samacharsecretary.com

बैलगाड़ी से निकली बारात ने देसी थीम वाली शादी की ताजा की यादें

समस्तीपुर. शहर की सड़कों पर बुधवार की शाम कुछ अलग ही था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न रोशनी की चकाचौंध, न लग्जरी गाड़ियों की कतार। अगर कुछ था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल तान। यह नजारा देख हर राहगीर ठिठक गया, मोबाइल कैमरे निकल आए और एक ही सवाल गूंजने लगा, अब भला बैलगाड़ी से भी कोई बरात जाता है?  आलोक की अनूठी शादी यह अनोखी और पूरी तरह देसी थीम वाली बरात शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी की थी। गोला रोड स्थित होटल से जब शाम ढलते ही बरात निकली, तो मानो समय कुछ पल के लिए पीछे लौट गया। दूल्हा रथ पर सवार था। सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे-पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।  बैलगाड़ी की शाही सवारी  इन बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती किसी शाही सवारी का आनंद ले रहे थे। कहीं सोफा सेट लगे थे, तो कहीं गद्दों पर बैठकर लोग लोकधुनों के साथ झूम रहे थे। करीब दो किलोमीटर का यह सफर तय कर जब बरात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची, तब तक यह केवल एक विवाह जुलूस नहीं रह गई थी, बल्कि चर्चा का विषय बन चुकी थी। इस बारात की खास बात यह थी कि यह पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त थी। न धुएं का गुबार, न शोर-शराबा। सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ी के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की तान ने ऐसा दृश्य रचा, जैसे गांव की आत्मा खुद इस विवाह की साक्षी बन गई हो। पर्यावरण संरक्षण का संदेश कार्यक्रम संयोजक और पशुप्रेमी महेंद्र प्रधान बताते हैं कि इस देसी और पर्यावरण-संवेदनशील आयोजन के लिए आसपास के गांवों से 35 जोड़ी बैलगाड़ियों को बुलाया गया था। सभी को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया। कुछ खास मेहमानों के लिए बैलगाड़ियों पर सोफा लगाए गए, जबकि बाकी में गद्दों की व्यवस्था की गई थी। जब यह अनोखी बरात सड़क पर निकली, तो देखने वालों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान एक साथ थी। किसी ने कहा,“यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर मेल बताया। शोर और दिखावे के इस दौर में यह देसी थीम वाली शादी यह संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है। वहीं दूल्हा आलोक ने कहा कि कुछ अलग करने की चाहत थी, लेकिन उसका यह स्वरूप होगा, सोचा नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को दी राहत, ED की खिंचाई, CJI ने दी अहम नसीहत

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रांची की MP-MLA कोर्ट की विशेष अदालत में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही ED को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है। सीजेआई की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ED के जवाब के बाद ही मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।  

प्रशांत किशोर का समस्तीपुर दौरा: नव निर्माण के संकल्प के साथ कार्य की शुरुआत

समस्तीपुर समस्तीपुर में जन सुराज के संस्थापक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहुंचे। वे बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत जिले के रोसड़ा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठनात्मक मजबूती और आने वाली रणनीति पर चर्चा की। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जन सुराज का यह अभियान केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सही मायनों में जनता की आवाज बनना है। उन्होंने कहा कि वे साथियों से संवाद करने, उनकी राय सुनने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए यहां आए हैं। शराबबंदी कानून पर किया तंज प्रशांत किशोर ने शराबबंदी कानून पर तंज कसते हुए कहा कि यदि शराबबंदी कानून से महिलाओं को इतना ही फायदा हो रहा है, तो इसे पूरे देश में लागू क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ बिहार के लोगों को ही इसका तथाकथित फायदा क्यों मिल रहा है। एनडीए सरकार को बिहार के साथ ही पूरे देश में इसे लागू करना चाहिए, ताकि सभी लोगों को इसका लाभ मिल सके। जन सुराज के साथियों ने गांधी आश्रम, चंपारण से जो बिहार को बदलने का संकल्प लिया था, चुनाव परिणाम आने के बाद भी जन सुराज के साथी पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे एक बार पुनः बिहार के नव निर्माण को लेकर कार्य शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले जन सुराज के साथियों को फिर से संगठित किया जाए और उन्हें पुनः प्रेरित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक जिले में जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है। उनसे यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किन कारणों से वे पिछड़ गए और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। जन सुराज किन मुद्दों को लेकर आगे बढ़े, इस पर भी विचार किया जा रहा है। मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना, जेपी सिंह, ललन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह, विश्वनाथ चौधरी, सुरेंद्र गुप्ता, इंदु गुप्ता, रोहित पासवान, अभिषेक आनंद सहित अन्य मौजूद थे।

गुजराती सहकारी मॉडल से बिहार में होगी जैविक खेती और ग्रामीण विकास

पटना. सहकारिता विभाग द्वारा गुजरात में सफल सहकारी समितियों के माडल को लागू कराने की तैयारी हो रही है। इसके लिए विभागीय स्तर से सहकारी समितियों के 50-50 लोगों की टीम गुजरात के दौरे पर भेजी जाएगी। ये टीमें गुजरात में कार्यरत सहकारी समितियों के कार्यों का अवलोकन और अध्ययन करेंगी। बिहार में 28 हजार सहकारी समितियां हैं जिनके अध्यक्षों व सचिवों के अलावा सदस्यों की अलग-अलग टीम बनाकर गुजरात भेजी जाएगी। वहां से लौटने के बाद संबंधित सहकारी समितियों को गुजरात में कार्यरत समितियों की तरह कार्य करने हेतु प्रेरित किया जाएगा। हाल में गुजरात में कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर लौटे सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि गुजरात में सामूहिक जैविक खेती जैसे नवाचार सफल माडल साबित हुआ है। गुजरात में सहकारी समितियां किसानों को सीधे जोड़कर, उन्हें जैविक खेती का प्रशिक्षण, प्रमाणित जैविक इनपुट (बीज, खाद) और उत्पाद की अच्छी मार्केटिंग सुनिश्चित करके जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। भारत ऑर्गेनिक जैसी संस्थाएं और डेयरी, गोबर से खाद बनाकर और फसलों की जैविक खरीद-बिक्री के लिए जीयूजेको और अमूल जैसे नेटवर्क का उपयोग करती हैं। जब गुजरात से ऐसी सहकारी समितियों का कार्यानुभव लेकर टीम लौटेगी तब जैविक खेती में गुजरात मॉडल का सफल प्रयोग सहकारी समितियों के सहयोग से किया जाएगा। जैविक खेती में नवाचार दिखाने वाले किसानों की ब्रांडिंग से लेकर मार्केटिंग की व्यवस्था की जाएगी। जैविक उत्पादों की खरीद और बेहतर मूल्य से लेकर बाजार उपलब्ध कराने की कार्य योजना बनायी जाएगी। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे उत्पादों को पंजीकरण कराने से लेकर प्रमाणन की व्यवस्था भी होगी। गुजरात के भरूच जैसे क्षेत्रों में केले के तने से रेशा और वर्मी कम्पोस्ट जैसे जैविक उत्पाद बनाकर आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह के कार्य उत्तर बिहार के केला उत्पादन वाले इलाकों में बखूबी संभव है। इसी तरह गुजरात में अमूल जैसी सफल सहकारी संस्थाओं की कार्यशैली ने वहां ग्रामीण आजीविका को नई ताकत दी है। यह कार्य बिहार में भी सहकारी समितियों से होगा। स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के अवसर सहकारिता विभाग ग्रामीण इलाकों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय युवकों को रोजगार के अवसर देने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए टैक्सी सर्विस स्कीम भी लॉन्च करने की योजना बन रही है। इससे स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार प्रदान करने की मदद मिलेगी। गुजरात में महिलाओं द्वारा संचालित दुग्ध समितियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही प्रयोग बिहार के सभी गांवों में महिलाओं द्वारा दुग्ध समितियों के संचालन में होगा।हर गांव में दुग्ध सहकारी समिति गठित की जा रही है। प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर प्लांट जैसी नई इकाईयां लगायी जाएंगी। जाहिर है, इससे डेयरी क्षेत्र में रोजगार बढ़ेंगे। तकनीक और पारदर्शिता पर जोर डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने से भी सहकारी समितियों को ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता लाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सहकारी समितियों के सदस्य किसानों का भरोसा और मजबूत हो। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी की जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और नई योजनाओं को लागू करने पर फोकस किया जा रहा है।

अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट की फटकार- ‘कमेटी नहीं, कार्रवाई बताइए’

रांची. झारखंड में जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी खरीद-बिक्री के मामलों पर अदालत का रुख और कड़ा हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से साफ शब्दों में कहा कि “कमेटी पर कमेटी बनाने का कोई औचित्य नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।” अदालत ने मुख्य सचिव से स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। सीएनटी लागू होने के बाद भी भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं होने से कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। SOP बनी नहीं, समीक्षा किस बात की? चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब अवैध कब्जे रोकने के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अभी तक बनी ही नहीं, तो उसकी समीक्षा के लिए नई कमेटी बनाने का क्या मतलब है? पूर्व में गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने नए कानून की जरूरत से इनकार करते हुए कहा था कि राज्य में पहले से ही सीएनटी और एसपीटी एक्ट लागू हैं। जरूरत सख्त अमल और स्पष्ट एसओपी की है। बावजूद इसके सरकार की ओर से एक और कमेटी गठित करने की बात अदालत को रास नहीं आई। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की जमीन पर कब्जे की कोशिश मामला तब और गंभीर हो गया जब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस इकबाल की जमीन पर कब्जे की कोशिश सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सरकार से जवाब तलब किया। न्याय मित्र अतनु बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखा और राज्य में दखल-दिहानी, फर्जी रजिस्ट्री व अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। RIMS जमीन बिक्री कांड: ACB के नोटिस से मची खलबली इधर, रांची में बहुचर्चित RIMS जमीन बिक्री मामले में जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़गाईं अंचल के वर्तमान व तत्कालीन सीओ, अंचल कर्मियों, स्थानीय अमीन, राजस्व कर्मचारियों और कथित जमीन दलालों को नोटिस भेजा है। सभी से पूछताछ की तैयारी है। जांच में प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि वर्ष 1993 के बाद से अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जे और गलत रजिस्ट्री के प्रमाण मिले हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद दाखिल-खारिज और निबंधन किए जाने में लापरवाही व संभावित मिलीभगत की बात जांच में उभरकर आई है। गौरतलब है कि यह जांच हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। क्या होगा आगे? मुख्य सचिव से कोर्ट में विस्तृत जवाब एसओपी पर स्पष्ट टाइमलाइन ACB की पूछताछ के बाद संभावित एफआईआर/चार्जशीट अवैध रजिस्ट्री रद्द करने और कब्जा हटाने की कार्रवाई झारखंड में जमीन से जुड़े घोटालों और अवैध कब्जों पर अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। अदालत के सख्त तेवर और एसीबी की सक्रियता से आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे संभव हैं।

तिब्बत को लेकर नितिन नवीन का गंभीर आरोप, नेहरू पर लगाए ऐतिहासिक चूक के आरोप

पटना भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोला है। बुधवार सुबह उन्होंने उन्होंने इसे ‘समझौता मिशन’ की राजनीति बताते हुए आरोप लगाया कि परिवार के हितों को देशहित से ऊपर रखा गया। नवीन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में बिना किसी प्रतिफल के तिब्बत में भारत के अधिकार चीन को सौंप दिए। उन्होंने कहा कि नेहरू ने कभी 45 करोड़ भारतीयों को अपनी ‘जिम्मेदारी’ बताया था, लेकिन उनके फैसलों ने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया। राजीव गांधी के कार्यकाल पर सवाल भाजपा अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय रक्षा सौदों का इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि रक्षा सेवाओं के माध्यम से निजी बैंक खातों को भरने का काम हुआ। राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप नवीन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘विदेशी शक्तियों की कठपुतली’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस का चुनावी इतिहास कथित तौर पर सीआईए फंडिंग से प्रभावित रहा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने 247 से अधिक विदेशी यात्राएं कीं, जिनमें कई बार सुरक्षा एजेंसियों को सूचना नहीं दी गई। उन्होंने विदेशी नेताओं, जैसे इल्हान ओमर और निवेशक जॉर्ज सोरोस से मुलाकातों पर भी सवाल उठाए। सोनिया गांधी को लेकर क्या कहा? नवीन ने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के जरिये सोनिया गांधी ने ‘सुपर प्रधानमंत्री’ की तरह काम किया और समानांतर सरकार चलाई। उन्होंने दावा किया कि इसी दौरान राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी सरकार और जॉर्ज सोरोस के नेटवर्क से फंडिंग मिली। युवा और राष्ट्रहित पर जोर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश का युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है। यदि उसे गुमराह करने की कोशिश की जाती है तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जनता अब तथाकथित ‘समझौता मिशन’ को समझ चुकी है और भविष्य में वही नेतृत्व स्वीकार करेगी जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। उन्होंने कहा कि देश की जनता राष्ट्रहित के मुद्दों पर सजग है और आने वाले समय में वही नेतृत्व चुनेगी जो देश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

बिहार की लाखों महिलाओं को ‘मुफ्त गैस कनेक्शन’ का केंद्र सरकार ने दिया गिफ्ट

पूर्णिया. केंद्र सरकार ने बिहार की लाखों महिलाओं को खुशखबरी दी. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन देने को लेकर मंजूरी मिल गई है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से बिहार को 25 लाख उज्ज्वला कनेक्शन स्वीकृत किए हैं. दरअसल, यह मुफ्त गैस कनेक्शन बीपीएल परिवार को मिलना है जो कि अब तक पारंपरिक तरीके से खाना बनाने यानी कि लड़की या फिर कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने के लिए निर्भर हैं. मंत्रालय ने दिया ये आदेश जानकारी के मुताबिक, 25 लाख कनेक्शन देने को लेकर राज्य सरकार के साथ-साथ गैस कंपनियों को भी मंत्रालय की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है. केंद्र से आदेश मिलते ही खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के विशेष सचिव उपेंद्र कुमार ने राज्य के सभी जिलों में आदेश जारी किया. केंद्र सरकार के इस कदम से बिहार की लाखों महिलाओं को सहूलियत मिलेगी. विशेष सचिव ने और क्या कहा? विशेष सचिव की ओर से कहा गया कि गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया को जितना हो सके आसान बनाए. इसके साथ ही कोई भी लाभार्थी छूट ना जाएं, इसका खासकर ध्यान रखें. इसके अलावा लोगों के बीच जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है. केंद्र सरकार की इस योजना से ना सिर्फ बिहार में लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा. मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने से बड़ा फायदा जानकारी के मुताबिक, इस योजना को लेकर सभी जिलों में उज्ज्वला समिति गठित की गई है. इस योजना को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. लड़कियों की कटाई के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा. मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने की वजह से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा.

गोड्डा-महागामा निकाय चुनाव का दोपहर तक जारी होगा रिजल्ट

गोड्डा. गोड्डा नगर परिषद और महागामा नगर पंचायत में चुनाव संपन्न होने के बाद अब सब की निगाह मतगणना पर टिकी है। निकाय चुनाव की मतगणना आगामी 27 फरवरी को निर्धारित है। चुनाव बैलेट पेपर से हुआ है, लिहाजा मतगणना में विलंब की आशंका है, लेकिन आयोग ने इसका पुख्ता इंतजाम किया है। सदर प्रखंड के सिकटिया पालिटेक्निक कॉलेज स्थित वज्रगृह परिसर में शुक्रवार को मतपेटियों का पिटारा खुल जाएगा। उसमें दर्ज जनता के वोटों की गिनती से तय होगा कि गोड्डा और महागामा निकाय में शहर की सरकार किसकी बनेगी। 8 बजे से शुरू होगी मतगणना राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार गोड्डा के सिकटिया पालिटेक्निक कॉलेज परिसर में शुक्रवार की सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू होगी। आयोग ने गोड्डा और महागामा के कुल 64 बूथों के लिए अलग-अलग 64 टेबल बनाए हैं। यहां एक ही राउंड में सभी बूथों के मतों की गिनती पूरी कर ली जाएगी। लिहाजा दोपहर तक चुनाव परिणाम सामने आ जाएंगे। इसको लेकर मतगणना स्थल में आयोग की तैयारी पूरी की जा रही है। बुधवार को मतगणना कर्मियों को अंतिम दौर का प्रशिक्षण मिलेगा। पूर्व में ही उन्हें मास्टर ट्रेनर की ओर से प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में कर्मियों को यह बताया गया है कि वोटों की गिनती कैसे होती है। काउंटिंग हाल में कौन-कौन मौजूद रह सकता है। गड़बड़ी होने पर इसकी शिकायत कहां की जा सकती है। मतगणना से जुड़ी जानकारी को गुप्त रखना जरूरी है। मतगणना से पहले कौन से अधिकारी किस निर्वाचन क्षेत्र की और कितने नंबर के टेबल पर गिनती करेंगे, ये सारी जानकारी पहले नहीं बताई जाएगी। आयोग के मापदंड के अनुसार वोटों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू होगी। किसी विशेष परिस्थिति में समय में बदलाव संभावित है। निकाय चुनाव में पोस्टल बैलेट से मतदान की सुविधा नहीं दी गई है। लिहाजा सभी टेबलों पर एक साथ सभी 64 बूथों में पड़े वोटों की काउंटिंग शुरू होगी। हर राउंड की बताई जाएगी गिनती मतगणना स्थल पर मौजूद रिटर्निंग ऑफिसर प्रत्येक राउंड की गिनती के बाद रिजल्ट बताएंगे। साथ ही इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी अपडेट किया जाएगा। मतों की गिनती का रुझान सुबह 9 बजे से आना शुरू हो जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक गोड्डा के दो निकायों में एक ही राउंड में गिनती पूरी होगी। मतगणना स्थल के प्रोटोकाल की जानकारी भी मतगणना कर्मियों को दी गई है। मतगणना स्थल पर शुक्रवार की सुबह छह बजे तक सभी अधिकारियों को पहुंचना होगा। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी और मतगणना केंद्र के रिटर्निंग ऑफिसर रैंडम तरीके से सुपरवाइजर और कर्मचारी को हाल नंबर और टेबल नंबर अलॉट करेंगे। गोड्डा नगर परिषद के मतगणना हाल में काउंटिंग के लिए 37 टेबल लगेंगे। वहीं महागामा नगर पंचायत के मतगणना हाल में 27 टेबल होंगे। इसके अलावा दोनों निकायों में अध्यक्ष और वार्ड पार्षद के अलग-अलग रिटर्निंग अधिकारियों के लिए टेबल रहेगा। एक ही राउंड में मतों की गिनती पूरी – राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर गोड्डा और महागामा निकाय के कुल 64 बूथों के लिए अलग-अलग 64 टेबल बनाए जा रहे हैं। यहां एक ही राउंड में सभी बूथों के मतों की गिनती पूरी कर ली जाएगी। लिहाजा दोपहर तक चुनाव परिणाम सामने आ जाएंगे। – फैजान सरवर, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, गोड्डा।

पूर्ण शराबबंदी पर सरकार लेगी बड़ा फैसला

पूर्णिया. बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के बीच सदन की दहलीज पर शराबबंदी को लेकर जबरदस्त घमासान देखने को मिला. इस मुद्दे पर न केवल राजद और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल हमलावर थे, बल्कि एनडीए के साथी दल रालोमो और लोजपा के सुर भी बदले-बदले नजर आए. जहां एक ओर विपक्ष ने इसे ‘कागजी शराबबंदी’ करार दिया, वहीं नीतीश सरकार के दिग्गज मंत्रियों ने मोर्चा संभालते हुए यह साफ कर दिया कि शराबबंदी केवल एक कानून नहीं, बल्कि जनता का अटूट जनादेश है. सदन से बाहर शराबबंदी पर सियासी संग्राम शराबबंदी से राज्य के राजस्व पर पड़ने वाले असर को लेकर जब सवाल उठे, तो संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी, उसी समय सरकार ने संभावित राजस्व हानि का पूरा आकलन कर लिया था. इस फैसले के बाद राज्य में कई चुनाव हुए और हर बार जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीति पर भरोसा जताया.जब जनता लगातार जनादेश दे रही है तो समीक्षा की मांग राजनीतिक बयानबाजी से अधिक कुछ नहीं, क्योंकि लोकतंत्र में जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी कसौटी होता है. शराबबंदी पर जारी बहस के बीच ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता आज शराबबंदी पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें शायद अपनी ही पार्टी के सिद्धांतों की जानकारी नहीं है. चौधरी ने तंज कसते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस की सदस्यता लेने की मूल शर्तों में ही शराब न पीने का संकल्प शामिल रहा है. सर्वदलीय निर्णय पर सवाल क्यों राजनीतिक गलियारों में हलचल तब बढ़ गई जब एनडीए के घटक दल रालोमो के विधायक माधव आनंद ने खुले तौर पर शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर दी. उन्होंने इसे जनहित का मामला बताते हुए कानून में लचीलापन लाने की वकालत की. इस पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शराबबंदी कोई एक दल का फैसला नहीं था, बल्कि सर्वदलीय सहमति से लिया गया निर्णय था. पुलिस की साठगांठ और कागज पर पाबंदी के आरोप विपक्ष की ओर से एआइएमआइएम के विधायक तौसीफ आलम और कांग्रेस के मनोज विश्वास ने सरकार को जमकर घेरा. तौसीफ आलम ने तो यहां तक चुनौती दे डाली कि पुलिस की मिलीभगत से घर-घर शराब बिक रही है और वे खुद सरकार को इसकी जगह दिखा सकते हैं. सत्ता पक्ष इसे सामाजिक सुधार का प्रतीक बता रहा है, जबकि विपक्ष और कुछ सहयोगी दल इसके क्रियान्वयन और प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में साफ है कि बिहार में शराबबंदी अब केवल कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन चुकी है.

जयमाला के वक्त दूल्हे के सामने दुल्हन पर गोली चलाने वाला सनकी आशिक, यूपी से आई बारात में मची अफरा-तफरी

बक्सर बक्सर के चौसा में खुशियों भरा शादी का माहौल उस वक्त मातम और दहशत में बदल गया, जब 'जयमाला' की रस्म के दौरान एक सिरफिरे आशिक ने दुल्हन को गोली मार दी. घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. मुफस्सिल थाना क्षेत्र का यह मामला है. यहां चौसा नगर पंचायत में एक शादी समारोह रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. दरअसल उत्तर प्रदेश के बलिया से आई बारात के बाद जब दूल्हा और दुल्हन स्टेज पर एक-दूसरे को वरमाला पहना चुके थे, तभी दुल्हन के प्रेमी ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी. गोली सीधे दुल्हन को लगी, जिसके बाद वह स्टेज पर ही गिर पड़ी. बारात यूपी के बलिया जिले से बक्सर के चौसा आई थी. द्वारपूजा के बाद जयमाला की रस्म शुरू हुई. दूल्हा और दुल्हन स्टेज पर खड़े थे, रिश्तेदार फोटो खिंचवा रहे थे और हंसी-खुशी का माहौल था. इसी बीच भीड़ में मौजूद प्रेमी अचानक करीब पहुंचा और पिस्टल निकालकर सीधे दुल्हन पर गोली चला दी. गोली चलते ही वहां भगदड़ मच गई. इस अफरा-तफरी का फायदा उठाकर आरोपी मौके से फरार हो गया.  अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर गोली लगने के बाद खून से लथपथ दुल्हन को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और शादी की रस्में बीच में ही रुक गई हैं. वायरल वीडियो और पुलिस की कार्रवाई वारदात का एक वीडियो सामने आया है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे जयमाला के जश्न के बीच अचानक गोली चलती है और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगते हैं. मुफस्सिल थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में मामला एकतरफा प्रेम का बताया जा रहा है. आरोपी युवक दुल्हन का परिचित बताया जा रहा है जो इस शादी से नाराज था.