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रामनवमी पर बदल जाता है हजारीबाग का रंग, चौक-चौराहों के नाम भी हो जाते हैं खास

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग में मनाई जाने वाली रामनवमी पूरे देश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां इस पर्व के दौरान पूरे शहर का रूप ही बदल जाता है, जिससे यह अयोध्या की झलक देता है। जिले में रामनवमी का त्योहार बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के अलग-अलग मोहल्लों, चौक-चौराहों और सड़कों के नाम बदल दिए जाते हैं। इन जगहों को नए धार्मिक नाम दिए जाते हैं, जो अयोध्या के स्थानों से प्रेरित होते हैं। रामनवमी के समय शहर के कई प्रमुख चौक नए नामों से जाने जाते हैं। जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक को भारतगढ़, झंडा चौक को दशरथगढ़, पंच मंदिर चौक को कृष्णगढ़, गोल चौक को अभिमन्युगढ़, ग्वालटोली चौक को नारायणगढ़ और सुभाष मार्ग को अंगदगढ़ कहा जाता है। इन नए नामों के बोर्ड भी लगाए जाते हैं। खास बात यह है कि रामनवमी जुलूस के दौरान लोग इन जगहों को उनके पुराने नाम से नहीं, बल्कि इन्हीं नए धार्मिक नामों से पुकारते हैं। इससे पूरा शहर एक धार्मिक माहौल में बदल जाता है। यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 100 साल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारीबाग के राम भक्त इस शहर को अयोध्या के रूप में देखते हैं। इसी वजह से यहां के चौक-चौराहों का नाम अयोध्या की तर्ज पर रखा जाता है। रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं और भव्य जुलूस निकालते हैं। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रामनवमी महासमिति और अन्य समितियों की होती है, जो हर साल इसे और भव्य बनाने का काम करती हैं। आज भी यह परंपरा उतनी ही जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है। नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यही वजह है कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में एक अलग पहचान रखती है।  

जदयू में हलचल: Nitish Kumar ने सांसद Girdhari Yadav पर की कार्रवाई

पटना जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी ने बांका से सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ कथित दल-विरोधी गतिविधियों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता का नोटिस सौंपा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियां की हैं। चुनाव के वक्त पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल रहे। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने कहा कि जब मुझसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में पूछा जाएगा, तब मैं अपना जवाब दूंगा। मुझे नहीं पता कि दिलेश्वर कामत ने क्या कहा है। मेरे खिलाफ किसी भी तरह की दल-विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के वक्त गिरधारी यादव का बेटा चाणक्य प्रकाश राजद में शामिल हो गए। उन्होंने बेलहर सीट से जदयू प्रत्याशी और विधायक मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसमें चाणक्य की हार हुई थी। इसके बाद से ही गिरधारी यादव पर सवाल उठने लगे थे। ललन बोले- यह फैसला हमने नहीं लिया इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा कि यह फैसला हमने नहीं लिया है। यह निर्णय उन लोगों की ओर से लिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे को विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर उतारा और खुद उसके लिए प्रचार भी किया। इसी आधार पर हमारे संसदीय नेता दिलेश्वर कामैत ने आवेदन दिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को लेना है। राजद सांसद ने उठाया सवाल राजद सांसद मीसा भारती ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरधारी यादव जदयू के सांसद हैं। अगर उनके बेटे ने चुनाव लड़ा है, तो वह वयस्क है और अपने फैसले खुद ले सकता है। ऐसे में इस आधार पर कार्रवाई करना सही नहीं है। अब देखना होगा कि आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

रहस्य से भरा बिहार का यह मेला, यूपी-बंगाल-नेपाल से खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में शारदीय नवरात्र के अवसर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो आधुनिक युग में भी प्राचीन मान्यताओं और गहरे अंधविश्वास की याद दिलाता है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित लक्षवार गांव का लक्षवार धाम इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे स्थानीय लोग प्रेतबाधा से मुक्ति का धाम मानते हैं, जहां नवरात्र के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कई राज्यों तक फैला है प्रभाव लक्षवार धाम की प्रसिद्धि केवल बिहार तक सीमित नहीं है। यहां उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में लगभग एक महीने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी के स्पर्श मात्र से शरीर के भीतर मौजूद बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहां ललका बाबा द्वारा दी जाने वाली भभूत का भी विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र में दिखते हैं विचलित करने वाले दृश्य शारदीय नवरात्र के मौके पर मंदिर परिसर में कई विचलित करने वाले दृश्य देखने को मिलते हैं। कहीं महिलाएं जोर-जोर से सिर हिलाती नजर आती हैं, तो कहीं पुरुष जमीन पर लोटकर अजीबोगरीब हरकतें करते दिखते हैं। अंधविश्वास का आलम यह है कि यहां आने वाले लोग इन गतिविधियों को इंसानी रूप में मौजूद भूत-प्रेत मानते हैं। पीड़ा से मुक्ति पाने की चाह में लोग मर्यादा और लोक-लाज की परवाह किए बिना घंटों तक इन क्रियाओं में लीन रहते हैं। शक्तिपीठ से शिवधाम तक का सफर मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस परंपरा की जड़ें दशकों पुरानी हैं। वर्ष 1972 में माता के आदेश पर लक्षवार शक्तिपीठ से पिंड का कुछ अंश लाकर कुचायकोट के जलालपुर बाजार में शिवधाम की स्थापना की गई थी। इसके बाद से ही यहां तांत्रिकों द्वारा भूत-प्रेत भगाने और मानसिक रोगों के उपचार का दावा करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज एक विशाल मेले का रूप ले चुका है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं, वहीं चिकित्सा जगत इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या और सामाजिक धारणा के रूप में देखता है।

झारखंड में रामनवमी की छुट्टी में बदलाव, जानें अब कब मिलेगी छुट्टी

रांची झारखंड में शुक्रवार यानी 27 मार्च को रामनवमी का त्यौहार मनाया जा रहा है। रामनवमी के पर्व को लेकर झारखंड सरकार ने छुट्टी की तारीख में बदलाव किया है। पहले घोषित तारीख में संशोधन करते हुए अब नई तिथि तय की गई है। 27 मार्च को रामनवमी का अवकाश घोषित राज्य सरकार ने रामनवमी की छुट्टी को 26 मार्च से बदलकर अब 27 मार्च कर दिया है। पहले जारी सरकारी सूची में 26 मार्च को रामनवमी के मौके पर एनआईए एक्ट के तहत अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन इस साल रामनवमी 27 मार्च को पड़ रही है। इसी दिन रांची समेत राज्य के कई शहरों और क्षेत्रों में शोभा यात्रा भी निकाली जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने छुट्टी की तारीख में बदलाव करते हुए 27 मार्च को रामनवमी का अवकाश घोषित किया है।  

पेंशन में देरी खत्म! बिहार सरकार का बड़ा फैसला, रिटायर्ड कर्मचारियों को समय पर भुगतान

पटना. बिहार सरकार ने सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए अब नए नियम बनाए हैं। विभागों को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिक के पेंशन फॉर्म के साथ एक चेक लिस्ट बनानी होगी और इसके बाद इसे महालेखाकार (एजी) कार्यालय को भेजना होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार की जानकारी में यह बात लाई गई थी कि महालेखाकार कार्यालय को अक्सर अधूरे या गलत भरे हुए पेंशन फॉर्म भेजे जाते हैं। जिसे मजबूरी में महालेखाकर को सरकार को वापस कर देना पड़ता है। इस वजह से कर्मचारियों को पेंशन और अन्य सेवांत लाभ मिलने में अनावश्यक देरी होती है। जिसके बाद अब सरकार ने समस्या दूर करने के लिए एक जांच सूची (चेक लिस्ट) तैयार की गई है। सरकार लेकर आई नया नियम अब हर विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पेंशन फॉर्म पूरी तरह सही और पूरा भरा हो। इस जांच सूची को भरकर पेंशन फॉर्म के साथ अनिवार्य रूप से भेजना होगा। सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और कोषागार अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के लिए जरूरी निर्देश दें। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिहार सचिवालय सेवा नियमावली, 2010 के अनुसार जिस विभाग में कर्मचारी कार्यरत हैं, वही विभाग उसके रिटायरमेंट से जुड़े सभी लाभों के लिए जिम्मेदार होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से पेंशन में होने वाली देरी खत्म होगी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर उनका हक मिल सकेगा।

कैदियों की सुविधाएं बढ़ेंगी: झारखंड सरकार का 120 करोड़ का जेल सुधार प्लान

रांची. झारखंड में जेल सुधार को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है। आगामी वित्तीय वर्ष में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे, जिनमें नई जेलों का निर्माण, मौजूदा जेलों की मरम्मत और सुरक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल है। सरकार ने इसके लिए योजना मद में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार देवघर, लातेहार, गोड्डा, पाकुड़ और चतरा में नई जेलों के निर्माण हेतु इस वर्ष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करेगी। उद्देश्य यह है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ कर बढ़ती कैदी संख्या के दबाव को कम किया जा सके। वर्तमान में कई जेलें अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक बंदियों को रखने के कारण भीड़भाड़ की समस्या से जूझ रही हैं। इसे देखते हुए अतिरिक्त वार्डों के निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है। मौजूदा जेलों का हो रहा विकास मौजूदा जेलों में मरम्मत कार्य, चारदीवारी निर्माण, नए बंदी वार्ड, शौचालय और रसोईघर जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। साथ ही जेलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए भी कदम उठाए जाने प्रस्तावित हैं। जेल आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत इंटरेक्टिव एलईडी डिस्प्ले, प्रोजेक्टर और कंप्यूटर सिस्टम लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल एक्स-रे मशीन, ईसीजी मशीन, हाइड्रोलिक बेड और स्ट्रेचर जैसे उपकरणों की खरीद की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक वार्ड बैरियर, गार्ड मानिटरिंग सिस्टम, आधुनिक लाकिंग सिस्टम, एक्सेस कंट्रोल और बायोमीट्रिक समाधान लागू किए जाएंगे। इसके अलावा मेटल डिटेक्टर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर और नॉन-लिनियर जंक्शन डिटेक्टर भी खरीदे जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुधार कार्य जेल सुधार की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 18 मई तक जेलों की अद्यतन रिपोर्ट मांगी है, जिसमें एक मार्च 2026 तक की स्थिति का विवरण देना अनिवार्य किया गया है। इस रिपोर्ट में जेलों की क्षमता, बंदियों की संख्या, भीड़भाड़ रोकने के उपाय, महिला कैदियों और उनके बच्चों के लिए सुविधाएं, तथा जेल कर्मियों की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी। कर्मचारियों की भारी कमी बनी चुनौती राज्य की जेल व्यवस्था में मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुरुष कक्षपाल के 1699 स्वीकृत पदों में से 1653 पद रिक्त हैं और मात्र 46 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसी तरह महिला कक्षपाल के 104 स्वीकृत पदों में केवल 24 कार्यरत हैं, जबकि 80 पद खाली हैं। उच्च कक्षपाल के 244 पदों में से 32 रिक्त हैं और मुख्य उच्च कक्षपाल के तीन पदों में एक पद खाली है। विभिन्न श्रेणियों में कुल 1912 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव फिलहाल सरकार के स्तर पर लंबित है।

बिहार को मिलेगी नई सौगात, पटना-बक्सर मरीन ड्राइव विस्तार की घोषणा

बक्सर. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने कहा कि बक्सर की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक भूमि अब विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। ''समृद्धि यात्रा'' के तहत स्थानीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए कहा कि पटना से कोईलवर तक मरीन ड्राइव बनाने का काम शुरू हो चुका है। इसे कोईलवर से बक्सर तक विस्तार दिया जाएगा। सड़कों में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब लोग पटना से बक्सर जाने में 5 घंटे का समय और ट्रेन के सफर पर निर्भर रहते थे। आज डबल इंजन की सरकार के कारण यह दूरी मात्र डेढ़ से दो घंटे की रह गई है। उन्होंने कहा कि बक्सर-चौसा सड़क को फोरलेन बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। साथ ही, 2024 के केंद्रीय बजट का उल्लेख करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के आग्रह पर बक्सर में गंगा नदी पर फोरलेन पुल का निर्माण किया जा रहा है। अब मेड इन बक्सर कोल्ड ड्रिंक पिएंगे युवा रोजगार और निवेश पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि बक्सर अब औद्योगिक रूप से सक्षम हो रहा है। उन्होंने कहा, अभी हमने सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास और उद्घाटन देखा है। जल्द ही बक्सर और डुमरांव बेवरेज यानी पेप्सी और कोका-कोला के बड़े केंद्र बनेंगे। अब यहां के युवा ''मेड इन यूएसए'' नहीं, बल्कि बक्सर में बनी कोल्ड ड्रिंक्स पिएंगे। उन्होंने दावा किया कि यह देश में सबसे अधिक मात्रा में बेवरेज का उत्पादन करने वाली इकाई है। सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों को रोजगार देकर पलायन रोकना है। मुख्यमंत्री ने यह तय किया है कि मजदूरी के लिए अब किसी को बिहार से बाहर नहीं जाना होगा। उन्हें स्थानीय तौर पर ही काम मिलेगा। सड़क और बिजली सुविधाओं में अभूतपूर्व विस्तार उपमुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए विकास का खाका पेश किया। कहा कि एनडीए की सरकार बनने के बाद बिहार का बजट 6,000 करोड़ से बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह बिजली के क्षेत्र में 2005 के 17 लाख कनेक्शन के मुकाबले आज 2.16 करोड़ कनेक्शन हैं। उन्होंने बताया कि सरकार हर घर को 125 यूनिट मुफ्त बिजली और सालाना ₹12,000 की सब्सिडी दे रही है। राज्य में सड़कों का जाल 6,000 किमी से बढ़कर 40,000 किमी तक पहुंच गया है। 18 लाख छूटी हुई महिलाओं को मिलेंगे 10-10 हजार रुपए उन्होंने जीविका दीदियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि 1.60 लाख करोड़ का बाजार अब महिलाओं के हाथ में है। मुख्यमंत्री ने 1.81 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,000 रुपए की राशि भेजी है, जो बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। कुछ बहनें इसमें छूट गई हैं। एक महीने के अंदर 18 लाख छूटी हुई जीविका दीदियों को 10-10 हजार रुपए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार देगी।

नवजातों की सुरक्षा पर फोकस: झारखंड में 60 से ज्यादा NBSU खुलेंगे, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम

मेदिनी नगर/पलामू. झारखंड में शिशु मृत्यु दर अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर 1000 जीवित जन्म पर करीब 25 नवजातों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के 60 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने का फैसला किया है। इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी जैसे कारणों से अधिकांश नवजातों की मौत जीवन के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। ऐसे में यदि जन्म के तुरंत बाद ही विशेष निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनबीएसयू को अस्पतालों के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में नवजात को बिना समय गंवाए तत्काल उपचार मिल सके। इससे गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज में देरी नहीं होगी और रेफरल पर निर्भरता भी कम होगी। एमएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 10 गंभीर नवजात मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में प्रतिदिन औसतन 10 गंभीर नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित एसएनसीयू में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन कई बार मरीजों के देर से पहुंचने के कारण डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद नवजातों को बचाना मुश्किल हो जाता है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आते हैं। आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाईयां प्रस्तावित एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की विशेष व्यवस्था भी होगी, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। पलामू जिले में फिलहाल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में एनबीएसयू संचालित है, लेकिन जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन केंद्रों में एनबीएसयू कब और कहां स्थापित होंगे, इसकी स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है। गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा राज्य सरकार ने 60 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन किन केंद्रों में यह सुविधा शुरू होगी, इसका स्पष्ट विवरण अभी नहीं दिया गया है। हालांकि, इस पहल से गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। – डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: बिहार के स्टेशनों पर फ्री पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू

जमुई. गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दानापुर मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर शीतल पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। जनसंपर्क पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर टर्मिनल, दानापुर, पाटलिपुत्र जंक्शन और आरा सहित अन्य प्रमुख स्टेशनों पर सामान्य कोच यात्रियों के लिए पहले से मौजूद नलों के अलावा मुफ्त शीतल जल की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत के अनुसार ठंडे शरबत और अन्य पेय पदार्थ भी नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसमें एनजीओ, रेलवे कर्मियों और स्वयं सहायता समूहों का सहयोग लिया जाएगा। स्टाल और मशीनों का नियमित निरीक्षण यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर वेंडिंग मशीन और खानपान स्टालों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। सभी स्टाल संचालकों को अधिकृत बोतलबंद पानी का पर्याप्त भंडारण रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अन्य ब्रांडों को भी गर्मी के मौसम की मांग के अनुसार स्टॉक बनाए रखने की सलाह दी गई है। नई व्यवस्थाएं और सुझाव मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर भुगतान के आधार पर जनता मील और पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नए वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव स्वीकृति के अंतिम चरण में है। आरआरसीटीसी द्वारा रेल नीर सेवा पूरी तरह से तैयार रखी गई है। यात्रियों से गर्मी में पर्याप्त पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन करने, धूप से बचने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करने की अपील की गई है। डिजिटल सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा लंबी कतारों से बचने के लिए रेल आनलाइन ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट बुकिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दोपहर की भीषण गर्मी से राहत के लिए प्रमुख स्टेशनों पर वातानुकूलित प्रतीक्षालय उपलब्ध हैं। पटना जंक्शन, दानापुर, बक्सर, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, झाझा सहित कई स्टेशनों पर रेलवे स्वास्थ्य इकाइयां सक्रिय हैं। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में यात्री रेलमदद (139) या स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों से सहायता ले सकते हैं। श्रमिकों और ट्रेनिंग वाटरिंग पॉइंट माल गोदामों में कार्यरत श्रमिकों को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्तमान में पटना, पाटलिपुत्र, दानापुर और राजगीर स्टेशनों पर ट्रेन वाटरिंग प्वाइंट कार्यरत हैं, जबकि किऊल, आरा, बक्सर और बख्तियारपुर में इन्हें जल्द ही शुरू किया जाएगा।

आतंकियों के लिए बनेगी ‘काला पानी’ जैसी जेल! सम्राट चौधरी ने लोकेशन का किया खुलासा

पटना बिहार सरकार 'काला पानी' जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है। कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा। गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा। काला पानी जैसी होगी नई जेल? अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।