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‘जा रानी जा…’ – तीन बच्चों की मां की कोर्ट मैरिज में पति खुद बना गवाह, बिहार में अनोखा मामला

 हाजीपुर         बिहार के वैशाली जिले से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. जहां रिश्तों की सीमाएं टूटती हैं, सोशल मीडिया पर प्यार की कहानी लिखी जाती है और अंत में ऐसा मोड़ आता है, जिसे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. यह मामला सिर्फ एक शादी या तलाक का नहीं बल्कि उस सच्चाई का आईना है, जिसे समाज अक्सर स्वीकार करने में हिचकता है. रानी कुमारी की जिंदगी भी कभी बिल्कुल आम थी. वर्ष 2011 में उनकी शादी अहिरपुर निवासी कुंदन कुमार से कोर्ट मैरिज के जरिए हुई. कुंदन घर पर ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे. शादी के बाद धीरे-धीरे परिवार बढ़ा और दंपती तीन बच्चों के माता-पिता बने. करीब पांच साल पहले रानी की जिंदगी में कुछ ऐसा हुइा जिसने सब कुछ बदल दिया. फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए उसकी बातचीत अपने ही फुफेरे भाई गोबिंद कुमार से बढ़ने लगी. शुरुआत पारिवारिक हालचाल से हुई, फिर पुराने किस्से, फिर लंबी बातचीत और देखते-देखते भावनाएं गहराने लगीं. मोबाइल की छोटी-सी स्क्रीन पर शब्दों ने वह जगह बना ली, जो शायद रिश्तों में खाली होती जा रही थी. गोबिंद रानी की बातें सुनते थे, उन्हें समझता था कम से कम रानी को ऐसा महसूस होने लगा. यही एहसास धीरे-धीरे प्यार में बदल गया. जब घर बार-बार छूटने लगा इस रिश्ते का असर जल्द ही रानी के व्यवहार में दिखने लगा. वह कई बार पति और बच्चों को छोड़कर गोबिंद के पास चली गई. दो-तीन साल पहले वह अचानक घर से गायब हो गई थी. काफी प्रयासों के बाद उसे वापस लाया गया. उस समय कुंदन कुमार काम के सिलसिले में जम्मू में रहने लगा, लेकिन रानी वहां भी टिक नहीं पाईं. डेढ़ महीने पहले भी वही कहानी दोहराई गई. कुंदन जम्मू से उन्हें वापस आया, बच्चों का वास्ता दिया, परिवार की दुहाई दी लेकिन हर बार की तरह रानी का मन कहीं और था.  कुंदन का टूटना और एक अनोखा फैसला बार-बार पत्नी का घर छोड़ना, बच्चों का सवाल, समाज की बातें. इन सबके बीच कुंदन कुमार भीतर से टूट गया. वह समझ गया कि जबरदस्ती किसी को साथ नहीं रखा जा सकता. एक दिन उन्होंने वह फैसला लिया, जिसे सुनकर लोग आज भी हैरान हैं. कुंदन ने रानी से साफ कह दिया अगर तुम्हारी खुशी गोबिंद के साथ है, तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं. कुंदन ने न तो हंगामा किया, न ही कानूनी लड़ाई चुनी. उल्टा,  रानी और गोबिंद की कोर्ट मैरिज कराने का जिम्मा खुद उठा लिया. कोर्ट मैरिज और पति बना गवाह वैशाली कोर्ट में जब रानी कुमारी और गोबिंद कुमार ने शादी के कागजात पर हस्ताक्षर किए, तो वहां मौजूद लोगों के लिए सबसे चौंकाने वाला सीन था पति कुंदन कुमार का गवाह बनकर खड़ा होना. वही कुंदन, जिनके साथ रानी ने 14 साल पहले सात फेरे नहीं, बल्कि कोर्ट मैरिज की थी, आज उसी महिला को दूसरे पति के साथ विदा कर रहा था. कुंदन ने कहा कि वह अब थक चुका है. उन्होंने बच्चों के लिए खुद को मजबूत किया और रानी को आजाद कर दिया.  गोबिंद का भरोसा और नई उम्मीद शादी के बाद गोबिंद कुमार ने भरोसा जताया कि रानी अब उन्हें छोड़कर वापस नहीं जाएंगी. उन्होंने बताया कि दोनों के बीच लंबे समय से बातचीत होती रही है और हाल ही में फोन पर हुई बात के बाद उन्होंने साथ रहने का अंतिम निर्णय लिया. गोबिंद का मानना है कि अब सब कुछ साफ है. कोई छुपाव नहीं, कोई अधूरा रिश्ता नहीं. वह इसे एक नई शुरुआत मानते हैं. रानी की बात: मैं खुश नहीं थी रानी कुमारी ने भी अपना पक्ष रखा. साफ कहा कि वह पहले पति के साथ खुश नहीं थीं. उनके अनुसार कुंदन के साथ रहना उनके लिए मानसिक रूप से तकलीफदेह था. यह भी स्पष्ट किया कि उनके तीनों बच्चे कुंदन के साथ ही रहेंगे और वह इस फैसले से संतुष्ट हैं. रानी का कहना है कि गोबिंद के साथ उन्हें समझ और अपनापन मिला, जिसकी कमी वह अपने वैवाहिक जीवन में महसूस कर रही थीं.

झारखंड में हत्या के मामले में 4 दोषियों में से कोर्ट से 2 आरोपी हो गए फरार

रांची/पाकुड़. झारखंड के पाकुड़ में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जिला न्यायालय परिसर से बुधवार को हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए चार अपराधियों में से दो अपराधी फरार हो गए। मामला अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के अंबाडीहा में जमीन विवाद में वर्ष 2019 में हुई भोलानाथ महली की हत्या से जुड़ा है। इस केस की सुनवाई एडीजे प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद के न्यायालय में चल रही थी। बुधवार को अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों शिवधन मोहली, कादू मोहली उर्फ वकील मोहली, सुनीलाल मोहली और नरेन मोहली हत्या का दोषी करार दिया। दोषी करार दिए जाने के बाद पुलिस चारों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की कागजी प्रक्रिया पूरी कर रही थी। चारों को कोर्ट हाजत के एएसआई हिरेंद्र नाथ मंडल के सुरक्षा में दे दिया गया। इसी बीच नरेन महली और शिवधन महली शौच के बहाने भाग निकले। अपराधियों के भागने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस की टीम दोनों अपराधियों की तलाश में निकली पर दोनों हाथ नहीं लगे। समाचार भेजे जाने तक पुलिस की टीम संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। पाकुड़ एसपी निधि द्विवेदी ने कहा कि फरार दोषियों की गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। हाजत प्रभारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गयी है, रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फरार शिवधन, नरेन पर अलग से दर्ज होगा मुकदमा कोर्ट परिसर से फरार हुए अपराधी शिवधन महली व नरेन महली के विरुद्ध अलग से मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है। नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बबलू कुमार ने बताया कि हाजत प्रभारी या कर्मी की ओर से लिखित शिकायत मिलने के बाद दोनों के विरूद्ध केस दर्ज किया जाएगा। बताया कि फिलहाल पुलिस की टीम दोनों की तलाश कर रही है।

जेल वार्डर बनने का मौका: झारखंड में 1733 भर्तियों के लिए आवेदन शुरू, फिजिकल टेस्ट में 6 मिनट की दौड़ जरूरी

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से निकाली गई जेल वार्डर ( कक्षपाल ) के 1733 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया कल 9 जनवरी 2026 से शुरू होगी। पहले यह 7 नवंबर 2025 से शुरू होनी थी लेकिन इसे टाल दिया गया था। इच्छुक व योग्य अभ्यर्थी झारखण्ड कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा 2025 के लिए jssc.jharkhand.gov.in पर जाकर 8 फरवरी 2026 तक एप्लाई कर सकेंगे। परीक्षा शुल्क भरने व फोटो और हस्ताक्षर अपलोड कर आवदेन पत्र का प्रिंट आउट लेने के लिए अंतिम तिथि 10 फरवरी 2026 है। 11 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन में करेक्शन की जा सकेगी। ऑनलाइन आवेदन पत्र में अभ्यर्थी के नाम, जन्म तिथि, ईमेल आईडी एवं मोबाइल संख्या को छोड़कर किसी भी गलत एंट्री को संशोधित करने के लिए फिर से लिंक उपलब्ध करायी जायेगी। नियुक्ति की कार्रवाई झारखंड राज्य की पुलिस, कक्षपाल, सिपाही (गृह रक्षा वाहिनी), उत्पाद सिपाही संयुक्त भर्ती नियमावली-2025 के तहत की जाएगी। जेएसएससी ने संशोधित नोटिस में खेल कूद कोटा का प्रावधान स्पष्ट किया है- क्र.सं. , प्रतियोगिता का स्तर , उपलब्धि 1. भारतीय ओलंपिक संघ अथवा उससे सम्बद्ध फेडरेशनों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता। उपलब्धि: द्वितीय / तृतीय स्थान 2. झारखंड ओलंपिक संघ अथवा उससे सम्बद्ध संघों द्वारा आयोजित अधिकाधिक राज्य चैंपियनशिप। , उपलब्धि: प्रथम स्थान 3. राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित करने वाले खिलाड़ी। उपलब्धि: राष्ट्रीय रिकॉर्ड फिजिकल टेस्ट के नियम हुए आसान शारीरिक परीक्षा के तहत अभ्यर्थियों के लिए दौड़ का आयोजन होगा। दौड़ प्रक्रिया को पहले से काफी सरल करते हुए दूरी को घटाया गया है। बता दें कि बीते मार्च माह में हुई कैबिनेट बैठक में पुलिस, कक्षपाल, सिपाही और उत्पाद सिपाही नियुक्ति के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा में बदलाव किया गया है। पुरुष अभ्यर्थियों को 06 मिनट में 1600 मीटर दौड़ पूरी करनी होगी। पहले यह दौड़ 10 किमी की होती थी। वहीं, महिला अभ्यर्थियों को 10 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। पहले महिलाओं को 06 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती थी। कक्षपाल भर्ती की वैकेंसी डिटेल्स रिक्तियों में 1634 पद पुरुषों और 64 पद महिलाओं के लिए हैं। पुरुषों में 165 पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए, 413 होमगार्ड के लिए और शेष 1056 अन्य अभ्यर्थियों के लिए हैं। कक्षपाल भर्ती योग्यता – 10वीं पास। आयु सीमा – 18 वर्ष से 25 वर्ष। अधिकतम आयु सीमा में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पुरुषों को दो वर्ष, अनारक्षित, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस वर्गों की महिलाओं को 3 वर्ष, एससी एसटी पुरुष व महिलाओं को 5 वर्ष की छूट मिलेगी। पुरुष अनारक्षित, ईडब्ल्यूएस, अत्यंत पिछड़ा वर्ग – लंबाई कम से कम 160 सेमी, सीना फुलाकर कम से कम 81 सेमी हो। एससी व एसटी – लंबाई कम से कम 155 सेमी, सीना फुलाकर कम से कम 79 सेमी हो। महिलाओं के लिए लंबाई कम से कम 148 सेमी हो। चयन – सबसे पहले शारीरिक मापदंड व शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी। इसमें सफल अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद मेडिकल जांच होगी। वेतन – लेवल -2 (19900 – 63200 रुपये) आवेदन फीस – 100 रुपये राज्य के एससी व एसटी के लिए – 50 रुपये  

झारखंड में कैदियों को रिश्वतखोरी और शोषण से बचाने घर बैठे पैसा भेज सकेंगे परिजन

रांची. झारखंड की जेलों में कैदियों के परिजन अब उन्हें ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके लिए सुविधा शुरू की गई है। जेल आईजी सुदर्शन मंडल के अनुसार, एक्सिस बैंक के सहयोग से कैदियों के डिजिटल अकाउंट खोले गए हैं। अब परिजन घर बैठे पैसे जेल में बंद अपने परिवार के सदस्य को पैसे भेज सकेंगे। इससे रिश्वत जैसी बुराई पर लगाम लगेगी। परिजनों को जेल के गेट पर घंटों इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। कैदी इन पैसों का उपयोग जेल कैंटीन से साबुन, तेल और बिस्किट जैसे सामान खरीदने के लिए कर सकेंगे। भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने जानकारी दी कि रांची सहित झारखंड की अलग-अलग जेलों में अब कैदियों के परिवार ऑनलाइन पैसे भेज सकेंगे। जेलों में नकद लेन-देन के कारण होने वाले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए जेल प्रशासन ने जरूरी बैंक डिटेल्स जारी कर दी हैं। इस नई सुविधा से अब कैदियों के रिश्तेदार घर बैठे ही उनके खाते में पैसे ट्रांसफर कर पाएंगे। जेल कैंटीन के खाते में आएगा पैसा अधिकारी ने बताया कि इस सुविधा से परिजनों को न तो जेल प्रशासन को रिश्वत देनी होगी और न ही मुलाकात के लिए गेट पर घंटों इंतजार करना पड़ेगा। यह नियम राज्य की सभी मुख्य जेलों में लागू कर दिया गया है। सभी कैदियों के लिए डिजिटल खाते खोले जा रहे हैं। अभी एक्सिस बैंक की मदद से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू हुई है। अब कैदी के परिजन और दोस्त घर बैठे ही जेल कैंटीन के खाते में पैसा भेज सकेंगे। जरूरत की चीजें खरीद पाएंगे कैदी अधिकारी ने बताया कि इन पैसों का इस्तेमाल कर कैदी जेल की कैंटीन से अपनी जरूरत की चीजें खरीद पाएंगे। नई व्यवस्था के तहत हर कैदी का एक डिजिटल खाता बनाया गया हैए जिससे वे साबुनए तेलए टूथपेस्ट और बिस्किट जैसा सामान ले सकेंगे। पहले यह सारा काम नकद पैसों से होता थाए जिसमें अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती थीं। अब डिजिटल सिस्टम होने से सारा हिसाब-किताब साफ रहेगा। कैदियों के शोषण का डर होगा खत्म इस योजना के लिए एक्सिस बैंक के साथ समझौता किया गया है और जेलों में जरूरी मशीनें लगा दी गई हैं। इस सुविधा के बदले विभाग बैंक को तय फीस दे रहा है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से कैदियों को अपनी जरूरत का सामान समय पर मिल सकेगा। नकद लेन-देन बंद होने से पारदर्शिता आएगी। साथ ही किसी बिचौलिए की जरूरत न होने से कैदियों के शोषण का डर भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा।

ज्वेलरी दुकान पर घूंघट-नकाब बैन नहीं बिहार सरकार का फैसला: JDU

पटना. बिहार में अब हिजाब और नकाब को लेकर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) ने फैसला लिया है कि बिहार में अब हिजाब और नकाब पहन कर दुकान में आनेवाले गहने नहीं खरीद पाएंगे। सर्राफा कारोबारी हिजाब पहनकर आई महिलाओं को सोना-चांदी या किसी अन्य तरह के आभूषण न तो बेचेंगे ना ही उनसे खरीद करेंगे। घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर दुकान में आने वालों पर भी यह लागू होगा। एआईजेजीएफ के इस फैसले के बाद अब सरकार जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन की भी प्रतिक्रिया आई है। जदयू नेता ने साफ किया है कि यह सरकार का फैसला नहीं है बल्कि यह फैसला ज्वेलर्स एसोसिएशन ने लिया है। राजीव रंजन ने कहा कि इस फैसले को लेने के पीछे उनके अपने कारण हैं। दुकान में चोरी की घटनाओं के दौरान उन्हें आरोपियों को पहचानने में परेशानी होती है। जाहिर है जदयू ने हिजाब-नकाब बैन विवाद को लेकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। बता दें कि ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन की ओर से लिये गये इस फैसले को पूरे राज्य के सर्राफा कारोबारी सदस्यों के लिए अनिवार्य किया गया है। राज्य स्तर पर ऐसा नियम लागू करने वाला बिहार देश का पहला प्रदेश है। एआईजेजीएफ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक वर्मा के मुताबिक इसके पहले झांसी और जोधपुर के कारोबारियों ने जिला स्तर पर यह लागू किया है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों बुर्का और हिजाब पहने कुछ अपराधियों ने मुंबई में सर्राफा दुकान में लूटपाट की। कई जगहों पर नकाबपोश लूटपाट कर चुके हैं। इसलिए सुरक्षा के ख्याल से यह कदम उठाया गया है। खुले चेहरा वालों की पहचान आसान होता है और सीसीटीवी में भी रिकॉर्ड होता है। इन वजहों से निर्णय 1. सर्राफा दुकानों पर चेहरा ढककर कोई बदमाश न घुसे 2. नकाब या मास्क पहनकर पूर्व में चोरी या लूटपाट की घटनाएं घटित हो चुकीं हैं 3. दुकान पर खरीदारी करने वाले व्यक्ति की पहचान हो सकेगी धार्मिक मूल्य से समझौता नहीं : जमात-ए-इस्लामी इस फैसले पर जमात-ए-इस्लामी हिंद, बिहार के अध्यक्ष मौलाना रिजवान इस्लाही ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दा का प्रावधान है। मुस्लिम महिलाएं इस पर कायम हैं। यदि हिजाब पहनने वाली महिलाओं को खरीदारी से रोका जाता है तो वे खरीदारी नहीं करेंगी। धार्मिक मूल्यों से कोई भी समझौता नहीं कर सकता है।

झारखंड के टाटा नगर होकर चलने वाली कई ट्रेनें रद्द

रांची. रेल यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है. दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा डिवीजन में विकासात्मक कार्य (डेवलपमेंटल वर्क) के कारण जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में कई लोकल, मेमू और एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है. इसका सीधा असर टाटानगर और उससे जुड़े रेल मार्गों पर यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा. रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से पहले से यात्रा की योजना बनाने की अपील की है. रद्द की गई ट्रेनें आसनसोल–आद्रा–आसनसोल मेमू (68046/68045) 6 जनवरी 2026 को पूरी तरह रद्द रहेगी. आद्रा–बराभूम–आद्रा मेमू (68053/68054) 8 और 11 जनवरी को नहीं चलेगी. आद्रा–भागा–आद्रा मेमू (68077/68078) 6 और 10 जनवरी को रद्द रहेगी. आसनसोल–आद्रा मेमू (68061/68062) 5, 8 और 11 जनवरी को रद्द की गई है. इन ट्रेनों के रद्द होने से टाटानगर से आसनसोल, आद्रा और आसपास के औद्योगिक इलाकों में सफर करने वाले दैनिक यात्रियों को परेशानी हो सकती है. आंशिक रद्दिकरण झारग्राम–धनबाद–झारग्राम एक्सप्रेस (18019/18020) 5 से 9 जनवरी और 11 जनवरी को बोकारो स्टील सिटी से ही समाप्त/प्रारंभ होगी. बर्धमान–हटिया–बर्धमान मेमू (13503/13504) 5 से 11 जनवरी तक एनएससीबी गोमो से चलेगी. टाटानगर–आसनसोल–बराभूम मेमू (68056/68060) 6 जनवरी को आद्रा से ही चलेगी. आसनसोल–पुरुलिया–आसनसोल मेमू (63594/63593) 5, 8 और 11 जनवरी को आद्रा से सीमित रहेगी. आसनसोल–टाटानगर–आसनसोल मेमू (68055/68056) 7 जनवरी को भी आद्रा से ही परिचालित होगी. आद्रा–मिदनापुर–आद्रा मेमू (68090/68089) 6 जनवरी को चंद्रकोना रोड से चलेगी. डायवर्ट की गई ट्रेन टाटानगर–हटिया एक्सप्रेस (18601), जो झारखंड के यात्रियों की जीवनरेखा मानी जाती है, 6 जनवरी 2026 को चांडिल–गुंडा बिहार–मुरी मार्ग से डायवर्ट होकर चलेगी. इससे यात्रा समय में बदलाव संभव है. रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे टाटानगर से यात्रा करने से पहले संबंधित ट्रेन की स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें. रेलवे को इस असुविधा के लिए खेद है, लेकिन भविष्य में बेहतर रेल सुविधाओं के लिए यह कार्य आवश्यक बताया गया है.

हिजाब हटाने पर चर्चा में आई नुसरत परवीन ने ज्वाइन की बिहार सरकार की नौकरी

पटना. हिजाब विवाद से चर्चा में आईं आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने कई दिनों से चल रही अटकलों के बाद बिहार सरकार की सेवा में योगदान दे दिया। नौकरी ज्वाइन करने के लिए दी गई समय सीमा को बढ़ाने के बाद नुसरत ने पटना में नौकरी के लिए रिपोर्ट किया। राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य महफूज-उर-रहमान ने बताया कि डॉक्टर नुसरत परवीन ने अंतिम तिथि पर ड्यूटी ‘ज्वाइन’ कर ली। उन्होंने कहा, “आज सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि थी और नुसरत ने पटना के सिविल सर्जन कार्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट कर दिया है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा उन्हें उपयुक्त स्थान पर पदस्थापित किया जाएगा।” प्राचार्य ने बताया कि सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई थी और फिर इसे सात जनवरी तक विस्तार दिया गया था। नुसरत परवीन उसी कॉलेज की छात्रा रह चुकी हैं, जिसके रहमान प्राचार्य हैं। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नुसरत ने शुरुआत में “नाराजगी” के चलते सेवा में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया था। ज्वाइनिंग की डेट बढ़ाने के बाद नुसरत ने दिया योगदान पिछले महीने, जब नुसरत तय समय सीमा के भीतर ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाई थीं, तब प्राचार्य ने कहा था, “उनके परिवार ने बताया था कि वे मीडिया कवरेज से बचना चाहती हैं और वह दोबारा विचार करेंगी कि उन्हें सेवा में शामिल होना है या नहीं।”आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन ने आखिरकार 23 दिनों के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है। गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में उन्होंने मंगलवार को योगदान दे दिया। नुसरत परवीन को पटना के सदर पीएचसी में तैनाती सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि उनकी तैनाती सदर पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में की गई है। उन्होंने योगदान के लिए आवेदन दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। डॉ. नुसरत परवीन को संविदा पर यह नौकरी मिली है। पहले उन्हें 31 दिसंबर तक ही योगदान करना था। डॉ. नुसरत परवीन उस समय चर्चा में आई थी, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान हिजाब हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। नुसरत पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी पीजी की पढ़ाई कर रही हैं।

झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की जमीन और भवन न होने से मान्यता होगी रद्द

रांची. विभागीय प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन कर डिप्लोमा इन फार्मेसी पाठ्यक्रम का संचालन कर रहे झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द होगी। इन संस्थानों के द्वारा सरकार से न तो एनओसी लिया गया था और न ही एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। इतना नहीं, इन संस्थानों के पास न तो अपनी जमीन और न अपना भवन ही है। साथ ही टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ भी नहीं हैं। ऐसे 34 फार्मेसी संस्थानों को सरकार की ओर से दिया गया लेटर ऑफ कंसेंट निरस्त होगा। डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स संचालित कर रहे 36 संस्थान ऐसे भी मिले हैं, जहां टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ की आंशिक कमी है, लेकिन इनका अपना भवन व अपनी जमीन है। ये संस्थान संचालन के लिए प्रयासरत तो हैं, लेकिन इन संस्थानों ने भी डिप्लोमा इन फार्मेसी के लिए न तो एनओसी लिया है और न ही इसके लिए आवेदन ही किया है। इन सभी 36 फार्मेसी संस्थानों से स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण पूछा है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह भी सवाल उठा है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा तय प्रावधान के अनुसार फार्मेसी संस्थानों में शिक्षकों, भवन और अन्य संसाधनों की जांच परीक्षा समिति द्वारा क्यों नहीं की गई। इस मामले में डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जामिनेशन कमेटी के अध्यक्ष/सदस्य सचिव से भी स्पष्टीकरण पूछा जाएगा। विभागीय कमेटी की जांच में हुआ खुलासा : अनियमितताओं की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने फार्मेसी संस्थानों की जांच के लिए बीते साल अगस्त में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में गठित कमेटी में अवर सचिव धीरंजन प्रसाद शर्मा व प्रशांत पांडेय शामिल थे। जांच समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच की तो व्यापक अनियमितता सामने आई। समिति ने जांच प्रतिवेदन विभाग को सौंप दिया है। रिपोर्ट के अनुसार कई संस्थान न तो सरकारी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं और न ही पीसीआई के मानकों पर खरे उतरते हैं।

बिहार की विकास दर बढ़कर हुई 13 फीसदी के पार

पटना. बिहार की विकास दर 13.09 फीसदी हो गई है। वर्तमान मूल्य पर वर्ष 2024-25 का जीएसडीपी में वार्षिक वृद्धि दर 13.09 फीसदी है, जबकि स्थिर मूल्य पर वार्षिक वृद्धि दर 8.64 फीसदी है। वहीं बिहार में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बढ़कर 76490 रुपए हो गया है। यह वर्तमान मूल्य पर वर्ष 2024-25 का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद है। जबकि, स्थिर मूल्य पर यह 40973 रुपए है। यह जानकारी योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने दी। बताया कि राज्य की 357 विकास योजनाओं को हरी झंडी मिली है। इन पर 16 हजार 887 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक इन योजनाओं को स्वीकृत प्रदान की गयी है। वे बुधवार को सूचना भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता योजना के तहत 8.76 लाख युवाओं को सहायता दी गयी है। इन्हें 1267 करोड़ का भुगतान किया गया है। इसी तरह मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत 72206 योजनाओं को पूरा किया गया है। जबकि, 17621 योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। पूर्ण की गयी योजनाओं पर 3634 करोड़ रुपए खर्च किये गये हैं। इसके अलावा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में 18 वीं लोकसभा सांसदों की अनुशंसा वाली 1108 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन पर 117.65 करोड़ खर्च हुए हैं। जबकि, राज्यसभा सांसदों की अनुशंसा पर 261.95 करोड़ की 2914 योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। श्री यादव ने कहा कि षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर दो हजार पंचायत सरकार भवनों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके पूर्व राज्य योजना अंतर्गत 1162 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना के तहत 293 भवनों का निर्माण पूर्ण किया गया है। इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव मयंक बरबड़े, निदेशक रंजीत कुमार मौजूद थे।

झारखंड शराब घोटाले में ACB ने गोवा से नवीन केडिया को किया गिरफ्तार

रांची. झारखंड में चर्चित शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में ACB को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस बहुचर्चित घोटाले से जुड़े प्रमुख आरोपियों में शामिल छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी नवीन केडिया को ACB ने गोवा से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर झारखंड की राजधानी रांची लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, नवीन केडिया को रांची लाए जाने के बाद ACB कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद एजेंसी उसे रिमांड पर लेकर शराब घोटाले से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ करेगी। ACB को उम्मीद है कि केडिया से पूछताछ के दौरान घोटाले से जुड़े नेटवर्क, लेन-देन और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद ACB ने नवीन केडिया को पूछताछ के लिए समन जारी किया था। एजेंसी ने उसे अपने समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था, लेकिन केडिया ने समन की अनदेखी की और ACB के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद ACB ने उसके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की। मामले में घिरने के बाद नवीन केडिया ने ACB की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद से ही केडिया ACB की नजरों में फरार चल रहा था। एजेंसी उसकी तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। ACB को गुप्त सूचना मिली थी कि नवीन केडिया गोवा में छिपा हुआ है। सूचना के सत्यापन के बाद ACB की टीम ने गोवा में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि वह लंबे समय से जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहा था। झारखंड शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है। इस मामले में पहले ही कई बड़े अधिकारियों, कारोबारियों और बिचौलियों के नाम सामने आ चुके हैं। ACB की जांच में यह आरोप है कि शराब नीति और टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। ACB अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। नवीन केडिया की गिरफ्तारी को जांच के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है। ACB ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।