अपडेट, चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने शिकायतों को बताया निराधार

रांची झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव की मतगणना 20 मार्च से लगातार जारी है. शुक्रवार यानी 3 अप्रैल को लगभग सभी जिला बार संघों में हुए मतदान के प्रथम प्राथमिकता के वोटों की गिनती पूरी कर ली गई है. हालांकि इन वोटों की जांच में दो दिन का समय लगेगा, जिसके बाद द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाएगी. गड़बड़ी के आरोपों को किया गया खारिज चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. गजेंद्र कुमार, अजय कुमार, नेहा ठाकुर और अनामिका शर्मा द्वारा उठाए गए आरोपों को निराधार बताया गया. उन्होंने कहा कि शिकायतें चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली थीं और इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए मामला स्टेट बार काउंसिल को भेज दिया गया है. जांच में नहीं मिली कोई अनियमितता इस मामले की जांच सहायक रिटर्निंग ऑफिसर व सेवानिवृत्त जिला जज शिवनारायण सिंह को सौंपी गई थी. उन्होंने मतदान केंद्र के रजिस्टर, कुल मतदान और बैलेट पेपर लेने के समय किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया. जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके आधार पर सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया. अजय कुमार के दावे पर भी नहीं मिला प्रमाण अजय कुमार ने एक भी वोट नहीं मिलने का मामला उठाते हुए कहा था कि उनके भतीजे ने उन्हें एक वोट दिया था, लेकिन जब इसकी जांच के लिए भतीजा का नाम मांगा गया, तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया.

प्रशासनिक सुधार की ओर बढ़े कदम, कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन ट्रेनिंग लेंगे झारखंड के कर्मचारी

 रांची झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अनूठी पहल करते हुए ‘साधना सप्ताह’ की शुरुआत की है. यह कार्यक्रम 2 अप्रैल 2026 से 8 अप्रैल 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जा रहा है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के कौशल और कार्यक्षमता को बढ़ाना है. क्षमता विकास और निरंतर सीखने पर जोर साधना सप्ताह का मुख्य उद्देश्य सरकारी पदाधिकारियों और कर्मचारियों में निरंतर सीखने की आदत विकसित करना और उनकी कार्यक्षमता को मजबूत करना है. सरकार चाहती है कि कर्मचारी बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखें और आधुनिक तकनीकों व प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमता का विकास करें. इससे शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा. आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम इस कार्यक्रम के तहत सभी सरकारी कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है. यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है. कर्मचारियों को उनके कार्य क्षेत्र से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण लेकर अपनी दक्षता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है. पाठ्यक्रमों में आधुनिक विषय शामिल साधना सप्ताह के दौरान जिन विषयों पर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से आधुनिक और जरूरत आधारित हैं. इनमें इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का परिचय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल बातें, गवर्नेंस सस्टेनेबिलिटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड बिगिनर और कार्यस्थल पर योग जैसे विषय शामिल हैं. इन पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग तय की गई है, ताकि कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें पूरा कर सकें. विभागीय स्तर पर समिति का गठन कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक विभाग और कार्यालय में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है. यह समिति संयुक्त सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी, जिसमें 3 से 4 पदाधिकारी शामिल होंगे. समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह साधना सप्ताह के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित करे. वेबिनार और चर्चा सत्र होंगे आयोजित साधना सप्ताह के दौरान केवल ऑनलाइन पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि समूह चर्चा, वेबिनार और पैनल चर्चा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इन सत्रों में समकालीन प्रशासनिक चुनौतियों, नीतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों (बेरूट प्रैक्टिसेज) पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इससे कर्मचारियों को व्यावहारिक अनुभव और नई सोच विकसित करने का अवसर मिलेगा. विभागाध्यक्षों को दी गई विशेष जिम्मेदारी राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करें. साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि इस कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक कार्यवाही समय पर पूरी हो. इससे साधना सप्ताह का उद्देश्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके. प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम साधना सप्ताह को झारखंड सरकार के प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यदि इस कार्यक्रम का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है, तो इससे सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. साथ ही, इससे आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है.

नक्सलियों की पुरानी ‘जन-अदालत’ वाली जगह का मंत्री ने किया निरीक्षण, बोले- विकास से ही खत्म होगा उग्रवाद

बूढ़ा पहाड़  झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शुक्रवार को उग्रवादियों का बहुचर्चित शरणस्थली बूढ़ा पहाड़ पहुंच गए. उनका यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. वित्त मंत्री दुर्गम रास्तों से होते हुए सड़क मार्ग, पैदल और बाइक के सहारे दोपहर करीब दो बजे बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित रहे इस इलाके में उनका दौरा सरकार की जमीनी सक्रियता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वित्त मंत्री ने बूढ़ा पहाड़ का लिया जायजा बूढ़ा पहाड़ पहुंचने के बाद वित्त मंत्री ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने पिकेट पर तैनात अधिकारियों और जवानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को जाना. साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया दौरे के बाद क्षेत्र में आए बदलावों की समीक्षा की. मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही क्षेत्र में उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो पाया है. इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बीडीओ, सीओ और संबंधित पंचायत के मुखिया बिंको उरांव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अब तक हुए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और ग्रामीणों की जरूरतों के बारे में विस्तृत जानकारी ली. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाय, ताकि आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके. नक्सलियों के जन-अदालत वाले स्थान का किया निरीक्षण दौरे के क्रम में वित्त मंत्री ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां कभी नक्सली नेता जन-अदालत लगाया करते थे. यह निरीक्षण क्षेत्र में बदलते हालात और शांति स्थापना की दिशा में उठाए गये कदमों का प्रतीक माना जा रहा है. स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी. सड़क, अस्पताल और स्कूल बनवाने का आश्वासन वित्त मंत्री ने कुल्ही से बूढ़ा पहाड़ तक सड़क निर्माण, हेसातु में हाई स्कूल की स्थापना और कुल्ही में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने गढ़वा के उपायुक्त को निर्देश दिया कि अगले 10 दिनों के अंदर एक विशेष बैठक आयोजित कर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की जाए और आगे की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए. नियंत्रण में है उग्रवाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि उग्रवाद अभी नियंत्रित स्थिति में है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.ऐसे में बुढ़ा पहाड़ क्षेत्र से सीआरपीएफ कैंप हटाना जल्दबाजी होगा. जब तक ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है. कुल मिलाकर, यह दौरा सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. विकास के बदौलत उग्रवाद होगा खत्म: वित्त मंत्री वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर शुक्रवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. इस दौरान उन्होंने न केवल विकास योजनाओं का जायजा लिया, बल्कि मुख्य धारा से भटके हुए उग्रवादियों को परोक्ष रूप से संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि उग्रवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया गया है. विकास के बदौलत ही उग्रवाद को समूल खत्म किया जा सकता है. इसलिए बूढ़ा पहाड़ के लोगों का विकास हो सके, इसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. केंद्र और राज्य की पुलिस ने उग्रवाद पर नियंत्रण करने में कामयाबी हासिल की है. इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. मानवीय है बूढ़ा पहाड़ का दौरा उन्होंने कहा कि बूढ़ा पहाड़ का यह दौरा राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय है. यहां आने पर उन्हें धरातल पहुंचने वाली योजनाओं के बारे में वास्तविक जानकारी मिली है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बूढ़ा पहाड़ के कुछ समय पहले दौरा करने के बाद ही यहां आने की इच्छा थी. हालांकि, 21 वर्ष पहले वह यहां आ चुके थे. उन्होंने कहा कि यहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तो पहुंचाया गया है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ अभी नहीं मिल सका है. यहां के लोग अभी भी सड़क ,बिजली, शौचालय, हाई स्कूल आदि की आस लगाए बैठे हैं. इसके लिए प्रयास किया जाएगा कि यहां समुचित विकास हो सके. इसके गढ़वा और पलामू डीसी को स्थिति से अवगत कराया जाएगा. मंईयां सम्मान योजना का मिल रहा लाभ उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही पेयजल और स्वच्छता विभाग, आपूर्ति विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के साथ बैठकर बूढ़ा पहाड़ के लिए योजनाओं के पैकेज के लिए समीक्षा करेंगे. यहां एक किलोमीटर तक आरसीसी सड़क बनाया जाना बेहद जरूरी है. यहां विकास की गति को तेज किया जाएगा. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मंईयां सम्मान योजना का लाभ यहां के लोगों को मिला है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके क्रय शक्ति को बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उग्रवाद कभी स्वीकार्य नहीं उन्होंने कहा कि मैं पलामू के छतरपुर इलाके से रहा हूं. इसलिए मैंने उग्रवाद को करीब से देखा है. मैं बूढ़ा पहाड़ से उग्रवादियों को को संदेश देना चाहता हूं कि जो गलत निर्णय लिया है, उसे भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देकर कुछ पैसे की वसूली से आत्मनिर्भर नहीं बना जा सकता है. इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था जरूरी है. इसलिए उग्रवादी विचारधारा को खत्म कर भारतीय लोकतंत्र के मुख्य धारा से जुड़ें.

पटना समेत इन शहरों के यात्रियों के लिए खुशखबरी, ऑनलाइन टिकट और मंथली पास के साथ मिलेंगी हाई-टेक बसें

पटना बिहार में लोगों की यात्रा आसान, तेज और सुरक्षित हो, इसके लिए परिवहन विभाग ने एक और निर्णय लिया है. राज्य में नई 340 एसी यात्री बसें चलाई जायेंगी. इसको लेकर परिवहन विभाग ने योजना बनाई है. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, बसों में सभी सुविधाएं रहेंगी और यह सभी बस इलेक्ट्रिक या सीएनजी की होंगी. जून से पीपीपी मोड में इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस जिले में चलेंगी सबसे ज्यादा बसें परिवहन विभाग ने पटना में सबसे ज्यादा 31 बसों को चलाने का निर्णय लिया है. जबकि बाकी शहरों में वहां की आबादी और एरिया को देखते हुए बसों का परिचालन होगा, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को योजना का लाभ मिल सकें. पीपीपी मोड में बसों का परिचालन फेज वाइज किया जाएगा. पहले फेज में पटना, गया, भागलपुर, राजगीर, नालंदा में परिचालन होगा. उसके बाद धीरे-धीरे बाकी जिलों में परिचालन होगा. दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व पटना नगर निगम की ओर से बसों का परिचालन पहले से हो रहा है, लेकिन उन बसों में भीड़ अधिक होने से यात्रियों को परेशानी होती है. इन बसों को भी दुरुस्त किया जाएगा, ताकि बसों में सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत नहीं हो. खास बात यह भी होगी कि बसों के परिचालन शुरू होते ही इन बसों में दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व की जायेंगी. ऑनलाइन टिकट के साथ मंथली पास की भी सुविधा शहरी इलाकों में परिचालन के लिए मंथली पास बनाने की सुविधा दी जायेगी और ऑनलाइन टिकट काटने की भी लोगों को सुविधा मिलेगी. साथ ही बसों के रूट के हिसाब से नंबर का निर्धारण किया जाएगा, जिसका डिस्पले ठहराव के पास होगा, ताकि यात्रियों को बस पकड़ने में दिक्कत नहीं हो और वह उसी स्टॉप पर रूकें. जहां उस बस का ठहराव होगा.

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल सफर होगा आसान, दानापुर-सोनपुर मंडल को बड़ी सौगात

 पटना मोकामा में गंगा नदी पर बन रहे नए रेल पुल का इंतजार अब खत्म होने वाला है. रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, यह पुल लगभग तैयार है और जून के महीने में इस पर ट्रेनें दौड़ने लगेंगी. शुक्रवार को पटना के पाटलिपुत्र रेल परिसर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मध्य रेल के जीएम छत्रसाल सिंह ने बताया कि यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क को एक नई मजबूती देगा. आना-जाना हो जाएगा बहुत आसान अभी तक पुराने राजेंद्र पुल पर ट्रेनों का बहुत ज्यादा लोड रहता था, जिससे गाड़ियां अक्सर लेट हो जाती थीं. नया पुल शुरू होने से दानापुर और सोनपुर रेल मंडलों के बीच ट्रेनों का आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि झाझा और पटना की तरफ रेल ओवर रेल (ROR) बनाया गया है. इसका फायदा यह होगा कि मेन लाइन की गाड़ियों को रोके बिना पैसेंजर और मालगाड़ियां आराम से गुजर सकेंगी. चौथी रेल लाइन बिछाने की भी तैयारी जीएम ने इसे भविष्य के लिए गेम चेंजर बताया है. इसके अलावा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन से झाझा के बीच 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की भी तैयारी है. इसी योजना के तहत कोइलवर में सोन नदी पर एक नया रेल पुल बनाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है. काम को तेजी से पूरा करने के लिए पूरे रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों जैसे दानापुर-फतुहा और बख्तियारपुर-किऊल में बांटा गया है. आने वाले समय में बिहार में रेल सफर न सिर्फ तेज होगा, बल्कि यात्रियों को जाम और वेटिंग से भी निजात मिलेगी.

गर्मी के साथ बिहार में गहराया जल संकट, 21 जिलों में तेजी से गिरा भूजल स्तर

 जयपुर बिहार में अगले दो से तीन दिनों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. लेकिन इसके बाद गिरावट हो सकती है. मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, बिहार के अधिकांश इलाकों में रविवार तक गर्मी अधिक महसूस होगी और रात का तापमान बढ़ा रहेगा. दिन में तेज धूप के साथ हल्की धूल भरी हवा भी कहीं-कहीं चलने की संभावना है. 6 अप्रैल को मौसम लेगा यू-टर्न मौसम विभाग की माने तो, 6 अप्रैल से मौसम यू-टर्न लेगा और तेज आंधी बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, 6 अप्रैल को बक्सर, भोजपुर, अरवल, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, पटना, बेगूसराय, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, गया और नवादा जिले में येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में तेज बारिश, ठनका गिरने और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की भी संभावना जताई गई है. 6 अप्रैल के बाद तीन से चार दिनों तक बिहार में मौसम का मिजाज इसी तरह का बना हुआ रहेगा. पिछले 24 घंटे में कैसा रहा मौसम? बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम आमतौर पर शुष्क बना रहा. सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस डेहरी (रोहतास), शेखपुरा और कैमूर (भभुआ) में दर्ज किया गया. राज्य का अधिकतम तापमान 30.3 से 38.4 डिग्री के बीच रहा. पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकांश जगहों पर अधिकतम तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सबसे कम न्यूनतम तापमान 18.4 डिग्री सुखेत (मधुबनी) में दर्ज किया गया. राज्य का न्यूनतम तापमान 18.4 से 26.6 डिग्री के बीच रहा. साथ ही पिछले 24 घंटों में बिहार के अनेक जगहों के न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव दर्ज नहीं किया गया. अप्रैल में ही गिर रहा भूजल स्तर बिहार में अचानक से बढ़ी गर्मी के कारण लगभग 21 जिलों के भूजल नीचे जाने लगा है. अप्रैल महीने की शुरूआत में ही राज्य में 126 ऐसी पंचायतें हैं, जहां दो से पांच फुट तक गिरावट दर्ज की गई है. पीएचईडी से मिली जानकारी के मुताबिक पटना, बिहारशरीफ, गया, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, भभुआ, जमुई, भागलपुर पूर्व और पश्चिम, बांका, सीतामढ़ी, दरभंगा, भोजपुर, गोपालगंज, मधुबनी, सहरसा, जहानाबाद, शेखपुरा, लखीसराय, खगड़िया, समस्तीपुर में भूजल में गिरावट मार्च से ही शुरू हो गई है. विभाग ने इन जिलों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है. साथ ही 11 अप्रैल को पटना में भूजल को स्थिर रखने और भूजल में हो रही गिरावट को लेकर बैठक बुलाई गई है.

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को मिलेगी बड़ी मदद, 5 चरणों में मिलेंगे 2 लाख रुपये

पटना बिहार में अप्रैल महीने के अंत तक जीविका दीदियों के खाते में 20-20 हजार रुपए ट्रांसफर किए जा सकते हैं. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को दूसरी किस्त देने की तैयारी की गई है. अब तक लगभग 19 लाख जीविका दीदियों ने आवेदन किया है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को इंडिपेंडेंट बनाने की पहल बिहार सरकार की ओर से की गई. पहले जीविका दीदियों को 10-10 हजार रुपए सहायता राशि दी गई. अब उन्हें 20-20 हजार रुपए दिए जाने की तैयारी की जा रही है. यह दूसरी किस्त के रूप में जीविका दीदियों को दी जायेगी. अप्रैल के अंत तक मिल सकती है राशि संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल महीने के अंत तक ही जीविका दीदियों के खाते में यह अमाउंट ट्रांसफर कर दिया जा सकता है. जीविका दीदियों की ओर से विकसित किए गए ऐप के जरिए ही चयन प्रक्रिया शुरू की गई है. जानकारी के मुताबिक, अब तक जिन महिलाओं ने अपना रोजगार शुरू किया है, उन्हें प्रायोरिटी लिस्ट में प्रीफरेंस देने का प्रावधान किया गया है. सिर्फ इन जीविका दीदियों को मिलेंगे 20-20 हजार पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपए दिए जाने के बाद कितनी महिलाओं ने अपना रोजगार शुरू किया, इसकी पहले मैपिंग की जाएगी. इसी दौरान महिलाओं को चिह्नित किया जाएगा और उन जीविका दीदियों को 20-20 हजार रुपए दिए जायेंगे. इसमें खुद के 5 हजार रुपए और लगाकर जीविका दीदियां रोजगार को बढ़ा सकतीं हैं. अब तक इस योजना के तहत लगभग 1.81 करोड़ महिलाओं को दस-दस हजार रुपए दिए गए हैं. 5 फेज में कितनी-कितनी राशि होंगे ट्रांसफर जानकारी के मुताबिक, जीविका दीदियों को 5 फेज में 2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी. दूसरी में किस्त में 20 हजार, तीसरी में 40 हजार, चौथी में 80 हजार और पांचवीं में 60 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. इसके साथ ही हर फेज में जीविका दीदियों को दी गई राशि कहां-कहां खर्च की गई, इसके बारे में जानकारी देनी पड़ेगी. सत्यापन होने के बाद ही अगले फेज की राशि उन्हें दी जाएगी.