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बाबूलाल मरांडी ने नीतीश कुमार के ट्वीट पर दी प्रतिक्रिया, बोले– सुशासन में आपका योगदान सबसे बड़ा

रांची झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।  

CM हेमंत ने नेमरा गांव में बाहा पूजा का निरीक्षण किया, तालाब और विकास कार्यों का लिया हाल

रांची  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा (गोला प्रखंड, रामगढ़ जिले) में बाहा पूजा के अवसर पर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ तालाब का दौरा किया और जल संरक्षण व सफाई से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। तालाबों का संरक्षण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों का संरक्षण ग्रामीण जीवन और पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को काम में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। इस मौके पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अंचल अधिकारी समेत कई विभागीय अधिकारी मौजूद थे। तालाब निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री सामुदायिक भवन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में बाहा पूजा के आयोजन, सुरक्षा, यातायात और अतिथियों के ठहरने की व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने निर्देश दिए कि पूजा के दौरान ग्रामीणों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। पूर्व विधायक और अन्य अतिथियों का आगमन बाहा पूजा में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री एक दिन पहले बुधवार शाम को नेमरा पहुंचे थे। इस दौरान पूर्व विधायक सीता सोरेन भी कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने गांव पहुंचीं। मुख्यमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है और सामुदायिक भवन में अतिथियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था बीएसएनएल टावर के पास नियंत्रित की जा रही है ताकि आवागमन सुचारू रहे। गांव में उत्साह का माहौल बाहा पूजा के अवसर पर नेमरा गांव में उत्साह और खुशी का माहौल है। प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच पारंपरिक समारोह को शांतिपूर्ण और भव्य बनाने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।  

नीतीश चले दिल्ली: बिहार की सियासत में बड़ा मोड़, क्या भाजपा संभालेगी सीएम की कुर्सी?

पटना बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद यह जानकारी दी है। नीतीश के राज्यसभा जाने का मतलब है राज्य की सत्ता में बहुत कुछ बदलने जा रहा है। राज्य में नई सरकार बनेगी। महज 105 दिन पहले दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं नीतीश के कुर्सी छोड़ने से बिहार के लिए और क्या-क्या बदल जाएगा? 1. पहली बार बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।   2. हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा 1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है। 3. नौवीं बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे नीतीश नीतीश कुमार बीते दो दशक के बिहार की सत्ता का पर्याय बने हुए हैं। इस दौरान उनकी पार्टी राज्य की पहले नंबर की पार्टी रही हो या तीसरे नंबर की मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश का पहला कार्यकाल महज सात दिन का रहा था। इसके बाद 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने नीतीश ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। 2010 में उन्होंने प्रचंड जीत के साथ तीसरी बार शपथ ली, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। दरअसल, भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया तो नीतीश ने अपनी राह बदल ली। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले उतरी और बुरी तरह हारी। पार्टी को राज्य की 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली। इस हार के बाद नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। महज नौ महीने बाद नीतीश ने फिर से सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश ने अपने धुर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर लड़ा और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया और एक बार फिर राज्य की बागडोर संभाली। 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद फिर से नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जबकि उनकी पार्टी सीटों के लिहाज से राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। 2022 में नीतीश ने फिर से लालू का साथ पकड़ा और फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नीतीश फिर से भाजपा के साथ आ गए और फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2025 में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने महज 105 दिन बाद यह तय हो गया कि नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। शायद ये आखिरी बार भी होगा। 4. बिहार की सियासत में पीढ़ीगत बदलाव आपातकाल के दौर में बिहार की सियासत में कई युवा चेहरे उभरे। ये चेहरे दशकों तक बिहार की सियासत का पर्याय रहे। लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शरद यादव, नीतीश कुमार इनमें सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। इन चेहरों में से रामविलास पासवान, सुशील मोदी और शरद यादव का निधन हो चुका है। लालू यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के बाद से सक्रिय सियासत से दूर हैं। अब इस पीढ़ी के आखिरी बड़े चेहरे नीतीश के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार की सियासत में एक पीढ़ी का लगभग अंत हो जाएगा। 5. बीस साल से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू पहली बार बैक सीट पर होगी पिछले बीस साल और चार चुनाव से बिहार की सत्ता की बागडोर जदयू के हाथ में है। अब अगर राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब जदयू सहयोगी के रूप में बिहार की सत्ता में होगी। 6. दूसरी बार जदयू का शीर्ष नेता बिहार की सत्ता का हिस्सेदार नहीं होगा ये दूसरा मौका होगा जदयू सत्ता की … Read more

बिहार में ड्रग्स पर लगाम लगाने हर जिले में खुलेगा नारकोटिक्स थाना

पटना. बिहार सरकार ने हाल ही में आर्थिक अपराध इकाई और सीआईडी से अलग कर मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया है. अब इस नवगठित ब्यूरो को जिला स्तर तक मजबूत करने की तैयारी चल रही है. साइबर थानों की तर्ज पर राज्य के हर जिले में नारकोटिक्स थाना खोला जाए, ताकि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच तेज हो और अभियुक्तों को जल्द सजा दिलाई जा सके. राज्य से जिले तक- एक नई कमांड स्ट्रक्चर हाल ही में राज्य सरकार ने आर्थिक अपराध इकाई से नारकोटिक्स और सीआईडी से मद्य निषेध इकाई को अलग कर एक नई संरचना तैयार की है. यह नवगठित ब्यूरो शराब और सूखे नशे दोनों के खिलाफ कार्रवाई करेगा. राज्यस्तरीय थाने को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है. इसी वजह से फिलहाल नारकोटिक्स से जुड़े केस आर्थिक अपराध इकाई में ही दर्ज हो रहे हैं. लेकिन अब फोकस जिला स्तर पर है. हर जिले में अलग नारकोटिक्स थाना खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे जांच की रफ्तार और निगरानी दोनों को धार मिलेगी. एडीजी की सीधी निगरानी, 218 टास्क फोर्स एक कमांड में नया ब्यूरो एडीजी (मद्य निषेध) के नेतृत्व में मिशन मोड पर काम कर रहा है. राज्यभर में जिला और अनुमंडल स्तर पर काम कर रही 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) अब इसी ब्यूरो के नियंत्रण में होंगी. यानी शराब और ड्रग्स के खिलाफ अभियान का पूरा रिमोट कंट्रोल एक ही कमांड के पास रहेगा. सरकार ने इस मिशन को मजबूत करने के लिए 88 नए पद सृजित किए हैं. इसके अलावा 229 पुराने पदों का हस्तांतरण तेजी से किया जा रहा है. संविदा के आधार पर विशेषज्ञों की भर्ती की भी तैयारी है, ताकि तकनीकी और खुफिया स्तर पर ड्रग नेटवर्क को तोड़ा जा सके. तकनीकी अड़चनें जल्द दूर, कार्रवाई होगी सीधी फिलहाल राज्यस्तरीय थाने की अधिसूचना लंबित होने के कारण केस दर्ज करने में तकनीकी बाधा है. लेकिन जैसे ही जिला स्तर पर थाने सक्रिय होंगे, बिहार पुलिस को ड्रग पेडलर्स और बड़े सिंडिकेट के खिलाफ सीधी और त्वरित कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा. जल्द ही जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर नए आदेश जारी होंगे. माना जा रहा है कि यह कदम बिहार में नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई साबित हो सकता है.

बिहार विधानसभा में गेट नंबर 10 से आगे मीडिया की नो एंट्री

पटना. बिहार विधानसभा परिसर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक मीडिया प्रतिनिधियों की एंट्री केवल गेट संख्या 10 तक ही सीमित है. इसके आगे किसी भी पत्रकार को जाने की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा और कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. गेट नंबर 10 ही होगा मीडिया का एंट्री पॉइंट प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, 5 मार्च को कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के लिए केवल गेट संख्या 10 ही एकमात्र प्रवेश द्वार है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्रकारों को इस गेट से आगे जाने की अनुमति नहीं दी. विधानसभा के अन्य सभी द्वारों से मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह ‘नो-गो ज़ोन’ तैयार किया गया है. सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’ या कवरेज पर पहरा? विधानसभा परिसर में अचानक बढ़ी इस सख्ती के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं. कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों और वीवीआईपी (VVIP) मेहमानों का जमावड़ा है। किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है. हालांकि, मीडिया गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या इतनी पाबंदी कवरेज को प्रभावित करेगी? प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है. नियमों का उल्लंघन पड़ा तो होगी कार्रवाई प्रशासन ने न केवल रास्ते सीमित किए हैं, बल्कि सख्त लहजे में चेतावनी भी जारी की है. आदेश में कहा गया है कि जो भी मीडियाकर्मी निर्धारित नियमों या तय सीमा का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पत्रकारों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर गेट संख्या 10 पर पहुंचें और वहीं से अपनी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें. विधानसभा के आसपास सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि हर आने-जाने वाले की गहन तलाशी ली जा रही है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि कार्यक्रम की सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. मीडिया संगठनों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके.

अमित शाह ने नीतीश के RS नामांकन की सराहना की, नॉमिनेशन के बाद CM हाउस में मुलाकात

पटना  नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा. इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी. नीतीश की अमित शाह ने दिल खोलकर की तारीफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. ऐसे में उन्होंने पटना पहुंचकर नामांकन भरा. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया. बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा. इनके दामन पर कोई दाग नहीं है. नॉमिनेशन के बाद CM हाउस पहुंचे नीतीश, शाह ने की मीटिंग नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. नॉमिनेशन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ की मीटिंग . तेजस्वी बोले- सबको पता था, बीजेपी यही करेगी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि पहले से ही कह रहा था कि उनको बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है. उनके साथ जो हो रहा है, सबको पता था कि यही होगा. हम लोग अगर वहां होते, तो उनको ये दिन नहीं देखना पड़ता. उनके साथ सहानुभूति है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव में नारा दिया 25 से 30, फिर से नीतीश और अभी देखिए. पटना के जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. 'मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं…', नीतीश ने किया ऐलान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, आज करेंगे नामांकन

पटना. बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल सुबह 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे. उनके साथ जदयू उम्मीदवार के रूप में रामनाथ ठाकुर भी नामांकन दाखिल करेंगे. जानकारी के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व की ओर से जदयू के प्रमुख नेताओं को नामांकन के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा गया है. इस बीच, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर पर अब लगभग मुहर लग गई है. इसी क्रम में भाजपा की ओर से भी उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार भी अपना नामांकन दाखिल करेंगे. वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. बीजेपी का होगा मुख्यमंत्री? नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही बिहार में नए सिरे से सरकार गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में इस कदम को बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर को लेकर जदयू के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नाराजगी की संभावना भी जताई जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मंथन किया. नामांकन के वक्त अमित शाह मौजूद रहेंगे  नामांकन के बाद सीएम नीतीश कुमार और एनडीए के अन्य नेताओं के साथ अमित शाह की बैठक हो सकती है. इसी बैठक में नई सरकार के गठन के फार्मूले पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. जेडीयू को दो डिप्टी सीएम के पद मिल सकते हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर चर्चा की गई. कौन होगा अगला मुख्यमंत्री सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नई सरकार के गठन को लेकर फॉर्मूला तय किया जा सकता है. चर्चा है कि बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जेडीयू को दो डिप्टी सीएम पद दिए जा सकते हैं. पार्टी में हलचल! बैठक के बाद संजय झा के आवास से बाहर निकलते हुए जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से राज्यसभा जा रहे हैं. पार्टी की ओर से यही संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह फैसला उनका अपना है. इस दौरान विजय कुमार चौधरी ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सबकी नजर बनी हुई है.

बिहार मौसम अपडेट: होली के बाद गर्मी का असर, जानिए आज किस जिले में ठंड का अहसास

पटना मार्च की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अब भी बिहार के कई जिलों में लोग कंबल ओढ़ रहे हैं। न्यूनतम तापमान भी 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। बिहार के मधेपुरा, सहररसा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीवान, वैशाली, शेखपुरा, गया, बक्सर, भागलुपर और पूर्णिया का तापमान 15 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। होली तक ऐसा ही मौसम रहेगा। सुबह और रात गुलाबी ठंड का एहसास होगा। हालांकि, पटना समेत कुछ जिलों में गर्मी का भी एहसास हो रहा है। कई जिलों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। होली के बाद पटना में गर्मी और बढ़ेगी। अधिकतम तापमन 33 डिग्री तक जाने के आसार हैं। मार्च से मई तक कैसा रहेगा मौसम? इधर, मौसम विज्ञान केंद्र ने स्पष्ट कह दिया है कि मार्च से लेकर मई तक इस बार अधिक गर्मी लगेगी। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि मार्च से मई तक 2026 की बिहार के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान और न्यूतनत सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। दिन और रात दोनों समय तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होगा। अप्रैल और मई माह में ही बिहार के कई जिलों में हीटवेव की घटनाएं हो सकती है। शहरी क्षेत्रों में हीट आईलैंड प्रभाव के कारण तापमान अधिक हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार से अपील है कि वह हीट एक्शन प्लान लागू करें। आम लोग दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।    पिछले 24 घंटे में कहां का तापमान कितना रहा? मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई। राज्य में अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री सेल्सियस से 33.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया। वहीं न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस से 20.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। तीन मार्च को बिहार में न्यूनतम तापमान सबसे कम 12.7 डिग्री सेल्सियस मधेपुरा और सहरसा में दर्ज किया गया। वहीं किशनगंज में 17.4 डिग्री सेल्सियस, अरवल में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मोतिहारी में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मुजफ्फरपुर में 17.2 डिग्री सेल्सियस, औरंगाबाद में 14.2 डिग्री सेल्सियस, मधुबनी में 14.2 डिग्री सेल्सियस, सुपौल में 16.6 डिग्री सेल्सियस, वाल्मीकिनगर में 16 डिग्री सेल्सियस, ज़िरादेई में 13.5 डिग्री सेल्सियस, समस्तीपुर में 13.8 डिग्री सेल्सियस, वैशाली में 15 डिग्री सेल्सियस, पटना में 18.2 डिग्री सेल्सियस, जहानाबाद में 16.8 डिग्री सेल्सियस, नालंदा (राजगीर) में 17.9 डिग्री सेल्सियस, शेखपुरा में 15 डिग्री सेल्सियस, गया में 15 डिग्री सेल्सियस, बक्सर में 15 डिग्री सेल्सियस, मुंगेर में 15.6 डिग्री सेल्सियस, भागलपुर में 14.7 डिग्री सेल्सियस, सबौर में 12.8 डिग्री सेल्सियस, पूर्णिया में 15.3 डिग्री सेल्सियस, कटिहार में 17.6 डिग्री सेल्सियस, फारबिसगंज में 18.2 डिग्री सेल्सियस तथा छपरा में 20.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। अगले तीन दिनों तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान में अगले दो से तीन दिनों तक विशेष बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद तीन दिनों के दौरान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। इसी तरह न्यूनतम तापमान में भी अगले दो से तीन दिनों तक स्थिरता रहेगी, जबकि उसके बाद दो से चार  डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी से गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। पटना में सात मार्च तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के पूर्वानुमान के अनुसार, तीन से सात मार्च तक राजधानी पटना में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 3 मार्च को अधिकतम 31 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने का अनुमान है, वहीं 4 मार्च को अधिकतम 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहेगा। 5, 6 और 7 मार्च को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने तथा न्यूनतम तापमान क्रमशः 19, 19 और 20 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस अवधि में सूर्योदय लगभग 6:11 बजे से 6:07 बजे के बीच और सूर्यास्त 5:52 बजे से 5:55 बजे के बीच होगा। कुल मिलाकर पटना में अगले पांच दिनों तक धूप खिली रहेगी और दिन में गर्मी का अहसास बढ़ेगा।

पुल हादसे के बाद सख्त कार्रवाई: घोघरी नदी प्रोजेक्ट के तीन इंजीनियर निलंबित

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में निर्माण कार्यों में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के एक हिस्से के ढह जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण कार्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। क्या है पूरा मामला? सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी के ऊपर बन रहे पुल का एक हिस्सा कुछ दिन पूर्व अचानक भरभराकर गिर गया। यह पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आवागमन का एक महत्वपूर्ण साधन बनने वाला था। निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान ही संरचना के ढह जाने से गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निगरानी में लापरवाही का आरोप लगाया। जांच के बाद निलंबन पुल गिरने की सूचना मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों की अनदेखी और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही सामने आई। विभागीय आदेश के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। तीनों अधिकारियों पर नियमित मॉनिटरिंग नहीं करने और गुणवत्ता नियंत्रण में विफल रहने का आरोप है। ठेकेदार पर भी कार्रवाई की तैयारी विभागीय सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य में लगी संवेदक एजेंसी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। सलेमपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस पुल के निर्माण का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। पुल गिरने से जहां सरकारी धन की बर्बादी हुई है, वहीं क्षेत्र का संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच और निर्धारित समयसीमा में मजबूत पुल निर्माण की मांग की है। सरकार का सख्त संदेश हाल के महीनों में बिहार के विभिन्न जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोपालगंज की यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए भी एक सख्त संदेश मानी जा रही है कि भ्रष्टाचार और तकनीकी शिथिलता पर कठोर कार्रवाई तय है।

JDU में नई पीढ़ी की दस्तक: Nitish Kumar के बेटे निशांत को मिल सकता है बड़ा पद

नई दिल्ली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में आना तय हो चुका है और पार्टी जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। मंत्री ने कहा कि निशांत कुमार को पार्टी में "बड़ी जिम्मेदारी" दी जाएगी। उन्होंने कहा, "अब यह स्पष्ट है और अंतिम रूप दे दिया गया है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में शामिल होंगे। पार्टी एक-दो दिन में इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। पार्टी कार्यकर्ता कई वर्षों से निशांत के राजनीति में आने की मांग कर रहे थे। अब होली से पहले इस फैसले के कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है।" एक-दो दिन में हो जाएगा फैसला मंत्री ने कहा, "उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या निशांत को राज्यसभा भेजा जा सकता है तो कुमार ने कहा, "कुछ भी हो सकता है।" एक दशक से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री रहे श्रवण कुमार मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं।