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आज बसिऔड़ा, कल गुलाल: बिहार में होली मनाने की परंपरा क्यों है सबसे अलग?

पटना मथुरा के बरसाने की लट्ठमार और वृंदावन की फूलों की होली तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसे देखने देश-विदेश से लोग आया करते हैं, लेकिन होली के मामले में बिहार भी पीछे नहीं है। यहां की होली भी रंग-बिरंगी है और रूप अनेक हैं। मतलब, बिहार के अलग-अलग इलाकों में होली कई अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। होली के त्योहार की शुरुआत इस बार 02 मार्च की रात होलिका दहन से हो चुकी है। आज गांव-देहात में धुरखेली जैसी परंपरा के तहत धूल-कीचड़ से होली की शुरुआत हो चुकी है। इस एक स्टोरी में जानिए, होलिका दहन और होली से बिहार में कहां-कैसे संस्कृति को जिंदा रखे हुए है। इसके साथ ही फगुआ या फाग कैसे रंग जमाता है, वह भी पढ़िए। होलिका दहन के पहले गांवों में गोइठा मांगने की रही है परंपरा बिहार के गांवों में होली के आगमन के पहले होलिका दहन करने के लिए घर-घर से चंदा के रूप में गोइठा मांगने की प्राचीन परंपरा रही है। इस परंपरा के तहत युवाओं, खासकर बच्चों की टोली अपने-अपने गांव में बोरियां लेकर घूमती और हर घर जाकर चंदा के रूप में गोइठा मांगती रही है। इस दौरान बच्चे और युवा, "अगजा गोसाईं गोड़ लागे ली, घूम-घूम के गोइठवां मांगे ली" का यह गीत गाते गांव में फिरते हैं। जैसे ही वे किसी के घर पर गोइठा मांगने पहुंचते हैं, तो उनका दूसरा गीत शुरू होता है। घर की मालकिन महिला को संबोधित करते हुए वे गाते हैं, "ए जजमानी तोरा सोने के केवाड़ी, दू (चार, पांच, दस की संख्या) गोइठा दा"। इसके बाद उस घर से गोइठा मिलने के बाद रुख अगले घर की ओर और गीत के वही बोल। यह सिलसिला होलिका दहन का दिन आने तक चलता रहता था। बच्चे और युवक चंदे में मिले गोइठों को अपने गांव में एक स्थान पर जमा करते हैं। इसके बाद जमा किए गए गोइठा होलिका दहन में जलाए जाते हैं। हालांकि, कई गांवों में होलिका दहन के लिए गोइठा मांगने की यह परंपरा अब लुप्त होती जा रही है। दरभंगा में डंफा की थाप पर होलिका दहन परिक्रमा की परंपरा दरभंगा के ग्रामीण इलाकों में डंफा (एक तरह का ढोल) की थाप पर पारंपरिक होली गीतों के गायन के साथ जलती हुई होलिका की परिक्रमा करने की समृद्ध परंपरा रही है। हालांकि, यह परंपरा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। कुछ गांवों में ही इस परंपरा का निर्वहन हो रहा है। फगुआ (फाग) गायन अब गांव से शहरों तक पहुंचा हुआ है होली के आगमन के पहले बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन से बिहार में फगुआ (फाग) गायन की समृद्ध परंपरा रही है। यह परंपरा आज भी जीवित है। इसके तहत गांवों में सार्वजनिक स्थान पर और शहरी इलाकों में देवी-देवताओं के मंदिरों के परिसर में फगुआ गाए जाते हैं। फगुआ गायन बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक चलता है। इस दौरान लोग राम-सीता, कृष्ण-राधा, शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं के होली खेलने के गीत गाते हैं। होली के दिन फाग गायन के समाप्त होने के बाद चैत्र (चैत) माह के शुरू होने के साथ ही चैता गायन शुरू होता है, जो रामनवमी तक चलता है। इस दौरान "चैत मासे लिहले जनमवा हो रामा चैत मासे…" आदि पारंपरिक लोकगीत उमंग के साथ गाए जाते हैं। बिहार में होली के साथ कुछ गंदी परंपराएं भी चली आ रही हैं। इनमें हंड़िया टांगने और कीचड़ वाली होली शामिल है। हंड़िया टांगने वाली परंपरा पूरी तरह शरारत से भरी है। इस परंपरा में गांवों में शरारती किस्म के युवक मिट्टी की हांडी की गर्दन में रस्सी बांधते हैं और हांडी में मल-मूत्र, गंदगी या कीचड़ भर कर रात में किसी घर के मुख्य दरवाजे पर टांग देते हैं। साथ ही दरवाजे पर कीचड़, गंदगी या मल-मूत्र बिखेर देते हैं। यहां तक कि किसी छोटे जानवर का मृत शरीर भी घर के दरवाजे पर टांग देते हैं। सुबह होते ही घर का मालिक या परिवार का कोई सदस्य जैसे ही दरवाजा खोलता है, वह हंड़िया से टकरा जाता है और सारी गंदगी उस पर गिर जाती है तथा पैर भी दरवाजे पर गिराई गई गंदगी से सन जाते हैं। स्वाभाविक है कि ऐसा जिस घर के साथ होगा, उस घर के लोग ऐसा करने वालों को गालियां देंगे; और ऐसा करने वाले लोग भी उसी टोले-मुहल्ले के होते हैं, जो गालियां सुनकर खुद मजे लेते हैं तथा उन्हें और गाली देने के लिए प्रेरित भी किया करते हैं। गांवों में शरारती किस्म के युवक हंड़िया टांगने वाला काम बहुधा उन्हीं घरों पर करते हैं, जिस घर के लोग चिढ़ने और गुस्सा करने वाले होते हैं। होली की दूसरी गंदी और गलत परंपरा कीचड़ तथा गंदगी वाली होली है। इस होली में लोग नाली के कीचड़, गोबर, मिट्टी, मल-मूत्र से होली खेलते हैं। इस तरह की होली झगड़े का भी सबब बन जाती है। सुखद बात यह है कि सभ्यता के विकास के दौर में होली से जुड़ी ये गलत परंपराएं अब समाप्त हो रही हैं।

एम्स पटना के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बच्ची का कटा हाथ जोड़ा

पटना. वैशाली की 6 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी का दाहिना हाथ रविवार की दोपहर चारा काटने की मशीन में कट गया। स्वजन तत्काल उसे लेकर अस्पतालों में मदद तलाशते रहे। अंततः शाम 7:30 बजे बच्ची को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया, जहां से उपचार की निर्णायक प्रक्रिया शुरू हुई। अस्पताल पहुंचते ही प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीमों ने स्थिति का आकलन कर त्वरित कार्यवाही की। आधे घंटे के भीतर लक्ष्मी को आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। रात आठ बजे शुरू हुई जटिल माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी छह घंटे तक चली। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह के मार्गदर्शन में आपरेशन संपन्न हुआ। टीम में डॉ. अंसारुल, डॉ. कुलदीप, डॉ. मैरी, डॉ. अजीना, डॉ. निकिता और डॉ. अनुप शामिल थे। पूरी प्रक्रिया में एनेस्थीसिया, आपरेशन थिएटर और नर्सिंग टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस उपलब्धि पर एम्स के निदेशक ने पूरी टीम को बधाई दी है। डॉक्टरों ने बताया कि लक्ष्मी की अंगुलियों में रक्त संचार के सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। चिकित्सकों को उम्मीद थी कि उचित देखभाल और पुनर्वास के साथ बच्ची अगले एक से दो महीनों में हाथ की कार्यक्षमता काफी हद तक प्राप्त कर सकती है। स्थिति अनुकूल रहने पर एक सप्ताह के भीतर उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सकों ने ऐसे मामलों में कटे अंग के सुरक्षित परिवहन को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कुछ सावधानियां भी बताई हैं। अंग कटने पर सुरक्षित जुड़ाव को लेकर रखें सावधानी प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह ने बताया कि किसी भी आकस्मिक घटना-दुर्घटना में अंग कटने या हटने की स्थिति में जोड़ने को लेकर आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। कटे हुए अंग को साफ प्लास्टिक बैग में रखें।

बिहार में 8 मार्च को मनेगा महिला रोजगार दिवस

पटना. 8 मार्च को इंटरनेशनल महिला दिवस है. इसी दिन बिहार में महिला रोजगार दिवस मनाया जाएगा. 8 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में रोजगार उत्सव के रूप में मनाया जाएगा. इसमें बड़ी संख्या में जीविका दीदियां शामिल होंगी. जानकारी के मुताबिक, महिला रोजगार योजना को लेकर 10-10 हजार रुपए मिलने के बाद महिलाओं ने जो रोजगार शुरू किया, उसे आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी. महिला उद्यमियों को किया जाएगा प्रोत्साहित इस दिन खास बात यह भी होगी कि ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित भी करेंगे. मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिक, 2005 के बाद यानी कि सत्ता में नीतीश सरकार के आने के बाद महिला सशक्तिकरण को लेकर कई तरह के काम किए गए हैं. स्वयं सहायता समूह के रूप में जीविका का गठन किया गया. ग्रामीण और शहर दोनों को मिलाकर अब तक टोटल 11 लाख 82 हजार स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है. जीविका दीदियों को लखपति बनाने की प्लानिंग बिहार में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं जीविका दीदियों को महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि खुद का रोजगार शुरू करने के लिए दिया गया था. अब उन्हें लखपति बनाए जाने की प्लानिंग है. अब जीविका दीदियों की तरफ से शुरू किए गए रोजगार का आंकलन किया जाएगा. इसके बाद उन्हें 2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी. 8 मार्च को कार्यक्रम में क्या-क्या होगा? जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के बारे में बताया गया कि इस दौरान महिला उद्यमी अपना एक्सपीरियंस शेयर करेंगी. इसके साथ ही उन्हें अपने रोजगार को और बेहतर करने के लिए एक्सपर्ट टिप्स देंगे. इसके अलावा महिला को बाकी के सरकारी योजनाओं की जानकारी और दो लाख रुपए देने को लेकर तमाम जानकारियां भी दी जायेंगी.

निशांत कुमार की सियासी दस्तक पर जदयू का संकेत, भाजपा बोली– खुले दिल से स्वागत

पटना जब विधानसभा चुनाव आया तो वह रास्ता। जब चुनाव निकल गया तो विधान परिषद् के रास्ते जाने की बात आई। अब राज्यसभा चुनाव की बारी आई तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री का रास्ता पक्का बताया जा रहा है। पहले की तरह ही जनता दल यूनाईटेड के मंत्रियों ने ही यह जानकारी दी है। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार नीतीश कुमार ने सहमति दी है। उन्हें नीतीश कुमार के बाद जदयू अध्यक्ष बनाने की भी बात कही जा रही है। अब तक नीतीश ने इसपर खुद आकर कुछ नहीं कहा है, क्योंकि वह परिवारवाद पर लगातार हमलावर रहे हैं। इधर, जदयू के दिग्गज नेता दावा कर रहे हैं कि निशांत कुमार जल्द ही पार्टी में पूरी तरह से एक्टिव हो जाएंगे। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी चल रही है? इस सवाल पर जनता दल यूनाइटेड के किसी भी नेता ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन निशांत की जदयू एंट्री पर जरूर बड़ा बयान दे दिया है। सीएम नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने कह दिया है कि जल्द ही वह सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं। राजनीति प्रवेश करने की पूरी संभावना बन गई ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा है कि निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति प्रवेश करने की पूरी संभावना बन गई है। उनके बारे में बिहार के नौजवान और जदयू नेता चाहते हैं कि निशांत सक्रिय राजनीति में आए। अब जल्द ही सबकी चाहत पूरी होने वाली है। उनके उनके जदयू में आगमन की जल्द ही घोषणा होगी और पार्टी के अंदर काम करेंगे। मंत्री दिलीप जायसवाल ने क्या कहा वह जानिए इधर, निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश की खबरों पर बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मैं नई पीढ़ी का राजनीति में स्वागत करता हूं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में नेतृत्व करने के लिए मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद करता हूं। यह बेहद खुशी की बात है कि निशांत जी अब मुख्यमंत्री और उनके परिवार के समर्थन के साथ राजनीति में प्रवेश करेंगे और हम उनका दिल से स्वागत करते हैं। वह निश्चित रूप से एक शिक्षित युवा नेता हैं, जिन्होंने बीटेक की डिग्री प्राप्त की है और जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। हर घटना अपने समय पर होती है और शायद अब सही समय आ गया है। उनके राजनीति में आने का गर्मजोशी से स्वागत किया जाना चाहिए। मंत्री अशोक चौधरी बोले- होली का बड़ा तोहफा है मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जनता दल यूनाईटेड और सीएम नीतीश कुमार की विचारधारा पर चलने वालों के लिए होली का एक बड़ा तोहफा है। जब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे तो बिहार के लिए काफी अच्छा रहेगा। वह काफी पढ़े लिखे हैं। इंजीनियर हैं। एक तरह से वह सीएम नीतीश कुमार की फोटो कॉपी है। होली के अवसर पर यह बड़ी खबर है। वह पार्टी के कार्यकर्ताओं की मांग पर आ रहे हैं। चुनाव के पहले से ही लोगों की मांग थी। अब वह सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं, यह खुशी की बात है।

बिहार के दो जिलों में पीपीपी मोड पर बनेंगे सरकारी मेडिकल कॉलेज

पटना. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा दांव खेला है. राज्य में अब नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण लोक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर पर खोलने का निर्णय लिया हैं. सात निश्चय पार्ट-3 के तहत सरकार ने इन जिलों में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है. अब सहरसा और गोपालगंज के छात्रों को डॉक्टर बनने और मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना होगा. PPP मोड पर बनेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के अधिक से अधिक जिलों में मेडिकल शिक्षा और उन्नत इलाज की सुविधा उपलब्ध हो. इसी रणनीति के तहत नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण PPP मॉडल पर कराया जाएगा, ताकि निजी निवेश के जरिए आधुनिक ढांचा और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके. जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज बनने हैं, वहां जमीन चिह्नित कर उसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है. यह कदम परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है. गोपालगंज में जमीन चिह्नित स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि गोपालगंज जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए मांझा प्रखंड में 24 एकड़ 37 डिसमील जमीन चिह्नित की गई है. जिला प्रशासन द्वारा जमीन का हस्तांतरण भी किया जा चुका है. सरकार ने इस जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के तकनीकी दल को स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह स्थान जिले के लिए एक बड़ा ‘हेल्थ हब’ साबित होगा. जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) की एक एक्सपर्ट टीम को स्थल निरीक्षण का निर्देश दिया गया है. टीम की रिपोर्ट आते ही पीपीपी मोड पर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. सहरसा में भी तैयारी अंतिम चरण में सहरसा जिले में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से हो रही थी. राज्य सरकार की योजना अगले पांच सालों में चरणबद्ध तरीके से उन सभी जिलों को कवर करने की है जहां अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं हैं. पीपीपी मोड पर बनने वाले ये कॉलेज न केवल सरकारी नियंत्रण में होंगे, बल्कि निजी निवेश के आने से यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं और आधुनिक मशीनें जल्द उपलब्ध हो सकेंगी. अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा. इससे स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक इलाज और मेडिकल शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ मरीजों को बड़े शहरों की ओर पलायन से राहत मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

20 हजार सेविका और सहायिका की भर्ती करेगा समाज कल्याण विभाग

पटना. समाज कल्याण विभाग ने राज्य भर में 20 हजार से अधिक सेविका और सहायिका की चयन प्रक्रिया शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है. विभाग ने न केवल पुराने केंद्रों की रिक्तियों को भरने की तैयारी की है, बल्कि 18 हजार नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं. इस मेगा भर्ती अभियान से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. 1.14 लाख केंद्र संचालित, 18 हजार नए प्रस्तावित बिहार में फिलहाल 1 लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. इसके अलावा 18 हजार नए केंद्रों की स्वीकृति के लिए पत्राचार किया गया है और 31 मार्च तक अनुमति मिलने की संभावना है. अनुमति मिलते ही पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर बहाली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. पुराने 2200 से अधिक केंद्रों पर भी सेविका-सहायिका के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू होगी. कई केंद्रों पर लंबे समय से पद खाली पाए गए हैं, जिससे पोषण और प्राथमिक शिक्षा सेवाएं प्रभावित हो रही थीं. विभाग ने 10 मार्च से नए केंद्रों के लिए स्थलों की पहचान का निर्देश दिया है. सभी सीडीपीओ को कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें जहां या तो आंगनबाड़ी केंद्र पास-पास संचालित हो रहे हैं या फिर ऐसे इलाके जहां केंद्र नहीं होने से बच्चों को पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है. 31 मार्च तक पूरी होगी कागजी कार्रवाई अनुमति मिलने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है और 31 मार्च तक मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है. मंजूरी मिलते ही पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इसके साथ ही, पुराने 2200 केंद्रों पर जहां पद खाली पड़े हैं, वहां भी नई नियुक्तियां की जाएंगी. 10 मार्च से सभी सीडीपीओ (CDPO) को नए स्थलों की पहचान करने का सख्त निर्देश दिया गया है. विभाग का लक्ष्य उन क्षेत्रों को कवर करना है जहां फिलहाल कोई केंद्र नहीं है और बच्चों को पोषाहार या प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. 10 मार्च से शुरू होने वाले इस सर्वे में उन मोहल्लों और टोलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां आंगनबाड़ी सुविधाओं का अभाव है. जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ही नए केंद्रों की स्थापना और वहां बहाली का खाका फाइनल होगा. अप्रैल से चयन प्रक्रिया समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, पहले से चल रहे केंद्रों में पाया गया है कि बड़ी संख्या में सेविका और सहायिका के पद रिक्त हैं. इन पदों को भरने के लिए 1 अप्रैल से जिलों में चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. जो महिलाएं स्थानीय स्तर पर काम करना चाहती हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है. भर्ती से जुड़ी विस्तृत योग्यता और चयन के मानदंडों की आधिकारिक घोषणा जल्द ही विभाग की वेबसाइट पर कर दी जाएगी.

12 हजार शिक्षकों को होली पर मिला 70 करोड़ का वेतन

बांका. होली का उत्साह परवान चढ़ चुका है। बाजार से गांव तक इसका रंग जमाने गुरुजी के बैंक खाते में सोमवार की सुबह ही 70 करोड़ से अधिक की राशि चली गई। शिक्षकों के खाते में यह राशि फरवरी के वेतन भुगतान के रूप में गई है। कोषागार ने ही करीब 60 करोड़ का वेतन भुगतान एक साथ कर दिया। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक लेकर उच्च माध्यमिक तक के शिक्षक शामिल हैं। इससे करीब 12 हजार शिक्षकों को वेतन मिला है। वेतन की इतनी बड़ी राशि ही होली का रंग जमाएगा। इसमें पुराने वाले नियमित शिक्षक के अलावा विशिष्ट और बीपीएससी शिक्षकों की बड़ी संख्या है। सुबह-सुबह वेतन मिलते ही शिक्षक खरीदारी के लिए बाजार में उतर गए। विभागीय आदेश पर शिक्षा विभाग ने फरवरी का वेतन भुगतान करने के लिए 10 दिन पूर्व की कवायद शुरु कर दी है। प्रखंड और जिला स्तर पर आने वाले निगेटिव को पिछले सप्ताह ही मंगा लिया था। 26 फरवरी तक वेतन भुगतान का विपत्र तैयार कर इसे कोषागार भेज दिया गया, ताकि फरवरी का वेतन शिक्षकों को समय पर मिल जाए। पिछले दो दिन शनिवार और रविवार को कोषागार बंद रहने से इसका वेतन भुगतान नहीं हो सका। लेकिन सोमवार की सुबह ही प्रशासन ने वेतन भुगतान को गंभीरता से लेते हुए सभी को वेतन का भुगतान कर दिया। इसके साथ ही शिक्षकों के चेहरे पर होली की चमक दिखने लगी। वैसे धूरखेली के दिन सोमवार को बड़ी संख्या में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षक इंटर और मैट्रिक की कापी जांच के लिए छह केंद्रों पर जमे रहे। इसके अलावा बचे शिक्षकों को विद्यालय खुला रहने के कारण धूल और कीचड़ खाते हुए विद्यालय जाना पड़ा। नियोजित प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव हीरालाल प्रकाश यादव ने कहा कि जीओबी मद से कटोरिया और चांदन के नियोजित शिक्षकों को वेतन मिलता है। लेकिन होली जैसे त्योहार में उनके ढाई सौ शिक्षकों को वेतन नहीं मिल सका है। डीईओ देवनारायण पंडित ने बताया कि अधिकांश शिक्षकों को वेतन भुगतान हो गया। कुछ नियोजित शिक्षकों का वेतन भुगतान बैंक के माध्यम से होता है। विभाग उनका वेतन भी भुगतान के लिए बैंक भेज दिया है। भयो-भयो कोलाहल समर भूमि में…. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों का होली मिलन समारोह सोमवार को आरएमके मैदान के रंगमंच पर हुआ। इसमें दर्जन भर शिक्षकों ने रामायणकालीन एक से एक होली गीतों से सबको सराबोर कर दिया। हिंदी शिक्षक प्रवीण कुमार ने पहले आज खेलत होली गोईया, कन्हैया खेलत होली… से इसकी शुरुआत की। इसके बाद संगीत शिक्षक सुशील कुमार ने एक-एक होली गीतों की प्रस्तुति की। आलोक प्रखर, धर्मेंद्र कुमार, दिलीप कुमार आदि ने एक से एक होली गीत की प्रस्तुति दी। नाल, तबला, हारमोनियम, झाल, झांझर बजाकर सबने होली का रंग जमा दिया। इस अवसर पर डीईओ देवनारायण पंडित, आरएमके प्रधान डा राकेश रंजन, एसएस बालिका प्रधान अनिल कुमार झा, कैरी के प्रधानाध्यापक राजीव रंजन, निशांत केतु, रौशन कृष्णा, अमरेश कुमार, राजीव कुमार, अमित कुमार यादव, प्रीतम कुमार, बमबम पंडित, चंदन चौधरी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सबने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामना दी। अध्यक्षता माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार दीपक और संचालन डा. राहुल कुमार ने किया।

बाबा बैद्यनाथ धाम में रंगों का उत्सव शुरू, ढोल-नगाड़ों संग निकलेगी भगवान की डोली

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम की पावन नगरी देवघर में आस्था, परंपरा और विशेष ज्योतिषीय संयोग के बीच आज से तीन दिवसीय होली महोत्सव की शुरुआत हो रही है। पूरे शहर में उत्साह और भक्ति का माहौल है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों को रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया है। परंपरा के अनुसार, सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा सोमवार शाम चार बजे बाबा वैद्यनाथ पर गुलाल अर्पित कर होली उत्सव का विधिवत शुभारंभ करेंगे। विशेष तिथि संयोग के कारण इस वर्ष दो मार्च से चार मार्च तक होली मनाई जाएगी, जबकि पांच मार्च को बासी होली खेली जाएगी। सोमवार को दिनभर जलार्पण के बाद दोपहर साढ़े तीन बजे मंदिर का पट बंद किया जाएगा और ठीक चार बजे फिर से खोला जाएगा। इसके बाद बाबा को गुलाल चढ़ाकर “सुखी होली” की शुरुआत होगी। इसी दौरान भितरखंड स्थित राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान की डोली ढोल-नगाड़ों के साथ आजाद चौक स्थित दोल मंच तक निकाली जाएगी। जयकारों और गुलाल के बीच संपन्न होगी विशेष पूजा शोभायात्रा के दौरान विभिन्न चौक-चौराहों पर मालपुआ का भोग लगाया जाएगा। दोल मंच पर राधा-कृष्ण को झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी। हरिहर मिलन तक मंदिर का पट पूरी रात खुला रहेगा। मंगलवार तड़के पांच बजकर ग्यारह मिनट पर दोल मंच पर विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद राधा-कृष्ण की डोली वापस बाबा मंदिर पहुंचेगी। सुबह छह बजे गर्भगृह में हरिहर मिलन का दिव्य दृश्य होगा, जहां जयकारों और गुलाल के बीच विशेष पूजा संपन्न होगी। श्रृंगार पूजन के बाद मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिया जाएगा और सुबह दस बजे से जलार्पण शुरू होगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।  

रांची में होली के दिन चटक धूप और गर्मी, मौसम विभाग ने जारी किया ताज़ा पूर्वानुमान

 रांची राजधानी रांची में होलिका दहन की तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि होली के दिन मौसम कैसा रहेगा। मौसम विभाग ने त्योहार के दिन के लिए साफ और शुष्क मौसम का अनुमान जताया है। राजधानी रांची में 2 मार्च को होलिका दहन किया जा रहा है। इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, होली के दिन आसमान पूरी तरह साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 15 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे लोग रंगों का त्योहार खुले दिल से मना सकेंगे। हालांकि दोपहर के समय तेज धूप और गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक देर तक धूप में रहने से बचने की सलाह दी गई है। पानी ज्यादा पीने और सिर को ढककर बाहर निकलने की हिदायत दी गई है। इस साल गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ सकती है मार्च के पहले दिन ही रांची का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ सकती है। फिलहाल मार्च के पहले सप्ताह में मौसम सामान्य रहेगा, लेकिन इसके बाद तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना है। अगले एक सप्ताह में राजधानी का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। राज्य के कई जिलों में भी तापमान 30 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है। चाईबासा में तापमान करीब 35 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं जमशेदपुर में 35 डिग्री, डाल्टनगंज में 36 डिग्री और बोकारो में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन जिलों में न्यूनतम तापमान 14 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। लोगों को सावधान रहने की जरूरत मौसम विभाग का मानना है कि मार्च महीना सामान्य रह सकता है, लेकिन अप्रैल और मई में गर्मी का असर ज्यादा दिखेगा। इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है और लू चलने की भी आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को अभी से सावधान रहने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है।  

Bank Holiday Alert: मार्च महीने में इतने दिन नहीं खुलेंगे बैंक, पहले जान लें तारीखें

पटना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी वर्ष 2026 के आधिकारिक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, मार्च महीने में बैंकिंग सेवाएं बड़े स्तर पर प्रभावित होने वाली हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय त्योहारों और साप्ताहिक छुट्टियों को मिलाकर कुल 18 दिन बैंकों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। बिहार में 12 दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित बिहार की बात करें तो राज्य में करीब 12 दिन बैंक बंद रहने की संभावना है। इसमें होली, रामनवमी और बिहार दिवस जैसे प्रमुख अवसर शामिल हैं। हालांकि, एटीएम (ATM), नेट बैंकिंग, यूपीआई (UPI) और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रहेंगी, लेकिन चेक क्लीयरेंस और ड्राफ्ट जैसे भौतिक कार्यों के लिए ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।   मार्च 2026 की प्रमुख छुट्टियों की सूची   तारीख अवसर / त्योहार 2 मार्च राम नवमी 3 मार्च होलिका दहन 4 मार्च होली (धुलंडी) 14 मार्च दूसरा शनिवार (बैंक अवकाश) 21 मार्च ईद–उल–फितर 22 मार्च बिहार दिवस (रविवार) 28 मार्च चौथा शनिवार (बैंक अवकाश) 31 मार्च महावीर जयंती   वहीं 1, 8, 15, 22 और 29 मार्च को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। डिजिटल लेनदेन का करें उपयोग बैंक अधिकारियों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि नकदी की समस्या से बचने के लिए वे डिजिटल माध्यमों का अधिक प्रयोग करें। हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन तकनीकी सेवाएं (Online Banking) 24×7 काम करती रहेंगी। यदि आपका कोई बड़ा ट्रांजैक्शन या बैंक शाखा से जुड़ा जरूरी काम है, तो उसे छुट्टियों से पहले निपटा लेना ही समझदारी होगी।