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डीडीसी का बड़ा एक्शन,घोषी नगर पंचायत की निविदा रद्द, कार्यपालक पदाधिकारी से मांगा जवाब

जहानाबाद जहानाबाद जिले में सैरात (हाट-बाजार) की बंदोबस्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। “माल महाराज के, मिर्जा खेले होली” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है, जहां एक ही जमीन पर नगर पंचायत और जिला परिषद दोनों ने बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और दोनों निकायों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ही जमीन पर दो-दो बंदोबस्ती मामला घोषी नगर पंचायत का है, जहां जिला परिषद जहानाबाद की सैरात की जमीन पर नगर पंचायत द्वारा भी निविदा निकालकर बंदोबस्ती कर दी गई। वहीं, जिला परिषद पहले से ही उसी सैरात की बंदोबस्ती के लिए प्रक्रिया चला रहा था। ऐसे में एक ही जमीन पर दो अलग-अलग बंदोबस्ती होने से स्थिति असाधारण हो गई और विवाद गहरा गया। DDC प्रीति एक्शन मोड में मामला सामने आते ही जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रीति एक्शन मोड में आ गईं। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए नगर पंचायत घोषी द्वारा की गई बंदोबस्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही, 24 घंटे के भीतर नगर पंचायत घोषी के कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जिला परिषद की जमीन पर वर्षों से लग रहा सैरात जानकारी के मुताबिक, घोषी नगर पंचायत मुख्यालय में जिला परिषद की खतियानी जमीन पर कई वर्षों से सैरात लगता आ रहा है। हर साल की तरह इस वित्तीय वर्ष में भी जिला परिषद ने विधिवत विज्ञापन निकालकर बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन इसी बीच नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने भी उसी जमीन पर सैरात के लिए निविदा जारी कर दी, जिसे नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। कानून क्या कहता है? जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 100 के अनुसार, जिला परिषद की परिसंपत्ति नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के अधीन नहीं होती। इसका साफ मतलब है कि जिला परिषद की स्वामित्व वाली जमीन पर नगर निकाय किसी भी तरह का बाजार या सैरात की बंदोबस्ती नहीं कर सकते। वहीं, नगर पंचायत घोषी के मुख्य पार्षद का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र के अंदर जो भी खाली जमीन है, वह नगर पंचायत की मानी जाती है और इस संबंध में पहले से आदेश भी जारी है।  

स्प्रिट पीने से मची चीख-पुकार,4 की मौत, SHO सस्पेंड और चौकीदार गिरफ्तार

मोहतिहारी मोतिहारी रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में जहरीली स्प्रिट (शराब) पीने से लोगों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। कल एक व्यक्ति की मौत हुई थी, वहीं दो अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इसके अलावा एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी चले जाने की खबर ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। मृतकों की संख्या बढ़ी, कई लोग अभी भी बीमार मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है। कल जहरीली शराब पीने से चंदू की मौत हुई थी। वहीं आज सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया परसौना निवासी प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो की मौत हो गई। उनका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो जहरीली शराब पीने से बीमार हैं और चोरी-चुपके इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने शराब समझकर स्प्रिट का सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अन्य कई पीड़ितों का इलाज जारी है। आंखों की रोशनी प्रभावित, मामले की गंभीरता बढ़ी डॉक्टरों के अनुसार, इस जहरीली शराब के सेवन से पहले आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। गांव में भय और आक्रोश, अवैध शराब पर सवाल घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और स्प्रिट का कारोबार चल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। साथ ही अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में लागू शराबबंदी कानून और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौकीदार भरत रॉय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तुरकौलिया थाना के SHO उमाशंकर मांझी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रघुनाथपुर में हुई हत्या के मामले में भी केस दर्ज कर लिया गया है. हीरालाल भगत के परिजनों के आवेदन पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।  

सरायकेला के कोमाय क्षेत्र में विकास की जगी नई उम्मीद, पगडंडियों के सहारे बांदूबेडा और लोटाबुरु पहुंचे विधायक

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के सीमावर्ती और दुर्गम कोमाय के बांदूबेडा और लोटाबुरु टोला में विकास की नई उम्मीद जगी है. घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में पहुंचना बेहद कठिन है. इन गांवों के लोग सड़क, पानी, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं. गुरुवार को सरायकेला-खरसावां के विधायक दशरथ गागराई ने बाइक से इन गांवों का दौरा किया और रोलाहातु पंचायत के इस पहाड़ी क्षेत्र में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. बांदूबेडा और लोटाबुरु गांव के लोगों ने अपनी समस्याएं बिंदुवार रखीं, जिन पर विधायक ने समाधान का भरोसा दिया. ग्रामीणों ने मुख्य रुप से सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ साथ आजीविका के लिये पहल करने का आग्रह किया. ग्रामीणों का कहना है कि इन सड़कों के बनने से पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और उनकी रोजमर्रा की परेशानियां काफी हद तक कम हो जाएंगी. 15 किलोमीटर बाइक चलाकर पहुंचे विधायक गांव के लोगों से बात करते विधायक दशरथ गागराई इस जनचौपाल की खास बात यह रही कि विधायक दशरथ गागराई को गांव तक पहुंचने के लिए चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम जिला) के टोकलो समेत घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे लांजी (चक्रधरपुर) होते हुए करीब 15 किलोमीटर बाइक से चलना पड़ा. लुदूबेडा से आगे कोई पक्की सड़क नहीं है. जंगलों के बीच बनी पगडंडियों के सहारे ही गांव तक पहुंचा जा सकता है. यहां भी थोड़ी की असावधानी से बड़ी दुर्घटना घट सकती है. ग्रामीणों ने श्रमदान से रास्ता बनाया है, लेकिन बारिश के दिनों में हालात बेहद खराब हो जाते हैं. सड़क बनेगी तो खुलेगा विकास का रास्ता मोटरसाइकिल से दौरा करते विधायक दशरथ गागराई जनचौपाल के दौरान विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि बांदूबेडा और लोटाबुरु टोला तक सड़क निर्माण की दिशा में पहल करने की बात कही, ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिले. बेहतर कनेक्टिविटी से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जा रहा है. क्षेत्र में रोड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है. सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं: दशरथ गागराई विधायक दशरक दशरथ गागराई ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग के लोगों तक पहुंचे. सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. गागराई ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सुलभ तरीके से लोगों तक पहुंचे, ऐसी व्यवस्था की जा रही है. ग्रामीण जागरूक होकर योजनाओं का लाभ उठाएं. बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे ग्रामीण दुर्गम रास्तों पर मोटरसाइकिल चलाते विधायक दशरथ गागराई ग्रामीणों ने जनचौपाल में कई गंभीर समस्याएं उठाईं. उन्होंने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण गांव में चापाकल तक नहीं लगाया जा सका है. लोग पहाड़ी के नीचे स्थित डाड़ी चुआ का पानी पीने को मजबूर हैं. स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद खराब है. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. किसी के बीमार होने पर मरीज को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है. संचार और शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित जंगल-झाड़ी में मोटरसाइकिल चलाते विधायक दशरथ गागराई ग्रामीणों ने बताया कि गांव में संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित है. शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है. गांव में स्कूल नहीं है बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब सात किमी दूर पास के गांव के स्कूल में जाना होता है. इस कारण कई बच्चे तो स्कूल ही नहीं जाते है. ग्रामीणों ने इन समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की. कभी नक्सल प्रभावित रहा क्षेत्र, अब विकास की उम्मीद कोमाय का यह क्षेत्र कभी घोर नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता था. लोग लांजी या फिर उससे आगे जाने से भी करराते थे. हालांकि अब नक्सल गतिविधियों में कमी आई है और क्षेत्र धीरे-धीरे विकास की मुख्य धारा से जुड़ रहा है. जनचौपाल से जगी नई उम्मीद विधायक के इस दौरे और जनचौपाल के बाद ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण जगी है. उन्हें विश्वास है कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा और आने वाले समय में उनका गांव भी विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा. इस मौके पर बासंती गागराई, मुखिया सतरी सांगा, धर्मेंद्र सिंह मुंडा, मुन्ना सोय, राम सोय, भरत सिंह मुंडा, राहुल सोय, करम सिंह मुंडा, गोबरा मुंडा, कल्याण कांडिर, जोसेफ टुटू, भोंज सांगा, मरियम सांगा, ग्रेस पुरती, एतवा हस्सा, नाजीर सोय, जीवन कांडिर, बीरसा कांडिर, जोन मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.

फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी रोक, बिहार सरकार ने आवेदन के साथ सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना किया जरूरी

पटना  बिहार सरकार ने जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियमों को बदल दिया है. अब आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा. अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरी कागजात के आवेदन करता है, तो उसका आवेदन खारिज कर दिया जाएगा. इस नए नियम का मकसद फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर रोक लगाना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. नए नियम के तहत निवास प्रमाण पत्र के लिए अब सिर्फ पहचान पत्र देना काफी नहीं होगा. आवेदक को अपने पते से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज या जमीन से संबंधित कागज भी देना होगा. यानी अब यह साबित करना जरूरी होगा कि आप वास्तव में उसी जगह के निवासी हैं. क्या- क्या अनिवार्य आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी नियम बदल दिया गया है. पहचान पत्र के साथ-साथ आय से जुड़े सैलरी स्लिप, आय प्रमाण या अन्य संबंधित डॉक्यूमेंट देने होंगे. इससे गलत जानकारी देकर आय प्रमाण पत्र बनवाने पर रोक लगेगी. जाति प्रमाण पत्र के लिए भी अब नया नियम लागू किया गया है. इसमें पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर जमीन आवेदक के नाम पर नहीं है और पिता, दादा या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर है, तो उस स्थिति में वंशावली देना जरूरी होगा. इससे यह पता चलेगा कि आवेदक का उस परिवार से क्या संबंध है. कम होगा फर्जीवाड़ा सरकार ने खतियान, दान पत्र, जमीन के अन्य कागजात और भूमिहीनों को मिली जमीन के दस्तावेज को भी मान्य माना है. यानी अलग-अलग तरह के राजस्व रिकॉर्ड अब आवेदन के लिए स्वीकार किए जाएंगे. हालांकि जिन लोगों के पास जमीन या इससे जुड़े कागजात नहीं हैं, उनके लिए भी व्यवस्था रखी गई है. ऐसे आवेदक आवेदन के समय जगह निरीक्षण का विकल्प चुन सकते हैं. इसके बाद राजस्व कर्मी मौके पर जाकर जांच करेंगे और सही पाए जाने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से अब प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया थोड़ी सख्त जरूर हो गई है. इससे फर्जीवाड़ा कम होगा और सही लोगों को ही इसका लाभ मिलेगा.

नीतीश कुमार 11 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात और बिहार में नई सरकार के गठन पर होगी चर्चा

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बस चंद दिनों तक ही सीएम रहेंगे. नई सरकार की सुगबुगाहट प्रदेश में तेज हो गई है. एक तरफ नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे तो दूसरी ओर बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. कौन होगा इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ सामने होगा. खबर है कि नीतीश कुमार 09 अप्रैल को दिल्ली के रवाना होंगे. वहीं 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर वे शपथ लेंगे. 11 अप्रैल को पीएम मोदी से दिल्ली में बिहार में बनने वाली नई सरकार पर चर्चा के लिए मुलाकात हो सकती है. इसके बाद नीतीश कुमार 11 अप्रैल की शाम या फिर 12 अप्रैल को पटना लौट आएंगे. 13 अप्रैल को हो सकती है पटना में बैठक सूत्रों की मानें तो बिहार में बनने वाली नई सरकार पर रायशुमारी, चर्चा के लिए 13 अप्रैल को पटना में एनडीए की बैठक हो सकती है. 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद एनडीए विधानमंडल की बैठक बुलायी जाएगी जिसमें नेता चुना जाएगा. 18 अप्रैल के आसपास बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है. इस तारीख से अगर देखें तो अब नीतीश कुमार कुछ ही दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. प्रदेश के कामकाज को नहीं छोड़ रहे नीतीश बता दें कि एक तरफ जहां नई सरकार की तैयारी हो रही है और नीतीश कुमार को सीएम पद छोड़ना है इन सबके बीच वे प्रदेश के विकास कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं. गुरुवार (02 अप्रैल, 2026) को नीतीश कुमार ने शहर की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं का निरीक्षण किया. वे पाटलिपुत्रा कॉलोनी में निर्माणाधीन पार्क नंबर 113 का निरीक्षण करने पहुंचे. यहां लोगों के घूमने-फिरने, जिम, बच्चों के खेल-कूद की सुविधाएं सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद पाटलि पथ पर रूककर नेहरू पथ को पाटलिपथ से जोड़ने के लिए किए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी ली. रूपसपुर नहर के समीप रूककर खगौल नेहरू पथ-अशोक राजपथ को जोड़नेवाले रूपसपुर नहर पथ के प्रस्तावित फोरलेन चौड़ीकरण कार्य एवं मजबूतीकरण कार्य के संबंध में जानकारी ली. सगुना मोड़ के पास रूककर रूपसपुर नहर से सगुना मोड़ तक नेहरू पथ के दोनों तरफ भूमिगत नाला के साथ पथ के चौड़ीकरण के संबंध में जानकारी ली.  

ट्रेन फूड से परेशानी: वंदे भारत में सफर के दौरान मां-बेटे की हालत खराब

रांची. प्रीमियम ट्रेनों में बेहतर सुविधा और गुणवत्ता के दावों के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के खाने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। Vande Bharat Express में यात्रा कर रही रांची की एक महिला यात्री ने आरोप लगाया है कि ट्रेन में परोसे गए भोजन के बाद उन्हें तेज एलर्जी हो गई, जबकि उनके दो वर्षीय बच्चे को भी दस्त की शिकायत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची निवासी आयुषी सिंह 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी–देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) के कोच E1 में यात्रा कर रही थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि यात्रा के दौरान भोजन करने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें गंभीर एलर्जी की समस्या हो गई। साथ ही, उनके बच्चे की भी तबीयत खराब हो गई। भोजन की गुणवत्ता पर उठाए सवाल महिला यात्री ने अपनी शिकायत में ट्रेन के भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद ट्रेन स्टाफ का रवैया संवेदनशील नहीं था। आयुषी ने अपने दावे के समर्थन में अस्पताल की पर्ची और कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। बताया गया है कि फिलहाल उनका इलाज रांची के मां राम प्यारी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में चल रहा है। यात्री ने यह भी कहा कि ट्रेन में दिया गया पानी का स्वाद असामान्य था, जिससे उन्हें स्वच्छता को लेकर और संदेह हुआ। क्या बोला IRCTC? इस पूरे मामले पर आईआरसीटीसी की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आईआरसीटीसी ने बयान जारी कर कहा कि 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) में परोसे गए लंच की जांच की गई थी और वह संतोषजनक पाया गया। वहीं, आरसीटीसी रांची के संयुक्त महाप्रबंधक एस.जे सोरेंग ने स्पष्ट किया कि यह ट्रेन वाराणसी-देवघर रूट की है, इसलिए इस मामले में संबंधित रूट के अधिकारी ही विस्तृत जानकारी दे सकेंगे। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों ने भी इंटरनेट मीडिया पर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए रेलवे से सख्त कार्रवाई और बेहतर निगरानी की मांग की है।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की गाज और बेरोजगार हुए इंटर शिक्षकों के भविष्य पर संकट, समायोजन का सरकारी वादा अब भी अधूरा

जमशेदपुर झारखंड के डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। 31 मार्च को सभी कॉलेजों में इंटर के शिक्षकों का आखिरी कार्यदिवस रहा। इसके बाद उन्हें कॉलेज नहीं आने को कह दिया गया है। सभी शिक्षकों की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। शिक्षकों के साथ साथ इंटर सेक्शन के शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी अल्टीमेटम दे दिया गया है। उन्हें जून के बाद काम से हटा दिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था के साथ हजारों शिक्षकों के चूल्हे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 31 मार्च की वह तारीख, जो अक्सर वित्तीय वर्ष के समापन और नई शुरुआत का प्रतीक होती है, इस बार झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत पांच हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ब्लैक डे साबित हुआ है। नई शिक्षा नीति का अनुपालन नई शिक्षा नीति के अनुपालन और राज्य सरकार के कड़े रुख के बीच डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर स्थायी रूप से पूर्ण विराम लग गया है। इस फैसले ने न केवल कॉलेजों के बड़े शैक्षणिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि उन संविदा शिक्षकों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है, जिन्होंने अपने जीवन के दो-तीन दशक इन्हीं कक्षाओं में छात्रों का भविष्य संवारने में खपा दिए। आज स्थिति यह है कि इन शिक्षकों के पास न नौकरी बची है और न ही आने वाले कल की कोई स्पष्ट उम्मीद। ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा कॉलेजों में इंटरमीडिएट सेक्शन के बंद होने का असर इतना व्यापक है कि इसने एक साथ हजारों घरों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। वे शिक्षक, जो कल तक गौरव के साथ कक्षाओं में व्याख्यान देते थे, आज इन शिक्षकों की माली हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि घर का राशन जुटाना, बच्चों की स्कूल फीस भरना और बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन गया है। कई शिक्षकों ने जमा-पूंजी घर बनाने या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए कर्ज लेने में लगा दी थी, लेकिन अब उनके सामने बैंक की ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा है। स्कूलों में समायोजित करने का आश्वासन सरकार की ओर से पिछले दिनों बार-बार यह आश्वासन दिया गया था कि डिग्री कॉलेजों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई हटने की स्थिति में इन अनुभवी शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी प्लस टू (उच्च माध्यमिक) स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। शिक्षा विभाग के गलियारों में इस नीति को लेकर कई बार चर्चाएं हुईं और मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक मंचों से यह घोषणा भी की गई कि किसी भी कर्मचारी को सड़क पर नहीं आने दिया जाएगा। लेकिन 31 मार्च की समय सीमा बीतने के बाद भी समायोजन की वह फाइल कहीं दबी हुई है। आश्वासन की जिस घुट्टी के सहारे ये शिक्षक अबतक काम कर रहे थे, वह अब कड़वी हकीकत में बदल चुकी है। शिक्षक-कर्मचारी खाली हाथ इस पूरे घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल महाविद्यालयों के इंटरमीडिएट सेक्शन के बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये को लेकर भी उठ रहे हैं। झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय इंटरमीडिएट शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, कोल्हान भर के कॉलेजों के इंटर सेक्शन के खातों में छात्रों के नामांकन और अन्य शुल्कों से जमा करोड़ों की आंतरिक राशि मौजूद है। संघ का स्पष्ट कहना है कि जब यह पैसा इन्हीं शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत और छात्रों के माध्यम से जमा हुआ है तो इसे केवल बैंक खातों में सड़ाने या किसी और मद में खर्च करने के बजाय उन शिक्षकों को सम्मानजनक विदाई राशि के रूप में क्यों नहीं दिया जा रहा है, जो आज दाने-दाने को मोहताज हैं। समायोजन का सरकार का वादा अब भी अधूरा आज राज्य के हजारों शिक्षकों और इंटर कर्मचारियों के चेहरे पर छाई मायूसी केवल एक नौकरी जाने का दुख नहीं है, बल्कि उस भरोसे के टूटने का दर्द है, जो उन्होंने व्यवस्था पर किया था। सरकार का प्लस टू स्कूलों में समायोजन का वादा अब चुनावी जुमले जैसा प्रतीत होने लगा है। बेरोजगार हुए इन शिक्षकों में महिला शिक्षकों की संख्या भी अधिक है, जिनके लिए इस उम्र में दोबारा करियर शुरू करना पहाड़ जैसा कठिन है। कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी इन कॉलेजों को दे दी, इस उम्मीद में कि कभी न कभी उनकी सेवा स्थायी होगी या उन्हें बेहतर विकल्प मिलेगा, लेकिन बदले में उन्हें केवल अनिश्चितता और अपमान मिला है।

सदर अस्पताल रांची में 10 और 11 अप्रैल को लगेगा मेगा हेल्थ कैंप, दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चों की स्क्रीनिंग और ऑपरेशन की सुविधा

रांची झारखंड में जन्मजात हृदयरोग से ग्रसित बच्चों का मुफ्त उपचार किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत पीड़ित बच्चों को राज्य के बाहर भेजकर ख्यात अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी करायी जाएगी। सर्जरी के बाद फॉलोअप भी किया जाएगा। बच्चों को यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बीते फरवरी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने श्री सत्य साईं संजीवनी ट्रस्ट और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के साथ एमओयू किया है। दोनों संस्थानों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेवारी दी गयी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि 10 और 11 अप्रैल को सदर अस्पताल रांची में मेगा कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों द्वारा ईको व अन्य जांच के माध्यम से बच्चों के हृदय रोगों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के उपरांत जिन बच्चों में सर्जरी की आवश्यकता पाई जाएगी, उनका निःशुल्क ऑपरेशन अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि में कराया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर आरबीएसके समन्यवक मुकेश कुमार (मोबाइल 7250364329) और अमृता हॉस्पिटल के प्रतिनिधि आदित्य कुमार (मो. 9162999702) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सर्जरी, फॉलोअप के साथ अभिभावक के आने-जाने की भी मुफ्त सुविधा अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि द्वारा चयनित बच्चों को अमृता हॉस्पिटल में ले जाकर मुफ्त सर्जरी की जाएगी। फॉलोअप भी किया जाएगा। जबकि, श्री सत्यसाईं संजीवनी ट्रस्ट के द्वारा सर्जरी के लिए योग्य पाए गए बच्चों को ट्रस्ट द्वारा संचालित अहमदाबाद, गुजरात, पलबेल, दिल्ली, गोवा समेत पांच अस्पतालों में ले जाकर मुफ्त सर्जरी की जाएगी। बच्चों के साथ उनके अभिभाविकों को भी जाने-आने ठहरने आदि की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, ऑपरेशन के बाद बच्चों का फॉलोअप भी मुफ्त किया जाएगा। इसके लिए जमशेदपुर में ट्रस्ट के द्वारा एक केंद्र संचालित है। 3 से 4 माह के अंतराल में जिलों में होगी स्क्रीनिंग एनएचएम के साथ किए गए एमओयू के तहत दोनों संस्थाओं को अलग-अलग जिलों का जिम्मेवारी सौंपी गयी है। श्री सत्य साईं संजीवनी ट्स्ट को जहां रांची, रामगढ़, धनबाद, बोकारो, चतरा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह, सरायकेला एवं पूर्वी सिंहभूम की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। वहीं, अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि को शेष जिले आवंटित किए गए हैं। इसके साथ ही रांची, जमशेदपुर, धनबाद व गिरिडीह में दोनों संस्थाओं के द्वारा कैंप लगाए जाएंगे। ये संस्थाएं 3-4 माह के अंतराल में अलग-अलग जिलों में स्क्रीनिंग कैंप लगागर बच्चों का चयन करेंगे। अपील: पीड़ित नवजात की सूचना साझा करें एनएचएम के आईईसी कोषांग के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह ने आमजनों से अपील की है कि इस शिविर का लाभ लेने हेतु यथाशीघ्र अपने नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सदर अस्पताल में संपर्क करें। उन्होंने नगर निकाय और नगर पंचायत के सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि अपने आस-पड़ोस में हृदय रोग से ग्रसित नवजात या बच्चों के अभिभावकों से इस शिविर की जानकारी साझा करें।

राजनीतिक हलचल तेज: नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नया मुख्यमंत्री संभालेगा पद

पटना. बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा। नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा। 13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे। 16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था। इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।

श्रद्धा के नाम पर खिलवाड़, मंदिर में मची भगदड़ के बाद प्रशासन सख्त, 20 नामजद आरोपियों पर एफआईआर

नांलदा बिहारशरीफ के मघड़ा मेला हादसे में पुलिस ने चार पुजारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मेले में श्रद्धा के नाम पर घिनौना खेल उजागर हुआ है। रुपये लेकर पूजा करवाने और महिलाओं पर डंडे चलाने का आरोप पुजारियों पर लगा है। दीपनगर थाने की दारोगा मौसमी कुमारी के बयान पर इस बाबत एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें 20 नामजद व कई अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। नामजदों में 18 पंडा समाज के लोग और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। बुधवार को एसपी भारत सोनी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आरोपितों में अनुज कुमार, अवधेश कुमार मिश्रा, विवेकानंद पांडेय व निरंजन कुमार पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। एसपी ने बताया कि पूजा करने जाने के क्रम में नूरसराय के एक गांव की 17 वर्षीया किशोरी के गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि, किशोरी के भाई ने दीपनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया है कि गांव का एक किशोर बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। मामले की जांच चल रही है। गौर हो कि मंगलवार को सुबह करीब सवा नौ बजे शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हो गए थे। घायलों में तीन का इलाज पटना में चल रहा है। गेट पर बांध दिया था बांस प्राथमिकी के अनुसार, दारोगा मौसमी कुमारी को थानाध्यक्ष राजमणि ने 10 बजकर पांच मिनट पर जल्द मंदिर पहुंचने का आदेश दिया। मंदिर के पास मौजूद लोगों ने बताया कि कुछ पंडा रुपये लेकर पूजा करा रहे थे। गेट पर बांस बांध दिया था। बांस को उठाकर गर्भगृह में घुसने के क्रम में सीढ़ी पर बेहोश होकर महिलाएं गिर गयीं। अफरा-तफरी के बीच लोग उन महिलाओं के ऊपर से गुजरने लगे। इससे उनकी मौत हो गयी। हादसे के बाद जागा प्रशासन मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए बड़े हादसे के बाद पुलिस व जिला प्रशासन पूरी तरह जाग गया है। घटना से हुई क्षति, चूक व वसूली की छूट से सबक लेते हुए डीएम कुंदन कुमार व एसपी भारत सोनी ने कलेक्ट्रेट में बुधवार को जिलेभर के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों संग मैराथन बैठक की। इसमें आगामी पर्व-त्योहार, प्रतियोगिता परीक्षा, स्थानीय मेला, हाट आदि में लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन बनायी। साथ ही, डीएम ने आपदा प्रबंधन एडीएम को कर्मियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का आदेश दिया। धार्मिक संस्थानों व अन्य कार्यक्रम स्थलों पर हर हाल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फरमान जारी किया गया। सीसीटीवी कैमरे कियाशील हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम की सूचना अग्निशमन, स्वास्थ्य, बिजली, पीएचईडी व जिला आपदा विभाग के अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता डीएम डीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी तरह के आयोजन में जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी तरह की लापरवाही व शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। स्नान-दान, चैती पूर्णिमा, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे व आने आने वाले अन्य पर्व-त्योहारों में भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चिह्रित कर समुचित तैयारी की जाएगी। बिना अनुमति व अनुज्ञप्ति के किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन पर समिति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। बीडीओ की जिम्मेवारी तय डीएम ने एसडीओ व बीडीओ को आदेश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों के ‘इवेंट कैलेंडर’ तैयार कर संभावित भीड़ के पूर्वानुमान के आधार पर सभी तरह का पुख्ता प्रबंध करें। कार्यक्रमों के आयोजन से पहले समिति के सदस्यों को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करना अनिवार्य होगा।