samacharsecretary.com

झारखंड में माइनस 2 डिग्री तक गिरा तापमान, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची रांची समेत राज्यभर में न्यूनतम तापमान गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले एक हफ्ते के पारा पर गौर करें तो अकेले मैकलुस्कीगंज का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री नीचे गिरकर शुक्रवार को माइनस दो डिग्री पर पहुंच गया। वहां ओस की बूंदें लगातार जम रही हैं। जनजीवन प्रभावित है। मैकलुस्कीगंज स्थिति स्थानीय माप केंद्र के अनुसार तीन जनवरी को वहां पारा 6.4, चार और पांच जनवरी को 5, छह को 1.5, सात को गिरकर माइनस 0.5, आठ को माइनस 1.5 और नौ जनवरी माइनस 2 डिग्री पर आ गया। वहीं रांची का न्यूनतम पारा जहां तीन जनवरी को 10.7 डिग्री था। वह नौ जनवरी को गिरकर 7.3 डिग्री पर पहुंच गया। पारा में लगातार गिरावट से पूरा झारखंड भीषण ठंड की चपेट में है। मौसम केंद्र के मुताबिक झारखंड को फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद कम है। राज्य में अगले 24 घंटों के दौरान सात जिलों में शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट और रांची समेत छह जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में ऑरेंज अलर्ट जबकि रांची, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, सिमडेगा एवं पश्चिमी सिंहभूम के लिए यलो अलर्ट है। जिलों में कहीं कहीं शीतलहर चलने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को राज्य के अधिकांश जिलों के तापमान में और कमी आयी। रांची का न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं राज्य में खूंटी का न्यूनतम राज्य में सबसे कम 1.5 डिग्री रहा। जबकि मेदिननगर 3.2, बोकारो 3.3, सिमडेगा 3.8 रहा। , हजारीबाग 4.3,सरायकेला 5.5 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य के छह जिलों का तापमान 6.0 डिग्री से नीचे और पूरे राज्य का तापमान नौ डिग्री से नीचे रहा। वहीं राज्य में लातेहार में शीत दिवस की स्थिति रही। यहां अधिकतम तापमान 15.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनसार राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की कमी आयी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों करीब छह डिग्री तक नीचे आ गए हैं। इससे राज्य में कहीं शीत लहर और कहीं शीतदिवस की स्थिति महसूस की जा रही है। न्यूनतम तापमान स्थान न्यूनतम खूंटी 1.5 मेदिननगर 3.2 बोकारो 3.3 सिमडेगा 3.8 हजारीबाग 4.3 सरायकेला 5.5 चाईबासा 6.8 रांची 7.3 लातेहार 7.3 देवघर 8.5 जमशेदपुर 8.4 पू सिंहभूम 7.7 कोडरमा 7.0 पाकुड़ 7.0 लोहरदगा 6.0 झारखंड के मौसम की जानकारी देते हुए मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अगले पांच दिनों के दौरान ठंड में कोई बदलाव होने की संभावना नही है। अगले दो दिन के दौरान तापमान में मामुली वृद्धि होने के बाद फिर इसमें तेजी से कमी आएगी। रांची समेत अन्य जिलों इस दौरान कड़ाके की सर्दी रह सकती है।

कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल, बर्फीली हवाओं व कोहरे ने बढ़ाई परेशानी

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले में ठंड के ट्रिपल अटैक से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पछुआ हवाओं के साथ बढ़ी कनकनी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पारा लुढ़कते ही हालात और गंभीर हो गए हैं। जिले में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जिसके बाद आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिले में हाड़ कंपाने वाली ठंड से फिलहाल कोई राहत नहीं मिलती दिख रही है। इसे देखते हुए राज्य मौसम विभाग ने शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ती ठंड के कारण जिला प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है, ताकि इसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर न पड़े। ठंडी पछुआ हवाओं के कारण लोग मॉर्निंग वॉक से भी परहेज कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहता है, इसके बाद दिनभर पछुआ और बर्फीली हवाएं चलने से पूरे जिले में शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक ठंड का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इस भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ रहा है, खासकर शहर में फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। मौसम विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर में लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। फिलहाल जिले का न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। ठंड के कारण सुबह से करीब 10 बजे तक और शाम 4 बजे के बाद से सुबह तक बर्फीली हवाओं के चलते लोगों की परेशानी बनी हुई है। अधिकांश लोग घरों में दुबके हुए हैं और अलाव का सहारा ले रहे हैं। ठंड से बचाव के लिए जिला प्रशासन की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी ठंड का शिकार न हो। मौसम विभाग ने बताया है कि शीतलहर, बर्फीली हवाओं और कोहरे के कारण जिले में लोगों को एक साथ तीन तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले दो से तीन दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है।    

लालू परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, लैंड फॉर जॉब मामले में फ्रॉड और साजिश के आरोप फ्रेम

पटना लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दिल्ली की कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा। दिल्ली राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोग बरी अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया। इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। क्या हैं पूरा मामला? आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

प्रशासनिक सुधारों से विकास की रफ्तार: बिहार-त्रिपुरा ने साझा किए अनुभव

पटना बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को त्रिपुरा सरकार के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नियमों में ढील और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक और संवाद आयोजित किया गया। इस बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक सुधार, सरल नीतियों के निर्माण और उद्योगों को बढ़ावा देने के सफल तरीकों को साझा करना था। बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने त्रिपुरा के मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार सिंह और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव साझा करना बिहार के समग्र विकास और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है। त्रिपुरा सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तार से बताया कि कैसे पुराने और जटिल नियमों में बदलाव कर निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया है। उन्होंने समझाया कि अनुमति की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, एक ही जगह से सभी स्वीकृतियां देने की व्यवस्था लागू की गई है और नीतियों में सुधार किए गए हैं। बैठक में भूमि और श्रम से जुड़े सुधारों, उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता, श्रम कानूनों को सरल बनाने, जांच व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीकृत प्रणाली अपनाने, तथा बिजली, पानी और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए बिना रुकावट अनुमति देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार आत्मनिर्भर बिहार और औद्योगिक विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। त्रिपुरा में किए गए नीतिगत सुधारों का अध्ययन कर बिहार अपनी औद्योगिक नीति को और अधिक आकर्षक बनाने पर विचार करेगा, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों और औपचारिकताओं का बोझ कम होने से सरकारी कामों में देरी खत्म होगी और सुशासन को मजबूती मिलेगी। बैठक में युवा, रोजगार और कौशल विकास विभाग की भागीदारी यह दिखाती है कि सरकार का उद्देश्य केवल उद्योग लगाना नहीं है, बल्कि बिहार के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित और सक्षम बनाना भी है। इस अवसर पर त्रिपुरा सरकार की ओर से उद्योग एवं वाणिज्य सचिव किरण गिट्टे, शहरी विकास सचिव अभिषेक सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं बिहार सरकार की ओर से गृह रक्षा वाहिनी के महानिदेशक, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव, नगर विकास, उद्योग, ऊर्जा और श्रम संसाधन विभाग के सचिव तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं वित्त विभाग, बिहार की ओर से दी गई।  

सुबह की ठंड नहीं बनी बाधा, सीएम नीतीश ने जेपी गंगापथ पहुंचकर विकास कार्यों की समीक्षा की

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को अधिकारियों को जे.पी पार्क को लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित कराये जाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज जे.पी. गंगापथ पर कराए जा रहे लैंड स्केपिंग, पौधा रोपण एवं सौंदर्गीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विकसित किए जा रहे पार्क का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों ने विकसित किए जा रहे पार्क के संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को दिए ये बड़े  निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह पार्क गंगा नदी के किनारे स्थित है, इसलिए लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित कराएं। यहां काफी अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि जे.पी.गंगा पथ पर पार्क विकसित होने से हरियाली बढ़ेगी साथ ही यहां आनेवाले लोग अपने परिवार के साथ कुछ समय व्यतीत कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियो को निर्देश दिया कि इस काम को जल्द पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दौरान कहा कि पौधारोपण होने से यह क्षेत्र हरा-भरा दिखेगा। उन्होंने कहा कि जे.पी. गंगापथ एक अछ्वुत परियोजना है जिसका सौंदर्याकरण बेहतर ढंग से कराया जा रहा है। आनेवाले समय में यह क्षेत्र लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। जे.पी. गंगा पथ पर लोगों के लिए सड़क सुरक्षा और निर्बाध आवागमन भी जरूरी है, इसका पूरा ध्यान रखें। निरीक्षण के दौरान राज्यसभा सांसद और जनता दल यूनाईटेड ( जदयू) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेश परासर, पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम एवं वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

मीसा के आवास पर लालू–तेज प्रताप की मुलाकात, 7 माह बाद परिवार में दिखी हलचल; तेजस्वी कहां थे?

पटना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और परिवार से निकाले जाने के बाद जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नीतीश सरकार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की लालू यादव से दिल्ली में मुलाकात हुई। अनुष्का यादव प्रकरण के बाद पिता और पुत्र के बीच सात माह बाद मुलाकात हुई। लैंड फॉर जॉब केस को लेकर राउज एवेन्यू कोर्ट में हाजिर होने के बाद तेज प्रताप यादव बहन मीसा भारती के आवास पर पहुंच गए। उन्होंने पिता से आशीर्वाद लिया और दही-चूड़ा भोज में शामिल होने का न्योता दिया। तेजस्वी यादव तब बहन के घर पर मौजूद नहीं थे। एक जनवरी को वे मां रबड़ी देवी को जन्मदिन की बधाई देने 10 सर्कुलर रोड पहुंच गए थे। नए साल में उन्होंने माता और पिता दोनों का आशीर्वाद ले लिया। 14 जनवरी को उनके आवास(पटना) पर दही चूड़ा भोज का आयोजन किया गया है जिसमें एनडीए के कई नेताओं को न्योता दिया गया है।

ठंड–कोहरे का कहर, झारखंड के इस जिले में बच्चों की मौज, बढ़ी छुट्टियों की संख्या

रांची  झारखंड में ठंड का सितम जारी है। भीषण ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं इसके चलते जमशेदपुर में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी, निजी एवं अल्पसंख्यक विद्यालय 9 और 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। यह अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगा प्रशासन का कहना है कि शीतलहर और घने कोहरे के दौरान छोटे बच्चों और किशोरों के बीमार पड़ने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए एहतियातन विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। प्रशासन के मुताबिक यह अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगा। इस अवधि में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। सभी कर्मचारियों को ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और विभागीय एवं गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना होगा। प्रशासन के मुताबिक यदि किसी विद्यालय में पहले से प्री-बोर्ड परीक्षाएं निर्धारित हैं, तो स्कूल प्रबंधन अपने विवेक से परीक्षा आयोजित कर सकता है। ऐसे मामलों में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रशासन की होगी।  

जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक बने झारखंड HC के नए चीफ जस्टिस, पद एवं गोपनीयता की शपथ

रांची झारखंड हाईकोर्ट को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। लोकभवन में शुक्रवार को यहां आयोजित समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश, महाधिवक्ता, स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और राज्य सरकार के मंत्री उपस्थित रहे। समारोह के दौरान सभी गणमान्य लोगों ने नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक का कार्यकाल 28 नवंबर 2026 तक रहेगा। उनका स्थानांतरण बॉम्बे हाईकोर्ट से झारखंड हाईकोर्ट किया गया है। जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक को अक्टूबर 1988 में महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया गया था। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की पणजी पीठ में सिविल एवं संवैधानिक कानून, श्रम एवं सेवा कानून, पर्यावरण कानून, वाणिज्यिक व कर कानून, कंपनी कानून तथा जनहित याचिकाओं के क्षेत्र में लंबे समय तक प्रभावी प्रैक्टिस की। अपने विधिक कैरियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के लिए अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता, राज्य सरकार के लिए विशेष अधिवक्ता तथा विभिन्न निगमों को कानूनी सेवाएं प्रदान कीं। उनकी विधिक दक्षता और अनुभव को देखते हुए 21 जून 2013 को उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। जस्टिस सोनक का जन्म 28 नवंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोवा के पणजी स्थित डॉन बॉस्को हाई स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद धेम्पे कॉलेज ऑफ आट्र्स एंड साइंस से बीएससी तथा एमएस कॉलेज ऑफ लॉ, पणजी से प्रथम श्रेणी में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके अतिरिक्त उन्होंने जेवियर सेंटर ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से पुर्तगाली भाषा में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है।  

रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई: रामगढ़ में CBI ने डाक ओवरसियर को रंगेहाथ पकड़ा

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले में सीबीआई ने बड़ी कारर्वाई करते हुए डाक विभाग के ओवरसियर  प्रभु मुंडा को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक ग्रामीण डाक सेवक से रामगढ़ मुख्यालय में योगदान (ज्वाइनिंग) कराने के एवज में 30 हजार रुपये घूस मांगने का आरोप है। 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा था डाक ओवरसियर प्रभु मुंडा सीबीआई सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक ग्रामीण डाक सेवक ने एजेंसी से लिखित शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि डाक ओवरसियर प्रभु मुंडा उससे रामगढ़ मुख्यालय में योगदान कराने के लिए लगातार 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। 15 हजार रुपए घूस लेते रंगे हाथ दबोचा जांच के दौरान बातचीत में यह बात सामने आई कि प्रभु मुंडा ने 30 हजार रुपये में से 15 हजार रुपये पहले और शेष 15 हजार रुपये बाद में लेने पर सहमति जताई थी। इसके बाद सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जाल बिछाने की योजना बनाई। आठ जनवरी को सीबीआई की टीम ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने प्रभु मुंडा को तयशुदा स्थान पर 15 हजार रुपये घूस के रूप में दिए, सीबीआई की टीम ने तत्काल कारर्वाई करते हुए उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अधिकारियों का दल प्रभु मुंडा को रांची ले आया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में कोई और अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल था या नहीं, और क्या इससे पहले भी प्रभु मुंडा इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त रहा है।

‘लैंड फॉर जॉब घोटाला’ में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ कोर्ट ने तय किए आरोप

नई दिल्ली पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी में नौकरियों के बदले भूमि लेने के घोटाले में राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने संदेह की कसौटी पर पाया कि लालू और परिवार की ओर से व्यापक साजिश रची गई थी. चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगियों को नौकरियों के बदले जमीन अधिग्रहण में सह-साजिशकर्ता के रूप में मदद मिली. कोर्ट ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की बरी करने की मांग की दलील सही नहीं है. इसके साथ ही, इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य सरकारी पद से अलग होकर आपराधिक उद्यम के रूप में काम कर रहे थे.   कोर्ट ने बहु चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है. अदालत ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, साथ ही आईपीसी के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप है. जबकि उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने यह फैसला सुनाया. इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर केस को कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी.इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. लैंड फॉर जॉब केस में मीसा भारती  बता दें कि 19 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में 103 आरोपी हैं जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है. इससे पहले कोर्ट आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर दो बार फैसला टाल चुका है. 4 दिसंबर और 10 नवंबर 2025 को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. तेज प्रताप यादव पर आरोप तय इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी. प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दिया था. लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है? बता दें कि लैंड फॉर जॉब घोटाला, कथित भ्रष्टाचार का केस है। यह साल 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि लालू यादव ने अपने रेल मंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया और इसके जरिए रेलवे के 'ग्रुप-डी' के पदों पर नियुक्तियां की। इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने और उनके परिवार ने उम्मीदवारों से रियायती दरों पर या गिफ्ट के तौर पर जमीनें हासिल की थीं। 98 आरोपियों में लालू परिवार का कौन-कौन शामिल? जांच के दौरान, इस केस में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें अब लालू परिवार को सदस्यों पर आरोप तय हो गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोप मुक्त किया जा चुका है। लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है? लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सदस्यों की संभावित सजा पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने INDIA TV से बताया, 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8, 9, 11, 12 और 13, ये सभी लगे हुए हैं। इन सभी में 7 साल तक की सजा का प्रावधान का है। वहीं, धारा 467, 468 और 471 भी हैं तो कुल मिलाकर इनको अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है, अगर सारी सजाएं एक साथ चलती हैं। लेकिन सजा अगर एक के बाद एक शुरू करने वाला कोई ऑर्डर अदालत देती है तो इसमें ये सजा बढ़ भी सकती है।' अलग-अलग सजा को लेकर प्रावधान क्या है? उन्होंने आगे कहा, 'अदालत जब आदेश देती है, तो कहती है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, तो उसमें जो अपर साइड सजा होती है, वही सजा दोषी को भुगतनी पड़ती है। यानी अधिकतम जितने साल की सजा कोर्ट की तरफ से सुनाई जाती है, उतने साल ही दोषी को जेल में रहना पड़ता है।'