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नीट स्टूडेंट केस में सनसनी, 18-21 साल के युवक की पहचान पर सवाल

पटना  बिहार की राजधानी पटना में NEET स्टूडेंट संग रेप और मर्डर मामले में नया मोड़ आया है. नीट छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मिले स्पर्म को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जी हां, एफएसएल यानी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है. FSL के आधिकारिक सूत्र का कहना है कि पटना में नीट की तैयारी करने वाली छात्रा के अंडरगारमेंट पर मिला स्पर्म 18 से 21 साल के किसी लड़के का है. अब तक इस केस में शक की सुई शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की तरफ घुमी हुई थी. मगर इस खुलासे ने मामले को और उलझा दिया है. दरअसल, नीट छात्रा संग रेप और मर्डर मामले में एफएसएल के आधिकारिक सूत्र ने नया खुलासा किया है. इसके मुताबिक, पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी करने वाली मृतक छात्रा के अंडरगारमेंट पर जो स्पर्म पाया गया था, वो 18 से 21 वर्ष के लड़के का है. अब सवाल है कि आखिर वो लड़का कौन है? क्या वही है नीट छात्रा का कातिल? क्यों अब तक उसका कुछ पता नहीं चल पाया? इन सभी सवालों का जवाब तलाशने में पुलिस जुट गई है. सूत्रों का कहना है कि एफएसल की रिपोर्ट आने के बाद अब एसआईआट ने इस उम्र के उस लड़के की तलाश तेज कर दी है. सूत्रों का कहना है कि 18 से 21 साल का यह लड़का, मृतक छात्रा का करीबी या हॉस्टल से जुड़ा है. खुलासा से नया मोड़ बता दें कि यह खुलासा ने पूरे केस को नया मोड़ दे दिया है, जहां शुरू में इसे सुसाइड बताया जा रहा था. परिवार और आम लोग न्याय की मांग कर रहे हैं, और पटना की सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. 18 साल की यह छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी. वह पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET एग्जाम की तैयारी कर रही थी. 6 जनवरी 2026 को शाम को वह अपने कमरे में बेहोश मिली थी. हॉस्टल के कर्मचारी उसे NMCH हॉस्पिटल ले गए, जहां वह कोमा में चली गई. इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. कैसे-कैसे उलझता गया केस सूत्रों की मानें तो शुरू में पुलिस ने इसे सुसाइड का मामला बताया. कहा गया कि छात्रा ने ज्यादा नींद की गोलियां खा लीं और वह टाइफाइड से भी पीड़ित थी. लेकिन परिवार ने आरोप लगाया कि यह सुसाइड नहीं, बल्कि रेप और हत्या है. उन्होंने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन और अन्य पर शक जताया. परिवार का कहना था कि पुलिस ने तीन दिन तक हॉस्टल सील नहीं किया, जिससे सबूत मिटाने का मौका मिल गया. मगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई सामने ला दी. पोस्टमॉर्मट रिपोर्ट से खुला राज पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर कई चोटें मिलीं, जैसे गर्दन और प्राइवेट पार्ट्स पर निशान. यह साफ हो गया कि मौत से पहले उसके साथ यौन हिंसा हुई थी. एफएसली की टीम ने छात्रा के कपड़े और अंडरगारमेंट जांचे, जहां मेल स्पर्म के निशान मिले. इस स्पर्म के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया. इसके बाद उम्र का पता चला है. सूत्रों का कहना है कि जिसका सैंपल मिला है, वह छात्रा का दोस्त, रिश्तेदार या हॉस्टल से जुड़ा कोई हो सकता है.

बिहार में आपदा से निपटने 20 जिलों में बनेंगे इमरजेंसी रिस्पॉन्स व ट्रेनिंग सेंटर

पटना. बिहार में आपदा प्रबंधन को और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने दूसरे चरण में प्रदेश के 20 जिलों में “डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स फैसिलिटी-कम-ट्रेनिंग सेंटर” की स्थापना का ऐलान किया है। इससे आपदा के समय त्वरित राहत, बेहतर समन्वय और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत होगी। 38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से बनेगा आपदा केंद्र आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से यह केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है। फिलहाल पहले चरण में 18 जिलों का चयन किया गया था, जिनमें से 17 जिलों में केंद्र पूरी तरह चालू हो चुके हैं, जबकि पटना जिले में निर्माण कार्य प्रगति पर है। दूसरे चरण में 20 जिलों में निर्माण कार्य संयुक्त सचिव ने बताया कि दूसरे चरण में भूमि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए 20 जिलों में केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। इन केंद्रों में अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जहां एसडीआरएफ टीमों की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरणों का भंडारण और आपातकालीन समन्वय की व्यवस्था रहेगी। आपदा राहत में बड़ा फैसला: अनुग्रह राशि बढ़ी राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों को मिलने वाली ग्रैच्युटस रिलीफ राशि 6000 रुपये से बढ़ाकर 7000 रुपये कर दी है। सिद्दीकी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बाढ़ प्रभावित जिलों के 9,71,678 परिवारों को कुल 680.17 करोड़ रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। बाढ़ आश्रय स्थलों का तेजी से निर्माण आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए राज्य के 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 “बाढ़ आश्रय स्थल” बनाए जा रहे हैं। इनमें से 96 आश्रय स्थल पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष चार का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इन जिलों में कटिहार, सीतामढ़ी, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, पूर्णिया, किशनगंज, दरभंगा, शिवहर, अररिया और मधुबनी शामिल हैं। 312 करोड़ का अत्याधुनिक SDRF मुख्यालय संयुक्त सचिव ने बताया कि 19 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहटा में बने नए एसडीआरएफ मुख्यालय भवन का उद्घाटन किया था। यह भवन 312.30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जिसमें प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र और आवासीय परिसर शामिल हैं। इससे राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

धनबाद में मेयर और 55 वार्ड पार्षद पदों की नामांकन प्रक्रिया शुरू

धनबाद. नगर निकाय चुनाव के धनबाद नगर निगम के मेयर और 55 वार्ड पार्षद के लिए नामांकन गुरुवार की सुबह 10 बजे से आरंभ हो गया। इसको लेकर उपायुक्त कार्यालय में पूरी तैयारी कर ली गई है। सुबह 9:30 बजे से ही सदर अनुमंडल पदाधिकारी धनबाद लोकेश बारंगे उपायुक्त कार्यालय में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे। मेमको मोड़ से लेकर निर्वाची पदाधिकारी के कार्यालय तक का उन्होंने निरीक्षण किया। दो जगहों पर रोके जाएंगे समर्थक नामांकन को लेकर सुरक्षा पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। उपायुक्त कार्यालय के अंदर अत्यधिक भीड़ न हो और चुनाव के अलावा अन्य कामों में बाधा न पहुंचे इसका विशेष ख्याल रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मेमको मोड़ और निरंकारी चौक पर बैरियर लगाया गया है। यहां से प्रत्याशियों के केवल तीन वाहनों को ही आगे जाने की अनुमति है। इसके अलावा दूसरा बैरियर उपायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट पर है। प्रत्याशियों को अपना वाहन यहीं छोड़ना होगा। इसके बाद वे अपने प्रस्तावक और अधिवक्ता के साथ ही अंदर जा पाएंगे। इन जगहों पर पुलिस की तैनाती की गई है। पूर्व मेयर करेंगे नामांकन  धनबाद नगर निगम के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल गुरुवार को अपना नामांकन करेंगे। नामांकन से पूर्व वे झरिया के श्री श्याम मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद समर्थकों के साथ उपायुक्त कार्यालय धनबाद के लिए रवाना होंगे। इस बीच वे धनबाद के शक्ति मंदिर में पूजा करेंगे।

बिहार में ‘कृषि सुपर बाजार’ का किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

पटना. बिहार में अब किसान अपनी उपज के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे। राज्य सरकार ने कृषि विपणन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कृषि रोड मैप (2023-28) के तहत प्रदेश के कृषि उपज बाजार प्रांगणों को आधुनिक “कृषि सुपर बाजार” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सके। इस संबंध में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि राज्य में कुल 53 कृषि उपज बाजार प्रांगण कार्यरत हैं, जिनमें से 22 बाजार प्रांगणों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इन बाजारों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। इन 22 बाजारों का हो रहा आधुनिकीकरण आधुनिकीकरण की सूची में सासाराम, बेगूसराय, कटिहार, फारबिसगंज, जहानाबाद, दरभंगा, किशनगंज, छपरा, बिहटा, पूर्णिया (गुलाबबाग), मुसल्लहपुर (पटना), आरा, हाजीपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, गया, बेतिया, दाउदनगर, मोहनिया और स्मार्ट सिटी योजना के तहत बिहारशरीफ कृषि बाजार समिति शामिल हैं। कृषि रोड मैप बना ‘गेम चेंजर’ कृषि मंत्री ने बताया कि दाउदनगर, वैशाली, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और मोहनिया बाजार प्रांगणों में विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य बाजारों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यहां आधुनिक शेड, पक्की सड़कें, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, कार्यालय भवन और भंडारण जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। किसानों को मिलेगा डायरेक्ट प्रॉफिट उन्होंने कहा कि बाजार प्रांगणों के विकास का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाना है। भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्द्धन की सुविधाओं से किसानों की बाजार पहुंच मजबूत होगी और बिचौलियों की भूमिका स्वतः कम हो जाएगी। ई-नाम से जुड़कर खुलेगा राष्ट्रीय बाजार राज्य के 20 कृषि उपज बाजार प्रांगणों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) से जोड़ा जा चुका है। इससे किसान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर में अपनी फसल बेच पा रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी और किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन में आधे घंटे लेट हुए तो साल होगा बर्बाद

पटना. बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) की ओर से 12वीं की परीक्षाएं 2 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली हैं. 12वीं के एग्जाम 13 फरवरी 2026 को खत्म होंगे. एग्जाम शांतिपूर्ण माहौल में और सही तरीके से हो इसके लिए बोर्ड की ओर से जरूरी गाइडलाइंस जारी किए गए हैं. अगर आप भी परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो ये गाइडलाइंस यहां देखें. बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) की ओर से 12वीं के एग्जाम 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित किए जाएंगे. एग्जाम शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में हो, इसके लिए बोर्ड ने एंट्री और गेट बंद करने को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं. बोर्ड ने सभी स्टूडेंट्स से अपील की है कि वे इन नियमों को गंभीरता से फॉलो करें. एंट्री को लेकर क्या हैं नियम? बोर्ड के अनुसार, सभी स्टूडेंट्स को अपने एग्जाम सेंटर पर परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले पहुंचना जरूरी होगा. पहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी, जबकि दूसरी शिफ्ट का परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से होगी. आधे घंटे पहले बंद होगा मेन गेट BSEB ने साफ किया है कि एग्जाम सेंटर का मेन गेट एग्जाम शुरू होने से ठीक 30 मिनट पहले बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी स्टूडेंट को अंदर एंट्री नहीं मिलेगी. बोर्ड ने सलाह दी है कि स्टूडेंट्स ट्रैफिक और भीड़ से बचने के लिए समय से पहले घर से निकलें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो. देर से पहुंचने वालों को नहीं मिलेगी एंट्री बोर्ड की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जो स्टूडेंट्स लेट पहुंचेंगे, उन्हें किसी भी हालत में एग्जाम सेंटर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. ऐसे स्टूडेंट्स को उस दिन का एग्जाम देने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए सभी कैंडिडेट्स के लिए जरूरी है कि वे समय का पूरा ध्यान रखें और समय से पहले सेंटर पर पहुंचें.

‘5 वर्षों में बिहार में ही मिलेगा रोजगार, अब बाहर नहीं जाना होगा’: सम्राट चौधरी

समस्तीपुर. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि हम न्याय यात्रा और प्रगति यात्रा में आपके बीच आए थे। क‌ई योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य लिया था। सभी का कार्य शुरू किया गया है। सभी की समीक्षा जारी है। पूरे वादे को 2026 में पूरा करने का किम किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा बीस साल पहले कैसा बिहार था। गांव में बिजली, सड़क, पानी, पंचायत भवन और हाई स्कूल नहीं था। नीतीश ने पूरी व्यवस्था को बदला। आज विकास गांव गांव तक पहुंचा। मोदी सरकार ने गांव गांव बिजली की बात कही उससे बढ़कर नीतीश कुमार ने घर घर पहुंचने की बात कही।  महिलाओं की अपील पर मुफ्त बिजली सम्राट चौधरी ने कहा महिलाओं की अपील पर मुफ्त बिजली की योजना बनाई गई। जिस बिहार में 17 लाख उपभोक्ताओं थै। 2.54 लाख उपभोक्ताओं तक पहुंचाया। 1.90 घरेलू उपभोक्ताओं। 1.70 करोड़ का बिजली बिल जीरो आ रहा। सीएम संवाद में रोजगार की बात आयी। सीएम ने 1.56 करोड़ को रोजगार के लिए पैसा दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा क‌ई बहनें कह रही कि हम बकरी पालन, दुकान, सिलाई आदि का काम कर रहे। जो बहनें आगे रोजगार करती रहेगी। उसे दो लाख की सहायता मिलेगी। पंचायत सरकार भवन बन रहा। डिग्री कालेज नहीं है। सभी प्रखंड में अगले दो वर्ष में खोला जाएगा। गांव में बिजली, पानी, सड़क की व्यवस्था होगी।   पांच साल रोजगार की बात होगी सम्राट चौधरी ने कहा आने वाले पांच साल रोजगार की बात होगी। उद्योग के लिए एक रुपया में जमीन मिलेगी। 500 करोड़ से अधिक का उद्योग लगाने वालों को। रोजगार लेने बाहर नहीं जाना पड़ेगा। सेमी कंडक्टर के माध्यम से उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इसका जंक्शन समस्तीपुर को बनाया है। सभी फोरलेन का कनेक्शन यहां से ही होगा। विकास की किरण यहां लगातार पहुंच रही है। अंत में उन्होंने कहा अच्छा रोजगार करने प्रदेश जा रहा है तो जाए मजदूरी के लिए जाने की जरूरत नहीं है। उसे पांच वर्ष के भीतर यहां रोजगार दिया जाएगा। 10 में 8 सीट देने के लिए कार्यकर्ता और आम जनता का आभार।

झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ. असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा? असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है. वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है. हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है. गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है? सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके. गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें. हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है? कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.

बिहार बोर्ड का निर्देश- परीक्षा केंद्र में जबरन घुसने पर अब 2 साल का निष्कासन

पटना. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) द्वारा आयोजित इंटर की वार्षिक परीक्षा दो फरवरी से शुरू हो रही। यह परीक्षा 13 फरवरी तक चलेगी। जबकि मैट्रिक परीक्षा 17 से फरवरी तक संचालित होगी। परीक्षा समिति ने कहा है कि परीक्षार्थियों को निर्धारित समय से आधे घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा। निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पर पहुंचने वाले परीक्षार्थी अगर जबरन या अवैध रूप से परीक्षा केंद्र में प्रवेश करते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह नियम इंटर और मैट्रिक परीक्षा दोनों में लागू रहेगा। इंटर व मैट्रिक परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले सभी परीक्षार्थियों को दोनों पालियों में परीक्षा शुरू होने से कम-से-कम एक घंटा पहले परीक्षा केंद्र में प्रवेश करना अनिवार्य होगा। वहीं परीक्षा कक्ष के मुख्य द्वार को परीक्षा प्रारंभ होने के आधे घंटे पहले बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। समिति ने कहा है कि यदि कोई परीक्षार्थी निर्धारित समय से विलंब से पहुंचने के बाद बाउंड्री फांदकर या गेट पर जबरदस्ती कर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो उसे क्रिमिनल ट्रेसपास का दोषी माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित परीक्षार्थी को दो वर्षों के लिए परीक्षा से निष्कासित किया जाएगा तथा उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। केंद्राधीक्षक पर भी होगी कार्रवाई परीक्षा समिति ने कहा है कि परीक्षा केंद्र में परीक्षार्थियों को जबरन प्रवेश कराने या परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने वाले केंद्राधीक्षक और अन्य जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ भी निलंबन एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समिति ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्ती से लागू की जाए और नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त न किया जाए। परीक्षा समिति ने परीक्षार्थियों और अभिभावकों से अपील किया है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचकर सभी औपचारिकताएं पूरी करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। इंटर की 1762 व मैट्रिक की 1699 परीक्षा केंद्रों पर होगी परीक्षा मैट्रिक की सैद्धांतिक परीक्षा 17 से 25 फरवरी तक होगी। मैट्रिक वार्षिक परीक्षा में 15 लाख 12 हजार 963 परीक्षार्थी शामिल होंगे। इसके लिए 1,699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इंटर वार्षिक परीक्षा में 13 लाख 17 हजार 846 परीक्षार्थी शामिल होंगे। इसके लिए 1,762 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इंटर की परीक्षा दो से 13 फरवरी तक संचालित होगी।

सरकारी अस्पतालों में ‘दलाल राज’ खत्म करने के लिए बनेगा ‘धावा दल’

पटना. सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा जेब भरने वाले दलालों की अब खैर नहीं है। यही नहीं उनका साथ देने वाले डॉक्टरों व अन्य चिकित्साकर्मियों की संलिप्तता साबित होने पर उनके खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इस बाबत मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल, जिला-अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व स्वास्थ्य उपकेंद्रों के औचक निरीक्षण के लिए धावा दल गठित करने को कहा है।  राज्यस्तर पर नोडल पदाधिकारी बनाया गया इस छापामार दल में वरीय उप समाहर्ता, जिलास्तरीय अन्य अधिकारी व सरकारी अस्पताल के डॉक्टर रहेंगे जो अस्पताल-अस्पताल जाकर जांच करेंगे। हर दिन की कार्रवाई की समीक्षा के लिए राज्यस्तर पर अपर सचिव धनंजय कुमार को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। वहीं जिला स्तर पर भी नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे जो जिले में की गई हर दिन की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग को भेजेंगे। स्वास्थ्य सचिव ने डीजीपी को भी पत्र भेज सभी जिलों के एसपी-एसएसपी को अस्पतालों की जांच कराने का अनुरोध किया है। सख्त कानूनी कार्रवाई तय पत्र में स्वास्थ्य सचिव ने लिखा है कि लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को जानबूझकर गुमराह कर महंगे निजी अस्पतालों, जांच घरों और दवा दुकानों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसके लिए परिसर में निजी नर्सिंग होम, निजी जांच केंद्र-रेडियो डायग्नोसिस व दवा दुकानदारों के कर्मचारियों का जमावड़ा रहता है। इलाज के लिए आए मजबूर मरीजों को गुमराह कर सरकारी सुविधाओं से वंचित व महंगे निजी इलाज में झोंका जा रहा है। ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ आमजन को सरकारी चिकित्सा सुविधा से वंचित व जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा पहुंचाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जानी अपेक्षित है। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में सक्रिय दलालों, निजी नर्सिंग होम एजेंटों व जांच माफिया के खिलाफ सख्त व सघन कार्रवाई की जरूरत है। मिलीभगत पर सरकारी कर्मी भी नहीं बचेंगे पत्र में सबसे बड़ा संदेश यह है कि अगर किसी सरकारी डॉक्टर या कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। उस पर भी कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई होगी। हर दिन की कार्रवाई की प्रगति सीधे स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाएगी।

जमशेदपुर में कैरव के आठ किडनैपर दबोचे

रांची/ जमशेदपुर. झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के व्यवसायी पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले में जमशेदपुर पुलिस ने अपनी पेशेवर कार्यकुशलता और रणनीति का लोहा मनवाते हुए बड़ी सफलता हासिल की है. कैरव की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के बाद पुलिस कप्तान के निर्देश पर चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत गिरोह के आठ अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने अपराधियों के पास से दो एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हिकल्स) गाड़ियां और अवैध हथियार भी बरामद किए हैं. फिलहाल, पकड़े गए अपराधियों से अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर पूछताछ की जा रही है.   पुलिस ने सादे लिबास में बिछाया जाल सूत्रों के अनुसार, पुलिस को अपराधियों के मूवमेंट की सटीक जानकारी मिल चुकी थी. हजारीबाग के बरही इलाके में पुलिस की विशेष टीम ने सादे लिबास में मोर्चा संभाला था. अपराधियों को भनक तक नहीं लगी कि उनकी हर हरकत पर खाकी की पैनी नजर है. जैसे ही पुख्ता जानकारी मिली, पुलिस ने घेराबंदी कर आठों को दबोच लिया. जिस जगह से पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार किया है, वह पहले भी कई बार डील के लिए प्रमुख और गोपनीय स्थल के रूप में फेमस है. बरामद गाड़ियों को जमशेदपुर के एक थाने में लाकर रखा गया है. एसएसपी का संकल्प हुआ पूरा मंगलवार को जब व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस का आभार जताने पहुंचा था, तब एसएसपी ने स्पष्ट कर दिया था कि पुलिस की पहली प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षित रिहाई थी. उन्होंने सांकेतिक रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा था कि अपराधी जल्द सलाखों के पीछे होंगे. बुधवार सुबह जैसे ही गिरफ्तारी की खबर सार्वजनिक हुई, शहर के औद्योगिक और व्यापारिक जगत में पुलिस के प्रति विश्वास और बढ़ गया है. मास्टर माइंड की तलाश तेज गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस गिरोह के नेटवर्क और इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड के बारे में उगलवाने में जुटी है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सनसनीखेज वारदात में शहर के किन स्थानीय गुर्गों ने मदद की थी. एसएसपी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा कर सकते हैं.