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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े नियम लागू

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के आचरण को और अधिक अनुशासित एवं जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में संशोधन करते हुए नई बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू कर दी है। यह नियमावली राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी और इसका विस्तार पूरे राज्य में होगा। संशोधित नियमावली के तहत सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स के उपयोग को लेकर कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। अब कोई भी सरकारी सेवक, चाहे अपने नाम से हो या छद्म नाम से, बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकेगा। कर्मचारियों को शालीन भाषा का प्रयोग करना होगा बिहार सरकार की ओर से प्रकाशित गजट में स्पष्ट कहा गया कि सरकारी ई-मेल या मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या संचालित करने के लिए प्रतिबंधित रहेगा। कोई भी कर्मचारी या अधिकारी ऐसा कोई भी कंटेंट पोस्ट नहीं करेंगे, जिससे सरकार की छवि को ठेस पहुंचे। कर्मचारियों को शालीन भाषा का प्रयोग करना होगा। भड़काऊ या अश्लील सामग्री से बचें और इसे पोस्ट न करें। बातचीत को सार्वजनिक करने पर भी रोक लगाई गई है सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया कि है कि सरकारी सेवक सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक दल, व्यक्तियों, मीडिया संस्थानों या कानूनी मामलों का समर्थन या आलोचना नहीं करेंगे। इसके अलावा, सरकारी नीतियों, योजनाओं या न्यायालयों के फैसलों पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करना भी वर्जित होगा। नियमावली के तहत गोपनीय या संवेदनशील जानकारी साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, कार्यस्थल से जुड़े वीडियो, रील्स या लाइव प्रसारण करने और किसी शिकायतकर्ता के साथ बातचीत को सार्वजनिक करने पर भी रोक लगाई गई है। अन्य माध्यमों से आय अर्जित नहीं कर सकेंगे नियम में यह भी कहा गया कि सरकारी कर्मचारी अब किसी भी प्रकार की कोचिंग, वेबिनार, लाइव प्रसारण या अन्य माध्यमों से आय अर्जित नहीं कर सकेंगे। व्यक्तिगत लाभ के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने, उत्पाद या सेवाओं के प्रचार-प्रसार में भाग लेने और अपने या परिचितों के हित साधने पर भी पाबंदी लगाई गई है। इसके अलावा, यौन उत्पीड़न पीड़ितों या किशोर अपराधियों की पहचान उजागर करने, जाति या धर्म के आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने तथा सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुचित टिप्पणी करने पर भी सख्त रोक रहेगी।

सरकारी स्कूलों में 18.34 लाख किताबें छापने की तैयारी, टेंडर प्रक्रिया शुरू

रांची  राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले कक्षा नौ के विद्यार्थियों को वर्तमान शैक्षणिक सत्र में जुलाई-अगस्त में एटलस, शब्दकोष, ग्रामर तथा सामान्य ज्ञान की पुस्तकें मिल पाएंगी इस बार विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान की दो पुस्तकें सामान्य ज्ञान-पार्ट वन तथ सामान्य ज्ञान-पार्ट टू के रूप में मिलेंगी। पुस्तकें 3,67,692 विद्यार्थियों के बीच निश्शुल्क वितरित की जाएंगी। कुल 18.34 लाख पुस्तकें छपेंगी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) ने इन पुस्तकों के प्रकाशन को लेकर मुद्रक के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत मुद्रक को कार्य आदेश जारी होने के 120 दिनों के भीतर प्रखंड स्तर पर पुस्तकें पहुंचानी होगी। वहां से प्रखंड संसाधन केंद्र द्वारा पुस्तकें स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। चयनित मुद्रक को दो प्रतिशत रायल्टी जेसीईआरटी को देनी होगी। सभी पुस्तकें 21 गुना 27 सेमी साइज में होगी। एटलस 172 पेज, शब्दकोष 660 पेज, ग्रामर 228 पेज तथा सामान्य ज्ञान की पुस्तकें प्रत्येक पुस्तक 228 पेज की होगी। निश्शुल्क वितरित होनेवाली सभी पुस्तकों पर जेसीईआरटी द्वारा निश्शुल्क वितरण के लिए प्रकाशित, क्रय-विक्रय अपराध लिख होगा। ओपन मार्केट में भी पुस्तकें बेच सकेंगे प्रकाशक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्णय के अनुसार, चयनित मुद्रक ये पुस्तकें ओपन मार्केट में भी बेच सकेंगे। इसके लिए उन्हें न केवल जेसीईआरटी से मंजूरी लेनी होगी, बल्कि दो प्रतिशत रायल्टी भी प्रदान करेगी।

झारखंड में रेल नेटवर्क होगा मजबूत, 68 किमी रूट के दोहरीकरण की तैयारी

 रांची  झारखंड के रेल विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरने वाली हैमुरी-चांडिल रूट पर ट्रेनों के लिए आने-जाने की अलग-अलग पटरियां (Double Line) बिछाने को बहुत जल्द रेलवे बोर्ड की हरी झंडी मिल सकती है. इस परियोजना के स्वीकृत होने से राज्य के रेल नेटवर्क में बहुत सुधार होगा और यातायात व्यवस्था अधिक सुगम व प्रभावी बनेगी. 800 करोड़ की लागत और 68 किमी का दायरा दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने जानकारी दी कि मुरी से चांडिल तक लगभग 68 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड के दोहरीकरण पर 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है. वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण इस रूट पर ट्रेनों के क्रॉसिंग और परिचालन में काफी समय नष्ट होता है. डबल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की आवाजाही तेज, सुरक्षित और अधिक व्यवस्थित हो जाएगी. बाइपास और ओवर रेल लाइन से मिलेगी मजबूती परियोजना के तहत सिल्ली बाइपास लाइन का निर्माण भी किया जाना है, जो रूट की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा. इसके साथ ही गुंडा विहार से चांडिल तक प्रस्तावित रेल ओवर रेल लाइन के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है. इन तकनीकी सुधारों से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों के दबाव को संतुलित करना आसान होगा. सांसद प्रदीप वर्मा का प्रयास और फंड आवंटन इस परियोजना को गति देने के लिए सांसद प्रदीप वर्मा ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर विशेष फंड आवंटन की मांग की थी. उम्मीद जताई जा रही है कि इसी माह के भीतर फंड आवंटन और प्रशासनिक स्वीकृति के सकारात्मक परिणाम सामने आ जाएंगे. अरुण जोशी ने कहा कि यह परियोजना झारखंड के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी.

डिजिटल अरेस्ट से करोड़ों की ठगी, पटना में एक्टिव गैंग

पटना पटना में औसतन हर माह करीब 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। शहर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठग गिरोह खुद को कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। ठग शेयर मार्केट में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी सहित अन्य झांसे देकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। खास बात यह भी है कि ठगी करने वाले लोग कम शिक्षित होने के बावजूद डॉक्टरों और प्रोफेसरों को शिकार बना रहे हैं। ठग अच्छे कम्युनिकेशन स्किल के कारण अपने इरादों में कामयाब हो जाते हैं। कई पेशेवर बने ठगी के शिकार पटना में हुईं ठगी की वारदातों पर नजर डालें तो पीड़ितों में से बहुत सारे डॉक्टर, प्रोफेसर, बड़े कारोबारियों के अलावा आईआईटी के छात्र तक शामिल हैं। इन उच्च शिक्षित वर्ग के लोगों को मैट्रिक और 11वीं तक शिक्षित शातिर बदमाश जाल में फंसा रहे हैं और लाखों रुपये हड़प रहे हैं। पटना की साइबर पुलिस ने जिन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया, उनमें से अधिकतर कम शिक्षित हैं। जाल में फंसाने वाला कम्युनिकेशन स्किल बताया जाता है कि कम औपरचारिक शिक्षा लेने के बावजूद ठगों के कम्युनिकेशन स्किल अच्छे होते हैं। वे हिंदी के साथ अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में भी फर्राटे से बातचीत करते हैं। उनके प्रभाव में आकर लोग उनके जाल में फंस जाते हैं। पटना में हाल ही में साइबर ठगों ने पटना यूनिवर्सिटी की रिटायर महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया और उनसे 3.07 करोड़ रुपये हड़प लिए। वे अलग-अलग झांसे देकर डॉक्टरों, अधिकारियों, कारोबारियों के साथ-साथ आईआईटी के छात्रों को भी शिकार बना चुके हैं। हर माह साइबर ठगी की 206 वारदातें साइबर पुलिस के मुताबिक पटना में हर माह औसतन 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। सन 2025 में साइबर थाने में साइबर ठगी के 2602 केस दर्ज हुए थे। जारी साल में जनवरी और फरवरी में 284 केस दर्ज हुए हैं। साइबर पुलिस ने पिछले साल 139 और इस साल अब तक 35 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। कुल मामलों में से करीब 30 प्रतिशत मामलो में ठगी शेयर मार्केट में निवेश और एपीके फाइल भेजकर की गई है। पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क बताया जाता है कि, बिहार में साइबर ठग नालंदा, नवादा, शेखपुरा और जमुई के हैं। वे पटना में किराए के फ्लैटों और मकानों से गिरोह चला रहे हैं। दक्षिणी पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैला है। वे रामकृष्ण नगर, पत्रकार नगर और बेऊर इलाके को अपना ठिकाना बना रहे हैं। बीते दो सालों में 80 प्रतिशत मामलों में अपराधी इन्हीं क्षत्रों से गिरफ्तार किए गए हैं। पिछले माह साइबर पुलिस ने एक गिरोह के छह ठगों को गिरफ्तार किया था। यह सभी मैट्रिक तक शिक्षित हैं। सोशल मीडिया से सीख रहे ठगी के गुर पता चला है कि ज्यादातर ठग किशोर और युवा हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए ठगी के तरीके सीखते हैं। यू-ट्यूब और टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर साइबर ठगी को अंजाम देने के तरीके सिखाने वाले कई वीडियो उपलब्ध हैं। वे इन्हीं वीडियो से ठगी के गुर सीखते हैं। ये साइबर ठग ठगी के लिए सॉफ्टवेयर आईटी पेशेवरों की मदद से तैयार कराते हैं।

बिरसा स्टेडियम में छऊ नृत्य और लोककलाओं की भव्य प्रस्तुति, देर रात तक चला कार्यक्रम

सरायकेला  झारखंड के सरायकेला जिले के बिरसा स्टेडियम में कला संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसिय चैत्रपर्व के दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया . कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचारण संगीतमय आराधना के साथ हुआ. कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा. कार्यक्रम का शुभारंभ सरायकेला के कलाकारों द्वारा छऊ नृत्य प्रस्तुत कर किया गया. इस खास मौके पर डीसी नीतीश कुमार सिंह, एसपी मुकेश लुणायत, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी, कलाकेंद्र के सचिव सह एसडीओ अभिनव प्रकाश, बीडीओ यस्मिता सिंह, डीपीआरओ अविनाश कुमार, डीटीओ गिरजा शंकर महतो, सहित कई पदाधिकारी,संगीत नाटक अकादमी के अवार्डी ब्रजेंद्र पट्टनायक, आर्टिस्ट एसोशिएसन के अध्यक्ष भोला महांती सहित काफी संख्या में कलाकार उपस्थित थे. दूसरे दिन भी मंगलाचरण के साथ हुई छऊ नृत्य चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव के दुसरे दिन छऊ नृत्य का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया गया. इसके बाद राजकीय छऊ कलाकेंद्र के कलाकारों द्वारा सरायकेला छऊ नृत्य प्रस्तुत किया गया. ग्रामीण छऊ नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मानभूम शैली और खरसावां शैली छऊ के कलाकारों द्वारा छऊ नृत्य प्रस्तुत किया. कलाकारों ने सराईकेला छऊ के हर पार्वती नृत्य, देवदासी नृत्य, पताका नृत्य प्रस्तुत किया. महोत्सव में जीतराय हांसदा द्वारा रिंझा नृत्य प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में ओडिशा के सुप्रसिद्ध गोटीपुओ नृत्य,पश्चिम ओडिशा के आदिवासी नृत्य घुड़का,कथक नृत्य,नटुआ नृत्य सहित अन्य नृत्य प्रस्तुत कर समां बांधा. कलाकारों को किया जाएगा सम्मानित चैत्र महोत्सव का समापन 13 अप्रैल सोमवार यानी आज होगा. आंतिम दिन यानी समापन पर सरायकेला के कई कला केंद्र द्वारा रात्री जागरण करते हुए छऊ नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा. साथ ही कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा. इस संबंध में कलाकेंद्र के सचिव सह एसडीओ अभिनव प्रकाश ने बताया कि आंतिम दिन सरायकेला छऊ राजकिय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला शैली के ग्रामीण छऊ नृत्य दल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल, केदार आर्ट सेंटर, कुश कारवा छऊ नृत्य दल, ग्रामीण नृत्य में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल सहित राजकिय छऊ कला केंद्र के कलाकारों द्वारा रात भर नृत्य प्रस्तुत करते हुए रात्री जागरण किया जाएगा.  

झारखंड में बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत की जमीनी हकीकत जानेंगे मंत्री

 बूढ़ा पहाड़ झारखंड के वित्तमंत्री राधा कृष्ण किशोर आज 13 अप्रैल को गढ़वा जिले के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के गांवों में चल रही विकास योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा करेंगे. बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के गांवों में विकास योजनाओं की लेंगे जानकारी झारखंड के वित्त, वाणिज्य-कर, योजना विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर आज गढ़वा जिले के सुदूरवर्ती और कभी नक्सलियों का गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के गांवों में चल रही विकास योजनाओं की हकीकत जानेंगे. जिला प्रशासन द्वारा जारी सूचना के मुताबिक मंत्री क्षेत्र में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे. समाहरणालय में सुबह 11:30 बजे होगी समीक्षा बैठक मंत्री श्री किशोर पूर्वाह्न 11:30 बजे समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) स्थित सभागार में एक समीक्षा बैठक करेंगे. इस बैठक में बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के सभी गांवों में बुनियादी सुविधाओं जैसे- बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की उपलब्धता की बिंदुवार समीक्षा की जाएगी. बैठक में जिले के आला अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है. दोपहर 1 बजे मीडिया से करेंगे प्रेस वार्ता तय कार्यक्रम के मुताबिक विकास कार्यों की समीक्षा के पश्चात अपराह्न 1:00 बजे मंत्री राधाकृष्ण किशोर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों के साथ प्रेस वार्ता करेंगे. इस दौरान वे क्षेत्र के विकास को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और समीक्षा बैठक के निष्कर्षों पर जानकारी साझा करेंगे.

तुरकौलिया कांड का मास्टरमाइंड गाजियाबाद से ऑपरेट कर रहा था फर्जी स्प्रिट नेटवर्क

मोतिहारी बिहार के मोतिहारी जिले के तुरकौलिया शराब कांड में एसआईटी ने जहरीली स्प्रिट की सप्लाई करने वाले मुख्य आरोपी सतीश चंद्र चौधरी को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह गाजियाबाद में फर्जी स्प्रिट कंपनी संचालित कर अवैध तरीके से आपूर्ति करता था।पुलिस के अनुसार, सतीश ने ही 31 मार्च को 85 बाल्टी स्प्रिट सप्लाई की थी, जिसे शराब धंधेबाजों में बांटा गया। इस जहरीले पदार्थ के सेवन से तुरकौलिया और रघुनाथपुर थाना क्षेत्र में 10 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। कई बीमारों की आंख की रोशनी भी चली गई थी। गाजियाबाद में फर्जी नाम से चलाता था सिंडिकेट एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि गिरफ्तार सतीश चंद्र चौधरी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र स्थित सुक्रौली गांव का निवासी है। वह गाजियाबाद में एसएस नाम से स्प्रिट बनाने और सप्लाई करने वाली फर्जी कंपनी चलाता था। पूछताछ में सतीश ने स्वीकार किया है कि उसने बीते 31 मार्च को कोटवा थाना क्षेत्र के सोवईया गांव निवासी लवकुश यादव को 85 बाल्टी जहरीली स्प्रिट उपलब्ध कराई थी। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सतीश से स्प्रिट लेने के बाद लवकुश यादव ने इसे खलीफा यादव व कन्हैया यादव को बेचा। इसके बाद इन दोनों ने स्प्रिट की सप्लाई आगे नागा यादव, संजीत यादव, रुपेश यादव और जिम्बू बैंठा समेत अन्य शराब धंधेबाजों को की। इसी जहरीली स्प्रिट से बनी शराब के सेवन से रघुनाथपुर और तुरकौलिया में कोहराम मच गया। 10 की मौत, दो दर्जन बीमार, कइयों की गई आंखों की रोशनी इस कांड में अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में चंदू कुमार, प्रमोद यादव, सम्पत साह, लड्डू साह, परीक्षण मांझी, योद्धा मांझी, आलियास मियां, हरिलाल भगत, लालकिशोर राय और विनोद साह शामिल हैं। करीब दो दर्जन से अधिक लोग बीमार हुए हैं, जिनमें से लौहा ठाकुर, राहुल पासवान, टुनटुन यादव, राजेश्वर राय, राहुल साह, रमेश यादव, श्यामाकांत साहनी, अशोक यादव और नीरज कुमार का इलाज चल रहा है। कई पीड़ितों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है। वित्तीय लेनदेन के मिले अहम सुराग एसपी ने बताया कि सतीश चंद्र चौधरी से पूछताछ में वित्तीय लेनदेन के महत्वपूर्ण डिटेल मिले हैं। इस आधार पर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया गया है। मुख्य आरोपी सतीश को रविवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। फिलहाल, एसआईटी की दो टीमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही हैं ताकि इस काले धंधे से जुड़े हर व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

Sand Mining Update: बिहार में नीलामी रुकी, अब आसान होगी पर्यावरणीय क्लियरेंस प्रक्रिया

पटना. बिहार में बालू घाटों की नीलामी में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने अब तेज़ी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भू-तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पर्यावरणीय मंजूरी की जटिल प्रक्रियाओं को आसान और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि नीलामी में हो रही देरी खत्म हो सके। राज्य में कुल 463 पीले बालू घाट चिन्हित हैं, लेकिन अब तक केवल 360 घाटों की ही नीलामी पूरी हो पाई है। शेष घाट पर्यावरणीय स्वीकृतियों में उलझे हुए हैं। सीटीई-सीटीओ प्रक्रिया आसान करने का निर्देश खासकर स्थापना की सहमति (CTE) और संचालन की सहमति (CTO) की लंबी प्रक्रिया नीलामी में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। मंत्री ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी अनुमतियां तय समय सीमा के भीतर दी जाएं, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही राज्य सरकार ने केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर मंजूरी प्रक्रिया को सरल और तेज करने का आग्रह भी किया है। निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार  सरकार का मानना है कि अगर पर्यावरणीय अनुमति की प्रक्रिया सुगम होती है, तो बचे हुए घाटों की नीलामी जल्द पूरी हो जाएगी। सरकार के इस कदम से न सिर्फ राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है, बल्कि निर्माण कार्यों—खासकर सड़क, पुल और भवन निर्माण को भी नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही, बालू की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

बिहार में नई सरकार गठन की तैयारी, 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण की संभावना

पटना बिहार के लिए अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। कहा जा रहा है कि बिहार इन्हीं 48 घंटों में एक बड़े सियासी बदलाव का गवाह बनेगा। अब यह तय हो चुका है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार के नए मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से ही होंगे। यह पहला मौका होगा जब बिहार में बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री होगा। हालांकि, बिहार के नए सीएम कौन होंगे यह अभी साफ नहीं है लेकिन नए सीएम को लेकर लोगों की जिज्ञासा काफी बढ़ी हुई है। जिज्ञासा इस बात को लेकर भी है कि आखिर बिहार के नए मुख्यमंत्री शपथ कहां लेंगे। ऐसी खबरें हैं कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को पटना में स्थित लोकभवन में संभावित है। सोमवार को लोकभवन में तैयारियों जैसा माहौल भी नजर आया। डीएम भी लोकभवन पहुंचे थे। यह भी कहा जा रहा है कि डीएम एसएम त्यागराजन ने यहां राज्यपाल से मुलाकात की है और इस मुलाकात में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि 15 को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अलावा कुछ वरिष्ठ मंत्रियों का ही शपथ ग्रहण होगा। इधर पटना के ही बापू सभागार को भी खाली रखा गया है। कुछ दिनों पहले तक शपथ ग्रहण स्थल के तौर पर गांधी मैदान का भी जिक्र किया जा रहा था। हालांकि, नए मुख्यमंत्री कहां शपथ लेंगे इसे लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए विधायक दल की बैठक में लगेगी। इस बैठक से पहले सियसी गलियारे में हलचल तेज है। पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहुंचे। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजेंद्र यादव और संजय झा ने भी सीएम नीतीश से मुलाकात की है। संजय झा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। नई सरकार का गठन आराम से हो जाएगा। कहीं कोई समस्या नहीं है और सभी चीजें चल रही हैं। सीएम नीतीश कुमार खुद भी सभी चीजों को मॉनिटर कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया जा रहा है कि संजय झा के आवास पर भी जदयू के कई नेता पहुंचे। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का गठन होगा। कैबिनेट सचिवालय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, बैठक सुबह 11 बजे होगी जिसके बाद राज्य के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

झारखंड में एक्साइज कॉन्स्टेबल परीक्षा पेपर लीक, 159 उम्मीदवार गिरफ्तार

 रांची  झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले में रांची पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 159 उम्मीदवारों को गिरफ्तार कर लिया है. इनमें अन्य 5 और लोगों की गिरफ्तारी हुई है जो गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं. प्रशासन के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तामार पुलिस थाना क्षेत्र के रारगांव में परीक्षार्थी इकट्ठा हुए हैं और परीक्षा से पहले उन्हें संभावित परीक्षा प्रश्नों को याद कराया जा रहा है. इसी सूचना के बाद देर शाम छापेमारी की गई. इस कार्रवाई के दौरान, अधिकारियों ने उत्तर कुंजी सहित प्रश्न पत्रों के चार सेट बरामद किए।  शुरुआती जांच में पता चला कि बरामद किए गए कुछ प्रश्न वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं. परीक्षा के 120 प्रश्नों में से एक खुरथा भाषा का प्रश्न लीक होने की पुष्टि हुई, जबकि एक प्रश्नपत्र आंशिक रूप से मेल खाता पाया गया. हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी तक पूरे प्रश्नपत्र के लीक होने की पुष्टि करने वाला कोई पुख्ता सबूत नहीं है।  अधिकारियों ने दी जानकारी  आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार, रांची के उपायुक्त और रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये जानकारी साझा की है. जांचकर्ताओं ने कथित मुख्य साजिशकर्ता की पहचान अतुल वत्स के रूप में की है, जिसका संबंध एक धोखाधड़ी गिरोह से बताया जा रहा है और उस पर पहले भी इसी तरह के परीक्षा धोखाधड़ी मामलों में आरोप लग चुके हैं. पुलिस ने बताया कि गिरोह ने कथित तौर पर उम्मीदवारों के साथ लगभग 15 लाख रुपये के सौदा किया था. आरोपियों ने इस अभियान के तहत उम्मीदवारों से एडमिट कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट भी कथित तौर पर एकत्र किए थे।  10 से 15 लाख में होता था सौदा  जांच के दौरान ये बात सामने आई है कि आरोपी उम्मीदवारों को गैंग एजेंट की ओर से 10 से 15 लाख रुपये हर अभ्यर्थी से परीक्षा प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उस स्थान पर लेकर आया था।  होगी कड़ी कार्रवाई  झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि गिरफ्तार किए गए सभी 159 उम्मीदवारों को भविष्य में आयोग की परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया जाएगा. पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए प्रयास जारी रखे हुए है और मामले में आगे की कार्रवाई चल रही है।